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 08 / 04 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *अपने आपसे बातें की ?*

 

➢➢ *"अब वापिस घर जाना है" - यह स्मृति में रहा ?*

 

➢➢ *कर्मों के हिसाब किताब को समझकर अपनी अचल स्थिति बनायी ?*

 

➢➢ *सर्व जिम्मेवारियों का बोझ बाप हवाले कर डबल लाइट रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *कोई भी खजाना कम खर्च करके अधिक प्राप्ति कर लेना, यही योग का प्रयोग है।* मेहनत कम सफलता ज्यादा इस विधि से प्रयोग करो। जैसे समय वा संकल्प श्रेष्ठ खजाने हैं, तो संकल्प का खर्च कम हो लेकिन प्राप्ति ज्यादा हो। *जो साधारण व्यक्ति दो चार मिनट संकल्प चलाने के बाद, सोचने के बाद सफलता या प्राप्ति कर सकता है वह आप एक दो सेकेण्ड में कर सकते हो, इसको कहते हैं कम खर्चा बाला नशीन। खर्च कम करो लेकिन प्राप्ति 100 गुणा हो इससे समय की वा संकल्प की जो बचत होगी वह औरों की सेवा में लगा सकेंगे, दान पुण्य कर सकेंगे, यही योग का प्रयोग है।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं कोटो में कोई हूँ"*

 

✧  सदा बाप और वर्सा दोनों की स्मृति रहती है? *बाप कौन और वर्सा क्या मिला है यह स्मृति स्वत: समर्थ बना देती है। ऐसा अविनाशी वर्सा जो एक जन्म में अनेक जन्मों की प्रालब्ध बनाने वाला है, ऐसा वर्सा कभी मिला है? अभी मिला है, सारे कल्प में नहीं।*

 

  *तो सदा बाप और वर्सा इसी स्मृति से आगे बढ़ते चलो। वर्से को याद करने से सदा खुशी रहेगी और बाप को याद करने से सदा शक्तिशाली रहेंगे। शक्तिशाली आत्मा सदा मायाजीत रहेगी और खुशी है तो जीवन है।* अगर खुशी नहीं तो जीवन क्या? जीवन होते भी ना के बराबर है। जीते हुए भी मृत्यु के समान है।

 

  *जितना वर्सा याद रहेगा उतनी खुशी। सदा खुशी रहती है? ऐसा वर्सा कोटो में कोई को मिलता है और हमें मिला है। यह स्मृति कभी भी भूलना नहीं। जितनी याद उतनी प्राप्ति। सदा याद और सदा प्राप्ति की खुशी।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  बीज में कौन - सी शक्ति है? वृक्ष के विस्तार को अपने में समाने की। *तो अब क्या पुरुषार्थ करना है? बीज स्वरूप स्थिती में स्थित होने का अर्थात अपने विस्तार को समाने का*। तो यह चेक करो।

 

✧  विस्तार करना तो सहज है लेकिन विस्तार को समाना सरल हुआ है? आजकल साइंस वाले भी विस्तार को समेटने का ही पुरुषार्थ कर रहे है। *साइंस पावर वाले भी तुम साइलेन्स की शक्तिवालों से काँपी करते है*। जैसे - जैसे साइलेन्स की शक्ति सेना इन्वेन्शन करती है फिर साइंस अपने रूप से इन्वेन्शन करती है।

 

✧  जैसे - जैसे यहाँ रिफाइन होते जाते है वैसे ही साइंस भी रिफाइन होती जाती है। जो बातें पहले उन्हों को भी असम्भव लगती थी वह अब सम्भव होती जा रही है। वैसे ही *यहाँ भी असम्भव बातें सरल और सम्भव होती जाती है।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *ऐसे विशेष आत्माओं को अपने अव्यक्त स्थिति में, अपनी रूहानी लाइट और माइट की स्थिति द्वारा लाइट-हाउस और माइट-हाउस बन एक स्थान पर रहते हुए भी चारों ओर अलौकिक रूहानी सर्विस की भावना और वृत्ति द्वारा सर्विस करनी चाहिए। इसको कहते हैं बेहद की सर्विस।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺ *"ड्रिल :- पतित से पावन बनना"*

 

