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 08 / 08 / 22  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *एक परमात्म माशूक का सच्चा आशिक बनकर रहे ?*

 

➢➢ *घरबार संभालते राजऋषि बनकर रहे ?*

 

➢➢ *माया की अब्दी बात को भी छोटी बनाकर पार किया ?*

 

➢➢ *वरदाता को अपना सच्चा साथी बनाया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  ब्रह्मा बाप से प्यार है तो ब्रह्मा बाप समान फरिश्ता बनो। *सदैव अपना लाइट का फरिश्ता स्वरूप सामने दिखाई दे कि ऐसा बनना है और भविष्य रूप भी दिखाई दे। अब यह छोड़ा और वह लिया। जब ऐसी अनुभूति हो तब समझो कि सम्पूर्णता के समीप है।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं विश्व-कल्याणकारी आत्मा हूँ"*

 

  सभी अपने को सदा विश्व की सर्व आत्माओंके कल्याणकारी आत्मायें अनुभव करते हो? सारा दिन विश्व-कल्याण के कर्तव्य में बिजी रहते हो या दो-चार घण्टे? *कितना भी स्थूल कार्य हो लेकिन स्थूल कार्य करते हुए भी मन्सा द्वारा वायब्रेशन्स फैलाने की सेवा कर सकते हो। क्योंकि जिसका जो कार्य होता है ना, वो कहाँ भी होगा- अपना कार्य कभी भी नहीं भूलेगा।*

 

  जैसे-कोई बिजनेसमेन है तो स्वप्न में भी अपना बिजनेस देखेगा। तो आपका काम ही है-विश्व-कल्याण करना। *कोई भी पूछे-आपका आक्यूपेशन क्या है, तो क्या यह कहेंगे-टाइपिस्ट हैं या इन्जीनियर हैं या बिजनेसमेन हैं। यह तो हुआ निमित्तमात्र लेकिन सदा स्मृति विश्व-कल्याणकारी आक्यूपेशन की है।* इतना बड़ा कार्य मिला है जो फुर्सत ही नहीं है और बातों में जाने की। ऐसे बिजी रहते हो?

 

  मन-बुद्धि बिजी रहती है? कभी खाली रहती है? *अगर सदा मन-बुद्धि से बिजी हैं तो मायाजीत हो ही गये। क्योंकि माया को भी समय चाहिए ना। आपको समय ही नहीं तो माया क्या करेगी? बिजी देखकर के आने वाला स्वत: ही वापस चला जाता है। तो मायाजीत हो गये? मन-बुद्धि को प्री रखना माना माया का आह्वान करना।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  आज सभी मिलन मनाने के एक ही शुद्ध संकल्प में स्थित हो ना। *एक ही समय, एक ही संकल्प - यह एकाग्रता की शक्ति अति श्रेष्ठ है।* यह संगठन की एक संकल्प की एकाग्रता की शक्ति जो चाहे वह कर सकती है। *जहाँ एकाग्रता की शक्ति है वहाँ सर्व शक्तियाँ साथ हैं।* इसलिए एकाग्रता ही सहज सफलता की चावी हैं।

 

✧  *एक श्रेष्ठ आत्मा के एकाग्रता की शक्ति भी कमाल कर दिखा सकती है तो जहाँ अनेक श्रेष्ठ आत्माओं के एकाग्रता की शक्ति संगठन रूप में है वह क्या नहीं कर सकते।* जहाँ एकाग्रता होगी वहाँ श्रेष्ठता और स्पष्टता स्वत: होगी। किसी भी नवीनता की इन्वेन्शन के लिए एकाग्रता की आवश्यकता है। चाहे लौकिक दुनिया की इन्वेन्शन हो, चाहे आध्यात्मिक इन्वेन्शन हो।

 

