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 12 / 10 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *देह सहित जो कुछ दिखता है, उसे भूलने का पुरुषार्थ किया ?*

 

➢➢ *"अभी हम शांतिधाम सुखधाम जाते हैं" - अन्दर में यह ख़ुशी रही ?*

 

➢➢ *त्रि स्मृति स्वरुप का तिलक धारण किया ?*

 

➢➢ *प्राप्तियों को सदा सामने रख कमजोरियों को सहज समाप्त किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *कर्मातीत अर्थात् कर्म के वश होने वाला नहीं लेकिन मालिक बन, अथॉरिटी बन कर्मेन्द्रियों के सम्बन्ध में आये, विनाशी कामना से न्यारा हो कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म कराये।* आत्मा मालिक को कर्म अपने अधीन न करे लेकिन अधिकारी बन कर्म कराता रहे। *कराने वाला बन कर्म कराना-इसको कहेंगे कर्म के सम्बन्ध में आना। कर्मातीत आत्मा सम्बन्ध में आती है, बन्धन में नहीं।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं राजऋषि हूँ"*

 

  सभी राजऋषि हो ना? *राज अर्थात् अधिकारी और ऋषि अर्थात् तपस्वी। तपस्या का बल सहज परिवर्तन कराने का आधार है।*

 

  *परमात्म-लगन से स्वयं को और विश्व को सदा के लिये निर्विग्न बना सकते हैं। निर्विग्न बनना और निर्विग्न बनाना - यही सेवा करते हो ना।*

 

  *अनेक प्रकार के विघ्नों से सर्व आत्माओंको मुक्त करने वाले हो। तो जीवनमुक्ति का वरदान बाप से लेकर औरों को दिलाने वाले हो ना। निर्बन्धन अर्थात् जीवनमुक्त।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *रोज दिन समाप्त होने अपने सहयोगी कर्मचारियों को चेक करो।* अगर कोई भी कमेंद्रियों से वा कर्मचारी से बार-बार गलती होती रहती है तो गलत कार्य करते-करते संस्कार पक्के हो जाते हैं। फिर चेज करने में समय और मेहनत भी लगती है।

 

✧  उसी समय चेक किया और चेंज करने की शक्ति दी तो सदा के लिए ठीक हो जायेंगे। सिर्फ बार-बार चेक करते रहो कि यह रांग है, यह ठीक नहीं है और उसको चेंज करने की युक्ति व नॉलेज की शक्ति नहीं दी तो सिर्फ बार-बार चेक करने से भी परिवर्तन नहीं होता। इसलिए *पहले सदा कर्मन्द्रियों को नॉलेज की शक्ति से चेज करो।*

 

✧  सिर्फ यह नहीं सोचो कि यह रांग है। लेकिन राइट क्या है और राइट पर चलने की विधि स्पष्ट हो। अगर किसी को कहते रहेंगे तो *कहने से परिवर्तन नहीं होगा लेकिन कहने के साथ-साथ विधि स्पष्ट करो तो सिद्धि हो।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ चारों ओर हलचल है, प्रकृति के सभी तत्व खूब हलचल मचा रहे हैं, एक तरफ भी हलचल से मुक्त नहीं हैं, व्यक्तियों की भी हलचल है, प्रकृति की भी हलचल है, *ऐसे समय पर जब इस सृष्टि पर चारों ओर हलचल है तो आप क्या करेंगे? सेफ्टी का साधन कौन-सा है? सेकण्ड में अपने को विदेही, अशरीरी व आत्म-अभिमानी बना ली तो हलचल में अचल रह सकते हो।* इसमें टाइम तो नहीं लगेगा? क्या होगा? अभी ट्रायल करो- एक सेकण्ड में मन-बुद्धि को जहाँ चाहो वहाँ स्थित कर सकते हो? (ड्रिल) *इसको कहा जाता है साधना।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- बाप से तैरना सीख इस दुनिया से पार हो जाना"*

 

_ ➳  *मैं फ़रिश्ता मधुबन डायमंड हाल में फरिश्तों की महफिल में बैठा हूँ...* अपनी चमकीली ड्रेस में सजे हुए फ़रिश्ते पूरे हाल की शोभा बढ़ा रहे हैं... पूरा डायमंड हाल रंग-बिरंगी फूलों से, गुब्बारों से सजा हुआ है... सभी फ़रिश्ते बाबा मिलन की अनमोल घडी के इन्तजार में बाबा की यादों को दिल में संजोये हुए झूम रहे हैं... *इन्तजार की घड़ियों को खत्म करते हुए बापदादा इस महफ़िल में आकर दृष्टि देकर ज्ञान अमृत की वर्षा करते हैं...*

