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 14 / 04 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *स्वयं को बाप की प्रॉपर्टी का अधिकारी अनुभव किया ?*

 

➢➢ *याद और सेवा का बैलेंस रखा ?*

 

➢➢ *जिम्मेवारी निभाते हुए डबल लाइट स्थिति का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *हर कदम में उडती कला का अनुभव किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *जितना आप अपनी अव्यक्त स्थिति में स्थित होते जायेंगे उतना बोलना कम होता जायेगा।* कम बोलने से ज्यादा लाभ होगा फिर इस योग की शक्ति से सर्विस स्वत: होगी। *योगबल और ज्ञान-बल जब दोनों इकट्ठा होता है तो दोनों की समानता से सफलता मिलती है।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ"*

 

✧  सदा अपने को बाप समान मास्टर सर्वशक्तिवान अनुभव करते हो? *जैसा बाप वैसे बच्चे हैं ना! सर्वशक्तियों का वर्सा बच्चों का अधिकार है। तो जब भी जिस शक्ति को जिस रूप से कार्य में लगाने चाहो वैसे लगा सकते हो!*

 

  *मास्टर सर्वशक्तिवान की स्मृति शक्तियों को इमर्ज करती है। जिस समय जिस शक्ति की आवश्यकता होगी उस समय इस स्मृति से कार्य में लगा सकते हो।*

 

  *ऐसे अनुभव करेंगे जैसे यह शरीर की शक्तियाँ बाहें हैं, पाँव हैं, आँखें हैं... जिस समय जो शक्ति यूज करने चाहें वैसे कर सकते हैं, वैसे यह सूक्ष्म शक्तियाँ कार्य में लगा सकते हैं। क्योंकि यह भी अपना अधिकार है। लेकिन इसका अधिकार है मास्टर सर्वशक्तिवान की स्मृति।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  आप पुराने हो इसलिए आपको सामने रख समझा रहे हैं। सामने कौन रख जाता है? जो स्नेही होता है। *स्नेहियों को कहने में कभी संकोच नहीं आता है*। एक - एक ऐसे स्नेही हैं?

 

✧  सभी सोचते है बाबा बडा आवाज क्यों नहीं करते हैं। लेकिन बहुत समय के संस्कार से अव्यक्त रूप से व्यक्त में आते है तो आवाज़ से बोलना जैसे अच्छा नहीं लगता है। *आप लोगों को भी धीरे - धीरे आवाज़ से परे इशारों पर कारोबर चलानी है*। यह प्रैक्टीस करनी है। समझा।

 

✧  बापदादा बुद्धि की ड्रिल कराने आते है जिससे परखने की और दूरांदेशी बनने की क्वालिफिकेशन इमर्ज रूप में आ जाये। क्योंकि आगे चलकर के ऐसी सर्वीस होगी जिसमे दूरांदेशी बुद्धि और निर्णय शक्ति बहुत चाहिए। इसलिए यह ड्रिल करा रहे हैं।फिर पाँवरफुल हो जायेगी। ड्रिल से शरीर भी बलवान होता  है। *तो यह बुद्धि की ड्रिल से बुद्धि शक्तिशाली होगी*।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  यह स्मृति में रहे कि वैराइटी आत्माएं है। आत्मिक दृष्टि रहे। आत्मा के रूप में उनको स्मृति में लाने से पावर दे सकेंगे। आत्मा बोल रही है। आत्मा के यह संस्कार हैं। यह पाठ पक्का करना है। *'आत्मा' शब्द स्मृति में आने से ही रूहानियत-शुभ  भावना आ जाती है, पवित्र दृष्टि हो जाती है। चाहे भले कोई गाली भी दे रहा है लेकिन यह स्मृति रहे कि यह आत्मा तमोगुणी पार्ट बजा रही है।* अपने आप का स्वयं टीचर बन ऐसी प्रैक्टिस करनी है। यह पाठ पक्का करने लिए दूसरों से मदद नहीं मिल सकती। अपने पुरुषार्थ की ही मदद है।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  बैलेंस रखने से ही ब्लेस्सिंग की प्राप्ति"*

 

_ ➳  *ओम शान्ति सेण्टर में बैठी मैं आत्मा बाबा के गीतों पर झूमते हुए बाबा के प्यार में खो जाती हूँ... प्यारे बाबा दीदी के मस्तक में विराजमान होकर मीठी मुरली सुना रहे हैं... बाबा के आते ही चारों ओर लाल प्रकाश छा गया है... परमधाम जैसा नज़ारा अनुभव कर रही हूँ...* सिर्फ मैं और मेरा बाबा दिख रहे हैं... सुप्रीम टीचर मुझे सेवा का महत्व समझा रहे हैं... मैं आत्मा गॉडली स्टूडेंट के स्वमान बैठकर बाबा की ज्ञान मुरली को सुन रही हूँ...

