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 09 / 07 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *याद के पुरुषार्थ से कर्मेन्द्रियों को वश में किया ?*

 

➢➢ *सर्विस में दुःख सुख मान अपमान सब कुछ सहन किया ?*

 

➢➢ *सर्व शक्तियों की लाइट द्वारा आत्माओं को रास्ता दिखाया ?*

 

➢➢ *स्नेह और सहयोग के साथ शक्ति रूप बने ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *अगर अभी से स्व कल्याण का श्रेष्ठ प्लैन नहीं बनायेंगे तो विश्व सेवा में सकाश नहीं मिल सकेगी।* इसलिए अभी सेवा में सकाश दें, बुद्धियों को परिवर्तन करने की सेवा करो। फिर देखो सफलता आपके सामने स्वयं झुकेगी। *मन्सा-वाचा की शक्ति से विघ्नों का पर्दा हटा दो तो अन्दर कल्याण का दृश्य दिखाई देगा।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं सारे चक्र में सबसे साहूकार आत्मा हूँ"*

 

  सबसे साहूकार से साहूकार कौन है? जो समझते हैं कि सारे चक्र के अन्दर साहूकार से साहूकार हम आत्मा हैं, वो हाथ उठाओ। किसमें साहूकार हो? कितने प्रकार के धन मिले हैं? वो लिस्ट याद रहती है? *बहुत खजाने मिले हैं! एक दिन में कितनी कमाई करते हो, मालूम है? पद्मों की कमाई करते हो। रहते गांव में हो और पद्मों की कमाई कर रहे हो! देखो, यही परमात्मा पिता की कमाल है जो देखने में साधारण लेकिन हैं सबसे साहूकार में साहूकार!*

 

  तो अखबार में निकालेंगे-यहाँ सबसे साहूकार में साहूकार बैठे हैं। तो फिर सब आपके पीछे आयेंगे। आजकल आतंकवादी साहूकारों के पीछे पड़ते हैं ना। फिर आपके पीछे पड़ जायेंगे तो क्या करेंगे? उन्हों को भी साहूकार बना देंगे ना। *हैं देखो कितने साधारण रूप में, कोई आपको देखकर समझेंगे कि ये सारे विश्व में साहूकार हैं या पद्मों की कमाई करने वाले हैं? लेकिन साधारणता में महानता समाई हुई है। जितने ही साधारण हो उतने ही अन्दर महान् हो! तो यह नशा रहता है-बाप ने क्या से क्या बना दिया और क्या-क्या दे दिया!* दोनों ही बातें याद रहती हैं ना।

 

  *तो अखबार में निकालेंगे ना-रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड (विश्व में सबसे अधिक धनवान)। और देखो, खजाना भी ऐसा है जिसको न चोर लूट सकता है, न आग जला सकती है, न पानी डूबो सकता है। ऐसा खजाना बाप ने दे दिया। अविनाशी खजाना है ना। अविनाशी खजाना कोई विनाश कर नहीं सकता। और कितना सहज मिल गया!* जितना खजाना है उसके अन्तर में मेहनत की है कुछ? त्याग किया या भाग्य मिला? त्याग भी किया तो बुराई का किया ना। बुराई छोड़ना भी कोई छोड़ना हुआ क्या? दुनिया कहती है-त्याग किया और आप कहते हो-भाग्य मिला है।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *समेटने की शक्ति बहुत अपने पास जमा करो।* इसके लिए विशेष अभ्यास चाहिए। अभी-अभी साकारी, अभी-अभी आकारी, अभी-अभी निराकारी। इन तीनों स्टेजेस में स्थित रहना इतना सहज हो जाए।

 

✧  *जैसे साकार रूप में सहज ही स्थित हो जाते हो वैसे आकारी और निराकारी स्थिति भी मेरी स्थिति है, तो अपनी स्थिति में स्थित होना तो सहज होना चाहिए।* जैसे साकार रूप में एक ड्रेस चेन्ज कर दूसरी ड्रेस धारण करते हो ऐसे यह स्वरूप की स्थिति परिवर्तन कर सको साकार स्वरूप की स्मृति को छोड आकारी फरिश्ता स्वरूप बन जाओ।

 

