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 12 / 10 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *श्रीमत पर चलने की पूरी पूरी हिम्मत रखी ?*

 

➢➢ *आत्मोन को पावन बनने की राय दी ?*

 

➢➢ *शरीर को ईश्वरीय सेवा के लिए अमानत समझकर कार्य में लगाया ?*

 

➢➢ *दृष्टि-वृत्ति में पवित्रता को अंडरलाइन किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *कर्मातीत अर्थात् कर्म के वश होने वाला नहीं लेकिन मालिक बन, अथॉरिटी बन कर्मेन्द्रियों के सम्बन्ध में आये, विनाशी कामना से न्यारा हो कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म कराये।* आत्मा मालिक को कर्म अपने अधीन न करे लेकिन अधिकारी बन कर्म कराता रहे। *कराने वाला बन कर्म कराना-इसको कहेंगे कर्म के सम्बन्ध में आना। कर्मातीत आत्मा सम्बन्ध में आती है, बन्धन में नहीं।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं राजऋषि हूँ"*

 

  सभी राजऋषि हो ना? *राज अर्थात् अधिकारी और ऋषि अर्थात् तपस्वी। तपस्या का बल सहज परिवर्तन कराने का आधार है।*

 

  *परमात्म-लगन से स्वयं को और विश्व को सदा के लिये निर्विग्न बना सकते हैं। निर्विग्न बनना और निर्विग्न बनाना - यही सेवा करते हो ना।*

 

  *अनेक प्रकार के विघ्नों से सर्व आत्माओंको मुक्त करने वाले हो। तो जीवनमुक्ति का वरदान बाप से लेकर औरों को दिलाने वाले हो ना। निर्बन्धन अर्थात् जीवनमुक्त।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *रोज दिन समाप्त होने अपने सहयोगी कर्मचारियों को चेक करो।* अगर कोई भी कमेंद्रियों से वा कर्मचारी से बार-बार गलती होती रहती है तो गलत कार्य करते-करते संस्कार पक्के हो जाते हैं। फिर चेज करने में समय और मेहनत भी लगती है।

 

✧  उसी समय चेक किया और चेंज करने की शक्ति दी तो सदा के लिए ठीक हो जायेंगे। सिर्फ बार-बार चेक करते रहो कि यह रांग है, यह ठीक नहीं है और उसको चेंज करने की युक्ति व नॉलेज की शक्ति नहीं दी तो सिर्फ बार-बार चेक करने से भी परिवर्तन नहीं होता। इसलिए *पहले सदा कर्मन्द्रियों को नॉलेज की शक्ति से चेज करो।*

 

✧  सिर्फ यह नहीं सोचो कि यह रांग है। लेकिन राइट क्या है और राइट पर चलने की विधि स्पष्ट हो। अगर किसी को कहते रहेंगे तो *कहने से परिवर्तन नहीं होगा लेकिन कहने के साथ-साथ विधि स्पष्ट करो तो सिद्धि हो।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ चारों ओर हलचल है, प्रकृति के सभी तत्व खूब हलचल मचा रहे हैं, एक तरफ भी हलचल से मुक्त नहीं हैं, व्यक्तियों की भी हलचल है, प्रकृति की भी हलचल है, *ऐसे समय पर जब इस सृष्टि पर चारों ओर हलचल है तो आप क्या करेंगे? सेफ्टी का साधन कौन-सा है? सेकण्ड में अपने को विदेही, अशरीरी व आत्म-अभिमानी बना ली तो हलचल में अचल रह सकते हो।* इसमें टाइम तो नहीं लगेगा? क्या होगा? अभी ट्रायल करो- एक सेकण्ड में मन-बुद्धि को जहाँ चाहो वहाँ स्थित कर सकते हो? (ड्रिल) *इसको कहा जाता है साधना।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- महावीर बनना"*

 

_ ➳  मैं आत्मा *मधुबन भूमि पर शांति स्तम्भ के सामने बैठ अपने अव्यक्त फरिश्ता स्वरूप की अनुभूति कर रही हूँ... मैं स्वयं को सफेद लाइट के कार्ब में देख रही हूँ...* ऊपर से दिव्य प्रकाश फैलाते हुए अलौकिक फरिश्ता ब्रह्मा बाबा और उनके तन में शिवबाबा प्रकट होते हैं... *अव्यक्त बापदादा को अपने सामने पाकर मैं फरिश्ता नन्हा बच्चा बन उनकी गोद मे चला जाता हूँ... ब्रह्मा माँ अपने रूहानी स्नेह दुलार से मुझे निहाल कर रही हैं...*

 