✧  *एकाग्रता अर्थात एक ही संकल्प में टिक जाना।* एक ही लगन में मगन हो जाना। *एकाग्रता अनेक तरफ का भटकाना सहज ही छुडा देती है।* जितना समय एकाग्रता की स्थिति में स्थित होंगे उतना समय देह और देह की दुनिया सहज भूली हुई होगी। क्योंकि उस समय के लिए संसार ही वह होता है, जिसमें ही मगन होते। *ऐसे एकाग्रता की शक्ति के अनुभवी हो?*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ *'उड़ती कला होना अर्थात् सर्व का भला होना।' उड़ती कला ही कर्मातीत स्थिति को प्राप्त करने की स्थिति है।* उड़ती कला ही श्रेष्ठ स्थिति हैं। देह में रहते, देह से न्यारी ओर सदा बाप और सेवा में प्यारे-पन की स्थिति है। *उड़ती कला ही विधाता और वरदाता स्टेज की स्थिति है।* उड़ती कला ही चलते-फिरते फरिश्ता व देवता दोनों रूप का साक्षात्कार कराने वाली स्थिति है।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  ज्ञान योग से सच्चा श्रंगार कर, देह से ममत्व निकालना"*

 

_ ➳  मीठे बाबा की मीठी यादो में डूबी हुई मै आत्मा... मीठे बाबा से मिलने वतन में पहुंची... वतन में मीठे बाबा कब से मेरी राह निहार रहे है... मुझे अपनी शक्तियो और गुणो की तरंगो में मालामाल कर रहे है... मीठे बाबा *मुझे अपने हाथो से सजाकर... मेरा श्रृंगार करके, मुझे सतयुगी दुनिया में सुखो का अधिकारी बना रहे है..*. मीठे बाबा की यादो में मै आत्मा... अशरीरी बनकर मुस्करा रही हूँ...

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को ज्ञानी और योगी बनाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... मीठे बाबा के श्रीमत की पालना में ज्ञान और योग के श्रृंगार से सज जाओ... देह और देह के भान से परे रहकर, सदा की सुंदरता को अपनाओ... *देह की मिटटी से उपराम होकर, आत्मिक भाव के सौंदर्य से सज धज कर मुस्कराओ.*.."

 

_ ➳  *मै आत्मा प्यारे बाबा से ज्ञान और योग के खजानो से स्वयं को लबालब करते हुए कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... आपने मुझे अपनी प्यारी गोद में बिठाकर कितना सुंदर बना दिया है... मै आत्मा विकारो से देह भान से मुक्त होकर भीतरी सौंदर्य से सज गयी हूँ... *अपने खोये गुण और शक्तियो को पाकर कितनी धनी बन गयी हूँ.*.."

 

   *प्यारे बाबा मुझ आत्मा को ज्ञान और योग की खुशबु से भरते हुए कहते है :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे.... देह के नशे में घिर कर जनमो तक दुखो को झेलते आये हो... *अब इसके दलदल से मन बुद्धि को निकाल कर... मीठे बाबा की यादो में तेजस्वी बनकर, स्वर्ग धरा पर इठलाओ.*.. मीठे बाबा ज्ञान और योग से सुंदर बनाने आये है... देह से पूरी तरहा ममत्व हटाकर ईश्वरीय यादो में खो जाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा से असीम खुशियो को पाकर कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... *आपकी प्यारी यादो में सत्य के प्रकाश में मै आत्मा कितनी ओजस्वी बन रही हूँ.*.. आपने मुझे ज्ञान और योग से भरकर मालामाल कर दिया है... मै आत्मा आपकी यादो आंतरिक सौंदर्य से सजती जा रही हूँ..."

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी यादो में खुबसूरत बनाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे.... *ज्ञान और योग से श्रृंगारित होकर अथाह सुखो से भरी दुनिया के मालिक बन जाओ..*. अपने सत्य स्वरूप के नशे में इस कदर खो जाओ... कि देह का आकर्षण ही न रहे... और ईश्वरीय यादो के प्रकाश में इस मिटटी के प्रभाव से पूरी तरहा से मुक्त हो जाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के प्यार में फूलो सी खिलकर कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... *मुझ आत्मा को आपके मीठे साये और साथ ने देवताई सुंदरता से सजाया है.*.. कितना प्यारा और खुबसूरत मेरा भाग्य आपने बनाया है... आपकी मीठी यादो में मै आत्मा स्वर्ग के मीठे सुखो के लिए श्रृंगारित हो रही हूँ..."अपने प्यारे बाबा से मीठी रुहरिहानं कर मै आत्मा साकार वतन में लौट आयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- एक परमात्मा माशूक का सच्चा आशिक बनना है*"

