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 07 / 11 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ मुरली सुनकर सुजाग रहे और आत्माओं को सुजाग किया ?

 

➢➢ हद की दुनिया से पार बेहद में जाने का अभ्यास किया ?

 

➢➢ स्वराज्य के संस्कारों द्वारा भविष्य राज्य अधिकार प्राप्त किया ?

 

➢➢ बेहद की वैराग्य वृत्ति को इमर्ज किया ?

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  ✰ अव्यक्त पालना का रिटर्न

         ❂ तपस्वी जीवन

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〰✧  बुद्धि रुपी पांव पृथ्वी पर न रहें। जैसे कहावत है कि फरिश्तों के पांव पृथ्वी पर नहीं होते। ऐसे बुद्धि इस देह रुपी पृथ्वी अर्थात् प्रकृति की आकर्षण से परे रहे। प्रकृति को अधीन करने वाले बनो न कि अधीन होने वाले।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?

 

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अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए

             ❂ श्रेष्ठ स्वमान

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✺   "मैं बाप की याद की छत्रछाया में रहने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ"

 

  सदा अपने को बाप की याद की छत्रछाया में रहने वाली श्रेष्ठ आत्मा अनुभव करते हो? छत्रछाया ही सेफ्टी का साधन है।

 

  इस छत्रछाया से संकल्प में भी अगर पावं बाहर निकलाते हो तो क्या होगा? रावण उठाकर ले जायेगा और शोक वाटिका में बिठा देगा। तो वहाँ तो जाना नहीं है।

 

  सदा बाप की छत्रछाया में रहने वाली, बाप की स्नेही आत्मा हूँ - इसी अनुभव में रहो। इसी अनुभव से सदा शक्तिशाली बन आगे बढ़ते रहेंगे।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?

 

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         रूहानी ड्रिल प्रति

अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं

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✧  जब आप सभी का टाइटल है मास्टर सर्व शक्तिवान, तो जैसा टाइटल है वैसा ही कर्म होना चाहिए ना है मास्टर और शक्ति समय पर काम में नहीं आये - तो कमजोर कहेंगे या मास्टर कहेंगे?

 

✧  तो सदा चेक करो और फिर चेन्ज (परिवर्तन) करो - कौन कौन-सी शक्ति समय पर कार्य में लग सकती है और कौन-सी शक्ति समय पर धोखा देती है? अगर सर्व शक्तियाँ अपने ऑर्डर पर नहीं चलती तो क्या विश्व राज्य अधिकारी बनेंगे?

 

✧  विश्व राज्य अधिकारी वही बन सकता है जिसमें कन्ट्रोलिंग पॉवर, रूलिंग पॉवर हो। पहले स्व पर राज्य, फिर विश्व पर राज्य स्वराज्य अधिकारी जब चाहे, जैसे

चाहे वैसे कन्ट्रोल कर सकते हैं। (पार्टियों के साथ)

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?

 

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         ❂ अशरीरी स्थिति प्रति

अव्यक्त बापदादा के इशारे

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〰✧   फ़रिशतो को फ़र्श की कभी आकर्षण नहीं होती है। अभी-अभी आया और गया। कार्य समाप्त हुआ फिर ठहरते नहीं। आप लोगों ने भी कार्य के लिए व्यक्त का आधार लिया, कार्य समाप्त किया फिर अव्यक्त एक सेकेण्ड में। यह प्रैक्टिस हो जाये फिर फ़रिश्ते कहलायेंगे।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺ "ड्रिल :- बाप से रूहानी हुनर सीखना"

➳ _ ➳ मैं आत्मा सरोवर के किनारे बैठ पानी में अपने प्रतिबिम्ब को निहारती हुई अपने अंतर्मन के सरोवर में डूब जाती हूँ... और अपने निज स्वरुप को निहारती हूँ... चमकते हीरे समान तेज दिव्य स्वरुप है मेरा... जिसको भूल मैं आत्मा अपने को देह समझ देह के सर्व बन्धनों में फंस गई थी... अपने निज गुणों को भूलकर अवगुणों को धारण कर ली थी... अब परमप्रिय परमपिता परमात्मा इस संगम युग में अपने संग के रंग में रंग कर मुझे फिर से देवता बना रहे हैं... मैं आत्मा उड़ते हुए प्यारे बाबा के पास पहुँच जाती हूँ... प्यारे बाबा से श्रीमत पर सर्वगुण संपन्न देवता बनने और बनाने का हुनर सीखने...

