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 09 / 05 / 22  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *अपना पूरा कनेक्शन एक शिव बाबा से रखा ?*

 

➢➢ *"मैंने इसका कल्याण किया" - यह अहंकार तो नहीं किया ?*

 

➢➢ *अमृत्वेले तीन बिंदियो का तिलक लगा क्यूं, क्या की हलचल से मुक्त रहे ?*

 

➢➢ *परिवर्तन शक्ति द्वारा व्यर्थ संकल्पों के बहाव का फ़ोर्स समाप्त किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  ब्रह्मा की स्थापना का कार्य तो चल ही रहा है। ईश्वरीय पालना का कर्त्तव्य भी चल ही रहा है। अब लास्ट में तपस्या द्वारा अपने विकर्मों और हर आत्मा के तमोगुणी संस्कारों और प्रकृति के तमोगुण को भस्म करने का कर्त्तव्य करना है। *जैसे चित्रों में शंकर का रूप विनाशकारी अर्थात् तपस्वी रूप दिखाते हैं, ऐसे एकरस स्थिति के आसन पर स्थित होकर अब अपना तपस्वी रूप प्रत्यक्ष दिखाओ।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं नूरे रत्न हूँ"*

 

  *सदा अपने को बापदादा की नजरों में समाई हुई आत्मा अनुभव करते हो? नयनों में समाई हुई आत्मा का स्वरूप क्या होगा? आखों में क्या होता है? बिन्दी।*

 

  *देखने की सारी शक्ति बिन्दी में है ना। तो नयनों में समाई हुई अर्थात् सदा बिन्दी स्वरुप में स्थित रहने वाली - ऐसा अनुभव होता है ना! इसको ही कहते हैं -'नूरे रत्न'।*

 

  *तो सदा अपने को इस स्मृति से आगे बढ़ाते रहो। सदा इसी नशे में रहो कि मैं 'नूरे रत्न' आत्मा हूँ।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  एक सेकण्ड में अपने को अपने सम्पूर्ण निशाने और  नशे में स्थित कर सकते हो? सम्पूर्ण निशाना क्या है उसको तो जानते हो ना? *जब सम्पूर्ण निशाने में स्थित हो जाते हैं - तो नशा तो रहता ही है।* अगर निशाने बुद्धि नहीं टिकती तो नशा भी नहीं रहेगा।

 

✧   *निशाने पर स्थित होने की निशानी है - नशा।* तो ऐसा नशा सदैव रहता है? जो स्वयं नशे में रहते है वह दूसरों को भी नशे में टिका सकते हैं। जैसे कोई हद कि नशा पीते है तो उनकी चलन से, उनके नैन - चैन से कोई भी जान लेता है - इसने नशा पिया हुआ है।

     

✧  इसी प्रकार यह जो सभी से श्रेष्ठ नशा है, जिसको ईश्वरीय नशा कहा जाता है, इसी में स्थित रहने वाला भी दूर से दिखाई तो देगा ना। *दूर से ही वह अवस्था इतना महसूस करे यह कोई - कोई ईश्वरीय लगन में रहने वाली आत्मायें हैं।* ऐसे अपने को महसूस करते हो?

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *स्व-मान में स्थित होना ही जीवन की पहेली को हल करने का साधन है।* आदि से लेकर अभी तक इस पहेली को हल करने में ही लगे हुए हो कि 'मैं कौन हूँ?" *'मैं कौन हूँ।' इस एक शब्द के उत्तर में सारा ज्ञान समाया हुआ है। यह एक शब्द ही खुशी के खजाने, सर्व शक्तियों के खजाने, ज्ञान धन के खजाने, श्वांस और समय के खजाने की चाबी है।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  बाप के फरमान का पालन कर चढ़ती कला में जाना"*

 

_ ➳  मीठे बाबा की यादो में डूबी मै आत्मा... कुटिया में हाले दिल सुनाने के लिए पहुंचती हूँ... मीठे बाबा भी बस मेरे ही इंतजार में बेठे है... अपना समय और संकल्प मुझ पर लुटा रहे है... और मै आत्मा भगवान को सम्मुख पाकर भाव विभोर हूँ... और मीठे बाबा से कह रही हूँ कि... बाबा आपने जीवन को ज्ञान रत्नों से सजाकर कितना मीठा, प्यारा और अनोखा कर दिया है... मै आत्मा *आपका असीम प्यार पाकर, इस विश्व धरा पर महाभाग्यवान बन मुस्करा रही हूँ.*..

