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 12 / 07 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *मन औत्र मुख से सर्व आत्माओं को खुश करने की सेवा की ?*

 

➢➢ *बाप के राईट हैण्ड निष्काम सेवाधारी बनकर रहे ?*

 

➢➢ *सेवा के माध्यम से बेगमपुर के बादशाह बनकर रहे ?*

 

➢➢ *आत्माओं को आत्मिक शांति , मन की शांति का अनुभव करवाया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  अब सर्व ब्राह्मण बच्चों को यह स्पेशल अटेंशन रखना है कि हमें चारों ओर पावरफुल याद के वायब्रेशन फैलाने हैं, क्योंकि *आप सब ऊंचे ते ऊंचे स्थान पर रहते हो। तो जो ऊंची टावर होती है, वह सकाश देती है, उससे लाइट माइट फैलाते हैं। तो रोज कम से कम 4 घण्टे ऐसे समझो हम ऊंचे ते ऊंचे स्थान पर बैठ विश्व को लाइट और माइट दे रहा हूँ।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं परमात्म प्यारा रूहानी गुलाब हूँ"*

 

  सदा अपने को रूहानी रूहे गुलाब समझते हो? रूहानी रूहे गुलाब अर्थात् सदा रूहानियत की खुशबू से सम्पन्न आत्मा। *जो रूहे गुलाब होता है उसका काम है सदा खुशबू देना, खुशबू फैलाना। गुलाब का पुष्प जितना खुशबूदार होता है उतने कांटे भी होते हैं, लेकिन कांटों के प्रभाव में नहीं आता।* कभी कांटों के कारण गुलाब का पुष्प बिगड़ नहीं जाता है, सदा कायम रहता है। कांटे हैं लेकिन कांटों से न्यारा और सभी को प्यारा लगता है। स्वयं न्यारा है तब प्यारा लगता है।

 

  अगर खुद ही कांटों के प्रभाव में आ जाए तो उसे कोई हाथ भी नहीं लगायेगा। *तो रूहानी गुलाब की विशेषता है, किसी भी प्रकार के कांटे हों-छोटे हों या बड़े हों, हल्के हों या तेज हों-लेकिन हो सदा न्यारा और बाप का प्यारा।* प्यारा बनने के लिए क्या करना पड़े? न्यारापन प्यारा बनाता है।

 

अगर किसी भी प्रभाव में आ गये तो न बाप के प्यारे और न ब्राह्मण परिवार के। *अगर सच्चा प्यार प्राप्त करना है तो उसके लिए न्यारा बनो-सभी हद की बातों से, अपनी देह से भी न्यारा। जो अपनी देह से न्यारा बन सकता है वही सबसे न्यारा बन सकता है।* कई सोचते हैं-हमको इतना प्यार नहीं मिलता, जितना मिलना चाहिए। क्यों नहीं मिलता? क्योंकि न्यारे नहीं हैं। नहीं तो परमात्म-प्यार अखुट है, अटल है, इतना है जो सर्व को प्राप्त हो सकता है। लेकिन परमात्म-प्यार प्राप्त करने की विधि है न्यारा बनना। विधि नहीं आती तो सिद्धि भी नहीं मिलती।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *जो बहुत समय के स्नेही और सहयोगी रहते हैं उनको अंत में मदद जरूर मिलती है।* ऐसे अनुभव करेंगे जैसे स्थूल वस्त्र उतार रहे हैं। ऐसे ही शरीर छोड देंगे।

 

✧  *सारा दिन में चलते-चलते बीच-बीच में अशरीरी बनने का अभ्यास जरूर करो।* जैसे ट्रैफिक कन्ट्रोल का रिकार्ड बजता है तो वैसे वहाँ कार्य में रहते भी बीच-बीच में अपना प्रोग्राम आपे ही सेट करो तो लिंक जुटा रहेगा। इससे अभ्यास होता जाएगा।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ *संगमयुग को नवयुग भी कह सकते हैं क्योंकि सब कुछ नया हो जाता है। बातें भी नई, मिलना भी नया, सब नया।* देखेंगे तो भी आत्मा, आत्मा को देखेंगे! पहले शरीरधारी शरीर को देखते थे अब आत्मा को देखते हैं। *पहले सम्पर्क में आते थे तो कई विकारी भावना से आते थे। अभी भाई-भाई की दृष्टि से सम्पर्क में आते हो।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- रूहानी सेवा- निस्वार्थ सेवा करना"*