_ ➳  मैं आत्मा समुन्दर के किनारे बैठ सागर की लहरों को निहारती हुई पवित्रता के सागर बाबा को याद करती हूँ... जिसने खिवैया बन पतवार को अपने हाथों में लेकर... मझधार में डूबती हुई मेरी नैया को किनारे लगा दिया... *पवित्रता के सागर में कई जन्मों की अपवित्रता को धोकर पवित्र बना दिया... पत्थरबुद्धि से पारसबुद्धि बना दिया... मेरे जीवन के खारेपन को दूर कर मीठा बना दिया... मैं आत्मा ऐसे मीठे बाबा के पास पहुँच जाती हूँ वतन में...*

 

  *पवित्रता का सागर प्यारा बाबा पवित्रता की किरणों को फैलाते हुए कहते हैं:-* "मेरे लाडले बच्चे... खिलते फूल जैसे मुस्कराते जीवन को पवित्रता से ही पा सकोगे... *ईश्वर पिता वही पावनता से सजाने आया है.. पिता की मीठी यादो से खूबसूरत तकदीर सदा के लिए बन जायेंगी... मीठा बाबा सोई तकदीर को जगाकर महकाने आया है... पावन बनाकर पावन दुनिया का वर्सा देने आया है...* सदगति देने आया है..."

 

_ ➳  *मैं आत्मा पवित्रता की किरणों के झरने में नहाते हुए कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा अपनी फूल से तकदीर को देहभान के नशे में काँटों से भर ली थी... मीठे बाबा आपने आकर मेरा सोया भाग्य जगाया है... पावन बनाकर मेरा सुंदर जीवन सजाया है..."*

 

  *पवित्रता के चमकीले हीरों से सजाते हुए मेरे प्यारे बाबा कहते हैं:-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... मिटटी के मटमैले रिश्तो ने स्वयं को देह समझने से खूबसूरत तकदीर दुखो का पहाड़ बन गयी... *अब मीठा बाबा फिर से सुनहरी सुंदरता से भरने धरा पर उतर आया है... पवित्रता के श्रृंगार से तकदीर को सुखो से महकाने आया है..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा रूहानियत की खुशबू से महकते हुए कहती हूँ:-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... *मै आत्मा विश्व पिता से मिलकर पवित्रता से जगमगाने लगी हूँ... मेरी पवित्रता विश्व में चहुँ ओर फैल रही है... मेरा भाग्य खिला गुलाब बन सारे विश्व में खुशबु बिखेर रहा है..."*

 

  *मेरा बाबा सर्व सुखों को मेरे झोली में डालते हुए कहते हैं:-* "प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... मीठे बाबा की मीठी यादो में खो जाओ... *सच्चे माशूक को हर साँस संकल्प में बसा लो... और इन मीठी यादो में सोई तकदीर को सारे सुखो से भरपूर बना दो... सच्चे पिता के साथ से पावन बनकर विश्व के मालिक बन मुस्कराओ..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा फ़रिश्ते समान पवित्र सुनहरे रंगों में सजते हुए हर्षित होकर कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा आपकी यादो में देह के मटमैलेपन से मुक्त हो सुनहरे पवित्र रंग में रंगती जा रही हूँ... मेरा पावन दमकता स्वरूप देख देख मै आत्मा प्यारे बाबा पर निहाल होती जा रही हूँ..."*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- अब वापस घर जाना है इसलिए सबसे ममत्व निकाल जीते जी मरना है*

 

_ ➳  साक्षीपन की सीट पर सेट होकर , इस सृष्टि पर चल रहे बेहद के ड्रामा को मैं मन बुद्धि के नेत्र से जैसे ही देखती हूँ, हर पार्टधारी का पार्ट मुझे एक्यूरेट लगने लगता है। *मन से सारे संशय दूर हो जाते हैं और दृष्टि वृति इस बेहद के नाटक को साक्षी होकर देखने और इसका आनन्द लेने में बिजी हो जाती है। जिन आत्माओं के पार्ट को देख मन मे क्यों, क्या, कैसे के सवाल उठते थे, साक्षीदृष्टा बनते ही वो सभी सवाल जैसे अब समाप्त हो गए हैं और मन मे यही खुशी है कि हम पार्ट पूरा कर अब वापिस जा रहे हैं, अपने उस स्वीट साइलेन्स होम में जो हमारा घर हैं, जहाँ से हम इस सृष्टि ड्रामा में पार्ट बजाने के लिए आये थे*। वो 84 जन्मों का पार्ट अब पूरा हुआ।

 

