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 08 / 11 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *ईश्वरीय स्नेह से पत्थर समान आत्माओं को भी पिघलाया ?*

 

➢➢ *आत्माओं को सहयोगी और सहजयोगी बनाया ?*

 

➢➢ *"हां जी" का पाठ पक्का किया ?*

 

➢➢ *सोयी हुई आत्माओं को जगाया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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〰✧  *चेक करो - जो भी संकल्प उठता है वह स्वयं वा सर्व के प्रति कल्याण का है? सेकेण्ड में कितने संकल्प उठे - उसमें कितने सफल हुए और कितने असफल हुए?* संकल्प और कर्म में अन्तर न हो। संकल्प जीवन का अमूल्य खजाना है। *जैसे स्थूल खजाने को व्यर्थ नहीं करते वैसे एक संकल्प भी व्यर्थ न जाये।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं बेफिकर बादशाह हूँ"*

 

  सदा बेफिकर बादशाह हो ना। जब बाप को जिम्मेवारी दे दी तो फिर किस बात का? *जब अपने ऊपर जिम्मेवारी रखते हो तो फिर फिकर होता है - क्या होगा, कैसे होगा.., और जब बाप के हावाले कर दिया तो फिकर किसको होना चाहिए, बाप को या आपको? और बाप तो सागर है, उसमें फिकर रहेगा ही नहीं।*

 

  *तो बाप भी बेफिकर और बच्चे भी बेफिकर हो गये। तो जो भी कर्म करो, कर्म करने से पहले यह सोचे कि मैं ट्रस्टी हूँ। ट्रस्टी काम बहुत प्यार से करता है लेकिन बोझ नहीं होता है। ट्रस्टी का अर्थ ही है सब कुछ, बाप तेरा। तो तेरे में प्राप्ति भी ज्यादा और हल्के भी रहेंगे, काम भी अच्छा होगा क्योंकि जैसी स्मृति होती है, वैसी स्थित होती है।* तेरा माना बाप की स्मृति। कोई रिवाजी महान आत्मा नहीं है, बाप है! तो जब तेरा कह दिया तो कार्य भी अच्छा और स्थिति भी सदा बेफिकर। जब बाप आफर कर रहा है कि फिकर दे दो, फिर भी अगर आफर नहीं मानें तो क्या कहेंगे?

 

  बाप की आफर है - बोझ छोड़ो तो सदा बेफिकर रहना है और दूसरों को बेफिकर बनाने की, अनुभव से विधि बतानी है। बहुत आशीर्वाद मिलेगी! *किसका बोझ वा फिकर ले लो तो दिल से दुआयें देंगे। तो स्वयं भी बेफिकर बादशाह और दूसरों की भी शुभ-भावना की दुआयें मिलेंगी। तो बादशाह हो, अविनाशी धन के बादशाह हो! बादशाह को क्या परवाह! विनाशी बादशाहों को तो चिंता रहती है लेकिन यह अविनाशी है।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *बिन्दु स्वरूप में स्थित होना अर्थात डबल लाइट बनना।* बडी चीज को उठाना मुश्किल होता है, छोटी चीज को उठाना सहज होता है। छोटे बिन्दु रूप को स्मृति में रखते हो या लम्बे शरीर को याद रखते हो?

 

✧  याद के लिए कहा जाता है - बुद्धि में याद रखना। मोटी चीज को याद रखते हो और छोटी चीज को छोड देते हो, इसलिए मुश्किल हो जाता है। लाइफ में भी देखो - छोटा बनना अच्छा है वा बडा बनना अच्छा है? छोटा बनना अच्छा है। तो *छोटा स्वरूप याद रखना अच्छा है ना।*

 

