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 10 / 01 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *पवित्रता का ताज पहने रखा ?*

 

➢➢ *सहजयोगी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *"सर्व प्राप्ति भव" वरदान का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *स्वराज्य अधिकारी बनकर रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *अशरीरी बनना वायरलेस सेट है। वाइसलेस बनना ही वायरलेस सेट की सेटिंग है। जरा भी अंश के भी अंशमात्र विकार वायरलेस के सेट को बेकार कर देगा इसलिए अब कर्मबन्धनी से कर्मयोगी बनो।* अनेक बन्धनों से मुक्त एक बाप के सम्बन्ध में समझो तो सदा एवररेडी रहेंगे।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं महावीर आत्मा हूँ"*

 

   सभी अपने को हावीर समझते हो ना? *महावीर अर्थात् सदा शस्त्रधारी। शक्तियों को वा पाण्डवों को सदा वाहन में दिखाते हैं और शस्त्र भी दिखाते हैं।*

 

  शस्त्र अर्थात् अलंकार। तो वाहनधारी भी और अलंकारधारी भी। *वाहन है - श्रेष्ठ स्थिति और अलंकार हैं - सर्वशक्तियाँ। ऐसे वाहनधारी और अलंकारधारी ही साक्षात्कारमूर्त बन सकते हैं।*

 

  *तो साक्षात बन सब को बाप का साक्षात्कार कराना यह है महावीर बच्चों का कर्तव्य।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *एकाग्रता की शक्ति, मन-बुद्धि दोनों ही एकाग्र हो तब कैचिंग पॉवर होगी।* बहुत अनुभव करेंगे। संकल्प किया - नि:स्वार्थ, स्वच्छ, स्पष्ट वह बहुत क्विक अनुभव करायेगा। साइलेन्स की शक्ति के आगे यह साइन्स चुकेगी। अभी भी समझते जाते हैं कि साइन्स में भी कोई मिसिंग है जो भरनी चाहिए।

 

✧  इसलिए *बापदादा फिर से अण्डरलाइन करा रहा हे कि अन्तिम स्टेज, अंतिम सेवा - यह संकल्प शक्ति बहुत फास्ट सेवा करायेगी।* इसलिए संकल्प शक्ति के ऊपर और अटेन्शन दो। बचाओ, जमा करो। बहुत काम में आयेगी। प्रयोगी इस संकल्प की शक्ति से बनेंगे।

 

✧  साइंस का महत्व क्यों है? प्रयोग में आती है तब सब समझते हैं हाँ, साइंस अच्छा काम करती है। तो साइलेन्स की पॉवर का प्रयोग करने के लिए एकाग्रता की शक्ति चाहिए और *एकाग्रता का मूल आधार है - मन की कन्ट्रोलिंग पॉवर, जिससे मनोबल बढता है।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *साइलेंस पॉवर प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *जैसे साइन्स के साधनों द्वारा समय और आवाज़ कितना भी दूर होते समीप हो गया है ना।* जैसे प्लेन द्वारा समय कितना नज़दीक हो गया है, थोड़े समय में कहाँ से कहाँ पहुँच सकते हो। *टेलीफोन द्वारा आवाज़ कितना समीप हो गया है।* लण्डन के व्यक्ति का आवाज़ भी ऐसे सुनाई देगा जैसे सम्मुख बात कर रहे हैं। ऐसे ही टेलीविजन के साधनों द्वारा कोई भी दृश्य वा व्यक्ति दूर होते हुए भी सम्मुख अनुभव होता है।

〰✧  साइन्स तो आपकी रचना है। आप मास्टर रचयिता हो। *साइलेन्स की शक्ति से आप सब भी विश्व की किसी भी दूर रहने वाली आत्मा का आवाज़ सुन सकते हो।* कौन-सा आवाज़? साइन्स मुख का आवाज़ सुनाने का साधन बन सकती है लेकिन मन का आवाज़ नहीं पहुँचा सकती। *साइलेन्स की शक्ति से हर आत्मा के मन का आवाज़ इतना ही समीप सुनाई देगा जैसे कोई सम्मुख बोल रहा है।*