✧  तो *फरिश्ते-पन की ड्रेस सेकण्ड में धारण कर ली। ड्रेस चेन्ज करना नहीं आता?*  ऐसे अभ्यास बहुत समय से चाहिए। तब ऐसे समय पर पास हो जायेंगे।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ बापदादा द्वारा सभी बच्चों को कौन सी नम्बरवन श्रीमत मिली हुई है? नम्बरवन श्रीमत है कि 'अपने को आत्मा समझो और आत्मा समझकर बाप को याद करो।' *सिर्फ आत्मा समझने से भी बाप की शक्ति नहीं मिलेगी। याद न ठहरने का कारण ही है कि आत्मा समझकर याद नहीं करते हो। आत्मा के बजाए अपने को साधारण शरीरधारी समझकर याद करते हो। इसलिए याद टिकती नहीं।* वैसे भी कोई दो चीज़ों को जब जोड़ा जाता है तो पहले समान बनाते हैं। ऐसे ही आत्मा समझकर याद करो तो याद सहज हो जायेगी, क्योंकि समान हो गये ना। यह पहली श्रीमत ही प्रैक्टिकल में सदा लाते रहो। यही मुख्य फाउण्डेशन है। अगर फाउण्डेशन कच्चा होगा तो आगे चढ़ती कला नहीं हो सकती।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- विचार सागर मंथन करना"*

 

_ ➳  मीठे बाबा ने जब से मेरा हाथ पकड़ा हैं, मुझे अपना बनाया हैं... *जीवन फूलो से महकने लगा है... चलते फिरते बस यही विचार रहता हैं कि कैसे मै ज्ञान रत्नों का अलग अलग तरह से विचार सागर मंथन करू...* जन्मो से प्यासी आत्मा को बाबा का हाथ और साथ मिलेगा... ये तो स्वप्नों में भी सोचा ना था... *आज मीठे बाबा को पाकर मैं आत्मा अमीर बन गईं हूँ सही मायने में... बाबा की प्रत्यक्षता की सर्विस की नई नई युक्तियाँ मन मे सजाकर... मैं आत्मा उड़ चली सूक्ष्म वतन बाबा को सब बताने... हाले दिल सुनाने* ...

 

  *मेरे प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को विचार सागर मंथन के गहरे राज बताते हुए कहा:-* "मीठे सिकीलधे बच्चे... *मुझ बाप का संग बहुत वरदानी हैं... इसको हर हाल मे सफल बनाना है... चलते फ़िरते हर कर्म में बाप को याद रख, सर्विस की नई नई युक्तियाँ निकालनी हैं...* समर्थ चितंन से बाप को, बाप की याद को सफल बनाना है... सच्ची कमाई से देवताई अमीरी को पाना हैं..."

 

_ ➳  *मै आत्मा बाबा को पूरे हक से, अधिकार से कहती हूं :-* "मेरे प्यारे मीठे बाबा... *आपने अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रख कर, मुझे ज्ञानरत्नो से भरपूर किया हैं* ... नए नए सर्विस की युक्तिओ से नवाजा हैं... इस सच्ची कमाई को ग्रहण कर मैं पूरे विश्व मे बाँट रही हूं... सभी आत्माओ की रूहानी सर्विस कर रही हूँ..."

 

  *परमपिता ने मुझे स्वर्ग के सुखों को याद दिलाते हुए कहा:-* "मेरे प्यारे, नैनो के तारे बच्चे... *किस्मत ने अति उत्तम दिन दिखाया हैं... स्वयम भगवान को हर सम्बन्ध में मिलवाया हैं... तो अब सच्ची कमाई करो* ... चलते फिरते बस एक बाबा की याद... दूसरा न कोई... सार्थक कर लो ये जीवन, हर सांस मे पिरो लो बाबा का प्यार... इतनी सर्विस की युक्तियाँ निकालो की... 21जन्मो के लिए भरपूर हो जाओ..."

 

_ ➳  *मैं आत्मा बाबा की वसीयत, वर्सा की हकदार बनते हुए बाबा को कहती हूं :-* "प्राणों से भी प्यारे मेरे बाबा... *मै आपकी याद में सदा खोई हुई... प्यार के झूले में झूलती हुई, हर क्षण बस आपको याद कर आनन्दित हो रही हूँ* ... हर पल अन्य आत्माओ को भी आप से जुड़ने की नई नई युक्तियाँ बता कर... खुद को भाग्यशाली बना रही हूँ..."

