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 13 / 05 / 22  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *ज्ञान खजाने से झोली भरी ?*

 

➢➢ *किसी भी विकार के वश हो विघन तो नहीं डाला ?*

 

➢➢ *भाग्यविधाता बाप द्वारा मिले हुए भाग्य को बांटा ?*

 

➢➢ *एकाग्रता का अभ्यास बड़ा निर्विघन और एकरस स्थिति का अनुभव किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  समय की समीपता के प्रमाण अभी सच्चे तपस्वी बनो। *आपकी सच्ची तपस्या वा साधना है ही बेहद का वैराग्य।* अभी चारों ओर पावरफुल तपस्या करनी है, *जो तपस्या मन्सा सेवा के निमित्त बनें, ऐसी पावरफुल सेवा अभी तपस्या द्वारा शुरू करो।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं रूहानी दृष्टि से सृष्टि को बदलने वाली आत्मा हूँ"*

 

  अपने को रूहानी दृष्टि से सृष्टि को बदलने वाला अनुभव करते हो? *सुनते थे कि दृष्टि से सृष्टि बदल जाती है लेकिन अभी अनुभवी बन गये। रूहानी दृष्टि से सृष्टि बदल गई ना! अभी आपके लिए बाप संसार है, तो सृष्टि बदल गई।* पहले की सृष्टि अर्थात् संसार और अभी के संसार में फर्क हो गया ना! पहले संसार में बुद्धि भटकती थी और अभी बाप ही संसार हो गया। तो बुद्धि का भटकना बंद हो गया, एकाग्र हो गई। क्योंकि पहले की जीवन में, कभी देह के सम्बन्ध में, कभी देह के पदार्थ में - अनेकों में बुद्धि जाती थी। अभी यह सब बदल गया। अभी देह याद रहती या देही?

 

  अगर देह में कभी बुद्धि जाती है तो रांग समझते हो ना! फिर बदल लेते हो, देह के बजाय अपने को देही समझने का अभ्यास करते हो। तो संसार बदल गया ना! स्वयं भी बदल गये। बाप ही संसार है या अभी संसार में कुछ रहा हुआ है? विनाशी धन या विनाशी सम्बन्ध के तरफ बुद्धि तो नहीं जाती? *अभी मेरा रहा ही नहीं। 'मेरे पास बहुत धन है' - यह संकल्प या स्वप्न में भी नहीं होगा क्योंकि सब बाप के हवाले कर दिया। मेरे को तेरा बना लिया ना! या मेरा, मेरा ही है और बाप का भी मेरा है।* ऐसे तो नहीं समझते? यह विनाशी तन-धन, पुराना मन, मेरा नहीं, बाप को दे दिया।

 

  *पहला-पहला परिवर्तन होने का संकल्प ही यह किया कि सब कुछ तेरा और तेरा कहने से ही फायदा है। इसमें बाप का फायदा नहीं है, आपका फायदा है। क्योंकि मेरा कहने से फंसते हो, तेरा कहने से न्यारे हो जाते हो। मेरा कहने से बोझ वाले बन जाते हो और तेरा कहने से डबल लाइट 'ट्रस्टी' बन जाते हो।* तो क्या अच्छा है - हल्का बनना अच्छा है या भारी बनना अच्छा है? आजकल के जमाने में शरीर से भी कोई भारी होता तो अच्छा नहीं लगता। सभी अपने को हल्का करने का प्रयत्न करते हैं। क्योंकि भारी होना माना नुकसान है और हल्का होने से फायदा है। ऐसे ही मेरा-मेरा कहने से बुद्धि पर बोझ पड़ जाता है, तेरा-तेरा कहने से बुद्धि हल्की बन जाती है। जब तक हल्के नहीं बने तब तक ऊँची स्थिति तक पहुँच नहीं सकते। उड़ती कला ही आनन्द की अनुभूति कराने वाली है। हल्का रहने में ही मजा है।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  जैसे स्थूल कर्मेन्द्रियों को एक सेकण्ड में जैसे और जहाँ करना चाहें वहाँ कर सकते हैं, अधिकार है न उन पर? *ऐसे बुद्धि के ऊपर और संकल्पों के ऊपर भी अधिकारी बने हो?* फुलस्टाँप करना चाहो तो कर सको क्या ऐसा अभ्यास है?

