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 12 / 04 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *बाप का पूरा मददगारा बनने के लिए सयाना और समझदार बनकर रहे ?*

 

➢➢ *मित्र सम्बन्धी धन दौलत आदि सब कुछ भूलने का अभ्यास किया ?*

 

➢➢ *बाप की आज्ञा समझ मोहब्बत से हर बता को सहन किया ?*

 

➢➢ *सफा ख़ुशी की खुराक खा तंदरुस्त रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *इस अभ्यास को शक्तिशाली बनाने के लिये पहले अपने पर प्रयोग करके देखो। हर मास वा हर 15 दिन के लिये कोई न कोई विशेष गुण वा कोई न कोई विशेष शक्ति का स्व प्रति प्रयोग करके देखो* क्योंकि संगठन में वा सम्बन्ध-सम्पर्क में पेपर तो आते ही हैं तो पहले अपने ऊपर प्रयोग करके चेक करो, कोई भी पेपर आया तो किस गुण वा शक्ति का प्रयोग करने से कितने समय में सफलता मिली? *जब स्व के प्रति सफलता अनुभव करेंगे तो आपके दिल में औरों के प्रति प्रयोग करने का उमंग-उत्साह स्वत: ही बढ़ता जायेगा।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं बापदादा के नयनों समाई हुई आत्मा हूँ"*

 

✧  सदा बाप के नयनों में समाई हुई आत्मा स्वयं को अनुभव करते हो? नयनों में कौन समाता है? जो बहुत हल्का बिन्दु है। तो सदा हैं ही बिन्दु और बिन्दु बन बाप के नयनों में समाने वाले। *बापदादा आपके नयनों में समाये हुए हैं और आप सब बापदादा के नयनों में समाये हुए हो।*

 

✧  जब नयनों में है ही बापदादा तो और कुछ दिखाई नहीं देगा। *तो सदा इस स्मृति से डबल लाइट रहो कि मैं हूँ ही बिन्दु। बिन्दु में कोई बोझ नहीं। यह स्मृति स्वरूप सदा आगे बढ़ाता रहेगा। आँखों में बीच में देखो तो बिन्दू ही है। बिन्दु ही देखता है। बिन्दू न हो तो आँख होते भी देख नहीं सकते।*

 

तो सदा इसी स्वरूप को स्मृति में रख उड़ती कला का अनुभव करो। बापदादा बच्चों के वर्तमान और भविष्य के भाग्य को देख हर्षित हैं, वर्तमान कलम है भविष्य के तकदीर बनाने की। *वर्तमान को श्रेष्ठ बनाने का साधन है - बड़ों के ईशारों को सदा स्वीकार करते हुए स्वयं को परिवर्तन कर लेना। इसी विशेष गुण से वर्तमान और भविष्य तकदीर श्रेष्ठ बन जाती है।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧   *बापदादा एक सेकण्ड में अव्यक्त से व्यक्त में आ गया वैसे ही बच्चे भी एक सेकण्ड में व्यक्त से अव्यक्त हो सकते हैं?* जैसे जब चाहे तब मुख से बोलो, जब चाहे तब मुख से बन्द कर दें। ऐसा होता है ना। वैसे ही बुद्धी को भी जब चाहें तब चलायें, जब न चाहे तब न चलो। ऐसा अभ्यास अपना समझते हो?

 

✧  मुख का आरगन्स कुछ मोटा है, बुद्धि मुख से सूक्ष्म है। *लेकिन मुख के माफिक बुद्धी को जब चाहो तब चलाओ, जब चाहो तब न चलाओ*। ऐसा अभ्यास है? यह ड्रिल जानते हो? अगर इस बात का अभ्यास मजबूत होगा तो अपनी स्थिती भी मज़बूत बना सकेंगे। यह है अपनी स्थिती की वृद्धी की विधी।

 

