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 14 / 03 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *"शांति, सुख, संपत्ति का सागर बाप हमें मिला है" - सदा इसी नशे में रहे ?*

 

➢➢ *अपना अहंकार छोड़ बाप समान निष्काम सेवा की ?*

 

➢➢ *अकाल तख़्त और दिल तख़्त पर बैठ सदा श्रेष्ठ कर्म किये ?*

 

➢➢ *स्वमान की सीट पर रह गुणवान और महान अवस्था का अनुभव किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *जिस समय जिस सम्बन्ध की आवश्यकता हो, उसी सम्बन्ध से भगवान को अपना बना लो।* दिल से कहो मेरा बाबा, और बाबा कहे मेरे बच्चे, इसी स्नेह के सागर में समा जाओ । *यह स्नेह छत्रछाया का काम करता है, इसके अन्दर माया आ नहीं सकती ।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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✺   *"मैं संगमयुगी श्रेष्ठ सच्चा ब्राह्मण हूँ"*

 

  2. सदा अपने को संगमयुगी श्रेष्ठ ब्रह्मण आत्मायें अनुभव करते हो? *सच्चे ब्राह्मण अर्थात् सदा सत्य बाप का परिचय देने वाले। ब्राह्मणों का काम है कथा करना, तुम कथा नहीं करते लेकिन सत्य परिचय सुनाते हो। ऐसे सत्य बाप का सत्य परिचय देने वाले, ब्राह्मण आत्मायें हैं, यही नशा रहे। ब्राह्मण देवताओंसे भी श्रेष्ठ हैं।*

 

  *इसलिए ब्राह्मणों का स्थान चोटी पर दिखाते हैं। चोटी वाले ब्राह्मण अर्थात् ऊँची स्थिति में रहने वाले। ऊँचा रहने से नीचे सब छोटे होंगे। कोई भी बात बड़ी नहीं लगेगी।* ऊपर बैठकर नीचे की चीज देखो तो छोटी लगेगी। कभी कोई समस्या बड़ी लगती तो उसका कारण नीचे बैठकर देखते हो। ऊपर से देखो तो मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।

 

  *तो सदा याद रखना -चोटी वाले ब्राह्मण हैं, इसमें बड़ी समस्या भी सेकण्ड में छोटी हो जायेगी। समस्या से घबराने वाले नहीं लेकिन पार करने वाले समस्या का समाधान करने वाले।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧   *यह पहली - पहली बात है जो कि तुम सभी को बताते हो कि - मैं आत्मा हूँ, न कि शरीर*। जब आत्मा होकर बिठाते हो तभी उनको फिर शरीर भूलता है। अगर आत्मा होकर नहीं बिठाते, तो क्या फिर देह सहित देह के संबन्ध भूल जाते! जब उनको बुलाते हो, तो क्या अपने शरीर से न्यारे होकर, जो न्यारा बाप है उनकी याद में नहीं बैठ सकते हो?

 

✧  अब सब बच्चे अपने को आत्मा समझ बैठो। सामने किसको देखें? आत्माओं के बाप को। इस स्थिति में रहने से व्यक्त से न्यारे होकर अव्यक्त स्थिति में रह सकेंगे। *'मैं आत्मा बिन्दु रुप हूँ' - क्या यह याद नहीं आता है*? बिन्दि रुप होकर बैठना नहीं आता? ऐसे ही अभ्यास को बढाते जाओगे तो एक सेकण्ड तो क्या, कितनी ही घण्टे इसी अवस्था में स्थित होकर इस अवस्था का रस ले सकते हो। इसी अवस्था में स्थित रहने से फिर बोलने कि जरूरत ही नहीं रहेगी।

 

