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 09 / 01 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *"हम भगवान के बच्चे हैं... वही हमको पढाते हैं" - इसी नशे में रहे ?*

 

➢➢ *प्राप्ति स्वरुप बन क्या क्यों के प्रश्नों से पार रहे ?*

 

➢➢ *परमात्म प्यार में लवलीन रह माया की आकर्षण को समाप्त किया ?*

 

➢➢ *कर्म करते हुए आत्माओं को देह से न्यारा, सूक्षम प्रकाश रूप की अनुभूति कराई ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *अशरीरी बनने के लिए समेटने की शक्ति बहुत आवश्यक है।* अपने देह-अभिमान के संकल्प को, देह के दुनिया की परिस्थितियों के संकल्प को समेटना है। शरीर और शरीर के सर्व सम्पर्क की वस्तुओं को, अपनी आवश्यकताओं के साधनों की प्राप्ति के संकल्प को भी समेटना है। *घर जाने के संकल्प के सिवाय अन्य किसी संकल्प का विस्तार न हो-बस यही संकल्प हो कि अब अपने घर गया कि गया।* अनुभव करो कि मैं आत्मा इस आकाश तत्व से भी पार उड़ती हुई जा रही हूँ, इसके लिये अब से अकाल तख्तनशीन होने का अभ्यास बढ़ाओ।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं अंधकार में रोशनी करने वाला चैतन्य दीपक हूँ"*

 

   अपने को सदा जगे हुए दीपक समझते हो? *आप विश्व के दीपक, अविनाशी दीपक हो जिसका यादगार अभी भी 'दीपमाला' मनाई जाती है। तो यह निश्चय और नशा रहता है कि हम दीपमाला के दीपक हैं? अभी तक आपकी माला कितनी सिमरण करते रहते हैं?* क्यों सिमरण करते हैं? क्योंकि अधंकार को रोशन करने वाले बने हो। स्वयं को ऐसे सदा जगे हुए दीपक अनुभव करो। टिमटिमाने वाले नहीं। 

 

  *कितने भी तूफान आयें लेकिन सदा एकरस, अखण्ड ज्योति के समान जगे हुए दीपक। ऐसे दीपकों को विश्व भी नमन करती है और बाप भी ऐसे दीपकों के साथ रहते हैं।*

 

  टिमटिमाते दीपकों के साथ नही रहते। *बाप जैसे सदा जागती ज्योति है, अखण्ड ज्योति है, अमर ज्योति है, ऐसे बच्चे भी सदा अमरज्योति! अमर ज्योति के रुप में भी आपका यादगार है। चैतन्य में बैठे अपने सभी जड़यादगारों को देख रहे हो। ऐसी श्रेष्ठ आत्मायें हो।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  संस्कार के ऊपर भी कन्ट्रोल होना चाहिए। जब चाहो, जैसे चाहो - जब यह अभ्यास पक्का होगा तब समझो पास विद ऑनर होंगे। तो *बनना लक्ष्मी-नारायण है, तो राज्य कन्ट्रोल करने के पहले स्व-राज्य अधिकारी तो बनो तब राज्य अधिकारी बनेंगे।*

 

✧  इसका भी साधन यही है कि खजाने जमा करो। समझा। अच्छा - इस वायुमण्डल में, मधुबन में बैठे हो। *मधुबन का वायुमण्डल पॉवरफुल है, इस वायुमण्डल में इस समय मन को कन्ट्रोल कर सकते हो?*

 