✧  क्या याद रखेंगे? बिन्दु। सहज काम दिया है या मुश्किल? तो फिर कभी-कभी क्यों करते हो? *सहज काम तो सदा' हो सकता है ना।* जब बाप भी बिन्दु, आप भी बिन्दु काम भी बिन्दु से है तो बिन्दु को याद करना चाहिए। तो अभी डॉट को नहीं भूलना बोझ नहीं उठाना। अच्छा! यह वैरायटी गुलदस्ता है।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  अव्यक्त में सर्विस कैसे होती है- यह अनुभव होता जाता है? अव्यक्त में सर्विस का साथ कैसे सदैव रहता है यह भी अनुभव होता है? *जो वायदा किया है कि स्नेही आत्माओं के हर सेकेण्ड साथ ही हैं, ऐसे सदैव साथ का अनुभव होता है? सिर्फ रूप बदला है लेकिन कर्तव्य वही चल रहा है।* जो भी स्नेही बच्चे हैं उन्हों के ऊपर छत्र रूप में नज़र आता है। छत्रछाया के नीचे सभी कार्य चल रहा है- ऐसी भासना आती है। *व्यक्त से अव्यक्त, अव्यक्त से व्यक्त में आना यह सीढ़ी उतरना और चढ़ना जैसे आदत पड़ गई है। अभी-अभी वहाँ, अभी-अभी यहाँ। जिसकी ऐसी स्थिति हो जाती है, अभ्यास हो जाता है उसको यह व्यक्त देश भी जैसे अव्यक्त भासता है। स्मृति और दृष्टि बदल जाती है।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- ईश्वरीय स्नेह से जीवन परिवर्तन करना"*

 

_ ➳  *मधुबन... श्रेष्ठ भूमि पर... मीठे बाबा के कमरे में रुहरिहान करने के लिये... जब मैं आत्मा... पांडव भवन के प्रांगण में पहुँचती हूँ... सुंदर सतयुग और मनमोहिनी सूरत... श्रीकृष्ण को सामने देख पुलकित हो उठती हूँ...* मीठे बाबा ने ज्ञान के तीसरे नेत्र को देकर... चित्रो में चैतन्यता को सहज ही दिखाया है... भक्ति में सबकुछ कल्पना मात्र लगता था... परन्तु आज बाबा की गोद में बैठकर... हर नज़ारा दिल के कितने करीब है... *बाबा ने सतयुगी दुनिया के ये प्यारे नज़ारे मेरे नाम लिख दिये हैं... मन के यह भाव... मीठे बाबा को सुनाने मैं आत्मा... कमरे की और बढ़ चलती हूँ...*

 

  *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपने महान भाग्य की खुशी से भरते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... *इस ऊँचे स्थान... मधुबन में, ऊँची स्थिति पर, ऊँची नॉलेज से, ऊँचे ते ऊँचे बाप की याद में, ऊँचे ते ऊँची सेवा स्मृति स्वरूप रहोंगे तो सदा समर्थ रहोगे..."* जहाँ समर्थ है वहाँ व्यर्थ सदा के लिये समाप्त हो जाता है... *इसलिये मधुबन श्रेष्ठ भूमि पर... बाप के साथ सदा सच्चे स्नेही बनकर रहना..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा प्यारे बाबा के ज्ञान रत्नों को अपनी झोली में समेटते हुए कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा... मैं आत्मा अपने मीठे भाग्य पर क्यों न इतराऊ... कि स्वयं भगवान ने मुझे अपनी *फूलो की बगिया में बिठा कर... मुझे भी सुंदर खिलता हुआ फूल बना दिया है... आपने मेरा जीवन सत्य की रोशनी से भर दिया है..."*

 

 ❉ *बाबा ने मुझ आत्मा को विश्वकल्याणकारी की भावना से ओतप्रोत बनाते हुए कहा :-* "मीठी लाडली बच्ची... ईश्वर पिता को पाकर, अब अपनी हर श्वांस को ईश्वरीय यादों में पिरो दो... *जब भी तुम ड्रामा के हर दृश्य को ड्रामा चक्र संगमयुगी टॉप पर स्थित हो कुछ भी देखोगी तो स्वतः ही अचल, अडोल रहोगी...* तुम तो कल्प पहले वाली... स्नेही, सहयोगी, अटल, अचल स्थिति में रहने वाली विजयी आत्मा हो..."

 

_ ➳  *मैं आत्मा ईश्वरीय यादों के खजानों से सम्पन्न होकर, मीठे बाबा से कहती हूँ :-"मीठे मीठे बाबा...* आपने मुझ आत्मा के जीवन में आकर... विश्व कल्याण की सुंदर भावना से भर दिया है... मैं आत्मा *आपसे सच्चा स्नेह रख सबके जीवन से दुःखों की लहर निकाल... सुख की किरणें फैलाती हूँ... सबके जीवन में आनंद और खुशियों के फूल खिला रही हूँ..."*

 

