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 08 / 03 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *"हम संगमयुगी ब्राह्मण देवताओं से भी उंच हैं" - सदा नशा रहा ?*

 

➢➢ *जो बाप समझाते हैं सिर्फ वही बुधी में रखा ?*

 

➢➢ *माया की छाया से निकल याद की छत्रछाया में रहे ?*

 

➢➢ *समझ के स्क्रू ड्राईवर से अलबेलेपन ले लूज़ स्क्रू को टाइट कर सदा अलर्ट रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *जो बच्चे परमात्म प्यार में सदा लवलीन, खोये हुए रहते हैं उनकी झलक और फलक, अनुभूति की किरणें इतनी शक्तिशाली होती हैं जो कोई भी समस्या समीप आना तो दूर लेकिन आंख उठाकर भी नहीं देख सकती।* उन्हें कभी भी किसी भी प्रकार की मेहनत हो नहीं सकती ।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं संगमयुगी श्रेष्ठ ब्राह्मण आत्मा हूँ"*

 

  सदा अपने को संगमयुगी श्रेष्ठ ब्राह्मण आत्मायें हैं, ऐसे समझते हो! ब्राह्मणों को सदा ऊँची चोटी की निशानी दिखाते हैं। ऊँचे ते ऊँचा बाप और ऊँचे ते ऊँचा समय तो स्वयं भी ऊँचे हुए। *जो सदा ऊँची स्थिति पर स्थित रहते हैं वह सदा ही डबल लाइट स्वयं को अनुभव करते हैं। किसी भी प्रकार का बोझ नहीं। न सम्बन्ध का, न अपने कोई पुराने स्वभाव संस्कार का। इसको कहते हैं सर्व बन्धनों से मुक्त।*

 

  ऐसे - फ्री हो? सारा ग्रुप निर्बन्धन ग्रुप है। आत्मा से और शरीर के सम्बन्ध से भी। निर्बन्धन आत्मायें क्या करेंगी? सेन्टर सम्भालेंगी ना। तो कितने सेवाकेन्द्र खोलने चाहिए। टाइम भी है और डबल लाइट भी हो तो आप समान बनायेंगी ना! *जो मिला है वह औरों को देना है। समझते हो ना कि आज के विश्व की आत्माओंको इसी अनुभव की कितनी आवश्यकता है! ऐसे समय पर आप प्राप्ति स्वरुप आत्माओंका क्या कार्य है! तो अभी सेवा को और वृद्धि को प्राप्त कराओ।*

 

  ट्रीनीडाड वैसे भी सम्पन्न देश है तो सबसे ज्यादा संख्या ट्रीनीडाड सेन्टर की होनी चाहिए। आसपास भी बहुत एरिया है, तरस नहीं पड़ता? *सेन्टर भी खोलो और बड़े-बड़े माइक भी लाओ। इतनी हिम्मत वाली आत्मायें जो चाहे वह कर सकती हैं। जो श्रेष्ठ आत्मायें हैं उन्हों द्वारा श्रेष्ठ सेवा समाई हुई है।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *हर खजाने को चेक करो - ज्ञान का खजाना अर्थात जो भी संकल्प, कर्म किया वह नॉलेजफुल हो करके किया?* साधारण तो नहीं हुआ? योग अर्थात सर्व शक्ति का खजाना भरपूर हो।

 

✧  तो चेक करो हर दिन की दिनचर्या में समय प्रमाण जिस शक्ति की आवश्यकता है, उसी समय वह शक्ति ऑर्डर में रही? *मास्टर सर्वशक्तिवान का अर्थ ही है मालिक।*

 

