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 11 / 09 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *बाप और बाप के कार्य में संशय तो नहीं उठाए ?*

 

➢➢ *लोकिक में युक्ति से विशाल बुधी होकर चले ?*

 

➢➢ *मनमत, परमत को समाप्त कर श्रीमत पर पद्मों की कमाई जमा की ?*

 

➢➢ *मन में सर्व के कल्याण की भावना बनी रही ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *मैजॉरिटी भक्तों की इच्छा सिर्फ एक सेकेण्ड के लिये भी लाइट देखने की है, इस इच्छा को पूर्ण करने का साधन आप बच्चों के नयन हैं।* इन नयनों द्वारा बाप के ज्योतिस्वरुप का साक्षात्कार हो। *यह नयन, नयन नहीं दिखाई दें लाइट का गोला दिखाई दे।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं सहजयोगी, कर्मयोगी आत्मा हूँ"*

 

✧  अपने को सहजयोगी अनुभव करते हो? सहज की निशानी क्या है? उसमें मेहनत नहीं होगी। वह सदा होगी, निरन्तर होगी। *मुश्किल काम होता है तो सदा नहीं कर सकते। जो सहज होगा वह स्वत: और निरन्तर चलता रहेगा। तो सहज योगी अर्थात् निरन्तर योगी। कभी साधारण, कभी योगी, ऐसे नहीं? योगी जीवन है तो जीवन सदा होता है। इसलिए योग लगाने वाले नहीं, लेकिन योगी जीवन वाले।*

 

  *ब्राह्मण जीवन है तो योग कभी नीचे-ऊपर हो ही नहीं सकता। क्योंकि सिर्फ योगी नहीं हो लेकिन कर्मयोगी हो। तो कर्म के बिना एक सेकण्ड भी रह नहीं सकते। अगर सोये भी हो तो सोने का कर्म तो कर रहे हो ना। तो जैसे कर्म के बिना रह नहीं सकते ऐसे योगी जीवन वाले योग के बिना रह नहीं सकते।* ऐसे अनुभव करते हो या योग टूटता है, फिर लगाना पड़ता है? फिर कभी लगता है, कभी टाइम लगता है-ऐसे तो नहीं है ना। योग का सहज अर्थ ही है याद। तो याद किसकी आती है? जो प्यारा लगता है। सारे दिन में देखो कि याद अगर आती है तो प्यारी चीज होती है। तो सबसे प्यारे से प्यारा कौन है? (बाबा) तो सहज और स्वत: याद आयेगा ना। अगर कहाँ भी, चाहे देह में, देह के सम्बन्ध में, पदार्थ में प्यार होगा तो बाप के बदले में वो याद आयेगा। कभी-कभी देह से प्यार हो जाता तो बॉडी कान्सेस हो जाते हो। तो चेक करना है कि सिवाय बाप के और कोई आकर्षित करने वाली वस्तु या व्यक्ति तो नहीं है?

 

  कर्मयोगी आत्मा का हर कर्म योगयुक्त, युक्तियुक्त होगा। अगर कोई भी कर्म युक्तियुक्त नहीं होता तो समझो कि योगयुक्त नहीं है। अगर साधारण कर्म होता, व्यर्थ कर्म हो जाता तो भी निरन्तर योगी नहीं कहेंगे। कर्मयोगी अर्थात् हर सेकण्ड, हर संकल्प, हर बोल सदा श्रेष्ठ है। तो सहज योगी अर्थात् कर्मयोगी और कर्मयोगी अर्थात् सहजयोगी। तो चेक करो कि सारे दिन में कोई साधारण कर्म तो नहीं होता? श्रेष्ठ हुआ? *श्रेष्ठ कर्म की निशानी होगी-स्वयं सन्तुष्ट और दूसरे भी सन्तुष्ट। ऐसे नहीं-मैं तो सन्तुष्ट हूँ, दूसरे हों या नहीं हो। योगी जीवन वाले का प्रभाव स्वत: दूसरों के ऊपर पड़ेगा। अगर कोई स्वयं से असन्तुष्ट है वा और उससे असन्तुष्ट रहते हैं तो समझना चाहिये कि योगयुक्त बनने में कोई कमी है।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  बेहद के वैराग्य वृत्ति का अर्थ ही है - वैराग्य अर्थात किनारा करना नहीं, लेकिन सर्व प्राप्ति होते हुए भी हद की आकर्षण मन को वा बुद्धि को आकर्षण में नहीं लावें। बेहद अर्थात *मैं सम्पूर्ण सम्पन्न आत्मा बाप समान सदा सर्व कर्मेन्द्रियों की राज्य अधिकारी।*

