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 07 / 01 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *जो बीता उसे याद तो नहीं किया ?*

 

➢➢ *संकल्प शक्ति को जमा कर स्व प्रति व विश्व प्रति इसका प्रयोग किया ?*

 

➢➢ *निश्चित विजय के नशे में रह बाप की पदमगुना मदद प्राप्त की ?*

 

➢➢ *अपनी अंतर्मुखी, अलोकिक व रूहानी स्थिति में सदकाल रहने का अभ्यास किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  अशरीरी स्थिति का अनुभव करने के लिए सूक्ष्म संकल्प रुप में भी कहाँ लगाव न हो, सम्बन्ध के रुप में, सम्पर्क के रुप में अथवा अपनी कोई विशेषता की तरफ भी लगाव न हो। *अगर अपनी कोई विशेषता में भी लगाव है तो वह भी लगाव बन्धन-युक्त कर देगा और वह लगाव अशरीरी बनने नहीं देगा।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं 'मधुबन तीर्थ' की स्मृति द्वारा समस्याओंको हल करने वाली आत्मा हूँ"*

 

  भाग्य विधाता की भूमि पर पहुंचना यह भी बहुत बड़ा भाग्य है। यह कोई खाली स्थान नहीं है, महान तीर्थ स्थान है। वैसे भी भक्ति मार्ग में मानते हैं कि तीर्थ स्थान पर जाने से पाप खत्म हो जाते हैं, लेकिन कब होते हैं, कैसे होते हैं, यह जानते नहीं हैं। इस समय तुम बच्चे अनुभव करते हो कि *इस महान तीर्थ स्थान पर आने से पुण्य आत्मा बन जाते हैं। यह तीर्थ स्थान की स्मृति जीवन की अनेक समस्याओंसे पार ले जायेगी। यह स्मृति भी एक तावीज का काम करेगी।*

 

✧  जब भी याद करेंगा तो यहाँ के वातावरण की शान्ति और सुख आपके जीवन में इमर्ज हो जायेगा। तो पुण्य आत्मा हो गये ना। *इस धरनी पर आना भी भाग्य की निशानी है। इसलिए बहुत-बहुत भाग्यशाली हो। अब भाग्यशाली तो बन गये लेकिन सौभाग्यशाली बनना वा पद्मापद्म भाग्यशाली बनना यह आपके हाथ में है।*

 

  बाप ने भाग्यशाली बना दिया, यही भाग्य समय प्रति समय सहयोग देता रहेगा। *कोई भी बात हो तो मधुवन में बुद्धि से पहुंच जाना। फिर सुख और शान्ति के झूले में झूलने का अनुभ करेंगे।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  कितना भी बिजी हो, लेकिन पहले से ही साधन के साथ साधना का समय एड करो। होता क्या है - सेवा तो बहुत अच्छी करते हो, समय भी लगाते हो, उसकी तो मुबारक है। लेकिन स्व-उन्नति या साधना बीच-बीच में न करने से थकावट का प्रभाव पडता है। बुद्धि भी थकती है, हाथ-पाँव भी थकता है और *बीच-बीच में अगर साधना का समय निकालो तो जो थकावट है ना, वह दूर हो जाए।*

 

✧  *खुशी होती है ना खुशी में कभी थकावट नहीं होती है।* काम में लग जाते हो, बापदादा तो कहते हैं कि काफी समय एक्शन-कान्सेस रहते हो। ऐसा होता है ना? एक्शन-कान्सेस की माक्र्स तो मिलती हैं, वेस्ट तो नहीं जाता है लेकिन सोल-कान्सेस की माक्र्स और एक्शन कान्सेस की माक्र्स में अन्तर तो होगा ना। फर्क होता है ना? तो अभी बैलेन्स रखो।

 

