━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

 07 / 02 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

 

∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *देवताओं जैसे गुण स्वयं में धारण किये ?*

 

➢➢ *याद के बल से सब पुराने हिसाब किताब चुक्तु किये ?*

 

➢➢ *सहज योग की साधना द्वारा साधनों पर विजय प्राप्त की ?*

 

➢➢ *स्वयं संतुष्ट रह सबको संतुष्ट किया ?*

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

✧  देह-भान से परे होना है तो यह रूहानी एक्सरसाइज कर्म करते भी अपनी ड्युटी बजाते हुए भी एक सेकण्ड में अभ्यास कर सकते हो। *यह एक नेचुरल अभ्यास हो जाए - अभी-अभी निराकारी, अभी-अभी फरिश्ता। यह मन की ड्रिल जितना बार करेंगे उतना ही सहज योगी, सरल योगी बनेंगे।*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

   *"कर्मयोगी की स्टेज द्वारा कर्मभोग पर विजय प्राप्त करने वाला 'विजयी रत्न' हूँ"*

 

  महावीर बच्चे सदा ही तंदुरस्त हैं। क्योंकि मन तंदुरस्त है, तन तो एक खेल करता है। *मन में कोई रोग होगा तो रोगी कहा जायेगा अगर मन निरोगी है तो सदा तंदुरस्त है।* सिर्फ शेश शैया पर विष्णु के समान ज्ञान का सिमरण कर हर्षित होते। यही खेल है। जैसे साकार बाप विष्णु समान टांग पर टांग चढ़ाए खेल करते थे ना। ऐसे कुछ भी होता है तो यह भी निमि मात्र खेल करते।

 

  सिमरण कर मनन शक्ति द्वारा और ही सागर के तले में जाने का चांस मिलता है। जब सागर में जायेंगे तो जरूर बाहर से मिस होंगे। तो कमरे में नहीं हो लेकिन सागर के तले में हो। नये-नये रत्न निकालने के लिए तले में गये हो। *कर्मभोग पर विजय प्राप्त कर कर्मयोगी की स्टेज पर रहना इसको कहा जाता है - 'विजयी रत्न'।*

 

  *सदा यही स्मृति रहती कि यह भोगना नहीं लेकिन नई दुनिया के लिए योजना है। फुर्सत मिलती है ना, फुर्सत का काम ही क्या है? नई योजना बनाना। पलंग भी लैनिंग का स्थान बन गया।*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

✧  कार्य करते फरिश्ता बनकर कर्म करो, फरिश्ता अर्थात डबल लाइट कार्य का बोझ नहीं हो। कार्य का बोझ अव्यक्त फरिश्ता बनने नहीं देगा। तो *बीच-बीच में निराकारी और फरिश्ता स्वरूप की मन की एक्सरसाइज करो ते थकावट नहीं होंगा।*

 

✧  जैसे ब्रह्मा बाप को साकार रूप में देखा - डबल लाइट सेवा का भी बोझ नहीं। अव्यक्त फरिश्ता रूप। तो सहज ही बाप समान बन जायेंगे। *आत्मा भी निराकार है और आत्मा निराकार स्थिति में स्थित होगी तो निराकार बाप की याद सहज समान बना देगी।*

 

✧  *अभी-अभी एक सेकण्ड में निराकारी स्थिति में स्थित हो सकते हो?* हो सकते हो? (बापदादा ने ड़ि्ल कराई) यह अभ्यास और अटेन्शन चलते-फिरते, कर्म करते बीच-बीच में करते जाना। तो *यह प्रैक्टिस मन्सा सेवा करने में भी सहयोग देगी और पॉवरफुल योग की स्थिति में भी वहुत मदद मिलेगी।* अच्छा।

