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 06 / 04 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *जो कुछ इन आँखों से दिखाई देता है, उसे न देखने का अभ्यास किया ?*

 

➢➢ *अपने करैक्टर का रजिस्टर रखा ?*

 

➢➢ *बाप के फरमान पर बुधी को खाली रखा ?*

 

➢➢ *सच्ची सेवा द्वारा सर्व की आशीर्वाद प्राप्त की ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  जैसे वाणी की प्रैक्टिस करते-करते वाणी के शक्तिशाली हो गये हो, ऐसे शान्ति की शक्ति के भी अभ्यासी बनते जाओ। *आगे चल वाणी वा स्थूल साधनों के द्वारा सेवा का समय नहीं मिलेगा। ऐसे समय पर शान्ति की शक्ति के साधन आवश्यक होंगे क्योंकि जितना जो महान् शक्तिशाली होता है वह अति सूक्ष्म होता है। तो वाणी से शुद्ध-संकल्प सूक्ष्म हैं इसलिए सूक्ष्म का प्रभाव शक्तिशाली होगा।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं डबल लाइट रिश्ता हूँ"*

 

  सदा डबल लाइट स्थिति का अनुभव करते हो? *डबल लाइट स्थिति की निशानी है - सदा उड़ती कला। उड़ती कला वाले सदा विजयी? उड़ती कला वाले सदा निश्चय बुद्धि, निश्चिन्त। उड़ती कला क्या है? उड़ती कला अर्थात् ऊँचे से ऊँची स्थिति।* उड़ते हैं तो ऊँचा जाते हैं ना? ऊँचे ते ऊँची स्थिति में रहने वाली ऊँची आत्माये समझ आगे बढ़ते चलो।

 

✧  *उड़ती कला वाले अर्थात् बुद्धि रूपी पाँव धरनी पर नहीं। धरनी अर्थात् देह-भान से ऊपर। जो देह-भान की धरनी से ऊपर रहते वह सदा फरिश्ते हैं। जिसका धरनी से कोई रिश्ता नहीं।* देह-भान को भी जान लिया, देही-अभिमानी स्थिति को भी जान लिया। जब दोनों के अन्तर को जान गये तो देह-अभिमान में आ नहीं सकते।

 

  जो अच्छा लगता है वही किया जाता है ना। तो सदा यही स्मृति से सदा उड़ते रहेंगे। *उड़ती कला में चले गये तो नीचे की धरनी आकर्षित नहीं करती, ऐसे फरिश्ता बन गये तो देह रूपी धरनी आकर्षित नहीं कर सकती।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  अभी तक टोटल रिजल्ट में क्या देखा? *सर्विस की सबजेक्टमें इन्चार्ज बनना आता है लेकिन याद की सबजेक्ट में बैटरी चार्ज करना बहुत कम आता है*। समझा। साकार रुप में अनुभव देखा। साकार रूप में सर्वीस की जिम्मेवारी सभी से ज्यादा थी। बच्चों में उनसे कितनी कम है।

 

✧  बच्चों को सिर्फ सर्वीस की ड्यूटी है। लेकिन साकार रूप में तो सभी डयूटी थी। संकल्पों का सागर था। रेसपोन्सिबिलिटी के संकल्पों में थे। फिर भी सागर की लहरों में देखते थे वा सागर के तले में देखते थे? *बच्चों को लहरों में लहराना आता है लेकिन तले में जाना नहीं आता*। उनका सहज साधन पहले सुनाया कि प्रैक्टिस करो।

 

