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 10 / 01 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *दिन रात सतोप्रधान बनने की फिकरात रही ?*

 

➢➢ *सेवा में मान शान के कच्चे फल को त्याग सदा प्रसन्नचित रहे ?*

 

➢➢ *परमात्म प्यार के सुखदाई झूले में झूलते रहे ?*

 

➢➢ *मन की एकाग्रता पर विशेष ध्यान दे आर्डर से मन को चलाया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *अशरीरी बनना वायरलेस सेट है। वाइसलेस बनना ही वायरलेस सेट की सेटिंग है। जरा भी अंश के भी अंशमात्र विकार वायरलेस के सेट को बेकार कर देगा इसलिए अब कर्मबन्धनी से कर्मयोगी बनो।* अनेक बन्धनों से मुक्त एक बाप के सम्बन्ध में समझो तो सदा एवररेडी रहेंगे।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं महावीर आत्मा हूँ"*

 

   सभी अपने को हावीर समझते हो ना? *महावीर अर्थात् सदा शस्त्रधारी। शक्तियों को वा पाण्डवों को सदा वाहन में दिखाते हैं और शस्त्र भी दिखाते हैं।*

 

  शस्त्र अर्थात् अलंकार। तो वाहनधारी भी और अलंकारधारी भी। *वाहन है - श्रेष्ठ स्थिति और अलंकार हैं - सर्वशक्तियाँ। ऐसे वाहनधारी और अलंकारधारी ही साक्षात्कारमूर्त बन सकते हैं।*

 

  *तो साक्षात बन सब को बाप का साक्षात्कार कराना यह है महावीर बच्चों का कर्तव्य।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *एकाग्रता की शक्ति, मन-बुद्धि दोनों ही एकाग्र हो तब कैचिंग पॉवर होगी।* बहुत अनुभव करेंगे। संकल्प किया - नि:स्वार्थ, स्वच्छ, स्पष्ट वह बहुत क्विक अनुभव करायेगा। साइलेन्स की शक्ति के आगे यह साइन्स चुकेगी। अभी भी समझते जाते हैं कि साइन्स में भी कोई मिसिंग है जो भरनी चाहिए।

 

✧  इसलिए *बापदादा फिर से अण्डरलाइन करा रहा हे कि अन्तिम स्टेज, अंतिम सेवा - यह संकल्प शक्ति बहुत फास्ट सेवा करायेगी।* इसलिए संकल्प शक्ति के ऊपर और अटेन्शन दो। बचाओ, जमा करो। बहुत काम में आयेगी। प्रयोगी इस संकल्प की शक्ति से बनेंगे।

 

✧  साइंस का महत्व क्यों है? प्रयोग में आती है तब सब समझते हैं हाँ, साइंस अच्छा काम करती है। तो साइलेन्स की पॉवर का प्रयोग करने के लिए एकाग्रता की शक्ति चाहिए और *एकाग्रता का मूल आधार है - मन की कन्ट्रोलिंग पॉवर, जिससे मनोबल बढता है।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *साइलेंस पॉवर प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *जैसे साइन्स के साधनों द्वारा समय और आवाज़ कितना भी दूर होते समीप हो गया है ना।* जैसे प्लेन द्वारा समय कितना नज़दीक हो गया है, थोड़े समय में कहाँ से कहाँ पहुँच सकते हो। *टेलीफोन द्वारा आवाज़ कितना समीप हो गया है।* लण्डन के व्यक्ति का आवाज़ भी ऐसे सुनाई देगा जैसे सम्मुख बात कर रहे हैं। ऐसे ही टेलीविजन के साधनों द्वारा कोई भी दृश्य वा व्यक्ति दूर होते हुए भी सम्मुख अनुभव होता है।

〰✧  साइन्स तो आपकी रचना है। आप मास्टर रचयिता हो। *साइलेन्स की शक्ति से आप सब भी विश्व की किसी भी दूर रहने वाली आत्मा का आवाज़ सुन सकते हो।* कौन-सा आवाज़? साइन्स मुख का आवाज़ सुनाने का साधन बन सकती है लेकिन मन का आवाज़ नहीं पहुँचा सकती। *साइलेन्स की शक्ति से हर आत्मा के मन का आवाज़ इतना ही समीप सुनाई देगा जैसे कोई सम्मुख बोल रहा है।*

