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 13 / 01 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *आसुरी अवगुणों को निकाला ?*

 

➢➢ *विचार सागर मंथन रख उल्लास में रहे ?*

 

➢➢ *स्नेह के रीटर्न में समानता का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *पुरुषार्थी जीवन में सदा संतुष्ट और खुश रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *कोई भी कार्य करते व पार्ट बजाते सागर समान ऊपर से भले हलचल दिखाई दे लेकिन अन्दर की स्थिति नथिंग न्यु की हो।* रचयिता और रचना के अन्त को जानने वाले त्रिकालदर्शी आराम से शान्ति की स्टेज पर ऐसे स्थित हो जाएं जो कोई भी कर्मेन्द्रियों की हलचल आन्तरिक स्टेज को हिला न सके।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"अनेक बार के विजयी हैं - इस स्मृति द्वारा विघ्न विनाशक बनने वाली निश्चयबुद्धि आत्मा हूँ"*

 

  सदा अपने को बाप के समीप आत्मा समझते हो? समीप आत्माओंकी निशानी क्या होती है? सदा बाप के समान। *जो बाप के गुण वह बच्चों के गुण। जो बाप का कर्तव्य वह सदा बच्चों का कर्तव्य। हर संकल्प और कर्म में बाप समान, इसको कहते हैं समीप आत्मा। जो समीप स्थिति वाले हैं वे सदा विघ्न विनाशक होंगे।*

 

✧  *किसी भी प्रकार के विघ्न के वशीभूत नहीं होंगे। अगर विघ्न के वशीभूत हो गये तो विघ्न-विनाशक नहीं कह सकते। किसी भी प्रकार के विघ्न को पार करने वाला इसको कहा जाता है विघ्न विनाशक।* तो कभी किसी भी प्रकार के विघ्न को देखकर घबराते तो नहीं हो? क्या और कैसे का क्वेश्चन तो नहीं उठता है?

 

  *अनेक बार के विजयी हैं...यह स्मृति रहे तो विघ्न विनाशक हो जायेंगे। अनेक बार की हुई बात रिपीट कर रहे हो, ऐसे सहजयोगी। इस निश्चय में रहने वाली विघ्न विनाशक आत्मां स्वत: और सहजयोगी होंगी।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  बापदादा ने पहले भी कहा है कि जैसे अभी यह पक्का हो गया है कि मैं ब्रह्माकुमारी/ब्रह्माकुमार हूँ चलते-फिरते - सोचते - हम ब्रह्माकुमारी हैं, हम ब्रह्माकुमार ब्राह्मण आत्मा हैं। ऐसे *अभी यह नेचुरल स्मृति और नेचर बनाओ कि मैं फरिश्ता हूँ।*

 

✧  *अमृतवेले उठते ही यह पक्का करो कि मैं फरिश्ता परमात्म श्रीमत पर नीचे इस साकार तन में आया हूँ,* सभी को सन्देश देने के लिए वा श्रेष्ठ कर्म करने के लिए कार्य पूरा हुआ और अपने शान्ति की स्थिति में स्थित हो जाओ।

 

✧  ऊँची स्थिति में

चले जाओ। एक-दो को भी फरिश्ते स्वरूप में देखो। *आपकी वृत्ति दूसरे को भी धीरे-धीरे फरिश्ता बनादेगी। आपकी दृष्टि दूसरे पर भी प्रभाव डालेगी।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *साइलेंस पॉवर प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  जो कहा वह किया। संकल्प और कर्म में अन्तर नहीं होता। क्योंकि *संकल्प भी जीवन का अनमोल खजाना है।* जैसे स्थुल खजाने को व्यर्थ नहीं करते हो वैसे शिव शक्तियाँ जिनकी मूर्त में दोनों गुण प्रत्यक्ष रूप में हैं उन्हों का एक भी संकल्प व्यर्थ नहीं होता। *एक एक संकल्प से स्वयं का और सर्व का कल्याण होता है।* एक सेकेण्ड में, एक संकल्प से भी कल्याण कर सकते हैं। इसलिए शक्तियों को कल्याणी कहते हैं।

〰✧  जैसे बापदादा कल्याणकारी है वैसे बच्चों का भी कल्याणकारी नाम प्रसिद्ध है। अब तो इतना हिसाब देखना पड़े। *हमारे कितने सेकेण्ड में, कितने संकल्प सफल हुए, कितने असफल हुए।* जैसे आजकल साइंस ने बहुत उन्नति की है जो एक स्थान पर बैठे हुए अपने अखों द्वारा एक सेकेण्ड में विनाश कर सकते हैं। तो क्या शक्तियों का यह साइलेन्स बल कहाँ भी बैठे एक सेकेण्ड में काम नहीं कर सकता?

