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 07 / 10 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *किसी से वाद विवाद तो नहीं किया ?*

 

➢➢ *देहि अभिमानी बनने की मेहनत की ?*

 

➢➢ *बाप के हाथ और साथ की स्मृति से मुश्किल को सहज बनाया ?*

 

➢➢ *पुरुषार्थ में सच्चाई से बापदादा की एक्स्ट्रा मदद का अनुभव किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  कर्मातीत अर्थात् कर्म के किसी भी बंधन के स्पर्श से न्यारे। ऐसा ही अनुभव बढ़ता रहे। *कोई भी कार्य स्पर्श न करे और करने के बाद जो रिजल्ट निकलती है उसका भी स्पर्श न हो, बिल्कुल ही न्यारापन अनुभव होता रहे। जैसे कि दूसरे कोई ने कराया और मैंने किया।* निमित्त बनने में भी न्यारापन अनुभव हो। *जो कुछ बीता, फुलस्टाप लगाकर न्यारे बन जाओ।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं सदा हर्षित रहने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ"*

 

  अपने को सदा हर्षित रहने वाली श्रेष्ठ आत्मा अनुभव करते हो? *हर्षितमुख, हर्षितचित। इसकी यादगार आपके यादगार चित्रों में भी  दिखाते हैं। कोई भी देवी या देवता की मूर्ति बनायेंगे तो उसमें चेहरा जो दिखाते हैं, वह सदा हर्षित दिखाते हैं।*

 

  अगर कोई सीरीयस (गम्भीर) चेहरा होगा तो देवता का चित्र नहीं मानेंगे। *तो हर्षितमुख रहने का इस समय का गुण आपके यादगार चित्रों में भी है। हर्षितमुख अर्थात् सदा सर्वप्राप्तियों से भरपूर। जो भरपूर होता है वही हर्षित रह सकता है। अगर कोई भी अप्राप्ति होगी तो हर्षित नहीं रहेंगे।* कितनी भी हर्षित रहने की कोशिश करें, बाहर से हंसेंगे लेकिन दिल से नहीं।

 

  कोई बाहर से हंसते हैं तो मालूम पड़ जाता है-यह दिखावे का हँसना है, सच्च नहीं। *तो आप सब दिल से सदा मुस्काराते रहो। कभी चेहरे पर दु:ख की लहर न आये। किसी भी परिस्थिति में दु:ख की लहर नहीं आनी चाहिए क्योंकि दु:ख की दुनिया छोड़ दी, संगम की दुनिया में आ गये।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  आप विदेश से आते हो तो बापदादा भी विदेश से आते हैं। *सबसे दूर-से-दूर से आते हैं लेकिन आते सेकण्ड में हैं।*

 

✧  आप सभी भी सेकण्ड में उडती कला का अनुभव करते हो? सेकण्ड में उड सकते हो? *इतने डबल लाइट हो, संकल्प किया और पहुँच गये।*

 

✧  *परमधाम कहा और पहुँचे, ऐसी प्रैक्टिस है?* कहाँ अटक तो नहीं जाते हो? कभी कोई बादल तंग तो नहीं करते हैं, केयरफुल भी हो और क्लियर भी, ऐसे है ना! (पार्टियों के साथ)

