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 13 / 10 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *आपस में आंतरिक लव से रहे ?*

 

➢➢ *सुप्रीम पीस और हैप्पीनेस का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *संगठन में सहयोग की शक्ति द्वारा विजयी बनकर रहे ?*

 

➢➢ *इच्छा मातरम् अविधा बनकर रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *पिछले कर्मों के हिसाब-किताब के फलस्वरूप तन का रोग हो, मन के संस्कार अन्य आत्माओं के संस्कारों से टक्कर भी खाते हो लेकिन कर्मातीत, कर्मभोग के वश न होकर मालिक बन चुक्तू कराओ।* कर्मयोगी बन कर्मभोग चुक्तू करना-यह है कर्मातीत बनने की निशानी।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं बाप की छत्रछाया में रहने वाली विशेष आत्मा हूँ"*

 

  सदा अपने को बाप की छत्रछाया में रहने वाली विशेष आत्माएं अनुभव करते हो? *जहाँ बाप की छत्रछाया है, वहाँ सदा माया से सेफ रहेंगे। छत्रछाया के अन्दर माया आ नहीं सकती। मेहनत से स्वत: ही दूर हो जायेंगे। सदा मौज में रहेंगे। क्योंकि जब मेहनत होती है, तो मेहनत मौज अनुभव नहीं कराती।*

 

  जैसे, बच्चों की पढ़ाई जब होती है तो पढ़ाई में मेहनत होती है ना। जब इम्तिहान के दिन होते हैं तो बहुत मेहनत करते हैं, मौज से खेलते नहीं हैं। और जब मेहनत खत्म हो जाती है, इम्तिहान खत्म हो जाते हैं तो मौज करते हैं। *तो जहाँ मेहनत है, वहाँ मौज नहीं। जहाँ मौज है, वहाँ मेहनत नहीं। छत्रछाया में रहने वाले अर्थात् सदा मौज में रहने वाले।* क्योंकि यहाँ पढ़ाई ऊंची पढ़ते हो लेकिन ऊंची पढ़ाई होते हुए भी निश्चय है कि हम विजयी हैं ही, पास हुए पड़े हैं। इसलिये मौज में रहते हैं।

 

  *कल्प-कल्प की पढ़ाई है, नयी बात नहीं है। तो सदा मोज् में रहो और दूसरों को भी मौज में रहने का सन्देश देते रहो, सेवा करते रहो। क्योंकि सेवा का ही फल इस समय भी और भविष्य में भी खाते रहेंगे। सेवा करेंगे तब तो फल मिलेगा।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  जो आत्मा स्वराज्य चलाने में सफल रहती है तो *सफल राज्य अधिकारी की निशानी है वह सदा अपने पुरुषार्थ से और साथ-साथ जो भी सम्पर्क में आने वाली आत्माएँ हैं वह भी सदा उस सफल आत्मा से सन्तुष्ट होंगी* और सदा दिल से उस आत्मा के प्रति शुक्रिया निकलता रहेगा।

 

✧  *सर्व के दिल से, सदा दिल के साज से वाह-वाह के गीत बजते रहेंगे, उनके कानों में सर्व द्वारा यह वाह-वाह का शुक्रिया का संगीत सुनाई देगा।* यह गीत ऑटोमेटिक है। इसके लिए टेपरिकार्डर बजाना नहीं पडता। इसके लिए कोई साधनों की आवश्यकता नहीं। यह अनहद गीत है। तो ऐसे सफल राज्य अधिकारी बने हो?

 

✧  क्योंकि *अभी के सफल राज्य अधिकारी भविष्य में सफलता का फल विश्व का राज्य प्राप्त करेंगे।* अगर सम्पूर्ण सफलता नहीं, कभी कैसे हैं, कभी कैसे हैं, कभी 100 परसेन्ट सफलता है, कभी सिर्फ सफलता है। कभी 100 परसेन्ट सफल नहीं हैं तो ऐसे राज्य अधिकारी आत्मा को विश्व का राज्य ताज प्राप्त नहीं होता लेकिन रॉयल फैमिली में आ जाता है।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ *बापदादा भिन्न-भिन्न रूप से बच्चों को समान बनाने की विधि सुनाते रहते हैं। विधि है ही बिन्दी, और कोई विधि नहीं है।* अगर विदेही बनते हो तो भी विधि है बिन्दी बनना। अशरीरी बनते हो, कर्मातीत बनते हो, सबकी विधि बिन्दी है। *इसलिए बापदादा ने पहले भी कहा है। अमृतवेले बापदादा से मिलन मनाते, रूह-रूहान करते जब कार्य में आते हो तो पहले तीन बिन्दियों का तिलक मस्तक पर लगाओ।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  आपस में आत्मिक लव रखना"*

