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 11 / 01 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *विचार सागर मंथन कर आपार ख़ुशी में रहे ?*

 

➢➢ *ब्राह्मण जीवन में सदा चीयरफुल और केयरफुल मूड में रहे ?*

 

➢➢ *सदा याद और सेवा के उत्साह में रहे ?*

 

➢➢ *चलते फिरते फ़रिश्ता स्वरुप की अनुभूति का अभ्यास किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *कितना भी कार्य की चारों ओर की खींचतान हो, बुद्धि सेवा के कार्य में अति बिजी हो - ऐसे टाइम पर अशरीरी बनने का अभ्यास करके देखो। यथार्थ सेवा का कभी बन्धन होता ही नहीं क्योंकि योग युक्त, युक्तियुक्त सेवाधारी सदा सेवा करते भी उपराम रहते हैं।* ऐसे नहीं कि सेवा ज्यादा है इसलिए अशरीरी नहीं बन सकते। *याद रखो मेरी सेवा नहीं बाप ने दी है तो निर्बन्धन रहेंगे।* ट्रस्टी हूँ, बन्धन मुक्त हूँ ऐसी प्रैक्टिस करो। अति के समय अन्त की स्टेज, कर्मातीत अवस्था का अभ्यास करो।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं प्रकृति की हलचल को साक्षी हो देखने वाली प्रकृति जीत आत्मा हु"*

 

✧  सदा मायाजीत और प्रकृतिजीत हो? मायाजीत तो बन ही रहे हो लेकिन प्रकृतिजीत भी बनो क्योंकि अभी प्रकृति की हलचल तो बहुत होनी हैं ना। हलचल में अचल रहो, ऐसे अचल बने हो? कभी समुद्र का जल अपना प्रभाव दिखायेगा तो कभी धरनी अपना प्रभाव दिखायेगी। *अगर प्रकृतिजीत होंगे तो प्रकृति की कोई भी हलचल अने को हिला नहीं सकेगी। सदा साक्षी होकर सब खेल देखते रहेंगे।*

 

  *जैसे फरिश्तों को सदा ऊंची पहाड़ी पर दिखाते हैं, तो आप फरिश्ते सदा ऊंची स्टेज अर्थात् ऊंची पहाड़ी पर रहने वाले।* ऐसी ऊंची स्टेज पर रहते हो?

 

  *जितना ऊंचे होंगे उतना हलचल से स्वत: परे रहेंगे।* अभी देखो यहाँ पहाड़ी पर आते हो तो नीचे की हलचल से स्वत: ही परे हो ना! शहरों में कितनी हलचल और यहाँ कितनी शान्ति और साधारण स्थिति में भी कितना रात-दिन का अन्तर होगा।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  मनोबल की बडी महिमा है। यह रिद्धि-सिद्धि वाले भी मनोबल द्वारा अल्पकाल के चमत्कार दिखाते हैं। आप तो विधिपूर्वक रिद्धि-सिद्धि नहीं, विधिपूर्वक कल्याण के चमत्कार दिखायेंगे जो वरदान हो जायेंगे, आत्माओं के लिए यह संकल्प शक्ति का प्रयोग वरदान सिद्ध हो जायेगा। तो *पहले यह चेक करो कि मन को कन्ट्रोल करने की कन्ट्रोलिंग पॉवर है?*

 

✧  सेकण्ड में जैसे साइन्स की शक्ति, स्विच के आधार से, स्विच ऑन करो, स्विच ऑफ करो - ऐसे सेकण्ड में मन को जहाँ चाहो, जैसे चाहो, जितना समय चाहो, उतना कन्ट्रोल कर सकते हैं? बहुत अच्छे-अच्छे स्वयं प्रति भी और सेवा प्रति भी सिद्धि रूप दिखाई देंगे। *लेकिन बापदादा देखते हैं कि संकल्प शक्ति के जमा का खाता अभी साधारण अटेन्शन है।*

 

✧  जितना होना चाहिए उतना नहीं है। संकल्प के आधार पर बोल और कर्म ऑटोमेटिक चलते हैं। अलग-अलग मेहनत करने की जरूरत ही नहीं है, आज बोल को कन्ट्रोल करो, आज दृष्टि को अटेन्शन में लाओ, मेहनत करो, आज वृत्ति को अटेन्शन से चेज करो। *अगर संकल्प शक्ति पॉवरफुल हो तो यह सब स्वतः ही कन्ट्रोल में आ जाते हैं।* मेहनत से बच जायेंगे। तो संकल्प शक्ति का महत्व जाने।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *साइलेंस पॉवर प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  साइलेन्स की शक्ति कितनी महान है? *साइलेन्स की शक्ति क्रोध-अग्नि को शीतल कर देती है।* साइलेन्स की शक्ति *व्यर्थ संकल्पों की हलचल को समाप्त कर सकती है।* साइलेन्स की शक्ति ही कैसे भी पुराने संस्कार हों, ऐसे *पुराने संस्कार समाप्त कर देती है।* साइलेन्स की शक्ति अनेक प्रकार के *मानसिक रोग सहज समाप्त कर सकती है।*