 

✧  विस्तार में जाने के बजाय एक सेकण्ड में फुलस्टाँप हो जाये ऐसी स्थिति समझते हो? जैसे ड्राइविंग का लाइसेन्स लेने जाते हैं तो जानबूझ कर भी उनसे तेज स्पीड करा के फिर फुलस्टाँप कराते हैं व ब्रेक कराते हैं। यह भी प्रैक्टिस है ना? *तो अपनी बुद्धि को चलाने और ठहराने की भी प्रैक्टिस करनी है।*

 

✧   *कमाल तब कहेंगे जब ऐसे समय पर एक सेकण्ड में स्टाँप हो जायें।* निरंतर विजयी वह जिसके युक्ति - युक्त संकल्प व युक्ति - युक्त बोल व युक्ति - युक्त कर्म हो या जिसका एक संकल्प व्यर्थ न हो। वह तब होगा जब यह प्रैक्टिस होगी मानो कोई ऐसी सर्विस है जिसमें फूल विजयी होना होता है तो ऐसे समय भी स्टाँप करने का अभ्यास करो।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ ऐसा अभ्यास करो जो जहाँ बुद्धि को लगाना चाहे वहाँ स्थित हो जायें। संकल्प किया और स्थित हुआ। यह रूहानी डिल सदैव बुद्धि द्वारा करते रहो। *अभी-अभी परमधाम निवासी, अभी-अभी सूक्ष्म अव्यक्त फरिश्ता बन जायें और अभी-अभी साकार कर्मन्द्रियों का आधार लेकर कर्मयोगी बन जायें। इसको कहा जाता है - संकल्प शक्ति को कण्ट्रोल करना।* संकल्प को रचा कहेंगे और आप उसके रचयिता हो। जितना समय जो संकल्प चाहिए उतना ही समय वह चले। जहाँ बुद्धि लगाना चाहे, वहाँ ही लगे। इसको कहा जाता है - अधिकारी। *यह प्रेक्टिस अभी कम है। और चेक करो कि जितना समय निश्चित किया, क्या उतना समय वह स्टेज रही?*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  इस यज्ञ की संभाल करने पवित्र जरुर रहना"*

 

_ ➳  कलकल करते झरने का, मधुर संगीत सुनकर, मुझ आत्मा को... *अपने जीवन में सजे सातो गुणो के सुर याद आते है... कि शिव संगीतकार पिता ने मेरे जीवन में आकर... मेरे जीवन को कितना प्यारा दिव्य बनाकर... यूँ गायन योग्य बना दिया है.*. विकारो के बेसुर भस्म कर दिए है... और ज्ञान की वीणा संग, यादो के सुरीले तारो को छेड़...मुझे सतो प्रधानता का गीत सिखाया है... देहभान में बेसुरी हो गयी मुझ आत्मा को.. सातो गुण में कितना सुरीला बनाकर, विश्व स्टेज पर दिव्यता से सजाया है... अपने प्यारे बाबा के प्यार में डूबी हुई मै आत्मा.... प्यार का गीत, मीठे बाबा को सुनाने, सूक्ष्म वतन पहुंचती हूँ..."

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को ज्ञान रत्नों से भरपूर करते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... *शिव बाबा ने धरा पर आकर, आप बच्चों को अपनी पलको से चुनकर, जो रूद्र ज्ञान यज्ञ रचा है.*.. उस यज्ञ के सच्चे रक्षक आप ब्राह्मण बच्चे हो... मीठे बाबा की याद में गुणवान और शक्तिवान बनकर... इस यज्ञ में अवगुणों को स्वाहा कर, गायन योग्य बनकर, सतयुग में मुस्कराते हो...."

 

_ ➳  *मै आत्मा प्यारे बाबा के ज्ञान रत्नों को अपनी झोली में समेटते हुए कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... मै आत्मा *अपने मीठे भाग्य पर कितना ना नाज करूँ... कि स्वयं भगवान ने मुझे अपनी फूलो सी गोद में बिठाकर, यूँ खुशियो में पुनः खिलाया है.*.. सारे विकर्मो से छुड़ाकर, मुझे देवताई श्रंगार से, फिर से सजाया है..."