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

〰✧  *दो बातें मुख्य याद रखनी हैं की एक तो मणि को देखना, देह रूपी सांप को न देखना। और दूसरी बात, अपने को अवतरित समझो। इस शरीर में अवतरित होकर कार्य करना हैं। यह प्रैक्टिस जरूर करो - एक सेकंड में आवाज में, एक सेकंड में संकल्प से परे, एक सेकंड में सर्विस के संकल्प में आये और एक सेकंड में संकल्प से परे स्वरूप में स्तिथ हो जाये। इस ड्रील पक्की होगी वह सभी परिस्तिथियों का सामना कर सकते हैं।* जैसे शारीरिक ड्रील सुबह कराई जाती हैं, वैसे यह अव्यक्त ड्रिल भी अमृतवेले विशेष रूप से करनी हैं। करना तो सारा दिन हैं लेकिन विशेष प्रैक्टिस करने का समय अमृतवेला हैं। *जब देखो बुद्धि बिज़ी हैं तो उसी समय यह प्रैक्टिस करो - परिस्तिथि में होते हुये भी हम अपनी बुद्धि को न्यारा कर सकते हैं। लेकिन न्यारे तब हो सकेंगे जब जो भी कार्य करते हो वह न्यारी अवस्था मे होकर करेंगे।* अगर उस कार्य मे अटेचमेंट होगी तो एक सेकंड में न्यारे  नही होंगे। इसलिए यह प्रैक्टिस करो। कैसी भी परिस्थिति हो। *क्योकि फाइनल पेपर अनेक प्रकार के भयानक और न चाहते भी अपनी तरफ आकर्षित करने वाली परिस्थितियों के बीच होंगे। उनकी भेंट में जो आजकल की परिस्थितिया हैं वो कुछ भी नही हैं।*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

 

∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- याद के बल से पावन बन उंच पद पाना"*

 

_ ➳  अमृतवेला का ये सुहानी पल रात के अँधेरे को ख़तम कर सुबह की रोशनी की ओर रुख कर रहा है... वैसे ही कलियुगी अंधियारे को चीरते हुए ये संगमयुग... सतयुग की ओर ले जा रहा है... *प्यारे बाबा जब से आयें हैं, संगम की हर घडी ही अमृतवेला बन गई है... जो सदा सुखों की ओर ले जाती है... हर पल ही कितना सुहावना हो गया है... इतनी पावन, सुन्दर वेला में मैं आत्मा प्यारे बाबा से प्यारी-प्यारी बातें करने पहुँच जाती हूँ पावन वतन में...*

 

  *मेरे मन मंदिर में अपनी मूरत बसाते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे फूल बच्चे... कितने मीठे खिले से महकते फूल से धरा पर उतरे थे पर खेलते खेलते काले पतित हो गए... *अब इस देह की दुनिया से निकल ईश्वर पिता की सोने सी यादो में स्वयं को उसी दिव्यता से दमकाओ क्योकि अब सुनहरी सुखो भरी दुनिया में चलना है...*

 

_ ➳  *निराकारी बाबा की यादों में स्वर्णिम सुखों को अपने नाम करते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... मै आत्मा अपने खोये रूप को सौंदर्य को आपकी यादो में पुनः पा रही हूँ... *कंचन काया और कंचन महल की अधिकारी बन रही हूँ और इस दुनिया से उपराम हो रही हूँ...*

 

  *अपने रूहानी नैनों से पावनता की खुशबू फैलाते हुए मीठे बाबा कहते हैं:-* मीठे प्यारे लाडले बच्चे... *ईश्वर पिता के साथ का समय बहुत कीमती है... यादो में रहकर अपने सच्चे दमकते स्वरूप को पाकर सुखो की दुनिया में मुस्कराओ...* यादो में अपनी दिव्यता और शक्तियो को फिर से पाकर सुंदर तन और मन से सुन्दरतम दुनिया के रहवासी बनो...

 

_ ➳  *मैं आत्मा प्रभु की यादों की धारा में बहकर सुन्दर कमल बन खिलते हुए कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... *मै आत्मा आपकी मीठी यादो में अपनी खोयी सुंदरता को पाकर मुस्करा रही हूँ...* दिव्य गुणो को धारण कर पवित्रता के श्रृंगार से सजकर देवताई स्वरूप में देवताओ की दुनिया घूम रही हूँ...

