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 09 / 02 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *पुरुषार्थ में ठंडा हो बैठ तो नहीं गए ?*

 

➢➢ *"यह ड्रामा एक्यूरेट बना हुआ है" - यह स्मृति में रख किसी भी बात की फ़िक्र तो नहीं की ?*

 

➢➢ *बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा सर्व लगावो से मुक्त रहे ?*

 

➢➢ *क्रोध अग्नि से दूर रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  आजकल के जमाने में डाक्टर्स कहते हैं दवाई छोड़ो, एक्सरसाइज करो, *तो बापदादा भी कहते हैं कि युद्ध करना छोड़ो, मेहनत करना छोड़ो, सारे दिन में 5-5 मिनट मन की एक्सरसाइज करो। वन मिनट में निराकारी, वन मिनट में आकारी, वन मिनट में सब तरह के सेवाधारी, यह मन की एक्सरसाइज 5 मिनट की सारे दिन में भिन्न-भिन्न टाइम करो तो सदा तन्दरूस्त रहेंगे, मेहनत से बच जायेंगे।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं निर्विघ्न स्थिति द्वारा हर कदम में तीव्रगति से आगे बढ़ने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ"*

 

✧  सदा निर्विघ्न, सदा हर कदम में आगे बढ़ने वाली श्रेष्ठ आत्मायें हो ना! किसी प्रकार का विघ्न रोकता तो नहीं है? *जो निर्विघ्न होगा उसका पुरुषार्थ भी सदा तेज होगा क्योंकि उसकी स्पीड तेज होगी। निर्विघ्न अर्थात् तीव्रगति की रतार।* विघ्न आये और फिर मिटाओ इसमें भी समय जाता है। अगर कोई गाड़ी को बार-बार स्लो और ते]ज करे तो क्या होगा? ठीक नहीं चलेगी ना। विघ्न आवे ही नहीं उसका साधन क्या है?

 

  *सदा मास्टर सर्वशक्तिवान की स्मृति में रहो। सदा की स्मृति शक्तिशाली बना देगी। शक्तिशाली के सामने कोई भी माया का विघ्न आ नहीं सकता। तो अखण्ड स्मृति रहे। खण्डन न हो।* खण्डित मूर्ति की पूजा भी नहीं होती है। विघ्न आया फिर मिटाया तो अखण्ड अटल तो नहीं कहेंगे। इसलिए 'सदा' शब्द पर और अटेन्शन। सदा याद में रहने वाले सदा निर्विघ्न होंगे।

 

  संगमयुग विघ्नों को विदाई देने का युग है। जिसको आधा कल्प के लिए विदाई दे चुके उसको फिर आने न दो। सदा याद रखो कि हम विजयी रत्न हैं। विजय का नगाड़ा बजता रहे। विजय की शहनाईयाँ बजती रहती हैं, ऐसे याद द्वारा बाप से कनेक्शन जोड़ा और सदा यह शहनाईयाँ बजती रहें। *जितना-जितना बाप के प्यार में, बाप के गुण गाते रहेंगे तो मेहनत से छूट जायेंगे। सदा स्नेही, सदा सहजयोगी बन जाते हैं।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *बापदादा ने जो रूहानी एक्सरसाइज दी है, वह सारे दिन में कितने बार करते हो?* और कितने समय में करते हो? निराकारी और फरिश्ता।

 

✧  बाप और दादा, अभी-अभी निराकारी, अभी-अभी फरिश्ता स्वरूप। दोनों में देह-भान नहीं है। तो *देहभान से परे होना है तो यह रूहानी एक्सरसाइज कर्म करते भी अपनी डयुटी बजाते हुए भी एक सेकण्ड में अभ्यास कर सकते हो।*

 

✧  *यह एक नेचुरल अभ्यास हो जाए - अभी-अभी निराकारी, अभी-अभी फरिश्ता।* अच्छा (बापदादा ने ड़िल कराई)