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी आँखों का तारा बनाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... संगम के वरदानी समय में ईश्वर पिता के साथ... अथाह खजानो के मालिक बनकर, रूद्र ज्ञान यज्ञ के रक्षक बन रहे हो... अपनी *दिव्यता और पवित्रता से इस यज्ञ को सम्भाल कर... ईश्वर पिता के दिल में मणि सा सजकर मुस्करा रहे हो.*.. गुणो से सजकर, पूज्य बन रहे हो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा अपने मीठे प्यारे भाग्य पर मुस्करा कर कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा... मै आत्मा स्वयं को ही भूल बेठी थी, आपने मेरे जीवन में आकर... *मुझे अपने प्यार में पवित्र बनाकर... दिव्य गुणो से महकाया है.*.. मुझ आत्मा को अपने साये तले रखकर... गायन योग्य बनाया है... मेरा खोया गौरव पुनः दिलाया है..."

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को विश्व परिवर्तन के महान कार्य में अपना सहयोगी बनाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे... इस रूद्र ज्ञान यज्ञ में आप ब्राह्मण बच्चे ही गायन योग्य बनते हो... शिव पिता के यज्ञ की दिल जान से रक्षा करते हो... फिर *आप ही दिव्यता और पवित्रता की दौलत से, देवताई स्वर्ग का राज्य भाग्य पाते हो*..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के महावाक्यों को अपने मन बुद्धि दिल में सजाकर कहती हूँ :-* "मीठे दुलारे बाबा मेरे... मै आत्मा आपकी मीठी गोद में आकर, काँटों से फूल बन गयी हूँ... *ईश्वरीय पालना में पलकर क्या से क्या हो गयी हूँ... वरदानो और शक्तियो से सजकर, गायन योग्य बन गयी हूँ.*.. और देवताई सुखो का अधिकार पा रही हूँ..."मीठे बाबा से बेहद की समझ लेकर मै आत्मा... अपने कार्य क्षेत्र पर आ गयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- ज्ञान खजाने से रोज झोली भरनी है*"

 

 _ ➳  अविनाशी ज्ञान रत्नों से मुझ आत्मा सजनी का श्रृंगार कर, मुझे सजा सँवार कर अपने साथ ले जाने के लिए मेरे शिव पिया आने वाले हैं। उनके इंतजार में मैं आत्मा इस देह रूपी कुटिया में भृकुटि रूपी दरवाजे पर पलके बिछाये खड़ी हूँ। *मेरे प्रेम की डोर से बंधे मेरे शिव पिया बिना कोई विलम्ब किए अपना धाम छोड़कर, अपने रथ पर विराजमान हो कर मेरे पास आ रहें हैं। हवाओं में फैली रूहानियत की खुशबू उनके आने का स्पष्ट संकेत दे रही है*। मुझ आत्मा पर पड़ रही उनके प्रेम की शीतल फुहारें मुझे उनकी उपस्थिति का स्पष्ट अनुभव करवा रही हैं। फिजाओं में एक दिव्य अलौकिक रूहानी मस्ती छा गई है जिसमे मैं आत्मा डूबती जा रही हूं।

 

 _ ➳  अपने शिव पिया को मैं अब अपने बिल्कुल समीप देख रही हूं। अपनी किरणों रूपी बाहों को फैला कर वो मुझे अपने साथ चलने का इशारा दे रहें हैं। उनकी किरणों रूपी बाहों को थामे अब मैं आत्मा सजनी उनके साथ चली जा रही हूं। *हर बन्धन से अब मैं मुक्त हो चुकी हूं। अपने शिव साजन का हाथ थामे मैं आत्मा सजनी इस दुख देने वाली दुनिया को छोड़ कर अपने शिव पिया के साथ उनके घर जा रही हूं*। पांच तत्वों से बनी साकारी दुनिया को पार करते हुए, अपने शिव पिया के साथ मैं आत्मा पहुंच गई सूक्ष्म लोक में जहां मेरे शिव पिया मुझ आत्मा का ज्ञान रत्नों से सोलह श्रृंगार कर मुझे अपनी निराकारी दुनिया मे ले जायेंगे।

 

 _ ➳  अब मैं देख रही हूं अपने शिव पिया को उनके लाइट माइट स्वरूप में। उनका यह स्वरूप बहुत ही आकर्षक, लुभावना और मन को मोहने वाला है। *अब मैं आत्मा भी अपनी फ़रिशता ड्रेस धारण कर लेती हूं और अविनाशी ज्ञान रत्नों का श्रृंगार करने के लिए अपने शिव पिया के सामने पहुंच जाती हूँ*। मुझे अपने पास बिठाकर बड़ी प्यार भरी नजरों से वो मुझे निहार रहे हैं और अपनी सर्वशक्तियों रूपी रंग बिरंगी किरणों से मुझे भरपूर कर रहें हैं।