 

✧  इन सूक्ष्म शक्तियों, मन-बुद्धि-संस्कार के भी अधिकारी। *संकल्प मात्र भी अधीनता न हो।* इसको कहते हैं राजऋषि अर्थात बेहद की वैराग वृति। यह पुरानी देह वा देह की दुनिया वा व्यक्त भाव, वैभवों का भाव - इस *सब आकर्षण से सदा और सहज दूर रहने वाले।*

 

✧  जैसे साइन्स की शक्ति धरनी की आकर्षण से परे कर लेती है, ऐसे *साइलेन्स की शक्ति इन सब हद की आकर्षणों से दूर ले जाती है।* इसको कहते हैं - सम्पूर्ण सम्पन्न बाप समान स्थिति तो ऐसी स्थिति के अभ्यासी बने हो?

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ यह स्वीट साइलेन्स की अनुभूति कितनी प्यारी है। अनुभवी तो हो ना। एक सेकण्ड भी आवाज से परे हो स्वीट साइलेन्स की स्थिति में स्थित हो जाओ। तो कितना प्यारा लगता है? साइलेन्स प्यारी क्यों लगती है? क्योंकि आत्मा का स्वधर्म ही शान्त है, ओरिजनल देश भी शान्ति देश है। इसलिए आत्मा को स्वीट साइलेन्स बहुत प्यारी लगती है। एक सेकण्ड में भी आराम मिल जाता है। *कितने भी मन से, तन से थके हुए हों, लेकिन अगर एक मिनट भी स्वीट साइलेन्स में चले जाओ तो तन और मन को आराम ऐसा अनुभव होगा जैसे बहुत समय आराम करके कोई उठता है तो कितना फ्रेश होता है।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- बाप से नर से नारायण बनने की सच्ची-सच्ची नालेज सुनना"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा अपने श्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन की प्राप्तियों के नशे में बाबा के गीत गुन गुना रही हूँ... कितना ही सुन्दर भाग्य मैंने पाया है... मीठे बाबा ने मुझे कलियुगी विकारों की दलदल से निकाल संगमयुग के सुहावने पलों में संजो दिया है...* पांच विकारों के पिंजरे से निकाल उड़ता पंछी बना दिया है... मैं आत्मा अपने दिल के इन्ही जज्बातों को बयान करने उड़ चलती हूँ बाबा की कुटिया में...   

 

   *बाबा की श्रीमत पर चल उंचा भाग्य बना नर से नारायण बनने की श्रीमत देते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* "मेरे मीठे फूल बच्चे... ईश्वर पिता की श्रीमत संग खुशियो से सजे, खुबसूरत जीवन के मालिक बनो... *श्रीमत के सहारे दुखो के दलदल से बाहर निकल, सुखो की बहारो में मीठा मुस्कराओ... रावण की मत से दूर रहकर, सुखो से छलकते जीवन को गले लगाओ...* ईश्वरीय राहो में सदा के सुखी बन अपने भाग्य पर इठलाओ..."

 

_ ➳  *अपने जीवन की गाडी को श्रीमत की पटरी पर चलाते हुए खुशियों का एहसास करते मैं आत्मा कहती हूँ:-* "हाँ मेरे प्यारे बाबा... *मैं आत्मा आपके प्यार और श्रीमत को पाकर कितनी सुखी और निश्चिन्त हो गयी हूँ... विकारी जीवन से मुक्त होकर पवित्रता से छलक उठी हूँ...* ईश्वरीय सानिध्य और श्रीमत के साये में पावनता से सज कर निखर गयी हूँ..."

