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 06 / 03 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *अपना और सर्व का कल्याण किया ?*

 

➢➢ *बाप समान फ़िक्र से निश्चिंत रहे ?*

 

➢➢ *ब्राह्मण जीवन की विशेषता की नेचुरल नेचर बनाया ?*

 

➢➢ *पवित्रता और शांति की लाइट चारों और फैलाने वाले लाइट हाउस बनकर रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  यह परमात्म प्यार की डोर दूर-दूर से खींच कर ले आती है। *यह ऐसा सुखदाई प्यार है जो इस प्यार में एक सेकण्ड भी खो जाओ तो अनेक दु:ख भूल जायेंगे और सदा के लिए सुख के झूले में झूलने लगेंगे।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं बाप के समीप रत्न हूँ"*

 

  सदा अपने को बाप के समीप रत्न समझते हो? जितना दूर रहते, देश से दूर भले हो लेकिन दिल से नजदीक हो। ऐसे अनुभव होता है ना। *जो सदा याद में रहते हैं, याद समीप अनुभव कराती है। सहज योगी हो ना। जब बाबा कहा तो 'बाबा' शब्द ही सहज योगी बना देता है। 'बाबा' शब्द जादू का शब्द है। जादू की चीज बिना मेहनत के प्राप्ति कराती है।*

 

  *आप सभी को जो भी चाहिए - सुख चाहिए, शान्ति चाहिए, शक्ति चाहिए जो भी चाहिए 'बाबा' शब्द कहेंगे तो सब मिल जायेगा। ऐसा अनुभव है!* बापदादा भी, बिछुड़े हुए बच्चे जो फिर से आकर मिले हैं, ऐसे बच्चों को देख खुश होते हैं। ज्यादा खुशी किसको? आपको है या बाप को?

 

  बापदादा सदा हर बच्चे की विशेषता सिमरण करते हैं। कितने लकी हो। अनुभव करते हो कि बाप हमको याद करते हैं? *सभी अपनी-अपनी विशेषता में विशेष आत्मा हो। यह विशेषता तो सभी की है - जो दूर देश में होते, दूसरे धर्म में जाकर फिर भी बाप को पहचान लिया। तो इस विशेष संस्कार से विशेष आत्मा हो गये।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *एकाग्रता की शक्ति विशेष संस्कार भस्म करने में आवश्यक है।* जिस स्वरूप में एकाग्र होने चाहो, जितना समय एकाग्र होने चाहो, ऐसी एकाग्रता संकल्प किया और भस्म। इसको कहा जाता है योग अग्नि। नाम-निशान समाप्त मारने में फिर भी लाश तो रहता है ना!

 

✧  *भस्म होने के बाद नाम निशान खत्मा तो इस वर्ष योग को पॉवरफुल स्टेज में लाओ।* जिस स्वरूप में रहने चाहो मास्टर सर्वशक्तिवान, ऑर्डर करो। समाप्त करने की शक्ति आपके ऑर्डर नहीं माने, यह हो नहीं सकता। मालिक हो, मास्टर कहलाते हो ना! तो मास्टर ऑर्डर करे और शक्ति हाजिर नहीं हो तो क्या वह मास्टर है?

 

✧  तो बापदादा ने देखा कि पुराने संस्कार का कुछ न कुछ अंश अभी भी रहा हुआ है और वह अंश बीच-बीच में वंश भी पैदा कर देता है, जो कर्म तक भी काम हो जाता है। युद्ध करनी पडती है। तो बापदादा बच्चों का समय प्रमाण युद्ध का स्वरूप भाता नहीं है। *बापदादा हर बच्चे को मालिक के रूप में देखने चाहता है।* ऑर्डर करो जी हजूर।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *ऐसे ट्रान्सपेरेंट हो जाओ जो अपकी शरीर के अन्दर जो आत्मा विराजमान है वह स्पष्ट सभी को दिखाई दे। आपका आत्मिक स्वरूप उन्हों को अपने आत्मिक स्वरूप का साक्षात्कार कराए।* इसको ही कहते हैं अव्यक्ती व आत्मिक स्थिति का अनुभव करना ।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  ज्ञान सागर बाप से अपनी झोली को ज्ञान रत्नों से भरना"*

 