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *सिर्फ अपनी विस्मृति इन सब बातों को उत्पन्न करती है। चाहे पिछले संस्कार, चाहे पिछले कर्म-बन्धन, चाहे वर्तमान की भूले - जो भी कुछ होता है, उनका मूल कारण अपनी विस्मृति है।* अपनी विस्मृति के कारण यह सभी व्यर्थ बातें सहज को मुश्किल बना देती हैं। स्मृति रहने से क्या होगा? जो लक्ष्य रखकर के आये हो स्मृति सम्पूर्ण विस्मृति असम्पूर्ण। *विस्मृति है तो बहुत ही विघ्न हैं और स्मृति है तो सहज और सम्पूर्णता।* अपनी बुद्धि को कण्ट्रोल करने के लिए कई बातों को हल्का करना पड़ता हैं। सभी से हल्की क्या चीज़ होती है? आत्मा (बिन्दी)। तो जब अपने को कण्ट्रोल करने लिए फुलस्टाप करना होता है। तो आप भी बिन्दी लगा दो। जो बीत चुका उसको बिल्कुल भूल जाओ।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- तन-मन-धन से सच्ची रूहानी सेवा करना"*

 

_ ➳  *जाना है हमें अपने परमधाम जहाँ देह ना है ना देह का ज्ञान... जाना है हमें अपने परमधाम...* इस गीत को सुनते ही मैं आत्मा टिक जाती हूँ अपने सत्य स्वरूप में... अपने सत्य स्वरुप में टिककर मैं आत्मा इस देह को छोड़कर अब ऊपर की ओर जा रही हूँ... *मैं चमकती हुई ज्योति आकाश मंडल को पार करती हुए जा रही हूं... अपने घर परमधाम...  गोल्डन प्रकाश से प्रकाशित, संपूर्ण शांति से भरपूर यह मेरा घर है...* मेरे सामने है सुख के दाता, आनंद के सागर मेरे मीठे प्यारे बाबा ... उनके सानिध्य में, मैं असीम सुख और शांति का अनुभव कर रही हूं... उनसे निकल रहे शक्तिशाली प्रकंपन मुझे असीम आनंद से भरपूर कर रहे हैं... उन से आ रही सर्व शक्तियों की किरणे मुझे शक्तिशाली बना रही हैं... *मेरे प्यारे बाबा के प्रेम की शीतल छाया मुझे अतींद्रिय सुखमय स्थिति का अनुभव करवा रही है...* मैं आत्मा एक शिव पिता की लगन में मगन हो जाती हूँ...

 

  *बाबा मुझ आत्मा को विश्व कल्याण की भावनाओं से ओत-प्रोत करते हुए कहते है :-* लाडले विश्व कल्याणकारी बच्चे मेरे... ईश्वर पिता ने आकर है आपके जीवन को अथाह सुख-शांति से है सजाया... सर्व प्राप्तियों से है आपको सम्पन्न बनाया... बन रूहानी सोशल वर्कर तुम इस सुख-शांति को पूरी दुनिया मे फैलाओं... *हर आत्मा को सुखों की अमीरी से भर आओ...*

 

_ ➳  *मैं विश्व कल्याणकारी आत्मा विश्व कल्याण की भावना से सम्पन्न होकर कहती हूँ :-*  मेरे दिल के सहारे सच्चे मनमीत बाबा मेरे... कितना ऊँचा कितना शानदार है आपने मुझ आत्मा का भाग्य बनाया... सच्ची सुख -शांति से है इस जीवन को सजाया... *बन अब मैं आत्मा रूहानी सोशल वर्कर सुखों की अमीरी से हर आत्मा को सजा रही हूँ... विश्व सेवाधारी बन पूरी दुनिया को सुख-शांति-पवित्रता से सम्पन्न बना रही हूँ...*  

 

  *बाबा मुझ आत्मा को सर्व आत्माओं के कल्याण का रूहानी अहसास देकर कहते है :-*  मीठे सच्चे सेवाधारी बच्चे मेरे... *पवित्रता की धरोहर से जीवन को श्रेष्ठ बनाकर क्या से क्या बन रहे हो... यह प्राप्ति औरों को भी कराओं...* सबके जीवन को आप समान खुशियों से महकाओं...  सफल कर अपना तन-मन-धन तुम... इस दुनिया को सुख-शांति पवित्रता से सम्पन्न बनाओ...