 

_ ➳  एक खुबसूरत उपवन में खिले लाल गुलाब को, मै आत्मा देख रही हूँ...उसकी खूबसूरती और खुशबु मुझे... मेरे बाबा की याद दिलाती है कि.... मेरे मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी गोद में बिठाकर... *इसी तरहा कितना मीठा और प्यारा बनाकर... अपनी शक्तियो और गुणो से भरपूर कर... रूहानियत की रंगत और खुशबु से महकाया है.*.. मै आत्मा ईश्वरीय प्यार में अपनी खोयी महानता को पुनः पाकर... *विश्व धरा पर अनोखी बन, अपनी अदभुत छटा बिखेर रही हूँ.*.. और बरबस हर दिल को ईश्वरीय दिल की और आकर्षित कर रही हूँ... और इसी सोच में खोयी मै आत्मा... मीठे बाबा की कुटिया में पहुंचती हूँ...

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को सच्चे प्यार में भिगोकर मा प्यार का सागर बनाते हुए कहा :-*"मीठे प्यारे फूल बच्चे... इस सृष्टि में से आप भगवान द्वारा चुने हुए खुबसूरत फूल हो... सदा इस नशे में रहकर, अपनी रूहानियत से, अपने गुणो से, इस विश्व धरा को प्रेम की खुशबु से महका दो... आपस में इस कदर प्यार से रहो कि... *आपकी चलन से सहज ही मीठे बाबा की झलक दिखाई दे... और हर दिल इस सच्चे प्यार की कशिश में मीठे बाबा तक खिंचा चला आये.*.."

 

_ ➳  *मै आत्मा प्यारे बाबा से गुणो और शक्तियो की रंगत लेकर इस विश्व धरा को खुशियो के रंग में रंगते हुए कहती हूँ :-* मीठे प्यारे बाबा मेरे... मै आत्मा आपसे अथाह खजाने पाकर और गुणो से सजधज कर... अपनी अनोखी छटा से हर दिल को आपका दीवाना बनाती जा रही हूँ... *प्रेम तरंगो से हर दिल को सराबोर कर रही हूँ... और स्नेह का प्रतीक बनकर सबको सच्चे पिता से मिलवा रही हूँ.*.."

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी श्रीमत देकर मुझे असीम खुशियो में भरते हुए कहा ;-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... देह की दुनिया में फंसे दुखो के दलदल में लिप्त... *विश्व की आत्माओ को सच्चे पिता से मिलवाकर... उनके दामन में भी सुख भरे फूल खिलाओ... उन्हें भी सच्ची खुशियो का पता दे आओ... उन्हें भी आप समान ज्ञान रत्नों से दौलतमंद बनाओ.*.. और आपस बहुत प्यार से रह, और स्नेह की धारा बहाकर, हर दिल का खुशियो से सिंचन करो... 

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के प्यार में डूबकर गुणो की प्रतिमूर्ति बनकर कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... देह भान में मै आत्मा स्नेह को भूलकर कड़वी और शुष्क हो गयी थी... *आपने अपनी मिठास से भरकर, मुझे प्रेम स्वरूप बना दिया है... आज यह ईश्वरीय प्रेम उपहार मै हर दिल को दे रही हूँ..*. सबकी प्यार से पालना करने वाली जगत मां बन गयी हूँ... और मुझे इतना खुबसूरत बनाने वाले पिता से मिलवा रही हूँ..."