✧  कई बच्चों का संकल्प है वृद्धि कैसे हो? *वृद्धि विधी से होती है। अगर विधी नहीं जानते हो तो वृद्धि भी नहीं होगी*। आज बापदादा हरेक की वृद्धि और विधी दोनों देख रहे हैं। अब बताओ क्या दृश्य देखा होगा? हरेक अपने आपसे पूछे और देखे कि वृद्धि हो रही हैं? मैजोरिटी अपनी वृद्वि से सन्तुष्ट हैं।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  सभी अव्यक्त रूप में स्थित हो ? यह तो जानते हो - अव्यक्त मिलन अव्यक्त स्थिति में स्थित रहने के अनुभवीमूर्त कहाँ तक बने हैं? *अव्यक्ति स्थिति में रहने वालों का सदा हर संकल्प, हर कार्य अलौकिक होता है। ऐसा अव्यक्ति भाव में, व्यक्ति देश और कर्तव्य में रहते हुए भी कमल पुष्प के समान न्यारा और एक बाप का सदा प्यारा रहता है। ऐसे अलौकिक अव्यक्ति स्थिति में सदा रहने वाले को कहा जाता है अल्लाह लोग।* टाइटिल तो और भी है। ऐसे को ही प्रीत बुद्धि कहा जाता है।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  बाप आयें हैं सारी दुनिया का हाहाकार मिटाकर, जयजयकार करने"*

 

_ ➳  मीठे मधुबन में मीठे बाबा के कमरे में बैठी हुई मै आत्मा... प्यारे बाबा की यादो में मन्त्र मुग्ध हूँ... और अपने मीठे भाग्य के बारे में सोच सोच कर मुस्करा रही हूँ... प्यारे बाबा का दिल से शुक्रिया कर रही हूँ... कि *प्यारे बाबा की बाँहों में आकर, मेरा जीवन कितना खुबसूरत, मीठा और प्यारा हो गया है... देह के सारे जंजालों से निकल मै आत्मा... सुखो में झूमती, गाती आनन्द में मुस्कराती अपनी सुखो की जन्नत की ओर बढ़ती ही जा रही हूँ...*

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को दुखो से मुक्त कराकर, सुखधाम का मालिक बनाते हुए कहा:-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... *मीठे बाबा की यादो से इस देह की दुनिया और विकारो के जंजाल से छूटकर... मीठे सुखो की दुनिया में मुस्कराना... रावण रुपी विकारो की सदा की विदाई कर... प्रेम, सुख, शांति की अशोक वाटिका में मौज मनाना है.*..

 

_ ➳  *मै आत्मा प्यारे बाबा से अथाह सुखो की दौलत अपनी बुद्धि झोली में भरते हुए कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... *आपकी मीठी प्यारी यादो ने मुझ आत्मा को विकारो के जंगल से निकाल, सुख और खुशियो भरे फूलो संग महकाया है*... मै आत्मा देहभान से निकल, अपने सत्य आत्मिक आनन्द के नशे में डूबकर... अशोक वाटिका में जा रही हूँ..."

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को सुंदर देवताई जीवन का राज समझाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... मीठे बाबा की यादे ही सतयुगी जीवन का आधार है... इन यादो में गहरे डूबकर जनमो के दुखो से मुक्त होकर... अनन्त सुखो के हकदार बनो... *मीठे बाबा के सारे गुण और खजाने... अपनी बाँहों में भरकर,बड़ी ही शान से, हँसते मुस्कराते, जयजयकार से सुख और आनन्द की दुनिया के मालिक बनो..*."

 

_ ➳  *मै आत्मा प्यारे बाबा से सुखो के गहरे राज समझकर कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे दुलारे बाबा... मै आत्मा आपकी यादो भरी गोद में... असीम सुखो को अपने भाग्य में भरती जा रही हूँ... *आत्मिक भाव में डूबकर, देह के आकर्षण और विकारो से परे होकर... जयघोष से देवताओ सा सुंदर जीवन, अपनी तकदीर में आपसे लिखवाती जा रही हूँ.*.."