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ ड्रिल बहुत अच्छी लग रही थी। यह रोज़ हर एक को करनी चाहिए। ऐसे नहीं हम बिजी हैं। *बीच में समय प्रति समय एक सेकण्ड चाहे कोई बैठा भी हो, बात भी कर रहा हो, लेकिन एक सेकण्ड उनको भी ड़िल करा सकते हैं और स्वयं भी अभ्यास कर सकते हैं। कोई मुश्किल नहीं है। दो-चार सेकण्ड भी निकालना चाहिए इससे बहुत मदद मिलेगी। नहीं तो क्या होता है, सारा दिन बुद्धि चलती रहती है ना तो विदेही बनने में टाइम लग जाता है और बीच बीच में अभ्यास होगा तो जब चाहें उसी समय हो जायेंगे क्योंकि अन्त में सब अचानक होना है।* तो अचानक के पेपर में यह विदेही पन का अभ्यास बहुत आवश्यक है। ऐसे नहीं बात पूरी हो जाये और विदेही बनने का पुरुषार्थ ही करते रहें। तो सूर्यवंशी तो नहीं हुए ना। इसलिए जितना जो बिजी है, उतना ही उसको बीच-बीच में यह अभ्यास करना ज़रूरी है। फिर सेवा में जो कभी-कभी थकावट होतीे, कभी कुछ-न-कुछ आपस में हलचल हो जाती है, वह नहीं होगा। अभ्यासी होंगे ना। एक सेकण्ड में न्यारे होने का अभ्यास होगा, तो कोई भी बात हुई एक सेकण्ड में अपने अभ्यास से इन बातों से दूर हो जायेंगे। *सोचा और हुआ। युद्ध नहीं करनी पड़े। युद्ध के संस्कार, मेहनत के संस्कार सूर्यवंशी बनने नहीं देंगे। लास्ट घड़ी भी युद्ध में ही जायेगी, अगर विदेही बनने का सेकण्ड में अभ्यास नहीं है तो।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- गृहस्थ में रहते कमल फूल समान बनना"*

 

_ ➳  सुहावने मौसम में कुदरती नजारों का आनंद उठाती मैं आत्मा तालाब के किनारे बैठ जाती हूँ... सूरज ने अपनी लालिमा की चादर पूरी प्रकृति पर ओढ़ दी है...  ठंडी ठंडी हवाओं का लुत्फ़ उठाती मैं आत्मा खिले हुए कमल पुष्पों को देख रही हूँ... कीचड़ में भी खिलकर कीचड़ से परे रह मुस्कुराते हुए खड़े हैं... *मैं आत्मा भृकुटी कमल के सिहांसन पर विराजमान होकर प्यारे मीठे बाबा के पास उड़ जाती हूँ, प्यारी-प्यारी, मीठी-मीठी बातें सुनने और सुनाने...* 

 

   *अंतिम जन्म में गृहस्थ व्यवहार में रहते कमल फूल समान पवित्र बनने की श्रीमत देते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे बच्चे... इस समय जबकि ईश्वर पिता सम्मुख है... तो इस अंतिम जन्म में पवित्रता को धारण करो... *भले गृहस्थ में रहो पर कमल समान पवित्रता से महकते रहो... और निरन्तर मीठे पिता की यादो में मगन रहो... भीतर ही भीतर यह याद का पुरुषार्थ करो...*

 

_ ➳  *एक बाबा को सब सौंपकर पवित्रता के वायब्रेशंस से गृहस्थ जीवन को महकाते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा आपकी यादो में खो रही हूँ... *गृहस्थ को पवित्रता से सम्भाल कर निरन्तर निखर रही हूँ... आपकी यादो में डूबने का गुप्त पुरुषार्थ कर रही हूँ...* एक बाबा दूसरा न कोई में मगन हो गई हूँ...

 

    *मुझे आत्मस्मृति का तिलक लगाकर पवित्रता के पुष्प बरसाते हुए मीठे बाबा कहते हैं:-* मीठे प्यारे फूल बच्चे... सारे संसार को चाहकर तो देख लिया... खुद को अपवित्र बनाकर दुखी होकर भी तो देख लिया... अब ईश्वर पिता की यादो में डूबकर देखो जरा... *पवित्रता को बाँहों में भरकर सज संवर कर देखो जरा... यही यादे सुखो के सुनहरे संसार की सैर कराएगी...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा ज्योतिबिंदु स्वरुप में टिककर माया मोह के घेरे को तोड़कर कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा आपके बिना कितना भटक रही थी... दुखो के जंजालों को सत्य समझ फंस पड़ी थी... *आपने आकर बाबा मुझ पत्थर बुद्धि का उद्धार किया है... मुझे पवित्रता का सुन्दरतम श्रृंगार दिया है...*

 

