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 14 / 01 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *"हम सब आत्मा भाई भाई हैं" - यह पाठ पक्का किया और करवाया ?*

 

➢➢ *कर्म-अकर्म-विकर्म की गुह्य गति को बुधी में रखा ?*

 

➢➢ *समय पर हर गुण व शक्ति को यूज़ किया ?*

 

➢➢ *शक्तिशाली संकल्प रच डबल लाइट अवस्था का अनुभव किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *जब आत्मिक शक्ति वाली, सेमी प्योर आत्मायें अपनी साधना द्वारा आत्माओं का आह्वान कर सकती हैं,* अल्पकाल के साधनों द्वारा दूर बैठी हुई आत्माओं को चमत्कार दिखाकर अपनी तरफ आकर्षित कर सकती हैं, *तो परमात्म शक्ति अर्थात् सर्व श्रेष्ठ शक्ति क्या नहीं कर सकती परन्तु इसके लिए विशेष एकाग्रता का अभ्यास चाहिए।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं समर्थ बाप और समर्थ युग की स्मृति द्वारा व्यर्थ को समाप्त करने वाली समर्थ आत्मा हूँ"*

 

  सदा अपने को समर्थ आत्माएं समझकर चलते हो? जब सर्वशक्तिवान की स्मृति है तो स्वत: समर्थ हो। समर्थ आत्मा की निशानी क्या होगी? *जहाँ समर्थी है वहाँ व्यर्थ सदा के लिए समाप्त हो जाता है। समर्थ आत्मा अर्थात् व्यर्थ से किनारा करने वाले। संकल्प में भी व्यर्थ नहीं। ऐसे समर्थ बाप के बच्चे सदा समर्थ।*

 

आधा कल्प तो व्यर्थ सोचा, व्यर्थ किया-अब संगमयुग है समर्थ युग। समर्थ युग, समर्थ बाप और समर्थ आत्माएं। तो व्यर्थ समाप्त हो गया ना। *सदा यह स्मृति मे रखो कि हम समर्थ युग के वासी, समर्थ बाप के बच्चे, समर्थ आत्मा हैं। जैसा समय, जैसा बाप वैसे बच्चे।*

 

*कलियुग है व्यर्थ। जब कलियुग का किनारा कर चुके, संगमयुगी बन गये तो व्यर्थ से किनारा हो ही गया। तो सिर्फ समय की याद रहे तो समय के प्रमाण स्वत: कर्म चलेंगे।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  यह पक्का है कि हम फरिश्ते हैं? फरिश्ता भव' का वरदान सभी को मिला हुआ है? *एक सेकण्ड में फरिश्ता अर्थात डबल लाइट बन सकते हो?* एक सेकण्ड में, मिनट में नहीं, 10 सेकण्ड में नहीं, एक सेकण्ड में सोचा और बना, ऐसा अभ्यास है? अच्छा जो एक सेकण्ड में बन सकते हैं, दो सेकण्ड नहीं, एक सेकण्ड में बन सकते हैं, वह एक हाथ की ताली बजाओ।

 

✧  बन सकते हैं? ऐसे ही नहीं हाथ उठाना। डबल फारेनर नहीं उठा रहे हैं। टाइम लगता है क्या? अच्छा जो समझते हैं कि थोडा टाइम लगता है, एक सेकण्ड में नहीं, थोडा टाइम लगता है, वह हाथ उठाओ। (बहुतों ने हाथ उठाया) अच्छा है, लेकिन *लास्ट घडी का पेपर एक सेकण्ड में आना है, फिर क्या करेंगे?*

 

✧  *अचानक आना है और सेकण्ड का आना है।* हाथ उठाया, कोई हर्जा नहीं। महसूस किया, यह भी बहुत अच्छा। परंतु *यह अभ्यास करना ही है। करना ही पडेगा, नहीं, करना ही है।* यह अभ्यास बहुत-बहुत-बहुत आवश्यक है। चलो फिर भी बापदादा कुछ टाइम देते हैं। कितना टाइम चाहिए? दो हजार तक चाहिए।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *साइलेंस पॉवर प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *अन्तिम पुरुषार्थ याद का ही है।* इसलिए याद की स्टेज वा अनुभव को भी बुद्धि में स्पष्ट समझना आवश्यक है। बिन्दु रुप की स्थिति क्या है और अव्यक्त स्थिति क्या है, दोनों का अनुभव क्या-क्या है? क्योंकि नाम दो  कहते हैं तो जरूर दोनों के अनुभव में भी अन्तर होगा। चलते-फिरते बिन्दु रूप की स्थिति इस समय कम भी नहीं लेकिन ना के बराबर ही कहें। इसका भी अभ्यास करना चाहिए। *बीच-बीच में एक दो मिनट भी निकाल कर इस बिन्दी रूप की प्रैक्टिस करनी चाहिए।* जैसे जब कोई ऐसा दिन होता है तो सारे चलते-फिरते हुए ट्रैफिक को भी रोक कर तीन मिनट साइलेन्स की प्रैक्टिस कराते हैं। सारे चलते हुए कार्य को स्टॉप कर लेते हैं।