 

  *अपने वरदानी बोल से स्वीट होम की याद दिलाते हुए स्वीट बापदादा कहते हैं:-* मेरे मीठे फूल बच्चे... इस पुरानी पतित देह की मिटटी से निकल कर... *अपने सत्य अविनाशी वजूद में खो जाओ... यह खेल अब पूरा हो गया, घर चलने का समय नजदीक आ गया है...* तो आत्मा मणि सा सज जाओ... शरीर तो यही छूटना है,साथ जाना नही... तो इसके चंगुल से स्वयं को छुड़ाते जाओ...

 

_ ➳  *परमात्म प्यार की कश्ती में बैठकर घर जाने की तैयारी करते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... मै आत्मा आपकी मीठी यादो में देह के भान से परे होकर, अपने खुबसूरत मणि रूप की चमक को पाकर मुस्करा उठी हूँ... *देह के आकर्षण से मुक्त होकर आपका हाथ पकड़ कर, ख़ुशी से घर चलने को आमादा हूँ...*

 

  *अनंत शक्तियों के श्रृंगार से मेरे स्वरुप को निखारते हुए मीठे बाबा कहते हैं:-* मीठे प्यारे लाडले बच्चे... *परमधाम में अशरीरी थे और अशरीरी बन कर ही वापस घर को चलना है... इसलिए मीठे बाबा की यादो में खोकर, अपने सत्य स्वरूप को यादो में ताजा करो...* इस विनाशी देह के भान से मुक्त हो जाओ... और निराकारी आत्मा के नशे में खोये रहो...

 

_ ➳  *संगमयुग में प्यारे बाबा से अपनी खोई हुई जागीर पाकर मैं आत्मा कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा देह के मायाजाल से बाहर निकल... अपने खुबसूरत अविनाशी रूप को यादो में बसा रही हूँ... *प्यारे बाबा आपकी यादो में अपनी खोयी चमक पाकर... धरती के लुभावने विनाशी आकर्षणों से सहज ही आजाद हो रही हूँ...*

 

  *मन के सरोवर को स्मृतियों के कमल से खिलाते हुए मेरे बाबा कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... *धरती पर उतर कर देह की मिटटी में खेल, कितने काले और पतित हो गए.... अब वापिस घर जाना है तो... जो खुबसूरत सितारे थे उसी रंग रूप के नशे से भर जाओ...* मै ये हूँ,मै वो हूँ... इस देहभान की खुमारी से जरा बाहर निकलो, और अशरीरी आत्मा के भान में आ जाओ...

 

_ ➳  *अपनी जीवन नैय्या की पतवार बाबा के हाथों में देकर इस विषय सागर से पार होते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा आपकी यादो में घर चलने को तैयार हो रही हूँ... देह भान के सारे भ्रमो से निकल कर... सत्य की राहो में, तेजस्वी स्वरूप लिए खुशियो में झूम रही हूँ...* देह के सारे अलंकारो को त्याग कर, गुणो और शक्तियो से श्रृंगारित हो रही हूँ...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- लायक, सपूत बनना है,कपूत नही*

 

_ ➳  अपने प्यारे परम पिता परमात्मा का सपूत बच्चा बन उनकी आज्ञानुसार, उनके फरमान का पालन करते हुए, अपने मन औऱ बुद्धि को याद की उस खूबसूरत रूहानी यात्रा पर मैं ले चलती हूँ, जो यात्रा जन्म जन्मांतर के पापों को भस्म कर, मुझे भविष्य 21 जन्मों के लिए अपरमअपार सुख देने वाली है। *चित को चैन देने वाली और मन को अमन कर देने वाली याद की उस यात्रा पर चलने के लिए मैं नश्वर संसार की हर बात से किनारा कर, हर संकल्प, विकल्प से अपने मन बुद्धि को हटाकर अपने ध्यान को एकाग्र करती हूँ* और अपनी सभी कर्मेन्द्रियों से चेतनता को समेट कर, मस्तक के बिल्कुल सेन्टर पर स्थित कर लेती हूँ।