〰✧  आत्माओं के मन में अशान्ति, दु:ख की स्थिति के चित्र ऐसे ही स्पष्ट दिखाई देंगे जैसे टी.वी. द्वारा दृश्य वा व्यक्ति स्पष्ट देखते हो। जैसे इन साधनों का कनेक्शन जोड़ा, स्वीच ऑन किया और स्पष्ट दिखाई और सुनाई देता है। ऐसे ही *बाप से कनेक्शन जोड़ा, श्रेष्ठ भावना और कामना का स्वीच ऑन किया तो दूर की आत्माओं को भी समीप अनुभव करेंगे।* इसको कहा जाता है विश्व-कल्याणकारी। ऐसी स्थिति को बनाने के लिए विशेष कोन-सा साधन अपनाना पड़े। *इन सबका आधार है साइलेन्स।* वर्तमान समय साइलेन्स की शक्ति जमा करो।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  सम्पूर्ण पवित्र बन बाप का नाम बाला करना"*

 

_ ➳  मीठे प्यारे बाबा की यादो में डूबी हुई मै आत्मा... अपने फ़रिश्ते प्रकाश को ओढ़कर सूक्ष्म वतन में पहुंचती हूँ... मीठे बाबा मुझे देख कर मुस्कराते हुए वरदानों की बौछार में मुझे भिगोने लगते है... *अपने आराध्य और मुझ आत्मा के मिलन् की प्यारी घड़ियों में वक्त ही ठहर गया है.*.. सारा आलम सुख और सुकून भरा है... सुख और आनन्द चहुँ ओर बिखर रहा है... और मुझ आत्मा की सुख अनुभूति से भरी सुख की किरणे स्थूल वतन तक फैल रही है... सारी प्रकर्ति और आत्माये सुख की अनुभूतियों में खोयी हुई है...

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को पवित्रता के श्रंगार से सजाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... कभी तो भगवान के दर्शन की कामना रखते थे... और आज ईश्वर ही पिता बनकर सम्मुख बेठा है.. तो *पिता की यादो भरी गोद में बैठकर, पवित्रता की खुशबु से भर जाओ.*.. इस अंतिम जनम में पावनता के रंग में रंग पवित्र बन... घर चलने की तैयारी करो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा को मुझ आत्मा के भविष्य को सुनहरा करते देख कहती हूँ :-* "प्राणप्रिय बाबा मेरे... मनमत और परमत के प्रभाव में आकर मै आत्मा कितनी पतित हो गयी थी... *आपने अपनी प्यार भरी बाँहों में भरकर, मुझे कितना पावन बना दिया है.*.. मै आत्मा सम्पूर्ण पवित्र बनकर मुस्करा रही हूँ..."

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा से पवित्रता के पक्के व्रत का वादा लेते हुए कहा :-* "मीठे लाडले बच्चे... मीठे बाबा के प्यारे साथ के, इस वरदानी संगम में पवित्रता का पक्का व्रत रखकर पवित्र बनो... यह अन्तिम जनम प्यारे बाबा के हाथो में सौंप दो... पावनता से जगमगाओ... *यही पवित्रता सच्चे सुखो का आधार है, जो अपार सुखो से दामन सजाएगी.*.."

 

_ ➳  *मै आत्मा प्यारे बाबा की गोद में ख़ुशी से झूमते हुए कहती हूँ :-* "मीठे दुलारे बाबा मेरे... आपने जीवन में आकर जीवन कितना प्यारा और अदभुत बना दिया है... विकारी बनकर जो खुद की ही नजरो में गिर गयी थी... आज पावन बनकर फिर से गर्वित हो गयी हूँ... *पवित्रता ने मेरा खोया हुआ सम्मान दिलाकर, मुझे कितना ऊँचा बना दिया है.*.."

 

   *मीठे बाबा मुझे अपने ज्ञान और याद की रश्मियों से लबालब करते हुए कहते है :-* "मीठे सिकीलधे बच्चे... देह भान को छोड़ मीठे बाबा की यादो के नशे में डूबकर... पावन बन मुस्कराओ... पवित्रता का पक्का पक्का व्रत रखो... और *अपनी वही चमक दमक को पाकर, अपूर्व सुखो के मालिक बन, खुशियो में खिलखिलाओ.*.. पवित्र बन कर, ही पवित्र दुनिया में जाना है...."