  *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को ज्ञान रत्नों से भरपूर करते हुए कहा :-* "मीठी बच्ची... *जहाँ सच्चा, श्रेष्ठ स्नेह है... वहाँ दुःख की लहर आ नही सकती...* परिवार के स्नेह के धागे में तो सभी बंधे हुए हो, लेकिन अब सच्चे सच्चे शिवबाबा की लग्न में मगन... *सदा एक की याद में रह... कभी भी क्या, क्यों के संकल्प में फंस नहीं जाना... नहीं तो सब व्यर्थ के खाते में जमा हो जायेगा..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा मीठे बाबा के सच्चे प्यार में दिल से कुर्बान होकर कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे मेरे बाबा... मैं आत्मा आपसे सच्चा स्नेह... सच्चा सुख पाकर धन्य धन्य हो गयी हूँ... *मीठे बाबा... आपने तो मेरे जीवन को दुःखों से सुलझाया है...* और सच्चे प्यार और मीठे ज्ञान रत्नों से सजाया है... *मैं आत्मा अब आपका साथ कभी भी नहीं छोडूंगी...* मीठे बाबा से सदा साथ रहने का वायदा करके मैं आत्मा... अपने कर्मक्षेत्र पर वापिस लौट आई..."

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  आत्माओं को सहयोगी और सहजयोगी बनाना*

 

_ ➳  बापदादा के ट्रांसलाइट के चित्र के सामने बैठी मैं बड़े प्यार से अपने प्यारे ब्रह्मा बाप को निहार रही हूँ और मन ही मन उनका धन्यवाद कर रही हूँ जिनके शरीर रूपी रथ का आधार स्वयं भगवान ने हम बच्चों से मिलने के लिए लिया। *बलिहारी ब्रह्मा बाप की जिन्होंने निश्चय बुद्धि बन सम्पूर्ण समर्पण भाव से अपना तन - मन - धन सब कुछ ईश्वरीय सेवा में समर्पित कर दिया और परमात्मा की श्रीमत पर चल अपने संकल्प बोल और कर्म को इतना श्रेष्ठ बना लिया कि उनमे और भगवान में जैसे अन्तर ही समाप्त हो गया और वे स्वयं ही भगवान का स्वरूप बन गए*। इसलिए उनके सम्बन्ध सम्पर्क में आने वाली हर आत्मा को ये आभास होता था कि ये कोई साधारण व्यक्ति नही बल्कि कोई अद्भुत शक्ति बोल रही है। चलते - फिरते हर कर्म करते ब्रह्मा बाबा ऐसे दिखाई देते थे जैसे कोई फ़रिश्ता हो।

 

_ ➳  ऐसे ब्रह्मा बाप समान बनने का दृढ़ संकल्प अपने मन मे करते हुए मैं अपने आप से प्रतिज्ञा करती हूँ कि अब मुझे हर कदम फॉलो फादर करते हुए, अपने संकल्प, बोल और कर्म को ऐसा श्रेष्ठ बनाना है जो मेरे श्रेष्ठ वायब्रेशन्स आत्माओं को परमात्म पालना का डायरेक्ट अनुभव करवायें ताकि *सभी के मुख से निकले कि हमने सिर्फ सुना नही लेकिन साक्षात बाप की झलक अनुभव की। अनुभव कराना है, अनुभवी बनाना है यही लहर चारों और फैलाकर भगवान बाप को प्रत्यक्ष करना ही अब मेरे इस ब्राह्मण जीवन का लक्ष्य है*। इसी लक्ष्य को पाने का तीव्र और अंतिम पुरुषार्थ अब मुझे करना है।

 

_ ➳  मन ही मन स्वयं से प्रतिज्ञा कर, उसे दृढ़ता का ठप्पा लगाने के लिए, स्वयं को परमात्म बल से भरपूर करने के लिए मैं अपने लाइट माइट स्वरूप में स्थित होकर, अपने फ़रिश्ता स्वरूप को धारण कर, अव्यक्त बापदादा के अव्यक्त वतन की और प्रस्थान करता हूँ। *सारे विश्व का चक्कर लगाता हुआ मैं फ़रिश्ता पाँच तत्वों की बनी साकारी दुनिया को पार कर, आकाश को पार करके उससे ऊपर पहुँच जाता हूँ अपने अव्यक्त बापदादा अव्यक्त वतन में*। देख रहा हूँ मैं अपने बिल्कुल सामने बापदादा को जो अपनी स्नेह भरी दृष्टि से निहारते हुए मुझ पर बलिहार जा रहें हैं। जिस भगवान पर दुनिया बलिहार जाती है वो भगवान अपने बच्चों पर कैसे बलिहार जाता है, यह देख कर मन खुशी से गदगद हो रहा है।

