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 11 / 01 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *किसी को दुःख तो नहीं दिया ?*

 

➢➢ *एक शिवबाबा को ही प्यार किया ?*

 

➢➢ *इस लोक के लगाव से मुक्त बन अव्यक्त वतन की सैर की ?*

 

➢➢ *अपने चेहरे और चलन से सत्यता की सभ्यता का अनुभव करवाया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *कितना भी कार्य की चारों ओर की खींचतान हो, बुद्धि सेवा के कार्य में अति बिजी हो - ऐसे टाइम पर अशरीरी बनने का अभ्यास करके देखो। यथार्थ सेवा का कभी बन्धन होता ही नहीं क्योंकि योग युक्त, युक्तियुक्त सेवाधारी सदा सेवा करते भी उपराम रहते हैं।* ऐसे नहीं कि सेवा ज्यादा है इसलिए अशरीरी नहीं बन सकते। *याद रखो मेरी सेवा नहीं बाप ने दी है तो निर्बन्धन रहेंगे।* ट्रस्टी हूँ, बन्धन मुक्त हूँ ऐसी प्रैक्टिस करो। अति के समय अन्त की स्टेज, कर्मातीत अवस्था का अभ्यास करो।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं प्रकृति की हलचल को साक्षी हो देखने वाली प्रकृति जीत आत्मा हु"*

 

✧  सदा मायाजीत और प्रकृतिजीत हो? मायाजीत तो बन ही रहे हो लेकिन प्रकृतिजीत भी बनो क्योंकि अभी प्रकृति की हलचल तो बहुत होनी हैं ना। हलचल में अचल रहो, ऐसे अचल बने हो? कभी समुद्र का जल अपना प्रभाव दिखायेगा तो कभी धरनी अपना प्रभाव दिखायेगी। *अगर प्रकृतिजीत होंगे तो प्रकृति की कोई भी हलचल अने को हिला नहीं सकेगी। सदा साक्षी होकर सब खेल देखते रहेंगे।*

 

  *जैसे फरिश्तों को सदा ऊंची पहाड़ी पर दिखाते हैं, तो आप फरिश्ते सदा ऊंची स्टेज अर्थात् ऊंची पहाड़ी पर रहने वाले।* ऐसी ऊंची स्टेज पर रहते हो?

 

  *जितना ऊंचे होंगे उतना हलचल से स्वत: परे रहेंगे।* अभी देखो यहाँ पहाड़ी पर आते हो तो नीचे की हलचल से स्वत: ही परे हो ना! शहरों में कितनी हलचल और यहाँ कितनी शान्ति और साधारण स्थिति में भी कितना रात-दिन का अन्तर होगा।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  मनोबल की बडी महिमा है। यह रिद्धि-सिद्धि वाले भी मनोबल द्वारा अल्पकाल के चमत्कार दिखाते हैं। आप तो विधिपूर्वक रिद्धि-सिद्धि नहीं, विधिपूर्वक कल्याण के चमत्कार दिखायेंगे जो वरदान हो जायेंगे, आत्माओं के लिए यह संकल्प शक्ति का प्रयोग वरदान सिद्ध हो जायेगा। तो *पहले यह चेक करो कि मन को कन्ट्रोल करने की कन्ट्रोलिंग पॉवर है?*

 

✧  सेकण्ड में जैसे साइन्स की शक्ति, स्विच के आधार से, स्विच ऑन करो, स्विच ऑफ करो - ऐसे सेकण्ड में मन को जहाँ चाहो, जैसे चाहो, जितना समय चाहो, उतना कन्ट्रोल कर सकते हैं? बहुत अच्छे-अच्छे स्वयं प्रति भी और सेवा प्रति भी सिद्धि रूप दिखाई देंगे। *लेकिन बापदादा देखते हैं कि संकल्प शक्ति के जमा का खाता अभी साधारण अटेन्शन है।*

 

