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 10 / 03 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *विस्तार में सार की सुन्दरता का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *भावना और निर्मान की विशेषता को सेवा में सदा साथ रखा ?*

 

➢➢ *बाप के साथ खाने, पीने, चलने, बोलने, सुनने का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *शक्तिशाली सेवा की और आराम मौज से बाप के दिलतख़्त पर रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *जिससे प्यार होता है, उसको जो अच्छा लगता है वही किया जाता है । तो बाप को बच्चों का अपसेट होना अच्छा नहीं लगता,* इसलिए कभी भी यह नहीं कहो कि क्या करें, बात ही ऐसी थी इसलिए अपसेट हो गये *अगर बात अपसेट की आती भी है तो आप अपसेट स्थिति में नहीं आओ ।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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✺   *"मैं बाप के सदा साथ रहने वाला सिकीलधा बच्चा हूँ"*

 

  सिकीलधे बच्चे सदा ही बाप से मिले हुए हैं। सदा बाप साथ है, यह अनुभव सदा रहता है ना? *अगर बाप के साथ से थोड़ा भी किनारा किया तो माया की आंख बड़ी तेज है। वह देख लेती है यह थोड़ा-सा किनारे हुआ है तो अपना बना लेती है। इसलिए किनारे कभी भी नहीं होना। सदा साथ।*

 

  *जब बापदादा स्वयं सदा साथ रहने की आफर कर रहे हैं तो साथ लेना चाहिए ना! ऐसे साथ सारे कल्प में कभी नहीं मिलेगा, जो बाप आकर कहे मेरे साथ रहो। ऐसे भाग्य सतयुग में भी नहीं होगा। सतयुग में भी आत्माओंके संग रहेंगे।* सारे कल्प में बाप का साथ कितना समय मिलता है? बहुत थोड़ा समय है ना। तो थोड़े समय में इतना बड़ा भाग्य मिले तो सदा रहना चाहिए ना।

 

  बापदादा सदा परिपक्व स्थिति में स्थित रहने वाले बच्चों को देख रहे हैं। कितने प्यारे-प्यारे बच्चे बापदादा के सामने हैं। एक-एक बच्चे बहुत लवली है। *बापदादा ने इतने प्यार से सभी को कहाँकहाँ से चुनकर इक्क्ठा किया है। ऐसे चुने हुए बच्चे सदा ही पक्के होंगे, कच्चे नहीं हो सकते।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  बापदादा ने अभी बाप के बजाए टीचर का रूप धारण किया है। होमवर्क दिया है ना? कौन होमवर्क देता है? टीचरा लास्ट में है सतगुरू का पार्टी तो अपने आप से पूछो सम्पन्न और सम्पूर्ण स्टेज कहाँ तक बनी है? *क्या आवाज से परे वा आवाज में आना, दोनों ही समान हैं?*

 

✧  जैसे आवाज में आना जब चाहे सहज है, ऐसे ही आवाज से परे हो जाना जब चाहे, जैसे चाहे वैस हैं? *सेकण्ड में आवाज में आ सकते हैं, सेकण्ड में आवाज से परे हो जाएँ - इतनी प्रैक्टिस हैं?* जैसे शरीर द्वारा जब चाहो, जहाँ चाहो वहाँ आ-जा सकते होना। ऐसे मन-बुद्धि द्वारा जब चाहो, जहाँ चाहो वहाँ आ-जा सकते हो?

 

✧  क्योंकि *अन्त में पास माक्र्स उसको मिलेगी जो सेकण्ड में जो चाहे, जैसा चाहे, जो ऑर्डर करना चाहे उसमें सफल हो जाए।* साइन्स वाले भी यही प्रयत्न कर रहे हैं, सहज भी हो और कम समय में भी हो। तो ऐसी स्थिति है? क्या मिनटों तक आये हैं, सेकण्ड तक आये हैं, कहाँ तक पहुँचे हैं?