✧  बिन्दु होकर बैठना कोई जड अवस्था नहीं है। जैसे बीज में सारा पेड़ समाया हुआ है, वैसे ही मुझ आत्मा में बाप की याद समायी हुई है। ऐसे होकर बैठने से सब रसनायें आयेगी और साथ भी यह नशा होगा कि - 'हम किसके सामने बैठे हैँ। बाप हमको भी अपने साथ कहाँ ले जा रहे है।' बाप तुम बच्चों को अकेला नहीं छोडता है। जो बाप का और तुम बच्चों का घर है, वहाँ पर साथ में ही लेकर जायेंगे। सब इकट्ठे चलने ही है। *आत्मा समझकर फिर शरीर में आकर कर्म भी करना है, परंतु कर्म करते हुए भी न्यारा और प्यारा होकरल रहना है*। बाप भी तुम बच्चों को देखते हैँ। देखते हुए भी बाबा न्यारा और प्यारा है ना। अच्छा।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  जो बन्धन मुक्त की स्थिति सुनाई कि शरीर में रहते हुए सिर्फ निमित ईश्वरीय कर्तव्य के लिए आधार लिया हुआ है। अधीनता नहीं निमत आधार लिया है। *जो निमित आधार शरीर को समझेंगे वह कभी भी अधीन नहीं बनेंगे। निमित आधार मूर्त ही सर्व आत्मओं के आधार मूर्त बन सकते हैं। जो स्वयं ही अधीन है वह उद्धार क्या करेंगे।* इसलिए सर्विस की सफलता इतनी है जितनी अधीनता से परे हरेक हैं।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  बाप समान बनना"*

 

_ ➳  मै आत्मा मीठे बाबा को अपने दिल की बात सुनाने के लिए झोपडी में पहुंचती हूँ... *एक पिता का विशाल ह्रदय देख देख अभिभूत हूँ.*.. कि बच्चे संगम पर भी अथाह सुखो में... और सतयुगी दुनिया के वैभव भी बच्चों के ही लिए है... और पिता झोपडी में बेठा, मुझे सुखो के अहसासो में भिगो रहा है... *बच्चे सदा के लिए सुख भरी दुनिया के मालिक बनकर, सदा अनन्त खुशियो में चहके... इन्ही जज्बातों में डूबा मेरा अलौकिक बाबा कितना निर्माण, कितना निर्विकारी, और निरहंकारी है... सब कुछ सिर्फ बच्चों के सुख के लिए... और बच्चों के सम्पूर्ण पावन बनने के इंतजार में बेठा... मेरा बाबा कितना मीठा और प्यारा है...* मीठे बाबा के लिए दिल में अथाह प्यार लेकर, मै आत्मा... झोपडी में प्रवेश करती हूँ...

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को विश्व कल्याण की भावनाओ से सजाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... सबके जीवन में आप समान खुशियो की बहारो को सजाओ... *ईश्वर पिता को पाकर, जो सच्चे अहसासो को आपने जिया है... उनकी अनुभूति हर दिल को भी कराओ... उनका भी सोया भाग्य जगाकर, आनन्द के फूलो से दामन सजाओ... सबको पतित से पावन बनाकर देवताई राज्य भाग्य दिलाओ..."*

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के अमूल्य ज्ञान को बुद्धि में समेटकर कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... *मै आत्मा आपकी यादो की छत्रछाया में पलकर, असीम खुशियो की मालिक बन गयी हूँ... यह खुशियां हर दिल पर उंडेल कर, उन्हें भी आप समान भाग्यशाली बना रही हूँ...* सबको पावनता भरी सुंदर राहो पर चलाकर... सुख के बगीचे में पहुंचा रही हूँ..."

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को दिव्य गुणो और शक्तियो से भरकर कहा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... ईश्वर पिता की यादो में गहरे डूबकर,श्रीमत के हाथो में अपना हाथ देकर... सबको श्रेष्ठ जीवन का मालिक सजाओ... *मीठे बाबा ने जो अपने प्यार की खुशबु में पावनता से सुगन्धित किया है... आप भी पावन बनने की खशबू हर दिल तक पहुँचाओ... सबको पावन बनने की युक्ति बताकर, सच्चे सुखो से दामन सजा आओ..."*

