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 09 / 03 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *"याद के समय मन भागता तो नहीं है ?" - अपने अन्दर यह चेक किया ?*

 

➢➢ *"हमें बाबा ने रावण के पिंजरे से मुक्त कर दिया" - सदा इसी ख़ुशी में रहे ?*

 

➢➢ *रूहानी नशे द्वारा पुरानी दुनिया को भूलने का अभ्यास किया ?*

 

➢➢ *हर सेकंड, हर श्वास, हर खजाने को सफल किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *बाप का बच्चों से इतना प्यार है जो अमृतवेले से ही बच्चों की पालना करते हैं । दिन का आरम्भ ही कितना श्रेष्ठ होता है! स्वयं भगवान मिलन मनाने के लिये बुलाते हैं, रुहरिहान करते हैं, शक्तियां भरते हैं!* बाप की मोहब्बत के गीत आपको उठाते हैं । कितना स्नेह से बुलाते हैं, उठाते हैं - मीठे बच्चे, प्यारे बच्चे, आओ.... । तो *इस प्यार की पालना का प्रैक्टिकल स्वरूप है ' सहज योगी जीवन' ।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं विश्व कल्याणकारी आत्मा हूँ"*

 

  सदा अपने को विश्व-कल्याणकारी बाप के बच्चे विश्व- कल्याणकारी आत्मायें समझते हो? अर्थात् सर्व खजानों से भरपूर। *जब अपने पास खजाने सम्पन्न होंगे तब दूसरों को देंगे ना! तो सदा सर्व खजानों से भरपूर आत्माएँ बालक सो मालिक हैं!* ऐसा अनुभव करते हो?

 

  *बाप कहा माना बालक सो मालिक हो गया। यही स्मृति विश्व-कल्याणकारी स्वत: बना देती है। और यही स्मृति सदा खुशी में उड़ाती है। यही ब्रह्मण जीवन है।*

 

  *सम्पन्न रहना, खुशी में उड़ना और सदा बाप के ख]जानों के अधिकार के नशे में रहना। ऐसे श्रेष्ठ ब्रह्मण आत्मायें हो।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  तो शक्तियों का खजाना कितना जमा है? जो समय पर कार्य में लगाते हैं, वह जमा होता है। चेक करते जा रहे हो कि मेरा खाता क्या है? क्योंकि *बापदादा को सभी बच्चों से अति प्यार है, बापदादा ही चाहते हैं कि सभी बच्चों का जमा का खाता भरपूर हो।*

 

✧  धारणा में भी भरपूर, धारणा की निशानी है - हर कर्म गुण सम्पन्न होगा। *जिस समय जिस गुण की आवश्यकता है वह गुण चेहरे, चलन में इमर्ज दिखाई दे।*

 

✧  अगर कोई भी गुण की कमी है, मानो सरलता के गुण की कर्म के समय आवश्यकता है, मधुरता की आवश्यकता है, चाहे बोल में, चाहे कर्म में अगर सरलता, मधुरता के बजाए थोडा भी आवेश या थकावट के कारण बोल मधुर नहीं है, चेहरा मधुर नहीं है, सीरियस है तो गुण सम्पन्न तो नही

कहेंगे ना। *कैसे भी सरकमस्टान्स हो लेकिन मेरा जो गुण है, वह मेरा गुण इमर्ज होना चाहिए।* अभी शार्ट में सुना रहे हैं।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *जैसे कुछ समय आप एक-दो को याद दिलाते थे - शिव बाबा याद है ? वैसे जब देखते हो कोई व्यक्त भाव में ज्यादा है तो उनको बिना कहे अपना अव्यक्ति शान्त रूप ऐसा धारण करो जो वह भी इशारे से समझ जायें तो फिर वातावरण कुछ अव्यक्त रहेगा।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- घडी-घडी बाप और वर्से को याद करना"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा बगीचे में पेड़ के नीचे बैठ मीठे बाबा को याद करती हूँ... प्यारे बाबा तुरंत मेरे सामने आ जाते हैं और अपनी गोदी में बिठाकर मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए गुणों और शक्तियों से मुझ आत्मा को भरपूर करते हैं...* मैं आत्मा एक-एक गुण और शक्ति को स्वयं में धारण करती जा रही हूँ... एक-एक वरदान को अपने में समाती जा रही हूँ... फिर मीठे बाबा दृष्टि देते हुए मुझ आत्मा से मीठी-मीठी रूह-रिहान करते हैं...