 

  *खुद खुदा अपनी खुदाई जादू मुझ पर बिखरते हुए कहते हैं:-* "मेरे मीठे बच्चे... खुदाई खिदमतगार बच्चे हो तो सफलता तो कदमो में बिखरी पड़ी है... *याद और सेवा से सारे कार्य सिद्ध हो जाते है... महा भाग्यशाली हो की ईश्वर पिता के सहयोगी हो.... तो इस महान नशे को यादो में प्रतिपल गहरा करो... की ईश्वर पिता हर कदम पर मेरा साथी है... और फिर कदम उठाओ तो जादू हुआ पड़ा है..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा प्यारे बाबा की राईट हैण्ड होने का अनुभव करती हुई कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा मीठे बाबा के साथ से सफल हो रही हूँ... *बाबा के हाथ और साथ से विजयी बन मुस्करा रही हूँ... खुदा मेरी बाँहो में है और मै सेवाओ के शिखर छूती जा रही हूँ..."*

 

  *मेरे प्यारे बाबा सेवाओं के सफलता की चाबी मुझे देते हुए कहते है:-* "मीठे प्यारे बच्चे... जब भगवान आसमान छोड़ धरती पर आ गया है तो अकेले भटकना क्यों... यूँ मायूस होकर फिर जीना क्यों... साथी बनाकर देखो जरा... *यादो में डूबकर अधिकार जमा कर देखो जरा... खुदाई जादू आजमा कर देखो जरा... सफलताओ के पहाड़ो पर विजयी पताका लिए सदा का मुस्कराओगे..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा विश्व कल्याण के स्टेज पर सफलता का झन्डा लहराते हुए कहती हूँ:-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... *मै आत्मा भगवान को साथ लेकर उड़ रही हूँ सफल हूँ विजेता हूँ इस नशे से भर गई हूँ... बाबा को साथ लिए सबके जीवन को सुंदर बना रही हूँ...* चारो ओर खुशियो भरे फूल खिला रही हूँ..."

 

  *करन करावनहार मेरे बाबा मुझे सारे फिक्रों से फारिग करते हुए कहते हैं:-* "मेरे सिकीलधे मीठे बच्चे... सारे बोझ बाबा को दे चलो... और हल्के होकर उड़ते रहो... *अभिमान और अपमान के जाल में न फंसो... पिता की मीठी यादो में जीकर न्यारे और प्यारे बनो... एक बाबा और न कोई के नशे में डूब जाओ... निमित्त बन पार्ट बजाओ... ईश्वरीय सेवा है... सारी फ़िक्र मीठे बाबा की है... आप याद के आनन्द में भीगे कदम सुख की हवाओ में उठाओ..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा खुदाई जादूगरी के समुन्दर में गोते लगाती हुई कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा खुशियो के परम् आनन्द में हूँ... *निमित्त हूँ विघ्नो से मुक्त हूँ... और ईश्वरीय सेवाओ में न्यारी प्यारी हूँ... इस नशे में गहरे समा रही हूँ... आपके मीठे साथ से उन्मुक्त हो खुशियो के आसमान में उड़ रही हूँ..."*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- स्वयं को बाप की प्रोपेर्टी का अधिकारी अनुभव करना*"

 

_ ➳  अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य के नशे में बैठी, अपने मीठे बाबा के प्रेम की लगन में मगन मैं उनकी मीठी यादों में रमण करती हुई *अनुभव करती हूँ कि जैसे मेरे शिव पिता अपने साकार रथ पर विराजमान हो कर, अपनी बाहें पसारे मुझे बुला रहें हैं और कह रहे हैं:- "आओ मेरे डबल सिरताज बच्चे, मेरे पास आओ"*। अव्यक्त बापदादा के ये अव्यक्त महावाक्य जैसे ही मेरे कानों में सुनाई पढ़ते हैं मैं अपनी अव्यक्त स्थिति में स्थित हो जाती हूँ और सूक्ष्म आकारी देह धारण कर, अपने साकारी तन से बाहर निकल कर, बापदादा के पास उनके अव्यक्त वतन की ओर चल पड़ती हूँ।