 

_ ➳  दिल मे सच्चे प्यार की आश ले कर, अपने परमात्मा माशूक की सच्ची आशिक बन, मैं उनके प्रेम की लगन में मगन हो कर उन्हें याद कर रही हूँ। *मेरी याद उन तक पहुंच रही है, मेरे प्यार की तड़प की वो महसूस कर रहें हैं तभी तो मेरे प्रेम के आकर्षण में आकर्षित हो कर वो मेरे पास आ रहें हैं*। उनके आने का मैं स्पष्ट अनुभव कर रही हूँ। अपने प्रेम की शीतल फुहारें मुझ पर बरसाते हुए मेरे सच्चे माशूक शिव बाबा अपना घर परमधाम छोड़ मुझ से मिलने के लिए इस साकार लोक में आ रहें हैं।

 

_ ➳  प्यार के सागर मेरे शिव पिता परमात्मा मुझे मेरे सच्चे प्यार का प्रतिफल देने के लिए अब मेरे सम्मुख हैं। उनके प्रेम की शीतल किरणों की शीतलता मुझे अपने आस - पास उनकी उपस्थिति का स्पष्ट अनुभव करवा रही हैं। *ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे मैं किसी विशाल सागर के किनारे बैठी हूँ और सागर की लहरों की शीतलता, शीतल हवाओं के झोंको के रूप में बार - बार आ कर मुझे स्पर्श कर रही हैं*। मेरे शिव पिता परमात्मा से आ रहे  सर्वशक्तियों के शक्तिशाली वायब्रेशन मुझे ऐसी ही शीतलता का अनुभव करवा रहें हैं। शीतल हवाओं के झोंको के रूप में मेरे शिव माशूक का प्यार निरन्तर मुझ पर बरस रहा है और मेरे मन को तृप्त कर रहा है।

 

_ ➳  अपने प्रेम की किरणों के आगोश में भरकर मेरे शिव साजन अब मुझ आत्मा को इस देह के पिजड़े से निकाल, अपने साथ ले जा रहें हैं। *देह के बन्धन से मुक्त हो कर मैं स्वयं को एकदम हल्का अनुभव कर रही हूँ। उन्मुक्त हो कर उड़ने का आनन्द कितना निराला, कितना लुभावना है*। अपने सच्चे माशूक की बाहों के झूले में झूलती, अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य पर इतराती मैं आत्मा आशिक उनके साथ उनके धाम जा रही हूँ। *देह और देह की दुनिया के झूठे रिश्तों के मोह की जंजीरो की कैद से निकल, अपने शिव पिया के साथ अब मैं पहुंच गई उनकी निराकारी दुनिया में*।

 

_ ➳  देख रही हूँ अब मैं स्वयं को परमधाम में अपने सच्चे माशूक शिव पिता परमात्मा के सामने। उनके प्यार की शीतल छाया के नीचे बैठी मैं आशिक आत्मा अपलक उन्हें निहार रही हूँ। *63 जन्मो से जिनके दर्शनों की आश मन में लिए इधर - उधर भटक रही थी। वो मेरे माशूक, मेरे शिव बाबा आज मेरे बिल्कुल सामने हैं। प्रभु दर्शन की प्यासी मैं आत्मा आज उन्हें अपने सामने पा कर तृप्त हो गई हूँ*। उनके प्यार की शीतल फुहारे रिम - झिम करती बारिश की बूंदों की तरह निरन्तर मुझ पर पड़ रही हैं। उनकी सर्वशक्तियाँ मेरे अंदर असीम बल भर रही हैं। *बीज रूप स्थिति में स्थित हो कर अपने बीज रूप शिव पिता परमात्मा के साथ मैं मंगल मिलन मना रही हूँ*। यह मंगल मिलन मुझे अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करवा रहा है।

 