✧  जितना होना चाहिए उतना नहीं है। संकल्प के आधार पर बोल और कर्म ऑटोमेटिक चलते हैं। अलग-अलग मेहनत करने की जरूरत ही नहीं है, आज बोल को कन्ट्रोल करो, आज दृष्टि को अटेन्शन में लाओ, मेहनत करो, आज वृत्ति को अटेन्शन से चेज करो। *अगर संकल्प शक्ति पॉवरफुल हो तो यह सब स्वतः ही कन्ट्रोल में आ जाते हैं।* मेहनत से बच जायेंगे। तो संकल्प शक्ति का महत्व जाने।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *साइलेंस पॉवर प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  साइलेन्स की शक्ति कितनी महान है? *साइलेन्स की शक्ति क्रोध-अग्नि को शीतल कर देती है।* साइलेन्स की शक्ति *व्यर्थ संकल्पों की हलचल को समाप्त कर सकती है।* साइलेन्स की शक्ति ही कैसे भी पुराने संस्कार हों, ऐसे *पुराने संस्कार समाप्त कर देती है।* साइलेन्स की शक्ति अनेक प्रकार के *मानसिक रोग सहज समाप्त कर सकती है।*

〰✧  साइलेंन्स की शक्ति, *शान्ति के सागर बाप से अनेक आत्माओं का मिलन करा सकती है।* साइलेन्स की शक्ति-अनेक जन्मों से *भटकती हुई आत्माओं को ठिकाने की अनुभूति करा सकती है।* महान आत्मा, धर्मात्मा सब बना देती है। साइलेन्स की शक्ति - *सेकण्ड में तीनों लोकों की सैर करा सकती है।*

〰✧  साइलेन्स की शक्ति- *कम मेहनत, कम खर्चा वालानशीन करा सकती है*साइलेन्स की शक्ति *समय के खज़ाने में भी एकानामी करा देती है अर्थात् कम समय में ज्यादा सफलता पा सकते हो।* साइलेन्स की शक्ति- *हाहाकार से जयजयकार करा सकती है।* साइलेन्स की शक्ति सदा आपके गले में *सफलता की मालायें पहनायेंगी।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- शिवबाबा की श्रीमत पर चलना"*

 

_ ➳  *अमृतवेले के रूहानी समय में मैं आत्मा बगीचे के झूले में बाबा की गोदी में बैठी हूँ... बाबा की गोदी के झूले में झूलती हुई उनके रूहानी प्यार में समाती जा रही हूँ...* अभी तक जिस भगवान को ढूंढ रही थी, दुनिया वाले जिसे अभी भी ढूंढ रहे हैं, अब मैं भाग्यशाली आत्मा उनकी गोद में बैठ उनकी पालना और शिक्षाएं ले रही हूँ... मीठे बाबा प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए मुझे वरदानों, खजानों से भरपूर करते हैं... *मैं आत्मा बाबा का दिल से शुक्रिया करती हुई उनसे रूह-रिहान करती हूँ... बाबा मुझे अपनी श्रेष्ठ मत देकर श्रेष्ठ बनाते हैं...*

 

  *प्यार के मीठे तराने सुनाकर प्रेम रस में मुझे भिगोते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* "मेरे मीठे फूल बच्चे... साधारण मनुष्य मात्र से खुबसूरत देवताई राज्य भाग्य वाले... महानतम भाग्य को पा रहे हो... तो श्रीमत के हाथ को सदा थाम कर दिल से शुक्रिया के नगमे गुनगुनाते रहो... *सच्चे प्यार के सागर से हर पल प्रेम सुधा का रसपान करो... और रूहानी प्रेम की बदली बन विश्व धरा को सिक्त करो...."*

 

_ ➳  *प्यारे प्रभु का साथ पाकर उनके हाथों में हाथ डालकर मैं आत्मा कहती हूँ:-* "हाँ मेरे प्यारे बाबा... मैं आत्मा आपके सच्चे प्यार की चन्दन महक में खोयी सी विश्व धरा को प्रेम तरंगो से सराबोर कर रही हूँ... *श्रीमत के मखमली हाथो में बेफिक्र सी खुशियो के अनन्त आसमाँ में झूम रही हूँ... सच्चे प्रेम में खोकर मदमस्त हो गई हूँ..."*

 