_ ➳  एक खुबसूरत झरने को निहारती हुई में आत्मा... सोचती हूँ...ऊंचाइयों से गिरता हुआ पानी... किस कदर धवल बन चमक रहा है... और यही जादूगरी मेरे जीवन में भी छा गयी है कि... *ईश्वर पिता ने आकर जो मुझ आत्मा को देह के दायरों से बाहर निकाल... अशरीरी अवस्था की ऊंचाइयों पर बिठाया... मै आत्मा निर्मल बन, गुणो की धवलता को पा गयी.*.. मेरा हर कार्य ईश्वरीय खूबसूरती से सजने लगा है... झरनो के सौंदर्य को निहारती हुई मै आत्मा... स्वयं के अंतर्मन में ईश्वर पिता द्वारा सजाये हुए... *गुणो और शक्तियो के भीतर बहते झरने में... स्वयं के उज्ज्वल धवल अद्वितीय सौंदर्य को देख मन्त्र मुग्ध हो रही हूँ.*..

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को ज्ञान रत्नों से लबालब कर, विश्व का मालिक बनाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... सत्य की तलाश में, दर दर की ठोकरे खाते रहे, फिर भी कोसो दूर ही रहे... *आज भगवान स्वयं धरा पर उतर कर, स्वयं से मिलवा रहा... और अपनी सारी मिल्कियत, जागीर से भरपूर कर रहा है.*.. ऐसे प्यारे पिता को पाकर, सदा मीठी यादो में डूब जाओ... अपने खुबसूरत शानदार भाग्य के मीठे मीठे गीत गाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा की सारी दौलत को दिल में समेटते हुए कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... मै आत्मा जनमो तक सच्चे सुखो और सत्य से महरूम रही... ईश्वर को पाने की चाहत में धरती आसमाँ नापती रही... पर प्यारे बाबा, आपकी एक झलक भी न पा सकी... *जब आपने आकर मुझे पुकारा, अपनी बाँहों में समाया, तो ही मै ईश्वर को जान सकी... मीठे बाबा अब तो हर साँस में आप समाये हो...*

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी सारी खानों और खजानो को मुझे सौंपते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... ईश्वर को पा लिया, सारी सृस्टि के बीज को जान लिया... तो अब व्यर्थ बातो में भटकना नही है... सदा एक बाप की प्रीत में डूबे हुए, ज्ञान रत्नों से झोली को भरते रहो... *मीठे बाबा की बाँहों में रहकर, सदा ज्ञान मणियो से सजे रहो... संगम की यादो भरे, यह बेशकीमती पल यूँ ही अब व्यर्थ में जाया न करो..."*

 

_ ➳  *मै आत्मा प्यारे बाबा की यादो में गहरे डूबकर अपने भाग्य पर नाज करते हुए कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... आपने मुझे मेरे सच्चे वजूद का अहसास कराकर... जीवन कितना प्यारा, और खुशियो से भरा, सुनहरा कर दिया है... ईश्वर पिता को पाने की चमक, सहज ही मेरे रंग रूप से झलकती है... *मेरे श्रीमत की खुबसूरत राहो पर रखे हुए, कदमो की आहट को...पूरा विश्व दीवाना होकर, सुन रहा है... और मीठे बाबा से, बिछड़ा हुआ, हर दिल पुनः मिल रहा है..."*

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी अखूट सम्पत्ति देकर, असीम खुशियो सजाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे... भोलानाथ पिता को पाकर, सब कुछ पा लिया है... *यह कितना प्यारा भाग्य है कि भगवान बाँहों में समा गया है... सारे दुखो से, भटकन से छुड़ाकर, सुखो से सजी और खुशियो से महकी नई खुबसूरत दुनिया का मालिक बना रहा है...* ऐसे प्यारे बाबा की यादो में रोम रोम से खो जाओ... जो दिव्यता और पवित्रता से संवार कर देवताई श्रंगार कर रहा है..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के सच्चे प्यार में गहरे डूबकर कहती हूँ :-* "मीठे मीठे प्यारे बाबा मेरे... मै आत्मा मन्दिरो में, कन्दराओं में आपके दीदारो को भटकती रही... और आपने स्वयं आकर, मुझे अपनी गोद में बिठा लिया... और *सच्चे ज्ञान से मुझे रौशन कर दिया है... मै आत्मा आपके प्यारे तले,अज्ञान अंधेरो से निकल कर, सदा के लिए नूरानी हो गयी हूँ...* प्यारे बाबा को अपनी भावनाये अर्पित कर.मै आत्मा... इस कर्मक्षेत्र पर लौट आयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- पढ़ाई अच्छी तरह से पढ़कर ज्ञान रत्नों से अपनी झोली भरपूर करनी है*"