❉ श्रीमत पर सबकी रूहानी खातिरी करने का हुनर सिखाते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:- मेरे मीठे फूल बच्चे... जिस परमात्मा को इतना पुकारा वह कितना सहज जीवन में मौजूद है यह कितनी बड़ी ख़ुशी है जागीर है... यह ईश्वर प्राप्ति की ख़ुशी की दौलत अपने चेहरे और चलन से हर पल छ्लकाओ... जो ईश्वरीय खजाना सहजता से यूँ पा लिए हो उस खजाने की झनकार जमाने को भी सुनाओ...

➳ _ ➳ खुशी की खुराक खाती और सर्व को खिलाती मैं आत्मा कहती हूँ:- हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... मै आत्मा श्रीमत का हाथ थामे आपसे पायी अनन्त खुशियो को हर दिल आत्मा पर उंडेल रही हूँ... अपने पिता से सेवा का हुनर सीख सच्ची रूहानी सेवा कर रही हूँ... आपसे पायी अथाह ख़ुशी के प्रकम्पन्न पूरे विश्व में फैला रही हूँ...

❉ मीठे बाबा देवताई गुणों से 16 श्रृंगार कर मुझे सजाते हुए कहते हैं:- मीठे प्यारे लाडले बच्चे... विश्व पिता की गोद में बैठे हो उसके दिल तख्त पर मुस्करा रहे... जिस भाग्य की कभी कल्पना भी न कर सके... वह भाग्य जीवन का सुंदर सच बनकर सम्मुख है... सच्ची ख़ुशी का पर्याय ईश्वरीय बाँहों में ही है... अपनी रूहानी चलन से यह ईश्वरीय अमीरी सबको दिखाओ...

➳ _ ➳ मन मधुबन को सच्चा हीरा बनाने के लिए बाबा का शुक्रिया करते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:- मेरे प्राणप्रिय बाबा... ईश्वरीय यादो में खुशियो की अपार दौलत मुझ आत्मा ने पायी है.. कितना सुख कितनी शांति कितनी ख़ुशी की अनुभवी हूँ... मै आत्मा जनमो बाद सच्ची मुस्कराहट को जी पायी हूँ... और श्रीमत को साथ लिए सबके होठो पर यह मुस्कराहट सजा रही हूँ...

❉ मेरे बागबान बाबा सुन्दर रूहानी बगीचे का निर्माण कर सेवा की जिम्मेवारी मुझे सौंपते हुए कहते हैं:- प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... श्रीमत के साथ पूरे विश्व की रूहानी सेवा कर सबको महा भाग्यशाली बनाओ... सबको अपने साथ की सच्ची खुशियो का भागीदार बनाओ और ईश्वर पिता के कन्धों पर चढ़ मुस्कराओ... दुखो से कुम्हलाये मेरे हर फूल को खुशियो का पानी देकर खिला आओ...

➳ _ ➳ बाबा की पालना और शिक्षाओं से रूहे गुलाब बन जहाँ में खुशबू फैलाकर सबके जीवन को सजाते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:- हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा आपकी श्रीमत की सुखमय राहो पर चलकर सच्चे सुख और सच्चे प्यार की गहरी अनुभवी होकर... अनुभव की दौलत सबको बाँट रही हूँ... आपके मीठे प्यार में सबके दुखो को दूर करने वाली जादूगर बन गई हूँ...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺ "ड्रिल :- बाप से साइलेन्स का हुनर सीखकर इस हद की दुनिया से पार बेहद में जाना है"