✧  अभी - अभी आवाज में आये, फिर मास्टर सर्वशक्तिवान बन अभी - अभी आवाज से परे। *अभी - अभी का अभ्यास करो*। कितना भी करोबार में हो लेकिन बीच - बीच में एक सेकण्ड भी निकाल कर इसका जितना अभ्यास , जितनी प्रैक्टीस करेंगे उतना प्रैक्टिकल रूप बनता जायेगा। प्रैक्टीस कम है इसलिए प्रैक्टिकल रुप नहीं। कभी सागर की लहरों में कभी तले में यह अभ्यास करो।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *सभी से महीन और बड़ा सुन्दरता का धागा एक शब्द में कहेंगे तो 'मैं' शब्द ही है। 'मैं' शब्द देह-अभिमान से पर ले जाने वाला है। और 'मैं' शब्द ही देही-अभिमानी से देह-अभिमान में ले आने वाला भी है।* मैं शरीर नहीं हूँ, इससे पर जाने का अभ्यास तो करते रहते हो। लेकिन यही मैं शब्द कि - "मैं फलानी हूँ, मैं सभी कुछ जानती हूँ, मैं किस बात में कम हूँ, मैं सब कुछ कर सकती हूँ, मैं यह-यह करती हूँ और कर सकती हूँ, मैं जो हूँ जैसी हूँ वह मैं जानती हूँ, मैं कैसे सहन करती हूँ, कैसे समस्याओं का सामना करती हूँ, कैसे मरकर मैं चलती हूँ, कैसे त्याग कर चल रही हूँ, मैं यह जानती हूँ।- *ऐसे मैं की लिस्ट सुल्टे के बजाय उल्टे रूप में महीन, सुन्दरता का धागा बन जाता है। यह सभी से बड़ा महीन धागा है।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺ *"ड्रिल :- बाबा 21 जन्म के लिए तुम्हारी दिल बहला देते हैं"*

 

➳ _ ➳  *मैं आत्मा तालाब के किनारे बैठ खिले हुए कमल कुन्ज देख देख हर्षित हो रही हूँ... हौले-हौले मस्ती भरी हवाएं चल रही है... बरखा की मधुर फुहारें नए-नए साज गाकर सुना रही हैं... सफ़ेद, गुलाबी रंगत लिए ये कमल ऐसे लग रहे जैसे तालाब के पानी में राज करे रहे हों...*  एकदम साफ़ उजले उजले कमल एक बूंद कीचड या पानी भी अपने ऊपर ठहरने नहीं देते हैं... अपने मुस्कुराते मन कमल को बाबा को अर्पित करने मैं आत्मा पहुँच जाती हूँ प्यारे वतन...

 

❉  *प्यारे ज्ञान सूर्य बाबा अपने ज्ञान किरणों की बूंदों से मेरे मन कमल को भिगाते हुए कहते हैं:-* "मेरे मीठे फूल बच्चे... ईश्वरीय राहो पर चलकर फूलो जैसा मुस्कराता खुशनुमा जीवन पाओ... *ऐसी खुबसूरत खुशियो से दामन सजाने वाले प्यारे बाबा पर दिल जान से बलिहार जाओ... ईश्वर पिता पर रोम रोम से कुर्बान जाओ... एक बार बेहद का सन्यास कर 21 जन्म के मीठे सुखो की तकदीर को सहज ही पा लो...*

 

➳ _ ➳  *मैं आत्मा हद के संबंधों से तोड़ निभा एक बाबा से सर्व संबंधो का रस लेते हुए कहती हूँ:-* "हाँ मेरे प्यारे बाबा... मैं आत्मा आपको पाकर अनन्त खुशियो को बाँहों में भर गई हूँ... *प्यारे बाबा आपकी सारी दौलत सारे खजाने अपने नाम कर ली हूँ... सच्चे दिल से बलि होकर कखपन देकर 21 जनमो की अमीरी पाने वाली महा भाग्यवान सज गयी हूँ..."*

 

❉  *मीठे बाबा विषय विकारों के कीचड़ से मुझ आत्मा को बाहर निकाल कमल फूल समान पवित्र बनाते हुए कहते हैं:-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... *ईश्वर पिता के साथ के यह मीठे पल खुबसूरत यादो से छ्लकाओ... और देवताई ताजो तख्त ईश्वर पिता से अपने नाम लिखवाओ...* सच्चे प्रेम में बलि हो, ईश्वर पिता पर अपना पूरा पूरा अधिकार जमाओ... 21 जनमो के सच्चे सुखो के खातिर यह एक जनम ईश्वर पिता को सौंप दो... गृहस्थ व्यवहार में रहते सबसे तोड़ निभाओ...*