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा के जीवन को ऊँचे आयामो से सजाते हुए बोले :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... *ईश्वरीय यादो में सर्व प्राप्तियों से भरपूर होकर, सदा उन्नति की ओर अग्रसर हो जाओ.*.. उतरने चढ़ने के खेल में... सदा के अधिकार को न गंवाओ... साक्षी व् साथी पन की स्म्रति से... फूल पास होने वाले महा भाग्यवान बन जाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा महान जीवन के गुर सीखकर कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... मै आत्मा आपकी प्यारी यादो में सदा उन्नति को पा रही हूँ... *शक्तियो की मालिक बनकर, सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न बन कर सुखो में मुस्करा रही हूँ.*.. व्यर्थ को समाप्त कर सदा समर्थ चिंतन में खोयी हुई हूँ...

 

   *प्यारे बाबा मुझ आत्मा को चढ़ती कला में जाने के राज समझाते हुए कहते है :-* "मीठे लाडले बच्चे... *अपने जीवन की कहानी को विशेषताओ से सम्पन्न बनाकर... इतना खुबसूरत बनाओ कि हर दिल प्रेरणा को प्राप्त करे.*.. व्यर्थ से परे होकर, फुल स्टॉप लगाकर... सदा उन्नति की राहो पर बढ़ते चलो... विशेषताओ के मोती चुगने वाले होलिहंस बन मुस्कराओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा प्यारे बाबा के ज्ञान धन से सम्पन्न बनकर कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा... स्वयं को मात्र देह समझ कर उतरती कला में चलती चली जा रही थी... अंधेरो में भटक रही थी... *कि आपने अपना हाथ देकर, मेरा भाग्य जगा दिया, और मुझे चढ़ती कला में जाने का सारा राज समझा दिया..*. मै आत्मा सदा आपकी उपकारी हूँ बाबा..."

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा को उन्नति से सजे श्रेष्ठ जीवन को समझाते हुए कहते है :-* "मीठे सिकीलधे बच्चे... *जीवन के सार को जीवन में लाकर, वरदानी मूर्त बन मुस्कराओ.*.. अपनी श्रेष्ठ स्थिति से सबको निर्विघ्न बनाने का सहयोग देकर....मीठे बापदादा के स्नेह का रिटर्न देने वाले... बाप समान और सम्पन्न बन जाओ... अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभूतियों में लाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा की असीम दौलत को पाकर कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... अपनी गोद में बिठाकर, अपनी मीठी पालना देकर, आपने मुझे कितना प्यारा और श्रेष्ठ बना दिया है... *मूल्यों को जीने वाली मै आत्मा वरदानी मूर्त बनकर विश्व धरा पर मुस्करा रही हूँ.*.. और अपनी चलन से ईश्वरीय अदा दिखा रही हूँ..."मीठे बाबा से सारे खजाने अपनी झोली में भरकर मै आत्मा साकार सृष्टि में लौट आयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- कभी किसी भी देहधारी को याद नही करना है*"

 

_ ➳  इस नश्वर देह और इस देह से जुड़ी हर वस्तु के चिंतन से मैं जैसे ही अपने मन बुद्धि को हटा कर अपने वस्तविक सत्य स्वरूप के बारे में विचार करती हूँ तो मन बुद्धि स्वत: ही मेरे उस सत्य स्वरूप पर एकाग्र होने लगते है और मैं मन बुद्धि के दिव्य नेत्रों से अपने उस अति सुंदर स्वरूप को देख कर आनन्द विभोर हो उठती है। *आहा! कितना सुंदर, चमकता हुआ, जगमग करता हुआ, दिव्य ज्योतिर्मय स्वरूप है मेरा*। अपने इस अति सुन्दर सलौने स्वरूप को मैं ज्ञान के दिव्य चक्षु से देख रही हूँ और इसमें समाये अपने सातों गुणों और अष्ट शक्तियों का गहराई तक अनुभव कर रही हूँ।

 

_ ➳  मैं देख रही हूँ मुझ आत्मा के सातों गुण सतरंगी किरणों के रूप में चारों ओर फैल कर अपनी अद्भुत छटा बिखरते हुए आस पास के वायुमण्डल को भी सतोगुणी बना रहे हैं। *किरणों का प्रवाह मुझ आत्मा से मेरे पूरे शरीर मे होता हुआ अब धीरे - धीरे बाहर तक फैलने लगा है*। एक दिव्य आलौकिक रूहानी मस्ती चारों और फैलती जा रही है। *चारों और अपने गुणों की किरणें फैलाता हुआ मुझे मेरा यह सतोगुणी स्वरूप एक सतरंगी खिले हुए रूहे गुलाब की तरह दिखाई दे रहा है जिसमे से निकल रही रूहानियत की खुशबू पूरे वायुमण्डल को रूहानी सुगन्ध से भर रही है*।