 

_ ➳  एकाग्रता की शक्ति द्वारा, अपने वास्तविक स्वरूप को ज्ञान के दिव्य चक्षु से निहारते हुए, अपने अंदर समाये गुणों और शक्तियों का आनन्द लेते हुए, याद की इस खूबसूरत यात्रा पर अब मैं धीरे - धीरे आगे बढ़ती हूँ। *एक चैतन्य सितारे के रूप में स्वयं को भृकुटि के भव्यभाल पर चमकता हुआ मैं देख रही हूँ जो अपने गुणों और शक्तियों की किरणें चारों और फैलाता हुआ धीरे - धीरे भृकुटि सिहांसन को छोड़, देह रूपी गुफा से बाहर आ रहा है*। अपनी सम्पूर्ण निराकारी स्थिति में अब मैं स्वयं को देह से बिल्कुल न्यारा देख रही हूँ। मेरा यह सतोगुणी स्वरूप मुझे गहन सुखमय स्थिति का अनुभव करवा रहा है। *देह और देह की दुनिया के हर बन्धन, हर बोझ से मुक्त एकदम लाइट स्थिति में स्थित होकर अब मैं धीरे - धीरे ऊपर आकाश की ओर जा रही हूँ*।

 

_ ➳  अपने गुणों और शक्तियों की रंग बिरंगी किरणो को चारों औऱ फैलाते हुए, याद की इस अति मनभावनी रूहानी यात्रा का आनन्द लेते हुए, मैं सारे विश्व का चक्कर लगाती हुई पहुँच जाती हूँ विशाल नीलगगन में। *सूर्य, चाँद, तारागणों के इस मांडवे को देखते - देखते इस विशाल नीलगगन को पार कर अब मैं इससे और आगे की यात्रा पर चलते हुए, सूक्ष्म लोक को पार करके, पहुँच जाती हूँ अपनी मंजिल अपने मूलवतन घर में*। साकारी और आकारी दोनों दुनियाओं से परें शान्ति की यह दुनिया जहाँ संकल्पों की भी हलचल नही, अपने इस मूलवतन घर में आकर याद की अपनी रूहानी यात्रा को मैं विराम देती हूँ और *इस यात्रा से मिलने वाले अतीन्द्रीय सुख के मधुर एहसास में डूब जाने के लिए, सुख के सागर अपने निराकार शिव पिता के पास पहुँचती हूँ*।

 

_ ➳  सर्वगुणों, सर्वशक्तियों के सागर अपने प्यारे पिता को ज्योतिपुंज के रूप में अपने सामने मैं देख रही हूँ जो अपनी किरणों रूपी बाहों को फैलाये मेरा आह्वान कर रहें हैं। *अपना सम्पूर्ण ध्यान महाज्योति अपने शिव पिता पर केंद्रित कर, मन बुद्धि रूपी नेत्रों से उनके सुन्दर स्वरूप को और उनसे निकल रहे प्रकाश की एक - एक किरण को निहारते हए मैं असीम आनन्द का अनुभव कर रही हूँ*। शक्तियों के सागर सर्वशक्तिवान मेरे शिव पिता की सर्वशक्तियों की अनन्त किरणें मुझ आत्मा के ऊपर पड़ रही हैं और मुझे गहन शीतलता की अनुभूति करवा रही हैं। *एक दिव्य अलौकिक आनन्द का अनुभव करते हुए, अतीन्द्रिय सुख के झूले में मैं झूल रही हूँ*।

 

_ ➳  मेरे प्यारे पिता की सर्वशक्तियों की शक्तिशाली किरणें मेरे अंदर प्रवाहित हो कर मुझमे असीम बल भर रहीं हैं। स्वयं को मैं बहुत ही शक्तिशाली और तृप्त अनुभव कर रही हूँ। सुख, शांति के सागर अपने शिव पिता से मिल कर, उनसे शक्तियों की खुराक ले कर, असीम ऊर्जावान बन कर अब मैं वापिस साकारी दुनिया में लौट रही हूँ। *अपने साकारी तन में विराजमान हो कर, अपने शिव पिता की याद को सदा अपने हृदय में बसा कर अब मैं सदा स्मृति स्वरूप रहती हूँ। बाबा का सपूत बच्चा बन, बाबा की आज्ञा अनुसार निरन्तर बाप को याद करने का बाबा ने जो फरमान दिया है उसे पूरा करने के लिए, कर्मयोगी बन, मन बुद्धि से याद की यात्रा पर चलने का पुरुषार्थ अब मैं निरन्तर कर रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं त्रि-स्मृति स्वरूप का तिलक धारण करने वाली आत्मा हूँ।*