✧  चाहे मिनट में करो, चाहे सेकण्ड में करो लेकिन कर सकते हो? *ऑर्डर दो मन को, बस आत्मा परमधाम निवासी बन जाओ।* देखो मन ऑर्डर मानता है या नहीं मानता है? (बापदादा ने ड़िल कराई) अच्छा।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *फ़रिश्ते अर्थात् इच्छा मात्रम अविद्या।* जैसे देवताओं के लिए गायन है- इच्छा मात्रम् अविद्या। यह है फ़रिश्ता जीवन की विशेषता। देवताई जीवन में तो इच्छा की बात ही नहीं। *ब्राह्मण जीवन सो फ़रिश्ता जीवन बन जाती अर्थात् कर्मातीत स्थिति को प्राप्त हो जाते।* किसी भी शुद्ध कर्म वा व्यर्थ कर्म वा विकर्म वा पिछला कर्म, किसी भी कर्म के बन्धन में बंध कर करना- इसको कर्मातीत अवस्था नहीं कहेंगे। एक है कर्म का सम्बन्ध, एक है बन्धन। तो जैसे यह गायन है- हद की इच्छा से अविद्या, ऐसे फ़रिश्ता जीवन वा ब्राह्मण जीवन अर्थात् 'मुश्किल' शब्द की अविद्या, बोझ से अविद्या, मालूम ही नहीं कि वह क्या होता है! *तो वरदानी आत्मा अर्थात् मुश्किल जीवन से अविद्या का अनुभव करने वाली।* इसको कहा जाता है- वरदानी आत्मा। तो *बाप समान बनना अर्थात् सदा वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों से पलना, सदा निश्चिन्त, निश्चित विजय अनुभव करना।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- बाबा को प्यार से याद कर श्रीमत पर सदा चलना"*

 

_ ➳  *अमृतवेले के रूहानी समय में मैं आत्मा बगीचे के झूले में बाबा की गोदी में बैठी हूँ... बाबा की गोदी के झूले में झूलती हुई उनके रूहानी प्यार में समाती जा रही हूँ...* अभी तक जिस भगवान को ढूंढ रही थी, दुनिया वाले जिसे अभी भी ढूंढ रहे हैं, अब मैं भाग्यशाली आत्मा उनकी गोद में बैठ उनकी पालना और शिक्षाएं ले रही हूँ... मीठे बाबा प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए मुझे वरदानों, खजानों से भरपूर करते हैं... *मैं आत्मा बाबा का दिल से शुक्रिया करती हुई उनसे रूह-रिहान करती हूँ... बाबा मुझे अपनी श्रेष्ठ मत देकर श्रेष्ठ बनाते हैं...*

 

  *प्यार के मीठे तराने सुनाकर प्रेम रस में मुझे भिगोते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* "मेरे मीठे फूल बच्चे... साधारण मनुष्य मात्र से खुबसूरत देवताई राज्य भाग्य वाले... महानतम भाग्य को पा रहे हो... तो श्रीमत के हाथ को सदा थाम कर दिल से शुक्रिया के नगमे गुनगुनाते रहो... *सच्चे प्यार के सागर से हर पल प्रेम सुधा का रसपान करो... और रूहानी प्रेम की बदली बन विश्व धरा को सिक्त करो...."*

 

_ ➳  *प्यारे प्रभु का साथ पाकर उनके हाथों में हाथ डालकर मैं आत्मा कहती हूँ:-* "हाँ मेरे प्यारे बाबा... मैं आत्मा आपके सच्चे प्यार की चन्दन महक में खोयी सी विश्व धरा को प्रेम तरंगो से सराबोर कर रही हूँ... *श्रीमत के मखमली हाथो में बेफिक्र सी खुशियो के अनन्त आसमाँ में झूम रही हूँ... सच्चे प्रेम में खोकर मदमस्त हो गई हूँ..."*

 

  *प्यार के चन्दन से मेरे जीवन फुलवारी को महकाकर खुशियों से मेरी झोली भरते हुए मीठे बाबा कहते हैं:-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... जिस ईश्वर पिता की खोज में दर दर भटक रहे थे... *आज उनकी फूलो सी गोद में देवताई स्वरूप को पा रहे हो... तो ऐसे मीठे बाबा पर दिल का सारा स्नेह उंडेल कर... सच्चे प्रेम का पर्याय बन जाओ... श्रीमत को दिल की गहराइयो से अपनाकर जीवन को सुखो के स्वर्ग में बदल दो..."*

 

_ ➳  *बाबा की श्रीमत पर चलते हुए दैवीय गुणों की धारणा करते हुए मैं आत्मा कहती हूँ :-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... मैं आत्मा आपकी बाँहों में अनन्त सुखो की हकदार हो गई हूँ... प्यारे बाबा सुख की एक बून्द को कभी व्याकुल *मै आत्मा,आज आपकी यादो में देवताओ सा निखर रही हूँ...मनुष्य मत पर पाये दुखो के दलदल से निकल श्रीमत से सम्पूर्ण सुखी हो गयी हूँ..."*