✧  लिंक को तोडो नहीं, जोडते रहो क्योंकि मैजारिटी डबल विदेशी काम करने में भी डबल बिजी रहते हैं। *बापदादा जानते हैं कि मेहनत बहुत करते हैं लेकिन बैलेन्स रखो।* जितना समय निकाल सको, सेकण्ड निकाली, मिनट निकालो, निकालो जरूरा हो सकता है? पाण्डव हो सकता है? टीचर्स हो सकता है? और जो ऑफिस में काम करते हैं, उनका हो सकता है? हाँ तो बहुत अच्छा करते हैं। अच्छा।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *फ़रिश्ते अर्थात् कर्मातीत अवस्था वाले।* आज के दिन सदा अपने को डबल लाइट समझ उड़ती कला का अनुभव करते रहना। कर्मयोगी का पार्ट बजाते भी कर्म और योग का बैलेन्स चेक करना कि कर्म और याद अर्थात् योग दोनों ही शक्तिशाली रहे? अगर कर्म शक्तिशाली रहा और याद कम रही तो बैलेन्स नहीं। और याद शक्तिशाली रही और कर्म शक्तिशाली नहीं तो भी बैलेन्स नहीं। तो *कर्म और याद का बैलेन्स रखते रहना।* सारा दिन इसी श्रेष्ठ स्थिति में रहने से अपनी कर्मातीत अवस्था के नज़दीक आने का अनुभव करेंगे। सारा दिन कर्मातीत स्थिति वा अव्यक्त फ़रिश्ते स्वरूप स्थिति में चलते फिरते रहना और नीचे की स्थिति में नहीं आना। आज नीचे नहीं आना, ऊपर ही रहना। अगर कोई कमज़ोरी से नीचे आ भी जाए तो एक-दो को स्मृति दिलाए समर्थ बनाए सभी ऊँची स्थिति का अनुभव करना। यह आज की पढ़ाई का होम वर्क है। होम वर्क ज़्यादा है, पढ़ाई कम है। *बाप का बनना अर्थात् डबल लाइट बनना।* क्योंकि बाप के बनते ही सब बोझ बाप को दे दिया। सदा बाप के हो ना! सब कुछ बाप को दे दिया। तन-मन-धनसम्बन्ध सब कुछ सरेन्डर कर दिया। फिर बोझ काहे का? अभी यही याद रखना - *जब सब कुछ बाप का हो गया तो सदा डबल लाइट बन गये।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- आत्मा की उन्नति वा चढ़ती का साधन बाप ही बतलाते हैं"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा सेण्टर में बाबा के कमरे में बैठ अपने दिल दर्पण में देख रही हूँ- अपने तकदीर की तस्वीर को... स्वयं भाग्यविधाता परमात्मा ने मेरी सोई हुई तकदीर को जगाकर, मेरा सुन्दर भाग्य बनाया है... परमात्मा ने अपने ज्ञान-योग के जल से मेरी तकदीर को सींचा है... अपने स्नेह-प्यार के फूलों की खुशबू से खुशबूदार बना दिया है...* 21 जन्मों तक सुख-शांति का वर्सा देकर मुझे एवर हेल्थी, एवर वेल्थी बना दिया है... अपने भाग्य के गुण गाती मैं आत्मा पहुँच जाती हूँ सूक्ष्म वतन में मेरे भाग्यविधाता बाबा के पास...

 

  *मुझे राजयोग सिखलाकर मेरी बिगड़ी को सुधारकर तकदीरवान बनाते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे बच्चे... मुझ पिता के सिवाय दुःख भरी दुनिया से छुड़ा न सके... सुख भरे जीवन जो दुखो के पहाड़ बन गए है... मेरे सिवाय परिवर्तन हो न सके... *मेरे सोने से फूल बच्चों की बिगड़ी तकदीर को मै ही संवार सकता हूँ... अपनी सारी शक्तिया ज्ञान देकर मै ही भाग्यवान बना सकता हूँ कोई और नही...*

 

_ ➳  *अपने सुन्दर भाग्य के नशे में खुशियों के गगन में उड़ते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा... आप संग ज्ञानवान बन रही हूँ... *अपने बिगड़ी सी किस्मत को हीरों से सजा रही हूँ... ज्ञान रत्नों से चमकती जा रही हूँ...  और भाग्यवान आत्मा बनती जा रही हूँ...*

 

  *ज्ञान रत्नों की झंकार से मेरे जीवन को सुरीला बनाकर प्यारे बाबा कहते हैं:-* मीठे प्यारे फूल बच्चे.... कितने सुखो और आनंद खुशियो से भरपूर दुनिया के रहवासी थे... और किस विकारो के दलदल में फस कर धस से गए हो.... *मुझ विश्व पिता से बच्चों की यह दशा देखी न जाय... बच्चों की तकदीर जगाने आया हूँ... ज्ञान रत्नों का खजाना लिए उतर आया हूँ...*