➳ _ ➳ आत्म चिंतन में मग्न हो कर मैं विचार करती हूं कि भगवान द्वारा दिये जा रहे इस ईश्वरीय ज्ञान का सार यही है कि "मुझे बिंदु बन बिंदु बाप के साथ वापिस जाना है तो क्या मेरा सेकण्ड में बिंदु बनने का अभ्यास पक्का हो गया? क्या मैंने विस्तार को सार में समा लिया? मन ही मन स्वयं से मैं बातें कर रही हूं।

➳ _ ➳ एकाएक मैं अनुभव करती हूं जैसे मैं बहुत सारी जंजीरो में बंधी हुई है। उन जंजीरों से छूटने के लिए छटपटा रही हूं। मेरा दम घुट रहा है लेकिन मैं उन जंजीरों को तोड़ पाने में स्वयं को असमर्थ अनुभव कर रही हूँ। बहुत प्रयास कर रही हूं उन्हें तोड़ने का। तभी कानो में मीठी मधुर आवाज आती है, मीठे बच्चे:- "घबराओ मत, ये जंजीरे साइंस के साधनों की जंजीरे हैं जिन्हें सारी दुनिया सुख के साधन समझने की भूल किये बैठी है" अंत समय मे ये सब साधन धोखा देने वाले हैं। इनसे छूटने का एक ही उपाय है। बस अशरीरी बन जाओ। ये सब जंजीरे स्वत: टूट जायेंगी।

➳ _ ➳ तभी मुझे अनुभव होता है जैसे महाज्योति शिव बाबा मेरे सिर के बिल्कुल ऊपर आ कर स्थित हो गए हैं और अपनी सर्वशक्तियों की शक्तिशाली किरणे पूरे वेग के साथ मुझ पर प्रवाहित कर रहें हैं। इन शक्तिशाली किरणों की शक्ति से एक एक करके सभी जंजीरे टूट रही हैं। देह का भान ही समाप्त हो गया है। केवल एक चमकता हुआ सितारा दिखाई दे रहा है। अब मैं अशरीरी स्थिति में स्थित हो कर अपने सत्य स्वरूप का स्पष्ट अनुभव कर रही हूं। मेरे सत्य स्वरुप का अनुभव मुझ आत्मा में निहित गुणों और शक्तियों को स्वत: ही इमर्ज कर रहा है। अब मैं अपने शांत स्वधर्म में स्थित हो चुकी हूं। दुनियावी साधनों के हर आकर्षण से अब मैं परे हूँ।

➳ _ ➳ अपनी इसी शांत चित्त स्थिति में स्थित मैं अशरीरी आत्मा अब हल्की हो कर ऊपर की औऱ उड़ रही हूँ। इस भौतिक जगत को पार करके, सूक्ष्म लोक से भी परे अब मैं पहुंच गई शान्तिधाम में, शांति के सागर अपने शिव पिता परमात्मा के पास। इस शान्तिधाम में फैले हुए शांति के शक्तिशाली प्रकम्पन मुझ आत्मा को गहन शांति की अनुभूति करवा रहें हैं। मेरे शिव पिता परमात्मा से आ रहा शान्ति की शक्तियों का फव्वारा मुझ पर बरस रहा है और इस फव्वारे की मीठी फुहारें मुझे अंदर तक रोमांचित कर रही हैं। शांति का बल मुझ आत्मा में पूरी तरह भर गया है।

➳ _ ➳ शांति की शक्ति से भरपूर हो कर मैं फिर से भौतिक जगत में लौट आई हूँ और पांच तत्वों की बनी देह में आ कर फिर से विराजमान हो गई हूं। मेरे अंदर जमा किया हुआ साइलेन्स का बल अब मुझे साइंस पर विजय दिला रहा है। जैसे साइन्स के साधन सेकण्ड में अंधकार से रोशनी कर देते हैं ऐसे ही साइलेन्स की शक्ति द्वारा सेकेंड में स्मृति का स्विच ऑन कर, मास्टर ज्ञानसूर्य बन अपनी सर्वशक्तियों की किरणों द्वारा मैं अज्ञान अंधकार में भटक रही आत्माओं को ज्ञान की रोशनी दे कर उन्हें भटकने से छुड़ा रही हूं। चलते फिरते हर कर्म करते अशरीरी पन के अभ्यास द्वारा, बाबा की याद में रह शांति के शक्तिशाली वायब्रेशन वायुमण्डल में फैला कर मैं सबको शांति की अनुभूति करवा रही हूं।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺  मैं स्वराज्य के संस्कारों द्वारा भविष्य राज्य अधिकार प्राप्त करने वाली तकदीरवान आत्मा हूँ ।