 

  *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को बड़े प्यार से निहारते हुए कहा:-* "मीठे मीठे बच्चे... इस संगम की मौज में, बाबा की सर्विस से... *धनवान बन जाओ... एक पल भी बाबा की याद ना छोड़ो... सच्ची कमाई करो और कराओ... यादों की कमाई से देवताओ की तरह सम्पन्न बन जाओ* ... भरपूर होकर 21 जन्मो तक मौज मनाओ... हर कर्म करते हुए बुद्धि योग मुझ बाप संग लगाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा बाबा से सम्पूर्ण ज्ञान खजाने बटोरते हुए, सारे विश्व की मालिक बन कहती हूं:-* प्यारे बाबा... "हमेशा से आपने मुझ आत्मा को महारानी का ताज पहनाया हैं... *मुझ आत्मा को चलते फिरते, रूहानी सर्विस करने के निमित्त बनाया हैं* ... कर्म करते आप को याद रखने की शक्ति दी हैं... इस तरह रूह रिहान कर मै आत्मा वापिस अपने लौकिक वतन आ जाती हूं..."

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- बाप की याद में रहना है*"

 

_ ➳  "अतींद्रिय सुख पूछना है तो गोप गोपियों से पूछो" बाबा के ये महावाक्य स्मृति में आते ही मैं खो जाती हूँ उस अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति में जो अपने गोपीवल्लभ बाप की याद में बैठते ही मैं आत्मा रूपी गोपी प्राप्त करती हूँ। *अपने गोपी वल्लभ बाप के साथ मनाई साकार मिलन की मीठी यादें अब एक - एक करके अनेक चित्रों के रूप में मेरी आँखों के सामने स्पष्ट हो रही हैं*। साकार मिलन का वो सुख मुझे बार - बार उस पावन धरती की याद दिला रहा है और मन रूपी पँछी बार - बार उड़ कर उस स्थान पर जा रहा है।

 

_ ➳  देख रही हूँ अब मैं स्वयं को मधुबन के आंगन में। बाबा की कुटिया के बाहर बने पार्क में मैं बैठी हूँ और एक खूबसूरत दृश्य देख रही हूँ। *सामने नटखट कान्हा मुरली बजा रहें हैं और उस मुरली की मीठी तान सबको मदहोश कर रही है*। गोपियाँ मुरली की मीठी तान को सुन कर अपनी सुध - बुध गंवा कर दौड़ी चली आ रही है। हर गोपी के साथ कान्हा रास करता हुआ दिखाई दे रहा है। *सभी गोपिकाएं एक अलौकिक मस्ती में मस्त हो कर अपने नटखट कान्हा के साथ, नृत्य कर रही हैं*। देखते ही देखते यह दृश्य एक और खूबसूरत दृश्य में परिवर्तित हो जाता है।

 

_ ➳  अब मैं देख रही हूँ स्वयं को डायमण्ड हाल में अपने गोपीवल्लभ बाबा के सामने जो अपने निर्धारित रथ गुलजार दादी की भृकुटि में विराजमान हो कर, उनके मुख से मधुर महावाक्य उच्चारण कर रहें हैं। *वहां उपस्थित सभी आत्मा रूपी गोपिकाएं उन मधुर महावाक्यों को सुन कर, देह के भान से मुक्त, एक अलौकिक रूहानी मस्ती में डूबी हुई दिखाई दे रही हैं*। अपने गोपीवल्लभ बाबा की मीठी मुरली के मधुर महावाक्य मैं आत्मा गोपी एकाग्र हो कर सुन रही हूँ और इन मधुर महावाक्यो के एक - एक शब्द में समाये अपने गोपी वल्लभ बाबा के प्रेम का मैं गहराई तक अनुभव कर रही हूँ। उनके प्रेम का यह मधुर एहसास मुझे असीम सुख की अनुभूति करवा रहा है।

 

_ ➳  मुरली के मधुर महावाक्य उच्चारण करने के साथ - साथ अब मेरे गोपीवल्लभ बाबा अपनी मीठी दृष्टि से मुझे निहाल कर रहें हैं। *उनकी मीठी दृष्टि से आ रही लाइट और माइट पाकर मैं भी लाइट माइट स्वरूप में स्थित हो कर, मास्टर बीजरूप स्थिति का अनुभव कर रही हूँ*। और इस स्थिति में स्थित होते ही अब मै अपने गोपीवल्लभ बाबा को उनके निराकार बीजरूप स्वरूप में अपने बिल्कुल सामने देख रही हूँ। उनसे आ रही सर्वशक्तियाँ चारों और फैल रही है और उनसे निकल रहे वायब्रेशन शांति की गहन अनुभूति करवा रहें हैं।