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी यादो में विकर्माजीत बनाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे.... अपने मीठे भाग्य के नशे में डूबकर सदा के लिए आनन्दित हो जाओ... *21 जनमो का खुबसूरत देवताई भाग्य पा रहे हो, इस मीठी खुमारी से भर जाओ.*.. प्यारे बाबा की पिता, टीचर, सतगुरु रूप में पाकर विकारो के दागो से मुक्त होकर, मीठे सुखो के अधिकारी बन रहे हो...

 

_ ➳  *मै आत्मा अपने लाडले मीठे बाबा को गले लगाते हुए कहती हूँ :-* "मेरे सच्चे साथी बाबा... आपने अपनी गोद में बिठाकर, गले लगाकर, मुझ आत्मा का कितना प्यारा भाग्य जगाया है... *मै आत्मा देह के दुखो से छूटकर, अनन्त सुखो की स्वामिन् बन रही हूँ... जयजयकार से मीठे सुखो के स्वर्ग में प्रवेश कर रही हूँ..*. मीठे प्यारे बाबा को अपने दिल के उदगार समर्पित करके, मै आत्मा... स्थूल जगत में आ गयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  पुरानी दुनिया के पाई - पैसे से, बुद्धि निकाल पूरा बेगर बनना है*

 

_ ➳  अंतिम समय के एक सेकेण्ड के पेपर के बारे में एकान्त में बैठी मैं विचार कर रही हूँ कि कैसा होगा अंत समय का वो एक सेकण्ड का पेपर! *साधारण पढ़ाई में भी जब स्टूडेंट्स का सरप्राइज टेस्ट होता है तो उस टेस्ट को देख कई स्टूडेंट्स के माथे पर तो पसीना आ जाता है*। यहाँ तो कल्प - कल्प की बाजी है। एक बार असफल होना माना कल्प - कल्प के लिए असफल हो जाना।

 

_ ➳  यही सब चिंतन करते हुए अब अपने आप से मैं सवाल करती हूँ कि क्या मैं ऐसी तैयारी कर रही हूँ! *क्या मेरी ऐसी ऊँची स्थिति बन रही है जो अंत समय के एक सेकण्ड के पेपर को देख मुझे पसीने ना आयें बल्कि खुशी और सफलता के दृढ़ विश्वास के साथ मैं वो पेपर दे सकूँ और पास विद ऑनर हो सकूँ*! ऐसा तभी हो सकता है जब अंत मति सो गति का मेरा बहुत अच्छा पुरुषार्थ होगा।

 

_ ➳  अंत मति सो गति ही, अंतिम समय के एक सेकण्ड के पेपर में पास विद ऑनर का खिताब दिलाये मेरे सतयुगी ऊँच पद की प्राप्ति का आधार बनेंगी। *इसलिए अब मुझे अंत मति सो गति के पुरुषार्थ में तीव्र गति से लग जाना है। इस पुरानी दुनिया से दिल हटाकर, अपना मुख मोड़ लेना है और हर बात से उपराम होकर बुद्धि को अपने परमधाम घर मे स्थित कर देना है*। केवल अल्फ और बे इन दो शब्दों को स्मृति में रख, अपने प्यारे प्रभु की याद से विकर्मो को दग्ध करना है और विश्व की बादशाही प्राप्त करने का तीव्र पुरुषार्थ करना है।

 

_ ➳  मन ही मन स्वयं से दृढ़ प्रतिज्ञा कर, इस प्रतिज्ञा को पूरा करने और इसमें सफल होने का वरदान अपने प्यारे प्रभु से प्राप्त करने करने के लिए और उनकी याद से विकर्मो को दग्ध करने के लिए अब मैं अशरीरी स्थिति में स्वयं को स्थित करती हूँ। *हर संकल्प विकल्प से अपने मन और बुद्धि को खाली करने के लिए अपने सम्पूर्ण ध्यान को अपने स्वरूप पर मैं एकाग्र कर लेती हूँ और अपने वास्तविक शान्त स्वरूप में स्थित होकर, शान्ति के एक अति सुखद अनुभव में कुछ पल के लिए खो जाती हूँ*।