〰✧  कहाँ जाने की अथवा उन्हों को आने की भी आवश्यकता नहीं। *अपने शुद्ध संकल्पों द्वारा आत्माओं को खींचकर सामने लायेगा।* जाकर मेहनत करने की आवश्यकता नहीं। अब ऐसे भी प्रभाव देखेंगे। *जैसे साकार में कहते रहते थे कि ऐसा तीर लगाओ जो तीर सहित आप के सामने पक्षी आ जाये।* अब यह होगा अपनी विलपावर से।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- मुख से सदैव ज्ञान रत्न निकालना"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा सागर के किनारे बैठ सागर में उठते हुए लहरों को निहार रही हूँ... ये लहरें कभी हवाओं की बाँहों को थाम आसमान को छूने की कोशिश कर रही हैं... कभी चट्टानों से टकराकर खेल रही हैं... मेरे जीवन की उथल पुथल की लहरों को समाप्त करने वाले ज्ञान सागर बाबा का मैं आत्मा आह्वान करती हूँ...* तुरंत ज्ञान सागर बाबा सागर के किनारे मुस्कुराते हुए खड़े हो जाते हैं... मैं आत्मा होली हंस बन ज्ञान रत्नों को चुगने के लिए ज्ञान सागर में डुबकी लगा देती हूँ...  

 

   *विचार सागर मन्थन कर अथाह खजानों से संपन्न बनने के लिए ज्ञान धन का दान करने की युक्ति बतलाते हुए ज्ञान सागर प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे फूल बच्चे... ईश्वरीय खजानो को बाँहों में भरकर मुस्कराने वाले महान भाग्यवान धनवान् हो... *यह दौलत जितना लुटाओगे अमीरी को अपने इर्दगिर्द सदा ही छलकता पाओगे... इस ज्ञान धन की खान की झलक हर दिल को दिखाओ... सबके जीवन में यह ईश्वरीय बहार खिला आओ...*

 

_ ➳  *मैं होलीहंस आत्मा ज्ञान सागर की गहराई में गोते लगाकर मोतियों को चुगते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... *मै आत्मा ईश्वर पिता की गोद में आकर मालामाल हो गई हूँ... कभी दीन हीन और गरीब सी आत्मा आज दौलतमंद हो गई हूँ...* और आप समान सबको धनवान् भाग्यवान बनाकर सुखो के फूल बिखेर रही हूँ...

 

   *लहराता प्यार का सागर मीठा बाबा प्यार की लहरों से जीवन को मुस्कराहट देते हुए कहते हैं:-* मीठे प्यारे लाडले बच्चे... यह ज्ञान धन ही जादूगरी है जो सुखो की खान में बदल जायेगी... दिलो ही दिल में इसे गिनते रहो... और अथाह खजानो को हर दिल पर लुटाओ... *इस अविनाशी ज्ञान धन से सबके जीवन में खुशियो को खिलाओ... सबके दिल आँगन में आनन्द की फिजां महका आओ...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा ज्ञान नदी बनकर पूरे विश्व को ज्ञान जल की धाराओं से भिगोते हुए कहती हूँ:-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा...*मै आत्मा ईश्वरीय ज्ञान धन से सबकी झोली भरकर अथाह सुखो का मालिक बना रही हूँ... मीठे बाबा से पाये अमूल्य खजाने का मालिक हर दिल को बना रही हूँ...* मा ज्ञान सूर्य होकर औरो को भी प्रकाशित कर रही हूँ...