〰✧  *आप भी कोई कार्य करते हो वा बात करते हो तो बीच-बीच में यह संकल्पों की ट्रैफिक को स्टॉप करना चाहिए।* एक मिनट के लिए भी मन के संकल्पों को चाहे शरीर द्वारा चलते हुए कर्म को बीच में रोक कर भी यह प्रैक्टिस करना चाहिए। *अगर यह प्रैक्टिस नहीं करेंगे तो बिन्दु रूप की पावर फुल स्टेज कैसे और कब ला सकेंगे?* इसलिए यह अभ्यास करना आवश्यक है।

〰✧  बीच-बीच में यह प्रैक्टिस प्रैक्टिकल में करते रहेंगे तो जो आज यह बिन्दु रुप की स्थिति मुश्किल लगती है वह ऐसे सरल हो जायेगी जैसे अभी मैजारिटी को अव्यक्त स्थिति सहज लगती है। पहले जब अभ्यास शुरू किया तो व्यक्त में अव्यक्त स्थिति में रहना भी मुश्किल लगता था। *अभी अव्यक्त स्थिति में रह कार्य करना जैसे सरल होता जा रहा है वैसे ही यह बिन्दुरुप की स्थिति भी सहज हो जायेगी।* अभी महारथियों को यह प्रैक्टिस करनी चाहिए।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- हर एक को बाप का परिचय देना"*

 

_ ➳  *इस सुहानी संगम के अमृतवेले मेरे प्राण प्यारे बाबा अलौकिक जन्मदिन की बधाई देते हुए मुझे प्यार से जगाते हैं... मैं आत्मा भी बाबा को जन्मदिन की बधाई देती हूँ... कितना अनोखा संगम है इस अनोखे संगम युग पर... बाप और बच्चे का जन्मदिन एक ही दिन... प्यारे बाबा मुझे गोदी में उठाकर वतन में लेकर जाते हैं...* जहाँ चारों ओर रंग बिरंगे हीरों से सजे हुए बैलून्स हैं... इन बैलून्स से रंग बिरंगी किरणें निकलकर मुझ आत्मा की चमक और बढ़ा रही है... प्यारे बाबा मीठी रूह-रिहान करते हुए मुझे ज्ञानामृत पिलाते हैं...

 

   *सर्व आत्माओं को बाप का परिचय देने सर्विस की भिन्न भिन्न युक्तियाँ बतलाते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे फूल बच्चे... ईश्वर पिता की गोद में फूल सा खिलने का जो सुख पाया है उस सुख को दूसरो के दामन में भी सजाओ... *दुखो में तड़फ रहे पुकार रहे हताश और निराश हो गए भाई आत्माओ को सुख और शांति की राह दिखाओ... सच्चे पिता से मिलाकर उनको भी खजानो से भरपूर कर दो...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा प्रभु प्यार की कश्ती में डूबकर अनंत अविनाशी खुशियों से भरपूर होते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... मै आत्मा आपसे अथाह खुशियो को पाकर सबको इस खान का मालिक बना रही हूँ... पूरा विश्व खुशियो से गूंज उठे ऐसी परमात्म लहर फैला रही हूँ... *प्यारे बाबा से हर दिल का मिलन करवा रही हूँ... और आप समान भाग्य सजा रही हूँ...*

 

   *मीठे बाबा खिवैया बन काँटों के समुंदर से फूलों के बगीचे में ले जाते हुए कहते हैं:-* मीठे प्यारे लाडले बच्चे... आप समान सबके दुखो को दूर करो... आनन्द प्रेम शांति से हर मन को भरपूर करो... सबको उजले सत्य स्वरूप के भान का अहसास दिलाओ... *प्यारा बाबा आ गया है यह दस्तक हर दिल पर दे आओ... सब बिछड़े बच्चों को सच्चे पिता से मिलवाओ और दुआओ का खजाना पाओ...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा फ़रिश्ता बन चारों ओर मेरा बाबा आ गया के ज्ञान फूल बरसाते हुए कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... *मै आत्मा आपसे पाये प्यार दुलार और ज्ञान रत्नों को हर दिल को बाटने वाली दाता बन गई हूँ...* सबको देह से अलग सच्ची मणि आत्मा के नशे से भर रही हूँ... प्यारे बाबा का परिचय देकर उनके दुखो से मुरझाये चेहरे को सुखो से खिला रही हूँ...