 

_ ➳  *विकारी दलदल से निकल खुबसूरत दुनिया की मालिक बनने की अधिकारी बन मैं आत्मा कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... मुझ आत्मा ने तो दुखो को ही जीवन का अटल सत्य मान लिया था... *आपने आकर भाग्य की लकीर ही बदल दी... सुंदर जीवन का आधार दे दिया... सारे रत्न भरे खजाने मेरे हाथो में देकर सुखो से मेरा श्रृंगार कर दिया...*

 

  *प्रेम के खजाने मुझ पर बरसाते हुए प्रेम के सागर मेरे बाबा कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे बच्चे... *जब सब ही खेल में उतर गए तो बाहर तो सिवाय ईश्वर पिता के कोई निकाल न सके... इन दर्दो से परमपिता ही उबार सके... वही खूबसूरत सुख दामन में वही सजा सके...* फूलो भरा महकता सतयुग वही तो बना सके... सारे विश्व को सम्पन्नता की दौलत से आबाद कर दे...

 

_ ➳  *स्वर्ग का राज्य तिलक अपने नाम कर बाबा के दिल तख़्त पर बैठकर मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा खुशनुमा भाग्य को पाकर निखरती जा रही हूँ... *अपनी काली हो गई तकदीर को सुनहरा सजाती जा रही हूँ... आपके दिए ज्ञान धन से विश्व की मालिक बन सुंदर तकदीर पाती जा रही हूँ..."*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- कम से कम 8 घण्टा ईश्वरीय गवर्मेन्ट की सर्विस कर अपना समय सफल करना*

 

_ ➳  इस पतित सृष्टि को पावन सतयुगी दुनिया मे परिवर्तन करने का जो कर्तव्य इस समय स्वयं भगवान इस धरा पर आकर कर रहें हैं उस ऑल माइटी अथॉरिटी, पाण्डव गवर्मेंट के साथ इस कर्तव्य में उसका मददगार बनना कितने महान सौभाग्य की बात है! *कितना श्रेष्ठ भाग्य है मेरा जो भगवान की मदद करने का गोल्डन चांस भगवान ने स्वयं मुझे दिया है। कोटो में कोई, कोई में भी कोई मैं वो महान सौभाग्यशाली आत्मा हूँ जिसे भगवान ने स्वयं अपने सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए चुना है*। "वाह मैं आत्मा और वाह मेरा भाग्य"। अपने श्रेष्ठ भाग्य को स्मृति में लाकर वाह - वाह के गीत गाती हुई मैं आत्मा अपने उस प्यारे पिता का कोटि - कोटि शुक्रिया अदा करके उनसे वादा करती हूँ कि *अपनी हर रोज की दिनचर्या में मैं 8 घण्टे पांडव गवर्मेंट की मदद अवश्य करूँगी। तन मन धन से ईश्वरीय कार्य मे सहयोग जरूर दूँगी*।

 

_ ➳  अपने सर्वशक्तिवान, सृष्टि के रचयिता पिता से वादा करके मैं जैसे ही मन बुद्धि को उनकी याद में स्थिर करती हूँ मुझे आभास होता है जैसे मेरे पिता अपना असीम बल भरकर मुझे अथक और अचल अडोल बनाने के लिए अपने पास बुला रहें हैं। *स्वयं भगवान मेरा आह्वान कर रहें हैं यह विचार कर मन ही मन गदगद होती हुई मैं सेकण्ड में देह भान का त्याग कर अपने अनादि बिंदु स्वरूप में स्थित हो जाती हूँ और अपने मन बुद्धि को पूरी तरह अपने प्यारे पिता के स्वरूप पर फोकस कर लेती हूँ*। देख रही हूँ अपने सर्वशक्तिवान शिव पिता को मैं फरिश्तो के अव्यक्त वतन में अपने अव्यक्त रथ में विराजमान होकर बाहें फैलाये अपना इंतजार करते हुए। अव्यक्त ब्रह्मा बाबा की भृकुटि में अनन्त प्रकाशवान अपने शिव पिता को मैं देख रही हूँ जो मुस्कारते हुए अव्यक्त इशारे से मुझे बुला रहें हैं।

 

