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 12 / 12 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ "अंत समय में एक बाप की याद की सिवाए और कोई भी विचार न आये" - यह अभ्यास किया ?

 

➢➢ कोई भी प्रशन आदि पूछने में अपना टाइम वेस्ट तो नहीं किया ?

 

➢➢ ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ साथी बन रात को दिन बनाने की सेवा की ?

 

➢➢ सेवा का चांस प्राप्त कर दुआओं से झोली भरी ?

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  ✰ अव्यक्त पालना का रिटर्न

         ❂ तपस्वी जीवन

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〰✧  अमृतवेले उठने से लेकर हर कर्म, हर संकल्प और हर वाणी में रेग्युलर बनो। एक भी बोल ऐसा न निकले जो व्यर्थ हो। जैसे बड़े आदमियों के बोलने के शब्द फिक्स होते हैं ऐसे आपके बोल फिक्स हो। एकस्ट्रा नहीं बोलना है।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?

 

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अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए

             ❂ श्रेष्ठ स्वमान

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   "मैं श्रेष्ठ खजानों से भरपूर आत्मा हूँ"

 

  सदा श्रेष्ठ खजानों से भरपूर आत्मा हूँ - ऐसा अनुभव करते हो? जो अखुट खजानों से भरपूर होगा, उसको रुहानी नशा कितना होगा!

 

  सदा सर्व खजानों से भरपूर हूँ - इस रुहानी खुशी से आगे बढ़ते चलो।

 

  सर्व खजाने व की आत्माओंको जगाए साथी बना देंगे। तो भरपूर और शक्तिशाली आत्मा बन आगे बढ़ते चलो।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?

 

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         रूहानी ड्रिल प्रति

अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं

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✧  अहंकार आने का दरवाज एक शब्द है, वो कौन-सा? 'मैं'। तो यह अभ्यास करो - जब भी मैं शब्द आता है तो ओरीजिनल स्वरूप सामने लाओ - 'मैं कौन? मैं आत्मा या फलानी-फलानी? औरों को ज्ञान देते हो ना - 'मैं' शब्द ही उडाने वाला है, मैं शब्द ही नीचे ले आने वाला है। 'मैं' कहने से ओरीजिनल निराकार स्वरूप याद आ जाये। ये नेचुरल हो जाये।

 

✧  तो पहला पाठ सहज है ना तो इसी को चेक करो, आदत डालो - 'मैं' सोचा और निराकारी स्वरूप स्मृति में आ जाये। कितनी बार 'मैं' शब्द कहते हो! मैंने यह कहा, मैं यह करूंगी, मैं यह सोचती हूँ. अनेक बार 'मैं' शब्द यूज करते हो। ते सहज विधि यह है निराकारी वा आकारी बनने की - जब भी मैं शब्द यूज करो, फौरन अपना निराकारी ओरीजिनल स्वरूप सामने आये।

 

✧  ये मुश्किल है वा सहज है? फिर तो लक्ष्य और लक्षण समान हुआ ही पडा है। सिर्फ यह युक्ति - निरहंकारी बनने का सहज साधन अपनाकर देखो। यह देहभान का मैं समाप्त हो जाये। क्योंकि मैं शब्द ही देह-अहंकार में लाता है और अगर मैं निराकारी आत्मा स्वरूप हूँ - यह स्मृति में लायेंगे तो यह मैं शब्द ही देहभान से परे ले जायेगा। ठीक है ना।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?

 

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         ❂ अशरीरी स्थिति प्रति

अव्यक्त बापदादा के इशारे

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〰✧  जैसे बापदादा व्यक्त में आते भी हैं तो भी अव्यक्त रूप के अव्यक्त देश की अव्यक्ति प्रवाह में रहते हैं। वही बच्चों को अनुभव कराने लिए आते हैं। ऐसे आप सभी भी अपने अव्यक्त स्थिति का अनुभव औरों को कराओ। जब अव्यक्त स्थिति की स्टेज सम्पूर्ण होगी तब ही अपने राज्य में साथ चलना होगा। एक आँख में अव्यक्त सम्पूर्ण स्थिति दूसरी आँख में राज्य पद। ऐसे ही स्पष्ट देखने में आयेंगे जैसे साकार रूप में दिखाई पड़ता है।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺ "ड्रिल :- टीचर बन मन वशीकरण मन्त्र सबको सुनाना"