〰✧  आत्माओं के मन में अशान्ति, दु:ख की स्थिति के चित्र ऐसे ही स्पष्ट दिखाई देंगे जैसे टी.वी. द्वारा दृश्य वा व्यक्ति स्पष्ट देखते हो। जैसे इन साधनों का कनेक्शन जोड़ा, स्वीच ऑन किया और स्पष्ट दिखाई और सुनाई देता है। ऐसे ही *बाप से कनेक्शन जोड़ा, श्रेष्ठ भावना और कामना का स्वीच ऑन किया तो दूर की आत्माओं को भी समीप अनुभव करेंगे।* इसको कहा जाता है विश्व-कल्याणकारी। ऐसी स्थिति को बनाने के लिए विशेष कोन-सा साधन अपनाना पड़े। *इन सबका आधार है साइलेन्स।* वर्तमान समय साइलेन्स की शक्ति जमा करो।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  अलौकिक राज्य दरबार का समाचार"*

 

_ ➳  मै ओजस्वी आत्मा चमकती हुई मणि... मीठे बाबा की गहरी यादो में खोयी हुई... शांतिवन में मीठे बाबा के कमरे में बेठी हुई हूँ... और *बाबा भी पल भर में जेसे मेरी यादो में खिचते हुए वहाँ उपस्थित हो गए.*.. और गहरी प्रेम दृष्टि से मुझ आत्मा को गुणो और शक्तियो से भरने लगे... मै आत्मा बाबा की सारी शक्तियो की स्वयं में समाती हुई देख रही हूँ... और अपना तेजस्वी रूप देख देख पुलकित हो रही हूँ...

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा को श्रेष्ठ राज्याधिकारी के रूप में देखते हुए बोले :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... *संगमयुगी स्वराज्य दरबार सबसे खुबसूरत दरबार है.*.. यह दरबार जन्म जन्मातर की दरबार की फाउंडेशन है.. इसलिए दिव्य बुद्धि के यन्त्र द्वारा अपना स्थान छैक करो... मा त्रिकालदर्शी बनकर तीनो कालो की नालेज के आधार पर इस दिव्य बुद्धि के यन्त्र को यूज करो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा की ज्ञान मणियो को दिल में समाती हुई बोली :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... *आपने जीवन में आकर खुबसूरत नये आयाम दिए है.*.. दुखभरी उदासी से छुड़ाकर मुझे सदा की मुस्कान से सजाया है... शरीर की पराधीन सी मुझ आत्मा को मुक्त कराकर.. स्वराज्य अधिकारी सा सजा मेरे भाग्य में चार चाँद लगा दिए है..."

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा के शानदार भाग्य पर मुस्करा रहे है और कह रहे है :-* "यह स्नेह सागर और नदियो का प्यार भरा मिलन है.. कितना प्यारा भाग्य आप बच्चों का है कि पूरे विश्व में अथाह संख्या होते हुए भी आपने मिलन का भाग्य पाया है... *भोले भक्त कण कण में ढूंढते ही रह गए और भोले के बच्चों ने भोले को ही पा लिया.*.. सच्ची दिल वालो ने दिलाराम को पा लिया और दिल में समा लिया..."

 

_ ➳  *ईश्वर पिता के हाथो में सजते संवरते अपने भाग्य को देखकर मै आत्मा बाबा की दीवानी होकर कहने लगी :-* " प्यारे लाडले बाबा मेरे... आपके मिलन को आपके दरस को मै आत्मा जनमो कितना भटकी हूँ... अब जीवन में आकर आपने मुझ बेचैन दिल आत्मा को... सदा का आराम दिया है... पता है ना मीठे बाबा आपके बिना वो दिन कितने उजड़े और सूने थे... *आपने आकर खुशियो के घुँघरूँ मेरे पेरो में बांध दिए है.*.."

