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 11 / 03 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *फूल बन सबको सुख दिया ?*

 

➢➢ *अन्दर ज्ञान की लहरें सदा उठती रही ?*

 

➢➢ *योगबल द्वारा माया की शक्ति पर जीत प्राप्त की ?*

 

➢➢ *व्यर्थ को समर्थ में परिवर्तित किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *बापदादा का बच्चों से इतना प्यार है जो समझते हैं हर एक बच्चा मेरे से भी आगे हो ।* दुनिया में भी जिससे ज्यादा प्यार होता है उसे अपने से भी आगे बढ़ाते हैं । यही प्यार की निशानी है । *तो बापदादा भी कहते हैं मेरे बच्चों में अब कोई भी कमी नहीं रहे, सब सम्पूर्ण, सम्पन्न और समान बन जाये ।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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✺   *"मैं बाप की विशेष आत्मा हूँ"*

 

  सभी अपने को बाप की विशेष आत्मायें अनुभव करते हो? सदा यही खुशी रहती है कि जैसे बाप सदा श्रेष्ठ है वैसे हम बच्चे भी बाप समान श्रेष्ठ हैं? इसी स्मृति से सदा हर कर्म स्वत: ही श्रेष्ठ हो जायेगा। जैसा संकल्प होगा वैसे कर्म होंगे। तो सदा स्मृति द्वारा श्रेष्ठ स्थिति में स्थित रहने वाली विशेष आत्मायें हो। *सदा अपने इस श्रेष्ठ जन्म की खुशियां मनाते रहो। ऐसा श्रेष्ठ जन्म जो भगवान के बच्चे बन जायें - ऐसा सारे कल्प में नहीं होता। पाँच हजार वर्ष के अन्दर सिर्फ इस समय यह अलौकिक जन्म होता है।*

 

  सतयुग में भी आत्माओंके परिवार में आयेंगे लेकिन अब परमात्म सन्तान हो। तो इसी विशेषता को सदा याद रखो। *सदा - मैं ब्राह्मण ऊँचे ते ऊँचे धर्म, कर्म और परिवार का हूँ। इसी स्मृति द्वारा हर कदम में आगे बढ़ते चलो। पुरुषार्थ की गति सदा तेज हो। उड़ती कला सदा ही मायाजीत और निर्बन्धन बना देगी।* जब बाप को अपना बना दिया तो और रहा ही क्या। एक रह गया था। एक में ही सब समाया हुआ है। एक की याद में, एकरस स्थिति में स्थित होने से शान्ति, शक्ति और सुख की अनुभूति होती रहेगी। जहाँ एक है वहाँ एक नम्बर है।

 

  तो सभी नम्बरवन हो ना। एक को याद करना सहज है या बहुतों को? बाप सिर्फ यही अभ्यास कराते हैं और कुछ नहीं। *दस चीजें उठाना सहज है या एक चीज उठाना सहज है? तो बुद्धि द्वारा एक की याद धारण करना बहुत सहज है। लक्ष्य सबका बहुत अच्छा है। लक्ष्य अच्छा है तो लक्षण अच्छे होते ही जायेंगे।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  जैसे लाइट हाऊस, माइट हाऊस सेकण्ड में ऑन करते ही अपनी लाइट फैलाते हैं, ऐसे आप सेकण्ड में लाइट हाऊस बन चारों ओर लाइट फैला सकते हो? यह स्थूल आँख एक स्थान पर बैठ दूर तक देख सकती है ना! फैला सकती है ना अपनी दृष्टि! ऐसे *आप तीसरे नेत्र द्वारा एक स्थान पर बैठे चारों ओर वरदाता, विधाता बन नजर से निहाल कर सकते हो? *

 

✧  अपने को सब बातों में चेक कर रहे हो? इतना तीसरा नेत्र क्लीन और क्लीयर है? *सभी बातों में अगर थोडी भी कमजोरी है, तो उसका कारण पहले भी सुनाया है कि यह हद का लगाव मैं और मेरा' है।* जैसे मैं के लिए स्पष्ट किया था - होमवर्क भी दिया था। तो मैं को समाप्त कर एक मैं रखनी है। सभी ने यह होमवर्क किया?