 

  *स्वीट बाबा अपनी स्वीट शिक्षाओं से मुझ आत्मा को अपने समान स्वीट बनाते हुए कहते हैं:-* मेरे मीठे फूल बच्चे... फूल बनाने वाले प्यारे पिता की यादो में डूब जाओ, मीठे बाबा को हर साँस के तार में पिरो दो... *ईश्वरीय यादो से प्राप्त सतयुगी सुखो को याद करो तो... मीठे संस्कारो से सज जायेंगे... और मीठे बाबा समान मीठे हो जायेंगे... हर लम्हा मिठास लुटाने वाले बन जायेंगे..."*

 

_ ➳  *स्वीट फादर और स्वीट राजधानी को याद कर बहुत बहुत स्वीट बनते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... *मै आत्मा अपने मीठे बाबा की बाँहों में झूल रही हूँ... यादो में डूबी अतीन्द्रिय सुख में खोयी हूँ... मीठे बाबा की यादो में प्रेम की नदिया बन गई हूँ...* ईश्वरीय प्रेम की लहरे पूरे विश्व में फैला रही हूँ... अपने मीठे सुखो की यादो में मुस्करा रही हूँ..."

 

  *मुझ आत्मा को रूहानियत के रंगों से सजाते हुए मीठा बाबा कहते हैं:-* मीठे प्यारे लाडले बच्चे... *ईश्वर पिता जो धरा पर उतर आया है तो उसकी यादो में डूब अथाह खजानो को लूटकर मालामाल हो जाओ... यादो में दिव्य गुणो और शक्तियो से सजकर देवताई श्रृंगार कर लो...* यह यादे मीठेपन से खिला देंगी और पवित्रता से संवार कर विश्व का मालिक सा सजायेंगी..."

 

_ ➳  *खुशियों के अम्बर में उड़ान भरकर खुशी के गीत गुनगुनाती हुई मैं आत्मा कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा देहधारियों की यादो में कितनी कड़वी हो गई थी... दुखो में कितनी कलुषित हो गई थी... *अब आपकी मीठी मीठी यादो में कितनी प्यारी मीठी और खुशनुमा होती जा रही हूँ... अपने सुखमय संसार को यादकर ख़ुशी से पुलकित होती जा रही हूँ..."*

 

  *अपनी मधुर वाणी से मेरे जीवन को मधुबन बनाकर मेरे बाबा कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... अब अपने दुखो के सारे बोझ मीठे पिता को सौंप हल्के मीठे होकर मुस्कराओ... पिता के प्यार में खो जाओ... *अपने सत्य स्वरूप के नशे में इतराओ... और अथाह सुखो की राजधानी को यादकर प्रेम और मीठेपन से महक उठो... और पूरे विश्व को इन मीठी तरंगो से भर दो..."*

 

_ ➳  *मीठे बाबा के हाथों मधुरस का पान कर मिठास से भरपूर होकर मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा मीठे बाबा की यादो में डूबकर कितनी मीठी प्यारी सतोगुणी होकर खिलखिला रही हूँ... *प्यारे बाबा ने अपनी खुशनुमा यादो में मुझे कितना मीठा खुबसूरत बना दिया है... पवित्रता से महकाकर बेशकीमती बना दिया है..."*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- एकान्त में बैठ बाप को याद कर कमाई जमा करनी है*"

 

_ ➳  अपनी एम ऑब्जेक्ट लक्ष्मी नारायण के चित्र के सामने खड़ी मैं बड़ी बारीकी और तन्मयता से भाव विभोर हो कर उस चित्र को देख रही हूँ और मन ही मन हर्षित हो रही हूँ। *उस चित्र की खूबसूरती को देखते - देखते एक सुन्दर गीत के वो शब्द याद आ जाते है कि "जिसकी रचना इतनी सुन्दर है, वो रचनाकार खुद कितना सुन्दर होगा"* इन्ही शब्दो पर विचार करते - करते मैं फिर से लक्ष्मी नारायण के उस चित्र पर नजर डालती हूँ और उनके अनुपम सौन्दर्य और तेजस्वी मुख मण्डल को निहारते हुए *उन्हें ऐसा श्रेष्ठ बनाने वाले श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ रचनाकार अपने शिव पिता को जैसे ही याद करती हूँ, मस्तिष्क के स्मृति पटल पर मेरे सुन्दर सलौने शिव पिता का मनमोहक स्वरूप उभर आता है और मन बुद्धि पूरी तरह से उनके स्वरूप पर एकाग्र हो जाते हैं*।

 