〰✧  साइलेंन्स की शक्ति, *शान्ति के सागर बाप से अनेक आत्माओं का मिलन करा सकती है।* साइलेन्स की शक्ति-अनेक जन्मों से *भटकती हुई आत्माओं को ठिकाने की अनुभूति करा सकती है।* महान आत्मा, धर्मात्मा सब बना देती है। साइलेन्स की शक्ति - *सेकण्ड में तीनों लोकों की सैर करा सकती है।*

〰✧  साइलेन्स की शक्ति- *कम मेहनत, कम खर्चा वालानशीन करा सकती है*साइलेन्स की शक्ति *समय के खज़ाने में भी एकानामी करा देती है अर्थात् कम समय में ज्यादा सफलता पा सकते हो।* साइलेन्स की शक्ति- *हाहाकार से जयजयकार करा सकती है।* साइलेन्स की शक्ति सदा आपके गले में *सफलता की मालायें पहनायेंगी।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- सदा ख़ुशी में रहना और दूसरों को भी ख़ुशी दिलाना"*

 

_ ➳  *भरपूर हुई है, मन की गागर... छलछल अब छलक रही है... मौजे परमात्म प्रेम की अंग अंग से अब झलक रही है, बाँट रही मै, भर भर आँचल, फिर भी मै भरपूर हूँ...* मौजों में रहती हरदम खुशियों का मै नूर हूँ... और प्रभु प्रेम का उपहार, इन खुशियों का नूर बनकर मैं आत्मा बैठी हूँ , खुशियों के सागर के पहलू में... खुशियों की तरंगे मेरे रोम रोम से बही जा रही हैं... ये धरती,ये गगन, ये बहती पवन सब मुझसे खुशनुमा मस्तियों की सौगात लिये जा रही है... *उनकी आँखो से बरसती खुशियों की चाँदनी अभी भी मुझे नख शिख नहला रही है*...

 

  *ज्ञान चन्द्रमा बापदादा आँखों ही आँखों में खुशियों की चाँदनी में नहलाते स्नेह से भरपूर हो मुझ आत्मा से बोले:-* "सदा रूहानियत की स्थिति में रहने वाली मेरी रूहे  गुलाब बच्ची... *सारे ज्ञान का सार मन्मनाभव को क्या आपने बुद्धि में धारण किया है*? क्या जन्मों जन्मों के लिए खुशी की खुराक से भरपूर हुए हो? *समाने और समेटने की शक्ति द्वारा एकाग्रता का अनुभव करने वाले सार स्वरूप बने हो*? ऊँचे ते ऊँचे बाप की बच्ची, *अब बाप समान ऊँची स्थिति बनाओं... समेटकर संकल्पों को अपने, इस लगाव की रस्सी को जलाओं..."*

 

_ ➳  *ज्ञान का तीसरा नेत्र दे कर सृष्टि के आदि मध्य अन्त का सम्पूर्ण सार मेरी बुद्धि में समाँ, मुझे त्रिनेत्री बनाने वाले बापदादा से, मैं आत्मा बोली:-* "मीठे से मीठा ज्ञान का एक ही अक्षर बुद्धि में धारण कर मैं धन्य हुई हूँ बाबा!... *जन्मों जन्मों की मिठास अब तो जीवन में इस कदर घुली कि कोशिशों के बिना ही दिशाओं में भी घुलने लगी है... गैर नही रहा कोई अब, हर रूह अपनी- सी  लगने लगी है...जाम खुशियों का अब भर- भर कर उँडेल रही हूँ*... *गमों की दुनिया भूली हूँ बाबा! अब बस खुशियों से खेल रही हूँ..."*

 

   *इस दुनियावी जहाजी बेडे को इस पतित भवसागर से पार ले जाने वाले मेरे खिवैय्या सतगुरू मुझ आत्मा से बोलें:-* "रूहानी बच्ची... संगम के इन गलियारों से इस ज्ञान की मीठी सेक्रीन, *मन्मनाभव का सबको अनुभव कराओं, ज्ञान और योग की ये फर्स्ट क्लास वन्डरफुल खुराक, खुशी के एक -एक लम्हें के लिए तरसती हर आत्मा को पिलाओं*, इस अनमोल खुराक के सर्जन का अब हर रूह से परिचय कराओ..."