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे प्यारे बाबा मुझ आत्मा के उज्ज्वल भविष्य को सजाने में खपते हुए देख कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे दुलारे बाबा मेरे... मै आत्मा आपके अथाह प्यार को पाकर, प्रेम, सुख, शांति की तरंगो से भर गयी हूँ... *सबको ईश्वरीय राहो का राही बनाकर... दुखो के दलदल से बाहर निकाल रही हूँ... सुख भरे फूलो को खिलाकर, अधरों पर मीठी मुस्कान सजा रही हूँ...*

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपने महान भाग्य के नशे से भरते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... *ईश्वर पिता जो धरती पर अथाह खजानो को ले आया है... इस दौलत से हर दिल को रूबरू कराओ... सबको प्यारे बाबा से मिलवाकर, जनमो के दुखो से छुटकारा दिलवाओ... श्रीमत की सुखदायी छाँव में, पावन दुनिया का मालिक बनाओ...* सबकी सोयी तकदीर को जगाकर, असीम खजानो का मालिक बनाकर, दिव्यता से भर आओ...

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा से महा धनवान् बनकर पूरे विश्व में इस ज्ञान धन की दौलत लुटाकर कहती हूँ :-* "मीठे दुलारे बाबा मेरे... मै आत्मा आपसे पायी अथाह धन सम्पद्दा को... अपनी बाँहों में भरकर, हर दिल को आपकी ओर आकर्षित कर रही हूँ... *मुझे इस कदर प्यारा बनाने वाले, पिता की झलक, अपनी रूहानियत से सबको दिखा रही हूँ... और आपकी बाँहों में पालना दिलवाकर, पुनः पावन बना रही हूँ...* मीठे बाबा को दिल के सारे जज्बात सुनाकर मै आत्मा... अपने कर्म के बीच पुनः लौट आयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- निरहंकारी होकर रहना है*

 

_ ➳  अपने प्यारे बाबा के मीठे मधुर महावाक्यों को पढ़ते हुए मैं विचार करती हूँ कि कितने निरहंकारी है बाबा। कैसे हम बच्चों की गुप्त रीति पालना कर रहें हैं! कितना सम्मान देते हैं हमे! सब कुछ खुद कर रहें हैं और मान हम बच्चों को देते हैं! रोज मीठे बच्चे कहकर याद प्यार देते हैं, बच्चो को नमस्ते करते हैं। *वाह मेरा भाग्य वाह जो ऐसे ईश्वर बाप की पालना में पलने का सर्वश्रेष्ठ सौभाग्य मुझे प्राप्य हुआ। अपना असीम स्नेह बरसाने वाले अपने प्यारे मीठे बाबा की मीठी सी याद की मीठी सी मस्ती में डूबी मैं आत्मा मन बुद्धि के विमान पर सवार हो कर अब पहुँच जाती हूँ अपने उस मीठे से मधुबन घर में जहाँ भगवान स्वयं आकर अपने बच्चों के साथ उनके जैसा साकार रूप धारण करके उनसे मिलते हैं*, उनसे रूह रिहान करते हैं और उनसे मंगल मिलन मनाकर, अपना प्यार उन पर बरसा कर वापिस अपने धाम लौट जाते हैं।

 

_ ➳  परमात्मा की इस दिव्य अवतरण भूमि अपने मीठे मधुबन घर में पहुंचते ही हवाओं में फैली रूहानी खुशबू को मैं महसूस कर रही हूँ। *अपने इस घर के आंगन मे प्रवेश करते ही मैं देखती हूँ सामने ब्रह्मा बाबा के एक बहुत बड़े चित्र को जिसमे बाबा बाहें पसारे अपने बच्चों के स्वागत में खड़े हैं*। अपने इस साकार रथ पर विराजमान होकर भगवान कैसे अपने बच्चों का आह्वान करते हैं यह देखकर मन में खुशी की लहर दौड़ रही है और मन खुशी में गा रहा है "वाह बाबा वाह"। *अपने इस मीठे मधुबन घर मे आकर अब मैं देख रही हूँ यहाँ के कण - कण में समाई ब्रह्मा बाबा की साकार यादों को जिन्हें उनके हर कर्म के यादगार चित्रों के रूप में चित्रित किया गया है*।