   *मन कमल को खिलाकर दिव्य गुणों की खुशबू से महकाते हुए मेरे सागर बाबा कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... विकारो की अपवित्रता से निकल कमल सी सुंदरता लिए पवित्र जीवन को जीओ... *सबसे बुद्धि को निकाल एक पिता में सर्व सुखो का सुख लो... यह गुप्त मेहनत आनंद की दुनिया का सुख दिलाएगी... और देवताई स्वरूप में सजाकर विश्व का मालिक बनाएगी...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा न्यारी प्यारी बन गृहस्थ को पवित्रता की चांदनी से रोशन करते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा आपकी यादो में खो रही हूँ... *गृहस्थ में रहते हुए सम्पूर्ण पावन बन रही हूँ... आपकी यादो में सुंदर दिव्य गुणो से सज रही हूँ... और देवता बन मुस्करा उठी हूँ...*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- एक बाप से ही रूहानी बातें सुननी हैं*"

 

_ ➳  "मेरे तो शिवबाबा एक, दूसरा ना कोई" इस गीत को गुनगुनाते हुए मैं अपने घर के आंगन में टहल रही हूँ और सोच रही हूँ कि जब से मुझे बाबा मिले हैं मेरा जीवन कितना सुंदर हो गया है। जिस जीवन मे दुःख, निराशा के सिवाय कुछ नही था वो जीवन मेरे भगवान बाबा ने आ कर कितना सुखदाई बना दिया है। *बाबा के साथ ने जीवन को ऐसा हरा भरा कर दिया है जैसे बारिश की बूंदे मुरझाये हुए पेड़ पौधों को हरा भरा कर देती हैं*। मेरे दिलाराम बाबा का प्यार ही तो मेरे इस जीवन की बहार है और अब मुझे अपने इस जीवन को बहार को पूरा संगमयुग ऐसे ही बरकरार रखना है इसलिए अपने दिलाराम शिव बाबा के फ़रमान पर चलना और केवल उनसे ही अब मुझे सुनना है।

 

_ ➳  स्वयं से बातें करते, अपने शिव पिता परमात्मा के प्यार के सुखद एहसास में मैं खो जाती हूँ और उनके प्यार का वो सुखद एहसास मुझे अपनी ओर खींचने लगता है। *ऐसा अनुभव होता है जैसे मैं एक पतंग हूँ और मेरी डोर मेरे शिव पिता के हाथ में है जो मुझे धीरे धीरे ऊपर खींच रहें हैं*। उनके प्रेम की डोर में बंधी मैं देह और देह की दुनिया को भूल ऊपर की और उड़ रही हूँ। नीले गगन में उन्मुक्त हो कर उड़ने का मैं आनन्द लेती हुई उस गगन को भी पार कर, उससे ऊपर सूक्ष्म लोक से भी परे मैं पहुंच जाती हूँ लाल प्रकाश  से प्रकाशित निराकारी आत्माओं की दुनिया में जो मेरे शिव पिता परमात्मा का घर है। शान्ति की इस दुनिया मे पहुंचते ही गहन शांति की अनुभूति में मैं खो जाती हूँ।

 

_ ➳  यह गहन शांति का अनुभव मुझे हर संकल्प, विकल्प से मुक्त कर रहा है। मुझे केवल मेरा चमकता हुआ ज्योति बिंदु स्वरूप और अपने शिव पिता का अनन्त प्रकाशमय महाज्योति स्वरूप दिखाई दे रहा है। *महाज्योति शिव बाबा से आ रही अनन्त शक्तियों की किरणें मुझ ज्योति बिंदु आत्मा पर पड़ रही है और मुझमे अनन्त शक्ति भर रही है*। मेरे शिव पिता परमात्मा से आ रही सतरंगी किरणे मुझ आत्मा में निहित सातों गुणों को विकसित कर रही हैं। देह अभिमान में आ कर, अपने सतोगुणी स्वरूप को भूल चुकी मैं आत्मा अपने एक - एक गुण को पुनः प्राप्त कर फिर से अपने सतोगुणी स्वरूप में स्थित होती जा रही हूँ। *हर गुण, हर शक्ति से मैं स्वयं को सम्पन्न अनुभव कर रही हूँ*।

 