  *प्यार के चन्दन से मेरे जीवन फुलवारी को महकाकर खुशियों से मेरी झोली भरते हुए मीठे बाबा कहते हैं:-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... जिस ईश्वर पिता की खोज में दर दर भटक रहे थे... *आज उनकी फूलो सी गोद में देवताई स्वरूप को पा रहे हो... तो ऐसे मीठे बाबा पर दिल का सारा स्नेह उंडेल कर... सच्चे प्रेम का पर्याय बन जाओ... श्रीमत को दिल की गहराइयो से अपनाकर जीवन को सुखो के स्वर्ग में बदल दो..."*

 

_ ➳  *बाबा की श्रीमत पर चलते हुए दैवीय गुणों की धारणा करते हुए मैं आत्मा कहती हूँ :-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... मैं आत्मा आपकी बाँहों में अनन्त सुखो की हकदार हो गई हूँ... प्यारे बाबा सुख की एक बून्द को कभी व्याकुल *मै आत्मा,आज आपकी यादो में देवताओ सा निखर रही हूँ...मनुष्य मत पर पाये दुखो के दलदल से निकल श्रीमत से सम्पूर्ण सुखी हो गयी हूँ..."*

 

  *अपने पलकों पर बिठाकर मेरे भाग्य को संवारते हुए मीठे प्यारे बाबा कहते हैं:-* "मेरे सिकीलधे मीठे बच्चे... ईश्वर पिता मनुष्य से देवताओ सा श्रृंगार कर... स्वर्गधरा पर सजा रहे है... *ऐसे मीठे पिता का रोम रोम से शुक्रिया कर... सच्चे प्यार से दिल, सदा का आबाद करो... सच्ची मत को अपनाकर... दिव्यता से सम्पन्न हो, अनोखे सुखो को दामन में भर लो..."*

 

_ ➳  *बाबा के प्यार की लहरों में लहराती हुई स्वर्ग सुखों की अधिकारी बन मैं आत्मा कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... *मैं आत्मा किन शब्दों में आपकी दरियादिली का शुक्रिया करूँ... मीठे बाबा मेरे, मै आत्मा तो दुखो को ही अपनी तकदीर मान ली थी... आपने तो मुझे देवतुल्य बना दिया है...* और असीम मीठे सुखो से मेरा जीवन संवार दिया है..."

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- किसी को भी दुख नही देना है*"

 

_ ➳  दुखों से लिबरेट कर, सबको सुख देने वाले दुख हर्ता सुख कर्ता, सदा कल्याणकारी *अपने सदाशिव भगवान बाप समान मास्टर दुख हर्ता सुख कर्ता बन सबको खुशी देने और डबल अहिंसक बन मन, वचन, कर्म से कभी भी किसी को दुख ना देने का स्वयं से वायदा कर, मैं दया के सागर, सुख के सागर अपने निराकार शिव पिता की याद में अपने मन बुद्धि को एकाग्र करती हूँ* और उनके पास ले जाने वाली अति सुखदायी आंतरिक यात्रा पर धीरे - धीरे अग्रसर होती हूँ। मन और बुद्धि जैसे - जैसे स्थिर होने लगते हैं और जैसे - जैसे एकाग्रता की शक्ति बढ़ने लगती है मुझे मेरा वास्तविक स्वरूप बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देने लगता है।

 

_ ➳  अपनी साकार देह में अपनी दोनों आइब्रोज़ के बीच अपने आपको एक चमकते हुए सितारे के रूप में मैं देख रही हूँ। *उस सितारे में से निकल रहा भीना - भीना प्रकाश मुझे बहुत सुखद एहसास करवा रहा है और उस प्रकाश की सतरँगी किरणों में अपने अंदर निहित सातों गुणों के वायब्रेशन्स को अपने मस्तक से निकल कर, चारो ओर फैलता हुआ मैं स्पष्ट अनुभव कर रही हूँ*। अपने निज स्वरूप से निकल रहे इन सातों गुणों के वायब्रेशन्स को एक रंग बिरंगे फव्वारे से निकल रही फ़ुहारों के रूप में अपने ही शरीर पर पड़ता हुआ मैं अनुभव कर रही हूँ। 

 

