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 13 / 09 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *पवित्रता की धारणा को सहजता से अपनाया ?*

 

➢➢ *पवित्रता के आधार पर सुख शांति का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *बहुत काल की निर्विघन स्थिति का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *बेगमपुर के बादशाह बनकर रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *जैसे बाप को सर्व स्वरुपों से वा सर्व सम्बन्धों से जानना आवश्यक है, ऐसे ही बाप द्वारा स्वयं को भी जानना आवश्यक है।* जानना अर्थात् मानना। मैं जो हूँ, जैसा हूँ, ऐसे मानकर चलेंगे तो देह में विदेही, व्यक्त में होते अव्यक्त, चलते-फिरते फरिश्ता वा कर्म करते हुए कर्मातीत स्थिति बन जायेगी।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं संगमयुगी पुरुषोत्तम आत्मा हूँ"*

 

  अपने को संगमयुगी पुरुषोत्तम आत्मायें अनुभव करते हो? पुरुषोत्तम अर्थात् पुरुषों में उत्तम पुरुष। तो अभी साधारण नहीं हो पुरुषोत्तम हो। क्योंकि ब्राह्मण अर्थात् श्रेष्ठ। ब्राह्मणों को सदा ऊंचा दिखाते हैं। मुख वंशावली दिखाते हैं ना। *तो ब्राह्मण बन गये अर्थात् श्रेष्ठ बन गये। साधारण पुरुष आप पुरुषोत्तम आत्माओंकी पूजा करते हैं क्योंकि ब्राह्मण अर्थात् पवित्र बन गये ना। तो पवित्रता की ही पूजा होती है। साधारण आत्मा भी पवित्रता को धारण करती है तो महान् आत्मा कहलाती है।* तो आप सब पवित्र आत्मायें हो ना कि मिक्स आत्मा हो? थोड़ी-थोड़ी अपवित्रता, थोड़ी-थोड़ी पवित्रता! नहीं। पवित्र आत्मा बन गये। तो पवित्रता ही श्रेष्ठता है। पवित्रता ही पूज्य है। तो ये नशा रहता है कि हम पुजारी से पूज्य बन गये?

 

  ब्राह्मणों की पवित्रता का गायन है। कोई भी शुभ कार्य होगा तो ब्राह्मण से करायेंगे। अशुभ कार्य ब्राह्मण से नहीं करायेंगे। अशुभ कार्य ब्राह्मण करें तो कहेंगे ये नाम का ब्राह्मण है, काम का नहीं। तो आप नामधारी हो या कामधारी? नामधारी ब्राह्मण तो बहुत हैं। *लेकिन आप जैसा नाम वैसा काम करने वाले हो। साधारण आत्मा नहीं हो, विशेष आत्मा हो। ये खुशी है ना। कल साधारण थे और आज विशेष बन गये। तो विशेष आत्मा समझने से जैसी स्मृति होगी वैसी स्थिति होगी और जैसी स्थिति वैसे कर्म होंगे।* चेक करो जब स्थिति कमजोर होती है तो कर्म कैसे होते हैं। कर्म में भी कमजोरी आ जायेगी और स्थिति शक्तिशाली तो कर्म भी शक्तिशाली होंगे।

 

  तो स्थिति का आधार है स्मृति। स्मृति खुशी की है तो स्थिति भी खुश। कर्म भी खुशी-खुशी से करेंगे। फाउन्डेशन है स्मृति। तो बाप ने स्मृति बदल ली। साधारण से विशेष आत्मा बने तो स्मृति चेंज हो गई। चाहे कर्म साधारण हों लेकिन साधारण कर्म में भी विशेषता हो। मानो खाना बना रहे हो तो ये तो साधारण कर्म है ना, सब करते हैं लेकिन आपका खाना बनाना और दूसरों के खाना बनाने में फर्क होगा ना। *आपके याद का भोजन और साधारण भोजन में अन्तर है। वो प्रसाद है, वो खाना है। तो विशेषता आ गई ना। याद में जो खाना खाते हो या बनाते हो तो उसको ब्रह्मा भोजन कहते हैं। तो सदा याद रखना कि पुरुषोत्तम विशेष आत्मायें बन गये तो साधारण कर्म कर नहीं सकते।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  तो *राजा का ऑर्डर उसी घडी उसी प्रकार से मानना - यह है राज्य-अधिकारी की निशानी।* ऐसे नहीं कि तीन-चार मिनट के अभ्यास के बाद मन माने या एकाग्रता के बजाए हलचल के बाद एकाग बने, इसको क्या कहेंगे?