_ ➳  बाबा से आ रही सर्वगुणों, सर्वशक्तियों की शक्तिशाली किरणों का प्रवाह निरन्तर बढ़ता जा रहा है। ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे बाबा अपने इन सर्वगुणों और सर्वशक्तियों को मुझ आत्मा में प्रवाहित कर मुझे आप समान बना रहे हैं। *इन शक्तिशाली किरणों की तपन से विकारों की कट जल कर भस्म हो रही है और मेरा स्वरूप अति उज्ज्वल बनता जा रहा हैं*। सातों गुणों और सर्वशक्तियों से भरपूर, अति उज्ज्वल, स्वरूप ले कर अब मैं आत्मा वापिस साकारी दुनिया मे लौट रही हूँ। साकारी तन में विराजमान हो कर भी अब  मुझ आत्मा के गुण और शक्तियां सदा इमर्ज रूप में रहते हैं।

 

_ ➳  "एक बाप के ही फरमान पर चलना और बाप से ही सुनना" इसे अपने जीवन का मंत्र बना कर अपने शिव पिता परमात्मा के स्नेह में मैं सदा समाई रहती हूँ। सिवाय शिव बाबा की मधुर वाणी के अब और किसी के बोल मेरे कानों को अच्छे नही लगते। *सिवाय श्रीमत के अब किसी की मत पर चलना मुझे ग्वारा नही*। सर्व सम्बन्ध एक बाप के साथ जोड़, अब मैं देह और देह की दुनिया से किनारा कर चुकी हूँ। चलते - फिरते, उठते - बैठते हर कर्म करते बाबा की छत्रछाया के नीचे मैं स्वयं को अनुभव करती हूँ। *कदम - कदम पर बाबा की श्रीमत ढाल बन कर मेरे साथ रहती है और मुझे माया के हर वार से सदा सेफ रखती है*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं बाप के हाथ और साथ की स्मृति से मुश्किल को सहज बनाने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं बेफिक्र वा निश्चिन्त आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा पुरुषार्थ में सदा सच्चाई को धारण करती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा बापदादा की एकस्ट्रा मदद का अनुभव करती हूँ  ।*

   *मैं सत्य स्वरूप आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. *अभी समय के प्रमाण आप हर निमित्त बनी हुईसदा याद और सेवा में रहने वाली आत्माओं को स्व परिवर्तन द्वारा विश्व परिवर्तन का वायब्रेशन पावरफुल और तीव्रगति का बढ़ाना है।* चारों ओर मन का दु:ख और अशान्तिमन की परेशानियां बहुत तीव्रगति से बढ़ रही हैं। *बापदादा को विश्व की आत्माओं के ऊपर रहम आता है। तो जितना तीव्रगति से दु:ख की लहर बढ़ रही है उतना ही आप सुख दाता के बच्चे अपने मन्सा शक्ति सेमन्सा सेवा व सकाश की सेवा से, वृत्ति से चारों ओर सुख की अंचली का अनुभव कराओ।* बाप को तो पुकारते ही हैं लेकिन आप पूज्य देव आत्माओं को भी किसी न किसी रूप से पुकारते रहते हैं। तो *हे देव आत्मायेंपूज्य आत्मायें अपने भक्त आत्माओं को सकाश दो।* साइन्स वाले भी सोचते हैं ऐसी इन्वेन्शन निकालें जो दु:ख समाप्त हो जाएसाधन सुख के साथ दु:ख भी देता है लेकिन दु:ख न होसिर्फ सुख की प्राप्ति हो उसका सोचते जरूर हैं। लेकिन स्वयं की आत्मा में अविनाशी सुख का अनुभव नहीं है तो दूसरों को कैसे दे सकते हैं। लेकिन आप सबके पास सुख का, शान्ति का, नि:स्वार्थ सच्चे प्यार का स्टाक जमा है।

 

 _ ➳  2. जमा की तो खुशी होती है लेकिन खर्च का हिसाब नहीं निकाला तो समय पर धोखा मिल जायेगा। जमा का खाता भी देखो लेकिन साथ-साथ अपने प्रति खर्च कितना किया। *दूसरे को कोई गुण दिया, शक्ति दीज्ञान का खजाना दिया वह खर्च नहीं हैवह जमा के खाते में जमा होता है लेकिन अपने प्रति समय प्रति समय खर्च किया तो खाता खाली हो जाता है।* इसीलिए अच्छे विशाल बुद्धि से चेकिंग करो।