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  जब तख्त नशीन होता है तो तख्त पर उपस्थित होने से राज कारोबार उसके आर्डर से चलते है अगर तख्त छोडते हैं तो वही कारोबारी उसकी आर्डर में नहीं चलेंगे । *तो ऐसे आप जब ताज तख्त छोड देते हो तो आपके  ही आर्डर में नही चलेंगे । जब अकाल तख्त नशीन होते हो तो यही कर्मेन्द्रियां जी हजूर करेंगी।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  विस्तार में सार की सुन्दरता"*

 

_ ➳  आज मुझ आत्मा को मीठे बाबा की यादो ने इस कदर घेरा... कि मै आत्मा, पलक झपकते डायमण्ड हॉल में पहुंच जाती हूँ... और दिल पुकारता है *मीठे बाबा जल्दी आओ... मन की आँखों से देखती हूँ दादी गुलजार सम्मुख विराजित है... और मीठे बापदादा कब से आकर मुझे दृष्टि से निहाल कर रहे है... पता ही न चला जेसे... अपने प्रियतम बाबा को अपनी यादो के आँचल में...यूँ बन्धा देखकर... मै आत्मा अपने महान भाग्य का दिल शुक्रिया कर रही हूँ... अपने मनमीत को सामने पाकर मन्त्रमुग्ध हो रही हूँ...*

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा को पावनता से सजाते हुए बोले :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... अपने मीठे परमधाम में जाने के लिए सारे विस्तार को बिन्दु में समाओ... *सर्वप्रव्रतियों से न्यारे और बाप के प्यारे बनकर डबल लाइट फ़रिश्ता हो उड़ जाओ... समेटने की शक्ति को कार्य में लगाकर बीज में सब समा दो... लगाव के सारे धागों को तोड़ उड़ता पंछी बन खुशियो के आसमान में उड़ जाओ..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा मीठे बाबा की अमूल्य शिक्षाओ को दिल में उतारते हुए कहती हूँ :-* "मेरे मीठे दुलारे बाबा... *आपके प्यार भरे साथ और अमूल्य रत्नों ने जीवन को सार गर्भित बना दिया है... जीवन का हर क्षण कीमती और सार्थक हो गया है... मै आत्मा हर विस्तार से परे होकर सार को पा रही हूँ...* बिन्दु बन बिन्दु बाबा की याद में मुस्करा रही हूँ..."

 

   *प्यारे बाबा मुझ आत्मा को अपने साथ भरे हाथ देते हुए कहते है :-* " संगमयुग में हीरो पार्ट बजाने वाली महान भाग्यवान आत्माये हो... कभी भी सेवाओ में अपने न्यारेपन को नही छोड़ना... *लगाव की चमकीली रस्सियों से परे रहकर, हर आत्मा को प्रत्यक्षफल की अनुभूति कराओ... स्वराज्यधिकारी सो विश्वराज्यधिकारो ऐसी वारिस क्वालिटी को बढ़ाओ..."*

 

_ ➳  *मै आत्मा अपने प्यारे पिता की दौलत का वारिस बनते हुए कहती हूँ :-* "मीठे लाडले बाबा मेरे... *आपने मुझे हर व्यर्थ से मुक्त कराकर कितना प्यारा और समर्थ बना दिया है... देह के विकारो में फंस कर... कालिमा से घिर गयी थी... आज आपकी यादो में अपना वही आत्मिक तेज...* और वही ओज पाकर पुनः तेजस्वी हो रही हूँ...

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा को ज्ञान रत्नों की दौलत से भरते हुए बोले :-* " विशेष अनुभव की खान बन, अनुभवी मूर्त बनाने का महादान करो... हर आत्मा को रूहे गुलाब बनाने की सेवा करो... सर्व शक्तियो को सदा कार्य में लगाकर स्वयं को उड़ती कला में उड़ाओ... *सी फादर फॉलो फादर कर सेवाओ में सफलतामूर्त बनकर मुस्कराओ... और सदा का श्रेष्ठ भाग्य बनाओ..."*

 

_ ➳  *मै आत्मा अपने प्यारे बाबा के अमूल्य रत्नों को बुद्धि कलश में समाते हुए कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... *आपने जिन सच्ची खुशियो से मुझ आत्मा का दामन सजाया है वही खुबसूरत बहार, मै आत्मा, सबके आँगन में खिला रही हूँ... खुबसूरत रूहानी गुलाब बनाकर सबको गुणो की खुशबु से महका रही हूँ और मीठे बाबा आपको पेश कर रही हूँ..."* मीठे बाबा से यूँ मीठी मीठी बाते करके मै आत्मा, धरती पर लौट आयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  बाप के साथ खाने, पीने, चलने, बोलने और सुनने का अनुभव करना*"