 

_ ➳  अपने लाइट माइट स्वरूप में मैं फ़रिश्ता अब बापदादा के पास पहुँचता हूँ और जा कर उनकी बाहों में समा जाता हूँ। *बाबा की बाहों के झूले में झूलते हुए  अतीन्द्रिय सुखमय स्थिति का मैं अनुभव कर रहा हूँ। जैसे एक छोटा बच्चा माँ की गोद मे स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है ऐसे ही बापदादा की ममतामयी गोद मे बैठ, उनके प्रेम की शीतल छाया में मैं गहन सुख का अनुभव कर रहा हूँ*। परमात्म गोद का सुख मुझे मेरे सर्वश्रेष्ठ भाग्य की स्मृति दिला रहा है। अपने भाग्य पर नाज करता हुआ मैं फ़रिश्ता अब परमात्म शक्तियों से स्वयं को भरपूर कर रहा हूँ। *अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रखकर सदा विजयी भव का वरदान देते हुए बापदादा अपनी शक्तियों से मुझे बलशाली बना रहे हैं*।

 

_ ➳  परमात्म शक्तियों और वरदानो से भरपूर होकर अपने लाइट माइट स्वरूप और निमितपन की स्मृति के साथ, ईश्वरीय कर्तव्य को पूरा करने के लिए मैं वापिस साकारी दुनिया में लौट आती हूँ। *अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर, मुख से सबको ज्ञान रत्नों का दान देने के साथ - साथ अपनी शक्तिशाली स्व स्थिति द्वारा अनुभवीमूर्त बन

अपने श्रेष्ठ वायब्रेशन्स द्वारा अब मैं सबको परमात्म प्यार और परमात्म पालना का अनुभव बिल्कुल सहज रीति करवा रही हूँ*।

अपने श्रेष्ठ संकल्प, बोल और कर्म द्वारा श्रेष्ठ योगी की लहर, महातपस्वीमूर्त की लहर, साक्षात्कारमूर्त बनने की लहर, और रूहानियत की लहर चारों और फैलाते हुए,

आत्माओं को अनुभव कराने की रेस द्वारा बाबा की प्रत्यक्षता में सहयोगी बनने का गोल्डन चान्स लेकर अपनी ऊँच तकदीर मै सहजता से बनाती जा रही हूँ।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं  नॉलेजफुल की विशेषता द्वारा संस्कारों के टक्कर से बचने वाली आत्मा हूँ।*

✺   *मैं कमल पुष्प समान न्यारी व साक्षी भाव आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं आत्मा हठ वा मेहनत करने से सदैव मुक्त हूँ  ।*

✺   *मैं आत्मा सदा रमणीकता से पुरुषार्थ करती हूँ  ।*

✺   *मैं तीव्र पुरुषार्थी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  *विश्व में एक तरफ भ्रष्टाचार, अत्याचार की अग्नि होगी, दूसरे तरफ आप बच्चों का पावरफुल योग अर्थात् लगन की अग्नि ज्वाला रूप में आवश्यक है*। यह ज्वाला रूप इस भ्रष्टाचार, अत्याचार के अग्नि को समाप्त करेगी और सर्व आत्माओं को सहयोग देगी। *आपकी लगन ज्वाला रूप की हो अर्थात् पावरफुल योग होतो यह याद की अग्निउस अग्नि को समाप्त करेगी और दूसरे तरफ आत्माओं को परमात्म सन्देश कीशीतल स्वरूप की अनुभूति करायेगी*। बेहद की वैराग्य वृत्ति प्रज्जवलित करायेगी। एक तरफ भस्म करेगी दूसरे तरफ शीतल भी करेगी। *बेहद के वैराग्य की लहर फैलायेगी*।

 

 _ ➳  बच्चे कहते हैं - मेरा योग तो हैसिवाए बाबा के और कोई नहींयह बहुत अच्छा है। परन्तु *समय अनुसार अभी ज्वाला रूप बनो*। *जो यादगार में शक्तियों का शक्ति रूप, महाशक्ति रूप, सर्व शस्त्रधारी दिखाया है, अभी वह महा शक्ति रूप प्रत्यक्ष करो*। चाहे पाण्डव हैंचाहे शक्तियां हैं, सभी सागर से निकली हुई ज्ञान नदियां हो, सागर नहीं होनदी हो। ज्ञान गंगाये हो।तो *ज्ञान गंगायें अब आत्माओं को अपने ज्ञान की शीतलता द्वारा पापों की आग से मुक्त करो*। यह है वर्तमान समय का ब्राह्मणों का कार्य।