 

 _ ➳  मन ही मन मैं विचार कर रही हूं कि कितना लंबा समय मैं अपने अविनाशी साजन से अलग रही। उनसे अलग रहने के कारण मैं तो श्रृंगार करना ही भूल गई थी। अविनाशी खजानों से वंचित हो गई थी। किंतु अब *बहुत काल के बाद मेरे शिव साजन मेरे सामने है और बहुत काल के बाद यह सुंदर मिलन हुआ है तो इस मिलन से अब मुझे सेकेंड भी वंचित नहीं रहना*। यह विचार मन मे आते ही अपने शिव पिया के प्रति प्यार और भी गहरा हो उठता है और मैं आत्मा सजनी उनके और समीप पहुंच जाती हूँ।

 

 _ ➳  मेरे शिव पिया अब स्वयं ज्ञान रत्नों से मेरा श्रृंगार कर रहें हैं। मेरे गले मे दिव्य गुणों का हार और हाथों में मर्यादाओं के कंगन पहना कर सर्व ख़ज़ानों से मेरी झोली भर रहें है। सुख, शांति, पवित्रता, शक्ति और गुणों से मुझे भरपूर कर रहें हैं। *ज्ञान रत्नों के खजानों से मालामाल करके मेरे शिव पिया ने मुझे कितना सम्पत्तिवान बना दिया है*। सर्वगुणों और सर्वशक्तियों के श्रृंगार से सजा मेरा यह रूप देख कर मेरे शिव पिया खुशी से फूले नही समा रहे। अविनाशी ज्ञान रत्नों के श्रृंगार से सजे अपने इस रूप को मैं मन रूपी दर्पण में देख कर मन ही मन अपने भाग्य पर गर्व कर रही हूं जो ऐसा अनुपम श्रृंगार करने वाले अविनाशी साजन मुझे मिले। *मन ही मन अपने शिव पिया से मैं प्रोमिस करती हूं कि इन अविनाशी ज्ञान रत्नों के श्रृंगार से अब मैं आत्मा सदा सजी सजाई रहूँगी*।

 

 _ ➳  अविनाशी ज्ञान रत्नों से सज - धज कर अब मैं आत्मा वापिस साकारी लोक में आ कर अपने साकारी शरीर मे विराजमान हो गई हूं। *अपने शिव पिया से मिले सर्व ख़ज़ानों से अब मैं स्वयं को सम्पन्न अनुभव कर रही हूँ*। हर रोज अपनी झोली अविनाशी ज्ञान रत्नों से भरकर, अपना श्रृंगार करके मैं आत्मा वरदानीमूर्त बन अब अपने सम्बन्ध - सम्पर्क में आने वाली हर आत्मा को अपने मुख से ज्ञान रत्नों का दान दे कर उन्हें भी अविनाशी ज्ञान रत्नों के श्रृंगार से सजाने वाले उनके अविनाशी प्रीतम से मिलवाने के रूहानी धन्धे में लग गई हूं।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं भाग्यविधाता बाप द्वारा मिले हुए भाग्य को बांट ने और बढ़ाने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं खुशनसीब आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा एकाग्रता के अभ्यास को बढ़ा देती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदैव निर्विघ्न और एकरस स्थिति का अनुभव करती हूँ  ।*

   *मैं निर्विघ्न आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

अव्यक्त बापदादा :-

 

_ ➳  *तीसरी अनुभूति- ऐसी समान आत्मा अर्थात् एवररेडी आत्मा - साकारी दुनिया और साकारी शरीर में होते हुए भी बुद्धियोग की शक्ति द्वारा सदा ऐसा अनुभव करेगी कि मैं आत्मा चाहे सूक्ष्मवतन में, चाहे मूलवतन में, वहाँ ही बाप के साथ रहती हूँ। सेकण्ड में सूक्ष्मवतन वासी, सेकण्ड में मूलवतनवासी, सेकण्ड में साकार वतन वासी हो कर्मयोगी बन कर्म का पार्ट बजाने वाली हूँ लेकिन अनेक बार अपने को बाप के साथ सूक्ष्मवतन और मूलवतन में रहने का अनुभव करेंगे।* फुर्सत मिली और सूक्ष्मवतन व मूलवतन में चले गये। ऐसे सूक्ष्मवतन वासी, मूलवतनवासी की अनुभूति करेंगे जैसे कार्य से फुर्सत मिलने के बाद घर में चले जाते हैं। दफ्तर का काम पूरा किया तो घर में जायेंगे वा दफ्तर में ही बैठे रहेंगे! ऐसे एवररेडी आत्मा बार-बार अपने को अपने घर के निवासी अनुभव करेंगी। जैसे कि घर सामने खड़ा है। *अभी-अभी यहाँ, अभी-अभी वहाँ। साकारी वतन के कमरे से निकल मूलवतन के कमरे में चले गये।*