 

   *मेरे बाबा कलियुगी अंधकार को दूर कर अखंड ज्योति बन ज्ञान की लौ जलाते हुए कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... अब ईश्वरीय प्रतिनिधि बन सबके जीवन को खुशियो से भर दो... विचार सागर कर नई योजनाये बनाओ... और ईश्वरीय पैगाम हर आत्मा तक पहुँचाओ... *सबकी जनमो की पीड़ा को दूर कर ख़ुशी उल्लास उमंगो से जीवन सजा आओ... पिता धरा पर उतर आया है... पुकारते बच्चों को जरा यह खबर सुना आओ...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा सम्बन्ध संपर्क में आने वाली हर आत्मा को उमंग उत्साह के पंख दे उड़ाते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा आपसे पायी अनन्त खुशियो की चमक सबको दिखा रही हूँ... प्यारा बाबा खुशियो की खान ले आया है खजानो को लुटाने आया है...* यह आहट हर दिल पर करती जा रही हूँ... भर लो अपनी झोलियाँ यह आवाज सबको सुना रही हूँ...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  कर्म - अकर्म - विकर्म की गुह्य गति को बुद्धि में रख कोई भी विकर्म नही करना है*

 

_ ➳  कर्मो की जिस गुह्य गति का ज्ञान भगवान से मुझे मिला है उस कर्म - अकर्म - विकर्म की गति को बुद्धि में रख अब मुझे अपने हर कर्म पर अटेंशन देते हुए इस बात का पूरा ध्यान रखना है कि अनजाने में भी मुझ से ऐसा कोई कर्म ना हो जो विकर्म बने। *अपने हर कर्म को श्रेष्ठ बनाने के लिए सबसे पहले मुझे अपने हर संकल्प को शुद्ध और श्रेष्ठ बनाना है। और इसके लिये अपने प्यारे पिता की आज्ञाओं को अपने जीवन मे धारण कर कदम - कदम श्रीमत पर चलने का मुझे पूरा अटेंशन रखना है*। मन ही मन स्वयं से बातें करती मैं अपने आप से और अपने प्यारे बाबा से प्रोमिस करती हूँ कि बिना सोचे समझे कोई भी कर्म अब मैं कभी नही करूँगी। हर कर्म करने से पहले चेक करूँगी कि वो श्रीमत प्रमाण है या नही!

 

_ ➳  कर्म - अकर्म - विकर्म की गति को बुद्धि में रख अपने हर कर्म को श्रेष्ठ बनाने की प्रतिज्ञा अपने प्यारे पिता से करके अब मैं कर्मो की अति गुह्य गति का ज्ञान देने वाले ज्ञानसागर अपने शिव बाबा की अति मीठी याद में मन बुद्धि को स्थिर करके बैठ जाती हूँ और अपने मन बुद्धि का कनेक्शन परमधाम में रहने वाले अपने पिता से जोड़ लेती हूँ। *जैसे बिजली का स्विच ऑन करते ही सारे घर मे प्रकाश फैल जाता है ऐसे ही स्मृति का स्विच ऑन करते ही परमधाम से परमात्म शक्तियों की लाइट सीधी मुझ आत्मा के ऊपर पड़नी शुरू हो जाती है और मेरे चारों तरफ एक अद्भुत दिव्य अलौकिक प्रकाश फैल जाता है*। इस सतरंगी प्रकाश के खूबसूरत झरने के नीचे बैठी मैं महसूस करती हूँ जैसे धीरे - धीरे मैं शरीर के भान से मुक्त होकर एक बहुत ही न्यारी लाइट स्थिति में स्थित होती जा रही हैं। स्वयं को मैं बहुत ही हल्का अनुभव कर रही हूँ।

 