_ ➳  ऐसा लग रहा है जैसे एक अद्भुत शक्ति मेरे अंदर जागृत हो रही है जो मुझे धीरे - धीरे अव्यक्त स्थिति में स्थित कर रही है। मेरा साकार शरीर लाइट के शरीर मे परिवर्तित होता जा रहा है। *ऊपर से लेकर नीचे तक अब मैं स्वयं को एक सुंदर प्रकाश की काया में अनुभव कर रही हूँ। स्वयं को मैं इतना हल्का महसूस कर रही हूँ कि ऐसा लग रहा है जैसे मेरे पाँव धरती को स्पर्श ही नही कर रहे और धीरे - धीरे अपनी प्रकाश की काया के साथ मैं ऊपर उड़ रही हूँ*। एक बहुत ही सुंदर अनुभूति और लाइट स्थिति का अनुभव करते हुए सारे विश्व का चक्कर लगा कर अब मैं आकाश से ऊपर जा रही हूँ। *निरन्तर ऊपर की ओर उड़ते हुए अब मैं सफेद प्रकाश की उस खूबसूरत दुनिया मे प्रवेश कर रही हूँ जहाँ अव्यक्त बापदादा मेरा इंतजार कर रहें हैं*।

 

_ ➳  फ़रिश्तों की इस लाइट की दुनिया में अपने सम्पूर्ण लाइट माइट स्वरूप में अपना अनन्त प्रकाश पूरे वतन में फैलाते हुए बापदादा को मैं सामने देख रही हूँ। अपनी दोनों बाहों को फैलाये अपने इंतजार में खड़े बापदादा के मुस्कारते हुए सुंदर मनभावन स्वरूप को निहारते हुए बापदादा के पास पहुंच कर मैं उनकी बाहों में समा जाती हूँ। *उनके नयनो में अथाह प्यार का सागर मेरे लिए उमड़ रहा है उस स्नेह सागर की गहराई में डूब कर मैं गहन अतीन्द्रिय सुख का अनुभव कर रही हूँ। अपने प्यारे बापदादा का अथाह प्यार पाकर तृप्त होकर अब मैं उनके सम्मुख बैठी हूँ और उनसे मीठी दृष्टि लेकर परमात्म शक्तियों को अपने अंदर भर रही हूँ*। बाबा के मस्तक से निकल रही तेज लाइट सीधी मुझ में प्रवाहित हो रही है। अथक सेवाधारी बन पाण्डव गवर्मेंट अर्थात ईश्वरीय कार्य मे मदद करने के लिए बाबा अपने हाथ मे मेरा हाथ लेकर अपनी सारी शक्तियों का बल मुझे दे रहें हैं। वरदानों से मेरी झोली भरकर मुझे भरपूर कर रहें हैं।

 

_ ➳  सर्व शक्तियों, सर्व वरदानों और सर्व खजानो से सम्पन्न होकर अब मैं अपनी लाइट की शक्तिशाली सूक्ष्म काया के साथ वापिस साकारी दुनिया मे लौट कर अपने साकार ब्राह्मण तन में आकर विराजमान हो जाती हूँ। *भगवान की पाण्डव गवर्मेंट का सच्चा सेवक बन सृष्टि परिवर्तन के उनके कार्य मे मदद करने के लिए अब मैं सम्पूर्ण समर्पण भाव से भगवान द्वारा रचे रुद्र ज्ञान यज्ञ में पूरा सहयोग दे रही हूँ। शरीर निर्वाह अर्थ अपने सभी दैनिक कर्तव्यों को पूरा करने के साथ - साथ 8 घण्टा पाण्डव गवर्मेंट की सेवा में सहयोगी बन, परमात्म सेवा और परमात्म याद द्वारा अपने संगमयुगी ब्राह्मण जीवन को मैं श्वांसों श्वांस सफल कर रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं संकल्प शक्ति को जमा कर स्व प्रति वा विश्व प्रति इसका प्रयोग करने वाली शक्तिशाली आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं निश्चित विजय के नशे में रह बाप की पदमगुणा  मदद प्राप्त करने वाली मायाजीत आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  अब आप लोगों की सेवा हैवायब्रेशन्स द्वारा आत्माओं को समीप लाना... आपस में तो होना ही है... आपसी स्नेह औरों को वायब्रेशन द्वारा खींचेगा... अभी आप लोगों को यह साधारण सेवा करने की आवश्यकता नहीं है... *भाषण करने वाले तो बहुत हैंलेकिन आप लोग हरेक आत्मा को ऐसी भासना दो जो वह समझें कि हमको कुछ मिला...*  ब्राह्मण परिवार में भी आपके संगठन के वायब्रेशन द्वारा निर्विघ्न बनाना है... मन्सा सेवा की विधि को और तीव्र करो... वाचा वाले बहुत हैं... मन्सा द्वारा कोई न कोई शक्ति का अनुभव हो... *वह समझें कि इन आत्माओं द्वारा यह शक्ति का अनुभव हुआ... चाहे शान्ति का होचाहे खुशी का होचाहे सुख का होचाहे अपने-पन का...* तो जो भी अपने को महारथी समझते हैं उन्हों को अभी यह सेवा करनी है... सभी अपने को महारथी समझते होमहारथी होअच्छा है। (जगदीश भाई ने गीत गाया) अभी औरों को भी आप द्वारा ऐसा अनुभव हो... बढ़ता जायेगा... इससे ही अभी ऐसी अनुभूति शुरू करेंगे तब साक्षात्कार शुरू हो जायेगा...