 

  *अपने पलकों पर बिठाकर मेरे भाग्य को संवारते हुए मीठे प्यारे बाबा कहते हैं:-* "मेरे सिकीलधे मीठे बच्चे... ईश्वर पिता मनुष्य से देवताओ सा श्रृंगार कर... स्वर्गधरा पर सजा रहे है... *ऐसे मीठे पिता का रोम रोम से शुक्रिया कर... सच्चे प्यार से दिल, सदा का आबाद करो... सच्ची मत को अपनाकर... दिव्यता से सम्पन्न हो, अनोखे सुखो को दामन में भर लो..."*

 

_ ➳  *बाबा के प्यार की लहरों में लहराती हुई स्वर्ग सुखों की अधिकारी बन मैं आत्मा कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... *मैं आत्मा किन शब्दों में आपकी दरियादिली का शुक्रिया करूँ... मीठे बाबा मेरे, मै आत्मा तो दुखो को ही अपनी तकदीर मान ली थी... आपने तो मुझे देवतुल्य बना दिया है...* और असीम मीठे सुखो से मेरा जीवन संवार दिया है..."

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- दैवी गुणों की धारणा और पढ़ाई पर पूरा अटेंशन दे अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करना है*"

 

_ ➳  एकांत में अंतर्मुखी बन कर बैठी मैं ब्राह्मण आत्मा विचार करती हूँ कि मेरा यह जीवन जो कभी हीरे तुल्य था आज रावण की मत पर चलने से कैसा कौड़ी तुल्य बन गया है! *दैवी गुणों से सम्पन्न थी मैं आत्मा और आज आसुरी अवगुणों से भर गई हूँ। रावण रूपी 5 विकारों की प्रवेशता ने मेरे दैवी गुण छीन कर मेरे अंदर काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहँकार पैदा कर मेरे जीवन को ही श्रापित कर दिया है और अब जबकि स्वयं भगवान आकर मेरे इस श्रापित जीवन से मुझे छुड़ा कर फिर से पूज्य देवता बना रहे हैं तो मेरा भी यह परम कर्तव्य बनता है कि उनकी श्रेष्ठ मत पर चल कर, अपने जीवन मे दैवी गुणों को धारण कर अपने जीवन को पलटा कर भविष्य जन्म जन्मान्तर के लिए सुख, शांति और पवित्रता का वर्सा उनसे ले लूँ*। मन ही मन इन्ही विचारो के साथ अपने दैवी गुणों से सम्पन्न स्वरूप को मैं स्मृति में लाती हूँ और अपने उस अति सुन्दर दिव्य स्वरूप को मन बुद्धि के दिव्य चक्षु से निहारने मे मगन हो जाती हूँ।

 

_ ➳  दैवी गुणों से सजा मेरा पूज्य स्वरूप मेरे सामने है। लक्ष्मी नारायण जैसे अपने स्वरूप को देख मैं मन ही मन आनन्दित हो रही हूँ। अपने सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पूर्ण, सम्पूर्ण निर्विकारी, मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप में मैं बहुत ही शोभायमान लग रही हूँ। *मेरे चेहरे की हर्षितमुखता, नयनो की दिव्यता, मुख मण्डल पर पवित्रता की दिव्य आभा मेरे स्वरूप में चार चांद लगा रही है। अपने इस अति सुन्दर स्वरूप का भरपूर आनन्द मैं ले रही हूँ । मन ही मन अपनी इस ऐम ऑब्जेक्ट को बुद्धि में रख, ऐसा बनने की मन मे दृढ़ प्रतिज्ञा कर, अपने जीवन को पलटाने के लिए दैवी गुणों को धारण करने का संकल्प लेकर, पुजारी से पूज्य बनाने वाले अपने परमपिता परमात्मा का दिल की गहराइयों से मैं शुक्रिया अदा करती हूँ* और 63 जन्मो के आसुरी अवगुणों को योग अग्नि में दग्ध करने के लिए अपने प्यारे पिता की याद में अब सम्पूर्ण एकाग्रचित होकर बैठ जाती हूँ।

 