 

_ ➳  *मैं आत्मा विश्व कल्याण के मीठे रूहानी अहसासों से भरकर कहती हूँ :-* मीठे-मीठे रत्नागर बाबा मेरे... पवित्रता ही सुख-शांति का आधार है... इस सत्य से सबको रूबरू करा रही हूँ...  सबके जीवन को आप समान खुशियों से महका रही हूँ... *सफल कर अपना तन-मन-धन सबकों ईश्वरीय सुखों से सम्पन्न बना रही हूँ...*

 

  *मीठे बाबा मुझ आत्मा को जिम्मेवारी का ताज पहनाकर कहते है :-* मीठे लाडले दिलतख्तनशीन बच्चे मेरे... *लगाकर अपना तन-मन-धन इस रूहानी सच्ची सेवा में अपना और दूसरों का भाग्य उज्जवल बनाओं...* अपने आत्मा भाईयों का तुम सोया भाग्य जगाओं... पवित्रता के फूलों से उनके जीवन को महकाओं... रूहानी सोशल वर्कर बन अब ये कमाल बच्चे कर दिखलाओं... 

 

_ ➳  *मैं सच्ची सेवाधारी आत्मा जिम्मेवारी का ताज पहन कर कहती हूँ :-* मीठे प्यारे जादूगर बाबा मेरे... तन-मन-धन इस ईश्वरीय सेवा में लगा कर अपना और दूसरों का भाग्य चमका रही हूँ... देकर सबको ईश्वरीय पैगाम... सुखमय जीवन की सच्ची राह दिखा रही हूँ... *पवित्रता के फूलों से उनके जीवन को महका रही हूँ... इस प्रकार सच्ची सुख शांति पवित्रता से दुनिया को सम्पन्न बना रही हूँ...*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- यह ड्रामा एक्यूरेट बना हुआ है , इसलिए किसी भी बात का फिक्र नही करना है*"

 

_ ➳  ड्रामा के पट्टे पर खड़े होकर, इस बेहद के ड्रामा में वैरायटी आत्माओं के वैरायटी पार्ट को देख मन ही मन मैं विचार करती हूँ कि कितना वन्डरफुल है ये ड्रामा! *इस सृष्टि ड्रामा में हर आत्मा अपना - अपना पार्ट प्ले कर रही है और एक का पार्ट भी दूसरे के पार्ट से मैच नही करता। हर आत्मा कल्प पहले मुआफ़िक अपना पार्ट बिल्कुल ऐक्यूरेट बजा रही है*। बाबा ने ड्रामा के इस राज को स्पष्ट करके जीवन को कितना सहज बना दिया है। इस राज को जानने से क्या, क्यो और कैसे की क्यू में उलझने की बजाए  सेकण्ड में फुल स्टॉप लगाना कितना सरल हो गया है। *ड्रामा के पट्टे पर खड़े होकर, ड्रामा के हर राज को अच्छी रीति समझ लेने से जीवन को जैसे एक नई दिशा मिल गई है*।

 

_ ➳  अपने ब्राह्मण जीवन मे निरन्तर आगे बढ़ते हुए, ड्रामा के हर राज को अच्छी रीति समझ अडोल रहने का पुरुषार्थ करते हुए, अब मुझे अपने सम्पूर्णता के लक्ष्य को जल्द से जल्द प्राप्त करना है *मन ही मन स्वयं से दृढ़ प्रतिज्ञा कर, ड्रामा के हर खूबसूरत पहलू से परिचित कराने वाले अपने प्यारे मीठे बाबा से मीठी मीठी रूहरिहान करने, उनसे मंगल मिलन मनाने और ड्रामा के पट्टे पर सदा अचल, अडोल रहने का उनसे वरदान प्राप्त करने के लिए मैं अपने प्यारे बाबा की याद में अपने मन और बुद्धि को एकाग्र करती हूँ* और सेकेण्ड में अशरीरी होकर, देह से बिल्कुल न्यारा एक अति सूक्ष्म चैतन्य सितारा बन भृकुटि के अकालतख्त से बाहर आ जाता हूँ और अपने बिंदु बाप के पास उनके धाम की ओर चल पड़ता हूँ।

 

 

_ ➳  परमधाम में स्थित मेरे बिंदु बाप से आ रही परमात्म शक्तियों की लाइट मुझ बिंदु सितारे के साथ कनेक्ट होकर मुझे बिल्कुल सहज रीति ऊपर की ओर खींच रही है और *मैं चैतन्य सितारा, इस परमात्म लाइट के साथ कनेक्ट होकर, स्वयं को हर चीज से उपराम अनुभव करते हुए, धीरे - धीरे ऊपर आकाश की ओर उड़ता जा रहा हूँ*। मेरे बिंदु पिता से आ रही परमात्म शक्तियों की लाइट मुझे अति शीघ्र 5 तत्वों की बनी साकारी दुनिया को पार कराये, फरिश्तो की आकारी दुनिया से ऊपर, आत्माओं की उस निराकारी दुनिया में ले आई है जहाँ पहुँच कर मैं आत्मा गहन विश्राम की स्थिति का अनुभव कर रही हूँ।