 

_ ➳  इन भारत की वादियों में खुशबू से भरी वायु का वेग, मधुर संगीत सा प्रतीत हो रहा हैं, मुझ आत्मा को... अपने सातो रंगों का जैसे साक्षात्कार हो गया हैं... *मेरे रूहानी पिता ने जैसे मेरे रूहानी सोशल वर्कर के संस्कार को प्रत्यक्ष कर दिया है*... सारे विकार न जाने कहाँ भस्म हो गए... और मैं आत्मा खुद को एक रूहानी सोशल वर्कर के रूप मे इस भारत भूमि पर स्वर्ग स्थापन करता देख रही हूँ... *अब मैं आत्मा अपने पिता से रूह रिहान करने सूक्ष्म वतन पहुंचती हूँ...*

 

  *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को देखकर मुस्कुराते हुए कहा:-* "मीठे सर्व गुणों से सम्पन्न प्यारे बच्चे... *शिव बाबा ने धरा पर आकर, आप बच्चों को एक एक कर बड़े प्यार से चुना हैं, ताकि तुम इस पवित्र भूमि भारत को फिर से स्वर्ग बना सको...* इस कार्य में परमपिता तुम्हारे साथ है...  तुम्हें योग्य बन, ये कार्य बड़ी परिपक्वता से करना है... मुस्कुराते हुए रूहानी सोशल वर्कर बन इस धरा पर स्वर्ग स्थापन करना है..."

 

_ ➳  *मैं आत्मा अपने मीठे बाबा के ज्ञान को दिल मे बड़े प्यार से धारण करते हुए कहती हूँ:-* "मेरे मीठे मीठे बाबा... *मै आत्मा कितनी भाग्यशाली हूँ... कि स्वयम भगवान ने मुझे चुना हैं...  सारे विकर्मो को दग्ध कर मुझे मेरे पिता ने... इस भारत खंड को, एक रूहानी सोशल वर्कर बन... स्वर्ग बनाने का कार्य सौंपा हैं*... मैं आत्मा... रूहानियत से सराबोर होकर बाबा का कार्य करने का प्लान बाबा से मिलकर बना रही हूँ..."

 

  *प्यारे बाबा मुझे रूहानियत से भरपूर कर अपने प्यार में डुबोते हुए मुझ आत्मा से कहता हैं:-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे *इस संगम युग में... इस वरदानी समय में... पिता के साथ मिलकर... दिव्यता औऱ पवित्रता से भरपूर होकर... सोशल वर्कर बनकर... इस भारत को स्वर्ग बनाने के निमित्त बनकर... तुम पूज्य बन रहे हो...* तुम इस सृष्टि का उद्धार कर रहे हो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा अपने भाग्य पर इतराती हुई कहती हूं:-* "मीठे बाबा... *मैं आत्मा तो स्वयम को भूली हुए थी, आपने संगम पर आ कर मुझे चुना*... मेरी रूहानी सोशल वर्कर की काबलियत को निखारा... मुझे दिव्यता का दान दिया, मुझ को अपनी छत्रछाया मे रखकर... इस भारत को स्वर्ग बनाने का कार्य दिया... *मेरा खोया हुआ स्वरूप लौटाया... मेरा खोया हुआ गौरव वापिस दिला कर मुझे पूज्य बना दिया..."*

 

  *मेरे मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को सोशल रूहानी सर्विस देखकर...भारत भूमि को स्वर्ग बनाने के कार्य में अपना सहयोगी बनाते हुए कहा:-* "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे... इस रूहानियत के कार्य में... *तुम ब्राह्मण बच्चे ही... इस धरा पर स्वर्ग लाने का कार्य कर सकते हो...* फिर आप ही रूहे गुलाब बन कर... दिव्यता व पवित्रता की दौलत का भरपूर भंडार बन कर, इस स्थापित किये गए स्वर्ग का राज्ये पाते हो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा बाबा के मुख से अपने लिए इतने उच्च महवाक्य सुनकर भावविभोर होकर दिल की गहराई से बाबा से कहती हूं:-* "मेरे प्यारे बाबा... मैं आत्मा कांटो से फूल बन गईं आपकी गोद मे बैठकर... *आपने जो शक्तिओ, वरदानों से मुझ आत्मा को सवारा हैं... तभी तो मैं आत्मा इस धरती पर स्वर्ग स्थापना की निमित बन पा रही हूँ*... औऱ आपसे प्राप्त सभी देवताई सुखों का अधिकार प्राप्त कर रही हूँ... मीठे बाबा से बेहद की रुहानियत, प्यार, समझ लेकर... मैं आत्मा वापिस इस कर्म क्षेत्र पर आकर... भारत को स्वर्ग बनाने के कार्य मे पूरी लगन से जुट जाती हूं..."