 

   *ज्ञान के जादूगर मेरे बाबा ज्ञान की छड़ी मुझ आत्मा को देते हुए कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... वरदानी संगम पर ईश्वर पिता से पाये अमूल्य रत्नों को... विचार सागर मन्थन से गहराई से दिल में समाओ... और यह ज्ञान की महक सबके दिलो तक पहुँचाओ... *यह ज्ञान दान महान पुण्य सा प्रतिफल देकर मालामाल करेगा...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा ज्ञान की छड़ी घुमाकर सबके जीवन से काँटों को निकालकर ज्ञान के फूलों से सजाते हुए कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा आपकी फूलो सी गोद में पाये रत्नों को दान कर सबके भाग्य को जगा रही हूँ... फूलो भरी राह पर हर दिल को चला रही हूँ...* जनमो के देह समझ थके पाँवो को सुख भरी मरहम लगा रही हूँ...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- अपने हर्षितमुख मुखड़े से बाप का नाम बाला करना है*"

 

_ ➳  आप समान अति मीठा बनाने वाले, मेरे अति मीठे शिव बाबा की मीठी याद मेरे अंदर एक ऐसी मिठास घोल देती है जिसमे विकारों की कड़वाहट घुलने लगती है। *अपने ऐसे अति मीठे बाबा की मीठी याद में बैठी मैं जैसे ही उनका आह्वान करती हूँ परमधाम से सीधे अपने ऊपर गिरती उनकी सर्वशक्तियों रूपी किरणों के मीठे झरने के नीचे स्वयं को अनुभव करती हूँ*। सातों गुणों की रंग बिरंगी किरणों का यह मधुर झरना मेरे तन - मन को शीतलता प्रदान कर रहा है। शीतलता की इसी गहन अनुभूति के बीच मैं अनुभव करती हूँ कि मुझ आत्मा को अपनी शीतल किरणों से शीतल बनाने वाले मेरे फर्स्टक्लास मीठे बाबा जैसे परमधाम से नीचे मेरे पास आ रहें हैं।

 

_ ➳  उनकी उपस्थिति से उनकी समीपता का एहसास मुझे स्पष्ट अनुभव होने लगा है। अपने सिर के बिल्कुल ऊपर मुझे उनकी छत्रछाया की अनुभूति हो रही है। मेरे पूरे कमरे में जैसे शीतलता की मीठी लहर दौड़ रही है। पूरे घर मे मेरे मीठे शिव बाबा के शक्तिशाली वायब्रेशन फैल रहें हैं। *एक अति मीठी सुखदाई स्थिति में मैं सहज ही स्थित होती जा रही हूँ। यह स्थिति मुझे देह और देह के झूठे भान से मुक्त कर, लाइट माइट स्वरूप का अनुभव करवा रही है*। धीरे - धीरे मैं इस साकारी देह के बंधन से स्वयं को मुक्त कर अपने लाइट के फ़रिशता स्वरूप को धारण कर रही हूँ।

 

_ ➳  मेरा यह लाइट का फ़रिशता स्वरूप मुझे धरती के आकर्षण से मुक्त कर, ऊपर की ओर ले जा रहा है। मैं स्वयं को धरती से ऊपर उड़ता हुआ अनुभव कर रहा हूँ। छत को पार करते हुए अब मैं खुले आकाश के नीचे पूरी दुनिया मे विचरण कर रहा हूँ। धीरे - धीरे अब मैं आकाश को भी पार करता हुआ लाइट की सूक्ष्म आकारी फरिश्तो की दुनिया मे प्रवेश कर रहा हूँ। इस अति सुन्दर फरिश्तो की दुनिया मे विचरण करता हुआ अब मैं स्वय को अव्यक्त ब्रह्मा बाप के सामने देख रहा हूँ। *फर्स्टक्लास मीठा और रॉयल बन बाप का नाम बाला करने वाले अपने प्यारे ब्रह्मा बाप के सामने बैठ मैं मन ही मन प्रतिज्ञा करता हूँ कि मुझे भी ब्रह्मा बाप समान फर्स्टक्लास मीठा और रॉयल बन बाप का नाम अवश्य बाला करना है*।

 