➳ _ ➳ बरस रही है बाबा हम पर आपकी मेहरबानियाँ... प्यार में भीगे अफसाने है कहती है जिन्दगियां... ये गीत गुनगाते हुए मैं आत्मा मधुबन घर पांडव भवन बाबा की कुटिया में प्रवेश करती हूँ... और मन ही मन बाबा से मीठी-मीठी रूहरिहान करने लगती हूँ... बाबा को अपने दिल का हाल सुनाने लगती हूँ... वाह मेरे मीठे बाबा कितना सुदंर हीरे तुल्य आपने मेरे जीवन को बना दिया है... कितनी खुशियों से जीवन को भर दिया है... जब से जीवन में आप आए हो बाबा जीवन में खुशियों की बहार आ गयी है... जीवन जीने की कला आपने सिखा दी... आपने मुझे अपना बना कर गले से लगाया मुस्कुराना सिखाया बाबा... बेसमझ से समझदार बनाया... वाह मीठे बाबा वाह... मुझ आत्मा की बातों को बड़े ध्यान से और बड़े प्यार से सुनते हुए बाबा अपनी स्नेह भरी दृष्टि मुझ आत्मा को रिस्पॉन्स दे रहे है...

❉ मीठे बाबा मुझ आत्मा में विश्व कल्याण की भावना भरते हुए कहते है :- "मीठे प्यारे फूल बच्चे मेरे... ईश्वर पिता को पाकर... जिन सच्ची खुशियो को, मीठे सुखो को, आपने पाया है... इन मीठी खुशियो से हर दिल आँगन को भर आओ... मनमनाभव का मन्त्र जो तुम बच्चों को परम सतगुरु से मिला है... उसे सबको सुनाओ..."

➳ _ ➳ मै आत्मा परम सतगुरु की अमूल्य शिक्षाओ को अपने दिल में गहरे समाकर कहती हूँ :- "मीठे प्यारे बाबा मेरे... मै आत्मा आपके मीठे प्यार में... असीम सुखो की अनुभूतियों से भरकर... यह अनुभव की दौलत, हर दिल पर, दिल खोलकर लुटा रही हूँ... ये मनमनाभव का प्यारा सच्चा मन्त्र सबको सुना रही हूँ... सबको आप समान खुशियो की अधिकारी बना रही हूँ..."

❉ लाडले बाबा मुझ को मनमनाभव के मन्त्र का स्वरूप बनाकर कहते है :- "मीठे प्यारे लाडले बच्चे मेरे... सतगुरु पिता से जो आपने मनमनाभव मन्त्र को जाना है... जरा गहरे से सबको सही मायनों में इसका अर्थ समझाओ... मनमनाभव के मन्त्र की कमाल सबको सुनाओ... आत्मिक भाव में और सुखदायी पिता की याद में हर पल, समय सहज ही सफल हो जायेगा खुशियों से सदाकाल के लिए जीवन भर जायेगा..."

➳ _ ➳ मै आत्मा मनमनाभव के मन्त्र का स्वरुप बनकर कहती हूँ :- "मीठे दुलारे ओ बाबा मेरे... मै आत्मा आपकी मीठी पालना में पलकर... असीम सुखो की मालिक बनकर... दिलो जान से मुस्कुरा रही हूँ... सही मायनों में मनमनाभव का अर्थ सबको समझा रही हूँ... मनमनाभव की कमाल अपने प्रैक्टिकल जीवन से दिखला रही हूँ... अपने प्यारे बाबा से हर बिछड़े दिल को मिलाकर... खुशियों के गीत गा रही हूँ..."

❉ मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को मनमनाभव के मन्त्र की खुराक खिलाते हुए कहते है :- "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे मेरे... ईश्वर पिता को पाकर अब हर साँस को ईश्वरीय यादो से पिरो दो... यह यादे ही सच्चे सुखो का आधार है... हर आत्मा को भी मनमनाभव की खुराक खिलाकर सदाकाल के लिए स्वस्थ बनाओ... ईश्वरीय यादो भरे, इन सच्चे अहसासो को... ख़ुशी को हर दिल तक पहुचाओं... मनमनाभव के मन्त्र का स्वरूप बनकर सबको आप समान स्वरूप बनाओ..."