 

_ ➳  *मुझ आत्मा से सब डिफेक्ट निकाल, मुझे प्युअर डायमण्ड बनाने वाले रत्नाकर बाप से, मैं आत्मा बोली:-* "मीठे बाबा... *एक बाप के डायरेक्शन प्रमाण चलने वाली मै महावीर आत्मा, मन्मनाभव की स्मृति से सबको समर्थ  बना रही हूँ*... आत्मा भाई -भाई की स्मृति से बाप के वर्से की ये अधिकारी आत्माए देखो, अपने भाग्य पर किस कदर इठला रही है, निमित्त बन, कर जो  दिया इनको अखुट खजाना, अब  त्रिकाल दर्शी बन ये भी सबको लुटा रही है, बाबा! *विकारों की खोट आपने मुझ आत्मा से जैसे निकाली है, वैसे ही मैं अब हर आत्मा को प्योर डायमंड बनने के तमाम हुनर सिखा रही हूँ..."* 

 

  *अतीन्द्रिय सुखों की रिमझिम सी बरसातों में भिगो देने वाले ज्ञानसागर बाप, शिक्षक और सतगुरू बोले:-* "सबको सुख देने वाली मेरी खुशबूदार फूल बच्ची... अपने *दिव्य गुणों की खुशबू से अब सतयुगी नजारें साकार करो, खुशियों के रंगों से जो बेरंग नजारें है, अब उनमे भी परमात्म प्यार भरों*... सदा खुश मौज में रहों खुद, फिर औरो, को खुशियाँ बाँट दो, प्यारें बन कर संसार के मोह के बंधन काट दों... *अन्तिम समय, सेकेन्ड का समय और नष्टोमोहा का पेपर, इस पेपर में पास सबको पास कराओं..."*

 

_ ➳  *वन्डरफुल ज्ञान देने वाले  वन्डरफुल बाप से इस वन्डरफुल समझानी को पाकर मैं आत्मा धन्य हो बोली*:- "प्यारे मीठे बापदादा... *इस ज्ञान का सार, वर्से का सार, ये अखुट खुशी और आपका पावन प्यार*... जो भर भर आपने लुटाया है... *इस पालना का रिटर्न मैने भी हर आत्मा को आप का परिचय देकर चुकाया है*... घर घर मन्दिर बन रहा है बाबा ! हर नर में नारायण नजर आते है... आप मौजों का सागर हो, ये सुनकर हर रूह आपके पहलू में आ चुकी है... *और  विश्व कल्याणकारी मैं आत्मा, निमित्त भाव से खुशियों के अखुट खजाने लुटाये जा रही हूँ... वरदानों से भरपूर कर रहे है बापदादा मुझे और मै मन्द मन्द मुस्कुराये जा रही हूँ..."*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- विचार सागर मंथन कर अपार खुशी में रहना है*"

 

_ ➳  सागर के तले में छुपी अनमोल वस्तुयों जैसे सीप, मोती आदि को पाने के लिए एक गोताखोर को पहले उसकी गहराई में तो जाना ही पड़ता है। *जब तक गोताखोर पानी के ऊपरी हिस्से पर तैरता रहता है तब तक तेज लहरों, पानी की थपेड़ों और तूफानों का भी उसको सामना करना पड़ता है* परन्तु यदि वह इन सबकी परवाह किये बिना पानी की गहराई में उतरता चला जाता है तो नीचे गहराई में जा कर हर चीज शांन्त हो जाती है और वह सागर के तले में छुपी उन चीजों को प्राप्त कर लेता है।

 

_ ➳  इस दृश्य को मन बुद्धि रूपी नेत्रों से देखते - देखते मैं विचार करती हूँ कि जैसे स्थूल सागर की गहराई में अनमोल सीप, मोती आदि छुपे होते हैं इसी तरह से स्वयं *ज्ञान सागर भगवान द्वारा दिये जा रहे इस ज्ञान में भी कितने अनमोल खजाने छुपे हैं बस आवश्यकता है इन खजानों को ढूंढने के लिए इस अनमोल ज्ञान की गहराई में जाने की अर्थात विचार सागर मंथन करने की*। मलाई से भी मक्खन तभी निकलता है जब उसे पूरी मेहनत के साथ मथा जाता है तो यहां भी अगर विचार सागर मन्थन नही करेंगे तो ज्ञान रूपी मक्खन का स्वाद भी नही ले सकेंगे। *इसलिये विचार सागर मन्थन कर, ज्ञान की गहराई में जा कर, फिर उसे धारणा में लाकर अनुभवी मूर्त बनना ही ज्ञान सागर द्वारा दिये जा रहे इस ज्ञान का वास्तविक यूज़ है*।