 

➳ _ ➳  *मैं आत्मा संगम की इन सुहावनी घड़ियों को प्यारे बाबा के नाम करते हुए कहती हूँ:-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा सुख और शांति की खोज में किस कदर दर दर भटक रही थी... *प्यारे बाबा आपने तो सुखो का समन्दर ही मेरे नाम कर दिया है... आपको पाकर तो मैंने सारा जहान पा लिया है... यह कौड़ी तुल्य जीवन सौंप कर हीरों से दामन सजा लिया है..."*

 

❉  *प्यारे बाबा मुझे रूहानियत से भरपूर कर पद्मापदम् भाग्यवान बनाते हुए कहते है:-* "मेरे सिकीलधे मीठे बच्चे... *ईश्वर पिता को दुखो में व्याकुल होकर जो पुकार रहे थे... वह मीठा बाबा अखूट खजानो को हथेली पर सजा, उपहार सा लाया है...* एक बार ऐसे पिता पर पूरा पूरा बलिहार जाओ... अधूरा नही, जितना ईश्वरीय दिल पर मर मिटोगे... उतनी सुखो की दौलत से मालामाल रहोगे..."

 

➳ _ ➳  *मैं आत्मा बाबा के इस अमूल्य ज्ञान की चाबी से 21 जन्मों के श्रेष्ठ भाग्य की प्रॉपर्टी अपने नाम करते हुए कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा देहधारियों पर मर मिटकर जो खाली और निष्प्राण हो गई थी... *आज मीठे बाबा आप मनमीत को पाकर, सच्चे दिल से अर्पण हो गई हूँ... गुणो और शक्तियो की दौलत पाकर, असीम धनदौलत को पा गई हूँ... 21 जनमो का शानदार भाग्य पाकर निहाल हो गयी हूँ..."*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- पढ़ाई में कोई गफलत नही करनी है*"

 

➳ _ ➳  अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप की स्मृति में बैठ *अपने परम शिक्षक शिव बाबा के मधुर महावाक्य रिवाइज करके मैं स्वयं से प्रतिज्ञा करती हूँ कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली श्रीमत जो मेरे परम शिक्षक शिव पिता परमात्मा हर रोज परमधाम से आकर मुरली के माध्यम से मुझे देते हैं। उस श्रीमत को अपने जीवन मे धारण कर मुझे नारी से लक्ष्मी बनने का पुरुषार्थ अवश्य करना है*। कभी भी श्रीमत पर चलने में गफलत वा बहाना नही करना है। मेरे शिव पिता परमात्मा की श्रेष्ठ मत ही मेरे इस ब्राह्मण जीवन की सेफ्टी का आधार है। माया के हर वार का सामना करने का अचूक मन्त्र मेरे शिव पिता की श्रीमत है।

 

➳ _ ➳  अपने श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ बाप, टीचर, सतगुरु की श्रेष्ठ मत पर सदा चलने की स्वयं से प्रतिज्ञा करते - करते मैं उन प्राप्तियों की सुखद अनुभूति में खो जाती हूँ जो ब्राह्मण बनने के बाद मेरे प्यारे बाबा से मुझे प्राप्त हुई है। *उन प्राप्तियों की मीठी मधुर स्मृति में खोई मैं अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य की सराहना करती हूँ कि कितनी पदमापदम सौभाग्य शाली हूँ मैं आत्मा। कोटो में कोई, कोई में भी कोई हूँ मै, जिसे स्वयं भगवान ने चुना है*। बड़े बड़े महा मण्डलेशवर, साधू सन्यासी जिस भगवान की महिमा के गीत गाते हैं वो भगवान रोज मेरे सम्मुख आकर मेरी महिमा के गीत गाता है। रोज मुझे स्मृति दिलाता है कि मैं महान आत्मा हूँ। मैं विशेष आत्मा हूँ। मैं इस दुनिया की पूर्वज आत्मा हूँ।