➳ _ ➳ मै आत्मा मनमनाभव मन्त्र की खुराक खाकर कहती हूँ :- "मीठे मीठे ओ बाबा मेरे... मुझ आत्मा के जीवन में आकर, आपने मुझ आत्मा को विश्व कल्याण की सुंदर भावना से भर दिया है... मै आत्मा हर पल सबको सुख से सजा रही हूँ... सबको मनमनाभव की खुराक खिला सदाकाल के लिए स्वस्थ रहने का राज सुना रही हूँ... सबके जीवन में आनन्द और खुशियो के फूल खिला रही हूँ... स्वयं मनमनाभव का स्वरूप बनकर आप समान मनमनाभव का स्वरूप बना रही हूँ... सबके जीवन को सुख-शांति भरी मुस्कान से सजा रही हूँ...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺ "ड्रिल :- अंत समय में एक बाप की याद के सिवाय और कोई भी विचार ना आए यह अभ्यास अभी से करना है"

➳ _ ➳ कितना वन्डरफुल है यह सृष्टि रूपी ड्रामा! और इस वैरायटी ड्रामा में पार्ट बजाने वाले वैरायटी पार्टधारी! एकांत में बैठ सृष्टि के इस बेहद ड्रामा पर चिंतन करते हुए मैं अपने जीवन के बारे में विचार करती हूँ कि इस बेहद ड्रामा में पार्ट बजाते हुए पूरे 63 जन्म देहधारियों से प्रीत करके सिवाय दुख और अशान्ति के और कुछ भी हासिल नही हो पाया। उस झूठी प्रीत की स्मृति मन में देह और देह की झूठी दुनिया के प्रति वैराग्य की भावना उतपन्न कर रही है। किन्तु इस हद की वैराग्य वृति को बेहद में बदलने के लिए अब मुझे अपने दिल की प्रीत केवल एक दिलाराम बाबा से लगानी है ताकि अन्त समय सिवाय दिलाराम बाप के ओर कोई भी याद ना आये। अब यही पुरुषार्थ मुझे अपने इस अंतिम जन्म में करना है।

➳ _ ➳ मन ही मन स्वयं से यह दृढ़ प्रतिज्ञा करते हुए अपने दिलाराम बाबा की दिल को सुकून देने वाली मीठी याद में मैं खो जाती हूँ। अपने दिलाराम बाबा को याद करते ही मन बरबस ही उनकी ओर खिंचने लगता है और जैसे ही मेरे दिल की आवाज मेरे दिलाराम बाबा तक पहुँचती है मेरे बाबा अपने प्यार का प्रतिफल अपनी सर्वशक्तियों की मीठी - मीठी फुहारों के रूप में परमधाम से सीधे मुझ आत्मा पर बरसाने लगते हैं। बारिश की रिमझिम फुहारों की तरह मेरे दिलाराम बाबा के प्रेम की मीठी फुहारें परमधाम से मेरे ऊपर पड़ रही हैं और मेरे मन को आनन्दित कर रही हैं। एक दिव्य अलौकिक मस्ती से मैं सरोबार होती जा रही हूँ।

➳ _ ➳ मेरे मीठे दिलाराम बाबा का प्रेम एक जादुई शक्ति बन कर, मुझे उनके समान अशरीरी बना कर अब अपनी ओर खींच रहा है। मुझे केवल अपना चमकता हुआ, अपने दिलाराम बाबा के प्रेम में खोया हुआ जगमग करता दिव्य ज्योतिर्मय स्वरूप ही दिखाई दे रहा है। अपने बाबा के प्रेम की डोर से बंधी मैं जगमग करती ज्योति अब भृकुटि के अकालतख्त को छोड़ देह से बाहर आ जाती हूँ और परमात्म प्यार के झूले में झूलती हुई ऊपर आकाश की ओर चल पड़ती हूँ।

➳ _ ➳ परमात्म प्यार का यह सुन्दर, सुहावना झूला मुझे सेकण्ड में समस्त तारामण्डल, सौरमण्डल और सूक्ष्म वतन को पार करवाकर उस अनन्त ज्योति के देश मे ले आता है जहाँ पहुंचते ही शांति की लहरें मुझ आत्मा को छूने लगती है और मुझे गहन शांति के गहरे अनुभव में ले जाती हैं। एक ऐसी अद्भुत शान्ति जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नही की थी उस अथाह शान्ति का अनुभव यहाँ पहुंच कर मैं आत्मा कर रही हूँ। अथाह शान्ति का यह अनुभव मुझे शांति के सागर मेरे शिव पिता के समीप ले कर जा रहा है।