 

_ ➳  हर चित्र में कर्म करते हुए बाबा का स्वरूप कितना न्यारा और प्यारा दिखाई दे रहा है। उनके ओरिजनल निराकारी स्वरुप की दिव्य चमक और निरहंकारिता की झलक उनके हर चित्र में मैं देख रही हूँ और उन चित्रों को देखते हुए उसी साकार पालना का अनुभव कर रही हूँ। *बाप समान बनने का दृढ़ संकल्प करके अब मैं मन बुद्धि के विमान पर बैठ पहुँच जाती हूँ बाबा के कमरे में जहाँ बाबा बैठे है अपने हर बच्चे को आप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनाने के लिए*। बाबा के ट्रांस लाइट के चित्र के सामने बैठ, बाबा को निहारते - निहारते मैं महसूस करती हूँ जैसे अपने लाइट माइट स्वरुप में मेरे सामने बैठ कर बाबा अपनी सारी लाइट माइट मुझ में प्रवाहित कर मुझे आप समान बना रहें हैं।

 

_ ➳  अपने लाइट माइट फ़रिश्ता स्वरूप में स्थित होकर मैं देख रही हूँ जैसे बाबा की भृकुटि से प्रकाश की अनन्त धाराएं निकल कर पूरे कमरे में फैल रही हैं और पूरा कमरा एक अलौकिक दिव्य आभा से जगमगा रहा है। *इन दिव्य अलौकिक किरणों को स्वयं में समा कर मैं गहन आनन्द का अनुभव कर रही हूँ। बाबा के मस्तक से निकल रही शक्तियों की धारायें और भी तीव्र होती जा रही हैं। ऐसा लग रहा है जैसे मेरे ऊपर शक्तियों का कोई झरना बह रहा हो*। रूहानी मस्ती में खो कर शक्तियों की इन किरणों को स्वयं में समाते हुए मैं स्वयं को बहुत ही बलशाली अनुभव कर रही हूँ।

 

_ ➳  स्वयं को परमात्म बल से भरपूर करके, ब्रह्मा बाप समान निराकारी, निर्विकारी और निरहंकारी बनने का दृढ़ संकल्प करके मैं बापदादा से प्रोमिस करती हूँ कि *जैसे ब्रह्मा बाप निराकारी सो साकारी बन सदा सर्व से न्यारे और शिव बाप के प्यारे बन कर रहे, वाणी से सदा निरहंकारी अर्थात् सदा रूहानी मधुरता और निर्मानता से भरपूर रहे और कर्म में हर कर्मेन्द्रिय द्वारा निर्विकारी अर्थात् प्युरिटी की पर्सनैलिटी से सदा सम्पन्न रहे ऐसा पुरुषार्थ ही अब मुझे करना है और बाप समान सम्पन्न बनना है*। स्वयं से और बाबा से यह प्रतिज्ञा करते हुए मैं अनुभव कर रही हूँ जैसे बाबा अपने वरदानी हस्तों से मुझे वरदान देकर, मेरी इस प्रतिज्ञा को पूरा करने की शक्ति मेरे अंदर भर रहें हैं। आप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनाने का बल मेरे अंदर भरकर बाबा जैसे फिर से अपने उसी स्वरूप में स्थित हो गए है।

 