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को रूहानियत से सराबोर कर प्यार का प्रतीक बनाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे... आप ब्राह्मण बच्चे ईश्वर पिता की... पलको से चुने हुए पसन्दीदा फूल हो... इस खुमारी में सदा खोये रहो... और *आपस में रूहानियत की मिसाल बनकर, बहुत बहुत प्यार से रहो... सदा खुशियो में चहकते हुए, स्नेह में डूबे हुए, सबको मीठे बाबा का पता देकर*... इस विश्व धरा को सुखो की बगिया बनाने में सहयोगी बनो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा की बाँहों में खोकर प्यार में मन्त्रमुग्ध होकर कहती हूँ ;-* "सच्चे सहारे मेरे बाबा... *कब सोचा था मेने, कि यूँ भगवान आकर...  मुझ पर इतनी मेहनत करके मुझे इतना प्यारा और मीठा बनाएगा... और असीम सुख शांति से मेरा यूँ जीवन सजाएगा... आज मै आत्मा कितनी खुश हूँ* और यह ख़ुशी में सब पर लुटा रही हूँ... और सबको मीठे बाबा के घर का पता दे रही हूँ..."मीठे बाबा को अपने प्यार की दास्ताँ सुनाकर, और प्यार की तरंगो से तरंगित होकर... मै आत्मा इस धरा पर लौट आयी...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- पीस और ब्लिस का वरदान लेने के लिए शमा पर पूरा फ़िदा होना है*"

 

_ ➳  हीरे के समान चमकती मैं मस्तक मणि आत्मा इस देह में भृकुटि सिहांसन पर विराजमान हो कर अपनी दिव्य आभा चारों ओर बिखेर रही हूं। *मैं अजर, अमर, अविनाशी आत्मा शिव पिता की अजर, अमर, अविनाशी सन्तान हूं*। मेरा वास्तविक स्वरुप तो हीरे के समान अति उज्ज्वल ही है किंतु देह अभिमान में आने के कारण, *विकारों की प्रवेशता ने मेरे इस अति उज्ज्वल रूप को लोहे के समान बना कर उसे मैला कर दिया था* जिसे मेरे दिलाराम दिलरुबा शिव बाबा ने आ कर ज्ञान और योग द्वारा फिर से चमकदार बनाने का सहज उपाय बता दिया।

 

_ ➳  मेरे दिलाराम शिव बाबा अपनी श्रेष्ठ मत द्वारा हर *रोज ज्ञान और योग रूपी साबुन से मुझ आत्मा की धुलाई कर मेरे मैले हो चुके स्वरूप को फिर से चमकदार बना कर मुझ आत्मा को कौड़ी से हीरे जैसा बना रहे हैं*। मेरे कौड़ी तुल्य जीवन को हीरे तुल्य बनाने वाले ऐसे दिलाराम बाप पर मुझे कितना बलिहार जाना चाहिए, यह विचार करते करते अपने दिलरुबा शिव बाबा से मिलने के लिए मैं आत्मा इस नश्वर देह को छोड़ चल पड़ती हूँ उस रूहानी यात्रा पर जो मुझे मेरे दिलाराम शिव बाबा तक पहुंचाने वाली है।

 

_ ➳  मन मे अपने शिव प्रीतम से मिलने का उमंग उत्साह लिए, ज्ञान और योग के पंख लगाए मैं आत्मा उड़ती जा रही हूं। सूर्य, चांद, सितारों को पार करते हुए उससे परे सूक्ष्म लोक को भी पार करते हुए मैं पहुंच गई आत्माओं की उस निराकारी दुनिया मे जहां मेरे शिव पिया रहते हैं। *अब मैं देख रही हूं अपने सामने अपने दिलरुबा शिव बाबा को जिनकी अनन्त शक्तियों रूपी किरणों से यह निराकारी दुनिया एक दिव्य प्रकाश से प्रकाशित हो रही है*। शांति और शक्ति के शक्तिशाली वायब्रेशन इस पूरे ब्रह्मांड में सर्वत्र फैले हुए हैं जो मन को असीम शान्ति और शक्ति से भरपूर कर शक्तिशाली बना रहे हैं।

 