 

_ ➳  गहन शांति की अनुभूति में गहराई तक खोई मैं आत्मा गोपी धीरे धीरे अपने गोपीवल्लभ बाप के बिल्कुल समीप पहुंच कर अब उनके साथ कम्बाइंड हो जाती हूँ। *इस कम्बाइंड स्थिति में स्थित होते ही अब मैं उनसे आ रही अनन्त शक्तियों को स्वयं में समाता हुआ स्पष्ट अनुभव कर रही हूँ*। परमात्म शक्तियां मुझ आत्मा में समाकर मुझे बहुत ही शक्तिशाली बना रही हैं। मेरे गोपीवल्लभ का प्रेम उनकी अनन्त किरणों के रूप में निरन्तर मुझ पर बरस रहा है। *ऐसा लग रहा है जैसे सुख का कोई झरना मुझ आत्मा के ऊपर बह रहा है और मैं असीम सुख से भरपूर होती जा रही हूँ*।

 

_ ➳  इस अतीन्द्रिय सुखमय स्थिति का गहराई तक अनुभव करके अब मैं स्वयं को वापिस अपने ब्राह्मण स्वरूप में और अपने गोपी वल्लभ बाप को उनके रथ पर विराजमान देख रही हूँ। *उनकी मीठी याद में समाये अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति को अपने साथ लेकर अब मैं मधुबन से वापिस अपने कर्मक्षेत्र पर लौट रही हूँ*। कर्मयोगी बन, हर कर्म करते अपने मीठे बाबा की याद में रह अब मैं हर समय अतीन्द्रिय सुख का अनुभव कर रही हूँ।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं सर्व शक्तियों की लाइट द्वारा आत्माओं को रास्ता दिखाने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं चैतन्य लाइट हाउस आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा स्नेह और सहयोग के साथ शक्ति रूप बन जाती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा राजधानी में नंबर आगे प्राप्त करती  हूँ  ।*

   *मैं शक्तिशाली आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  कई बच्चे बड़े होशियार हैं। अपने पुराने लोक की लाज भी रखने चाहते और ब्राह्मण लोक में भी श्रेष्ठ बनना चाहते हैं। *बापदादा कहते लौकिक कुल की लोकलाज भल निभाओ उसकी मना नहीं है लेकिन धर्म कर्म को छोड़ करके लोकलाज रखनायह रांग है। और फिर होशियारी क्या करते हैंसमझते हैं किसको क्या पता? - बाप तो कहते ही हैं - कि मैं जानी जाननहार नहीं हूँ। निमित्त आत्माओं को भी क्या पताऐसे तो चलता है। और चल करके मधुबन में पहुँच भी जाते हैं।* सेवाकेन्द्रों पर भी अपने आपको छिपाकर सेवा में नामीग्रामी भी बन जाते हैं। जरा सा सहयोग देकर सहयोग के आधार पर बहुत अच्छे सेवाधारी का टाइटल भी खरीद कर लेते हैं। *लेकिन जन्म-जन्म का श्रेष्ठ टाइटल सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पन्न, सम्पूर्ण निर्विकारी... यह अविनाशी टाइटल गंवा देते हैं। तो यह सहयोग दिया नहीं लेकिन अन्दर एकबाहर दूसरा'' इस धोखे द्वारा बोझ उठाया।*

 

 _ ➳  *सहयोगी आत्मा के बजाए बोझ उठाने वाले बन गये। कितना भी होशियारी से स्वयं को चलाओ लेकिन यह होशियारी का चलानाचलाना नहीं लेकिन चिल्लाना है।* ऐसे नहीं समझना यह सेवाकेन्द्र कोई निमित्त आत्माओं के स्थान हैं। *आत्माओं को तो चला लेते लेकिन परमात्मा के आगे एक का लाख गुणा हिसाब हर आत्मा के कर्म के खाते में जमा हो ही जाता है।* उस खाते को चला नहीं सकते। इसलिए बापदादा को ऐसे होशियार बच्चों पर भी तरस पड़ता है। फिर भी एक बार बाप कहा तो बाप भी बच्चों के कल्याण के लिए सदा शिक्षा देते ही रहेंगे। *तो ऐसे होशियार मत बनना। सदा ब्राह्मण लोक की लाज रखना।*