 

_ ➳  हम बच्चो को यह ज्ञान दे कर, हमारे दुखदाई जीवन को सुखदाई, मनुष्य से देवता बनाने के लिए स्वयं भगवान को इस पतित दुनिया, पतित तन में आना पड़ा। तो ऐसे भगवान टीचर द्वारा दिये जा रहे इस ज्ञान का हमे कितना रिगार्ड रखना चाहिए। *ज्ञान की एक - एक प्वाइंट पर विचार सागर मंथन कर उसे धारणा में ले कर आना और फिर औरों को धारण कराना ही भगवान के स्नेह का रिटर्न है*। और भगवान के स्नेह का रिटर्न देने के लिए ज्ञान का विचार सागर मन्थन कर, सेवा की नई - नई युक्तियाँ अब मुझे निकाल औरों को भी यह ज्ञान देकर उनका भाग्य बनाना है मन ही मन स्वयं से यह दृढ़ प्रतिज्ञा कर ज्ञान सागर अपने प्यारे परमपिता परमात्मा शिव बाबा की याद में मैं अपने मन बुद्धि को एकाग्र करती हूँ।

 

_ ➳  मन बुद्धि की तार बाबा के साथ जुड़ते ही मैं अनुभव करती हूँ जैसे ज्ञान सूर्य शिवबाबा मेरे सिर के ठीक ऊपर आ कर ज्ञान की शक्तिशाली किरणों से मुझे भरपूर कर रहें हैं। *बाबा से आ रही सर्वशक्तियो रूपी किरणों की मीठी फुहारें जैसे ही मुझ पर पड़ती हैं मेरा साकारी शरीर धीरे - धीरे लाइट के सूक्ष्म आकारी शरीर मे परिवर्तित हो जाता हैं* और मास्टर ज्ञान सूर्य बन लाइट की सूक्ष्म आकारी देह धारण किये मैं फ़रिशता ज्ञान की रोशनी चारों और फैलाता हुआ सूक्ष्म लोक में पहुँच जाता हूँ और जा कर बापदादा के सम्मुख बैठ जाता हूँ।

 

_ ➳  अपनी सर्वशक्तियों को मुझ में भरपूर करने के साथ - साथ अब बाबा मुझे विचार सागर मन्थन का महत्व बताते हए कहते हैं कि *"जितना विचार सागर मंथन करेंगे उतना बुद्धिवान बनेंगें और अच्छी रीति धारणा कर औरों को करा सकेंगे"*। बड़े प्यार से यह बात समझा कर बाबा मीठी दृष्टि दे कर परमात्म बल से मुझे भरपूर कर देते हैं। मैं फ़रिशता परमात्म शक्तियों से भरपूर हो कर औरों को आप समान बनाने की सेवा करने के लिए अब वापिस अपने साकारी तन में लौट आता हूँ।

 

_ ➳  *अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप को सदा स्मृति में रख अपने परमशिक्षक ज्ञान सागर शिव बाबा द्वारा दिये जा रहे ज्ञान को गहराई से समझने और उसे स्वयं में धारण कर फिर औरों को धारण कराने के लिए अब मैं एकांत में बैठ विचार सागर मंथन कर सेवा की नई - नई युक्तियाँ सदैव निकालती रहती हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं याद और सेवा के उत्साह में रहकर उत्सव मनाने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं ब्राह्मण जीवन मे सदा चियरफुल  और केयरफुल मूड में रहने वाली कम्बाइन्ड रूपधारी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  दिल मे झण्डा तो लहरा लिया है और कपडे का झण्डा भी लहरा लिया है जगह-जगह पर। *अभी प्रत्यक्षता का झण्डा जल्दी से जल्दी लहराना ही है। यही व्रत लोदृढ़ प्रतिज्ञा का व्रत लो की जल्दी से जल्दी यह झण्डा नाम बाला का लहराना ही है।* अभी दुखी दुनिया को मुक्तिधाम मे जीवनमुक्ति धाम में भेजो। बहुत दुखी है ना तो रहम करोअब दुख से छुडाओ। *जो बाप का वर्सा है - 'मुक्तिकावह सबको दिलाओ क्यों की परेशान बहुत हैं।* आप शान मे होवह परेशान हो। कभी भी मन्सा सेवा से अपने को अलग नही करनासदा सेवा करते रहो। वायुमण्डल फैलाते रहो। *सुखदाता के बच्चे सुख का वायुमण्डल फैलाते चलो। यही मनाना है।*