 

✧   अधिकारी कहेंगे? तो ऐसी चेकिंग करो। क्योंकि पहले से ही सुनाया है कि *अंतिम समय की अंतिम रिजल्ट का समय एक सेकण्ड का क्वेचन एक ही होगा।*

 

✧  इन सूक्ष्म शक्तियों के अधिकारी बनने का अभ्यास अगर नहीं होगा अर्थात *आपका मन राजा का ऑर्डर एक घडी के बजाए तीनचार घडियों में मानता है तो राज्य अधिकारी कहलायेंगे वा एक सेकण्ड के अंतिम पेपर में पास होगे?* कितने माक्र्स मिलेंगे?

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ तो ब्राह्मणों का स्थान और स्थिति - दोनों ऊँची। अगर स्थान की याद होगी तो स्थिति स्वत: ऊँची हो जायेगी। *ब्राह्मणों की दृष्टि भी सदा ऊपर रहती है। क्योंकि आत्मा 'आत्माओं' को देखती है, आत्मा ऊपर है तो दृष्टि भी ऊपर जायेगी।* कभी भी किससे मिलते हो या बात करते हो तो आत्मा को देखकर बात करते हो, आत्मा से बात करते हो, आपकी दृष्टि आत्मा की तरफ जाती है। आत्मा मस्तक में है ना। *तो ऊँची स्थिति में रहना सहज है।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- सुख, शांति और ख़ुशी का आधार- पवित्रता"*

 

_ ➳  सेन्टर में बाबा के कमरे में, लवलीन अवस्था में बैठी मैं प्रभु पंसद आत्मा दिलाराम बाबा को दिल के मीठे जज्बात ब्या कर रही हूँ... *जो प्यार मिला मुझे तुमसे वर्णन करूँ मैं कैसे मुख से... ये दिल जानता है बाबा दिखता है जो नैनों के नूर से... वर्णन करूँ मैं कैसे मुख से...* सब कुछ भूल एक उसके प्यार में खो चुकी हूँ... बस एक बाबा... प्यार के सागर बाबा भी मुझ आत्मा पर प्रेम की किरणों की वर्षा कर रहे है... अतिइन्द्रिय सुख के झूले मे मैं आत्मा झूल रही हूँ... मुझ आत्मा की चमक ओज तेज बढ़ता जा रहा है... बेहद आंनद में मैं आत्मा झूम रही हूँ... और फिर बाबा मुझ आत्मा का हाथ पकड़ मुझे ज्ञान डांस कराने लगते है...

 

  *मीठे बाबा मुझ आत्मा पर ज्ञान वर्षा करते हुए कहते है :-* "मीठे लाडले फूल बच्चे मेरे... माया मौसी ने किस कदर था तुम्हें देह और देह सम्बन्धों के जंजाल में फंसाया... झूठी आकर्षणों में था तुम्हें बहकाया... सुख-शांति पवित्रता के अधिकार से था तुम्हें वंचित कराया... ऐसी घड़ी में पुनः सुख का सागर है धरा पर आया... *स्वर्ग की स्थापना कर तुम्हें फिर से सुख-शांति पवित्रता के तीन अधिकार... है तुम्हें देने आया..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा ज्ञान की रिमझिम वर्षा में भीगकर कहती हूँ :-* "मीठे दिल के सच्चे सहारे बाबा मेरे... आपने स्मृतियों की रोशनी देकर माया के जंजाल से है मुझे बाहर निकाला... *आपकी श्रीमत पर चल पुनः अपने खोये अधिकार को पा रही हूँ... आप की आज्ञा पर चल स्वयं को पवित्र बना... ऐसे कमल समान जीवन से अनेक जन्मों के लिए सुख-शांति पवित्रता का अधिकारी स्वयं को बना रही हूँ...* इन सच्चे अपने मूल अधिकारों को पाकर सच्ची अमीरी से भरती जा रही हूँ..."