  *निःस्वार्थ रूहानी स्नेह से मुझ आत्मा की जन्म जन्म की तड़पन को मिटाते हुए ब्रह्मा माँ कहते हैं:-* "मेरे प्यारे लाडले बच्चे... *सदा अपने को सोचो कि बाप के हैं और बाप के ही सदा रहेंगे... यह दृढ़ संकल्प सदा आगे बढ़ाता रहेगा...* कमजोरियों के बारे में ज्यादा नहीं सोचना है... कमजोर चिंतन करते करते... कमजोरियों के बारे में सोचते सोचते कमजोर हो जाते हैं... मेरा योग नहीं लगता... मुझसे सेवा नहीं होती... इस तरह के कमजोर संकल्प नहीं करनी है... संकल्पों में दृढ़ता धारण करनी है..."

 

_ ➳  *रूहानी स्नेह सागर की अनन्त लहरों में हिलोरे लेते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* "प्राणेश्वर मीठे बाबा... कितना सुंदर दिव्य ज्ञान आप मुझ आत्मा को दे रहे हैं... अब मैं आत्मा *अपने हर संकल्प को सूक्ष्मता से... गहराई से चेक कर रही हूँ... कि कहीं मेरे संकल्प कमजोरी वाले तो नहीं हैं... इन संकल्पों को पहचान कर फिर मैं आत्मा उनके स्थान पर दृढ़ता के संकल्प... समर्थ संकल्प धारण कर रही हूँ... समर्थ संकल्पों से मैं आत्मा शक्तिशाली बनती जा रही हूँ..."*

 

  *ज्ञान चिंगारी से मुझ आत्मा की बुझी हुई ज्योति को जगाते हुए बापदादा कहते हैं:-* "मीठे सिकीलधे बच्चे... माया कमजोर संकल्प के रूप में ही आती है... और माया के इस रूप को न समझ कर कमजोरियों का वर्णन करने... *सोचते रहने से माया के साथी बन जाते हैं... कमजोरों की साथी माया है... कभी भी कमजोर संकल्पों का बार-बार वर्णन नहीं करना और ना ही सोचना है... बार बार सोचने से भी स्वरूप बन जाते हैं...* सदा यह सोचो कि *मैं बाबा का नहीं बनूंगा तो और कौन बनेगा... कल्प कल्प मैं ही बाबा का बना था बना हूँ... और बनूंगा... यह संकल्प तंदुरुस्त और मायाजीत सहज ही बना देगा..."*

 

_ ➳  *बाबा से मिले ज्ञान प्रकाश से जगमगाती हुई मैं आत्मा कहती हूँ:-* "मेरे प्यारे बाबा... आप मुझे माया के सूक्ष्म से सूक्ष्म रूप की परख करा रहे हैं... इससे मैं सहज ही अपने संकल्पों की चेकिंग कर रही हूँ... *कमजोर संकल्पों को न मैं आत्मा सोच रही हूँ... न ही उनका वर्णन कर रही हूँ... अब मैं आत्मा सदा समर्थ संकल्पों में ही रमण कर रही हूँ..."*

 

  *ज्ञान के दिव्य चक्षु देते हुए ज्ञान सागर बाबा कहते हैं:-* "प्यारे फूल बच्चे... आप कभी भी कमजोरी के संकल्प नहीं कर सकते... *आप कमजोर नहीं हो... मास्टर सर्वशक्तिमान आत्मा हो... बापदादा के चुने हुए रत्न हो... तो कमजोर कैसे हो सकते हो... आप सदा के महावीर, सदा के बहादुर हो... बाप के साथी हो... यही श्रेष्ठ संकल्प रखना है... जब बाप साथी है तो माया अपना साथी बना नहीं सकती..."*

 

_ ➳  *बाबा के दिए हुए ज्ञान को आत्मसात करते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* "प्यारे बाबा... मैं आत्मा अब शुद्ध समर्थ और शक्तिशाली संकल्प कर रही हूँ... *मैं ही कल्प कल्प की वह भाग्यवान आत्मा हूँ... जिसे स्वयं भगवान ने चुना है... सदा बाबा की साथी सहयोगी स्नेही आत्मा हूँ... इन्हीं श्रेष्ठ संकल्पों से मैं ईश्वरीय साथ का अनुभव कर रही हूँ... और मायाजीत बनती जा रही हूँ..."*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- श्रीमत पर चलने की पूरी - पूरी हिम्मत रखनी है*"

 