✧  ऐसे तो नहीं समय बीतने के बाद शक्ति का सोचते ही रह जाएं। *अगर समय पर ऑर्डर पर शक्ति इमर्ज नहीं होती, एक शक्ति को भी अगर ऑर्डर में नहीं चला सकते तो निर्विघ्न राज्य के अधिकारी कैसे बनेंगे?*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *यह अव्यक्त मिलन अव्यक्त स्थिति में स्थित होकर ही मना सकते हो । अव्यक्त स्थिति का अनुभव कुछ समय लगातार करो तो ऐसे अनुभव होंगे जैसे साइन्स द्वारा दूर की चीजें सामने दिखाई देती है। ऐसे ही अव्यक्त वतन की एक्टिविटी यहाँ स्पष्ट दिखाई देगी।* बुद्धि बल द्वारा अपनी सर्व शक्तिवान के स्वरूप का साक्षात्कार कर सकते हैं।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- विचार सागर मंथन कर सब जगह भाषण के लिए एक ही टॉपिक निकालना"*

 

_ ➳  मीठे बाबा ने जब से मेरा हाथ पकड़ा हैं, मुझे अपना बनाया हैं... *जीवन फूलो से महकने लगा है... चलते फिरते बस यही विचार रहता हैं कि कैसे मै ज्ञान रत्नों का अलग अलग तरह से विचार सागर मंथन करू...* जन्मो से प्यासी आत्मा को बाबा का हाथ और साथ मिलेगा... ये तो स्वप्नों में भी सोचा ना था... *आज मीठे बाबा को पाकर मैं आत्मा अमीर बन गईं हूँ सही मायने में... बाबा की प्रत्यक्षता की सर्विस की नई नई युक्तियाँ मन मे सजाकर... मैं आत्मा उड़ चली सूक्ष्म वतन बाबा को सब बताने... हाले दिल सुनाने* ...

 

  *मेरे प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को विचार सागर मंथन के गहरे राज बताते हुए कहा:-* "मीठे सिकीलधे बच्चे... *मुझ बाप का संग बहुत वरदानी हैं... इसको हर हाल मे सफल बनाना है... चलते फ़िरते हर कर्म में बाप को याद रख, सर्विस की नई नई युक्तियाँ निकालनी हैं...* समर्थ चितंन से बाप को, बाप की याद को सफल बनाना है... सच्ची कमाई से देवताई अमीरी को पाना हैं..."

 

_ ➳  *मै आत्मा बाबा को पूरे हक से, अधिकार से कहती हूं :-* "मेरे प्यारे मीठे बाबा... *आपने अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रख कर, मुझे ज्ञानरत्नो से भरपूर किया हैं* ... नए नए सर्विस की युक्तिओ से नवाजा हैं... इस सच्ची कमाई को ग्रहण कर मैं पूरे विश्व मे बाँट रही हूं... सभी आत्माओ की रूहानी सर्विस कर रही हूँ..."

 

  *परमपिता ने मुझे स्वर्ग के सुखों को याद दिलाते हुए कहा:-* "मेरे प्यारे, नैनो के तारे बच्चे... *किस्मत ने अति उत्तम दिन दिखाया हैं... स्वयम भगवान को हर सम्बन्ध में मिलवाया हैं... तो अब सच्ची कमाई करो* ... चलते फिरते बस एक बाबा की याद... दूसरा न कोई... सार्थक कर लो ये जीवन, हर सांस मे पिरो लो बाबा का प्यार... इतनी सर्विस की युक्तियाँ निकालो की... 21जन्मो के लिए भरपूर हो जाओ..."

 

_ ➳  *मैं आत्मा बाबा की वसीयत, वर्सा की हकदार बनते हुए बाबा को कहती हूं :-* "प्राणों से भी प्यारे मेरे बाबा... *मै आपकी याद में सदा खोई हुई... प्यार के झूले में झूलती हुई, हर क्षण बस आपको याद कर आनन्दित हो रही हूँ* ... हर पल अन्य आत्माओ को भी आप से जुड़ने की नई नई युक्तियाँ बता कर... खुद को भाग्यशाली बना रही हूँ..."