 

✧  जो इस होमवर्क में सफल हुए वह हाथ उठाओ। बापदादा ने सबको देखा है। *हिम्मत रखो, डरो नहीं* हाथ उठाओ। अच्छा है *मुबारक मिलेगी।* बहुत थोडे हैं। इन सबके हाथ टी.वी. में दिखाओ। बहुत थोडों ने हाथ उठाया है। अभी क्या करें? सभी को अपने ऊपर हँसी भी आ रही है।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *आप लोगों का जो गायन है अन्त:वाहक शरीर द्वारा बहुत सैर करते थे, उसका अर्थ क्या है? यथार्थ अर्थ यही है कि अन्त के समय की जो आप लोगों की कर्मातीत अवस्था की स्थिति हैं* वह जैसे वाहन होता हैं ना। कोई न-कोई वाहन द्वारा सैर किया जाता है। कहाँ का कहाँ पहुँच जाते हैं ! *वैसे जब कर्मातीत अवस्था बन जाती है तो यह स्थिति होने से एक सेकण्ड में कहाँ का कहाँ पहुँच सकते हैं। इसलिए अन्त:वाहक शरीर कहते हैं।* वास्तव में यह अन्तिम स्थिति का गायन है। उस समय आप इस स्थूल शरीर की भान से परे रहते हो। इसलिए इनको सूक्ष्म शरीर भी कह दिया है। *जैसे कहावत है - उड़ने वाला घोडा। तो इस समय के आप सभी के अनुभव की यह बातें हैं जो कहानियों के रूप में बनाई हुई है। एक सेकण्ड में आर्डर किया यहाँ पहुँचो ; तो वहाँ पहुँच जायेगा।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- "परमात्मा बाप की युनिवर्सिटी के स्टूडेंट होने की गुप्त ख़ुशी में रहना*

 

_ ➳  *मैं आत्मा गॉडली स्टूडेंट बन सेंटर में बाबा के सम्मुख बैठ बाबा की यादों में मग्न हो जाती हूँ... धीमे-धीमे प्यारे बाबा के मधुर गीत बज रहे हैं... लाल प्रकाश से भरा पूरा हाल परमधाम नज़र आ रहा है... सभी आत्माएं चमकते हुए लाल बिंदु लग रहे हैं... मनुष्य से देवता, नर से नारायण बनने की यह यूनिवर्सिटी है जिसमें मुझे कोटों में से चुनकर स्वयं परमात्मा ने एडमिशन करवाया है...* अपना बच्चा, अपना स्टूडेंट, अपना वारिस बनाया है... प्यारे बाबा का आह्वान करते ही दीदी के मस्तक में विराजमान होकर मीठे बाबा मीठी मुरली सुनाते हैं...

 

   *नर से नारायण बनने की सच्ची सच्ची नालेज सुनाते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे बच्चे... इस झूठ की दुनिया में झूठ को ही सत्य समझ जीते आये... अब सत्य पिता सचखण्ड की स्थापना करने आये है... *अपने सत्य दमकते स्वरूप को भूल साधारण मनुष्य होकर दुखो में लिप्त हो गए बच्चों को... मीठा बाबा नारायण बनाकर विश्व का मालिक बनाने आया है...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा पत्थर से पारस, मनुष्य से देवता बनने की पढाई को धारण करते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा भगवान से बैठ सारे सत्य को समझ रही हूँ... कैसे साधारण नर से नारायण बन सकती हूँ... यह गुह्य रहस्य बुद्धि में भर रही... ईश्वर पिता मुझे गोद में बिठा पढ़ा रहा... और मेरा सदा का नारायणी भाग्य जगा रहा है...*

 

   *लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सत्य की राह पर ऊँगली पकड़कर चलाते हुए मीठे बाबा कहते हैं:-* मीठे प्यारे फूल बच्चे... जब सब मनुष्य मात्र झूठ को सत्य समझ जी रहे तो सत्य फिर कौन बताये... *सत्य परमात्मा के सिवाय तो भूलो को... फिर कौन राह दिखाये... तो वही सत्य कथा प्यारा बाबा सुना रहा और कांटे हो गए बच्चों को फूलो सा फिर खिला रहा...*

 

_ ➳  *अपने भाग्य पर नाज करती अविनाशी खुशियों में लहराते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा मीठे बाबा से महान भाग्य प्राप्त कर रही हूँ... *सचखण्ड की मालिक बन रही हूँ... मनुष्य से देवताई रूप में दमक रही हूँ... और सुखो की बगिया में खुशियो संग झूल रही हूँ... कितना प्यारा मेरा भाग्य है...*