➳ _ ➳ अब मैं धीरे - धीरे अपने दिलाराम बाबा के पास जा रही हूँ। उनके अति समीप पहुँच कर मैं जैसे ही उन्हें छूती हूँ शक्तियों का एक तेज करेन्ट मुझ आत्मा में प्रवाहित होने लगता है जो मुझे असीम आनन्द देने के साथ - साथ असीम शक्ति से भर देता है। अपने बाबा के साथ टच रह कर स्वयं को पूरी तरह भरपूर करके मैं आत्मा वापिस सृष्टि ड्रामा पर अपना पार्ट बजाने के लिए अब परमधाम से नीचे आ जाती हूँ।

➳ _ ➳ अपने दिलाराम बाबा के सच्चे निस्वार्थ प्यार के अनुभव को अपने मन रूपी दर्पण पर अंकित कर उस प्यार की गहराई में जब चाहे खोकर, उस सच्ची प्रीत को अपने ब्राह्मण जीवन का आधार बना कर अब मैं अपने दिलाराम बाबा के प्यार के झूले में सदैव झूलती रहती हूँ। देह और देह की दुनिया मे रहते हुए, देह के सम्बन्धों से ममत्व निकाल, सर्व सम्बन्धों का सुख अपने दिलाराम बाबा से लेते हुए, दिल की सच्ची प्रीत बाबा से रखते हुए अब मैं ऐसा पुरुषार्थ कर रही हूँ जो अन्त समय सिवाए दिल को आराम देने वाले मेरे दिलाराम बाबा के ओर कोई भी मुझे याद ना आये।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   मैं आत्मा ज्ञान सूर्य, ज्ञान चन्द्रमा की साथी हूँ।
✺   मैं रात को दिन बनाने वाली आत्मा हूँ।
✺   मैं आत्मा रूहानी ज्ञान सितारा हूँ।

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺ मैं आत्मा सदैव सेवाओं का चांस लेती हूँ ।
✺ मैं आत्मा सदा दुआओं से अपनी झोली भरती हूँ ।
✺ मैं सेवाधारी आत्मा हूँ ।

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. बापदादा देखते हैं कि बच्चों के लिए अभी समय की क्या पुकार हैआप भी समझते हो ना कि समय की क्या पुकार है?अपने लिए सोचो। सेवा प्रति तो भाषण कियेकर रहे हैं ना! लेकिन अपने लिए, अपने से ही पूछो कि हमारे लिए समय की क्या पुकार है? वर्तमान समय की क्या पुकार हैतो बापदादा देख रहे थे कि अभी के समय अनुसार हर समयहर बच्चे को 'दातापनकी स्मृति और बढ़ानी है। चाहे स्व-उन्नति के प्रति दाता-पन का भावचाहे सर्व के प्रति स्नेह इमर्ज रूप में दिखाई दे। कोई कैसा भी होक्या भी होमुझे देना है।

 

 _ ➳  तो दाता सदा ही बेहद की वृत्ति वाला होगाहद नहीं और दाता सदा सम्पन्न, भरपूर होगा। दाता सदा ही क्षमा का मास्टर सागर होगा। इस कारण जो हद के अपने संस्कार या दूसरों के संस्कार वो इमर्ज नहीं होंगेमर्ज होंगे। मुझे देना है। कोई देनहीं दे लेकिन मुझे दाता बनना है।  किसी भी संस्कार के वश परवश आत्मा होउस आत्मा को मुझे सहयोग देना है। तो किसी का भी हद का संस्कार आपको प्रभावित नहीं करेगा। कोई मान देकोई नहीं देवह नहीं दे लेकिन मुझे देना है। ऐसे दातापन अभी इमर्ज चाहिए। मन में भावना तो है लेकिन... लेकिन नहीं आवे। मुझे करना ही है।

 

 _ ➳  कोई ऐसी चलन वा बोल जो आपके काम का नहीं हैअच्छा नहीं लगता हैउसे लो ही नहीं। बुरी चीज ली जाती है क्यामन में धारण करना अर्थात् लेना। दिमाग तक भी नहीं। दिमाग में भी बात आ गई नावह भी नहीं। जब है ही बुरी चीज, अच्छी है नहीं तो दिमाग और दिल में लो नहीं यानी धारण नहीं करो। और ही लेने के बजाए शुभ भावना, शुभ कामनादाता बन दो। लो नहींक्योंकि अभी समय के अनुसार अगर दिल और दिमाग खाली नहीं होगा तो निरन्तर सेवाधारी नहीं बन सकेंगे।

 