_ ➳  देह और देह की दुनिया को भूल अपने प्यारे पिता के स्वरूप को निहारने में मैं आत्मा ऐसे मग्न हो जाती हूँ जैसे चात्रिक पक्षी स्वन्ति की एक बूंद के लिये बादलों की ओर टकटकी लगाए देखता रहता है। *अपने प्यारे प्रभु को मन बुद्धि के दिव्य नेत्र से अपने सामने देखते हुए उनकी एक - एक किरण को एकटक निहारते हुए, मैं उनके अद्भुत सौंदर्य का रसपान कर रही हूँ*। शक्तियों की अनन्त किरणे बिखेरता उनका सुन्दर सलौना स्वरूप मुझे अपनी और आकर्षित कर रहा है। उनके पास जा कर उन्हें छूने की प्रबल इच्छा मेरे अंदर जागृत हो रही है। मेरे हर संकल्प को मेरे प्यारे प्रभु बिना कहे जैसे जान रहें हैं इसलिए बिल्कुल सहज रीति अपनी मैग्नेटिक पावर से मुझे अपनी और खींच रहें हैं।

 

_ ➳  मेरे प्यारे मीठे बाबा की सर्वशक्तियों का यह चुम्बकीय बल मुझे देह भान से पूरी तरह मुक्त कर, अशरीरी स्थिति में स्थित कर रहा है। देह और देह से जुड़ी कोई भी वस्तु अब मुझे दिखाई नही दे रही। *मैं आत्मा स्वयं को एकदम साक्षी स्थिति में अनुभव कर रही हूँ।  ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं संकल्प मात्र भी देह से अटैच नही हूँ। बहुत ही न्यारी और प्यारी, एक अलौकिक सुखमय स्थिति में मैं स्थित हो चुकी हूँ और इस अति न्यारी और प्यारी स्थिति में मैं सहजता से नश्वर देह को त्याग कर अब ऊपर आकाश की ओर जा रही हूँ*। सेकेण्ड में आकाश को पार कर, सूक्ष्म वतन से होती हुई मैं पहुँच जाती हूँ परमधाम अपने प्यारे बाबा के पास और उनके पास जा कर बैठ जाती हूँ ।

 

_ ➳  बाबा से सर्वगुणों और सर्वशक्तियों की सतरंगी किरणे निकलकर मुझ आत्मा पर बरस रही हैं और मुझे असीम आनन्द से भरपूर कर रही हैं। एक अलौकिक दिव्यता  मुझ आत्मा में भरती जा रही है। प्यार के सागर मेरे मीठे बाबा अपनी शक्तिशाली किरणो के रूप में अपना असीम प्यार मुझ पर लुटा रहे हैं। *उनके प्यार की शीतल किरणे मेरे अंदर गहराई तक समा कर, मुझे भी उनके समान मास्टर प्यार का सागर बना रही हैं। निरसंकल्प बीज रूप अवस्था में अपने बीज रूप शिव पिता को छू कर, उनके प्यार का सुखद एहसास करने के साथ - साथ उनकी सर्वशक्तियों को स्वयं में समाकर, सर्वशक्ति सम्पन्न स्वरूप बनकर मैं आत्मा वापिस साकारी दुनिया मे अपना पार्ट बजाने के लिए लौट आती हूँ*।

 