_ ➳  अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप की स्मृति में बैठ *अपने परम शिक्षक शिव बाबा के मधुर महावाक्य रिवाइज करके मैं स्वयं से प्रतिज्ञा करती हूँ कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली श्रीमत जो मेरे परम शिक्षक शिव पिता परमात्मा हर रोज परमधाम से आकर मुरली के माध्यम से मुझे देते हैं। उस श्रीमत को अपने जीवन मे धारण कर मुझे नारी से लक्ष्मी बनने का पुरुषार्थ अवश्य करना है*। कभी भी श्रीमत पर चलने में गफलत वा बहाना नही करना है। मेरे शिव पिता परमात्मा की श्रेष्ठ मत ही मेरे इस ब्राह्मण जीवन की सेफ्टी का आधार है। माया के हर वार का सामना करने का अचूक मन्त्र मेरे शिव पिता की श्रीमत है।

 

_ ➳  अपने श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ बाप, टीचर, सतगुरु की श्रेष्ठ मत पर सदा चलने की स्वयं से प्रतिज्ञा करते - करते मैं उन प्राप्तियों की सुखद अनुभूति में खो जाती हूँ जो ब्राह्मण बनने के बाद मेरे प्यारे बाबा से मुझे प्राप्त हुई है। *उन प्राप्तियों की मीठी मधुर स्मृति में खोई मैं अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य की सराहना करती हूँ कि कितनी पदमापदम सौभाग्य शाली हूँ मैं आत्मा। कोटो में कोई, कोई में भी कोई हूँ मै, जिसे स्वयं भगवान ने चुना है*। बड़े बड़े महा मण्डलेशवर, साधू सन्यासी जिस भगवान की महिमा के गीत गाते हैं वो भगवान रोज मेरे सम्मुख आकर मेरी महिमा के गीत गाता है। रोज मुझे स्मृति दिलाता है कि मैं महान आत्मा हूँ। मैं विशेष आत्मा हूँ। मैं इस दुनिया की पूर्वज आत्मा हूँ। 

 

_ ➳  अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य को याद करते - करते अपने परम शिक्षक, परम सतगुरु, अपने प्यारे बाबा की मीठी - मीठी यादों में मैं खो जाती हूँ। मन जैसे बिल्कुल शांत और स्थिर हो जाता है और बुद्धि पूरी तरह से परमधाम में बाबा के सुंदर स्वरूप पर एकाग्र हो जाती है। *मन बुद्धि की तार परमधाम निवासी मेरे प्यारे मीठे बाबा के साथ जुड़ते ही ऐसा अनुभव होता है जैसे कोई चीज मुझे ऊपर की ओर अपनी तरफ खींच रही है*। मैं आत्मा सेकेण्ड में निराधार बन, देह से न्यारी हो कर ऊपर की ओर चल पड़ती हूँ। *परमात्म शक्ति रूपी मैग्नेटिक पॉवर मुझे सहज ही अपनी ओर खींचती चली जा रही है*। 

 

_ ➳  इस अति आनन्दमयी रूहानी यात्रा पर चलते हुए मैं सूर्य, चाँद, तारागणों को पार कर, फरिश्तों की दुनिया से भी पार, पहुँच जाती हूँ परमधाम, उस परम ज्योति पुंज के सामने जिनकी अनन्त शक्तियों की मैग्नेटिक पावर मुझे अपनी ओर खींच रही थी। *वो परम ज्योति पुंज मेरे प्यारे परम पिता परमात्मा मेरे सम्मुख हैं। उनसे निकल रही अनन्त शक्तियां मुझे दिव्य अलौकिक आनन्द से भरपूर कर रही हैं*। उनकी किरणों की शीतल छाया मुझे गहन शांति का अनुभव करवा रही हैं। 

 

_ ➳  सर्वशक्तिवान अपने शिव पिता की सर्वशक्तियों रूपी किरणों की छत्रछाया के नीचे बैठ, स्वयं को उनकी सर्वशक्तियों से भरपूर कर, शक्तिशाली बन मैं परमधाम से नीचे आ जाती हूँ और फरिश्तों की जगमग करती हुई दुनिया में प्रवेश कर जाती हूँ। *यहां आकर अपनी सफेद चमकीली फरिश्ता ड्रेस को मैं धारण करती हूँ और अव्यक्त बापदादा के पास पहुँचती हूँ। बड़े प्यार से बापदादा अपनी बाहों को फैला कर मुझे अपनी बाहों में भर लेते हैं और असीम स्नेह लुटाने के बाद अपनी शक्तिशाली दृष्टि से मुझे निहारते हुए अपना समस्त बल मेरे अंदर भरकर मुझे  शक्तिशाली बना देते हैं और वरदानो से मुझे भरपूर कर देते हैं*।

 