_ ➳  ये हल्केपन का निराला अनुभव मुझे देह के हर बंधन से मुक्त कर रहा है। देह रूपी डाली का आधार छोड़ मैं आत्मा पँछी बड़ी आसानी से ऊपर की ओर उड़ान भर रही हूँ और देह से निकल कर चमकती हुई अति सूक्ष्म ज्योति बन अपनी किरणों को बिखेरती हुई आकाश की ओर उड़ती जा रही हूँ। *देह और देह की इस साकारी दुनिया को पार कर, मैं आकाश से ऊपर अब फरिश्तों की आकारी दुनिया से होकर अपनी निराकारी दुनिया में पहुँच गई हूँ*। आत्माओं की इस निराकारी दुनिया अपने इस शान्तिधाम घर मे आकर मैं गहन शांति का अनुभव कर रही हूँ। *कुछ क्षणों के लिए गहन शांति के गहरे अनुभवों में खोकर, अब मैं शांति के सागर, सुख के सागर, प्रेम और पवित्रता के सागर अपने पिता के पास पहुँच कर, मन बुद्धि के नेत्रों से उन्हें निहार रही हूँ*।

 

_ ➳  अपने पिता के अति सुन्दर मनभावन स्वरूप को मैं देख रही हूँ जो मेरे ही समान एक प्वाइंट ऑफ लाइट, एक अति सूक्ष्म बिंदु हैं किंतु गुणों में वो सिंधु हैं। उनके सानिध्य में, उनसे आ रही सर्वशक्तियों की किरणों के फव्वारे के नीचे बैठ मैं स्वयं को उनकी शक्तियों से भरपूर कर रही हूँ। *अपने परमधाम घर में अपने परमपिता परमात्मा शिव बाबा के सामने निराकारी, निर्विकारी और निर्संकल्प स्थिति में स्थित हो कर मैं गहन शांति का अनुभव कर रही हूँ*। बाबा से सर्वगुणों और सर्वशक्तियों की अनन्त सतरंगी किरणे निकल कर मुझ आत्मा में समा रही हैं और मैं स्वयं में इन गुणों और शक्तियों को भरकर स्वयं को सर्वगुण और सर्वशक्तिसम्पन्न बना रही हूँ। *बीज रूप अवस्था की मैं गहन अनुभूति कर रही हूँ जो मुझे अतीन्द्रिय सुख प्रदान कर रही है*।

 

_ ➳  अतीन्द्रिय सुख के झूले में झूलने का भरपूर आनन्द लेकर और शक्ति स्वरूप स्थिति में स्थित हो कर अब मैं पुनः लौट रही हूँ फिर से देहधारियों की साकारी दुनिया में। फिर से अपने साकार तन में, साकार दुनिया मे, साकार सम्बन्धो के बीच अपने ब्राह्मण स्वरुप में मैं स्थित होकर देह और देह की दुनिया मे फिर से अपना पार्ट बजा रही हूँ।*किन्तु देह और देहधारियों के बीच में रहते हुए भी अपने सत्य स्वरूप में टिक कर अपनी दिव्यता और रूहानियत का अनुभव करते हुए अब मैं उपराम स्थिति में स्थित होकर, कर्म - अकर्म - विकर्म की गुह्य गति को बुद्धि में रख कर ही हर कर्म कर रही हूँ*। कर्म - अकर्म - विकर्म की गति बुद्धि में रहने से अब हर कर्म मैं सोल कॉन्शियस होकर कर रही हूँ इसलिये मेरा हर कर्म स्वत: ही श्रेष्ठ बनता जा रहा है।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं समय पर हर गुण वा शक्त्ति को यूज करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं अनुभवी मूर्त आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा नाजुकपन के संकल्पों को समाप्त करती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदैव शक्तिशाली संकल्प रचती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा डबल लाइट रहती हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. *इस समय आप हर एक को, आत्माओं प्रति रहमदिल और दाता बन कुछ न कुछ देना ही हैचाहे मन्सा सेवा द्वारा दो, चाहे शुभ भावना से दोश्रेष्ठ सकाश देने की वृत्ति से दोचाहे आध्यात्मिक शक्ति सम्पन्न बोल से दोचाहे अपने स्नेह सम्पन्न सम्बन्ध-सम्पर्क से दो लेकिन कोई भी आत्मा वंचित नहीं रहे।* दाता बनोरहमदिल बनो। चिल्ला रहे हैं। बाप के आगे अपनी-अपनी भाषा में चिल्ला रहे हैं - शान्ति दोस्नेह दोदिल का प्यार दो, सुख की किरणें दिखाओ। तो बाप कैसे देंगेआप बच्चों द्वारा ही देंगे ना! *बाप के आप सभी राइट हैण्ड हो। कोई को कुछ भी देना होता है तो हैण्ड द्वारा ही देते हैं ना! तो आप सभी बाप के राइट हैण्ड हो ना!*