 

_ ➳  एक ऐसी दुनिया में मैं स्वयं को देख रही हूँ जहाँ ना साकार देह का कोई बन्धन है और ना ही सूक्ष्म देह का कोई भान है केवल चमकती हुई निराकारी बिंदु आत्मायें अपने बिंदु बाप की अनन्त शक्तियों की किरणों रूपी बाहों में सिमट कर, उनके प्यार और उनकी शक्तियों से स्वयं को भरपूर कर रही हूँ। *बिंदु बाप के साथ अपने बिंदु बच्चो का यह मंगल मिलन मन को असीम आनन्द का अनुभव करवा रहा है*। अपने बिंदु पिता से मिलन मनाने के लिए मैं बिंदु आत्मा अब धीरे - धीरे उनके पास पहुँचती हूँ ओर उनकी सर्वशक्तियों की किरणों की छत्रछाया के नीचे जाकर बैठ जाती हूँ।

 

_ ➳  विकारों की प्रवेशता के कारण मुझ आत्मा की बैटरी जो डिसचार्ज हो गई थी वो अब परमात्म शक्तियों से चार्ज हो गई है और मैं आत्मा जैसे लाइट हाउस बन गई हूँ। *परमात्म शक्तियों से भरपूर होकर स्वयं को मैं बहुत ही शक्तिशाली अनुभव कर रही हूँ। शक्तियों का पुंज बनकर, बेहद के सृष्टि ड्रामा में अपना खूबसूरत पार्ट बजाने के लिए मैं वापिस साकार सृष्टि पर लौट आती हूँ*। फिर से 5 तत्वों की साकारी दुनिया में, अपने साकारी तन में प्रवेश कर ड्रामा के पट्टे पर आकर खड़ी हो जाती हूँ।

 

_ ➳  अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर ड्रामा के हर राज को गहराई से समझ, साक्षी दृष्टा बन, ड्रामा की हर सीन को साक्षी होकर देखते हुए, हर परिस्थिति में अचल अडोल रहने का अब मैं पुरुषार्थ कर रही हूँ। *"सृष्टि का यह नाटक अब पूरा हो रहा है" यह स्मृति मुझे हर आकर्षण से मुक्त और हर चीज से उपराम करके, ड्रामा के राज को अच्छी रीति समझ, स्वयं को अचल, अडोल और एकरस बनाने में सहयोग दे रही है*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा सर्व लगावो से मुक्त्त रहने वाली सच्ची राजऋषि आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं खुद को भी जलाने और दूसरों को भी जला देने की क्रोध अग्नि से मुक्त होने वाली शांत आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  वैसे बापदादा ने देखा है कि सेवा से लगन अच्छी है। सेवा के लिए एवररेडी हैं, चाँस मिले तो प्यार से सेवा के लिए एवररेडी हैं। लेकिन अभी सेवा में एडीशन करो - *वाणी के साथ-साथ मनसा, अपनी आत्मा को विशेष कोई- न-कोई प्राप्ति के स्वरूप में स्थित कर वाणी से सेवा करो*। मानो भाषण कर रहे हो तो वाणी से तो भाषण अच्छा करते ही हो लेकिन उस समय अपने आत्मिक स्थिति में विशेष चाहे शक्ति की, चाहे शान्ति की, चाहे परमात्म-प्यार की, कोई-न-कोई विशेष अनुभूति की स्थिति में स्थित कर मनसा द्वारा आत्मिक स्थिति का प्रभाव वायुमण्डल में फैलाओ और वाणी से साथ-साथ सन्देश दो। *वाणी द्वारा सन्देश दो, मनसा आत्मिक स्थिति द्वारा अनुभूति कराओ*।

 