 

  *लाडले बाबा ज्ञान रत्नों से मुझ आत्मा का श्रृंगार करते हुए कहते है :-* "प्यारे राजदुलारे बच्चे मेरे... रहमदिल बाबा माया की गुलामी से है तुम्हें छुडाने आया... *अब इस देह भान से निकल स्वयं के सत्य स्वरूप में खो जाओ... आप देह नहीं, चमकती मणि हो इसकी याद में गहरे डूब जाओ...* निराकार पिता की यादों मे खो जाओ... और इस प्रकार सुख-शांति पवित्रता के तीन अधिकार 21 जन्म के लिए पाओं..."

 

_ ➳  *मैं आत्मा ज्ञान रत्नों से सज-धज कर कहती हूँ :-* "मीठे मनमीत बाबा मेरे... आपने मुझ आत्मा को माया की गुलामी से छुड़ा स्वतंत्र पंछी है बनाया... कितना बेशुमार कितना शानदार आपने मेरे भाग्य को है बनाया... खो कर आपकी मीठी यादों में सच्ची कमाई करती जा रही हूँ... *इस याद की बहार से ही 21 जन्मों के लिए स्वयं को सुख-शांति पवित्रता के अधिकारी बनाती जा रही हूँ..."*

 

  *मीठे बाबा ज्ञान की अथाह सम्पदा देकर मुझ आत्मा से कहते है :-* "मीठे विश्व कल्याणकारी बच्चे मेरे... ईश्वर पिता की मीठी गोद में बैठ, देह के मटमैले आकर्षण से निकलकर, अपनी आत्मिक तरंगों के आनंद में डूब जाओ... सुख-शांति पवित्रता की किरणों से स्वयं को सजाओं... *इस प्रकार स्वयं सुख-शांति पवित्रता के अधिकारी बन दूसरों को भी बनाओं... सबको ये तीन अधिकार दिलाने की सेवा निरंतर करते जाओ...."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा ज्ञान की अथाह सम्पदा पाकर नशे से कहती हूँ :-* "प्यारे ज्ञान सागर बाबा मेरे... आप आये तो जीवन में बहार आ गयी... कितने रंगों से आपने मेरे जीवन को भर दिया है... *बनकर आप के समान मैं आत्मा सुख-शांति की अधिकारी बन, सबको बना रही हूँ...* सुख-शांति पवित्रता के ये तीन अधिकार सबको दिला रही हूँ... ऐसी सेवा कर मैं आत्मा आपको प्रत्यक्ष करती जा रही हूँ...."

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  बेगमपुर के बादशाह बनकर रहना*"

 

 _ ➳  बापदादा की मत पर चल, अपने सभी बोझ बापदादा को सौंपते ही मैं अनुभव करती हूँ जैसे मैं बेफ़िक्र बादशाह बन, उमंग उत्साह के पंख लगा कर उड़ रही हूँ। *निश्चिन्त स्थिति का यह अनुभव मुझे उड़ती कला का अनुभव करवा रहा है। स्वयं को मैं एकदम हल्का अनुभव कर रही हूँ*। इस हल्की और निश्चिन्त स्थिति का भरपूर आनन्द लेते हुए मैं अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य के बारे में विचार करती हूँ कि कितनी पदमापदम सौभाग्यशाली हूँ मैं आत्मा जो मुझे कदम - कदम पर श्रेष्ठ मत देकर मेरे जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाले बाप और दादा मुझे मिले। 

 

 _ ➳  कितनी भाग्यवान है वो ब्राह्मण आत्मायें जो इस समय भगवान को यथार्थ रीति पहचान कर, उनकी मत पर चल रही हैं। *जिस ब्रह्मा की मत को भक्ति में मशहूर माना जाता है वो ब्रह्मा बाप इस समय सम्मुख बैठ अपनी श्रेष्ठ मत हम बच्चों को दे रहें है और उनके तन में विराजमान स्वयं निराकार शिव भगवान भी साकार में आकर अपनी श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ मत द्वारा कल्प - कल्प के लिए हम ब्राह्मण बच्चों का सर्वश्रेष्ठ भाग्य बना रहें हैं*। 

 

 _ ➳  ऐसे बापदादा की मत पर चल अपना भाग्य बनाने वाली आत्मायें कोटो में कोई हैं। और उन कोई में भी कोई मैं हूँ वो सौभाग्यशाली आत्मा। *अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य के बारे में चिंतन करती अब मैं उन पलों को याद करती हूँ जब किसी भी बात का मन पर बोझ हुआ तो बापदादा ने कैसे सामने आकर हमेशा ये अहसास दिलाया कि "बच्चे आप चिन्ता क्यो करते हो, मैं बैठा हूँ ना"*। और जब बापदादा की मत पर चल, सब कुछ उन्हें सौंप दिया तो वो बोझ जो मन को भारी कर रहा था, इतना हल्का हो गया जैसे कि था ही नही। 