 

  *रूहानी यादों में मेरे मन के चमन को खिलाकर मेरे रूहानी बाबा कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... *सिर्फ बाबा की यादे ही एकमात्र उपाय है जो इस पतित तन और मन को खुबसूरत और पवित्र बना सकता है... तो इस समय को यादो में भर दो... अपने पुरुषार्थ को तीव्र कर स्वयं को निखारने में पूरी तन्मयता से जुट जाओ...* क्योकि अब पवित्र दुनिया में चलने और सुख लेने का समय हो गया है...

 

_ ➳  *एक की लगन में मगन होकर जीवन में मिठास भरकर मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा जनमो के कालेपन को आपकी मीठी यादो में धो रही हूँ...* वही सुंदर देवताई स्वरूप पा रही हूँ और सुख और शांति की दुनिया की अधिकारी होकर मीठे सुखो में खिलखिला रही हूँ... *यादो में पावन बनकर खिल उठी हूँ...*

 

────────────────────────

 

∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- विकर्माजीत बनना है इसलिए अब कोई भी विकर्म नही करना है*"

 

_ ➳  63 जन्मो के विकर्मो का बोझ जो आत्मा के ऊपर है उसे भस्म करने और स्वयं को विकर्माजीत बनाने के लिए मैं आत्मा बिंदु बन परमधाम में अपने बिंदु बाप के सानिध्य में जा कर बैठ जाती हूँ। *5 तत्वों से परे लाल सुनहरी प्रकाश से प्रकाशित यह दुनिया बहुत ही निराली और असीम शांति से भरपूर करने वाली है। यहाँ आकर मैं गहन शांति का अनुभव कर रही हूँ*। संकल्पो की भी यहाँ कोई हलचल नही। अपनी ओरिजनल बीजरूप अवस्था में स्थित हो कर बीजरूप परमात्मा बाप के साथ का यह मंगल मिलन मुझे अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करवा रहा है। चित को चैन और मन को आराम दे रहा है।

 

_ ➳  ज्ञानसूर्य शिव बाबा सर्वशक्तियों की ज्वलंत किरणों को निरन्तर मुझ बिंदु आत्मा पर प्रवाहित कर, मुझ आत्मा के ऊपर चढ़े हुए विकारों के किचड़े को जला कर भस्म कर रहे है। *बाबा से आ रही सर्वशक्तियों की अनन्त किरणे चक्र की भांति गोल - गोल घूमती हुई मेरे पास आ रही हैं। जैसे - जैसे इन किरणो का दायरा बढ़ता जा रहा है इनके आगोश में मैं गहराई तक समाती जा रही हूँ*। मेरे चारों और फैले सर्वशक्तियों के इस गोल चक्र ने जैसे ज्वाला स्वरूप धारण कर लिया है। ऐसा लग रहा है जैसे मेरे चारों तरफ योग अग्नि की बहुत ऊँची - ऊँची लपटे निकल रही हैं जिसकी तपिश से मेरे पुराने आसुरी स्वभाव, संस्कार जल कर भस्म हो रहें हैं और *मेरी खोई हुई सर्वशक्तियाँ पुनः जागृत हो रही हैं। मेरे सारे विकर्म भस्म हो रहें हैं*।

 

_ ➳  आत्मा में पड़ी खाद जैसे - जैसे योग अग्नि में जल रही है, विकर्म विनाश हो रहें हैं वैसे - वैसे मैं आत्मा हल्की और चमकदार बनती जा रही हूँ। सोने के समान चमकता हुआ मेरा स्वरूप मुझे बहुत ही प्यारा और न्यारा लग रहा है। *कभी मैं अपने इस जगमग करते ज्योतिर्मय स्वरूप को देखती हूँ तो कभी अनन्त प्रकाशमय, सर्वशक्तियों के सागर अपने शिव पिता को*। इस अलौकिक मिलन की मस्ती में डूबी मैं एकटक अपने प्यारे बाबा को निहार रही हूँ और अपने प्यारे परमात्मा के सानिध्य में स्वयं को धन्य - धन्य अनुभव कर रही हूँ। *वाह मैं आत्मा, वाह मेरे बाबा, जो मुझे अपनी सर्वशक्तियों से भरपूर कर रहे है यही गीत गाती मैं इस अलौकिक मिलन का भरपूर आनन्द ले रही हूँ*।