_ ➳  इस अतीन्द्रिय सुख का गहन अनुभव करने के बाद, अपने माशूक शिव पिता परमात्मा के इस अदभुत, अद्वितिय प्यार का सुखद एहसास अपने साथ ले कर मै उनकी आशिक आत्मा वापिस साकारी दुनिया मे लौट रही हूँ। अब मैं अपने साकारी तन में विराजमान हूँ और स्वयं को अपने शिव पिया के साथ कम्बाइंड अनुभव कर रही हूँ। *उनके निस्वार्थ प्यार का मधुर एहसास मुझे हर पल उनकी उपस्थिति का अनुभव कराता रहता है*। एक पल के लिए भी मैं उनसे अलग नही होती। चलते - फिरते, खाते - पीते हर कर्म करते वो मुझे अपने साथ अनुभव होते हैं। अपने माशूक शिव परमात्मा की सच्ची आशिक बन अब मैं हर पल उनकी ही यादों में खोई रहती हूँ।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं माया की बड़ी बात को भी छोटी बनाकर पार करने वाली निश्चयबुद्धि आत्मा हूँ।*

   *मैं विजयी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सदैव वरदाता को अपना सच्चा साथी बना लेती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा वरदानों से झोली भरते अनुभव करती हूँ  ।*

   *मैं सहजयोगी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

✺ अव्यक्त बापदादा :-

➳ _ ➳  *गम्भीरता का गुण बहुत आगे बढ़ाता है।* कोई भी बात बोल दी नासमझो अच्छा किया और बोल दिया तो आधा खत्म हो जाता हैआधा फल खत्म हो गयाआधा जमा हो गया। और *जो गम्भीर होता है उसका फुल जमा होता है। कहते हैं ना-देखो जगदम्बा गम्भीर रही,* चाहे सेवा स्थूल में आप लोगों से कम कीआप लोग ज्यादा कर रहे हो लेकिन ये गम्भीरता के गुण ने फुल खाता जमा किया है। कट नहीं हुआ है। कई करते बहुत हैं लेकिन आधापौना कट हो जाता है। करते हैंकोई बात हुई तो पूरा कट हो जाता है या थोड़ी बात भी हुई तो पौना कट हो जाता है। ऐसे ही अपना वर्णन किया तो आधा कट हो जाता है। बाकी बचा क्यातो जब जगदम्बा की विशेषता - जमा का खाता ज्यादा है। गम्भीरता की देवी है।

➳ _ ➳  *ऐसे और सभी को गम्भीर होना चाहिएचाहे मधुबन में रहते हैंचाहे सेवाकेन्द्र में रहते हैं* लेकिन बापदादा सभी को कहते हैं कि गम्भीरता से अपनी मार्क्स इकट्ठी करोवर्णन करने से खत्म हो जाती हैं। चाहे अच्छा वर्णन करते होचाहे बुरा। *अच्छा अपना अभिमान और बुरा किसका अपमान कराता है।* तो हर एक गम्भीरता की देवी और गम्भीरता का देवता दिखाई दे। अभी गम्भीरता की बहुत-बहुत आवश्यकता है। अभी बोलने की आदत बहुत हो गई है क्योंकि भाषण करते हैं ना तो जो भी आयेगा वो बोल देंगे। *लेकिन प्रभाव जितना गम्भीरता का पड़ता है इतना वाणी का नहीं पड़ता।*

✺   *ड्रिल :-  "गंभीरता के गुण से सेवा में फुल मार्क्स जमा करना"*

➳ _ ➳  स्कूल की घंटी बजते ही बच्चों का तूफान के जैसे भागना... नाचते... कूदते बच्चों का स्कूल छूटते ही भागना... *मैं आत्मा निहार रही थी.... सभी बच्चों के तरंगों को... बच्चों की चंचल वृति को...* और सोच रही थी... यही तो वह बच्चे हैं जो बचपन की दीवार तोड़ कर यौवन की तगार पर खड़े हैं... और पूरे देश के भविष्य के नींव समान यह बच्चे... डूबे हुए हैं... *बाहरीय जगमगाहट में... स्थूल चीज़ों में अपनी बुद्धि को वेस्ट करते... मोबाइल इंटरनेट... होटल... घूमना फिरना...  इसे ही दुनिया समझते यह बच्चे...* अज्ञान वश... अपने ही उज्जवल भविष्य को अपनी ही चंचल वृत्ति के हाथों बर्बाद कर रहे हैं... *दैवीय संस्कारों की कमी को उजागर होता देख मैं आत्मा हतप्रभ हो जाती हूँ...*