_ ➳  नीचे साकारी दुनिया मे आ कर अपने पांच तत्वों के बने शरीर में मैं प्रवेश करती हूँ। बाबा के प्यार के सुखद एहसास को सदा स्मृति में रख, गुप्त रीति उन्हें याद कर, लक्ष्मी नारायण जैसा श्रेष्ठ बनने का अब मैं जी जान से पुरुषार्थ कर रही हूँ। *बाबा की श्रीमत पर चल, बाबा की शिक्षाओं को जीवन मे धारण करते हुए अपने संकल्प, बोल और कर्म को योगयुक्त औऱ युक्तियुक्त बनाकर मैं सहज ही श्रेष्ठ बनती जा रही हूँ*। गुप्त रीति ईश्वरीय याद में रह योगबल से पुराने कर्मबन्धनों के हिसाब - किताब बिल्कुल सहज भाव से चुकतू करने के साथ - साथ *अपने पुराने आसुरी स्वभाव संस्कारो को भी योग अग्नि में भस्म कर, श्रेष्ठ दैवी गुणों को धारण करते हुए अपने लक्ष्य की ओर मैं निरन्तर आगे बढ़ती जा रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं रूहानी नशे द्वारा पुरानी दुनिया को भूलने वाली स्वराज्य सो विश्व राज्य अधिकारी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं हर सेकेण्ड, हर श्वांस, हर खज़ाने को सफल करने वाली सफलतामूर्त आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  *बाप और बच्चों का एक दिवस जन्म यही वण्डर है।* तो आज आप सभी सालिग्राम बच्चे बाप को मुबारक देने आये हो वा बाप से मुबारक लेने आये हो? देने भी आये हो, लेने भी आये हो। साथ-साथ की निशानी है कि *आप बच्चों का और बाप का आपस में बहुत-बहुत-बहुत स्नेह है। इसलिए जन्म भी साथ-साथ है और रहते भी सारा जन्म कम्बाइण्ड अर्थात् साथ हैं।* इतना प्यार देखा है! अगर आक्युपेशन भी है तो *बाप और बच्चों का एक ही विश्व परिवर्तन करने का आक्युपेशन है* और वायदा क्या है? कि *परमधाम, स्वीट होम में भी साथ-साथ चलेंगे* या आगे पीछे चलेंगे? साथ-साथ चलना है ना! तो ऐसा स्नेह आपका और बाप का है। *न बाप अकेला कुछ कर सकता, न बच्चे अकेले कुछ कर सकते।* कर सकते हो? सिवाए बाप के कुछ कर सकते हो! और बाप भी कुछ नहीं कर सकता। इसीलिए ब्रह्मा बाप का आधार लिया आप ब्राह्मणों को रचने के लिए। *सिवाए ब्राह्मणों के बाप भी कुछ नहीं कर सकते। इसलिए इस अलौकिक अवतरण के जन्म दिवस पर बाप बच्चों को और बच्चे बाप को पदमापदम बार मुबारक दे रहे हैं। आप बाप को दे रहे हैं, बाप आपको दे रहे हैं।*

 

✺   *ड्रिल :-  "बाप के साथ सदा कम्बाइण्ड रहने का अनुभव"*

 

 _ ➳  *शिवरात्रि के इस महान अलौकिक अवतरण जन्म दिवस पर मैं आत्मा सुबह आँख खुलते ही अपने मीठे लाडले बाबा को, फरिश्ता स्वरूप में अपने सामने पाती हूँ...* मैं आत्मा मीठे बाबा को गुड मोर्निंग विश करती हूँ... *बाबा मुस्कुरा कर मुझ आत्मा को रिस्पोन्ड करते है...* कमरे में चारों ओर लाइट ही लाइट है... और रंग-बिरंगे लाइट के फूलों से पूरा कमरा सज गया है... *बाबा मुझ आत्मा को शक्तिशाली दृष्टि दे रहे है...* मीठे बाबा की आंखों से सफेद रंग की शक्तिशाली पवित्र किरणें निकल मुझ आत्मा पर पड़ रही है... जैसे-जैसे ये किरणें मुझ आत्मा पर पड़ रही है... मैं आत्मा देह भान से न्यारी होती जा रही हूँ... *मुझ आत्मा का स्वरूप परिवर्तित होकर चमकीला फरिश्ता स्वरूप बनता जा रहा है...* मैं नन्हा फरिश्ता बिना देरी किए, जल्दी से जाकर अपने लाडले बाबा के गले लग जाता हूँ...

 

 ➳ _ ➳  *बाबा भी मुझ नन्हे लाडले बच्चे को अपनी बाहों में समा लेते है... और अब मैं मीठा फरिश्ता मीठे बाबा को इस अलौकिक जन्म दिवस पर पदमापदम मुबारक देता हूँ...* और सामने टेबल पर रखे फूल बाबा को भेट करता हूँ... और अपने हाथों से बाबा के लिए बनाया कार्ड बाबा को भेट करता हूँ... *मीठे बाबा बड़े ही प्यार से इसे स्वीकार करते हुए बड़ी ही मीठी दृष्टि से मुझे देखते है... बाबा की इस मीठी दृष्टि से मुझ आत्मा के नयन सजल हो जाते है...* बाबा मुझ आत्मा को भी पदमापदम गुणा मुबारक दे रहे है... और रंग-बिरंगे फूलों की बारिश कर रहे है... इन फूलों की बारिश में, मैं फरिश्ता भीग रहा हूँ... *मैं फरिश्ता बाबा के हाथों में हाथ ले डांस कर रहा हूँ...* तभी बाबा सामने देखते है बाबा के देखते ही वहाँ एक बड़ा सा फूलों से सजा झूला आ जाता है...