_ ➳  गहन शान्ति की अनुभूति करते हुए अपने शिव पिया के सानिध्य में मैं उनकी सर्वशक्तियों से स्वयं को भरपूर कर रही हूं। उनसे आ रही सर्वशक्तियों की शक्तिशाली किरणे मुझ आत्मा के ऊपर चढ़ी विकारों की कट को जला कर मुझे हीरे के समान चमकदार बना रही है। मेरा स्वरुप अति उज्ज्वल होता जा रहा है। *विकर्मों का बोझ मुझ आत्मा के ऊपर से उतरने लगा हैं और मैं स्वयं को एकदम हल्का अनुभव करने लगी हूँ। अपने मीठे प्यारे शिव बाबा की लाइट और माइट को स्वयं में समा कर लाइट माइट स्वरूप बन कर अब मैं आत्मा लौट रही हूँ* फिर से उसी कर्मक्षेत्र पर अपना पार्ट बजाने के लिए। अपनी साकारी देह में प्रवेश कर मैं आत्मा फिर से आ कर भृकुटि सिहांसन पर विराजमान हो जाती हूँ।

 

_ ➳  साकारी तन में विराजमान हो कर, इस कर्मभूमि पर रहते, हर कर्म करते अब मैं आत्मा अपने शिव पिया की शिक्षाओं को जीवन मे धारण कर अपने जीवन को हीरे तुल्य बनाने का दृढ़ संकल्प करती हूं। मेरा *यह दिव्य अलौकिक ब्राह्मण जीवन मेरे दिलाराम शिव बाबा की अमानत है इसलिए मनमत या परमत पर चल कर मुझे इस अमानत में खयानत नही डालनी* बल्कि एक-एक कदम अपने दिलाराम बाबा की श्रेष्ठ मत पर चल कर अब मुझे उन पर पूरी तरह बलिहार जाना है। सच्चा परवाना बन शमा पर पूरी तरह फिदा हो जाना है।

 

_ ➳  मन ही मन स्वयं से यह दृढ़ प्रतिज्ञा करती हुई अपने शिव पिया की श्रेष्ठ मत पर चल अब मै अपने हर कर्म को दिव्य और श्रेष्ठ बना रही हूँ। *शिव बाबा द्वारा रचे इस रुद्र ज्ञान यज्ञ में स्वयं को समर्पित कर, ईश्वरीय कार्य मे उनकी मददगार बन उन पर फिदा होने का सच्चा सबूत दे रही हूं*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं संगठन में सहयोग की शक्ति द्वारा विजयी बनने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं सर्व के शुभचिंतक  आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा कोई भी इच्छा रखने से सदा मुक्त हूँ  ।*

   *मैं सदा अच्छी आत्मा हूँ  ।*

   *मैं आत्मा इच्छा मात्रम् अविद्या हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. *सतयुग में या मुक्तिधाम में मुक्ति व जीवनमुक्ति का अनुभव नहीं कर सकेंगे। मुक्ति-जीवनमुक्ति के वर्से का अनुभव अभी संगम पर ही करना है।* जीवन में रहतेसमय नाजुक होते, परिस्थितियाँ, समस्यायें, वायुमण्डल डबल दूषित होते हुए भी इन सब प्रभाव से मुक्तजीवन में रहते इन सर्व भिन्न-भिन्न बन्धनों से मुक्त एक भी सूक्ष्म बन्धन नहीं हो - ऐसे जीवन मुक्त बने होवा अन्त में बनेंगे? अब बनेंगे या अन्त में बनेंगे?

 

 _ ➳  2. *बापदादा अभी से स्पष्ट सुना रहे हैंअटेन्शन प्लीज। हर एक ब्राह्मण बच्चे को बाप को बन्धनमुक्तजीवनमुक्त बनाना ही है।* चाहे किसी भी विधि से लेकिन बनाना जरूर है। जानते हो ना कि विधियाँ क्या हैंइतने तो चतुर हो ना! तो बनना तो आपको पड़ेगा ही। चाहे चाहोचाहे नहीं चाहोबनना तो पड़ेगा ही। फिर क्या करेंगे? (अभी से बनेंगे) *आपके मुख में गुलाबजामुन। सबके मुख में गुलाबजामुन आ गया ना। लेकिन यह गुलाबजामुन है - अभी बन्धनमुक्त बनने का। ऐसे नहीं गुलाबजामुन खा जाओ।*