 

   *श्रीमत से श्रृंगार कर अपने बगीचे में खिलखिलाता फूल बनाकर मीठे बाबा कहते हैं:-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... सच्चे प्यार की बाँहों में फूलो जैसा खिल जाओ... सच्चे पिता की श्रीमत पर चलकर सतयुगी सुनहरे सुखो को दामन में सजाओ... *अब विकारो से परे रहकर, महानतम भाग्य के नशे में खो जाओ... यादो की खुमारी और ज्ञान रत्नों की खनक से जीवन सदा का खूबसुरत बनाओ..."*

 

_ ➳  *श्री श्री की श्रेष्ठ मत पर चल देवताई गुणों से सज-धज कर मनमीत बाबा से मैं आत्मा कहती हूँ:-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... मैं आत्मा इतना प्यारा सा भाग्य पाकर तो निहाल हो गयी हूँ... मनुष्य मत और विकारो से दूर रहकर, सच्चे सुखो का आलिंगन कर रही हूँ... *श्रीमत का हाथ पकड़ कर आलिशान सुखो की धरा को बाँहों में भरने को आतुर हो रही हूँ..."*

 

   *अपने प्रेम के आगोश में डुबोकर वरदानों की बारिश करते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* "मेरे सिकीलधे मीठे बच्चे... *ईश्वर पिता की मत पर चलेंगे तो विश्व का मालिक बन अनन्त सुखो में झूमेंगे... इसलिए सदा श्रीमत को थामे ईश्वर पिता की गोद में फूलो सा महकते रहो...* रावण की मत ने दुखो के भँवर में उलझाकर गहरे डुबोया है... अब श्रीमत की ऊँगली को सदा पकड़े, सदा खुशनुमा पवित्र और सुखी हो कर खुशियो में झूम जाओ..."

 

_ ➳  *बाबा की यादों के आँचल में समाकर खुशियों के आँगन में झूमते नाचते मैं आत्मा कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा ईश्वरीय मत पर चलकर असीम खुशियो और सुख का स्त्रोत बन गई हूँ... खुबसूरत देवता बन सदा की इज्जत पा रही हूँ...* ईश्वरीय राहो में मुस्कराता खुबसूरत खुशहाल जीवन पाकर... जनमो के दुःख और विकारो से मुक्त हो गयी हूँ..."

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- बाप और बाप के कार्य में कभी संशय नहीं उठाना है*"

 

_ ➳  मेरे कौड़ी तुल्य जीवन को हीरे तुल्य बनाने वाले, सर्व सम्बन्धो का मुझे सुख देकर मेरे जीवन को खुशहाल बनाने वाले मेरे दिलाराम बाबा ने मेरे जीवन मे आकर जो अनगिनत उपकार मुझ पर किये हैं, उनका तो बदला चुकाया भी नही जा सकता। *लेकिन उनके स्नेह का रिटर्न देने के लिए मैं सदा उनकी वफादार फरमानबरदार बनकर रहूँगी। अपने ऐसे सच्चे बाबा के प्रति निश्चय में मैं कभी कमी नही आने दूँगी। चाहे दुनिया कितने भी इल्जाम लगाए लेकिन अपने दिलाराम बाबा का हाथ और साथ मैं कभी नही छोडूंगी*। मन ही मन स्वयं से बातें करते हुए मैं बाबा के प्रति निश्चय में कभी भी ना हिलने की दृढ़ प्रतिज्ञा करती हूँ और अपने प्यारे ब्रह्मा बाबा के बारे में विचार करती हूँ जिन्होंने समाज का विरोध सहन करके भी सम्पूर्ण निश्चय बुद्धि बन परमात्म कर्तव्य को सम्पूर्ण समर्पण भाव से पूरा किया और भगवान के दिल रूपी तख्त पर सदा के लिए विराजमान हो गए।

 

_ ➳  ऐसे कदम - कदम पर फ़ॉलो फादर कर, ब्रह्मा बाप समान सम्पूर्ण निश्चय बुद्धि बन, परमात्म कार्य मे सदा सहयोगी बनने का संकल्प लेकर मैं अपने दिलाराम बाबा की दिल को आराम देने वाली मीठी सी प्यारी सी याद में अपने मन और बुद्धि को एकाग्र करती हूँ। *मन को शीतलता देने वाली सागर की मीठी - मीठी लहरों के समान मेरे मीठे बाबा की मीठी - मीठी याद मेरे मन और बुद्धि को भी शान्त और शीतल बना देती है और शरीर को पूरी तरह रिलैक्स कर देती है*। यह रिलैक्सेशन मेरे सारे शरीर से चेतना को धीरे - धीरे समेट कर मेरे सम्पूर्ण ध्यान को दोनों आईब्रोज के बीच भृकुटि के मध्य भाग पर केंद्रित कर देती है।  