 

_ ➳  अपने परम शिक्षक, परम सतगुरु शिव पिता परमात्मा से पढ़ने और अपनी बुद्धि रूपी झोली को ज्ञान रत्नों से भरपूर करने के लिए मैं अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप में स्थित होती हूँ और ज्ञान स्नान करने के लिए अपने आश्रम की ओर चल देती हूँ। *अपने प्यारे प्रभु की याद में एक - एक कदम रखते हुए, अपने श्रेष्ठ भाग्य का मैं गुणगान करती हुई जा रही हूँ कि कोटो में कोई, कोई में भी कोई मैं कितनी महान भाग्यवान आत्मा हूँ जिसे डायरेक्ट भगवान के सम्मुख बैठ कर, उनसे अथाह ज्ञान धन अर्जित करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है*। भगवान स्वयं अपना धाम छोड़ कर मुझे पढ़ाने के लिए आते हैं और हर रोज़ ज्ञान के अखुट ख़ज़ानों से मेरी बुध्दि रूपी झोली को भर कर मुझे दुनिया की सबसे सम्पत्तिवान आत्मा बना देते हैं।

 

_ ➳  मन ही मन अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य के गीत गाती, अपने गॉडली स्टूडेंट के श्रेष्ठ स्वमान के नशे में चलते - चलते मैं पहुँच जाती हूँ अपने ईश्वरीय विश्वविद्यालय में और जा कर क्लास रूम में बैठ जाती हूँ जहाँ और भी गॉडली स्टूडेंट ब्राह्मण बच्चे अपने परमशिक्षक से ज्ञान धन प्राप्त करने के लिए पहुँच चुके हैं। *सभी अपने परमशिक्षक बेहद के बाप की याद में मग्न हो कर उनका आह्वान कर रहें हैं। अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप में आत्मिक स्मृति में स्थित होकर अपने परमशिक्षक का आह्वान करते ही मैं अनुभव करती हूँ जैसे परमधाम से अनन्त रंग बिरंगी किरणों के रूप में ज्ञान सागर के ज्ञान की वर्षा हो रही है* जो रिमझिम फ़ुहारों के रूप में पूरे क्लासरूम में बरस रही हैं।

 

_ ➳  क्लासरूम में उपस्थित सभी गॉडली स्टूडेंट ब्राह्मण बच्चे ज्ञान की रिमझिम फ़ुहारों की शीतलता का सुखद अनुभव करके जैसे आनन्द विभोर हो रहें हैं। सभी के चेहरे एक दिव्य आभा से दमकते हुए स्पष्ट दिखाई दे रहें हैं। *पूरा क्लासरूम रंग बिरंगी किरणो के शक्तिशाली वायब्रेशन से भरा हुआ बहुत ही मनमोहक और आनन्दमयी लग रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे सर्वशक्तियों के इन्द्रधनुषी रंगों का एक बहुत ही शक्तिशाली आभामंडल क्लासरूम के चारों और निर्मित हो गया है* और इस आभामंडल के प्रभाव से सभी स्टूडेंट जैसे एकदम लाइट माइट स्थिति में स्थित होते जा रहें हैं।

 

_ ➳  देखते ही देखते क्लासरूम में अव्यक्त बापदादा की प्रवेशता होती है। अपने लाइट माइट स्वरूप में बापदादा सामने संदली पर आकर बैठते हैं और अपने सामने लाइट माइट स्वरूप में उपस्थित अपने सभी गॉडली स्टूडेंट फरिश्तो को अपनी मीठी दृष्टि से निहारने लगते हैं। *अपनी मीठी दृष्टि से सबमे अपनी शक्तियों का बल भरते हुए बापदादा अब परमशिक्षक बन अपने मधुर महावाक्य उच्चारण कर सभी के ऊपर ज्ञान की वर्षा करने लगते हैं*। ऐसा लग रहा है जैसे अव्यक्त ब्रह्मा बाबा के मुख कमल से ज्ञान की बरसात हो रही है और सभी ज्ञान स्नान करके रिफ्रेश हो रहें हैं। *अपनी बुद्धि को पूरी तरह से अपने परमशिक्षक पर एकाग्र कर सभी ब्रह्मा मुख से उच्चारित बाबा के एक - एक महावाक्य को ध्यान से सुन कर अपनी बुद्धि रूपी झोली को अविनाशी ज्ञान रत्नों से भरपूर कर रहें हैं*।