 

 ➳ _ ➳  बाबा मुझ फरिश्ते का हाथ पकड़ झूले पर बैठ जाते है... *बाबा मुझ आत्मा को टोली खिला रहे है... मुझ आत्मा के नयन सजल हो रहे है...* मैं श्रेष्ठ भाग्य को देख-देख हर्षा रही हूँ, गीत गा रही हूँ... *वाह ऐसा वण्डरफुल जन्म मैं आत्मा अभी ही इस संगम पर मनाती हूँ... बाबा के साथ के अनुभवों से सजी ये जीवन कितना सुहाना है...* मैं फरिश्ता एकदम से बाबा से लिपट जाता हूँ... और मन ही मन बाबा से कहता हूं... *बाबा आप हमेशा मेरे साथ ऐसे ही रहना... बाबा बिन कहें मेरे दिल की आवाज सुन लेते है...* और मुझे बड़ी मीठी दृष्टि देते हुए मुझ फरिश्ते के दोनों हाथ अपने हाथ में ले लेते है... *मैं फरिश्ता बाबा की सागर जैसी आँखों में जब देखता हूँ...* तो अनुभव कर रहा हूँ... जैसे बाबा की बिन कहे भी बाबा इन सागर जैसी आँखों से ही कह रहे हो... *"आप बच्चों का और बाप का आपस में बहुत-बहुत-बहुत स्नेह है... इसलिए जन्म भी साथ-साथ है और रहते भी सारा जन्म कम्बाइंड अर्थात साथ है... स्वीट होम में भी साथ-साथ चलेंगे"...*

 

 _ ➳  उस नि:शब्द के ये शब्द सुन मैं फरिश्ता खुशी से भर गया हूँ... और *अब बाबा मुझ फरिश्तें के सिर पर अपना हाथ रख मुझे वरदान दे रहे है... "कम्बाइंड स्वरूप भव बच्चे", विजयी भव बच्चे...* मैं फरिश्ता अन्तर्मन से बाबा द्वारा दिए वरदानों को स्वीकार करता हूँ... बाबा सर्व शक्तियों से मेरा श्रृंगार कर रहे है... *मैं फरिश्ता बेहद शक्तिशाली स्थिति का अनुभव कर रहा हूँ... सर्व शक्तियों और वरदानों से भरपूर मैं फरिश्ता अब अपनी दिनचर्या की शुरुआत करता हूँ...* मैं फरिश्ता हर कर्म करते हुए बाबा के साथ का अनुभव कर रहा हूँ... बाबा की छत्रछाया को निरंतर अनुभव कर रहा हूँ...

 

 _ ➳  *मैं फरिश्ता चलते हुए महसूस कर रहा हूँ... जैसे बाबा मेरे हाथों में हाथ लिए मेरे साथ चल रहे है...* हर सेवा करते बाबा के साथ की अनुभूति मैं फरिश्ता कर रहा हूँ... मन खुशी में गा रहा है... *तुम तो यही कहीं बाबा मेरे आस-पास हो... आते नजर नहीं पर मेरे साथ-साथ हो... तुम तो यही-कही बाबा...* बाबा के हर पल के साथ से, मैं आत्मा उड़ती कला और निरंतर सहजयोगी अवस्था का अनुभव कर रही हूं... *उठते-बैठते, चलते-फिरते, खाते-पीते हर पल बाबा का हाथ और साथ का अनुभव मैं आत्मा निरंतर कर रही हूँ... और अपने भाग्य की स्मृति में झूम रही हूँ...* वाह मुझ आत्मा का भाग्य जो हर पल, स्वयं भगवान का हाथ और साथ मिला है...

 

 ➳ _ ➳  *कैसा अद्भुत और वण्डर मुझ आत्मा का यह नया जन्म हुआ है... कितना महान और श्रेष्ठ ये जीवन है... जिसका हर पल उसके साथ से सजा है... मैं आत्मा अपने इस कम्बाइंड स्वरूप के नशे में झूम रही हूँ... मैं आत्मा शिवशक्ति हूँ...* बाबा के द्वारा दिया वरदान प्रत्यक्ष हो रहा है... वाह मुझ ब्राह्मण आत्मा का भाग्य वाह... *मैं आत्मा बाबा के हर पल का साथ पाकर खुशी-खुशी से तीव्र गति से आगे बढ़ रही हूँ...* और अन्य आत्माओं को भी आगे बढ़ा रही हूँ... *अपने इस कम्बाइंड स्वरूप से हर कार्य में सहज सफलता प्राप्त कर रही हूँ...* इस प्रकार सर्व का कल्याण करते हुए हर पल मैं आत्मा खुशियों के गीत गाते आगे बढ़ रही हूँ... *मेरे संग-संग चलते है बाबा... मेरे संग-संग चलते है बाबा... जैसे गंगन मे चाँद, चलता है... चलता है उनकी किरणों की छाया मे दिल हर पल रहता है... शुक्रिया करनकरावनहार मीठे बाबा शुक्रिया...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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