_ ➳  मन बुद्धि के विमान पर बैठ मैं भी अब फिर से अपनी कर्मभूमि पर लौट आई हूँ। *अपने ब्राह्मण स्वरुप में स्थित होकर ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखते हुए, बाप समान निराकारी और निरहंकारी बनने का पूरा पुरुषार्थ अब मैं कर रही हूँ और अपने सम्पूर्णता के लक्ष्य को पाने की दिशा में निरन्तर आगे बढ़ रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं अकाल तख्त और दिलतख्त  पर बैठ सदा श्रेष्ठ कर्म करने वाली कर्मयोगी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं सदा स्वमान की सीट पर सेट रहकर गुणवान और महान बनने वाली शक्तिशाली आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  *एक दो के सहयोगी बनो जो सभी मास्टर सर्वशक्तिवान बन आगे उड़ते चलें। दाता बनकर सहयोग दो।*बातें नहीं देखो, सहयोगी बनो। स्वमान में रहो और सम्मान देकर सहयोगी बनो क्योंकि *किसी भी आत्मा को अगर आप दिल से सम्मान देते हो, यह बहुत-बहुत बड़ा पुण्य है क्योंकि कमजोर आत्मा को उमंग-उत्साह में लाया तो कितना बड़ा पुण्य है!* गिरे हुए को गिराना नहीं है, गले लगाना है अर्थात् बाहर से गले नहीं लगाना, *गले लगाना अर्थात् बाप समान बनाना। सहयोग देना।*

 

✺   *ड्रिल :-  "गिरे हुए को गिराना नहीं, गले लगाना"*

 

 _ ➳  मैं मास्टर सर्वशक्तिवान... सर्वशक्तिवान शिवबाबा से कंबाइंड हूँ... प्यारे बाबा से सर्वशक्तियों की किरणें निरन्तर मुझ आत्मा पर पड़ रहीं हैं... *मैं आत्मा पदमापदम सौभाग्यशाली... जो स्वयं भगवान मेरा हो गया... वाह मेरा भाग्य...बाबा ने मेरे सारे बोझ... चिंताएं... फिकरातों से मुक्त कर दिया... अब मुझे भी बाप समान बनकर सभी आत्माओं को सहयोग देकर... उन्हें आप समान बनाना है...* 

 

 _ ➳  *मैं आत्मा मास्टर दाता के स्वमान में रह हरेक आत्मा के प्रति शुभ भावना... शुभ कामना रख रही हूँ... मैं आत्मा फॉलो फादर कर सभी आत्माओं को सम्मान की दृष्टि से देख रही हूँ...* जैसे ब्रह्मा बाबा ने अपकारियो पर भी उपकार किया... निंदा करने वालो को भी अपना मित्र समझा... उन्हें गले लगाया... वैसे ही *मैं आत्मा फॉलो फादर करती... सभी आत्माओं के प्रति सदभावना रख हर कर्म कर रहीं हूँ...*   

 

 _ ➳  मैं आत्मा बाप समान विश्व की सर्वआत्माओं के प्रति कल्याण की भावना रख रहीं हूँ...  किसी भी आत्मा के प्रति भेदभाव नहीं रखती अपितु  सर्व के प्रति आत्मिक दृष्टि रखती हूँ... *मैं आत्मा विश्वकल्याणकारी के स्वमान में स्थित हो... विशाल दिल रख... रहम की भावना से... सर्व आत्माओं के प्रति सुख... शांति... के वायब्रेशन्स फैला रही हूँ...*

 

 _ ➳  मैं मास्टर सर्वशक्तिवान... अपनी श्रेष्ठ वृति के वायब्रेशन्स द्वारा वायुमण्डल को ऐसा बनाती हूँ... *जो कोई भी मेरे सम्बन्ध सम्पर्क में आता है... वह खुद बखुद मेरी ओर आकर्षित होता है...* उन्हें मुझसे स्नेह... प्यार की भासना आती है... सहयोग... हिम्मत की अनुभूति होती है...

 

 _ ➳  *मैं आत्मा अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य को देख बहुत खुश हो रहीं हूँ... सदा सर्वशक्तिवान के स्वमान में रह... उमंग उत्साह के पंख लगा... हरेक को सहयोग देती हुई... सम्मान देती हुई... उड़ती कला में उड़ रही हूँ...* और सर्वशक्तिवान... शिवबाबा... भाग्यविधाता को दिल से शुक्रिया करती हुई... अपने भाग्य की सराहना कर रहीं हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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