 

_ ➳  कर्मयोगी बन, चलते फिरते बुध्दि का योग अपने शिव पिता परमात्मा के साथ लगाकर, स्वयं को उनकी सर्वशक्तियों की शीतल छाया के नीचे अनुभव करते मैं बड़ी सहजता से हर कर्म कर रही हूँ। *बाबा की याद मेरे अंदर बल भर रही है जिससे बिना मेहनत और थकावट के हर कार्य बड़ी ही सहज रीति से और स्वत: ही सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है*। हर कर्म में भगवान को अपना साथी बना कर, कदम - कदम पर उनकी मदद और उनके साथ का अनुभव मेरे अंदर हर पल एक नई स्फूर्ति और ऊर्जा का संचार करता रहता है।

 

_ ➳  ऐसे बाबा की याद में रह शरीर निर्वाह अर्थ हर रोज के अपने दैनिक कार्यो को सम्पन्न करके जैसे ही मैं कर्तव्यमुक्त होती हूँ। अपने भगवान बाप का दिल से शुक्रिया अदा करते हुए उनकी दिल को सुकून देने वाली अति मीठी याद में बैठ जाती हूँ। *अपनी पलको को हौले से बंद कर, अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य की स्मृति में खोई मैं स्वयं से ही बातें कर रही हूँ कि कितनी महान सौभाग्यशाली हूँ मैं आत्मा जो मुझे हर पल भगवान का संग मिलता रहता है*। कभी सिर्फ उनके एक दर्शन मात्र की मैं प्यासी थी और आज वो भगवान मेरे हर कर्म में मेरा सहयोगी है।

 

_ ➳  "वाह मैं आत्मा वाह" "वाह मेरा भाग्य वाह" ऐसे मन ही मन वाह - वाह के गीत गाते हुए मैं मनमनाभव होकर अपने मन को सभी संकल्पो, विकल्पों से हटाकर उस एक अपने भगवान साथी पर एकाग्र करती हूँ। *एक पल के लिए मुझे अनुभव होता है जैसे बापदादा मेरे सामने हैं। अपनी पलको को मैं जैसे ही खोलती हूँ अपने सामने लाइट माइट स्वरूप में बापदादा को बैठे हुए देखती हूँ*। बापदादा की बहुत तेज लाइट और माइट मेरे ऊपर पड़ रही है जो मुझे लाइट माइट स्थिति में स्थित कर रही है।

 

_ ➳  अपने साकार शरीर मे से एक अति सूक्ष्म लाइट का फ़रिश्ता मैं निकलता हुआ देख रही हूँ। *बापदादा की लाइट माइट मुझ नन्हे फ़रिश्ते को अपनी ओर खींच रही हैं। मैं नन्हा फ़रिश्ता आगे बढ़ता हूँ और जाकर बापदादा की गोद मे बैठ जाता हूँ*। अपने प्यार की शीतल छाँव में बिठाकर बापदादा अपना सारा स्नेह मेरे ऊपर उड़ेल रहें हैं। अपनी गोद मे मुझे लिटाकर, बड़े प्यार से अपना हाथ मेरे सिर पर थपथपाकर बाबा मुझे मीठी लोरी सुना रहें हैं। *ऐसा लग रहा है जैसे मेरी पलकें बंद हो रही हैं और थोड़ी देर के लिए मीठी निंद्रा की स्थिति में जाकर मैं गहन सुकून का अनुभव कर रही हूँ*।

 

_ ➳  क्षण भर की इस मीठी निंद्रा से जगते ही मैं स्वयं को फिर से अपने ब्राह्मण स्वरूप में देखती हूँ। किन्तु अब मैं स्वयं को बहुत ही हल्का अनुभव कर रही हूँ। *बाबा की गोद मे विश्राम करने के  इस अति खूबसूरत सुखद अहसास ने मुझे बहुत ही एनर्जेटिक बना दिया है*। जैसे लौकिक रीति से भी एक साधारण मनुष्य कर्म करते - करते जब थक जाता है तो थोड़ी देर विश्राम कर लेता है ताकि दोबारा कर्म करने की शक्ति उसमे आ जाए। ऐसे ही बाबा की गोदी में लेटने के इस एक सेकण्ड के अनुभव ने मुझमे जैसे असीम बल भर दिया है। *इस अति मीठे सुखद एहसास के साथ, स्वयं को पहले से कई गुणा अधिक बलशाली अनुभव करके मैं उठती हूँ और फिर से कर्म योगी बन कर्म करने लग जाती हूँ*।