 

  *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को बड़े प्यार से निहारते हुए कहा:-* "मीठे मीठे बच्चे... इस संगम की मौज में, बाबा की सर्विस से... *धनवान बन जाओ... एक पल भी बाबा की याद ना छोड़ो... सच्ची कमाई करो और कराओ... यादों की कमाई से देवताओ की तरह सम्पन्न बन जाओ* ... भरपूर होकर 21 जन्मो तक मौज मनाओ... हर कर्म करते हुए बुद्धि योग मुझ बाप संग लगाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा बाबा से सम्पूर्ण ज्ञान खजाने बटोरते हुए, सारे विश्व की मालिक बन कहती हूं:-* प्यारे बाबा... "हमेशा से आपने मुझ आत्मा को महारानी का ताज पहनाया हैं... *मुझ आत्मा को चलते फिरते, रूहानी सर्विस करने के निमित्त बनाया हैं* ... कर्म करते आप को याद रखने की शक्ति दी हैं... इस तरह रूह रिहान कर मै आत्मा वापिस अपने लौकिक वतन आ जाती हूं..."

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- सदा नशा रहे कि हम संगमयुगी ब्राह्मण देवताओ से भी ऊंच है क्योंकि अभी हम ईश्वरीय औलाद हैं*"

 

_ ➳  अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित मैं आत्मा मन ही मन विचार करती हूँ कि कितनी पदमापदम सौभाग्यशाली हूँ मैं आत्मा कि *जिस ब्राह्मण सम्प्रदाय को भक्ति में सबसे ऊंच माना जाता है वो सच्ची ब्राह्मण आत्मा मैं हूँ जिसे स्वयं परम पिता परमात्मा ने आ कर ब्रह्मा मुख से अडॉप्ट करके ईश्वरीय सम्प्रदाय का बनाया है*। मैं वो कोटो में कोई और कोई में भी कोई सौभाग्यशाली आत्मा हूँ जिसे स्वयं भगवान ने चुना है।

 

_ ➳  बड़े - बड़े महा मण्डलेशवर, साधू सन्यासी जिस भगवान की महिमा के केवल गीत गाते हैं लेकिन उसे जानते तक नही, वो भगवान रोज मेरे सम्मुख आकर मेरी महिमा के गीत गाता है। *रोज मुझे स्मृति दिलाता है कि "मैं महान आत्मा हूँ" "मैं विशेष आत्मा हूँ" "मैं इस दुनिया की पूर्वज आत्मा हूँ"। *"वाह मेरा सर्वश्रेष्ठ भाग्य" जो मुझे घर बैठे भगवान मिल गए और मेरे जीवन मे आकर मुझे नवजीवन दे दिया*। उनका निस्वार्थ असीम प्यार पा कर मेरा जीवन धन्य - धन्य हो गया। इस जीवन में अब कुछ भी पाने की इच्छा शेष नही रही। जो मैंने पाना था वो अपने ईश्वर, बाप से मैंने सब कुछ पा लिया है।

 

_ ➳  अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य की स्मृति में खोई हुई मैं अपने भाग्य को बदलने वाले भाग्यविधाता बाप को जैसे ही याद करती हूँ वैसे ही मेरे भाग्यविधाता बाप मेरे सामने उपस्थित हो जाते हैं। *अपने लाइट माइट स्वरूप में भगवान जैसे ही मुझ ब्राह्मण आत्मा पर दृष्टि डालते हैं उनकी पावन दृष्टि मुझे भी लाइट माइट स्वरूप में स्थित कर देती है और डबल लाइट फ़रिश्ता बन मैं चल पड़ती हूँ बापदादा के साथ इस साकारी लोक को छोड़ सूक्ष्म लोक में*। बापदादा के सामने मैं फ़रिश्ता बैठ जाता हूँ।

 

_ ➳  बापदादा की मीठी दृष्टि और उनकी सर्वशक्तियों से स्वयं को भरपूर करके मैं अपने जगमग करते ज्योतिर्मय स्वरूप को धारण कर अपने परमधाम घर की ओर चल पड़ती हूँ। *सेकण्ड में मैं आत्मा पहुँच जाती हूँ अपने घर मुक्तिधाम में। यहां मैं परम मुक्ति का अनुभव कर रही हूँ। मैं आत्मा शांति धाम में शांति के सागर अपने शिव पिता परमात्मा के सम्मुख गहन शान्ति का अनुभव कर रही हूँ*। मेरे शिव पिता परमात्मा से सतरंगी किरणे निकल कर मुझ आत्मा पर पड़ रही हैं और मैं स्वयं को सातों गुणों से सम्पन्न अनुभव कर रही हूँ। शिव बाबा से अनन्त शक्तियाँ निकल कर मुझ में समाती जा रही हैं। कितना अतीन्द्रिय सुख समाया हुआ है इस अवस्था में।