 

_ ➳  ब्रह्मा बाबा के मुख कमल से सबको अविनाशी ज्ञान धन देकर अब बापदादा एक - एक करके अपने हर गॉडली स्टूडेंट फ़रिश्ते बच्चे पर दृष्टि डाल रहें हैं। मै देख रही हूँ जैसे *अव्यक्त ब्रह्मा बाबा की भृकुटि से ज्ञान सागर शिव बाबा के ज्ञान की अनन्त किरणे प्रकाश की एक तेज धार के रूप में निकल रही है और प्रकाश की वो तेज धारा हर फ़रिश्ते के मस्तक को छू रही है*। ज्ञान सागर बाबा के ज्ञान की सम्पूर्ण शक्ति को मैं अपने अंदर भरता हुआ स्पष्ट महसूस कर रही है। ऐसा लग रहा है जैसे *ज्ञान के अखुट खजाने बाबा की भृकुटि से निकल कर मुझ में समाते जा रहें है और मैं अविनाशी ज्ञानधन से सम्पन्न बनती जा रही हूँ*।

 

_ ➳  बेहद के बाप से अथाह ज्ञान धन ले कर, अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर मैं वापिस अपने कर्मक्षेत्र पर लौट आती हूँ। *प्रतिदिन दो बार ज्ञान स्नान से स्वयं को रिफ़्रेश करके, अपने परमशिक्षक शिव पिता के महावाक्यों को सदा स्मृति में रखते हुए, उन्हें धारणा में लाकर, लौकिक और अलौकिक हर कर्तव्य को निभाते, अविनाशी ज्ञान धन की कमाई जमा करने का भी पुरुषार्थ अब मैं बिल्कुल सहजता से कर रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं ब्राह्मण जन्म की विशेषता को नेचरल नेचर बनाने वाली सहज पुरुषार्थी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं पवित्रता और शांति की लाईट चारों ओर फैलाने वाला लाइट हाउस हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  ब्राह्मणों के दृढ़ संकल्प में बहुत शक्ति है... अगर ब्राह्मण दृढ़ संकल्प करें तो क्या नहीं हो सकता! सब हो जायेगा सिर्फ योग को ज्वाला रूप बनाओ... *योग ज्वाला रूप बन जायेगा तो ज्वाला के पीछे आत्मायें स्वतः ही आ जायेंगी क्योंकि ज्वाला (लाइट) मिलने से उन्हों को रास्ता दिखाई देगा...* अभी योग तो लगा रहे हैं लेकिन योग ज्वाला रूप होना है... सेवा का उमंग-उत्साह अच्छा बढ़ रहा है लेकिन योग में ज्वाला रूप अभी अण्डरलाइन करनी है... *आपकी दृष्टि में ऐसी झलक आ जाए तो दृष्टि से कोई न कोई अनुभूति का अनुभव करें...*

 

 

✺   *ड्रिल :-  "ब्राह्मणों के दृढ़ संकल्प की शक्ति का अनुभव"*

 

 _ ➳  शांति के सागर अपने शिव पिता की याद में बैठी मैं गहन शान्ति का आनन्द ले रही हूँ... और उसी गहन शान्ति की स्थिति में मैं अनुभव करती हूँ कि जैसे अनेकों आत्माओं की रोने, चिल्लाने की आवाज़ें मेरे कानों में सुनाई देने लगी है... उन आवाजों के साथ एक पीड़ादायक दृश्य मुझे दिखाई देता है... *मैं देख रही हूँ सारे विश्व की आत्मायें, प्रकृति से, वायुमण्डल से, अपने सम्बन्धियों से, अपने मन के कमजोर संस्कारों से, बीमारियों से पीड़ित हो कर तड़प रही हैं...* सुख शांति की एक अंचली की तलाश में भटक रही हैं, रो रही है, चिल्ला रही हैं...