 

➳ _ ➳  अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य को याद करते - करते अपने परम शिक्षक, परम सतगुरु, अपने प्यारे बाबा की मीठी - मीठी यादों में मैं खो जाती हूँ। मन जैसे बिल्कुल शांत और स्थिर हो जाता है और बुद्धि पूरी तरह से परमधाम में बाबा के सुंदर स्वरूप पर एकाग्र हो जाती है। *मन बुद्धि की तार परमधाम निवासी मेरे प्यारे मीठे बाबा के साथ जुड़ते ही ऐसा अनुभव होता है जैसे कोई चीज मुझे ऊपर की ओर अपनी तरफ खींच रही है*। मैं आत्मा सेकेण्ड में निराधार बन, देह से न्यारी हो कर ऊपर की ओर चल पड़ती हूँ। *परमात्म शक्ति रूपी मैग्नेटिक पॉवर मुझे सहज ही अपनी ओर खींचती चली जा रही है*।

 

➳ _ ➳  इस अति आनन्दमयी रूहानी यात्रा पर चलते हुए मैं सूर्य, चाँद, तारागणों को पार कर, फरिश्तों की दुनिया से भी पार, पहुँच जाती हूँ परमधाम, उस परम ज्योति पुंज के सामने जिनकी अनन्त शक्तियों की मैग्नेटिक पावर मुझे अपनी ओर खींच रही थी। *वो परम ज्योति पुंज मेरे प्यारे परम पिता परमात्मा मेरे सम्मुख हैं। उनसे निकल रही अनन्त शक्तियां मुझे दिव्य अलौकिक आनन्द से भरपूर कर रही हैं*। उनकी किरणों की शीतल छाया मुझे गहन शांति का अनुभव करवा रही हैं।

 

➳ _ ➳  सर्वशक्तिवान अपने शिव पिता की सर्वशक्तियों रूपी किरणों की छत्रछाया के नीचे बैठ, स्वयं को उनकी सर्वशक्तियों से भरपूर कर, शक्तिशाली बन मैं परमधाम से नीचे आ जाती हूँ और फरिश्तों की जगमग करती हुई दुनिया में प्रवेश कर जाती हूँ। *यहां आकर अपनी सफेद चमकीली फरिश्ता ड्रेस को मैं धारण करती हूँ और अव्यक्त बापदादा के पास पहुँचती हूँ। बड़े प्यार से बापदादा अपनी बाहों को फैला कर मुझे अपनी बाहों में भर लेते हैं और असीम स्नेह लुटाने के बाद अपनी शक्तिशाली दृष्टि से मुझे निहारते हुए अपना समस्त बल मेरे अंदर भरकर मुझे  शक्तिशाली बना देते हैं और वरदानो से मुझे भरपूर कर देते हैं*।

 

➳ _ ➳  परमात्म शक्तियों से भरपूर होकर, वरदानो से अपनी झोली भरकर प्यारे बापदादा की श्रेष्ठ मत पर चल, अपने ब्राह्मण जीवन को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए, मैं अपने निराकारी स्वरूप में वापिस लौटती हूँ और साकार सृष्टि पर आकर अपने ब्राह्मण तन में प्रवेश कर जाती हूँ। *परमात्म शक्तियों का बल मुझे मेरे इस ब्राह्मण जीवन में हर कदम श्रीमत पर चलने की प्रेरणा दे रहा है। श्रीमत पर चलने में कभी भी गफलत वा बहाना ना करने की प्रतिज्ञा कर, अपने प्यारे बाबा की याद में रह, उनकी मदद से अब मैं इस प्रतिज्ञा को दृढ़ता के साथ पूरा करते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ बना रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं बाप के फरमान पर बुद्धि को खाली रखने वाली व्यर्थ वा विकारी स्वपनों से भी मुक्त आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं सच्ची सेवा द्वारा सर्व की आशीर्वाद प्राप्त करने वाली तकदीरवान आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