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺ मैं सकाश देने की सेवा करने के लिए बेहद की वैराग्य वृत्ति को इमर्ज करने वाली आत्मा हूँ ।

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  बापदादा बच्चों का प्यार भी देखते हैंकितने प्यार से भाग-भाग कर मिलन मनाने पहुंचते हैं और फिर आज हाल में भी मिलन मनाने के लिए कितनी मेहनत से, कितने प्यार से नींद, प्यास को भूलकर पहले नम्बर में नजदीक बैठने का पुरुषार्थ करते हैं। बापदादा सब देखते हैंक्या-क्या करते हैं वह सारा ड्रामा देखते हैं। बापदादा बच्चों के प्यार पर न्योछावर भी होते हैं और यह भी बच्चों को कहते हैं जैसे साकार में मिलने के लिए दौड़-दौड़ कर आते हो ऐसे ही बाप समान बनने के लिए भी तीव्र पुरुषार्थ करो, इसमें सोचते हो ना कि सबसे आगे ते आगे नम्बर मिले। सबको तो मिलता नहीं हैयहाँ साकारी दुनिया है ना! तो साकारी दुनिया के नियम रखने ही पड़ते हैं।

 

 _ ➳  बापदादा उस समय सोचते हैं कि सब आगे-आगे बैठ जाएं लेकिन यह हो सकता हैहो भी रहा है, कैसे? पीछे वालों को बापदादा सदा नयनों में समाया हुआ देखते हैं। तो सबसे समीप हैं नयन। तो पीछे नहीं बैठे हो लेकिन बापदादा के नयनों में बैठे हो। नूरे रत्न हो। पीछे वालों ने सुनादूर नहीं होसमीप हो। शरीर से पीछे बैठे हैं लेकिन आत्मा सबसे समीप है। और बापदादा तो सबसे ज्यादा पीछे वालों को ही देखते हैं। देखो नजदीक वालों को इन स्थूल नयनों से देखने का चांस है और पीछे वालों को इन नयनों से नजदीक देखने का चांस नहीं है इसलिए बापदादा नयनों में समा लेता है। 

 

 _ ➳  बापदादा मुस्कराते रहते हैंदो बजता है और लाइन शुरू हो जाती है। बापदादा समझते हैं कि बच्चे खड़े- खड़े थक भी जाते हैं लेकिन बापदादा सभी बच्चों को प्यार का मसाज कर लेते हैं। टांगों में मसाज हो जाता है। बापदादा का मसाज देखा है ना - बहुत न्यारा और प्यारा है।

 

 _ ➳  बाप से मिलन का उमंग-उत्साह सदा आगे बढ़ाता है। लेकिन बापदादा तो बच्चों को एक सेकण्ड भी नहीं भूलता है। बाप एक है और बच्चे अनेक परन्तु अनेक बच्चों को भी एक सेकण्ड भी नहीं भूलते क्योंकि सिकीलधे हो।

 

✺   ड्रिल :-  "डायमंड हॉल में स्थूल में पीछे बैठने के बावजूद सूक्ष्म में बाबा की नयनों में बैठ प्रभु मिलन के असीम सुख का अनुभव करना "

 