_ ➳  एकाग्रता की शक्ति जैसे - जैसे बढ़ने लगती है मेरा वास्तविक स्वरूप मेरे सामने पारदर्शी शीशे के समान चमकने लगता है और अपने स्वरूप का मैं आनन्द लेने में व्यस्त हो जाती हूँ। एक चमकते हुए बहुत ही सुन्दर स्टार के रूप में मैं स्वयं को देख रही हूँ। *उसमे से निकल रही रंगबिरंगी किरणें चारों और फैलते हुए बहुत ही आकर्षक लग रही हैं। उन किरणों से मेरे अंदर समाये गुण और शक्तियों के वायब्रेशन्स जैसे - जैसे मेरे चारों और फैल रहें है, एक सतरंगी प्रकाश का खूबसूरत औरा मेरे चारो और बनता जा रहा है*। प्रकाश के इस खूबसूरत औरे के अंदर मैं स्वयं को ऐसे अनुभव कर रही हूँ जैसे किसी कीमती खूबसूरत जगमगाती डिब्बी के अंदर कोई बहुमूल्य हीरा चमक रहा हो और अपनी तेज चमक से उस डिब्बी की सुंदरता को भी बढ़ा रहा हो।

 

_ ➳  सर्वगुणों औऱ सर्वशक्तियों की किरणें बिखेरते अपने इस सुन्दर स्वरूप का अनुभव करके और इसका भरपूर आनन्द लेकर अब मैं चमकती हुई चैतन्य शक्ति देह की कुटिया से निकल कर, स्वयं को कौड़ी से हीरे तुल्य बनाने वाले अपने प्यारे शिव बाबा के पास उनके धाम की ओर चल पड़ती हूँ। *प्रकाश के उसी खूबसूरत औरे के साथ मैं ज्योति बिंदु आत्मा अपनी किरणे बिखेरती हुई अब धीरे - धीरे ऊपर उड़ते हुए आकाश में पहुँच कर, उसे पार करके, सूक्ष्म वतन से होती हुई अपने परमधाम घर मे पहुँच जाती हूँ*। आत्माओं की इस निराकारी दुनिया में चारों और चमकती जगमग करती मणियों के बीच मैं स्वयं को देख रही हूँ। चारों और फैला मणियो का आगार और उनके बीच मे चमक रही एक महाज्योति। ज्ञानसूर्य शिव बाबा अपनी सर्वशक्तियों की अनन्त किरणे फैलाते हुए इन  चमकते हुए सितारों के बीच बहुत ही लुभावने लग रहे हैं। *उनकी सर्वशक्तियों की किरणों का तेज प्रकाश पूरे परमधाम घर मे फैल रहा है जो हम चैतन्य मणियों की चमक को कई गुणा बढ़ा रहा है*।

 

_ ➳  अपने प्यारे पिता के इस सुंदर मनमनोहक स्वरूप को देखते हुए मैं चैतन्य शक्ति धीरे - धीरे उनके नजदीक जाती हूँ और उनकी सर्वशक्तियों की किरणों रूपी बाहों में ऐसे समा जाती हूँ जैसे एक बच्चा अपनी माँ के आंचल में समा जाता है। मेरे पिता का प्यार उनकी अथाह शक्तियों के रूप में मेरे ऊपर निरन्तर बरस रहा है। *मेरे पिता के निस्वार्थ, निष्काम प्यार का अनुभव, उनका प्यार पाने की मेरी जन्म - जन्म की प्यास को बुझाकर मुझे तृप्त कर रहा है। परमात्म प्यार से भरपूर होकर योग अग्नि में अपने विकर्मों को दग्ध करने के लिए अब मैं बाबा के बिल्कुल समीप जा रही हूँ और उनसे आ रही जवालास्वरूप शक्तियों की किरणों के नीचे बैठ, योग अग्नि में अपने पुराने आसुरी स्वभाव संस्कारों को जलाकर भस्म कर रही हूँ*। बाबा की शक्तिशाली किरणे आग की भयंकर लपटों का रूप धारण कर मेरे चारों और जल रही है, जिसमे मेरे 63 जन्मो के विकर्म विनाश हो रहें हैं और मैं आत्मा शुद्ध पवित्र बन रही हूँ।

 