 

   *दुःख की धरती बदलकर सुख की स्वर्णिम नगरी स्थापित करते हुए मेरे बाबा कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... सच्चा पिता तो सत्य सुखो से भरा सचखण्ड ही बनाये... यह दुःख धाम तो विकारो की माया ही बसाये... पिता तो अपने बच्चों को मीठे महकते सुखो की नगरी में ही बिठाये... *सारे विश्व का राज्य बच्चों के कदमो में ले आये और नारायण बनाकर विश्व धरा पर शान से चमकाए... तो वही मीठी सत्य नालेज बाबा बैठ सुना रहा है...*

 

_ ➳  *परमात्म ज्ञान पाकर गुण, शक्तियों और अनुभवों के खजानों से सजकर मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा सच्चे पिता से सत्य जानकारी लेकर सोने सी निखरती जा रही हूँ... *मीठा बाबा मुझे नारायण सा सजा रहा... यह नालेज मै मन बुद्धि में ग्रहण करती जा रही हूँ... और अपने सत्य स्वरूप को जीती जा रही हूँ...*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  अन्दर कोई भी भूत है तो जांच करके उसे निकलना है*

 

_ ➳  अंतर्मुखता की गुफा में बैठ, अपने मन रूपी दर्पण में मैं अपने आपको निहार रही हूँ और विचार कर रही हूँ कि *अपने अनादि स्वरूप में मैं आत्मा कितनी पवित्र और सतोप्रधान थी और आदि स्वरूप में भी 16 कला सम्पूर्ण, सम्पूर्ण गुणवान थी किन्तु देह भान में आकर मैं आत्मा पतित और कला विहीन हो गई इसलिए कोई भी गुण मुझ आत्मा में नही रहा*। यह सोचते - सोचते कुछ क्षणों के लिए अपने अनादि और आदि स्वरूप की अति सुखदाई मधुर स्मृतियों में मैं खो जाती हूँ और मन बुद्धि से पहुँच जाती हूँ अपने अनादि स्वरूप का आनन्द लेने के लिए अपनी निराकारी दुनिया परमधाम में।

 

_ ➳  देख रही हूँ अब मैं अपने उस सम्पूर्ण सत्य स्वरूप को जो मैं आत्मा वास्तव में थी। सर्वगुणों, सर्वशक्तियों से सम्पन्न अपने इस अति चमकदार, सच्चे सोने के समान दिव्य आभा से दमकते निराकार बिंदु स्वरूप को देख मन ही मन आनन्दित हो रही हूँ। *लाल प्रकाश की एक अति खूबसूरत दुनिया मे, चारों और चमकती हुई जगमग करती मणियों के बीच, अपना दिव्य प्रकाश फैलाते हुए एक अति तेजोमय चमकते हुए सितारे के रूप मे मैं स्वयं को देख रही हूँ*। अपने इस सम्पूर्ण सतोप्रधान अनादि स्वरूप की स्मृति में स्थित होकर, अपने गुणों और शक्तियों का भरपूर आनन्द लेने के बाद अब मैं अपने आदि स्वरूप का आनन्द लेने के लिए मन बुद्धि के विमान पर बैठ अपनी सम्पूर्ण निर्विकारी सतयुगी दुनिया में पहुँच जाती हूँ।

 

_ ➳  अपने सम्पूर्ण सतोप्रधान देवताई स्वरूप में मैं स्वयं को एक अति सुंदर मनभावनी स्वर्णिम दुनिया मे देख रही हूँ। सोने के समान चमकती हुई कंचन काया, नयनों में समाई पवित्रता की एक दिव्य अलौकिक चमक और मस्तक पर एक अद्भुत रूहानी तेज से सजे अपने इस स्वरूप को देख मैं गदगद हो रही हूँ। *पवित्रता और सम्पन्नता का डबल ताज मेरी सुन्दरता में चार चांद लगा रहा है। 16 कलाओं से सजे अपने इस सम्पूर्ण पवित्र, सर्व गुणों से सम्पन्न स्वरूप को बड़े प्यार से निहारते हुए मैं अपने इस आदि स्वरूप का भरपूर आनन्द लेने के बाद फिर से अपने ब्राह्मण स्वरूप की स्मृति में स्थित हो जाती हूँ* और मन ही मन विचार करती हूँ कि अपने सम्पूर्ण सतोप्रधान स्वरूप को पुनः प्राप्त करने का ही अब मुझे तीव्र पुरुषार्थ करना है।