_ ➳  इस प्रतिज्ञा को पूरा करने का बल मुझमें भरने के लिए अब परमधाम से मेरे अति मीठे शिव बाबा फरिश्तों की इस दुनिया मे प्रवेश करते हैं और आ कर ब्रह्मा बाबा की भृकुटि में विराजमान हो जाते हैं। *बाप दादा अपने वरदानी हस्तों से अब मुझे विजयी भव का वरदान देते हुए, अपनी सर्वशक्तियाँ मेरे अंदर प्रवाहित करते हुए मुझ आत्मा में बल भर रहें हैं ताकि कदम - कदम पर फॉलो फादर कर, अपने शिव बाबा का नाम मैं बाला कर सकूँ*। बापदादा की शक्तिशाली दृष्टि से मेरे पुराने आसुरी स्वभाव संस्कार जल कर भस्म हो रहें हैं और उसके स्थान पर फर्स्टक्लास मीठा और बहुत - बहुत रॉयल बनने के संस्कार इमर्ज हो रहें हैं।

 

_ ➳  आसुरी संस्कारों का त्याग कर इन दैवी संस्कारों को ही अब मुझे अपने जीवन में धारण करने का पुरुषार्थ करना है, इसी दृढ़ प्रतिज्ञा के साथ अपने लाइट माइट स्वरूप को अपने ब्राह्मण स्वरूप में मर्ज करके अब मैं अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो जाती हूँ। अपने ब्राह्मण जीवन के नियमो और मर्यादाओं पर चलते हुए अब मैं हर कर्म में ब्रह्मा बाप को फॉलो कर रही हूँ। *अपने मीठे शिव बाबा की श्रीमत पर कदम - कदम चलते हुए अब मैं आसुरी अवगुणों का त्याग करती जा रही हूँ। मेरे मुख से अब किसी भी आत्मा को दुख देने वाले कड़वे बोल नही निकलते। बाप समान सबको सुख देने वाले मीठे बोल ही अपने मुख से बोलते हुए अब मैं सबके जीवन को खुशियों की मिठास से भर रही हूँ*।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं स्नेह के रिटर्न् में समानता का अनुभव करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं सर्वशक्ति सम्पन्न आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा पुरुषार्थी जीवन में सदा संतुष्ट और खुश रहती हूँ  ।*

   *मैं खुशनसीब आत्मा हूँ  ।*

   *मैं सदा संतुष्ट मणि हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  *सदा समय अनुसार अपने मनबुद्धि को स्वप्न तक भी सदा शुभ और शुद्ध रखो।* कई बच्चे रूहरूहान में कहते हैं - बापदादा तो शक्तियाँ देता है लेकिन समय पर शक्ति यूज नहीं होती। *बापदादा विशेष सब बच्चों के साथी होने के सम्बन्ध से विशेष ऐसे समय पर एक्सट्रा मदद देते हैंक्यों? बाप जिम्मेवार है बच्चों को सम्पन्न बनाए साथ ले जाने के लिए।* तो बाप अपनी जिम्मेवारी विशेष ऐसे समय पर निभाते हैं लेकिन कभी-कभी बच्चों के मन की कैचिंग पावर का स्विच आफ होता हैतो बाप क्या करेंबाप तो फिर भी स्विच आन करने कीखोलने की कोशिश करते हैं लेकिन टाइम लग जाता है। इसलिए जब फिर स्विच आन हो जाता है तो कहते हैं - करना तो नहीं चाहिए थालेकिन हो गया। *तो सदा अपने मन की कैचिंग पावर,जिसको आप कहते हैं टचिंगउस टचिंग व कैचिंग पावर का स्विच आन रखो।* माया कोशिश करती है आफ करने की, सेकण्ड में आफ करके चली जाती है, इसीलिए जैसा समय नाजुक होता जायेगा, अभी होना है और। डरते तो नहीं हो ना?   

 

✺   *ड्रिल :-  "मन की कैचिंग पावर का स्विच आन रख परिस्थितियों के समय बापदादा की एक्सट्रा मदद का अनुभव"*

 

 _ ➳  *देख रहा हूँ मैं नन्हा फरिशता स्वयं को बापदादा के साथ हाथों में हाथ लिए सांयकाल में छत पर घूमते हुए...* मैं नन्हा फरिशता बड़े ही फलक से अपने बापदादा के साथ चल रहा हूँ... तभी बाबा मुझ फरिशते को गोद में उठा लेते है... और सामने झूले पर बिठा देते है... *और मुझ फरिशते को झूला झूला रहे है... तभी मुझ आत्मा के मन में एक प्रश्न रूपी लहर आती है... बापदादा तो शक्तियाँ देता है लेकिन समय पर शक्ति यूज नहीं होती...* बाबा बिना कहें ही मुझ आत्मा के मन की बात समझ जाते है... और मुझे सामने देखने का इशारा करते है...