✺   *मैं सम्पूर्ण विजयी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं आत्मा प्राप्तियों को सदा सामने रखती हूँ  ।*

✺   *मैं आत्मा कमजोरियों को सहज समाप्त होते अनुभव कर रही हूँ  ।*

✺   *मैं आत्मा प्राप्ति स्वरूप हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  *आज बापदादा अपने चारों ओर के बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं* क्योंकि बाप जानते हैं कि मेरा एक-एक बच्चा चाहे लास्ट पुरुषार्थी भी है फिर भी विश्व में सबसे बड़े ते बड़े भाग्यवान है क्योंकि *भाग्य विधाता बाप को जानपहचान भाग्य विधाता के डायरेक्ट बच्चे बन गये। ऐसा भाग्य सारे कल्प में किसी आत्मा का न हैन हो सकता है।* साथ-साथ सारे विश्व में सबसे सम्पत्तिवान वा धनवान और कोई हो नहीं सकता। चाहे कितना भी पदमपति हो लेकिन *आप बच्चों के खजानों से कोई की भी तुलना नहीं है क्योंकि बच्चों के हर कदम में पदमों की कमाई है। सारे दिन में हर रोज चाहे एक दो कदम भी बाप की याद में रहे वा कदम उठायातो हर कदम में पदम...* तो सारे दिन में कितने पदम जमा हुए? ऐसा कोई होगा जो एक दिन में पदमों की कमाई करे! इसलिए *बापदादा कहते हैं अगर भाग्यवान देखना हो वा रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड आत्मा देखनी हो तो बाप के बच्चों को देखो।*  

 

✺   *ड्रिल :-  "बाप के रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड बच्चे होने का अनुभव"*

 

 _ ➳  ड्रामा की रील को रिवर्स कर... मैं भाग्यशाली आत्मा पहुँच जाती हूँ... *उस घड़ी, उस पल, उस समय में जब वो मेरे जीवन में आया... उसने मुझे अपना बनाया... मेरा हाथ थामा, मुझे गले लगाया... कितनी हंसीन वो घड़ी थी जब भाग्यविधाता, वरदाता, परमसत्ता ही मेरा हो गया...* वो विश्व का मालिक जिसकी एक झलक को भक्त तरसते, हिमालय पर बैठे वो तपस्वी उसको पाने के लिए तपस्या करते... और *वो दाता भाग्यविधाता मेरा हो गया, और मैं उसकी हो गयीं...* इस अदभुत, अविस्मरणीय डायंमड़ *अनमोल यादों में खोई मैं आत्मा प्रकृति के सानिध्य में बैठी हूँ...*

 

 _ ➳  और *इन पलों को एक बार फिर से जी रही हूँ... जैसे-जैसे ये एक-एक पल, सीन सामने आ रही है... मैं आत्मा एक बार फिर उसी खुशी, नशे, उमंग का अनुभव कर रही हूँ...* इन पलों को फिर से एक बार  जीती, अपने भाग्य पर इतराती, बलखाती, मैं पदमा-पदम भाग्यशाली आत्मा मन उपवन में नृत्य कर रही हूँ... तभी अचानक *मुझ आत्मा पर रिम-झिम लाइट की बारिश होने लगती हैं... ये लाइट की बारिश मुझे परमात्म-प्यार में भीगों रही हैं... मैं आत्मा ऊपर देखती हूँ... बापदादा बादलों के बीच से मुझे देख-देख हर्षित हो रहे है... और वाह बच्चे वाह के गीत गा रहे बाहें फैलाएँ मेरा आवाहन कर रहे हैं...* बाबा को देख मैं आत्मा फूल की तरह खिल जाती हूँ... जैसे मैं आत्मा आगे की तरफ कदम बढाती हूँ... तभी एक सुनहरी सीढी मुझ आत्मा के सामने आ जाती हैं... जिस पर लिखा है... *"ईश्वरीय संतान"*

 