 

_ ➳  इसी संकल्प के साथ अब मैं अपने मन रूपी दर्पण में अपने आपको देखने का प्रयास करती हूँ और बड़ी महीनता के साथ अपनी चेकिंग करती हूँ कि कौन - कौन से भूतों की समावेशता अभी भी मेरे अन्दर है! *कहीं ऐसा तो नही कि मोटे तौर पर स्थूल विकारो रूपी भूतों पर तो मैंने जीत पा ली हो किन्तु सूक्ष्म में अभी भी देह भान में आने से कुछ सूक्ष्म भूत मेरे अंदर प्रवेश कर जाते हो! यह चेकिंग करने के लिए अब मैं स्वराज्य अधिकारी की सीट पर सेट हो जाती हूँ और आत्मा राजा बन अपनी कर्मेन्द्रियों की राजदरबार लगाती हूँ* कि कौन - कौन सी कर्मेन्द्रिय मुझे धोखा देती है और भूतों को प्रवेश होने में सहायक बनती है।

 

_ ➳  अपनी एक - एक कर्मेन्द्रिय की महीन चेकिंग करते हुए और स्वयं को मन रूपी दर्पण में देखते हुए, अपने अंदर विद्यमान भूतों को दृढ़ता से बाहर निकालने का दृढ़ संकल्प लेकर, स्वयं को गुणवान बनाने के लिए अब मैं अपने निराकार बिंदु स्वरूप में स्थित होकर गुणों के सागर अपने शिव पिता के पास उनके धाम की ओर रवाना हो जाती हूँ। *सैकेंड में साकारी और आकारी दुनिया को पार कर आत्माओ की निराकारी दुनिया में पहुँच कर, गुणों की खान अपने गुणदाता बाबा के सर्वगुणों और सर्वशक्तियों की किरणो की छत्रछाया के नीचे जाकर बैठ जाती हूँ*। अपनी सारी विशेषताएं, सारे गुण बाबा अपनी शक्तियों की किरणों के रूप में मुझ आत्मा पर लुटाकर मुझे आप समान बना देते हैं।

 

_ ➳  अपने प्यारे बाबा से सर्वगुण, सर्वशक्तियाँ लेकर मैं लौट आती हूँ वापिस साकारी दुनिया में। फिर से ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर अब मैं अपने पुरुषार्थ पर पूरा अटेंशन दे रही हूँ। *अपने प्यारे पिता की याद से विकर्मो को भस्म कर पावन बनने के साथ - साथ अपने अनादि और आदि गुणों को जीवन मे धारण कर, गुणवान बनने के लिए, अपने मन दर्पण में अपने आपको को देखते हुए अब मैं बार बार अपनी चेकिंग कर, भूतों को निकाल कर दिव्य गुणों को धारण करती जा रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं योगबल द्वारा माया की शक्त्ति पर जीत प्राप्त करने वाली सदा विजयी आत्मा   हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं व्यर्थ को समर्थ में परिवर्तन करके नंबरवन में आने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. बहुत दुःखी हैं। *बापदादा को अभी इतना दुःख देखा नहीं जाता है।* पहले तो आप शक्तियों को, देवता रूप पाण्डवों को रहम आना चाहिए। *कितना पुकार रहे हैं।* *अभी आवाज पुकार का आपके कानों में गूँजना चाहिए।* समय की पुकार का प्रोग्रा्म करते हो ना! *अभी भक्तों की पुकार भी सुनो, दुःखियों की पुकार भी सुनो।*

 

 _ ➳  2. अभी थोड़ी-थोड़ी पुकार सुनो तो सही, *बिचारे बहुत पुकार रहे हैं, जिगर से पुकार रहे हैं, तड़फ रहे हैं।* *साइंस वाले भी बहुत चिल्ला रहे हैं, कब करें, कब करें, कब करें पुकार रहे हैं।*

 

 _ ➳  3. आपका गीत है - दुःखियों पर कुछ रहम करो। *सिवाए आपके कोई रहम नहीं कर सकता।* *इसलिए अभी समय प्रमाण रहम के मास्टर सागर बनो।* स्वयं पर भी रहम, अन्य आत्माओं प्रति भी रहम। *अभी अपना यही स्वरूप लाइट हाउस बन भिन्न-भिन्न लाइटस की किरणें दो।* *सारे विश्व की अप्राप्त आत्माओं को प्राप्ति की अंचली की किरणें दो।* अच्छा।