 

  *प्यारे बाबा बहुमूल्य रत्नों को मेरी झोली में बरसाते हुए बोले मीठे लाडले बच्चे :-* "याद और सेवा में बेलेन्स को रखकर सदा वर्द्धि को पाते रहो... होलिहंस बनकर सदा विशेषताओ के मोती ही चुगते रहो... सदा फॉलो फादर कर बापदादा के दिल तख्त पर छाये रहो... *शिव शक्ति कम्बाइंड इस विशेषता से सदा सजे रहकर सफलताओ के आसमाँ को छु लो..*."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा को अपनी बाँहों में भरकर प्यार करते हुए कह उठी :-* "मेरे दिल के चैन बाबा... आपकी प्यारी श्रीमत ने मुझे हर बुराई से परे कर होलिहंस रूप में निखारा है... मै आत्मा व्यर्थ से निकल समर्थता को पा चली हूँ... *आपकी यादो में शिव शक्ति बनकर शक्तियो से भरपूर हो गयी हूँ.*.. और जहाँ भी कदम रखती हूँ सफलता कदमो को चूमती है... ऐसी मीठी रुहरिहानं कर मै आत्मा अपने कार्य क्षेत्र पर आ गयी..."

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  सहजयोगी अवस्था का अनुभव*"

 

_ ➳  अपने सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन की प्राप्तियों के बारे में विचार करते ही मैं नशे और खुशी से भर जाती हूँ और ब्राह्मण जीवन की अनन्त प्राप्तियों की स्मृति में खो जाती हूँ। *जिस भगवान की महिमा में शास्त्र भरे पड़े हैं वो भगवान रोज मेरे सम्मुख आ कर मेरी महिमा करता है। जिस भगवान के दर्शन की दुनिया प्यासी है वो भगवान मेरा बाप बन मेरी पालना कर रहा है, टीचर बन हर रोज मुझे पढ़ाने आता है और सतगुरु बन मुझे श्रेष्ठ कर्म करना सिखलाता है*। अविनाशी ज्ञान रत्नों के ख़जाने से हर रोज मेरी झोलियां भरता हैं। हर कदम पर मेरा साथी बन मेरे साथ चलता है। हर मुश्किल में मेरा सहारा बन मुझे हर मुश्किल से पार ले जाता है।

 

_ ➳  अपने सर्वश्रेस्ठ भाग्य के सितारे को चमकाने वाले भगवान बाप का मैं मन ही मन शुक्रिया अदा करती हूँ और उनकी स्नेह भरी याद में बैठ जाती हूँ। *अपने प्यारे मीठे बाबा की मीठी याद में बैठते ही मैं अशरीरी स्थिति का अनुभव कर रही हूँ। स्वयं को अब मैं एक चमकते हुए सितारे के रूप में देख रही हूँ। एक ऐसा सितारा जिसमे से रंगबिरंगी किरणे निकल रही हैं*। अपने इस अति प्यारे, अति सुंदर ज्योतिर्मय स्वरूप को मन बुद्धि रूपी नेत्रों से मैं निहार रही हूँ और इसमें समाये गुणों और शक्तियों का अनुभव कर रही हूँ।

एक मीठी सी शान्तमयी स्थिति में मैं स्थित हो रही हूँ। यह मीठी शांतिमयी स्थिति मुझे देह और देह की दुनिया के हर बन्धन से मुक्त कर रही है।

 

_ ➳  बन्धन मुक्त हो कर मैं आत्मा अब इस देह से बाहर निकल रही हूँ और एक आनन्दमयी रूहानी यात्रा की ओर कदम बढ़ा रही हूँ। *यह रूहानी यात्रा मुझे मेरे शिव पिता परमात्मा के पास ले जा रही है। भृकुटि से निकल कर, मैं चमकती हुई मणि अब ऊपर की ओर बढ़ रही हूँ*। धीरे - धीरे सूर्य, चाँद, तारा मण्डल को पार करती करती हुई, सफेद प्रकाश की दुनिया सूक्ष्म लोक को भी पार करके अब मैं पहुंच गई अपने शिव पिता परमात्मा के पास उनकी निराकारी दुनिया परमधाम, निर्वाणधाम में। *वाणी से परे की यह दुनिया ही मेरी रूहानी यात्रा की मंजिल है। अपनी इस मंजिल पर पहुंच कर मैं गहन सुख और शांति का अनुभव कर रही हूँ*।

 