 

✺  *"ड्रिल :- सेकण्ड में सूक्ष्मवतन वासी, सेकण्ड में मूलवतनवासी, सेकण्ड में साकार वतन वासी होने का अनुभव करना*

 

_ ➳  *बाबा बुला रहे हैं बच्चों वतन में आओ, अब मुझको न बुलाओ तुम मेरे पास आओ... ये गीत सुनते ही मैं आत्मा ऊपर खींची चली जा रही हूँ...* प्यारे बाबा दोनों हाथों को फैलाए मुझे वतन में बुला रहे हैं... मन-बुद्धि के तार बाबा से जुड़ते ही मुझ आत्मा का स्थूल शरीर गायब हो रहा है... मैं आत्मा सूक्ष्म शरीर धारण कर पहुँच जाती हूँ सूक्ष्म वतन... *जहाँ ब्रह्मा बाबा के तन में शिव बाबा ऐसे लग रहे हैं जैसे हीरे की डिब्बी में हीरा चमक रहा हो...*

 

_ ➳  *सुप्रीम हीरे से दिव्य किरणों की बौछारें मुझ पर पड़ रही हैं... एक-एक किरण मुझ आत्मा के एक-एक विकार को भस्म कर रहा है...* सभी अवगुणों, कमी-कमजोरियों, विकारों से मुक्त होकर मैं आत्मा हलकी हो रही हूँ... फरिश्ते समान डबल लाइट हो गई हूँ... मैं आत्मा बेदाग हीरा बन रही हूँ...

 

_ ➳  अब मैं आत्मा सूक्ष्म वतन से भी ऊपर उड रही हूँ... फरिश्ते का ड्रेस लोप हो रहा है... मैं आत्मा धीरे-धीरे बिंदु बन रही हूँ... *बिंदु बन मैं आत्मा बिंदु बाबा के साथ ऊपर उड़ते हुए मूलवतन पहुँच जाती हूँ...* सुप्रीम बिंदु से एक हो जाती हूँ... एक होते ही बाबा से गुण, शक्तियां मुझमें ट्रान्सफर हो रही हैं... *मैं आत्मा सर्व प्राप्ति सम्पन्न स्थिति का अनुभव कर रही हूँ...*

 

_ ➳  अब मुझ आत्मा को पूरी सृष्टि ही अपना घर लग रहा है... मैं आत्मा बेहद के घर में रह रही हूँ... मैं आत्मा ऐसा अनुभव कर रही हूँ कि मैं अब तीन कमरे के घर में रह रही हूँ... *साकारी वतन के कमरे में कर्मयोगी बन कर्म करती हूँ... फिर सेकंड में सूक्ष्मवतन के कमरे में बापदादा के पास पहुंच जाती हूँ और सेकंड में मूलवतन के कमरे में बिंदु बाबा के पास चले जाती हूँ...* मैं आत्मा हर कर्म बाबा के साथ से करती हूँ फिर बाबा के साथ अपने वतन पहुँच जाती हूँ...

 

_ ➳  अब मैं आत्मा अपने घर जाने के लिए सदा एवररेडी रहती हूँ... *जब चाहे तब मैं आत्मा अपने बुद्धियोग की शक्ति द्वारा कहीं भी जा सकती हूँ...* मैं आत्मा साकार वतन में सिर्फ कर्म करने आती हूँ... यहाँ की किसी वस्तु, व्यक्ति, वैभव में अपना मन नहीं लगाती हूँ... इस देह से भी मैं आत्मा डिटैच रहती हूँ... ये देह सिर्फ कर्म करने का साधन है... *अब मैं आत्मा एवररेडी बन सेकण्ड में सूक्ष्मवतन वासी, सेकण्ड में मूलवतनवासी, सेकण्ड में साकार वतन वासी होने का अनुभव कर रही हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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