 _ ➳  आज की यह स्वर्णिम सुबह, आज का यह स्वर्णिम दिवस ये मुझ आत्मा के जीवन की वो सुनहरी अनमोल घड़ी है जब मुझ आत्मा का इस संसार की सर्वोच्च सता से मिलन होने जा रहा है... मैं जगमगाती झिलमिलाती आत्मा सितारा स्वयं को प्रभु अवतरण भूमि मधुबन घर में देख रही हूँ... मुझ जगमगाती आत्मा की जीवन रुपी किताब का वो पन्ना जो प्रभु प्यार के रंग से रंगा है... उसकी साथ की हसीन अनुभवों से सजा है... आज वो पन्ना खुल गया हैं... मैं आत्मा आज साकार में प्रभु मिलन करने वाली हूँ... रंगने वाली हूँ आज उस एक के रंग में.... मीठे से मेरे बाबा की यादों में गुनगुनाती, मीठे बाबा की याद की लहरों में लहराती, इस दिल को थामे जिसकी एक-एक धड़कन गा रही है... बाबा ओ मेरे मीठे प्यारे बाबा आ जाओ ना मीठे बाबा... आज तो जैसे उसकी यादों की बाढ़ आ गयीं हो, और मैं आत्मा उसमें बहती जा रही हूँ... बहती जा रही हूँ... ना तन का भान है, ना देह की स्मृति भूल चुका है ये संसार, भूल चुकी है देह, एक-एक पल, एक-एक सांस में बस उस एक की याद हैं... बेचैन है ये नैन बाबा की एक झलक पाने को... नैन बेचैन है... बस उसके दीदार को... जैसे-जैसे समय बीत रहा है... दिल में बाबा की यादों का सैलाब बढ़ता जा रहा है... ये दिल खुशी में गुनगुना रहा है...

 

 _ ➳  झिलमिल सितारे बन कर... उड़ के वतन में जाए, जाके परमपिता से मंगल मिलन मनाये... आज तो लग रहा है जैसे मधुबन की हर गली बोल उठी हो... और ये प्रकृति भी जैसे झूम रही हो, गा रही हो... मंद-मंद चलती ये रूहानी हवायें भी जैसे सिर्फ उसके ही आने का पैगाम दे रही हो...  दोपहर दो बजे का यह समय है... मैं आत्मा ध्यान से देख रही हूँ... बेहद डायमंड हाल को बस कुछ समय में ही मेरे लाडले बाबा यहाँ आने वाले है... कितनी हंसीन वो घड़ी होगी... मन ही मन बाबा से मीठी-मीठी बातें करती हुई देख रही हूँ... उन सभी आत्माओं को जो दूर-दूर से उमंग-उत्साह के साथ प्रभु मिलन के लिए आई है... कितनी बेचैन है प्रभु मिलन मनाने को... उसके प्यार में समाने को कैसे आत्माएँ सब छोड़ उसके समीप बैठने को कितने उंमग से लाइनों में लगी, डायमण्ड हाल में सबसे आगे बाबा के नजदीक बैठने के पुरुषार्थ में लग गए है... सभी दिव्य फरिश्तों को देख रही हूँ मैं आत्मा, एक-एक आत्मा प्रभु मिलन की प्यासी उस एक से मिलने को बेताब है... ऐसा लग रहा है जैसे चारों ओर दिव्य फरिश्तों का मेला लगा है... कितना अदभुत ये दृश्य है... मैं आत्मा भी बाबा के समीप आगे बैठने के पुरूषार्थ में खुशी-खुशी लग जाती हूँ... लेकिन देखते ही देखते सारा हाल भर गया है... प्रभु प्यारों से... साढे छहः बजे का ये समय है... ऐसा लग रहा है मानों दिव्य फरिश्तों की महफिल लगी हुई हैं...

 