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- आत्माओं को मन की शांति का अनुभव करवाना*"

 

_ ➳  "विश्व की सर्व आत्मायें शांति की तलाश में भटक रही है, उन तड़पती हुई आत्माओं को शांति की अनुभूति करवाओ" अपने शिव पिता परमात्मा के इस फरमान का पालन करने के लिए, अपनी शांत स्वरूप स्थिति में स्थित हो कर मैं शांति के सागर अपने शिव पिता परमात्मा की याद में बैठ जाती हूँ। *अशरीरी स्थिति में स्थित होते ही मैं स्वयं को शान्तिधाम में शांति के सागर अपने शिव पिता परमात्मा के सन्मुख पाती हूँ जो शांति की अनन्त शक्तियों से मुझे भरपूर कर रहें हैं*। अपने शिव पिता से आ रही शांति की शक्तिशाली किरणों को स्वयं में समा कर मैं जैसे शांति का पुंज बनती जा रही हूं।

 

_ ➳  शांति की असीम शक्ति का स्टॉक अपने अंदर जमा करके अब मैं परमधाम से नीचे आ कर विश्व की उन सर्व आत्माओं को शांति की अनुभूति करवाने चल पड़ती हूँ जो पल भर की शांति की तलाश में भटक रही हैं। *सूक्ष्म लोक में पहुंच कर अपना लाइट का फ़रिशता स्वरूप धारण कर, शांति दूत बन बापदादा के साथ कम्बाइंड हो कर अब मैं विश्व ग्लोब पर आ कर बैठ जाता हूँ*। मैं देख रहा हूँ बापदादा से अविरल शांति की धाराएं निकल रही हैं जो निरन्तर मुझ फ़रिश्ते में समा रही है। शांति की इन धाराओं को मैं फ़रिशता अब विश्व ग्लोब के ऊपर प्रवाहित कर रहा हूँ। *शांति की इन धाराओं के विश्व ग्लोब पर पड़ते ही शांति के शक्तिशाली वायब्रेशन पूरे विश्व मे फैल रहें हैं*।

 

_ ➳  जैसे - जैसे ये वायब्रेशन वायुमण्डल में फैल रहें हैं वैसे - वैसे वायुमण्डल में एक दिव्यता छाने लगी है। *जैसे सुबह की ताजी हवा शरीर को सुखद अहसास करवाती है वैसे ही वायुमण्डल में फैले ये शांति के वायब्रेशन आत्माओं को एक अद्भुत सुख का अनुभव करवा रहें हैं*। उनके अशांत मन शांति का अनुभव करके तृप्त हो रहे हैं। सबके चेहरे पर एक सकून दिखाई दे रहा है। *जन्म जन्मान्तर से शांति की एक बूंद की प्यासी आत्माओं की प्यास बुझ रही है*। शांति के सागर शिव पिता से आ रही शांति की किरणों का प्रवाह और भी तीव्र होता जा रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे शांति की शक्ति की किरणों की बरसात हो रही है।

 

_ ➳  *जैसे चात्रक पक्षी अपनी प्यास बुझाने के लिए स्वांति की एक बूंद पाने की इच्छा से व्याकुल निगाहों के साथ निरन्तर आकाश की ओर देखता रहता है*। इसी प्रकार शांति की तलाश में भटकती और तड़पती हुई आत्मायें भी शांति की एक बूंद पाने की इच्छा से व्याकुल निगाहों से ऊपर देख रही है और शांति की किरणों की बरसात में नहा कर जैसे असीम शांति का अनुभव करके प्रसन्न हो रही हैं। *विश्व की सर्व आत्माओं को शांति की अनुभूति करवाकर अब मैं फ़रिशता बापदादा के साथ फिर से सूक्ष्म लोक में पहुंचता हूँ*। अपनी फ़रिशता ड्रेस को उतार कर अपने निराकारी स्वरूप में स्थित हो कर अब मैं आत्मा अपने शांत स्वरूप में स्थित हो कर वापिस साकारी दुनिया मे अपने साकारी शरीर मे प्रवेश करती हूं।