 

✺   *ड्रिल :-  "रहम के मास्टर सागर बन भक्तों की, दुःखियों की पुकार सुनने का अनुभव"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने इष्ट देवी के स्वमान में स्थित हूँ... परमात्मा की दी हुई सर्व शक्तियों से भरपूर हूँ... *मैं आत्मा अपने पूज्य स्वरूप में हूँ...* *मैं सभी मनुष्यों की दु:ख भारी पुकार सुन रही हूँ...* भगवान के पास भी यह पुकार जा रही हैं... कितना दु:ख हैं... मैं शिव शक्ति हूँ... *मुझे सभी दु:खी आत्माओं के ऊपर बहुत रहम आ रहा हैं...* सभी दु:खी आत्मायें पुकार रही है... कि आओ हमारे दु:ख हरो... *मैं आत्मा मैं शिव की शक्ति सभी दु:खी आत्माओं को शांति की किरणें दे रही हूँ...* मैं देख रही हूँ... सभी आत्मायें शांति पा रही हैं... *सभी के दु:ख हरने वाली मैं माँ दुर्गा हूँ...* सभी की पुकार कि अब बहुत दु:ख बढ़ गया हैं... मेरे कानों में ये आवाज़ गूंज रही हैं...

 

 _ ➳   मैं आत्मा अपने रहम के *सागर पिता के समान मास्टर रहम का सागर हूँ...* मैं आत्मा देख रही हूँ कि *मेरे आगे भक्त आत्माओं की लाइन लगी हुई है...* सभी आत्मायें बहुत दु:खी है... वो मन्नते मांग रहे है... *मैं आत्मा अपने पूज्य स्वरूप से सभी की मनोकामना पूर्ण कर रही हूँ...*

 

➳ _ ➳  सभी दु:खी आत्माओं को शांति चाहिये... यही पुकार मुझ तक पहुँच रही है... *साइंस वाले भी पुकार रहे है कि जो हमने इंवेनशन की हैं...* *जो साधन नई दुनियां के स्थापन के निमित्त बने हुए हैं...* *उनका उपयोग कब करें...* क्योंकि दु:ख और हलचल बढ़ती ही जा रही हैं... सभी आत्माओं को शांति चाहिये... सभी पुकार रहे है... सभी दु:खी आत्माए तड़प रही है... वो प्रेम और शांति की प्यासी हैं... *सभी आत्मायें आश भरी नजरों से हमे देख रही हैं...* *और मैं आत्मा सबकी आश पूरी कर रही हूँ...*

 

 _ ➳   बाबा कहते बच्चे आप लोग जल्दी जल्दी संपूर्ण बनो... *ये हलचल, ये विनाश के साधन सब आपके लिए रुके हुए है...* प्रकृति भी आधा कल्प से दु:ख सहन कर चुकी हैं... *सब आपका इंतजार कर रहे हैं...* *आप बच्चों का ही यह काम हैं...*

 

 _ ➳  *मैं आत्मा मास्टर रहम का सागर हूँ...* *मैं आत्मा सभी आत्माओं को शांति का सकाश दे रही हूँ...* *मुझ मास्टर शांति के सागर के सिवाय दु:खी आत्माओं को रहम, शांति दे नही सकता...* मैं आत्मा परमपिता परमात्मा से और शक्तियां लेकर और शक्तिशाली बनती जा रही हूँ... और *मास्टर रहम का सागर बन सभी दुखी आत्माओं को रहम, प्यार की किरणें दे रही हूँ...* मैं आत्मा स्वयं पर भी रहम करते हुए और आगे बढ़ती जा रही हूँ... *मैं आत्मा सभी आत्माओ को बाप का, सुख की दुनियां का परिचय देकर सुख का रास्ता बता रही हूँ...* *मैं आत्मा लाइट हाउस हूँ...* *सभी आत्माओं को सुख, प्रेम, आनंद, शक्ति की किरणें दे रही हूँ...* सारे विश्व की आत्मायें जो भटक रही हैं... मांग रही हैं... पुकार रही हैं... उन *सभी आत्माओं को प्राप्ति की अंचली की किरणें दे रही हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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