 

 _ ➳  ऐसे कदम - कदम पर अपने प्यारे बाप और दादा की मत पर सदा चलने और अपने सभी बोझ उन्हें देकर, सदा हल्के रहने की स्वयं से प्रतिज्ञा कर, *अपने भाग्यनिर्माता बापदादा से मिलने का मैं जैसे ही संकल्प करती हूँ अव्यक्त बापदादा की अव्यक्त आवाज मुझे सुनाई देती है जैसे बाबा कह रहे हैं "आओ बच्चे, मेरे पास आओ"।* यह अव्यक्त आवाज़ मुझे अव्यक्त स्थिति में स्थित कर, अव्यक्त फ़रिश्ता बनाये, बापदादा के अव्यक्त वतन की ओर लेकर चल पड़ती है। 

 

 _ ➳  अपने लाइट के सूक्ष्म आकारी शरीर को धारण कर मैं फ़रिश्ता साकार दुनिया को पार करता हूँ और उससे ऊपर अंतरिक्ष को पार करके लाइट के सूक्ष्म देहधारी फ़रिशतो की दुनिया मे पहुँच जाता हूँ। *अव्यक्त बापदादा के इस अव्यक्त वतन में मैं देख रहा हूँ अपने सामने अव्यक्त ब्रह्मा बाबा को उनके सम्पूर्ण फ़रिशता स्वरुप में और उनकी भृकुटि में विराजमान शिव बाबा को। इस कम्बाइन्ड स्वरूप में बापदादा के मस्तक से बहुत तेज लाइट और माइट निकल रही है जो चारों और फैल कर पूरे सूक्ष्म वतन को प्रकाशमय बना रही है*। सर्वशक्तियों के शक्तिशाली वायब्रेशन बापदादा से निकल कर चारों और फैल रहे हैं। 

 

 _ ➳  इन शक्तिशाली वायब्रेशन का आकर्षण मुझे बापदादा के बिलुक़ल समीप ले कर जा रहा हैं। मैं फ़रिशता बापदादा के पास पहुँच कर, उनके सामने जाकर बैठ जाता हूँ। *बापदादा के मस्तक से आ रही शक्तियों की लाइट और माइट अब सीधी मुझ फ़रिश्ते पर पड़ रही है और मैं फ़रिशता सर्वशक्तियों से भरपूर हो रहा हूँ*। अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रख कर बाबा मुझे हर बोझ से सदा मुक्त रहने का वरदान दे रहें हैं।

 

 _ ➳  बापदादा से वरदान लेकर और सर्वशक्तियो से सम्पन्न बन कर मैं फ़रिशता अब वापिस साकार लोक की ओर प्रस्थान करता हूँ। अपने लाइट के सूक्ष्म आकारी तन के साथ मैं अपने साकारी तन में प्रवेश कर जाता हूँ। *अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर, अब मैं कदम - कदम पर बाप और दादा की मत पर चल कर, अपने सब बोझ बापदादा को दे कर, डबल लाइट स्थिति का अनुभव सदैव कर रही हूँ और इस डबल लाइट स्थिति में स्थित होकर, बापदादा को सदा अपने साथ अनुभव करते हुए, अपने संगमयुगी ब्राह्मण जीवन और संगमयुग की मौजों का अब मैं भरपूर आनन्द ले रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं रोब के अंश का भी त्याग करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं स्वमानधारी आत्मा हूँ।*

   *मैं पुण्य आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा संतुष्टता और प्रसन्नता की विशेषता धारण करती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा उड़ती कला का अनुभव करती हूँ  ।*

   *मैं संतुष्ट और प्रसन्नचित्त आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  *वर्तमान समय आप बच्चों की विश्व को इस सेवा की आवश्यकता है जो चेहरे सेनयनों सेदो शब्द से हर आत्मा के दु:ख को दूर कर खुशी दे दो।* आपको देखते ही खुश हो जाएं। इसलिए खुशनुमा चेहरा या खुशनुमा मूर्त सदा रहे क्योंकि मन की खुशी सूरत से स्पष्ट दिखाई देती है। कितना भी कोई भटकता हुआ, परेशानदु:ख की लहर में आयेखुशी में रहना असम्भव भी समझते हों लेकिन आपके सामने आते ही आपकी मूर्तआपकी वृत्ति, आपकी दृष्टि आत्मा को परिवर्तन कर ले।