अव्यक्त बापदादा :-

 

_ ➳  तो बापदादा अपनी सेना के महावीरों को, अस्त्रधारी आत्माओं को देख रहे थे कि कौन-कौन आलमाइटी अथार्टी पाण्डव सेना में मैदान पर उपस्थित हैं। क्या देखा होगा? *कितनी वण्डरफुल सेना है! दुनिया के हिसाब से अनपढ़ दिखाई देते हैं लेकिन पाण्डव सेना में टाइटल मिला है - नालेजफुल'। सभी नालेजफुल हो ना? शरीर से चलना, उठना भी मुश्किल है लेकिन पाण्डव सेना के हिसाब से सेकण्ड में परमधाम तक पहुँच कर आ सकते हैं।* वे तो एक हिमालय के ऊपर झण्डा लहराते हैं लेकिन शिव शक्ति पाण्डव सेना ने तीनों लोकों में अपना झण्डा लहरा दिया है। भोले भाले लेकिन ऐसे चतुर सुजान हैं जो विचित्र बाप को भी अपना बना दिया है।

 

✺  *"ड्रिल :- नॉलेजफुल अवस्था का अनुभव"*

 

_ ➳  *मैं ज्योतिबिंदु आत्मा परमधाम में परमज्योति शिवबाबा के अति समीप बैठ जाती हूँ...* परमज्योति से अति दिव्य तेजस्वी किरणें निकलकर मुझ आत्मा पर पड़ रही हैं... मुझ आत्मा के मन-बुद्धि से सारी अशुद्धता बाहर निकल रही है... *सारी अपवित्रता काले बादलों के रूप में बाहर निकल रही है...*

 

_ ➳  बाबा से निकलती गोल्डन किरणों से मुझ आत्मा का बुद्धि रूपी बर्तन गोल्डन बन रहा है... *अब ज्ञान सागर से दिव्य ज्ञान की किरणें निकल रही है...* दिव्य ज्ञान मुझ आत्मा की बुद्धि में समा रहा है... मुझ आत्मा से जन्मों-जन्मों की अज्ञानता बाहर निकल रही है... *दिव्य ज्ञान को पाकर मैं आत्मा नालेजफुल बन रही हूँ...*

 

_ ➳  मैं आत्मा नालेज की स्मृति से तीनों लोकों की सैर कर रही हूँ... *तीनों कालों में अपने स्व स्वरुप के दर्शन कर... मैं आत्मा स्व-दर्शन चक्रधारी बन रही हूँ...* अपने निज स्वरूप की स्मृति में रह... मैं आत्मा निज गुणों, शक्तियों को धारण कर रही हूँ... *अष्ट शक्तियों को धारण कर शिव शक्ति होने का अनुभव कर रही हूँ...*

 

_ ➳  मैं आत्मा ज्ञान, योग, धारणा, सेवा चारों सब्जेक्ट्स में पास विद आनर होने का पुरुषार्थ कर रही हूँ... *अब मैं आत्मा सभी अलंकारो, शस्त्रों से सदा सुसज्जित रहती हूँ... शिव शक्ति बन सदा विश्व कल्याण के स्टेज पर स्थित रहती हूँ...* एवर रेडी रहती हूँ... *मैं आत्मा जगत से न्यारी होकर जगत कल्याण कर रही हूँ...*

 

_ ➳  एक दिलाराम बाप को दिल में बिठाकर महावीर बन रही हूँ... महावीर बन सभी परिस्थियों को सहज ही पार कर रही हूँ... अब मैं आत्मा सदा अस्त्रधारी बन समय, स्वांस, शक्तियों के खजानों को सेवा में लगा रही हूँ... *मैं आत्मा स्मृति स्वरुप समर्थी स्वरुप बन नॉलेजफुल अवस्था का अनुभव कर रही हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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