 

_ ➳  अपने स्वीट बाबा से स्वीट साइलेन्स होम में मधुर मंगल मिलन मनाकर, योग अग्नि में विकर्मो को भस्म करके, डबल लाइट बन कर अब मैं वापिस साकारी दुनिया में लौट रही हूँ। *साकारी दुनिया में अपने साकार ब्राह्मण तन में अब मैं आत्मा विराजमान हूँ। बाबा की याद से विकर्मो पर जीत प्राप्त कर, विकर्माजीत बनने के लिए अब मैं अपने हर कर्म पर पूरा अटेंशन रखती हूँ*। स्वयं को स्वराज्य अधिकारी की सीट पर स्थित कर अब मैं हर रोज कर्मेन्द्रिय रूपी मंत्रियों की राजदरबार लगाती हूँ और उन्हें उचित निर्देश देकर अपनी इच्छानुसार उनसे हर कार्य करवाती हूँ।

 

_ ➳  कर्मेन्द्रीयजीत बन कर्म करने से पिछले अनेक जन्मों के आसुरी स्वभाव संस्कार जो विकर्मो का कारण बन रहे थे वे सभी आसुरी स्वभाव संस्कार अब परिवर्तन हो रहे हैं। *तीन बिंदियों की स्मृति का तिलक अब मैं अपने मस्तक पर सदा लगा कर रखती हूँ जिससे मुझे निरन्तर यह स्मृति रहती है कि मुझे कर्मेन्द्रियों से ऐसा कोई पाप कर्म नही करना जिससे विकर्म बने*। अमृतवेले से रात तक बाबा की जो भी श्रीमत मिली हुई है उस पर एक्यूरेट चलने से और बाबा की याद में रह हर कर्म करने तथा स्वयं को सदा योग भट्टी में अनुभव करने से अब विकर्मों के खाते बन्द हो रहे हैं और मैं सहज ही विकर्माजीत बनती जा रही हूँ।

 

────────────────────────

 

∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं सहज योग की साधना द्वारा साधनों पर विजय प्राप्त करने वाली प्रयोगी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

────────────────────────

 

∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं स्वयं संतुष्ट रह, सब को संतुष्ट करने वाली संतुष्टमणि हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

────────────────────────

 

∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  सबने अपना एकाउण्ट रखा, जिन्होंने एक्यूरेट अपना एकाउण्ट रखा है, नियम प्रमाण, काम चलाऊ नहीं, यथार्थ रूप से जैसा भी है लेकिन एकाउण्ट अपना पूरा रखा है, सच्चा-सच्चा एकाउण्ट, चलाऊ नहीं, वह बड़ा हाथ उठाओ। जिन्होंने रखा है, लिखा है नहीं, रखा है। थोड़ों ने रखा है। अच्छा पीछे वाले जिन्होंने रखा है, खड़े हो जाओ। अच्छा। डबल फारेनर्स जिन्होंने रखा है वह उठो। अच्छा मुबारक हो। अच्छा - जिन्होंने नहीं रखा है उन्हों से हाथ नहीं उठवाते हैं। उठाना अच्छा नहीं लगेगा ना। लेकिन *जिन्होंने सच्चा-सच्चा एकाउण्ट रखा है, बापदादा के पास तो स्पष्ट हो ही जाता है।* कइयों ने थोड़ा हिसाब से नहीं, जैसे एवरेज निकाला जाता है ना, ऐसे भी रखा है। एक्यूरेट बहुत थोड़ों ने लिखा है या रखा है। फिर भी *बाप के डायरेक्शन को माना इसलिए बापदादा ने दो प्रकार की एक्सट्रा मार्क्स उन्हों की बढ़ाई, क्योंकि श्रीमत पर चलना यही भी एक सबजेक्ट है।* तो श्रीमत पर चलने की सबजेक्ट में फुल पास हुए इसलिए फर्स्ट नम्बर वालों को बापदादा ने अपने तरफ से 25 मार्क्स बढ़ाई, जो पहला नम्बर हैं और जो दूसरा नम्बर हैं उसको 15 मार्क्स बढ़ाई। यह एक्सट्रा लिफ्ट बापदादा ने अपने तरफ से दी। *तो फाइनल पेपर में आपकी यह मार्क्स जो हैं वह जमा होंगी। पास विद आनर होने में मदद मिलेगी।*