➳ _ ➳  और मन ही मन इन बच्चों को सच्ची शिक्षा रूपी ज्ञान दान के अधिकारी बनाने में मैं आत्मा... एक नजर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पे डालती हूँ... यह वही संस्था हैं जहाँ बड़े बड़े वेल एजुकेटेड और कम पढ़े हुए... बच्चे बुढ्ढे... गरीब-अमीर... *सब एक ही साथ बैठ कर ईश्वरीय पढ़ाई पढ़ते हैं... यह वह संस्था हैं जहाँ मनुष्य से देवी-देवता बनना सिखाया जाता हैं... कैसी होगी वह शिक्षा जहाँ स्वयं भगवान आकर पढ़ाते हैं...* खुशनसीब मैं आत्मा... जो इसी विद्यालय की स्टूडेन्ट हूँ... काम क्रोध लोभ मोह माया के विकारों रूपी काले बादलों को योग अग्नि रूपी ज्ञान अमृत से नष्ट होता देख रही हूँ....

➳ _ ➳  *स्वयं शिव परमात्मा द्वारा स्थापित संस्था... प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय...* पूरे विश्व में एक ही विद्यालय हैं जहाँ विकारों से मुक्त किया जाता हैं... *दर दर भटकते भक्तों को भगवान मिल जाते हैं...* सच्चा सच्चा गीता ज्ञान... मिलता हैं... स्वयं भगवान की प्रत्यक्षता जहाँ होती हैं ऐसी संस्था की मैं भाग्यवान स्टूडेंट *आज अपने भगवान को याद करूं और भगवान न आये ऐसा हो ही नहीं सकता...* भगवान को प्रत्यक्ष हाजिरहजुर देखना... जानना... महसूस करना है तो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में आओ... जहाँ स्वयं भगवान के हाथों विजय भव का स्वराज्य अधिकारी तिलक लगाया जाता है...

➳ _ ➳  ऐसी खुशनसीब मैं आत्मा बापदादा के साथ... उनका हाथ पकडे... चल पड़ती हूँ... सभी स्कूल... कॉलेज में... अपने फ़रिश्ते रूप में सज मैं आत्मा... *बापदादा से आती हुई ज्ञान रत्नों रूपी शिक्षाओं को अपने में धारण कर विश्व की सभी स्कूल... कॉलेज पर... सभी विद्यार्थियों पर फैलाती जा रही हूँ...* बापदादा का हाथ अपने हाथों में पकड़ें... मैं आत्मा... देख रही हूँ... बापदादा की पवित्रता... शांति से भरी किरणें सभी स्कूल... कॉलेज के बच्चों को मिल रही है... *उनकी चंचलता... बाहरीय चमक दमक की झूठी माया रूपी विकारों की अग्नि को बापदादा की शक्तियों रूपी किरणों से स्वाहा होता देख रही हूँ...*

➳ _ ➳  चंचलता को गंभीरता में परिवर्तित होता देखती मैं आत्मा... खुद भी गम्भीर होती जा रही हूँ... पुरुषार्थ में... योग में... हर संकल्प... हर स्वांस में सिर्फ एक की ही याद रहें... ऐसी गंभीर स्थिति में मग्न होती जा रही हूँ... गम्भीरता के गुण से फुल खाता जमा करती जा रही हूँ... सभी बच्चों को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्टुडेन्ट बनता देख यह आँखे अश्रु से भर जाती हैं... *कोटि बार धन्यवाद उस परमपिता परमात्मा का जो हर घड़ी... हर पल... अपने भक्तों की लाज रखने चला आता है...  कोटि बार धन्यवाद प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का जहाँ अनाथ को सनाथ बनाने स्वयं भगवान आते हैं...*

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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