 

_ ➳  बीज रूप अवस्था की गहन अनुभूति करने के बाद अब मैं आत्मा वापिस लौट आती हूँ अपने साकारी ब्राह्मण तन में और भृकुटि पर विराजमान हो जाती हूँ। *अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित मैं आत्मा अब सदा इसी नशे में रहती हूँ कि मैं सबसे उंच चोटी की हूँ, ईश्वरीय सम्प्रदाय की हूँ*। आज दिन तक मेरा यादगार भक्ति में ब्राह्मणों को दिये जाने वाले सम्मान के रूप में प्रख्यात है। *आज भी भक्ति में ब्राह्मणों का इतना आदर और सम्मान किया जाता है कि उनकी उपस्थिति के बिना कोई भी कार्य सम्पन्न नही माना जाता और वो सच्ची ब्राह्मण आत्मा वो कुख वंशवाली ब्राह्मण नही बल्कि ब्रह्मा मुख वंशावली, ईश्वरीय पालना में पलने वाली, मैं सौभाग्यशाली आत्मा हूँ"।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं माया की छाया से निकल याद की छत्रछाया में रहने वाली बेफिक्र बादशाह  आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं समझ के स्क्रू ड्राइवर से अलबेलेपन के लूज़ स्क्रू को टाइट कर सदा अलर्ट रहने वाली ज्ञानी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. ब्राह्मण आत्मायें वर्तमान वायुमण्डल को देख विदेश में डरते तो नहीं है? कल क्या होगा, कल क्या होगा... यह तो नहीं सोचते हो? कल अच्छा होगा। अच्छा है और अच्छा ही होना है। *जितनी दुनिया में हलचल होगी उतनी ही आप ब्राह्मणों की स्टेज अचल होगी। ऐसे है? डबल विदेशी हलचल है या अचल है? अचल है? हलचल में तो नहीं हैं ना!* जो अचल हैं वह हाथ उठाओ। अचल हैं? कल कुछ हो जाये तो? तो भी अचल हैं ना! क्या होगा, कुछ नहीं होगा। आप ब्राह्मणों के ऊपर परमात्म छत्रछाया है। जैसे वाटरप्रुफ कितना भी वाटर हो लेकिन वाटरप्रुफ द्वारा वाटरप्रुफ हो जाते हैं। ऐसे ही कितनी भी हलचल हो लेकिन ब्राह्मण आत्मायें परमात्म छत्रछाया के अन्दर सदा प्रुफ हैं। बेफिकर बादशाह हो ना! कि थोड़ा-थोड़ा फिकर है, क्या होगा? नहीं। बेफिकर। *स्वराज्य अधिकारी बन, बेफिकर बादशाह बन, अचल-अड़ोल सीट पर सेट रहो। सीट से नीचे नहीं उतरो।* अपसेट होना अर्थात् सीट पर सेट नहीं है तो अपसेट हैं। सीट पर सेट जो हैं वह स्वप्न में भी अपसेट नहीं हो सकता।

 

 _ ➳  2. बापदादा कम्बाइण्ड है, जब सर्वशक्तिवान आपके कम्बाइण्ड है तो आपको क्या डर है! *अकेले समझेंगे तो हलचल में आयेंगे। कम्बाइण्ड रहेंगे तो कितनी भी हलचल हो लेकिन आप अचल रहेंगे।*

 

 _ ➳  3. बाप की जिम्मेवारी है, *अगर आप सीट पर सेट हो तो बाप की जिम्मेवारी है, अपसेट हो तो आपकी जिम्मेवारी है।*

 