_ ➳  मेरे सामने मेरे शिव पिता परमात्मा हैं। शक्तियों की अनन्त किरणे बिखेरता उनका अति सुंदर मनोहारी स्वरूप मन को लुभा रहा है। मन बुद्धि रूपी नेत्रों से मैं एकटक उन्हें निहार रही हूँ। निहारते - निहारते अब मैं उनके समीप पहुंच गई हूँ और उनकी अनन्त शक्तियों की किरणों को अपने ऊपर आते हुए अनुभव कर रही हूँ। *स्वयं को मैं अपने शिव पिता परमात्मा की सर्वशक्तियों रूपी किरणों की ममतामयी गोद मे अनुभव कर रही हूँ। बाबा का असीम प्रेम और वात्सलय उनकी ममतामयी किरणों के रूप में निरन्तर मुझ पर बरस रहा है*। बाबा का यह अथाह प्यार मुझमे असीम बल भर कर मुझे शक्तिशाली बना रहा है।

 

_ ➳  बाबा के इस निस्वार्थ प्रेम को स्वयं में समा कर अब मैं वापिस लौट रही हूँ। अपने ब्राह्मण स्वरूप में अब मैं स्थित हूँ और बाबा के प्रेम की लगन में मग्न हो कर हर कर्म कर रही हूँ। *बाबा के असीम स्नेह और प्यार की अनुभूति ने मुझे सहजयोगी बना दिया है*। चलते - फिरते हर कर्म करते अब मेरी बुद्धि का योग बाबा के साथ स्वत: ही जुटा रहता है। *सदा मुहब्बत के झूले में झूलते हुए हर प्रकार की मेहनत से अब मैं मुक्त हो गई हूँ*।

 

_ ➳  अब मुझे याद में रहने की मेहनत नही करनी पड़ती बल्कि "बाबा" शब्द का अजपाजाप अब निरन्तर मेरे अंदर चलता रहता है जो मुझे हर पल मनमनाभव की स्थिति में स्थित रखता है। *हर पल, हर घड़ी बाबा की छत्रछाया को मैं अपने ऊपर अनुभव करती हूँ*। बाबा की छत्रछाया मुझे सदा निश्चित स्थिति का अनुभव कराती है। सहजयोगी बन परमात्म याद और परमात्म छत्रछाया के अंदर रहने से अब मेरा जीवन नई खुशी नए उत्साह से सदा भरपूर रहता है।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं रहमदिल की भावना द्वारा अपकारी पर भी उपकार करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं शुभचिंतकआत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा तपस्या के बल से असंभव को संभव कर देती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा सफलता मूर्त हूँ  ।*

   *मैं तपस्वी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. देखो परिवर्तन तो होना ही है ना! तो प्रकृति भी अपना काम तो करेगी ना! जब मनुष्य आत्माओं ने प्रकृति को तमो गुणी बना दियातो वह अपना काम तो करेगी ना। लेकिन हर खेलड्रामा के खेल मे यह भी खेल हैं। खंल को देखते हुए अपनी अवस्था ऊपर नीचे नही करना। *मास्टर सर्वशक्तिवान आत्माओं की स्व-स्थिति पर पर-स्थिति प्रभाव नही डाले। और ही आत्माओं को मानसिक परेशानियों से छुडाने के निमित्त बनो क्यों की मन की परेशानी आप मेडिटेशन से ही मिटा सकते हो।* डाक्टर्स अपना काम करेंगे, साईन्स वाले अपना काम करेंगेगवमेंन्ट अपना काम करेगीआप का काम हैं मन के परेशानीटेन्शन को मिटाना। टेन्सन फ्री जीवन का दान देना। सहयोग देना।

 

 _ ➳  2. जैसे आग लगती है तो आग बुजाने वाले डरते नही है, बुजाते है। *तो आप सब भी मन के परेशानी की आग बुजाने वाले हो।*

 

 _ ➳  3. देखो प्रकृति को कोई मना नहीं कर सकता हैगुजरात में आओआबू में नहीं आओबाम्बे में नहीं आओनहीं। वह स्वतन्त्र है। *लेकिन सभी को अपने स्व-स्थिति को अचल-अडोल और अपने बुद्धि कोमन के लाइन को क्लियर रखना हैं। लाइन क्लियर होगी तो टचिंग होगी।* बापदादा ने पहले भी कहा था उन्हों की वायरलेस है, आपकी वाइसलस बुद्धि है। क्या करना हैक्या होना हैयह निर्णय स्पष्ट और शीघ्र होगा। ऐंसे नही सोचते रहो बाहर निकलेंअन्दर बैठें, दरवाजे पर बैठेंछत पर बैठें। नहीं। आपके पांव वहाँ ही चलेंगे जहाँ सेफटी होगी। और अगर बहुत घबरा जाओघबराना तो नही चाहिए, लेकिन बहुत घबरा जाओ, बहुत डर लगे तो मधुबन एशलम घर आपका है। *डरना नहींअभी तो कुछ नही है, अभी तो सब कुछ होना है, डरना नहींखेल है। परिवर्तन होना है ना। विनाश नही, परिवर्तन होना है।* सबमें वैराग्य वृत्ति उत्पन्न होनी है। रहमदिल बन सर्व शक्तियों द्वारा सकाश दे रहम करो। समझा!