 

_ ➳  हर कर्म बाबा की याद में रह कर करने से कर्म का बोझ अब मुझे भारी नही बनाता बल्कि बाबा की याद, कर्म करते भी कर्म के बन्धन से मुझे मुक्त रख, सदा हल्केपन का अनुभव करवाती है। *चलते -  फिरते कर्म करते बीच - बीच मे शरीर से डिटैच हो कर अपने प्यारे बाबा की सर्वशक्तियों की किरणों रूपी गोद मे बैठ विश्राम करना और उनकी शक्तियों से भरपूर हो कर, शक्तिशाली बन फिर से कर्म में लग जाना, यही अभ्यास हर समय करते हुए, हर कर्म को मैं बड़ी सहजता से सम्पन्न कर लेती हूँ*

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं ज्ञान रत्नों को धारण कर व्यर्थ को समाप्त करने वाली होलिहंस आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं सदा अपनी श्रेष्ठ पोज़ीशन में स्थित रह ऑपोज़ीशन को समाप्त करने वाली विजयी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  संकल्प करते हो लेकिन बाद में क्या होता है? संकल्प कमजोर क्यों हो जाते हैं? जब चाहते भी हो क्योंकि बाप से प्यार बहुत है, बाप भी जानते हैं कि बापदादा से सभी बच्चों का दिल से प्यार है और प्यार में सभी हाथ उठाते हैं कि 100 परसेन्ट तो क्या लेकिन 100 परसेन्ट से भी ज्यादा प्यार है और बाप भी मानते हैं प्यार में सब पास हैं। लेकिन क्या है? लेकिन है कि नहीं है? लेकिन आता है कि नहीं आता है? पाण्डव, बीच-बीच में लेकिन आ जाता है? ना नहीं करते हैं, तो हाँ है। *बापदादा ने मैजारिटी बच्चों की एक बात नोट की है, प्रतिज्ञा कमजोर होने का कारण एक ही है, एक ही शब्द है। सोचो, वह एक शब्द क्या है? टीचर्स बोलो एक शब्द क्या है? पाण्डव बोलो एक शब्द क्या है? याद तो आ गया ना! एक शब्द है - 'मैं'।* अभिमान के रूप में भी 'मैं' आता है और कमजोर करने में भी 'मैं' आता है। मैंने जो कहा, मैंने जो किया, मैंने जो समझा, वही राइट है। वही होना चाहिए। यह अभिमान का 'मैं'

 

 _ ➳  *मैं जब पूरा नहीं होता है तो फिर दिलशिकस्त में भी आता है, मैं कर नहीं सकता, चल नहीं सकता, बहुत मुश्किल है। एक बाडीकान्सेसनेस का 'मैं' बदल जाए, 'मैं' स्वमान भी याद दिलाता है और 'मैं' देह-अभिमान में भी लाता है।* 'मैं' दिलशिकस्त भी करता है और 'मैं' दिलखुश भी करता है और अभिमान की निशानी जानते हो क्या होती है? कभी भी किसी में भी अगर बाडीकान्सेस का अभिमान का अंश मात्र भी है, उसकी निशानी क्या होगी? वह अपना अपमान सहन नहीं कर सकेगा। *अभिमान अपमान सहन नहीं करायेगा।* जरा भी कहेगा ना - यह ठीक नहीं है, थोड़ा निर्माण बन जाओ, तो अपमान लगेगा, यह अभिमान की निशानी है।

 

✺   *ड्रिल :-  "प्रतिज्ञा कमजोर होने का निवारण- अभिमान के 'मैं' का त्याग करना"*

 

 _ ➳  आज सवेरे-सवेरे मै आत्मा बाबा को याद करते हुए अमरुद के बगीचे में चली जाती हूँ... यहाँ टहलते हुए मै आत्मा प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद लेते हुए, मन ही मन बाबा के गीत गुनगुनाती चलती जा रही हूँ... *घूमते-घूमते मुझ आत्मा के कदम अचानक एक घने वृक्ष के पास आकर रुक जाते है... उस वृक्ष पर चिड़िया का घोसला है... चिड़िया के बच्चो की चहचहाहट वातावरण में फैल रही है...* चिड़िया बच्चो के मोह को त्याग उन्हें घोसले में छोड़ खुले नीले आसमान में पंख फैलाये उड़ जाती है...