 

_ ➳  मैं महसूस कर रही हूँ देह का भान पूरी तरह समाप्त हो गया है और स्वयं को मैं अशरीरी आत्मा देख रही हूँ। केवल एक अति सूक्ष्म चमकता हुआ शाइनिंग स्टार मुझे दिखाई दे रहा है। जिसमे से निकल रही किरणे मन को आनन्दित करती हुई चारों और फैल रही हैं। *देह भान से पूरी तरह मुक्त यह अशरीरी स्थिति मुझे मेरे सातों गुणों और अष्ट शक्तियों से सम्पन्न, ओरिजनल स्वरूप का स्पष्ट अनुभव करवा रही है। अपने स्वधर्म में मैं पूरी तरह स्थित हो कर अपने सत्य स्वरूप का भरपूर आनन्द ले रही हूँ*। दुनियावी आकर्षणों से बोझ से मुक्त स्वयं को मैं बहुत ही हल्का अनुभव कर रही हूँ और हल्की हो कर ऊपर की औऱ उड़ रही हूँ। *पाँच तत्वों से निर्मित इस भौतिक जगत को पार करके, उससे ऊपर सूक्ष्म लोक को भी पार करके मैं पहुँच गई हूँ ब्रह्मलोक में अपने दिलाराम शिव पिता के पास जिनके साथ मेरा जन्म - जन्म का अनादि सम्बन्ध है*।

 

_ ➳  अपनी अनन्त शक्तियों की किरणों रूपी बाहों को फैलाये मेरे मीठे शिव बाबा मेरे सामने खड़े हैं। बिना एक पल भी व्यर्थ गंवाये अपने प्यारे पिता के पास जाकर मैं उनकी किरणों रूपी बाहों में समा जाती हूँ। *पूरे पाँच हजार वर्ष उनसे बिछड़ कर उनसे दूर रहने की सारी पीड़ा को मैं उनकी किरणों रूपी बाहों में समाकर, अतीन्द्रिय सुख की गहन अनुभूति में खोकर, भुला रही हूँ*। प्यार के सागर अपने शिव पिता के प्यार की गहराई में समाकर मैं स्वयं को उनके निस्वार्थ प्यार से भरपूर कर रही हूँ। मेरे शिव पिता का अविनाशी प्यार उनके स्नेह की किरणों के रूप में निरन्तर मुझ पर बरस रहा है। *उनसे आ रही स्नेह की किरणों की मीठी फुहारें मुझे रोमांचित कर रही हैं और मेरे निश्चय को दृढ़ रखने का बल मुझे दे रही हैं*।

 

_ ➳  अपने दिलाराम बाबा की सर्व शक्तियों से स्वयं को भरपूर करके, उनके प्यार के खूबसूरत मीठे मधुर अति सुखद एहसास के साथ अब मैं वापिस देह और देह की दुनिया में लौट रही हूँ। बड़े से बड़ी परिस्थितियां भी अब बाबा के प्रति मेरे निश्चय को डिगा नही पाती क्योंकि मेरे बाबा का प्यार ढाल बन कर मुझमें असीम शक्ति का संचार प्रतिपल करता रहता है। *अपने सर्वशक्तिवान बाबा की सर्वशक्तियों की छत्रछाया को मैं सदा अपने ऊपर महसूस करते हुए, सम्पूर्ण निश्चयबुद्धि बन अब माया के हर पेपर को अपने पिता के सहयोग से सहज ही पार करती जा रही हूँ*। स्वयं पर, बाबा पर और ड्रामा पर सम्पूर्ण निश्चय मुझे व्यर्थ के हर संकल्प विकल्प से मुक्त रखते हुए, मेरी साइलेन्स की शक्ति को बढ़ाकर मेरी स्थिति को एकरस और अचल अडोल बनाता जा रहा है।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं मनमत परमत को समाप्त करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं श्रीमत पर पदमों की कमाई जमा करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं पदमापदम भाग्यशाली आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा मन में सर्व के कल्याण की भावना सदा बनाकर रखती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा विश्व कल्याणकारी का कर्तव्य सदा निभाती हूँ  ।*