 

 _ ➳  मैं फरिशता सामने देखता हूँ... *कुछ यात्री एक पहाड़ी रास्ते से अपनी मंजिल की ओर प्रभु महिमा के गीत गाते खुशी से आगे बढ़ रहे है...* सबके हाथ में एक मशीन है... जिस पर लिखा है *मन-बुद्धि... और इसी मशीन पर एक बटन है जिसमें लिखा है अॉन, अॉफ* रास्ता बहुत संकरा है... सभी यात्री आगे बढ़ रहे है... रास्ते के साथ-साथ ही कई तरह के रंग-बिरंगे खेल चल रहें है... कई तरह की चमकीली दिखने वाली वस्तुएँ रास्ते के साईड में है... *कुछ यात्री बीच-बीच में चलते हुए इन साइड में चल रहे सीन को देखने में व्यस्त हो जाती है साथ में चल रहे रंग-बिरंगे खेलों को देखने में लग जाते है...*

 

 _ ➳  कुछ यात्री आगे बढ़ रहे है... *इसी बीच कुछ यात्री जो यहाँ वहाँ की साइड सीन में व्यस्त हो जाते है... उनके हाथ में जो मशीन है उसके बटन अॉफ हो जाता है...* और अचानक जिस रास्ते पर सभी यात्री चल रहे है उसमें ऊपर से बड़े-बड़े पत्थर आना शुरू हो जाते है... मैं आत्मा बड़े ध्यान से इस दृश्य को देख रही हूँ... तभी मैं आत्मा देखती हूँ... *ऊपर से बाबा सभी जो उस रास्ते पर चल रहे यात्री है... उनको सिगनल भेज रहे है... लेकिन कुछ यात्री जिनकी मन-बुद्धि रूपी मशीन अॉन है... वे उस सिगनल को कैच करते है... और हाई जम्प देकर उस पत्थर से आगे निकल जाते है...* लेकिन जिन यात्रियों की मशीन का बटन अॉफ था वो बाबा से मिल रहे सिगनल को कैच नहीं कर पा रहे है...

 

 _ ➳  तभी वो दृश्य मुझ आत्मा की आँखों के सामने से गायब हो जाता है... और बापदादा मुझ आत्मा के सामने आ जाते है... *बाबा मुझे दृष्टि दे रहे है... बाबा की दृष्टि से निकलती ज्ञान रूपी रोशनी मुझ आत्मा में समा रही है और इस दृश्य का राज मेरे सामने स्पष्ट होता जा रहा है...* बाबा मुझ आत्मा के सिर पर अपना वरदानी हाथ रखते है... बाबा के वरदानी हाथ से शक्तिशाली किरणें मुझ आत्मा में समा रही है... *मुझ आत्मा की बुद्धि दिव्य बनती जा रही है... मुझ आत्मा का मन रूपी दर्पण बिल्कुल स्वच्छ और शुद्ध बनता जा रहा है...* अब मैं आत्मा देख रही हूँ

 

 ➳ _ ➳  स्वयं को कर्म भूमि पर केवल एक बाबा की याद में भिन्न-भिन्न कर्म करते हुए... *मैं आत्मा देख रही हूँ... पत्थर रुपी कई तरह की परिस्थितियाँ मुझ आत्मा के जीवन में आ रही है लेकिन मुझ आत्मा की मन-बुद्धि की लाइन क्लियर होने के कारण मैं आत्मा सहज ही बाबा से मिली टचिंग को यूज कर रही हूँ... बापदादा की एकस्ट्रा मदद अनुभव कर रही हूँ...* और बडी सहजता से हाई जम्प देकर हर परिस्थिति रूपी पत्थर को पार कर रही हूँ... मैं आत्मा माया के रंग-बिरंगे खेल रूपी व्यर्थ से सदा मुक्त रह सदा स्वप्न तक भी  अपनी मन-बुद्धि को शुद्ध और स्वच्छ रखती हूँ... और *निडर होकर समय रहते निर्विघ्न हो आगे बढ़ रही हूँ... और दूसरों को भी निर्विघ्न बना कर आगे बढा रही हूँ... शुक्रिया मीठे बाबा शुक्रिया*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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