_ ➳  मन मे चल रहे इन सभी विचारों का चित्रण करते हुए, बुद्धि से इस बेहद के नाटक को देखते हुए, अपने प्यारे पिता के साथ वापिस अपने निर्वाण धाम घर जाने की खुशी मुझे अपने प्यारे पिता से मिलने के लिए व्याकुल करने लगती है। *मन रूपी पँछी उड़कर  सेकण्ड में अपने मीठे बाबा के पास पहुँच कर उनकी किरणों रूपी बाहों के आगोश में समा जाना चाहता है। अपने पिता से मिलने की मेरे मन की व्याकुलता मुझे देह के भान से धीरे - धीरे मुक्त करती जा रही है। अपने निराकारी स्वरूप में मैं स्वत: ही स्थित होती जा रही हूँ*। स्वयं को मैं देह से अलग एक चैतन्य ज्योति के रूप में मस्तक के बीच मे चमकता हुआ स्पष्ट अनुभव कर रही हूँ। मुझ आत्मा ज्योति से निकल रहा प्रकाश मुझे मेरे गुणों और शक्तियों का अनुभव करवा कर एक गहन सन्तुष्टता और आनन्द प्रदान कर रहा है।

 

_ ➳  अपने अंदर निहित गुणों और शक्तियों को वायब्रेशन्स के रूप में अपने मस्तक से निकलते हुए मैं स्पष्ट देख रही हूँ। प्रकाश की रंग बिरंगी किरणों के रूप में, औंस की मीठी मीठी फुहारों की तरह ये वायब्रेशन्स मेरे चारों और फैल रहें हैं। *एक गहन शन्ति और असीम सुख की अनुभूति करते हुए, अपने इस अति सुंदर न्यारे और प्यारे स्वरुप का भरपूर आनन्द लेकर, अब मैं बिंदु आत्मा एक अति सूक्ष्म स्टार बन कर, भृकुटि की कुटिया से बाहर निकलती हूँ और कुछ क्षणों के लिए अपनी नश्वर देह को और अपने आस - पास की नश्वर चीजो को साक्षी होकर देखने के बाद, उन सबसे किनारा कर ऊपर की और उड़ जाती हूँ*। एक अद्भुत हल्केपन का अनुभव करते हुए और इस बन्धनमुक्त स्थिति का भरपूर आनन्द लेते हुए, मैं आकाश को पार करती हूँ और अव्यक्त वतन से होती हुई अपनी निराकारी दुनिया मे प्रवेश करती हूँ।

 

_ ➳  चमकते हुए अति सूक्ष्म चैतन्य सितारों की यह दुनिया जो मेरे पिता का घर है, अपने इस निर्वाण धाम घर मे अब मैं पहुँच गई हूँ और अपने प्यारे पिता से मिलने उनके पास जा रही हूँ। एक अखण्ड महाज्योति के रूप में अपने पिता को मैं अपने सामने देख रही हूँ जो अपनी किरणों रूपी बाहों को फैलाये मुझे  बुला रहें हैं। *अपने बाबा की किरणों रूपी बाहों में समाकर, गहन शांति और सुख का अनुभव करते हुए, उनकी सर्वशक्तियों की छत्रछाया के नीचे बैठ अब मैं विश्राम कर रही हूँ*। स्वयं को उनके प्यार से, उनकी शक्तियों से, उनके गुणों से भरपूर कर रही हूँ। अपने पिता के साथ एक मधुर स्नेह मिलन मैं मना रही हूँ और इस मिलन का भरपूर आनन्द ले रही हूँ।

 

_ ➳  अपने पिता के साथ मनाए इस मंगल मिलन से मिलने वाले मेरे पिता के प्यार और उनकी शक्तियों ने मेरे अंदर अथाह बल भर दिया है। ऐसा लग रहा है जैसे मैं बहुत उर्जावान बन गई हूँ। हर शक्ति, हर गुण से सम्पन्न बन गई हूँ। इन गुणों और शक्तियों को स्वयं में धारण कर, सृष्टि पर अपने पार्ट को एक्युरेट बजाने के लिए मैं वापिस साकार सृष्टि की ओर लौट रही हूँ। *अपने साकार तन में मैं आत्मा अब प्रवेश करके भृकुटि सिहांसन पर विराजमान हो कर इस सृष्टि रूपी रंगमंच पर अपने और हर आत्मा के पार्ट को साक्षी होकर देख रही हूँ। हर आत्मा अपना पार्ट पूरा कर अब खुशी से वापिस जा रही है यह स्मृति मुझे क्या, क्यों और कैसे के प्रश्नों की क्यू से बाहर निकाल कर, अति प्रसन्नचित स्थिति का अनुभव अब सदैव करवा रही है*। सारे गिले शिकवे समाप्त हो गए हैं और मन हर समय खुशी से यही गीत गाता रहता है कि "अब घर जाना है" और वापिस घर जाने की यह स्मृति ही मुझे देह और देह की दुनिया से उपराम करती जा रही है।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं कर्मो के हिसाब किताब को समझ कर अपनी अचल स्थिति बनाने वाली सहज योगी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं अपनी सर्व ज़िम्मेवारियों का बोझ बाप हवाले करके डबल लाइट रहने वाला फरिश्ता हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