 _ ➳  दिल या दिमाग जब किसी भी बातों में बिजी हो गया तो सेवा क्या करेंगे? फिर जैसे लौकिक में कोई 8 घण्टाकोई 10 घण्टा वर्क करते हैंऐसे यहाँ भी हो जायेगा। 8 घण्टे के सेवाधारी, 6 घण्टे के सेवाधारी। निरन्तर सेवाधारी नहीं बन सकेंगे। चाहे मन्सा सेवा करोचाहे वाणी सेचाहे कर्म अर्थात् संबंधसम्पर्क से। हर सेकण्ड दाता अर्थात् सेवाधारी। दिमाग को खाली रखने से बाप की सेवा के साथी बन सकेंगे। दिल को सदा साफ रखने से निरन्तर बाप की सेवा के साथी बन सकते हैं।

 

 _ ➳  2.  तो क्या सुनासमय की पुकार है - दाता बनो। आवश्यकता है बहुत। सारे विश्व के आत्माओं की पुकार है - हे हमारे ईष्ट...ईष्ट तो हो ना! किसी न किसी रूप में सर्व आत्माओं के लिए ईष्ट हो। तो अभी सभी आत्माओं की पुकार है - हे इष्ट देव-देवियां परिवर्तन करो।

 

✺   ड्रिल :-  "समय की पुकार - दातापन की वृत्ति रखना"

 

 _ ➳  मैं आत्मा फर्श से न्यारी होती हुई एक बाबा से रिश्ता रख फरिश्ता बन उड़ चलती हूँ फरिश्तों की दुनिया में... जहाँ बापदादा मेरे ही इन्तजार में बैठे हुए हैं... चारों ओर सफेद चमकीले प्रकाश की आभा बिखेरते हुए बापदादा अपने कोमल हाथों से मुझे अपनी गोदी में बिठाते हैं... बाबा अपनी मीठी दृष्टि देते हुए अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रखते हैं...  

 

 _ ➳  बाबा की मीठी दृष्टि मुझ आत्मा में मिठास घोल रही है... मैं आत्मा भी बाप समान मीठी बन रही हूँ... मुझ आत्मा के पुराने स्वभाव संस्कार बाहर निकल रहे हैं... बाबा के हाथों से दिव्य अलौकिक गुण व शक्तियाँ निकलकर मुझ फरिश्ते में प्रवाहित हो रहे हैं... वर्तमान समय को देखते हुए... बाप दादा मुझ आत्मा के अन्दर दातापन की स्मृति को बढ़ा रहे हैं... दातापन की स्मृति से मुझ आत्मा के अंदर सर्व के प्रति स्नेह इमर्ज रूप में दिखाई दे रहा है... और स्व उन्नति के प्रति भी दातापन का भाव दिखाई दे रहा है...

 

 _ ➳  क्षमा के सागर बाबा मुझ आत्मा को दाता बना क्षमा के मास्टर सागर बना रहें हैं... इस दातापन के भाव मुझ आत्मा के अन्दर भरपूर होने से... मैं आत्मा किसी भी संस्कार के वश परवश आत्मा हो... उसे सहयोग देती हूँ...  मीठे बाबा नेे मेरे दातापन को इमर्ज कर दिया है... जिससे कोई भी आत्मा मुझे मान दे या न दे पर मुझे तो उसे देना ही है... ऐसा भाव मुझ आत्मा के अंदर जागृत हो गया है... 

 

 _ ➳  मैं आत्मा अब निरंतर सेवाधारी बन सदैव दातापन की स्मृति में रह सर्व आत्माओं के प्रति शुभ भावना शुभकामना रखती हूँ... अब मैं आत्मा सदैव हर आत्मा की झोली अपनी दुआओं से भरपूर करके, अपने सम्बन्ध संपर्क में आने वाली हर आत्मा के जीवन को निर्विघ्न बनाने में अपना भरपूर सहयोग देती हूँ... अब मैं आत्मा किसी की भी चलन या बोल को अपने चित पर नहीं रखती... और सदैव क्षमा भाव धारण करते हुए हर आत्मा को क्षमा का दान देते हुए तीव्रता से अपने अलौकिक जीवन में आगे बढ़ते जा रही हूँ...

 

 _ ➳  अब मैं आत्मा दिल को सदा साफ रख और दिमाग को खाली रख... अपने प्यारे मीठे बाबा की सेवा की साथी बन गई हूँ... मैं आत्मा मनसा-वाचा-कर्मणा और संबंध संपर्क से हर सेकेंड दाता अर्थात सेवाधारी बनती हूँ... मैं इष्टदेवी सारे विश्व की आत्माओं की पुकार सुन समय प्रमाण अब परिवर्तन के कार्य में लग जाती हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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