 

✺   *ड्रिल :-  "संगम पर बन्धनमुक्त, जीवनमुक्त बनने का अनुभव करना"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा  *फर्श से न्यारी होती हुई एक बाबा से रिश्ता रख फरिश्ता बन उड़ चलती हूँ फरिश्तों की दुनिया में...* जहाँ बापदादा मेरे ही इन्तजार में बैठे हुए हैं... चारों ओर सफेद चमकीले प्रकाश की आभा बिखेरते हुए बापदादा अपने कोमल हाथों से मुझे अपनी गोदी में बिठाते हैं... बाबा अपनी मीठी दृष्टि देते हुए अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रखते हैं...  

 

 _ ➳  *बाबा की मीठी दृष्टि मुझ आत्मा में मिठास घोल रही है...* मैं आत्मा भी बाप समान मीठी बन रही हूँ... मुझ आत्मा के पुराने स्वभाव-संस्कार बाहर निकल रहे हैं... मैं आत्मा अटेन्शन की शक्ति द्वारा परिस्थितियों, समस्याओें, वायुमण्डल के  प्रभाव से मुक्तशरीर में रहते इन सर्व बन्धनों से न्यारी एवं प्यारी होती जा रही हूँ... मोह के सूक्ष्म बन्धन सब समाप्त हो रहे है... बाबा के हाथों से दिव्य अलौकिक गुण व शक्तियां निकलकर मुझ फरिश्ते में प्रवाहित हो रहे हैं... मुझ आत्मा के आसुरी अवगुण भस्म हो रहे हैं... मैं आत्मा दिव्य गुणों को धारण कर धारणा सम्पन्न अवस्था का अनुभव कर रही हूँ...

 

 _ ➳  मैं आत्मा स्व को परिवर्तित कर रही हूँ... मैं आत्मा कलियुगी संस्कारों से मुक्त हो रही हूँ... और संगमयुगी श्रेष्ठ संस्कारों को स्वयं में धारण कर रही हूँ... अब  *मैं आत्मा श्रीमत अनुसार ब्राह्मण कुल की सर्व धारणाओं पर चल रही हूँ...* मैं आत्मा स्व-परिवर्तन द्वारा सर्व को परिवर्तित कर रही हूँ...

 

 _ ➳  *मैं आत्मा परिपक्वता की शक्ति द्वारा परिवर्तन कर रही हूँ...* हर परिस्थिति में अचल अडोल बन विजय प्राप्त कर रही हूँ... कैसी भी परिस्थिति अब मुझ आत्मा को हिला नहीं सकती है... मैं आत्मा हर परिस्थिति में अटेंशन अपनी धारणा में परिपक्व रहती हूँ...

 

 _ ➳  अब मैं आत्मा सदा अटेंशन रख परिवर्तन करने की कला से माया के सभी रूपों को परिवर्तित कर रही हूँ... परिपक्वता की शक्ति से मैं आत्मा सर्व मर्यादाओं का पालन कर रही हूँ... *मैं आत्मा अपनी निर्मान' स्थिति द्वारा हर गुण को प्रत्यक्ष कर रही हूँ...* मैं आत्मा धर्म सत्ताधारी बन इन गुणों का अनुभव कर रही हूँ... बाबा मुझ आत्मा से खुश हो कर मुझे गुलाबजामुन खिला रहे हैं...

 

 _ ➳  बाबा की शक्तिशाली किरणें मुझ फ़रिश्ते से होती हई विश्व के कोने कोने में पहुँच रही है... और *विश्व की सर्व आत्माओं तक बाबा का सन्देश पहुंचा रही है... विश्व की हर आत्मा धरती पर आये भगवान को पहचान रही है और बाबा से अपना जन्म सिद्ध अधिकार मुक्ति और जीवन मुक्ति का वर्सा प्राप्त कर रही है...* मैं फरिश्ता सदैव इसी तरह बाबा की सेवा में तत्पर विश्व की सर्व आत्माओं को आप समान बनाने की सेवा कर अपनी झोली दुआओं से भर रहा हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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