 _ ➳  सभी दिल थाम कर, दिल में प्रभु प्यार लिए बैठे है... बाबा के इन्तजार में, मैं आत्मा भी हाल की सबसे आखरी पंक्ति में बैठ जाती हूँ... और वहाँ से इस हाल का अदभुत नजारा देखते मन ही मन बाबा से बातें करती, बडे ध्यान से उस स्टेज को देख रही हूँ... जो यहाँ से बहुत दूर नजर आ रहा हैं... जहाँ मेरे मीठे बाबा आने वाले है... और सोच रही हूँ बाबा तो यहाँ से काफी दूर बैठेंगा... पता नहीं बाबा की नजर यहाँ पीछे पड़ेगी या नहीं... और कहती हूँ मीठे बाबा मुझे भी नजदीक बैठना था... बस इतना कह प्यार भरी नजरों से बाबा को देखती हूँ दिल को थामे खुद को मनाती हूँ... और फिर मिलन की खुशी में मशगुल हो जाती हूँ... अब मैं आत्मा बाबा का आवाहन कर रही हूँ... उड़ चली मैं आत्मा परमधाम आमंत्रण देने  प्यारे बाबा को मेरे प्यारे बाबा आ जाओ... मेरे दिल के दिलाराम... इस दिल की भूमि पर चले आओ... इस मन के आंगन में चले आओ बाबा, बेचैन है नैन आज तेरा दीदार करने को, बस और इंतजार ना कराओ बाबा... देख रही हूँ मैं आत्मा बाबा मेरे साथ नीचे उतर रहे है... वह ज्योति- महाज्योति धीरे-धीरे सूक्ष्म वतन में पहुंच शिव बाबा ब्रह्मा तन में प्रवेश कर रहे हैं... और मैं आत्मा अपने सूक्ष्म शरीर में... बापदादा नीचे उतर रहे हैं कितना अद्भुत दृश्य है यह... कितना भाग्य है मेरा जो भगवान को धरती पर आते हुए देख रही हूं... दादी के तन में बाबा की पधरामणि चारों ओर डेड साइलेंस... एक बेआवाज़ चुप्पी... सभी आत्माएँ ये अदभुत दृश्य देख रही है... अव्यक्त बापदादा दृष्टि दे रहे हैं सबसे पहले बाबा की दृष्टि मुझ आत्मा पर पड़ती है... मुझ आत्मा की आँख भर आती है... बाबा का ये प्यार देख कर और लग रहा है... जैसे बाबा कह रहे हो सिकीलधे बच्चे पीछे नहीं बैठे हो... आप तो बाबा के नयनों में समाए हो...

 

 _ ➳  जैसे ही बाबा की दृष्टि मुझ आत्मा पर पड़ती है... एक दिव्य दृष्टि की प्रवेशता मुझ आत्मा में हो रही हैं... उसकी एक नजर ने ही मुझे निहाल कर दिया हैं... अब देख रही हूँ मैं आत्मा नजदीक से बाबा की इन सागर जैसे रूहानी नैनों को जिसमें कितना प्यार समाया है... कैसा जादू, कैसा जलवा इन नैनों में समाया है... सारी दूरियाँ खत्म हो गयीं है... साकार में दूर बैठे भी बाबा के बेहद पास हूँ... बाबा ने मुझे अपने नैनो में समा लिया है... बाबा की आंखों से प्यार बरस रहा है... नूर बरस रहा है... और बाबा की प्यार भरी दृष्टि की अविरल धाराएँ बह रही है जिसमें मैं आत्मा भीग गई हूँ... रंग गई हूँ उस एक के रंग में... अपलक नयनों से मैं मीठे बाबा से दृष्टि ले रही हूँ... कैसी वरदानी दृष्टि हैं ये बाबा की, बाबा ने सर्व वरदानों शक्तियों से मुझ आत्मा को सजा दिया हैं... स्वयं को बाबा के बेहद करीब नैनों में समाया हुआ अनुभव कर रही हूँ, मैं नूरे रत्न आत्मा... अपने नैनों में समाकर बाबा ने, अपने प्यार की मसाज कर दी है... खुशी है उमंग है उत्साह है... स्थूल में नहीं बैठे लेकिन स्वयं को बाबा के दिलतख्त पर बैठे अनुभव कर रही हूँ मैं खुशनसीब आत्मा... दिल अब यही गा रहा हैं पाना था सो पा लिया....