_ ➳  परमात्म शक्तियों से भरपूर होकर, वरदानो से अपनी झोली भरकर प्यारे बापदादा की श्रेष्ठ मत पर चल, अपने ब्राह्मण जीवन को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए, मैं अपने निराकारी स्वरूप में वापिस लौटती हूँ और साकार सृष्टि पर आकर अपने ब्राह्मण तन में प्रवेश कर जाती हूँ। *परमात्म शक्तियों का बल मुझे मेरे इस ब्राह्मण जीवन में हर कदम श्रीमत पर चलने की प्रेरणा दे रहा है। श्रीमत पर चलने में कभी भी गफलत वा बहाना ना करने की प्रतिज्ञा कर, अपने प्यारे बाबा की याद में रह, उनकी मदद से अब मैं इस प्रतिज्ञा को दृढ़ता के साथ पूरा करते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ बना रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं शरीर को ईश्वरीय सेवा के लिए अमानत समझकर कार्य मे लगाने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं नष्टोमोहा आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सदा दृष्टि-वृत्ति में भी पवित्रता को अण्डरलाइन करती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा वानप्रस्थ स्थिति में जाती हूँ  ।*

   *मैं परम पवित्र आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  *आज बापदादा अपने चारों ओर के बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं* क्योंकि बाप जानते हैं कि मेरा एक-एक बच्चा चाहे लास्ट पुरुषार्थी भी है फिर भी विश्व में सबसे बड़े ते बड़े भाग्यवान है क्योंकि *भाग्य विधाता बाप को जानपहचान भाग्य विधाता के डायरेक्ट बच्चे बन गये। ऐसा भाग्य सारे कल्प में किसी आत्मा का न हैन हो सकता है।* साथ-साथ सारे विश्व में सबसे सम्पत्तिवान वा धनवान और कोई हो नहीं सकता। चाहे कितना भी पदमपति हो लेकिन *आप बच्चों के खजानों से कोई की भी तुलना नहीं है क्योंकि बच्चों के हर कदम में पदमों की कमाई है। सारे दिन में हर रोज चाहे एक दो कदम भी बाप की याद में रहे वा कदम उठायातो हर कदम में पदम...* तो सारे दिन में कितने पदम जमा हुए? ऐसा कोई होगा जो एक दिन में पदमों की कमाई करे! इसलिए *बापदादा कहते हैं अगर भाग्यवान देखना हो वा रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड आत्मा देखनी हो तो बाप के बच्चों को देखो।*  

 

✺   *ड्रिल :-  "बाप के रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड बच्चे होने का अनुभव"*

 

 _ ➳  ड्रामा की रील को रिवर्स कर... मैं भाग्यशाली आत्मा पहुँच जाती हूँ... *उस घड़ी, उस पल, उस समय में जब वो मेरे जीवन में आया... उसने मुझे अपना बनाया... मेरा हाथ थामा, मुझे गले लगाया... कितनी हंसीन वो घड़ी थी जब भाग्यविधाता, वरदाता, परमसत्ता ही मेरा हो गया...* वो विश्व का मालिक जिसकी एक झलक को भक्त तरसते, हिमालय पर बैठे वो तपस्वी उसको पाने के लिए तपस्या करते... और *वो दाता भाग्यविधाता मेरा हो गया, और मैं उसकी हो गयीं...* इस अदभुत, अविस्मरणीय डायंमड़ *अनमोल यादों में खोई मैं आत्मा प्रकृति के सानिध्य में बैठी हूँ...*

 

 _ ➳  और *इन पलों को एक बार फिर से जी रही हूँ... जैसे-जैसे ये एक-एक पल, सीन सामने आ रही है... मैं आत्मा एक बार फिर उसी खुशी, नशे, उमंग का अनुभव कर रही हूँ...* इन पलों को फिर से एक बार  जीती, अपने भाग्य पर इतराती, बलखाती, मैं पदमा-पदम भाग्यशाली आत्मा मन उपवन में नृत्य कर रही हूँ... तभी अचानक *मुझ आत्मा पर रिम-झिम लाइट की बारिश होने लगती हैं... ये लाइट की बारिश मुझे परमात्म-प्यार में भीगों रही हैं... मैं आत्मा ऊपर देखती हूँ... बापदादा बादलों के बीच से मुझे देख-देख हर्षित हो रहे है... और वाह बच्चे वाह के गीत गा रहे बाहें फैलाएँ मेरा आवाहन कर रहे हैं...* बाबा को देख मैं आत्मा फूल की तरह खिल जाती हूँ... जैसे मैं आत्मा आगे की तरफ कदम बढाती हूँ... तभी एक सुनहरी सीढी मुझ आत्मा के सामने आ जाती हैं... जिस पर लिखा है... *"ईश्वरीय संतान"*