 

 _ ➳  आज मन की खुशी के लिए कितना खर्चा करते हैंकितने मनोरंजन के नये-नये साधन बनाते हैं। *वह हैं अल्पकाल के साधन और आपकी है सदाकाल की सच्ची साधना।* तो साधना उन आत्माओं को परिवर्तन कर ले। *हाय-हाय ले आवें और वाह-वाह लेकर जाये। वाह कमाल है - परमात्म आत्माओं की! तो यह सेवा करो।* समय प्रति समय जितना अल्पकाल के साधनों से परेशान होते जायेंगेऐसे समय पर आपकी खुशी उन्हों को सहारा बन जायेगी क्योंकि आप हैं ही खुशनसीब। 

 

✺   *ड्रिल :-  "सच्ची खुशी बाँटने की सेवा का अनुभव"*

 

 _ ➳  रात्रि को पूरे दिन का चार्ट देकर मैं आत्मा... अपना स्थूल शरीर बिस्तर पर छोड़कर *सूक्ष्म वतन में चली जाती हूँ... मीठी ब्रह्मा मां की स्नेह भरी गोदी में सो जाती हूँ... ब्रह्म मुहूर्त के सुनहरे समय में... मीठी माँ अपना प्यार भरा हाथ मेरे सिर पर फिराते हुए... मुझे मीठी वाणी से मीठे बच्चे, लाडले बच्चे कह कर जगा रही है...* मीठी माँ गुणों और वरदानों से मुझ आत्मा को सजा रही है...

 

 _ ➳  पूरी तरह चार्ज होकर... *अपनी सम्पन्न और भरपूर अवस्था में मैं आत्मा... अपने स्थूल शरीर में प्रवेश करती हूँ... मैं स्वयं को ईश्वरीय खजानों से भरपूर देख रही हूँ...* साक्षी होकर मैं देखती हूँ कि... आज संसार में चारों तरफ कितना दुःख, अशांति है... आत्मायें कष्टों और पीड़ाओं से कराह रही हैं... आत्माएं भिखारी की भांति तलाश रही हैं... कि उनके अंधकारमय जीवन में... कहीं से खुशी की हल्की सी रोशनी नज़र आ जाये...

 

 _ ➳  मैं आत्मा खुशियों के सागर पिता की संतान हूँ... *मैं खुशी के खजाने की मालिक हूँ... मैं आत्मा खुशी के खजाने से भरपूर हूँ... लबालब हूँ... मैं आत्मा अपने मुस्कुराते चेहरे से, नयनों से, बोल से सर्व को यह खजाना बांटती जा रही हूँ...* खुशियों के फव्वारे बाबा के नीचे स्थित मैं आत्मा... सर्व आत्माओं पर खुशी का खजाना बरसा रही हूँ...

 

 _ ➳  आत्माओं के कष्ट दूर हो रहे हैं... वे सच्ची खुशी प्राप्त कर स्वयं को धन्य धन्य महसूस रही हैं... *मुझ फरिश्ते के वरदानी बोल, मधुर बोल आत्माओं को कष्टों से मुक्त करते जा रहे हैं... उनके जीवन में मिठास घोल रहे हैं...* बाबा मुझे यह सबसे श्रेष्ठ सेवा कराने के निमित्त बना रहे हैं...

 

 _ ➳  मैं आत्मा यह सच्ची सेवा कर रही हूँ... सर्व को खुशी का खजाना बांटती जा रही हूँ... आत्मायें, जो कि मनोरंजन के साधन आदि पर कितना खर्चा करके अल्पकाल की खुशी की तलाश कर रही हैं... लेकिन फिर भी उनको खुशी नहीं मिल पा रही है... वे *दुःखी, अशांत आत्मायें परमपिता परमात्मा से प्राप्त सच्ची खुशी को प्राप्त कर वाह-वाह कर रही हैं... उन के जीवन की बगिया इस सच्ची खुशी के शीतल जल से लहलहा गयी हैं... सभी के दिलों में परमात्म प्रत्यक्षता हो रही है... चारों ओर वाह बाबा, वाह बाबा के मधुर बोल गूंज रहे हैं...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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