 

✺   *ड्रिल :-  "सुखदाता के बच्चे बन सुख का वायुमण्डल फैलाने का अनुभव"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने मीठे बाबा का हाथ पकड़े... उनसे मीठी-मीठी बातें करते हुए सैर कर रही हूँ... *मुझे तीर्थ यात्रा पर जाते हुए कुछ पदयात्री नजर आते हैं... जो कितना कष्ट, तकलीफें पाकर भी... भावना और प्रेम के वश पैदल चलते जा रहे हैं...* उनके हाथ में ध्वज/पताका है... मुंह से 'जय बाबा की' के जयकारे कर रहे हैं... उनके चेहरों पर अपने इष्टदेवों के प्रति कितना स्नेह है... जिस स्नेह और भक्ति भाव में भीगे हुए ये चलते जा रहे हैं...

 

 _ ➳  इनके हाथ में पताका देखकर मैं आत्मा याद करती हूँ शिवरात्रि को... जब *हम बाबा के बच्चे भी बाबा के अवतरण दिवस पर शिव ध्वज फहरा रहे हैं... हमारे दिलों में अपने प्यारे शिव साजन के स्नेह का झंडा लहरा रहा है.*.. हर ब्राह्मण आत्मा का दिल 'मेरा बाबा मेरा बाबा' के मधुर गीत गा रहा है... सबके दिलों में मीठे बाबा के प्यार की शहनाइयां गूंज रही हैं... सभी पर जैसे कि ईश्वरीय प्रेम का सुधा रस बरस रहा है... जिसे पीकर हर आत्मा रूपी चातक की प्यास बुझ रही है... और असीम तृप्ति मिल रही है...

 

 _ ➳  मैं आत्मा रूपी सूरजमुखी अपने ज्ञान सूर्य बाबा को निहार रही हूँ... बाबा की किरणों का स्पर्श पाकर मन की एक एक कली खिल उठी है... खुशियों में झूम रही है... *मैं आत्मा अपने खेलते मुस्कुराते हुए चेहरे से बाबा को विश्व में प्रत्यक्ष कर रही हूँ... अपनी दिव्य रूहानी मुस्कान, अव्यक्त स्थिति से हर एक के दिल में परमात्म प्यार का झंडा लहरा रही हूँ*... विश्व की प्यासी, तड़पती अतृप्त, अशांत आत्माओं को प्यारे रूहानी पिता से मिलवाने के निमित्त बन रही हूँ...

 

 _ ➳  कष्टों, पीड़ाओं के थपेड़े खा खाकर दुःखी, निराश, अशांत आत्माएं... एक क्षण की शांति को पाने के लिए बेताब है... ये अपने पिता और घर को भूलकर कैसे भक्ति मार्ग में दर-दर भटक रही हैं... पर कोई भी ठिकाना नहीं पा रही हैं... *उन आत्माओं को मुझ आत्मा के द्वारा अपने वास्तविक घर का ठिकाना मिल रहा है... अपने रूहानी घर और रूहानी पिता का परिचय पाकर आत्माओं की उदासी, पीड़ाएँ समाप्त हो रही हैं*... सभी अपने रूहानी बाबा से मुक्ति और जीवन मुक्ति का वर्सा ले रही हैं... हर एक के दिल में, जुबां पर बाबा का नाम बाला हो रहा है...

 

 _ ➳  *मैं आत्मा सुख सागर पिता की संतान सुख स्वरूप आत्मा हूँ...* बाबा की छत्रछाया में हूँ... अपने बाबा से सर्व संबंधों का रसास्वादन कर रही हूँ... मैं आत्मा अतीन्द्रिय सुख के झूले में झूल रही हूँ... *ये सुख और आनंद के प्रकम्पन... मुझसे निकलकर चारों ओर फैल रहे हैं... चारों ओर का वायुमंडल चार्ज हो रहा है...* इस वायुमंडल में आने वाली हर आत्मा... सच्चे आत्मिक सुख का अनुभव कर रही है... मैं सुख सागर बाबा की किरणों के झऱने के नीचे स्थित होकर सर्वत्र सुखों की वर्षा कर रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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