 

_ ➳  *मै आत्मा पवित्रता से सजधज कर मीठे बाबा से कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा... आप जीवन में न थे तो मै आत्मा कितनी काली पतित बनकर बुझ गयी थी, आपने आकर मेरी बुझी ज्योति को पुनः जगाया है... *मुझे पावनता से सजाकर मुझे कितना खुबसूरत बनाया है.. मेरा खोया श्रृंगार वापिस दिलाया है...* प्यारे बाबा को दिल के सारे जज्बात सुनाकर मै आत्मा.. अपने साकारी तन में लौट आयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- बेहद की पढ़ाई पढ़नी और पढ़ानी है*"

 

_ ➳  *मनमनाभव के महामन्त्र को स्मृति में लाकर अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप में मैं जैसे ही स्थित होती हूँ मुझे अपनी ईश्वरीय पढ़ाई, पढ़ाने वाले अल्फ अर्थात अपने परम शिक्षक शिव बाबा और बे अर्थात इस मोस्ट वैल्युबुल पढ़ाई से मिलने वाली सतयुग की बादशाही भी स्वत: ही स्मृति में आने लगती है*। मन मे विचार चलता है कि लौकिक रीति से विद्यार्थी अल्प काल के उंच विनाशी पद को पाने के लिए कितनी मुश्किल पढ़ाई पड़ते हैं। कैसे रात - दिन एक कर देते है। सिवाय पढ़ाई के उन्हें और कुछ सूझता नही। कितनी मेहनत करते है किंतु फिर भी प्राप्ति अल्प काल के लिए ही होती है।

 

_ ➳  यहाँ तो अल्फ और बे को याद करने की कितनी सिम्पल पढ़ाई है और प्राप्ति जन्म - जन्म की है। *मन ही मन मैं अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य की सराहना करती हूँ कि "वाह रे मैं खुशनसीब आत्मा" जो स्वयं भगवान शिक्षक बन मुझे इतनी सिम्पल पढ़ाई पढ़ा कर जन्म जन्मान्तर के लिए मेरा भाग्य बनाने आये हैं*। ऐसे भगवान बाप, टीचर, सतगुरु पर मुझे कितना ना बलिहार जाना चाहिए। मन में यह संकल्प आते ही अपने परम शिक्षक को मिलने के लिए मन बेचैन हो उठता है।

 

_ ➳  अपने लाइट के फ़रिशता स्वरूप को धारण कर मैं चल पड़ती हूँ अपने परम शिक्षक शिव बाबा के पास उनसे ज्ञान के अथाह खजाने लेने ताकि स्वयं को भरपूर कर, इस ईश्वरीय पढ़ाई को अच्छी रीति पढ़ कर औरों को भी पढ़ा सकूँ। *अति तीव्र वेग से उड़ता हुआ मैं फ़रिशता सेकण्ड में साकारी दुनिया को पार कर, सूक्ष्म लोक में प्रवेश करता हूँ*। अपने सामने अपने परम शिक्षक शिव बाबा को ब्रह्मा बाबा की भृकुटि में मैं स्पष्ट देख रही हूँ। बापदादा बड़े प्यार से मन्द - मन्द मुस्कराते हुए अपने नयनो से मुझे निहार रहे हैं। *बाबा की भृकुटि से बहुत तेज प्रकाश निकल कर सीधा मुझ फ़रिश्ते पर पड़ रहा है। यह प्रकाश स्नेह की मजबूत डोर बन कर मुझे अपनी और खींच रहा है*।

 

_ ➳  बाबा के स्नेह की डोर से बंधा मैं फ़रिशता अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप में स्थित हो कर बाबा के सामने जा कर बैठ जाता हूँ। बाबा ज्ञान के अथाह खजाने मुझ पर लुटा रहें हैं। *मेरी बुद्धि रूपी झोली को अविनाशी ज्ञान रत्नों से भरपूर कर रहें हैं*। अल्फ और बे को याद करने की अति सिम्पल पढ़ाई पढ़ा कर अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रख कर, बाबा मुझे इस पढ़ाई को अच्छी रीति पढ़ने और दूसरों को पढ़ाने का वरदान दे रहें हैं।