 

 _ ➳  लेकिन जिन्होंने नहीं रखा है, कोई भी कारण है, है तो अलबेलापन और तो कुछ नहीं है लेकिन फिर भी कोई भी कारण से अगर नहीं रखा है तो बापदादा कहते हैं कि फिर भी एक मास अपना एकाउण्ट अभी से रखो और *अगर अभी से एक मास एक्यूरेट, नम्बरवन वाला एकाउण्ट रखेंगे, तो बापदादा उसकी मार्क्स कट नहीं करेंगे,* जो श्रीमत प्रमाण नहीं कर सके हैं। समझा। कट नहीं करेंगे लेकिन करना जरूरी है। *श्रीमत न मानने से मार्क्स तो कट होती हैं ना!* अन्त में जब आप अपना पोतामेल ड्रामा अनुसार दिल की टी.वी. में देखेंगे और टी.वी. नहीं, *अपने ही दिल की टी.वी. में बापदादा दिखायेंगे, तो उसमें इस श्रीमत की मार्क्स कट नहीं करेंगे। *फिर भी बापदादा का प्यार है।*

 

✺   *ड्रिल :-  "श्रीमत को फालो कर मार्क्स लेने का अनुभव"*

 

 _ ➳  *आर्शीवाद की खान, अधिकार की पवित्र भूमि, परमात्म अवतरण की अति श्रेष्ठ भूमि मधुबन घर पांडव भवन में, मैं तपस्वी आत्मा स्वयं को देख रही हूँ...* पतित-पावन बाबा की याद में खोई मैं आत्मा परमात्म सानिध्य का अनमोल अविस्मरणीय अनुभव कर रही हूँ... *देख रही हूँ मैं तपस्वी आत्मा पतित-पावन बाबा से मुझ आत्मा पर पड़ती हुई तेजस्वी किरणों को, जैसे-जैसे ये तेजस्वी किरणें मुझ आत्मा पर पड़ रही है... मुझ आत्मा का तेज बढ़ता जा रहा है...* एक-एक किरण मुझ आत्मा में एक नयी उर्जा नयी शक्ति का संचार कर रही है... *सारे विकार-पाप भस्म हो रहे है... मुझ आत्मा की लाइट बढ़ती जा रही है... मैं आत्मा हल्कापन फील कर रही हूँ... देह में होते भी विदेही अवस्था का स्पष्ट अनुभव कर रही हूँ...* मैं आत्मा बेहद पावरफुल स्टेज का अनुभव कर रही हूँ...

 

 _ ➳  तभी मैं आत्मा देखती हूँ... *बाबा फरिशता स्वरूप में मेरे सामने आकर खड़े हो जाते है...* मैं आत्मा एकटक बस बाबा को देखे जा रही हूँ... तभी *बाबा अपना हाथ आगे बढाते है... और मुझ आत्मा के सिर पर अपना हाथ रख देते है... बाबा के सिर पर हाथ रखते ही मैं आत्मा रिटर्न जर्नी चली जाती हूँ...* और ऐसे समय में पहुंच जाती हूं... जहाँ *अव्यक्त बापदादा हिस्ट्री हाल में मुरली चला रहे है... और बहुत बड़ी सभा लगी हुई है... मैं तपस्वी आत्मा बड़े ध्यान से इस फरिशतों की सभा को साक्षी होकर देख रही हूँ...* और मैं आत्मा भी बाबा के महावाक्यों को सुनने लग जाती हूँ...