 

 _ ➳  2. तो अभी बाप राइट हैण्डस द्वारा आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली तो दिलायेंगे ना! बिचारों को अंचली भी नहीं देंगे तो कितने तड़पेंगे। *अभी सभी हद की बातों से ऊँचे हो जाओ। हद की बातों मेंहद के संस्कारों में समय नहीं गँवाओ।*   

 

✺   *ड्रिल :-  "बाप का राइट हैण्ड रहमदिल बनना"*

 

 _ ➳  ज्ञान सूर्य बाबा की संतान मैं आत्मा मास्टर ज्ञान सूर्य हूँ... *बाबा के दिये ज्ञान को बुद्धि में बिठा कर मैं आत्मा उसका मनन चिन्तन कर रही हूँ...* इस दुनिया के कोलाहल से दूर शान्त स्थान पर जाकर मैं आत्मा बैठ गयी हूँ... स्वयं को देह से न्यारा कर आत्मिक स्वरूप में स्थित करती हूँ... कर्मेन्द्रियों से भी न्यारी हो रही हूँ और एक दम हल्कापन महसूस कर रही हूँ... अपने शांत स्वरूप में मैं आत्मा स्वयं को देख रही हूँ

 

 _ ➳  अपनी इस शांत अवस्था में मैं आत्मा कुछ आवाज़ें सुनती हूँ... पहले ये आवाज़ें थोड़ी धीमी हैं फिर धीरे धीरे ये आवाज़ें तेज़ होने लगती हैं... ये समस्त आवाज़ें मैं अब सुन पा रही हूँ... *ये विश्व की उन सभी आत्माओ की आवाज़े हैं जो दुखी और परेशान हैं... अपने कष्टों से मुक्त होने के लिए ये आत्मायें चीख रही हैं, चिल्ला रही हैं...* कुछ आत्मायें शरीर के रोग से भयंकर दर्द में हैं तो कुछ आत्मायें मानसिक कष्ट में हैं... कोई संबंधों में धोखा मिलने से दुखी हैं... किसी के अपने प्रिय जन ने शरीर छोड़ा है...

 

 _ ➳  इस तरह असंख्य आत्मायें अपने अपने दुखों से दुखी हो इन समस्त कष्टों से मुक्ति पाने को चीख पुकार कर रही हैं... *मैं आत्मा इन सबकी ये करुण पुकार सुनकर अपने प्यारे बाबा को याद करती हूँ और बाबा की शक्तिशाली किरणों को स्वयं में भरती हूँ...* बाबा की किरणें मुझमे समा गयी हैं... अब ये किरणें मुझसे निकल कर उन समस्त आत्माओ तक पहुच रही हैं... और वो आत्मायें जो अभी तक चीख पुकार कर रही थीं वो ये वाइब्रेशन को कैच कर रही हैं...

 

 _ ➳  मैं आत्मा पॉवरफुल सकाश इन सभी आत्माओ को दे रही हूँ... *सभी दुखी और अशांत आत्मायें मुझ आत्मा से सकाश को प्राप्त कर अपने दुखों को भूल रही हैं...* उनके कष्ट कम हो रहे हैं और ये समस्त आत्मायें आश्चर्य से सोच रही हैं कि ये शांति और शक्तियों की किरणें उन्हें कहाँ से मिल रही हैं... आत्मायें स्वतः ही सहज रूप से मेरी ओर आकर्षित हो रही हैं... और मैं आत्मा उन सभी को  निरंतर शक्तिशाली वाइब्रेशन देकर उनके सारे कष्टों से उन्हें मुक्त करती जा रही हूँ...

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने पिता परमात्मा की संतान उनकी हर श्रीमत का पालन करते हुए विश्व परिवर्तन के कार्य में उनकी सहयोगी बन रही हूँ... ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रख कर मैं आत्मा उनको फॉलो करते हुए आगे बढ़ रही हूँ... हर आत्मा को सुख और शांति की किरणें दे उनके दुखों को दूर कर रही हूँ... *मनसा वाचा कर्मणा सेवा करते हुए बाबा का राइट हैंड बन मैं आत्मा सेवा कर रही हूँ...* हद के संस्कारों और हद की बातों से ऊपर उठ कर मैं आत्मा रहमदिल बन सर्व को सुख शांति की किरणें देकर उनके दुखों को कम करने में उन्हें मदद कर रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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