_ ➳  मैं देख रही हूँ जैसे - जैसे ये फुहारें मेरे शरीर पर पड़ रही है मेरे शरीर के सभी अंग एक - एक करके शिथिल हो रहें हैं। अपने आपको मैं एक दम रिलेक्स महसूस कर रही हूँ। *ऐसा लग रहा है जैसे शरीर का भान बिल्कुल समाप्त हो गया है और मैं बिल्कुल अशरीरी हो गई हूँ*। जैसे मक्खन से बाल निकलता है ऐसे इस अशरीरी अवस्था में मैं आत्मा बिल्कुल सहज रीति देह से बिल्कुल न्यारी होकर अब भृकुटि के अकालतख्त को छोड़ उससे बाहर आ गई हूँ। 

 

_ ➳  दैहिक दुनिया के हर बन्धन से मुक्त इस अवस्था मे मैं स्वयं को बहुत हल्का महसूस कर रही हूँ। यह हल्कापन मुझे धरनी के आकर्षण से मुक्त करके, ऊपर की ओर उड़ा रहा है। *धीरे - धीरे मैं चमकता सितारा अपनी खूबसूरत आंतरिक यात्रा के इस पहले को पड़ाव को पार कर अब ऊपर आकाश की ओर जा रहा हूँ*। निरन्तर अपनी मंजिल की ओर बढ़ती हुई मैं चैतन्य शक्ति आत्मा आकाश को पार कर, उससे ऊपर सूक्ष्म वतन को पार करती हुई अब अपनी मंजिल, अपने शांति धाम घर में अपने सुख सागर बाबा के पास पहुँच चुकी हूँ। 

 

_ ➳  बाबा के पास पहुँच कर उनसे आ रही सुख की किरणों के शीतल झरने के नीचे खड़ी होकर मैं स्वयं को उनके सुख की किरणों से भरपूर कर स्वयं को उनके समान मास्टर सुख का सागर बना रही हूँ। *बाबा से आ रही सुख की पीले रंग की शक्तियों का झरना झर - झर करके मेरे ऊपर बहता ही जा रहा है और उन शक्तियों को मैं अपने अन्दर गहराई तक समाती जा रही हूँ*। अपने सुख सागर बाबा से सुख की अनन्त शक्ति अपने अंदर भरकर मैं वापिस साकारी दुनिया में अपने कर्मक्षेत्र पर लौटती हूँ। 

 

_ ➳  अपने सुख सागर बाप से अपने अंदर भरी हुई सुख की शक्ति मुझे बाप समान मास्टर दुख हर्ता सुख कर्ता बना रही है। अपने सम्बन्ध, सम्पर्क में आने वाली हर आत्मा पर रहम की दृष्टि रखते हुए, सुख के वायब्रेशन उन्हें देकर मैं सबको सुख का अनुभव करवा रही हूँ। *कैसे भी स्वभाव संस्कार वाली आत्मा मेरे सम्पर्क में क्यो ना आये, किन्तु डबल अहिंसक बन मन, वचन, कर्म से किसी को भी दुख ना पहुँचाकर, सबके प्रति शुभभावना शुभकामना रखते हुए, मैं मास्टर सुख का सागर बन सबको सुख देकर, सबकी दुआयों की पात्र आत्मा बन रही हूँ*।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं इस लोक के लगाव से मुक्त्त बन अव्यक्त वतन का सैर करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं आत्मा उड़ता पंछी हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा अपने चेहरे और चलन से सत्यता की सभ्यता का अनुभव कराती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सत्य स्वरूप हूँ  ।*

   *मैं संगमयुगी श्रेष्ठ आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  दिल मे झण्डा तो लहरा लिया है और कपडे का झण्डा भी लहरा लिया है जगह-जगह पर। *अभी प्रत्यक्षता का झण्डा जल्दी से जल्दी लहराना ही है। यही व्रत लोदृढ़ प्रतिज्ञा का व्रत लो की जल्दी से जल्दी यह झण्डा नाम बाला का लहराना ही है।* अभी दुखी दुनिया को मुक्तिधाम मे जीवनमुक्ति धाम में भेजो। बहुत दुखी है ना तो रहम करोअब दुख से छुडाओ। *जो बाप का वर्सा है - 'मुक्तिकावह सबको दिलाओ क्यों की परेशान बहुत हैं।* आप शान मे होवह परेशान हो। कभी भी मन्सा सेवा से अपने को अलग नही करनासदा सेवा करते रहो। वायुमण्डल फैलाते रहो। *सुखदाता के बच्चे सुख का वायुमण्डल फैलाते चलो। यही मनाना है।*