 

 _ ➳  मै आत्मा कुछ देर के लिए उस स्थान पर बैठ जाती हूँ... छोटे-छोटे चिड़िया के बच्चे चहचहाते हुए घोसले से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे है... वे निरतंर प्रयास करते जा रहे है... *उड़ना भी चाहते है, पर जिस डाली पर बैठे है उसे छोड़ भी नही रहे... कुछ देर के प्रयास के बाद उन बच्चो (चूजो) में से एक पंख फैलाये उड़ जाता है... उसे देख और बच्चे भी उमंग-उत्साह में आ जाते है और. कुछ देर बाद सभी बच्चे देह का भान त्याग, शक्ति के पंख लगाये नीले... आकाश में पंख फैलाये उड़ जाते है...* उन बच्चों को उड़ता देख मैं आत्मा प्रसन्नता का अनुभव करती हुई प्यारे बाबा की याद में एक शांत स्थान पर बैठ जाती हूँ...

 

 _ ➳  शांत स्थान पर बैठी मै आत्मा बाबा की याद में अपने अंतर्मन में एक चित्र देख रही थी... *मै आत्मा पंछी स्वयं को देह-अभिमान की जंजीरों में, संबंध-संपर्क की जंजीरों में, मोह की जंजीरों में, जिम्मेवारियों की जंजीरों में जकड़ा हुआ अनुभव कर रही थी... पुराने संस्कारों की जंजीरे इतनी कड़ी थी कि छूटते, छूटती नही थी... मै आत्मा बोझ तले दबी हुई अनुभव कर रही थी...*   

 

 _ ➳  *मेरा बाबा* कहते ही प्यारे बाबा मुझ आत्मा के समक्ष मुस्कुराते हुए आ जाते है... बाबा के नैनो से निकलती दिव्य तेजोमय किरणे मुझ आत्मा में समाती जा रही है... *धीरे-धीरे मै आत्मा बाबा से निकलती हुई किरणों में समाती जा रही हूँ... इन किरणों के तेजोमय प्रभाव में देह अभिमान की... पुराने संस्कारो की, मोह की, सम्बन्ध-संपर्क की सभी जंजीरे पिघलती जा रही है... धीरे-धीरे मै आत्मा बोझ से मुक्त हो हल्की होती जा रही हूँ...*   

 

 _ ➳  *मै आत्मा देहभान की जंजीरो से न्यारी हो प्यारे बाबा के साथ सूक्ष्मवतन को पार करती हुई अपने निराकारी स्वरुप में शिव बाबा के पास परमधाम पहुँच जाती हूँ...* सर्वशक्तिवान बाप से सर्व शक्तियाँ प्राप्त करती हुई मै आत्मा हिम्मत का पहला कदम बढ़ाते हुए प्रतिज्ञा करती हूँ कि *मै आत्मा देह अभिमान के मै को त्यागकर, स्वमान के मै में स्थित हो जाऊंगी... शिव बाबा से निकलती हुई किरणे मुझ आत्मा पर निरतंर बरस रही है... इन किरणों में समायी मै आत्मा अपनी सारी जिम्मेवारियां बाबा को दे एक दम हल्की हो, देह का भान त्याग पार्ट बजाने के लिए पुनः इस देह में आ जाती हूँ...* मै आत्मा बड़े प्यार से बाबा को अमरुद का भोग लगा, उड़ते पंछी की तरह हल्की हो, हर प्रतिज्ञा का पालन करती हुई बुद्धि से बाबा का हाथ पकड़ इस रूहानी यात्रा में निरंतर चलती जा रही हूँ... बस चलती जा रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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