अव्यक्त बापदादा :-

 

_ ➳  मेहनत से छुटने की विधि- मेरा-पन समाप्त करोः- बापदादा सभी बच्चों को मेहनत से छुड़ाने आये हैं। आधाकल्प बहुत मेहनत की अब मेहनत समाप्त। उसकी सहज विधि सुनाई है, *सिर्फ एक शब्द याद करो - मेरा बाबा'। मेरा बाबा कहने में कोई भी मेहनत नहीं। मेरा बाबा कहो तो, दुख देने वाला मेरामेरा' सब समाप्त हो जायेगा। जब अनेक मेरा है तो मुश्किल है, एक मेरा हो गया तो सब सहज हो गया। बाबा-बाबा कहते चलो तो भी सतयुग में आ जायेंगे।* मेरा पोत्रा, मेरा धोत्रा, मेरा घर, मेरी बहू... अब यह जो मेरे-मेरे की लम्बी लिस्ट है इसे समाप्त करो। अनेकों को भुलाकर एक बाप को याद करो तो मेहनत से छूट आराम से खुशी के झूले में झूलते रहेंगे। सदा बाप की याद के आराम में रहो।

 

✺  *"ड्रिल :- मेरा बाबा शब्द की स्मृति से अनेको मेरा मेरा भूलने का अनुभव"*

 

_ ➳  *मेरा बाबा शब्द की रूहानी चुम्बकीय शक्ति से... मैं आत्मा प्यारे बाबा की याद में खींची चली जा रही हूँ...* मैं आत्मा मुक्त गगन की पंछी बन ऊपर उड रही हूँ... सांसारिक डाल की पकड को छोड रही हूँ... सर्व बन्धनों से छूट रही हूँ... *मेरा बाबा शब्द के जादू से मैं आत्मा डाल की पंछी से उड़ता पंछी बन रही हूँ...* मैं उड़ता पंछी पंच तत्वों की दुनिया से परे सूक्ष्मलोक पहुँच जाती हूँ...

 

_ ➳  *मेरा बाबा, प्यारा बाबा, मीठा बाबा कहते-कहते... मैं आत्मा बाबा के सामने बैठ जाती हूँ... बापदादा के रूहानी नैनों से अलौकिक, पारलौकिक रुहानी प्रेम छलक रहा है...* मुझ आत्मा का देहभान छूट रहा है... मैं आत्मा देही-अभिमानी बन रही हूँ... मुझ आत्मा का देह के सम्बन्धियों से मोह खत्म हो रहा है... *मुझ आत्मा का इस पुरानी दुनिया, पुरानी वस्तु-वैभव का आकर्षण ख़तम हो रहा है...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा कई जन्मों से मेरा तन, मेरा मन, मेरा धन करते-करते दुखी, अशांत हो गई थी...* मेरा-मेरा करते मैं स्वयं को ही भूल गई... अपने पिता को भूल गई... अपने असली घर को ही भूल गई थी... मेरा बाबा शब्द की स्मृति से मैं आत्मा अपने स्व स्वरूप की स्मृति में टिक रही हूँ... *मुझ आत्मा को अपने असली पिता, असली घर, असली लक्ष्य स्पष्ट दिख रहा है...*

 

_ ➳  *मेरा बाबा शब्द में अनेकों मेरा-मेरा समा रहा है...* मैं आत्मा सबकुछ भूल एक बाबा को ही याद करती हूँ... मैं आत्मा विनाशी चीजों के मेरे-मेरे से किनारा कर रही हूँ... अविनाशी वर्से की अधिकारी बन रही हूँ... मैं आत्मा मेहनत से छूट रही हूँ... सहजयोगी बन रही हूँ... *अब मैं आत्मा मेरा बाबा शब्द की स्मृति से अनेको मेरा मेरा भूलकर... सदा बाबा की याद की खुशी के झूले में झूलने का अनुभव कर रही हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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