 

✺  *"ड्रिल :- अन्दर एक, बाहर दूसरा'' - इस धोखे द्वारा बोझ नहीं उठाना।*

 

 _ ➳  *इस दुनियावी समुन्दर के बीच देह रूपी सीप के अन्दर मैं आत्मा रूपी मोती चमक रही हूँ...* कई जन्मों से अपने असली गुणों को भूलकर मैं आत्मा मोती इस देह रूपी सीप के अन्दर दबकर रह गई थी... दूर गगन से ज्ञान सूर्य की किरणें मुझ पर पड़ रही हैं... *ज्ञान सूर्य की किरणों से देह रूपी सीप का आवरण टूट रहा है... देह रूपी सीप के आवरण को तोड़ मैं आत्मा रूपी मोती बाहर निकलती हूँ... पंच तत्वों की दुनिया से ऊपर उड रही हूँ...* आकाश तत्व से भी पार और ऊपर उडती हुई पहुँच जाती हूँ अपने परमपिता के पास परमधाम...

 

 _ ➳  *परमधाम में मैं आत्मा अपने स्व स्वरूप बिंदु रूप में चमक रही हूँ... अपने पिता की बाँहों में लिपट जाती हूँ...* मेरे शिव पिता से निकलती दिव्य सतरंगी किरणों से मुझ आत्मा के सारे विकार काले धुंए के रूप में बाहर निकल रहे हैं... मैं आत्मा निर्विकारी बन रही हूँ... जन्म-जन्मान्तर के सभी अवगुण भस्म हो रहे हैं... रंग-बिरंगी किरणें एक-एक गुण के रूप में मुझ आत्मा में समा रहे हैं... मैं आत्मा अपने असली गुणों को धारण कर रही हूँ... सर्व गुण सम्पन्न बन रही हूँ... सभी कमी-कमजोरियां, पुराने आलस्य-अलबेलेपन के संस्कार समाप्त हो रहे हैं... *मैं आत्मा शक्तियों को धारण कर शक्ति स्वरूप बन रही हूँ... मैं कलाविहीन आत्मा अब 16 कलाओं से सम्पन्न बन गई हूँ...*        

 

 _ ➳  मैं आत्मा जन्म-जन्म के श्रेष्ठ अविनाशी टाइटल से श्रृंगार कर नीचे अपने देह में अवतरित होती हूँ... मैं आत्मा सदैव अपने दिव्य गुणों, शक्तियों की स्मृति में रहकर हर कर्म कर रही हूँ... हर कर्म को बाबा की सेवा समझ कर रही हूँ... करावनहार करा रहा है मैं आत्मा निमित्त करनहार कर रही हूँ... *मैं आत्मा ब्राह्मण कुल की मर्यादाओं, धर्म, कर्म का पालन करते हुए लौकिक कुल की लोकलाज को निभा रही हूँ... मैं आत्मा ऐसा कोई भी कर्म नहीं करती हूँ जिससे ब्राह्मण कुल कलंकित हो... सदा ब्राह्मण लोक की लाज का ध्यान रखते हुए हर कर्म को करती हूँ... कभी भी डिस सर्विस नहीं करती हूँ...*

 

 _ ➳  *मैं आत्मा अन्दर और बाहर एक समान रहती हूँ... अन्दर एकबाहर दूसरा'' इस धोखे द्वारा बोझ नहीं उठाती हूँ...* सहयोगी आत्मा बन सर्व का सहयोग करती हूँ... पुराने लोक की लाज रखने कोई भी होशियारी नहीं दिखाती हूँ... कर्म का खाता नहीं बढ़ाती हूँ... बाप से, निमित्त आत्माओं से सच्चाई और सफाई से रहती हूँ... सच्चा-सच्चा ब्राह्मण बन, ब्राह्मण धर्म को धारण कर कर्म में लाती हूँ... बाबा की शिक्षाओं को धारण कर आचरण और व्यवहार में लाती हूँ... *सदा अपने को बाबा के बगीचे का रूहानी पुष्प समझ अपने कर्तव्यों को निभाती हूँ... फिर से काँटों को धारण नहीं करती हूँ... सदा आत्मिक दृष्टि, वृत्ति रख लौकिक और अलौकिक का बैलेंस रखती हूँ... अल्पकाल के विनाशी टाइटल के पीछे अपना अविनाशी टाइटल नहीं गंवाती हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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