   *मैं विश्व कल्याणकारी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  बापदादा बहुत बच्चों की रंगत देखते हैं - आज कहेंगे बाबा,ओ *मेरे बाबाओ मीठा बाबाक्या कहूंक्या नहीं कहूं ...... आप ही मेरा संसार हो,* बहुत मीठी-मीठी बातें करते हैं और दो चार घण्टे के बाद अगर कोई बात आ गई तो भूत आ जाता है। बात नहीं आती,भूत आता है। बापदादा के पास सभी का भूत वाला फोटो भी है। देखो, एक यादगार भी भूतनाथ का है। तो भूतों को भी बापदादा देखते हैं- कहाँ से आयाकैसे आया और कैसे भगा रहे हैं। यह खेल भी देखते रहते हैं। कोई तो घबराकर, दिलशिकस्त भी हो जाते हैं। फिर बापदादा को यही शुभ संकल्प आता है कि इनको कोई द्वारा *संजीवनी बूटी खिलाकर सुरजीत करें* लेकिन वे मूर्छा में इतने मस्त होते हैं जो संजीवनी बूटी को देखते ही नहीं हैं। *ऐसे नहीं करना। सारा होश नहीं गंवानाथोड़ा रखना। थोड़ा भी होश होगा ना तो बच जायेंगे।* 

    

✺   *ड्रिल :-  "संजीवनी बूटी खाकर सदा सुरजीत रहना"*

 

 _ ➳  *इस शरीर रूपी डिब्बी के अन्दर हीरे समान चमकने वाली मैं आत्मा हूँ...* मन-बुद्धि रूपी नेत्रों से स्वयं के इस स्वरूप को स्पष्ट देख और अनुभव कर रही हूँ... मैं आत्मा देख रही हूँ स्वयं को इस दुनिया के सबसे पावरफुल स्थान मधुबन पांडव भवन के हिस्ट्री हाल में बापदादा के सामने, एक संगठन में बैठा हुआ... *ये वही स्थान है जहाँ स्वयं परम सत्ता शिव बाबा ने बहुत काल तक वास्तव्य किया है...* कई महान आत्माओं ने यहाँ बहुत काल तपस्या की है जिस कारण ये स्थान प्रचंड उर्जा से परिपूर्ण है... यहाँ पहुंच कर *मैं आत्मा भी स्वयं में इस प्रचंड उर्जा का प्रवाह अनुभव कर रही हूँ...* और सहज ही अशरीरी अनुभव कर रही हूँ... *स्वयं को परमात्म-एनर्जी से भरा हुआ अनुभव कर रही हूँ...  बेहद पावरफुल स्टेज का अनुभव हो रहा है...* देह भान से ऊपर उठ देही अवस्था का स्पष्ट अनुभव कर रही हूँ... देख रही हूँ मैं आत्मा हिस्ट्री हाल में *बापदादा संदली पर बैठ संगठन में बैठी आत्माओं को दृष्टि योग करा रहे हैं...*

 

 _ ➳  जैसे ही बाबा मुझ आत्मा को दृष्टि देते हैं... मुझ आत्मा के सामने एक दृश्य इमर्ज होता है... मैं आत्मा मन-बुद्धि रूपी नेत्रों से स्पष्ट देख रही हूँ... एक बहुत बड़ी नांव, एक विशाल सागर में जा रही है... जिस नांव पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है... *"भगवान हमारा साथी है"*... और इस नाव में बहुत सारे यात्री स्वार हैं... और *स्वयं बाबा इस नैया के खिवैया बन इसे चला रहे हैं...* सभी यात्रियों के चेहरे बड़े हर्षितमुख है... सभी यात्री प्रभु महिमा के गीत गाते हुए खुशी में झूमते हुए अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ रहे हैं... इन सभी यात्रियों को देख लग रहा है मानो *बाबा ही इनका संसार है...* प्रभु महिमा से फुल ये आत्माएं हर्षा रही है और इस प्रकार ये नांव आगे बढती जा रही है... कुछ समय बीत जाने के बाद एक बड़ा अजब दृश्य सामने आता है... सागर में अचानक तूफान आता है... सागर में लहरें उठने लगती है... तेज हवाएं चलने लगती है... और नाव डोलने लगती हैं... कुछ यात्री जिनके चेहरे पर कुछ समय पहले खुशी थी... ये सीन देख उनके चेहरे पर घबराहट, चिंता, कई प्रकार के प्रश्रों के चिन्ह दिखाई दे रहे हैं... उनकी आँखों में डर और मुख से यह क्या, यह क्यों, यह कैसे शब्द निकल रहे हैं... और कुछ यात्री यह सीन देखते वैसे ही बैठे हैं जैसे पहले बैठे थे... *बाबा भी इस नांव में बैठ ये अजब दृश्य देख रहे है...*