 

_ ➳  अपने स्वधर्म में स्थित हो कर शांति की गहन अनुभूति करते हुए मेरी बुद्धि का कनेक्शन स्वत: ही शांति के सागर मेरे शिव पिता के साथ जुड़ जाता है और मेरे प्यारे पिता की सर्वशक्तियों की किरणें मुझे सेकेण्ड में अपनी ओर खींच लेती हैं। *उनकी सर्वशक्तियों की किरणों रूपी बाहों को थामे मैं देह के अकालतख्त को छोड़ देह से बाहर आ जाती हूँ और ऊपर अपने शिव पिता के पास उनकी निराकारी दुनिया की ओर प्रस्थान कर जाती हूँ*।

 

_ ➳  साकार और सूक्ष्म लोक को पार कर मैं मूल वतन में प्रवेश करती हूँ और अपने पिता की किरणों रूपी बाहों के झूले से नीचे उतर कर अपने इस ब्रह्मलोक, परमधाम घर की सैर करते हुए, इस अंतहीन ब्रह्मांड में फैले शांति के वायब्रेशन्स को अपने अंदर समाकर गहन शांति की अनुभूति करते हुए अब बाबा के पास जा कर बैठ जाती हूँ। *उनकी सर्वशक्तियों की अथाह किरणे एक मीठे झरने के रूप में मुझ पर बरसने लगती हैं और मुझे सर्वशक्तियों से भरपूर करके आप समान शक्तिशाली बना देती है*। बाबा की सर्वशक्तियों को स्वयं में समाकर मैं वापिस साकार लोक में लौट आती हूँ और फिर से अपने साकार शरीर रूपी रथ पर आकर विराजमान हो जाती हूँ।

 

_ ➳  अपने ब्राह्मण जीवन में शक्तिसम्पन्न स्वरूप के साथ, अब मैं अंत मति सो गति के लिए निरन्तर सर्वशक्तिवान बाप की याद में रहने का सहज पुरुषार्थ कर रही हूँ। सर्वसम्बन्धो से बाबा को अपना बनाकर, हर सम्बन्ध का सुख बाबा से लेते हुए, देह और देह की दुनिया से मैं नष्टोमोहा बनती जा रही हूँ। *इस पुरानी दुनिया से मेरी दिल हटती जा रही है। अपना मुख इस विनाशी दुनिया से मोड़, नई आने वाली सतयुगी दुनिया की ओर करके,अंत मति सो गति द्वारा, अंतिम समय के पेपर में पास विद ऑनर होने का पुरुषार्थ मैं पूरी लग्न के साथ कर रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं बाप की आज्ञा समझ मोहब्बत से हर बात को सहन करने वाली सहनशील आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं सदा खुशी की खुराक खाकर तंदुरुस्त रहने वाली खुशनसीब आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

अव्यक्त बापदादा :-

 

_ ➳  ब्रह्मा की तपस्या का फल आप बच्चों को मिल रहा है। तपस्या का प्रभाव इस मधुबन भूमि में समाया हुआ है। साथ में बच्चे भी हैं, बच्चों की भी तपस्या है लेकिन निमित्त तो ब्रह्मा बाप कहेंगे। *जो भी मधुबन तपस्वी भूमि में आते हैं तो ब्राह्मण बच्चे भी अनुभव करते हैं कि यहाँ का वायुमण्डल, यहाँ के वायब्रेशन सहजयोगी बना देते हैं। योग लगाने की मेहनत नहीं, सहज लग जाता है और कैसी भी आत्मायें आती हैं, वह कुछ न कुछ अनुभव करके ही जाती हैं। ज्ञान को नहीं भी समझते लेकिन अलौकिक प्यार और शान्ति का अनुभव करके ही जाते हैं।* कुछ न कुछ परिवर्तन करने का संकल्प करके ही जाते हैं। यह है ब्रह्मा और ब्राह्मण बच्चों की तपस्या का प्रभाव।