 

_ ➳  *ज्ञान के अखुट खजानों से अपनी बुद्धि रूपी झोली को भरपूर करके, अपने फ़रिशता स्वरूप को सूक्ष्म लोक में छोड़, अपने निराकार ज्योति बिंदु स्वरूप में स्थित हो कर अब मैं आत्मा ज्ञान सूर्य शिव बाबा के पास उनके धाम पहुँच जाती हूँ* और जा कर अपने परमशिक्षक ज्ञानसूर्य शिव बाबा की सर्वशक्तियों की किरणों की छत्रछाया में बैठ जाती हूँ। ज्ञान की अनन्त किरणों से स्वयं को भरपूर करके मैं वापिस साकारी दुनिया की ओर प्रस्थान करती हूँ और जा कर अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो जाती हूँ।

 

_ ➳  अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप को सदा स्मृति में रख अब मैं अल्फ और बे को याद करने की इस अति सिम्पल पढ़ाई को अच्छी रीति पढ़ने और औरों को पढ़ाने की सेवा में लगी रहती हूँ। *हर रोज अपनी झोली अविनाशी ज्ञान रत्नों से भरकर, वरदानीमूर्त बन अपने सम्बन्ध - सम्पर्क में आने वाली हर आत्मा को अपने मुख से ज्ञान रत्नों का दान दे कर उन्हें भी अल्फ और बे को याद करने की यह सिम्पल पढ़ाई पढ़ने और उंच प्रालब्ध बनाने के लिए प्रेरित करती रहती हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं परमात्म प्यार के सुखदाई झूले में झूल कर दुःख की लहर से मुक्त होने वाली सुख स्वरूप आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं सेवा में मान - शान के कच्चे फल को त्याग सदा प्रसन्नचित रहने वाली अभिमान मुक्त्त आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. देखो परिवर्तन तो होना ही है ना! तो प्रकृति भी अपना काम तो करेगी ना! जब मनुष्य आत्माओं ने प्रकृति को तमो गुणी बना दियातो वह अपना काम तो करेगी ना। लेकिन हर खेलड्रामा के खेल मे यह भी खेल हैं। खंल को देखते हुए अपनी अवस्था ऊपर नीचे नही करना। *मास्टर सर्वशक्तिवान आत्माओं की स्व-स्थिति पर पर-स्थिति प्रभाव नही डाले। और ही आत्माओं को मानसिक परेशानियों से छुडाने के निमित्त बनो क्यों की मन की परेशानी आप मेडिटेशन से ही मिटा सकते हो।* डाक्टर्स अपना काम करेंगे, साईन्स वाले अपना काम करेंगेगवमेंन्ट अपना काम करेगीआप का काम हैं मन के परेशानीटेन्शन को मिटाना। टेन्सन फ्री जीवन का दान देना। सहयोग देना।

 

 _ ➳  2. जैसे आग लगती है तो आग बुजाने वाले डरते नही है, बुजाते है। *तो आप सब भी मन के परेशानी की आग बुजाने वाले हो।*

 

 _ ➳  3. देखो प्रकृति को कोई मना नहीं कर सकता हैगुजरात में आओआबू में नहीं आओबाम्बे में नहीं आओनहीं। वह स्वतन्त्र है। *लेकिन सभी को अपने स्व-स्थिति को अचल-अडोल और अपने बुद्धि कोमन के लाइन को क्लियर रखना हैं। लाइन क्लियर होगी तो टचिंग होगी।* बापदादा ने पहले भी कहा था उन्हों की वायरलेस है, आपकी वाइसलस बुद्धि है। क्या करना हैक्या होना हैयह निर्णय स्पष्ट और शीघ्र होगा। ऐंसे नही सोचते रहो बाहर निकलेंअन्दर बैठें, दरवाजे पर बैठेंछत पर बैठें। नहीं। आपके पांव वहाँ ही चलेंगे जहाँ सेफटी होगी। और अगर बहुत घबरा जाओघबराना तो नही चाहिए, लेकिन बहुत घबरा जाओ, बहुत डर लगे तो मधुबन एशलम घर आपका है। *डरना नहींअभी तो कुछ नही है, अभी तो सब कुछ होना है, डरना नहींखेल है। परिवर्तन होना है ना। विनाश नही, परिवर्तन होना है।* सबमें वैराग्य वृत्ति उत्पन्न होनी है। रहमदिल बन सर्व शक्तियों द्वारा सकाश दे रहम करो। समझा!