 _ ➳  *भाषण के समय आपके बोल आपके मस्तक से, नयनों से, सूरत से उस अनुभूति की सीरत दिखाई दे* कि आज भाषण तो सुना लेकिन परमात्म प्यार की बहुत अच्छी अनुभूति हो रही थी। *जैसे भाषण की रिजल्ट में कहते हैं बहुत अच्छा बोला, बहुत अच्छा, बहुत अच्छी बातें सुनाई, ऐसे ही आपके आत्म-स्वरूप की अनुभूति का भी वर्णन करें। मनुष्य आत्माअों को वायब्रेशन पहुँचे, वायुमण्डल बने। जब साइंस के साधन ठण्डा वातावरण कर सकते हैं, सबको महसूस होता है बहुत ठण्डाई अच्छी आ रही है। गर्म वायुमण्डल अनुभव करा सकते हैं। साइंस सर्दी में गर्मी का अनुभव करा सकती है, गर्मी में सर्दी का अनुभव करा सकती है, तो आपकी साइलेन्स क्या प्रेम स्वरूप, सुख स्वरूप, शान्त स्वरूप वायुमण्डल अनुभव नहीं करा सकती*। यह रिसर्च करो। सिर्फ अच्छा-अच्छा किया लेकिन अच्छे बन जायें, तब समाप्ति के समय को समाप्त कर अपना राज्य लायेंगे।

 

✺   *ड्रिल :-  "भाषण के साथ-साथ परमात्म प्यार की अनुभूति कराना "*

 

 _ ➳  प्राप्ति स्वरूप मैं आत्मा संगम की प्राप्तियों को साक्षी होकर देख रही हूँ... *समय, स्वाँस और संकल्पों के खजाने से मालामाल मैं आत्मा, मेरे पास सेवा के ये अनूठे से साधन...* मनसा वाचा और कर्मणा... मेरे लिए अखुट कमाई का साधन है...

 

 _ ➳  प्रेम स्वरूप मैं आत्मा, परमात्म प्यार में लीन देख रही हूँ स्वयं को भृकुटी के मध्य में... सुनहरे लाल प्रकाश से झिलमिलाती मैं मणि सम्पूर्ण देह को आलोकित कर रही हूँ... *मन में उठने वाले हर सकंल्प को पवित्रता की शक्ति से भरपूर करती मैं आत्मा, वाचा शक्ति को परमात्म प्रेम और गुणों के प्रकाश से भरपूर कर रही हूँ*... मेरी वाचा परमात्म प्यार और शक्तियों का स्वरूप प्रतीत हो रही है... 

 

 _ ➳  *देह में विराजमान मैं आत्मा नयन, बोल, मस्तक और सम्पूर्ण सूरत से परमात्म सीरत की अनुभूति करा रही हूँ*... प्रभु प्रेम में  मगन *मेरा बाबा मीठा बाबा* बोलती ये आँखें हर आत्मा को मेरे शान्त स्वरूप की अनुभूति करा रही है... मस्तक पर दमकती भाग्य रेखा मेरे उच्च भाग्य की झलक दिखा रही है... सूरत में और मेरे हर कर्म में बापदादा की सीरत प्रत्यक्ष हो रही है...

 

 _ ➳  *मुझसे निकलते प्रेम पवित्रता शान्ति और शक्तियों के वायब्रैशन शक्तिशाली वातावरण का निर्माण कर रहे है... अंग प्रत्यंग अपनी अपनी मूक भाषा में भाषण करते प्रतीत हो रहे है... वाणी से परमात्म गुणों का वर्णन करती मैं उन्हीं के गुण स्वरूप बनती जा रही हूँ*... मैं मनसा वाचा और कर्मणा परमात्म प्रेम की गहरी अनुभूति कर आस- पास की सभी आत्माओं को उन अनुभूतियों से भरपूर कर रही हूँ...

 

 _ ➳  *प्रकाश का झरना बहाते शिव बिन्दु मेरे सिर के ठीक ऊपर*... मैं नहाती जा रही हूँ इस लाल रंग के गहरे प्रकाश में... मेरे रोम रोम को अथाह ऊर्जा से भरपूर कर रहा है, ये  प्रकाश... असीम शक्तियों की मैं मालिक मास्टर सर्व शक्तिमान की सीट पर सेट होकर मनसा द्वारा आत्मिक शक्तियों का प्रकाश फैलाती हुई... दूर दूर तक वातावरण में फैलता परमात्म प्यार फैलता जा रहा है...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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