 

✺   *ड्रिल :-  "सुखदाता के बच्चे बन सुख का वायुमण्डल फैलाने का अनुभव"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने मीठे बाबा का हाथ पकड़े... उनसे मीठी-मीठी बातें करते हुए सैर कर रही हूँ... *मुझे तीर्थ यात्रा पर जाते हुए कुछ पदयात्री नजर आते हैं... जो कितना कष्ट, तकलीफें पाकर भी... भावना और प्रेम के वश पैदल चलते जा रहे हैं...* उनके हाथ में ध्वज/पताका है... मुंह से 'जय बाबा की' के जयकारे कर रहे हैं... उनके चेहरों पर अपने इष्टदेवों के प्रति कितना स्नेह है... जिस स्नेह और भक्ति भाव में भीगे हुए ये चलते जा रहे हैं...

 

 _ ➳  इनके हाथ में पताका देखकर मैं आत्मा याद करती हूँ शिवरात्रि को... जब *हम बाबा के बच्चे भी बाबा के अवतरण दिवस पर शिव ध्वज फहरा रहे हैं... हमारे दिलों में अपने प्यारे शिव साजन के स्नेह का झंडा लहरा रहा है.*.. हर ब्राह्मण आत्मा का दिल 'मेरा बाबा मेरा बाबा' के मधुर गीत गा रहा है... सबके दिलों में मीठे बाबा के प्यार की शहनाइयां गूंज रही हैं... सभी पर जैसे कि ईश्वरीय प्रेम का सुधा रस बरस रहा है... जिसे पीकर हर आत्मा रूपी चातक की प्यास बुझ रही है... और असीम तृप्ति मिल रही है...

 

 _ ➳  मैं आत्मा रूपी सूरजमुखी अपने ज्ञान सूर्य बाबा को निहार रही हूँ... बाबा की किरणों का स्पर्श पाकर मन की एक एक कली खिल उठी है... खुशियों में झूम रही है... *मैं आत्मा अपने खेलते मुस्कुराते हुए चेहरे से बाबा को विश्व में प्रत्यक्ष कर रही हूँ... अपनी दिव्य रूहानी मुस्कान, अव्यक्त स्थिति से हर एक के दिल में परमात्म प्यार का झंडा लहरा रही हूँ*... विश्व की प्यासी, तड़पती अतृप्त, अशांत आत्माओं को प्यारे रूहानी पिता से मिलवाने के निमित्त बन रही हूँ...

 

 _ ➳  कष्टों, पीड़ाओं के थपेड़े खा खाकर दुःखी, निराश, अशांत आत्माएं... एक क्षण की शांति को पाने के लिए बेताब है... ये अपने पिता और घर को भूलकर कैसे भक्ति मार्ग में दर-दर भटक रही हैं... पर कोई भी ठिकाना नहीं पा रही हैं... *उन आत्माओं को मुझ आत्मा के द्वारा अपने वास्तविक घर का ठिकाना मिल रहा है... अपने रूहानी घर और रूहानी पिता का परिचय पाकर आत्माओं की उदासी, पीड़ाएँ समाप्त हो रही हैं*... सभी अपने रूहानी बाबा से मुक्ति और जीवन मुक्ति का वर्सा ले रही हैं... हर एक के दिल में, जुबां पर बाबा का नाम बाला हो रहा है...

 

 _ ➳  *मैं आत्मा सुख सागर पिता की संतान सुख स्वरूप आत्मा हूँ...* बाबा की छत्रछाया में हूँ... अपने बाबा से सर्व संबंधों का रसास्वादन कर रही हूँ... मैं आत्मा अतीन्द्रिय सुख के झूले में झूल रही हूँ... *ये सुख और आनंद के प्रकम्पन... मुझसे निकलकर चारों ओर फैल रहे हैं... चारों ओर का वायुमंडल चार्ज हो रहा है...* इस वायुमंडल में आने वाली हर आत्मा... सच्चे आत्मिक सुख का अनुभव कर रही है... मैं सुख सागर बाबा की किरणों के झऱने के नीचे स्थित होकर सर्वत्र सुखों की वर्षा कर रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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