 

 _ ➳  बाबा के महावाक्यों को मैं आत्मा बड़े ध्यान से सुनते हुए, बुद्धि रूपी डायरी में नोट करती जा रही हूँ... *श्रीमत पर चलना यह भी एक सबजेक्ट है*  मैं आत्मा देख रही हूँ कि बाबा सभी का एकाउंट चेक कर रहे है पुछ रहे है... *किस-किस ने एकाउंट रखा है... और किस-किस ने रखा भी है और लिखा भी है...* मैं तपस्वी आत्मा देख रही हूँ... कुछ आत्माओं ने नियम प्रमाण एक्यूरेट एकाउंट रखा भी है और लिखा भी है... *उनको बाबा 25 मार्क्स एक्सट्रा दे रहे है...* और दूसरे जिन्होंने एकाउंट रखा है... लेकिन एक्यूरेट लिखा नहीं है...

 

 _ ➳  *उनको बाबा 15 मार्क्स दे रहे है...* और कुछ आत्माएं ऐसी है जिन्होनें एकाउंट रखा भी नहीं है और लिखा भी नहीं है... *बाबा उनको एक और चांस दे रहे है...* तभी मैं आत्मा इस दृश्य को देख अपने आप से प्रश्न करती हूँ... *मैं आत्मा इन तीनों में से किस स्थिति में हूँ...* क्या मैं आत्मा श्रीमत पर चलना जो कि एक सबजेक्ट है... उस पर सही से चल रही हूँ... क्या मुझ आत्मा का हर कदम श्रीमत अनुसार है... क्योंकि *फाइनल पेपर में ये मार्क्स भी पास विद आनर होने में मदद करेगें...* तभी मुझ आत्मा के सामने से, ये सारे दृश्य गायब हो जाते है... *मैं आत्मा देख रही हूँ बाबा फरिशता स्वरूप में सामने खड़े है... बाबा मुझ तपस्वी आत्मा को शक्तिशाली दृष्टि दे रहे है...* बाबा की आँखों से शक्तिशाली किरणें मुझ आत्मा में भरती जा रही है... और *धीरे-धीरे इस दृश्य का राज मैं आत्मा समझ रही हूँ...*

 

 _ ➳  मैं आत्मा समझ गयीं हूँ कि बाबा इस सीन द्वारा मुझे क्या समझाना चाह रहे है... *बाबा की सभी बातों को मैं आत्मा बुद्धि रूपी डायरी में नोट कर... इन सभी बातों को अटेनशन दे धारण कर रही हूँ...* अब मैं आत्मा देख रही हूँ स्वयं को इस कर्म स्थली पर... अब *मैं आत्मा हर कर्म बाबा की श्रीमत के अकॉर्डिंग कर रही हूँ...* मैं आत्मा श्रीमत रुपी जो सबजेक्ट है... उस पर सही से चल रही हूँ... मैं आत्मा अपना सच्चा-सच्चा एकाउंट रख हर कर्म बाबा की श्रीमत के अकॉर्डिंग कर  *फुल मार्क्स जमा कर रही हूँ...* मैं आत्मा दिल रूपी टी. वी द्वारा बाबा को अपना एकाउंट दिखा रही हूँ... जिसे देख *बापदादा भी फुल एक्सट्रा मार्क्स मुझ आत्मा को दे रहे है...* ये मार्क्स भी एकाउंट में जमा हो रहे है... और *मैं आत्मा उड़ती कला का अनुभव कर रही हूँ... शुक्रिया मीठे बाबा शुक्रिया....*

 

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

 

_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━