 

 _ ➳  *बापदादा ने यह भी देखा की जो नये नये बच्चे आते है, उन्हो मे कई आत्मायें ऐसी भी है जिन्हों को बापदादा के सहयोग के साथ-साथ आप ब्राह्मण आत्माओं के द्वारा हिम्मत, उमंग, उत्साह,समाधान मिलने की आवश्यकता है...* छोटे-छोटे है ना! फिर भी है छोटे लेकिन हिम्मत रख ब्राह्मण बने तो है ना! तो छोटों को शक्तियों द्वारा पालना की आवश्यकता है... और पालना नहीशक्ति देने के पालना की आवश्यकता है... तो जल्दी से स्थापना की ब्राह्मण आत्मायें तैयार हो जाएं क्यों की कम से कम 9 लाख तो चाहिए ना! तो शक्तियों का सहयोग दोशक्तियों से पालना दोशक्तियाँ बढाओ... *ज्यादा डिसकस करने की शिक्षायें नही दो... शक्ति दो... उनकी कमजोरी नहीं देखो लेकिन उसमे विशेषता वा जो शक्ति की कमी हो वह भरते जाओ...* आजकल जो निमित्त है उन्हों को इस पालना के निमित्त बनने की आवश्यकता है... जिज्ञासु बढायें, सेवाकेन्द्र बढायें यह तो कामन है, लेकिन हर एक आत्मा को शक्तिशाली बाप की मदद से बनायेंअभी इसकी आवश्यकता है... सेवा तो सब कर रहे हो और करने के बिना रह भी नही सकते... लेकिन सेवा मे शक्ति स्वरूप के वायब्रेशन आत्माओं को अनुभव हो, शक्तिशाली सेवा हो... *साधारण सेवा तो आजकल की दुनिया मे बहुत करते है लेकिन आपकी विशेषता है -'शक्तिशाली सेवा'*... ब्राह्मण आत्माओं को भी शक्ति की पालना आवश्यक है... अच्छा...

 

✺   *ड्रिल :-  "अपने को महारथी समझ मन्सा सेवा द्वारा शक्तियों का अनुभव कराना"*

 

 _ ➳  समय की समीपता की ओर इशारा करती बाबा की अव्यक्त वाणियों पर विचार सागर मन्थन करते हुए मैं स्वय से ही सवाल करती हूं कि समय जिस तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है, क्या समय के हिसाब से मेरे पुरुषार्थ की गति भी उतनी ही तीव्र है? *समय की समीपता को देखते हुए आने वाले समय प्रमाण जो मनसा बल मेरे अंदर जमा होना चाहिए, क्या वो बल मैं जमा कर रही हूँ?* मन में उठ रहे इन सवालों जवाबों की उलझन के बीच मैं देखती हूँ अंत का वो सीन जिसमे मुझे महारथी बन लाचार, बेबस, दुखी आत्माओं को मनसा बल द्वारा शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता है...