 

 _ ➳  तभी वो दृश्य मुझ आत्मा की आँखों के सामने से गायब हो जाता है... मैं आत्मा सामने देखती हूँ... *महान ज्ञान सागर बाबा मुझ आत्मा को दृष्टि दे रहे हैं... बाबा की सागर जैसी आँखों से ज्ञान प्रकाश रूपी किरणें मुझ आत्मा के अन्दर समा रही है...* जैसे-जैसे मुझ आत्मा में ये ज्ञान प्रकाश रुपी किरणें मेरे अन्दर समा रही है, इस दृश्य का राज मुझ आत्मा के सामने स्पष्ट होता जा रहा है... मैं आत्मा विचार कर रही हूँ... *जिस जीवन रुपी नैया का खिवैया स्वयं सर्वशक्तिमान बाबा है... वह जीवन रुपी नैया में भल बातों रुपी कितने भी तूफान आएं... ये नैया कभी डूब नहीं सकती है...*

 

 ➳ _ ➳  मैं आत्मा स्वयं से प्रश्र करती हूँ, अपने लक्ष्य की तरफ चलते-चलते, जब इस जीवन रूपी नैया में बातों रुपी भूत, बातों रुपी तूफान आते हैं तो कहीं मैं आत्मा लक्ष्य से भटक इन हलचल में तो नहीं आ जाती, घबरा तो नहीं जाती, बातों रूपी भूतों को देख भूतनाथ तो नहीं बन जाती ये जानते हुए भी की *इस जीवन रुपी नैया का खिवैया स्वयं बाबा है...* देखती हूँ सामने *बाबा से शक्तिशाली किरणों की अविरल धाराएँ मुझ आत्मा पर पड़ कर मेरे अन्दर समा रही है...*

 

 _ ➳  *मैं आत्मा बेहद शक्तिशाली महसूस कर रही हूँ...* देख रही मैं आत्मा बाबा ने अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रख दिया... बाबा के हाथों से ज्ञान प्रकाश की किरणें मेरे अन्दर समा रही हैं... जैसे-जैसे ये ज्ञान प्रकाश की किरणें अन्दर समा रही है... *मैं आत्मा शक्तिशाली... अचल अडोल अवस्था का अनुभव कर रही हूँ, पहले से और ज्यादा शक्तिशाली स्वयं को अनुभव कर रही हूँ...* अब देखती हूँ अपनी इस जीवन रूपी नैया को जिसका खिवैया स्वयं बाबा है... और मैं आत्मा बाबा संग आगे बढ़ रही हूँ... और देख रही हूँ... बातों रूपी भूत, कभी एक लहर कभी दूसरी लहर के रुप में सामने आ रहे हैं... लेकिन *मैं स्मृति स्वरूप हूँ... महावीर हूँ... अब ये बातें आती है और चली जाती है... मैं आत्मा एकरस अचल-अडोल होकर बाबा संग अपने लक्ष्य की ओर अभय होकर बढ़ रही हूँ...* मैं आत्मा अन्य आत्माओं को भी जो चलते-चलते, किसी-न-किसी बातों रूपी भूतों के कारण रुक गए हैं, बेहोश होकर अपने लक्ष्य से भटक गए है... उन्हें *ज्ञान और याद रूपी संजीवनी बूटी से सुरजीत बना रही हूँ...* देख रही हूँ अब वे सभी आत्माएं अचल-अडोल एकरस होकर इस जीवन रूपी नैया में *बाबा संग अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही है... शुक्रिया लाडले बाबा शुक्रिया...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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