 

_ ➳  साकारी दुनिया मे आ कर अब मैं आत्मा अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो कर, निरन्तर अपने शांत स्वधर्म में रहकर शांति के वायब्रेशन चारों ओर फैला रही हूँ। सर्व आत्माओ को शांति के सागर बाप का परिचय दे कर, उन्हें भी अपने शांत स्वधर्म में स्थित हो कर शांति पाने का सहज उपाय बता रही हूं। *स्वयं को शांति के सागर अपने शिव पिता के साथ सदा कम्बाइंड अनुभव करने से मेरे सम्पर्क में आने वाली परेशान आत्मायें डेड साइलेन्स की अनुभूति करके सहज ही अपनी सर्व परेशानियों से मुक्त हो रही हैं*। "विश्व की सर्व आत्माओं को शांति का अनुभव कराना" यही मेरा कर्तव्य है। इस बात को सदा स्मृति में रख अब मैं इसी ईश्वरीय सेवा में निरन्तर लगी रहती हूं।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं फरिश्ता स्वरूप आत्मा हूँ।*

   *मैं गति - सदगति का प्रसाद बांट ने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं मास्टर गति - सदगति दाता आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा हिम्मत का एक कदम बढ़ाती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा बाप की मदद के हजार कदम बढ़ते हुए अनुभव करती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा हिम्मतवान हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

_ ➳  आज बापदादा सर्व स्नेही और मिलन की भावना वाली श्रेष्ठ आत्माओं को देख रहे हैं। बच्चों की मिलन भावना का प्रत्यक्षफल बापदादा को भी इस समय देना ही है। भक्ति की भावना का फल डायरेक्ट सम्मुख मिलन का नहीं मिलता। लेकिन एक बार परिचय अर्थात् ज्ञान के आधार पर बाप और बच्चे का सम्बन्ध जुटातो ऐसे *ज्ञान स्वरूप बच्चों को अधिकार के आधार पर शुभ भावनाज्ञान स्वरूप भावनासम्बन्ध के आधार पर मिलन भावना का फल सम्मुख बाप को देना ही पड़ता है*। तो आज ऐसे ज्ञानवान मिलन की भावना स्वरूप आत्माओं से मिलने के लिए बापदादा बच्चों के बीच आये हुए हैं।

 

_ ➳  *कई ब्राह्मण आत्मायें शक्ति स्वरूप बनमहावीर बन सदा विजयी आत्मा बनने में वा इतनी हिम्मत रखने में स्वयं को कमजोर भी समझती हैं लेकिन एक विशेषता के कारण विशेष आत्माओं की लिस्ट में आ गई हैं*। कौन-सी विशेषता?  *सिर्फ बाप अच्छा लगता है*श्रेष्ठ जीवन अच्छा लगता है। ब्राह्मण परिवार का संगठननि:स्वार्थ स्नेह- मन को आकर्षित करता है। बस यही विशेषता है कि *बाबा मिलापरिवार मिलापवित्र ठिकाना मिलाजीवन को श्रेष्ठ बनाने का सहज सहारा मिल गया*। *इसी आधार पर मिलन की भावना में स्नेह के सहारे में चलते जा रहे हैं*।

 

✺   *"ड्रिल :- स्वयं को विशेष आत्मा समझना।"*

 

_ ➳  शुभभावनाओं की शाखाओं पर झूलता, स्नेह वात्सल्य के पलनों में पलता, मैं आत्मपंछी, मन बुद्धि की सुन्दर मणियों समान चमचमाती आँखों से इस देह रूपी पिंजरें को साक्षी भाव से देख रहा हूँ... *पाँच तत्वों से बना ये देह रूपी पिंजरा... इसमे रहने का लम्बा अभ्यास और इसकी छदम् स्वर्ण मयी आभा मुझे लुभाती है, मगर दूर क्षितिज से आती और मेरे कानो में गुनगुनाती मीठी- सी मनुहार भी मुझे बुलाती है*... मिलन की भावना में स्नेह के सहारें, उमंग उत्साह के पंखो से चले आओं मेरे पास... मानों कोई पुकार रहा है... *आ जाओ लाडलों अब अव्यक्त है इशारें इन्तज़ार कर रहे है बाबा बाहें पसारे*...