 

✺   *ड्रिल :-  "मास्टर सर्वशक्तिवान बन प्रकृति के खेल देखने का अनुभव"*

 

 _ ➳  बाबा के प्यार में डूबी मैं उनका आत्मा बच्चा उनकी याद में बैठी हूँ... बाबा के दिये इस गुह्य ज्ञान को स्मृति में रख स्वयं को भृकुटि के बीचोंबीच आत्मा देख रही हूँ... *मैं आत्मा अपने दिव्य प्रकाश से चमक रही हूँ और मेरा ये प्रकाश मेरे चारों ओर के वातावरण को भी आलौकित कर रहा है...* इस प्रकाश से मेरी देह भी चमक उठी है... मैं आत्मा अब इस देह से निकल कर अपना  फरिश्ता स्वरूप धारण करती हूँ...

 

 _ ➳  *मैं आत्मा अपने फरिश्ता रूप में आज इस पूरे सृष्टि का चक्कर लगा रही हूँ... इस धरती के आकर्षण से ऊपर उड़कर मैं फरिश्ता इस पूरे विश्व को देख रही हूँ...* मैं देखती हूँ कि प्रकृति भिन्न भिन्न रूप में चारों ओर विनाश कर रही है... कहीं पर बाढ़ का प्रकोप है तो कहीं भूकंप से सारी इमारतें ध्वस्त हो गयी हैं... कहीं पर बादल फटने से पूरा क्षेत्र उसकी चपेट में आ गया है तो कहीं भयंकर तूफान आने से हर तरफ विनाश ही विनाश दिखाई दे रहा है... अब सृष्टि के इस अंत समय में प्रकृति भी अपना तमोगुणी स्वरुप दिखा रही है...

 

 _ ➳  मैं फरिश्ता इन सब के बीच अपने आत्मा भाइयों को देखती हूँ जो ऐसी सीन को देखकर डरे हुए हैं... *मैं फरिश्ता अपने बापदादा को याद करते हुए उनसे शक्तियों की किरणें लेती हूँ और अब मैं इन सभी आत्माओ को ये शक्तिशाली किरणें दे रही हूँ...* मुझसे ये वायब्रेशन प्राप्त करके आत्मायें अपने को शक्तिशाली महसूस कर रही हैं...

 

 _ ➳  मुझ आत्मा को मेरे बाबा ने विश्व परिवर्तन के निमित्त बनाया है... मैं आत्मा इस बेहद के नाटक को साक्षी होकर देख रही हूँ... *इस बेहद के ड्रामा में कैसी भी सीन हो मैं आत्मा उसे बस एक खेल समझ कर पार करती हूँ...* मैं मास्टर सर्वशक्तिमान की स्मृति में स्थित हो अपनी स्वस्थिति को शक्तिशाली बना रही हूं... मेरी ये शक्तिशाली स्थिति अन्य आत्माओं के मन को भी शक्तिशाली बनाने के निमित्त बनती है...

 

 _ ➳  *मैं आत्मा इस रहस्य को जानती हूँ कि ये विनाश का सीन भी ड्रामा में नूँध है... ये विनाश नहीं परिवर्तन है और मुझे ये बाबा का संदेश सभी आत्माओ को देना है...* बाबा का परिचय देकर उनका बुद्धियोग बाबा से जोड़ना है... जिससे ये समस्त आत्मायें भी अपनी स्वस्थिति को अचल अडोल बना कर अपने मन और बुद्धि की लाइन को एक दम क्लियर कर रही हैं... अब ये आत्मायें भी विनाश को ड्रामा का खेल समझ कर देख रही हैं... और अपनी मानसिक परेशानियों से मुक्त हो रही हैं...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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