 

 _ ➳  इस दृश्य को देखते - देखते एकाएक जैसे कानों में बापदादा की अव्यक्त आवाज सुनाई देती है... उन दृश्य से जैसे ही मैं ध्यान हटाती हूँ अपने सामने बापदादा को देखती हूँ जो मुझे अपने साथ चलने का इशारा कर रहें हैं... बाबा अपना हाथ आगे बढ़ाते हैं... बाबा के हाथ मे मैं जैसे ही अपना हाथ रखती हूँ, मेरा ब्राह्मण स्वरूप लाइट के फ़रिशता स्वरूप में बदल जाता है और *बाबा का हाथ थामे मैं फ़रिशता बाबा के साथ चल पड़ता हूँ... बाबा के साथ चलते - चलते मैं वही सब दृश्य फिर से देख रहा हूँ... हर तरफ चीखते - चिल्लाते शांति की तलाश में भटकते मनुष्य दिखाई दे रहें हैं...*

 

 _ ➳  इन सभी दृश्यों को देखते - देखते बाबा मुझे एक ऐसे स्थान पर ले आते हैं जहां बहुत सारी ब्राह्मण आत्मायें पहले से ही उपस्थित हैं... मैं भी अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो कर उन सभी ब्राह्मण आत्माओं के पास जा कर बैठ जाती हूँ... *बाबा सभी ब्राह्मण बच्चों को सम्बोधित करते हुए फ़रमान करते हैं:- "सभी योग को ज्वाला स्वरूप बनाओ और शांति के एक ही संकल्प में स्थित हो जाओ"...* देखते ही देखते सभी शांति के एक ही दृढ़ संकल्प में स्थित हो जाते हैं और बाबा की याद में बैठ जाते हैं... सेकण्ड में शांति के शक्तिशाली वायब्रेशन से पूरा स्थान भर जाता है... और धीरे - धीरे शांति के वो शक्तिशाली वायब्रेशन दूर - दूर तक फैल जाते हैं...

 

 _ ➳  अब मैं देख रही हूँ उन सभी तड़पती हुई अशांत आत्माओं को जो शांति के उन शक्तिशाली वायब्रेशन से आकर्षित हो कर,भाग - भाग कर उस स्थान पर आ कर एकत्रित हो रही हैं... *ऐसा लग रहा है जैसे ब्राह्मणों के दृढ़ संकल्प और जवालस्वरूप योग से यह स्थान एक विशाल शांति कुंड बन गया है और शांति की शक्ति चारों तरफ फैल कर सबको शान्ति का अनुभव करवा रही है...* बाबा की याद में बैठी सभी ब्राह्मण आत्मायें शांतिस्वरूप की चुम्बक बन सभी दुखी और अशांत आत्माओं को अपनी ओर खींच रही हैं... सबके मुख से यही निकल रहा है कि केवल यहां से ही शांति मिलेगी... शांति की अंचली पा कर अब सभी आत्मायें शांति की अनुभूति करके, प्रसन्न हो कर वापिस लौट रही हैं...

 

 _ ➳  बापदादा अब सभी ब्राह्मण आत्माओं को संकल्पो की दृढ़ता पर विशेष अटेंशन खिंचवाते हुए हर ब्राह्मण आत्मा को अपनी सर्वशक्तियों और वरदानों से भरपूर कर रहें हैं... सभी ब्राह्मण आत्मायें बापदादा से सर्वशक्तियाँ और वरदान ले कर अब अपने सेवा स्थलों पर वापिस लौट रहे हैं... मैं भी अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित अब वापिस अपने कर्मक्षेत्र पर लौट आती हूँ... इस बात को सदा स्मृति में रखते हुए कि *"ब्राह्मणों के दृढ़ संकल्प में बहुत शक्ति है" अब मैं अपने संकल्पो को शुभ और श्रेष्ठ बना कर, अपनी मनसा शक्ति से, वृति से अपने सम्बन्ध, सम्पर्क में आने वाली सभी दुखी और अशांत आत्माओं को शांति की अनुभूति करवा रही हूँ...* और साथ ही साथ योग को जवालस्वरूप बनाने का दृढ़ संकल्प कर अब मैं याद की यात्रा पर निरन्तर आगे बढ़ रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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