 

✺   *ड्रिल :-  "ज्वाला रूप की योग अग्नि से भ्रष्टाचार, अत्याचार की अग्नि को समाप्त करना"*

 

 _ ➳  भृकुटी की कुटिया में बैठी मैं शिव सूर्य को एकटक निहारती हुई... *उनके रूहानी नयनों के प्यालों से बहता रूहानी प्रकाश... शक्तियों को मेरे रोम-रोम में भरता हुआ*... प्रकाश की एक तीव्र धारा मेरे मस्तिष्क में समाती हुई... *मन के सभी प्रकार के व्यर्थ के अंश को भस्म करती हुई... किसी तेज शावर की तरह यह मस्तिष्क से आँखों तक पहुँच रही है, और आँखो में बसे हर भ्रष्ट आचरण के अंश को पूरी तरह नष्ट कर रही है*... और बस आँखों में एक की ही सूरत... और उसी से लगी है पूरी लगन... बाकी अन्य सभी लगन विदाई लेती हुई... ये तेज शावर सभी ज्ञानेन्द्रियों से विकार के अंश को जलाकर भस्म कर रहा है... प्रकाश की दूसरी धारा शीतल पावन गंगाजल की भाँति मेरे रोम रोम में शीतलता प्रवाहित करती हुई... विकारों की भस्म को धोकर पूरी तरह साफ करती हुई...

 

 _ ➳  किसी पारदर्शी पावन दर्पण की तरह जगमगा उठा है मेरा अस्तित्व... शीशे की दीवारो में जगमगाती हुई जैसे कोई जगमग ज्योति... *एक विशाल ज्योति के रूप में मेरे ठीक ऊपर शिव पिता... मेरे साथ साथी बनकर*... सैकडों मील दूर तक फैली आकाश गंगा की भाँति उनसे निरन्तर मुझ तक आती हुई प्रकाश की धारा... और अब *ये प्रकाश ज्वाला का रूप धारण कर सारी सीमाओं को तोडता हुआ स्वछन्दता से आस पास के वातावरण में फैल रहा है... दूर दूर तक फैले हुए भ्रष्टाचार, और अत्याचार के कंटीले जंगल को जलाता हुआ*...  उसके अंश को भस्म करता हुआ... *ये घने कैक्टस की झाडियाँ, ये विषैली नागफनियाँ*... जिन्होनें  शिष्टाचार की कोमल कलियों को बंधक बना लिया था... आज जलकर भस्म हो रही है... शिव के साथ निरन्तर कम्बांइन्ड रूप में, मैं आत्मा शीतलता की धारा से इन कोमल कलियों को शीतल कर रही हूँ... मुक्त हुई ये कलियाँ बेहद के वैराग्य से भरकर निहार रही है शिव पिता की ओर... और हर एक अपने शक्ति स्वरूप को इमर्ज कर महाशक्ति रूप धारण कर रही है... देखते ही देखते इनसे एक साथ असंख्य ज्वालाएँ प्रकट होकर चारों दिशाओं में फैल गयी है... भ्रष्टाचार के वंश मात्र को भस्म करती हुई...

 

 _ ➳  और अब मैं आत्मा, शीतल गंगा की धारा बन, भ्रष्टाचार की इस भस्म को, इन पाँच तत्वों से बहुत दूर बहाकर ले जा रही हूँ... अपने पीछे की सृष्टि को सतोप्रधान बनाती हुई... एक नई ऊर्जा से भरकर ये धरा मुस्कुरा रही है... *सदाचार और नैतिकता के नन्हें अंकुर इसकी गोद में मुस्कुरानें लगें है... हवाऐं सौरभ लेकर गुनगुना रही है... मानों जगती का चप्पा चप्पा आज यही कह रहा है... जन्नत ने द्वार खटखटाया है आज... खोल सखी पट घूँघट के संदेशा प्रियतम का कोई लाया है आज*... निरन्तर अटैन्शन से, मैं आत्मा शिव बाबा के साथ कम्बाइन्ड रूप में... अब प्रवेश कर रही हूँ अपनी शीशे के समान पारदर्शी देह में... शिव शक्ति रूप में हर भ्रष्ट संकल्प के प्रति अटैन्शन रखती हुई... ओम शान्ति...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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