 

_ ➳  सप्तरंगों की इन्द्रधनुषी आभा से झिलमिलाती नन्हीं मणि के समान मैं आत्मा, उमंग उत्साह के पंखों से उडती जा रही हूँ परमधाम की ओर... और एक रूप होकर शिव पिता की गोद में समाँ गयी हूँ... *वो स्नेहमयी गोद, उनका वो दुलार, शुभ संकल्पों की माला बनकर सिज़रें की सभी रूहानी मणियों को शुभ भावों से भरपूर कर रहा है...* मैं आत्मा स्वयं को देर तक शान्ति प्रेम पवित्रता और शक्तियों से भरपूर करती जा रही हूँ...

 

_ ➳  *बारिश के बाद जैसे- भरपूर होकर बहता कोई झरना, झरने के नीचे भरपूर होकर झलकता कोई घट*... उसी तरह मेरे उर का घट भी छलक रहा है... छलछलाई उर में मधुशाला अंग अंग डूबा प्यार में, पाकर तेरी रहमते, खाक शेष इस संसार में... *ज्ञान स्वरूप बनकर, मैं अधिकारी बन, शुभभावना और सर्वसम्बन्धों का सुख पाती हुई, स्नेह मिलन का प्रत्यक्ष फल पा रही हूँ*... मिलन का ये सुख अनिर्वचनीय है... *न बता सकूँ न छुपा सकूँ कुछ-कुछ हालत मदहोशी की, अल्फ़ाज नहीं मिलते लबों को, और बोल रही है खामोशी भी...*

 

_ ➳  मैं आत्मा भरपूर होकर फरिश्ता रूप में बापदादा के संग विश्व सेवा पर... विश्व की सभी आत्माओं को मनसा सकाश दे रही हूँ... बापदादा के हाथों में मेरे दोनो हाथ... *मैं फरिश्ता महसूस कर रही हूँ उन हाथों की वरदानी शक्तियों को, जो मुझ फरिश्ते को शक्ति स्वरूप और महावीर बनने का वरदान दे रहे हैं*... बापदादा मुझे सदा विजयी बनने का तिलक लगा रहे हैं... *उनकी उँगलियों का वो स्नेहिल सा जादुई स्पर्श मैं देर तक अपनी भृकुटी पर महसूस कर रही हूँ... ये स्पर्श मुझे पल पल विशेष आत्मा होने का गहराई से एहसास करा रहा है* और मैं याद कर रही हूँ अपनी विशेषताओं को...

 

_ ➳  सिर्फ एक बाप को पहचाना है मैंने, सिर्फ एक बाप अच्छा लगता है... और इसी एक सम्बन्ध से सब सम्बन्ध पा लिए है... *देखूँ आँचल को मैं अपने, ये सौगातो से भरपूर है, बन गयी मैं विशेष आत्मा ये तेरी रहमतों का नूर है... ये निशदिन स्नेह की बरसाते और सुख रूहानी रिश्तों का, मंजिले कदमों तले और संग मिला फरिश्तों का*...

 

_ ➳  *बाबा मिला, परिवार मिला, जीवन को श्रेष्ठ बनाने का सहारा मिल गया*... पाना था जो पा लिया के नशे में चूर मैं आत्मपंछी लौट आयी हूँ फिर से उसी देह में... *अब ये देह मेरे लिए पिंजरा नही है... ये विशेष साधन है संगम पर विशेष कमाई का*... साक्षी भाव से देखती हुई मैं विशेष आत्मा बैठ गयी हूँ पंच तत्वो के इस विशेष रथ पर... अपनी विशेष सेवाओ के निमित्त... अपनी विशेषताओं के नशे में चूर... *क्योंकि इस संगम पर मेरा अब हर पल विशेष है*... ओम शान्ति...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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