_ ➳  सच्चे सोने के समान शुद्ध और स्वच्छ बनकर अपने प्यारे पिता की श्रेष्ठ मत पर चल कर, अब मैं अपने जीवन को पलटाने और श्रेष्ठ बनाने के लिए स्वयं में दैवी गुणों की धारणा करने के लिए फिर से साकार सृष्टि पर लौट आती हूँ और अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर पूज्य बनने के पुरुषार्थ में लग जाती हूँ। *अपने आदि पूज्य स्वरूप को सदा स्मृति में रखते हुए, बाबा की याद से पुराने आसुरी स्वभाव संस्कारों को दग्ध कर, नए दैवी संस्कार बनाने का पुरुषार्थ करते हुए अब मैं स्वयं का परिवर्तन बड़ी सहजता से करती जा रही हूँ*

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं परमात्म प्यार में लवलीन रहकर माया की आकर्षण समाप्त करने वाली सहजयोगी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं प्राप्ति स्वरूप बन क्यों, क्या के प्रश्नों से पार रहने वाली सदा प्रसन्नचित आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  औरों के सेवा की बहुत-बहुत बहुत-बहुत आवश्यकता है। यह तो कुछ भी नही हैबहुत नाजुक समय आना ही है। ऐसे समय पर *आप उड़ती कला द्वारा फरिशता बन चारों ओर चक्कर लगाते, जिसको शान्ति चाहिएजिसको खुशी चाहिएजिसको सन्तुष्टता चाहिएफरिशते रूप मे साकाश देने का चक्कर लगायेंगे* और वह अनुभव करेंगे। जैसे अभी अनुभव करते है नापानी मिल गया बहुत प्यास मिटी। खाना मिल गयाटेन्ट मिल गयासहारा मिल गया। ऐसे अनुभव करेंगे शांति मिल गई फरिशतों द्वारा। शक्ति मिल गई। खुशी मिल गई। *ऐसे अन्तःवाहक अर्थात् अन्तिम स्थितिपावरफुल स्थिति आपका अन्तिम वाहन बनेगा। और चारों ओर चक्कर लगाते सबको शक्तियाँ देंगे। साधन देंगे।* अपना रूप सामने आता है । *इमर्ज करो। कितने फरिस्ते चक्कर लगा रहे है! सकाश दे रहे है,* तब कहेंगे जो आप एक गीत बजाते हो ना - *शक्तियां आ गई... शक्तियों द्वारा ही सरवशक्तिवान स्वतः ही सिद्ध हो जायेगा। सुना।*

 

✺   *ड्रिल :-  "अपने अन्तः वाहक शरीर द्वारा सेवा का अनुभव"*

 

 _ ➳  देख रही हूँ मैं आत्मा स्वयं को एक बड़ी सी ऊंची पहाड़ी पर प्रकृति के सानिध्य में बैठे हुए... चारों तरफ एक गहन शांति है... कोई आवाज नहीं... *अब मैं आत्मा चलती हूँ अन्तर यात्रा की ओर... समस्त चेतना को भृकुटि के मध्य केन्द्रित करती हूँ...* केवल अपने इस ज्योतिमय स्वरूप को देख रही हूँ *मैं आत्मा, महसूस कर रही हूँ अपने इस प्रकाशमय स्वरूप को बहुत गहराई से...* जितना गहराई से मैं आत्मा अपने इस स्वरूप को अनुभव करती जा रही हूँ उतना ही *मुझ आत्मा की आंतरिक शक्तियाँ जागृत हो रही है... मुझ आत्मा का प्रकाश बढ़ रहा है...* देख रही हूँ मैं आत्मा अपने इस जगमगाते शक्तिशाली स्वरूप को... तभी मुझ आत्मा की मन रूपी स्लेट पर बाबा के द्वारा कहे महावाक्य उभरने लगते है...

 

 _ ➳  *अन्त:वाहक अर्थात अन्तिम स्थिति, पावरफुल स्थिति आपका अन्तिम वाहन बनेगा । इमर्ज करो अपना यह स्वरूप इमर्ज करो* यह शब्द जैसे कानों में गुंजने लगते है... *मैं आत्मा ड्रामा की रिल को फारवर्ड करती हूँ... और अब मैं आत्मा पहुंच चुकी हूँ, ड्रामा के उस अन्तिम चरण में जहाँ चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है... बेहद दर्दनाक सीन सामने आ रहे हैं... आत्माएँ चिल्ला रही है... रो रही है...* दु:खों के पहाड़ उनके जीवन पर गिर पड़े है... *प्रकृति भी अपना विकराल रूप दिखा रही है... चारों तरफ प्रकृति का प्रकोप है... ना कोई साधन कार्य कर रहे है... ना ही विनाशी धन काम आ रहा है...* एक पल की शांति, खुशी की प्यासी आत्माएँ भटक रही है...