 

 _ ➳  अनेक प्रकार के सीन एक - एक करके मेरी आँखों के सामने आ रहें हैं... मैं देख रही हूँ *कहीं प्रकृति का विकराल रूप, कहीं विकारों का विकराल रूप, कहीं तमोगुणी आत्माओं का वार और कहीं भगवान को पुकारती भक्त आत्माओं की हृदय विदीर्ण पुकार... राज्य सत्ता, धर्म सत्ता, और अनेक प्रकार के बाहुबल सब हलचल की स्थिति में दिखाई दे रहें हैं...* सभी आशापूर्ण निगाहों से उन महारथी आत्माओं की इंतजार कर रहें हैं जो मसीहा बन कर उन्हें इन सभी मुसीबतों से बाहर निकाल कर, पल भर की शांति, सुख का अनुभव करवा सके...

 

 _ ➳  तभी एक और दृश्य आंखों के सामने उभर आता है... मैं देख रही हूँ *बापदादा के साथ अनेक महारथी ब्राह्मण आत्मायें मसीहा बन उन तड़पती हुई आत्माओं के पास आ रही है और अपनी शीतल दृष्टि से, अपनी शक्तिशाली मनसा शक्ति से उन्हें बल प्रदान कर रही हैं...* उन्हें शांति की अंचलि दे कर तृप्त कर रही हैं... एक तरफ हाहाकार और दूसरी तरफ जयजयकार हो रही है... इस दृश्य को देखते देखते मैं स्वयं से प्रतिज्ञा करती हूं कि समय की इन अंतिम घड़ियों के नजदीक आने से पहले मुझे अपने अंदर इतना बल जमा करना है कि महारथी बन, विश्व की सभी दुखी अशांत आत्माओ को मनसा द्वारा शक्तियों का अनुभव करवा सकूँ और भगवान की प्रत्यक्षता में सहयोगी बन सकूँ...

 

 _ ➳  इसी दृढ़ निश्चय के साथ अपने फ़रिशता स्वरूप को धारण कर मैं बापदादा के पास पहुंच जाती हूँ सूक्ष्म वतन और बाबा की सर्वशक्तियाँ स्वयं में समाहित कर, परमात्म बल से मैं भरपूर हो जाती हूँ... परमात्म शक्तियों से स्वयं को सम्पन्न कर अपने ब्राह्मण स्वरूप में आकर अब मैं निरन्तर परमात्म याद में रह, अपनी मनसा वृति को शक्तिशाली बनाने का पुरुषार्थ कर रही हूँ... *अपने अंदर मनसा बल को जमा करने के साथ - साथ मनसा शक्तियों के प्रयोग से अनेको आत्माओ को परमात्म पालना का अनुभव करवाकर उन्हें अपने ईश्वरीय परिवार के समीप ला रही हूँ...*

 

 _ ➳  महारथी बन अपने सम्बन्ध सम्पर्क में आने वाली और सेवा स्थल पर आने वाली आत्माओं को मैं मनसा शक्ति द्वारा कोई ना कोई शक्ति का अनुभव करवा रही हूँ... *कोई आत्मा शांति का, कोई सुख का, कोई खुशी का और कोई अपनेपन का अनुभव करके जैसे तृप्त हो रही हैं...* इन मनसा शक्तियों के प्रयोग से सेवा स्थल का वायुमण्डल भी निर्विघ्न बन रहा है।

 

 _ ➳  सेवा स्थल का वायुमण्डल निर्विघ्न होने से ब्राह्मण संगठन भी शक्तिशाली बन रहा है जिससे सेवा स्थल पर आने वाले नए बच्चो को बापदादा के सहयोग के साथ साथ  ब्राह्मण आत्माओं के द्वारा उमंग, उत्साह, हिम्मत और समाधान मिलने से वो भी तीव्र गति से आगे बढ़ रहें हैं... *शक्तियों का सहयोग और शक्तियों की पालना मिलने से निर्बल और उत्साह हीन आत्मायें भी अपने अंदर शक्ति भरने से शक्तिशाली स्थिति का अनुभव कर रही है...*

 

 _ ➳  *सेवा मे शक्ति स्वरूप के वायब्रेशन आत्माओं को अनुभव हो, शक्तिशाली सेवा हो इसी लक्ष्य को ले कर अब सभी ब्राह्मण आत्मायें अपनी मनसा शक्ति को बढ़ा कर महारथी बन मनसा द्वारा शक्तियों का अनुभव कर और करवा रही है...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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