 

 _ ➳  बाबा मुरली चला रहे हैं... देख रही हूं मैं गोपिका उस गोपीवल्लभ को कैसे वो बोलता है... कैसे उसके नैन बोल रहे हैं... एकटक होकर सिर्फ और सिर्फ उस मुरलीधर को मैं गोपिका देख रही हूं... सुन रही हूँ और खो गई हूँ... रंग गई हूँ... और बह रही हूँ, उसके मुरली की अविरल धाराओं में... सुध-बुध खो बस उसको ही देखे जा रही हूँ... ज्ञान की बरसात हो रही है... इस ज्ञान बरसात में भीगकर मैं आत्मा भी ज्ञान स्वरूप बन गयीं हूँ... मुरली पूरी हुई... अब मैं आत्मा देख रही हूँ... इस संसार की महान हस्तियों का मिलन दूसरी महान हस्ती से, दादीयाँ, वरिष्ठ भाई बाबा से मिल रहे है... मैं आत्मा भी उनके साथ बाबा से मिल रही हूँ... कितना प्यार कर रहा है मीठा बाबा... बहुत करीब से प्यार के सागर को देख रही हूँ... ये प्यार देख मुझ आत्मा के नयन सजल हो रहे है... सब कुछ भूल गया है समा गयी हूँ सिर्फ उस एक के प्यार में, बाबा को गुलदस्ते भेंट किए जा रहे है...

 

 _ ➳  मैं आत्मा भी बाबा को रंगबिरंगा गुलदस्ता भेंट रही हूँ... और देख रही हूँ मैं आत्मा बाबा के इन रुहानी नैनों को, इन खामोश निगाहों को देख रही हूँ जिसमें बेहद प्यार समाया हैं... जो खामोश होकर भी बहुत कुछ कह रहे है... तुम सा हंसीन बाबा कोई नहीं जहाँ में... अब बाबा मुझ अपने हाथों से टोली खिला रहे है... नयन बस उस पर टिक गये है... और दिल कह रहा है... कौन करेगा ऐसा प्यार... ओ मेरे मीठे बाबा, प्यारे बाबा... मेरे दिल की धड़कन मेरे बाबा... कहाँ मिलेगा बाबा ऐसा सतयुग में तेरा प्यार... अपने हाथ से दृष्टि देकर... हम सब बच्चों को हमारे दिलाराम बाबा अपने हाथ से टोली खिला रहे है... कैसा अदभुत मंजर है ये... स्वयं परमसत्ता टोली खिला रहा है... देख रही हूँ मैं आत्मा कैसे वो हंसता है... कैसे उसके ये नयन बोल रहे है... कैसा अजब सा जादू इन नयनों में हैं... कितना प्यार लुटा रहा है बाबा कैसी लीलाएँ वो मुरलीधर वो दिलाराम कर रहा है... देखा है तुमको बाबा रूहों से प्यार करते... बाबा विदाई ले रहा है... देख रही हूँ... उसकी साक्षी स्थिति, उसका अनासक्त भाव एक तरफ वो प्यार लुटा रहा है... और अब ऐसे विदा हो रहा है जैसे यहाँ था ही नहीं... लग रहा है जैसे यूं ही बाबा सामने बैठा रहे और मैं गोपिका उसे ही देखती रहूँ... कह रही हूँ... ना जाओ बाबा यहीं रह जाओ... ना जाओ मीठे बाबा... अभी ना जाओ छोड कर के दिल अभी भरा नहीं अभी-अभी तो आये हो... आया था बाबा हमें अपने रंग में रंगने... वरदान अपना प्यार लुटाने आप समान बनाने... बाबा ने मुझ आत्मा को भरपूर कर दिया है सर्व शक्तियों, वरदानों से मुझ आत्मा को सजा दिया है... अब बस रह गयी हैं... उसकी अनमोल यादें और शिक्षाएँ, देख रही हूँ, मैं आत्मा स्वयं को बाबा की शिक्षाओं को स्वरूप में लाते अब मुझ आत्मा का पुरुषार्थ तीव्र हो गया है... मैं बाबा की नूरे रत्न आत्मा बाबा के कदम पर कदम रख बाप समान बनने और फर्स्ट नम्बर लेने के पुरुषार्थ में जुट गयीं हूँ... और हर पल स्वयं को मीठे बाबा के नयनों में समाया हुआ अनुभव कर रही हूँ... बाबा से मिले खजाने को सभी आत्माओं में बांट रही हूँ... वरदानी मूर्त बन उन्हें भी वरदानों, शक्तियों से सजाकर आप समान बना रही हूँ... ओम शांति... शुक्रिया मीठे बाबा शुक्रिया...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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