 

 _ ➳  उन्हें कहीं से कोई आशा की किरण नजर नहीं आ रही है... *जहाँ-तहाँ आत्माएँ दर्द में चिल्ला रही है... इस दुनिया की अन्तिम सीन बेहद दर्दनाक है...* आत्माएँ तड़फ रही है... उनकी आँखों में दर्द-दु:ख साफ दिखाई दे रहा है... *इसी अन्तिम सीन में मैं आत्मा देख रही हूँ स्वयं को... अपनी बेहद पावरफुल स्टेज को... अपनी इस अन्तिम स्थितिकर्मातीत स्टेज को... यहाँ रहते भी साक्षी दृष्टा हर प्रकार से उपराम अवस्था का अनुभव मैं आत्मा कर रही हूँ...* देख रही हूँ मैं आत्मा अपने इस शक्ति स्वरूप को... जिसमें *संहारी और अलंकारी दोनों स्वरूप एक साथ इमर्ज रूप में है... देख रही हूँ अपने इस कम्बाइंड शिवशक्ति स्वरूप को... लाइट माइट सम्पन्न इस स्थिति को... अपनी इस फरिश्ता स्थिति को...* देख रही हूँ मैं आत्मा...

 

 _ ➳  अब मैं फरिश्ता एक सेकंड में अलग-अलग स्थान पर पँहुच कर सभी दु:खी अशांत आत्माओं को सुख-शांति और खुशी की सकाश दे रहा हूँ... *मैं फरिश्ता जिन्हें शांति चाहिए, उन्हें शांति दाता बन शांति दे रहा हूँ... जिन्हें खुशी चाहिए उन्हें खुशी दे रहा हूँ... जिन्हें सुख चाहिए उन्हें सुख की अनुभूति करा रहा हूँ...* मुझ फरिश्ते के साथ बाबा के सभी बच्चे अपने अन्त: वाहक शरीर द्वारा इस पूरे विश्व में जहाँ जिसे जिस चीज की आवश्यकता है उन्हें दे रही है... *हम सभी फरिश्ते मिलकर सुख, शांति की सकाश इस पूरे विश्व को दे रहे है... चारों ओर चक्कर लगा रहे है... सबको सकाश दे रहे है...* आत्माएँ शांति की अनुभूति कर रही है... सुख की अनुभूति कर रही है...

 

 _ ➳  हम फरिश्तों को देखकर बेसहारा आत्माएँ सहारे का अनुभव कर रही है... *हमें देख भक्त आत्माएँ भी अपने ईष्टों का साक्षात्कार कर सन्तुष्ट हो रही है...* जयजयकार कर रही है... और अब यह गायन प्रत्यक्ष हो रहा है... *शिव शक्तियाँ आ गई धरती पर शिव शक्तियाँ आ गई... घर-घर में होती है जिनकी पूजा... चेतन में वो देवियाँ आ गई... हम फरिश्तों से सबको अनेक साक्षात्कार हो रहे है... हम शिव शक्तियों द्वारा सर्वशक्तिवान प्रत्यक्ष हो रहा है...* हाहाकार से जय-जयकार हो रही है... हम एक-एक फरिश्ते द्वारा एक बाबा प्रत्यक्ष हो रहा है... *सभी आत्माएँ अपने सच्चे पिता, अपने प्यारे पिता को पहचान रही है... एक-एक आत्मा के मुख से निकल रहा है मेरा बाबा आ गया मेरा बाबा आ गया...* उन्हें अपने सत्य स्वरूप का साक्षात्कार हमारे द्वारा हो रहा है... उन्हें अब अपने घर का सही रास्ता मिल गया है... अपने सच्चे पिता और अपने असली घर का पता पाकर *सभी आत्माएँ खुश हो रही है... सच्ची शांति, सुख खुशी सच्चे प्यार की अनुभूति कर रही है... ओम शांति...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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