 

✺   *ड्रिल :-  "मास्टर सर्वशक्तिवान बन प्रकृति के खेल देखने का अनुभव"*

 

 _ ➳  बाबा के प्यार में डूबी मैं उनका आत्मा बच्चा उनकी याद में बैठी हूँ... बाबा के दिये इस गुह्य ज्ञान को स्मृति में रख स्वयं को भृकुटि के बीचोंबीच आत्मा देख रही हूँ... *मैं आत्मा अपने दिव्य प्रकाश से चमक रही हूँ और मेरा ये प्रकाश मेरे चारों ओर के वातावरण को भी आलौकित कर रहा है...* इस प्रकाश से मेरी देह भी चमक उठी है... मैं आत्मा अब इस देह से निकल कर अपना  फरिश्ता स्वरूप धारण करती हूँ...

 

 _ ➳  *मैं आत्मा अपने फरिश्ता रूप में आज इस पूरे सृष्टि का चक्कर लगा रही हूँ... इस धरती के आकर्षण से ऊपर उड़कर मैं फरिश्ता इस पूरे विश्व को देख रही हूँ...* मैं देखती हूँ कि प्रकृति भिन्न भिन्न रूप में चारों ओर विनाश कर रही है... कहीं पर बाढ़ का प्रकोप है तो कहीं भूकंप से सारी इमारतें ध्वस्त हो गयी हैं... कहीं पर बादल फटने से पूरा क्षेत्र उसकी चपेट में आ गया है तो कहीं भयंकर तूफान आने से हर तरफ विनाश ही विनाश दिखाई दे रहा है... अब सृष्टि के इस अंत समय में प्रकृति भी अपना तमोगुणी स्वरुप दिखा रही है...

 

 _ ➳  मैं फरिश्ता इन सब के बीच अपने आत्मा भाइयों को देखती हूँ जो ऐसी सीन को देखकर डरे हुए हैं... *मैं फरिश्ता अपने बापदादा को याद करते हुए उनसे शक्तियों की किरणें लेती हूँ और अब मैं इन सभी आत्माओ को ये शक्तिशाली किरणें दे रही हूँ...* मुझसे ये वायब्रेशन प्राप्त करके आत्मायें अपने को शक्तिशाली महसूस कर रही हैं...

 

 _ ➳  मुझ आत्मा को मेरे बाबा ने विश्व परिवर्तन के निमित्त बनाया है... मैं आत्मा इस बेहद के नाटक को साक्षी होकर देख रही हूँ... *इस बेहद के ड्रामा में कैसी भी सीन हो मैं आत्मा उसे बस एक खेल समझ कर पार करती हूँ...* मैं मास्टर सर्वशक्तिमान की स्मृति में स्थित हो अपनी स्वस्थिति को शक्तिशाली बना रही हूं... मेरी ये शक्तिशाली स्थिति अन्य आत्माओं के मन को भी शक्तिशाली बनाने के निमित्त बनती है...

 

 _ ➳  *मैं आत्मा इस रहस्य को जानती हूँ कि ये विनाश का सीन भी ड्रामा में नूँध है... ये विनाश नहीं परिवर्तन है और मुझे ये बाबा का संदेश सभी आत्माओ को देना है...* बाबा का परिचय देकर उनका बुद्धियोग बाबा से जोड़ना है... जिससे ये समस्त आत्मायें भी अपनी स्वस्थिति को अचल अडोल बना कर अपने मन और बुद्धि की लाइन को एक दम क्लियर कर रही हैं... अब ये आत्मायें भी विनाश को ड्रामा का खेल समझ कर देख रही हैं... और अपनी मानसिक परेशानियों से मुक्त हो रही हैं...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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