 _ ➳  जैसे ही मैं आत्मा इस सीढी पर पांव रखती हूँ... *मुझ आत्मा की साकारी देह परिवर्तन होकर लाइट की हो जाती है...* ... मैं आत्मा ईशवरीय संतान हूँ... इस नशे से भर गयीं हूँ... *मेरे एक एक कदम आगे बढाने से मुझे खुशी और उमंग अनुभव होता है... अपने भाग्य पर नाज़ हो रहा है... मेरे कदम चढ़ती कला की और बढ़ रहे है... मेरे कदमों में पदमों की कमाई जमा हो रही है... अपने पार्ट पर, अपने भाग्य पर मुझ आत्मा को नाज हो रहा हैं...* परमात्म-प्यार, परमात्म-पालना, परमात्म-साथ का अनुभव कर रही हूँ... *परमात्मा की सर्व शक्तियों से सम्पन्न अनुभव कर रही हूँ...* एक दूसरी सुनहरी सीढी मुझ आत्मा के सामने आ जाती हैं... जिस पर लिखा है... *"सर्व खजानों की अधिकारी आत्मा"* जैसे ही मैं आत्मा इस सीढी पर पांव रखती हूँ... यह सीढी परिवर्तन होकर एक दरवाजा बन जाती हैं... *बाबा मुझे एक चाबी देते है... जैसे ही मैं आत्मा दरवाजा खोलती हूँ... अन्दर अथाह खजाने है...*

 

 _ ➳  रंग-बिरंगे ढेर सारे खजाने है और *एक-एक खजाना करोड़ों का है अविनाशी हैं...* मैं आत्मा स्वयं को सर्व खजानों से सम्पन्न अनुभव कर रही हूँ... *मैं आत्मा अपनी धनवान, सम्पतिवान स्थिति का अनुभव कर रही हूँ...* तभी बाबा मुझ आत्मा के सामने आते है और मुझ फरिश्ते के सिर पर हाथ फेरते है... *बापदादा भी मुझ आत्मा के श्रेष्ठ भाग्य को देख हर्षित हो रहे हैं... और मुझ आत्मा के भाग्य के गीत गा रहे है...* बाबा मुझ आत्मा को गोद में उठा लेते है... और मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए... *वाह मेरे मोस्ट रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड पदमापदम भाग्यशाली बच्चे वाह...* मैं नन्हा फरिश्ता भी परमसत्ता की गोद में बैठी, अपने भाग्य को देख-देख हर्षा रही हूँ...

 

 _ ➳  *मैं आत्मा बाप की मोस्ट रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड बच्चे होने का अनुभव कर रही हूँ...* वाह क्या श्रेष्ठ भाग्य मुझ आत्मा का हैं जो भाग्यविधाता, वरदाता मुझ आत्मा का हो गया है... कितने अथाह खजानों के मालिक बाबा ने मुझे बना दिया हैं... *परमसत्ता बाबा की गोदी से मैं नन्हा फरिश्ता पूरे विश्व को देख रहा हूँ... और मुझ आत्मा को अपने भाग्य पर नाज हो रहा हैं... और बाप के मोस्ट रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड बच्चे होने के नशे से भर गया हूँ...* अब मैं फरिश्ता साकारी दुनिया की तरफ इसी नशे अनुभव के साथ लौट रहा हूँ...

 

 _ ➳  अब देख रही हूँ मैं आत्मा स्वयं को अपनी ब्राह्मण ड्रेस को धारण कर *मैं आत्मा सारे दिन में हर कर्म बाबा की याद में कर... याद रुपी कदम में पदमों की कमाई जमा कर रही हूँ...* मोस्ट रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड इस नशे के साथ मैं महान धनवान, सम्पत्तिवान आत्मा सर्व खजानों को जो मुझ आत्मा के पास है... जो *एक-एक खजाना करोड़ों का हैं... उसे स्व और अन्य आत्माओं के प्रति यूज़ कर रही हूँ... उन्हें भी धनवान और सम्पतिवान बना रही हूँ... उन्हें आपसमान बना रही हूँ...* मैं बाप की मोस्ट रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड बच्चा हर कर्म इसी नशे में, बाबा की याद में कर रही हूँ... और यही अनुभव कर रही हूँ... *तुम्हें पा के हमनें जहाँ पा लिया हैं... जमी तो जमी आसमा पा लिया है...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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