 

_ ➳  ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे मैं किसी सुगन्धित फूंलो के खिले हुए उपवन में पहुँच गई हूँ जहां चारों ओर फैली दिव्यता मन बुद्धि को दिव्य बना कर, *देह और देह की दुनिया से किनारा कराए, उस दिव्य लोक की ओर ले कर जा रही है जो मुझ आत्मा का वास्तविक घर है, मेरे पिता परमात्मा का घर है*। जहां से मैं आत्मा अपने सत्य स्वरूप के साथ सृष्टि रूपी रंगमंच पर पार्ट बजाने के लिए आई थी और पार्ट बजाते - बजाते अपने सत्य स्वरूप को ही भूल गई थी। किन्तु मेरे शिव पिता परमात्मा ने आ कर मुझे मेरा वास्तविक परिचय दे कर मुझे मेरे उस सत्य स्वरूप का अनुभव करवा दिया।

 

_ ➳  अपने उस सत्य स्वरूप का अनुभव अपने घर में, अपने शिव पिता परमात्मा के सम्मुख करने के लिए मैं आत्मा अब अपने घर परमधाम की ओर चल पड़ती हूँ। मन बुद्धि के विमान पर सवार हो कर सेकण्ड में मैं आकाश को पार कर जाती हूँ और उससे भी परें अपने परमधाम घर में पहुँच जाती हूँ अपने शिव परम पिता परमात्मा के पास। *बीजरूप शिव पिता की मास्टर बीजरूप सन्तान मैं आत्मा स्वयं को देख रही हूँ आत्माओं की अति सुंदर निराकारी दुनिया में*। मेरे सामने बिंदु रूप में मेरे शिव पिता परमात्मा और उनके सामने मैं बिंदु आत्मा। कितना सुखद दृश्य हैं। बिंदु बाप और बिंदु बच्चे का यह मंगल मिलन चित को चैन और मन को आराम दे रहा है ।

 

_ ➳  5 तत्वों के पार लाल सुनहरी प्रकाश से प्रकाशित यह दुनिया कितनी निराली और असीम शांति से भरपूर करने वाली है। चारों और गहन शांति ही शांति का अनुभव हो रहा है। संकल्पो की हलचल मात्र भी यहां नही है। *इस बीजरूप अवस्था में अपने ओरिजनल स्वरूप में स्थित हो कर अपने बीज रूप परमात्मा बाप के सानिध्य में मैं अतीन्द्रिय सुख का अनुभव कर रही हूँ* । बीजरूप बाबा से आती सर्वशक्तियों रूपी किरणों की बौछारें मुझे असीम बल प्रदान कर रही हैं। बाबा से आती सर्वशक्तियों को स्वयं में समाकर मैं शक्तियों का पुंज बन गई हूँ और बहुत ही शक्तिशाली स्थिति का अनुभव कर रही हूँ।

 

_ ➳  शक्ति स्वरूप स्थिति में स्थित हो कर अब मैं पुनः लौट रही हूँ जीवात्माओं की साकारी दुनिया में। फिर से अपने साकार तन में, साकार दुनिया मे, साकार सम्बन्धो के बीच अपने ब्राह्मण स्वरुप में मैं स्थित हूँ। *देह और देह की दुनिया मे रह कर मैं अपना पार्ट बजा रही हूँ*। किन्तु देह और देहधारियों के बीच में रहते हुए भी अपने सत्य स्वरूप में टिक कर अपनी दिव्यता और रूहानियत का अनुभव मुझे इस नश्वर दुनिया से वैराग्य दिला रहा है। स्वयं को मैं इस दुनिया से उपराम अनुभव कर रही हूँ। *बुद्धि को देहधारियों से निकाल, अपने सत्य स्वरूप में अपने सत्य बाप के साथ सर्व सम्बन्धों का सुख लेते हुए मैं हर पल अतीन्द्रिय सुख का अनुभव कर रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं अमृतवेले तीन बिन्दियों का तिलक लगाने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं क्यू, क्या की हलचल से मुक्त आत्मा हूँ।*

   *मैं अचल - अडोल आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सदैव परिवर्तन शक्ति को धारण करती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा व्यर्थ संकल्पों के बहाव के फोर्स को समाप्त कर देती हूँ  ।*

   *मैं सदा समर्थ आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

अव्यक्त बापदादा :-

 