 

✺   *ड्रिल :-  "विश्व की आत्माओं को सुख की अंचली का अनुभव कराना"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा इस साकारी शरीर में... भ्रकुटी के मध्य में विराजमान हूँ... *मैं आत्मा चमकता हुआ सितारा हूँ... उड़ चलता हूँ परमधाम की ओर... मेरे प्रेम के... शांति के... सुख के सागर परमपिता परमात्मा शिव बाबा के पास... उनसे शांति की... शक्ति की... प्रेम की... सुख की रंग - बिरंगी किरणें मुझ आत्मा पर पड़ रही है...* और मैं आत्मा इन शक्तियों से भरपूर हो रही हूँ... मुझ आत्मा के चारों ओर एक शक्तिशाली... आभामंडल बन गया है... जिसका प्रभाव दूर - दूर तक फैल रहा है... अब मैं आत्मा वापस उड़ कर पहुँच जाती हूँ... विश्‍व ग्लोब पर...

 

 _ ➳  मैं आत्मा सुख - शांति का फरिश्ता... विश्‍व के ग्लोब पे विराजमान हूँ... मुझ आत्मा से सुख - शांति और शक्ति की किरणें... निरंतर प्रवाहित हो रही है... *मुझ आत्मा के सम्मुख... विश्व की समस्त दुखी, अशांत और पीड़ित आत्माएँ विराजमान है... और मैं आत्मा इन सब आत्माओं को... सुख की अंचली का अनुभव करा रही हूँ...* सबके दुख दूर कर... सुख का अनुभव करवा रही हूँ... *रहम दिल बाप की... मैं मास्टर रहम दिल संतान... सबकी पीड़ा दूर कर रही हूँ...*

 

 _ ➳  *अभी समय के प्रमाण मैं निमित्त बनी हुई आत्मा... सदा याद और सेवा में रहने वाली आत्मा... स्व परिवर्तन द्वारा विश्व परिवर्तन करने के लिए... पावरफुल वायब्रेशन तीव्रगति से फैला रही हूँ...* मुझ आत्मा के इस वाइब्रेशन के संपर्क में... जो भी आत्मा आ रही है... वो स्वतः ही परिवर्तित हो रही है... और अपने परमपिता की ओर आकर्षित हो रही है...

 

 _ ➳  मैं आत्मा बापदादा से प्राप्त सुख - शांति की शक्तियों को... सारे विश्व में फैला रही हूँ... *विश्व में तीव्रगति से फैल रही दु:ख की लहर को समाप्त करने के लिए... मैं आत्मा सुख दाता की संतान... अपनी मन्सा शक्ति से... मन्सा सेवा से... सकाश की सेवा से... और वृत्ति से चारों ओर सुख की अंचली का सब आत्माओं को अनुभव करा रही हूँ...* मैं पूज्य ईष्ट देवी अपने भक्तों को सुख शांति के वाइब्रेशन दे रही हूँ... उनको वरदानों से भरपूर कर उनका उद्धार कर रही हूँ...

 

 _ ➳  *साइन्स की इन्वेन्शन से निकले साधन... सुख के साथ दुख भी देते हैं... लेकिन मुझ आत्मा के पास परमात्मा से प्राप्त... सच्चा सुख का... शान्ति का... नि:स्वार्थ प्रेम का स्टॉक जमा है... जो सभी आत्माओं को सच्चा सुख और शांति का ही अनुभव करवा रहा है... मैं आत्मा इन जमा शक्तियों को... सर्व आत्माओं के कल्याण के लिए यूज कर रही हूँ... दूसरे को कोई गुण दिया... शक्ति दी... ज्ञान का खजाना दिया... वह खर्च नहीं है... वह जमा के खाते में जमा होता है... लेकिन अपने प्रति समय प्रति समय खर्च किया तो खाता खाली हो जाता है...* इसीलिए अब मैं आत्मा  विशाल बुद्धि से चेकिंग कर... इन खजानों को... बापदादा के बताये अनुसार विश्व कल्याण अर्थ यूज करती हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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