 

✺  *"ड्रिल :- मधुबन तपोभूमि की स्मृति से अलौकिक प्यार और शांति का अनुभव"*

 

_ ➳  मैं आत्मा घर की छत पर बैठकर... चाँद सितारों को निहारती हुई... प्यारे बाबा का आह्वान करती हूँ... प्यारे बाबा तुरंत मुझ आत्मा के सामने आ जाते हैं... मैं आत्मा बाबा से मधुबन की सैर कराने का आग्रह करती हूँ... प्यारे बाबा अपने साथ मुझ आत्मा को *बादलों के विमान में बिठाकर मधुबन लेकर जाते हैं...*

 

_ ➳  *यहाँ की ठंडी-ठंडी हवाएं सुन्दर प्रकृति ऐसा लग रहा... मानों हमारा स्वागत कर रही हों...* मैं आत्मा बाबा का हाथ पकड मधुबन की सुन्दरता को निहार रही हूँ... बाबा मुझ आत्मा को चार धामों की यात्रा करा रहे हैं... *बाबा का कमरा, बाबा की कुटिया, हिस्ट्री हॉल, शांति स्तम्भ में... कदम रखते ही मुझ आत्मा में रूहानियत की अनुभूति हो रही है...*

 

_ ➳  *बाबा मुझ आत्मा के सामने साकार ब्रह्मा बाबा के... त्याग और तपस्यामय जीवन के दृश्यों को इमर्ज कर रहे हैं...* ब्रह्मा बाबा ने शिव बाबा के यज्ञ में अपना सबकुछ समर्पित कर दिया था... *ब्रह्मा बाबा ज्ञान, पवित्रता एवं योग के साक्षात चैतन्य मूर्त थे...* निरंतर त्याग वृत्ति, और तपस्या मूर्त बनकर हर सेकेण्ड, हर संकल्प द्वारा विश्व कल्याण करते गए...

 

_ ➳  ब्रह्मा बाबा का पारसमणि समान व्यक्तित्व लोहे को सोना बना देता था... ब्रह्मा बाबा जागती ज्योत थे... उनके सम्पर्क में आने से बुझे दीपक जग उठते थे... उनके निर्मल जीवन, दिव्यगुण सम्पन्न आचरण, मधुरता, सेवा-भाव से... भटकते हुए को जीवन पथ मिल जाता था... *ब्रह्मा बाबा ने साकार में मधुबन में रात-दिन अटल साधना... कठिन तपस्या कर... मधुबन को पावरफुल तपोभूमि के रूप में परिवर्तित कर दिया...*

 

_ ➳  *बाबा की तपस्या का प्रभाव आज भी इस मधुबन भूमि में समाया हुआ है...* इन दृश्यों को देखकर मैं आत्मा बाप के स्नेह में समा रही हूँ... ब्रह्मा बाबा की तपस्या के फल के प्रभाव से मैं आत्मा... प्रेम, सुख, आनंद, पवित्रता की अनुभूति कर रही हूँ... *मैं आत्मा बाप समान तपस्वीमूर्त बनने का दृढ़ संकल्प करती हूँ...*

 

_ ➳  यहाँ का वायुमण्डल, यहाँ के वायब्रेशन मुझ आत्मा को सहजयोगी बना रहे हैं... *बिना मेहनत के बाप के मुहब्बत में समाकर... बाप समान स्वतः निरंतर योगी बन रही हूँ...* मैं आत्मा सदा इस वरदानी भूमि की स्मृति में रहकर वरदानी मूर्त बन रही हूँ... *अब मैं आत्मा मधुबन तपोभूमि की स्मृति से ही अलोकिक प्यार और शांति का अनुभव कर रही हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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