✺   *ड्रिल :-  "परमात्म छत्रछाया के अन्दर सदा सेफ रहने का अनुभव"*

 

 _ ➳  आज मैं आत्मा अपने ब्राह्मण जीवन में मिली हुई सारी प्राप्तियों को याद कर रही हूँ... *जब से बाबा ने अपना बच्चा बनाया तब से लेकर आज तक मैं खुशियों के झूले में झूल रही हूँ... बाबा से मिली शक्तियों को अपने कार्य व्यवहार में यूज़ करते हुए निरंतर आगे बढ़ती जा रही हूँ...* इसी तरह इस कल्याणकारी संगमयुग की प्राप्तियों के अविनाशी झूले मैं झूलती मैं आत्मा इस शरीर रूपी चोले को छोड़ कर ऊपर की ओर उड़ जाती हूँ... और सूक्ष्मवतन में आकर ठहरती हूँ...

 

 _ ➳  मैं बाबा के सम्मुख हूँ और बाबा की प्यार भरी दृष्टि से निहाल हो रही हूँ... आज बाबा के साथ इस सृष्टि का चक्र लगाने नीचे की ओर आ रही हूँ... बाबा के हाथ में हाथ देकर मैं आत्मा अपने फरिश्ता रूप में इस धरती के ऊपर उड़ रही हूँ... उड़ते उड़ते मैं बाबा के साथ आज डबल विदेशी आत्माओ को देख रही हूँ... वायुमण्डल के प्रभाव में  आकर ये आत्मायें हलचल में आ जाती हैं और उनकी स्थिति ऊपर नीचे हो जाती है... *मैं आत्मा बाबा के साथ कंबाइंड हो इन समस्त आत्माओ को पॉवरफुल वाइब्रेशन दे रही हूँ... ये किरणें उन आत्माओ तक पहुंच रही हैं और उनमें समाती जा रही हैं...* इन किरणों को प्राप्त कर इन आत्माओ की स्थिति अचल अडोल बन रही है... हलचल को समाप्त कर ये आत्मायें अपने स्वमान में स्थित हो रही हैं...

 

 _ ➳  मैं फरिश्ता अब बाबा का हाथ पकड़ कर आगे की ओर जाती हूँ... मैं देख रही हूँ उन सभी आत्माओ को जिन्हें बाबा ने अपना बच्चा बनाया है... ये सभी बाबा के बच्चे जो इस संगमयुग में ब्राह्मण बन कर पुरुषार्थ कर रहे हैं... पर *कभी कभी परिस्थिति वश तो कभी संबंध संपर्क में आते ये आत्मायें अपने स्वमान की सीट से थोड़ा हट जाती हैं और अपसेट हो जाती हैं...* मैं आत्मा बाबा के साथ इन आत्माओ को भी शक्तिशाली वाइब्रेशन दे रही हूँ... 

 

 _ ➳  सभी ब्राह्मण आत्मायें बाबा की शक्तियों को स्वयं में भर रही हैं... जिससे वो अपने को पहले से ज़्यादा ऊर्जावान महसूस कर रही हैं... *सभी आत्मायें स्वयं को परमात्म छत्रछाया में अनुभव कर रही हैं और स्वयं को सुरक्षित देख रही हैं... बेफ़िक्र बादशाह बन सारी चिंताओं से मुक्त हो रही हैं...* ना किसी बात की फ़िक्र ना आने वाले कल का डर...

 

 _ ➳  मैं फरिश्ता अब नीचे की ओर वापस आ रही हूँ और नीचे आकर अपने स्थूल शरीर मे फिर से प्रवेश करती हूँ... मुझ आत्मा में भी ये समझ आ गयी है कि जब बाबा ने मुझे अपना बच्चा बना लिया है तो अब मुझे भी किसी भी बात से परेशान नहीं होना है... *बाप दादा कंबाइंड रूप से मेरे साथ हैं जो पल पल मेरी छत्रछाया बनकर मेरे साथ साथ चलते हैं...* जिससे मेरी सारी हलचल समाप्त हो रही है और मैं आत्मा अचल अडोल बनती जा रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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