_ ➳  वातावरण को पावरफुल बनाने का लक्ष्य रखो तो सेवा की वृद्धि के लक्षण दिखाई देंगे:- जैसे मन्दिर का वातावरण दूर से ही खींचता है, ऐसे याद की खुशबू का वातावरण ऐसा श्रेष्ठ हो जो आत्माओं को दूर से ही आकर्षित करे कि यह कोई विशेष स्थान है। *सदा याद की शक्ति द्वारा स्वयं को आगे बढ़ाओ और साथ-साथ वायु मण्डल को भी शक्तिशाली बनाओ। सेवाकेन्द्र का वातावरण ऐसा हो जो सभी आत्मायें खिंचती हुई आ जाएं। सेवा सिर्फ वाणी से ही नहीं होती, मंसा से भी सेवा करो। हरेक समझे मुझे वातावरण पावरफुल बनाना है, हम जिम्मेवार हैं। ऐसा जब लक्ष्य रखेंगें तो सेवा की वृद्धि के लक्षण दिखाई देंगे।* आना तो सबको है, यह तो पक्का है। लेकिन कोई सीधे आ जाते हैं, कोई चक्कर लगाकर, भटकने के बाद आ जाते हैं। इसलिए एक-एक समझे कि मैं जागती ज्योति बनकर ऐसा दीपक बनूँ जो परवाने आपेही आयें। आप जागती ज्योति बनकर बैठेंगे तो परवाने आपेही आयेंगे।

 

✺  *"ड्रिल :- सेवाकेंद्र का वायुमंडल शक्तिशाली बनाना"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा सेवाकेंद्र के हाल के चेयर पर चियरफुल होकर बैठी हूँ...* सभी भाई-बहनें भी बैठे हुए हैं... अगरबत्ती की भीनी-भीनी खुशबू आ रही है... चारों ओर लाल रोशनी है... *सामने ब्रह्मा बाबा की तस्वीर और शिवबाबा का लाल लाइट चमक रहा है...* सभी मंत्रमुग्ध होकर बाबा के गाने सुनते हुए झूम रहे हैं... सामने दीदी आकर विराजमान हो जाती हैं... दीदी सबको योग कमेंट्री द्वारा याद की यात्रा पर ले चलती हैं...

 

_ ➳  *मैं आत्मा भृकुटी के चेयर पर गॉडली स्टूडेंट के स्वमान में विराजमान हो जाती हूँ...* सभी प्यारे बाबा का आह्वान करते हैं... आह्वान करते ही सामने शिव बाबा के लाल लाइट में फ़्लैश होता है और वो लाइट का फ़्लैश ब्रह्मा बाबा की तस्वीर में बाबा के मस्तक में चमकने लगता है... *ऐसा लग रहा सामने तस्वीर से बाबा बाहर निकल साकार रूप में खड़े होकर मुस्कुरा रहे हैं...* और सबको अपने प्रेम, सुख, शांति की किरणों से आच्छादित कर रहे हैं...

 

_ ➳  *शांति के सागर को सामने खड़े देख सभी अपने देहभान से मुक्त हो रहे हैं...* शांति के सागर की लहरें चारों ओर फैल रही हैं... मैं आत्मा शांति के सागर की अनंत गहराईयों में समाती जा रही हूँ... न कोई आवाज़, न कोई हलचल, न कोई दुःख-अशांति... मैं आत्मा गहन शांति का अनुभव कर रही हूँ... *सभी के साकार शरीर लुप्त हो चुके हैं... सभी अपने लाइट के शरीर में चमक रहे हैं... सभी जागती ज्योति बन चुके हैं...*

 

_ ➳  *सेवाकेंद्र का वायुमंडल रूहानियत की खुशबू से महक रहा है...* सभी जगमगाते हुए दीपक लग रहे हैं... सभी से वायब्रेशंस निकलकर चारों ओर फैल रहे हैं... सेवाकेंद्र के बाहर दूर-दूर तक रूहानी खुशबू फैल रही है... सेवाकेंद्र का वातावरण पावरफुल बन गया है... *सभी रूहानी दीपक बन अपनी रोशनी चारों ओर फैला रहे हैं... और परवानों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं...*

 

_ ➳  *सेवाकेंद्र शांतिकुंड बन चुका है... शांति की किरणें विश्व की आत्माओं को दूर से ही आकर्षित कर रही हैं...* सभी आत्मायें ऐसा अनुभव कर रही हैं कि यह कोई विशेष स्थान है... सभी भटकती हुई आत्माएँ महसूस कर रही हैं कि यही उनकी मंजिल है... सभी अशांत, अतृप्त आत्मायें शांति की शक्ति से खींचे चले आ रहे हैं... *याद की शक्ति द्वारा मैं आत्मा स्वयं भी आगे बढ़ता हुआ अनुभव कर रही हूँ और साथ-साथ वायु मण्डल को भी शक्तिशाली बना रही हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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