 

 _ ➳  जैसे ही मैं आत्मा इस सीढी पर पांव रखती हूँ... *मुझ आत्मा की साकारी देह परिवर्तन होकर लाइट की हो जाती है...* ... मैं आत्मा ईशवरीय संतान हूँ... इस नशे से भर गयीं हूँ... *मेरे एक एक कदम आगे बढाने से मुझे खुशी और उमंग अनुभव होता है... अपने भाग्य पर नाज़ हो रहा है... मेरे कदम चढ़ती कला की और बढ़ रहे है... मेरे कदमों में पदमों की कमाई जमा हो रही है... अपने पार्ट पर, अपने भाग्य पर मुझ आत्मा को नाज हो रहा हैं...* परमात्म-प्यार, परमात्म-पालना, परमात्म-साथ का अनुभव कर रही हूँ... *परमात्मा की सर्व शक्तियों से सम्पन्न अनुभव कर रही हूँ...* एक दूसरी सुनहरी सीढी मुझ आत्मा के सामने आ जाती हैं... जिस पर लिखा है... *"सर्व खजानों की अधिकारी आत्मा"* जैसे ही मैं आत्मा इस सीढी पर पांव रखती हूँ... यह सीढी परिवर्तन होकर एक दरवाजा बन जाती हैं... *बाबा मुझे एक चाबी देते है... जैसे ही मैं आत्मा दरवाजा खोलती हूँ... अन्दर अथाह खजाने है...*

 

 _ ➳  रंग-बिरंगे ढेर सारे खजाने है और *एक-एक खजाना करोड़ों का है अविनाशी हैं...* मैं आत्मा स्वयं को सर्व खजानों से सम्पन्न अनुभव कर रही हूँ... *मैं आत्मा अपनी धनवान, सम्पतिवान स्थिति का अनुभव कर रही हूँ...* तभी बाबा मुझ आत्मा के सामने आते है और मुझ फरिश्ते के सिर पर हाथ फेरते है... *बापदादा भी मुझ आत्मा के श्रेष्ठ भाग्य को देख हर्षित हो रहे हैं... और मुझ आत्मा के भाग्य के गीत गा रहे है...* बाबा मुझ आत्मा को गोद में उठा लेते है... और मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए... *वाह मेरे मोस्ट रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड पदमापदम भाग्यशाली बच्चे वाह...* मैं नन्हा फरिश्ता भी परमसत्ता की गोद में बैठी, अपने भाग्य को देख-देख हर्षा रही हूँ...

 

 _ ➳  *मैं आत्मा बाप की मोस्ट रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड बच्चे होने का अनुभव कर रही हूँ...* वाह क्या श्रेष्ठ भाग्य मुझ आत्मा का हैं जो भाग्यविधाता, वरदाता मुझ आत्मा का हो गया है... कितने अथाह खजानों के मालिक बाबा ने मुझे बना दिया हैं... *परमसत्ता बाबा की गोदी से मैं नन्हा फरिश्ता पूरे विश्व को देख रहा हूँ... और मुझ आत्मा को अपने भाग्य पर नाज हो रहा हैं... और बाप के मोस्ट रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड बच्चे होने के नशे से भर गया हूँ...* अब मैं फरिश्ता साकारी दुनिया की तरफ इसी नशे अनुभव के साथ लौट रहा हूँ...

 

 _ ➳  अब देख रही हूँ मैं आत्मा स्वयं को अपनी ब्राह्मण ड्रेस को धारण कर *मैं आत्मा सारे दिन में हर कर्म बाबा की याद में कर... याद रुपी कदम में पदमों की कमाई जमा कर रही हूँ...* मोस्ट रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड इस नशे के साथ मैं महान धनवान, सम्पत्तिवान आत्मा सर्व खजानों को जो मुझ आत्मा के पास है... जो *एक-एक खजाना करोड़ों का हैं... उसे स्व और अन्य आत्माओं के प्रति यूज़ कर रही हूँ... उन्हें भी धनवान और सम्पतिवान बना रही हूँ... उन्हें आपसमान बना रही हूँ...* मैं बाप की मोस्ट रिचेस्ट इन दी वर्ल्ड बच्चा हर कर्म इसी नशे में, बाबा की याद में कर रही हूँ... और यही अनुभव कर रही हूँ... *तुम्हें पा के हमनें जहाँ पा लिया हैं... जमी तो जमी आसमा पा लिया है...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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