 

_ ➳  अपनी लाइट की सूक्ष्म आकारी देह को धारण किये मैं फ़रिशता साकार लोक में भ्रमण करता हुआ, आकाश को पार करके पहुँच जाता हूँ सूक्ष्म आकारी फरिश्तों की उस अति सुंदर मनोहारी दुनिया में जहां बापदादा बाहें पसारे मेरा इंतजार कर रहें हैं। बापदादा के सामने पहुँच कर, मैं बिना कोई विलम्ब किये उनकी बाहों में समा जाता हूँ। *अपने बाबा की ममतामयी बाहों के झूले में झूलते हुए मैं असीम आनन्द से विभोर हो रहा हूँ*। बाबा का प्रेम और वात्सलय बाबा के हाथों के स्पर्श से मैं स्पष्ट अनुभव कर रहा हूँ।ऐसे निस्वार्थ प्रेम को पा कर मेरी आँखों से खुशी के आँसू छलक रहें हैं। बाबा मेरे आंसू पोंछते हुए बड़ी मीठी दृष्टि से मुझे देख रहें हैं।

 

_ ➳  बाबा की मीठी दृष्टि से, बाबा की सर्वशक्तियाँ मुझ फ़रिश्ते में समा रही हैं। मैं स्वयं को परमात्म बल से भरपूर होता हुआ अनुभव कर रहा हूँ। *बापदादा के प्यार की शीतल छाया में मैं फरिश्ता असीम सुख और आनन्द का अनुभव कर रहा हूँ*। बापदादा अपना वरदानीमूर्त हाथ मेरे सिर पर रख कर मुझे वरदानों से भरपूर कर रहे हैं। हर प्रकार की सिद्धि से बाबा मुझे सम्पन्न बना रहे हैं। सर्व सिद्धियों, शक्तियों और वरदानों से मुझे भरपूर करके अब बाबा मुझे भविष्य नई दुनिया का साक्षात्कार करवा रहें हैं।

 

_ ➳  ज्ञान के दिव्य चक्षु से मैं देख रहा हूँ, बाबा मेरा हाथ पकड़ कर मुझे आने वाली नई सतयुगी दुनिया मे ले जा रहें हैं और बड़े स्नेह से मुझे कह रहे हैं देखो, बच्चे:- इस नई दुनिया के आप मालिक हो" *अब मैं स्वयं को विश्व महाराजन के रूप में देख रहा हूँ। सारे विश्व पर मैं राज्य कर रहा हूँ। मेरे राज्य में डबल ताज पहने देवी देवता विचरण कर रहें हैं। राजा हो या प्रजा सभी असीम सुख, शान्ति और सम्पन्नता से भरपूर हैं*। चारों ओर ख़ुशी की शहनाइयाँ बज रही हैं। प्राकृतिक सौंदर्य भी अवर्णनीय है। रमणीकता से भरपूर सतयुगी नई दुनिया के इन नजारों को देख मैं मंत्रमुग्घ हो रहा हूँ।

 

_ ➳  इस खूबसूरत दृश्य का आनन्द लेने के बाद मैं जैसे ही अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होती हूँ। *स्वयं को एक दिव्य अलौकिक नशे से भरपूर अनुभव करती हूँ और अब मैं सदा इसी रूहानी नशे में रहते हुए कि मैं ब्रह्माण्ड और विश्व की मालिक बन रही हूँ, निरन्तर अपने पुरुषार्थ को आगे बढ़ा रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं व्यर्थ वा डिस्टर्ब करने वाले बोल से मुक्त डबल लाइट अव्यक्त फरिश्ता आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं स्वयं को परमात्म प्यार के पीछे कुर्बान करके सफलता को गले की माला बनाने वाली सहजयोगी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

अव्यक्त बापदादा :-

 

_ ➳  *जैसे साइन्स का बल अपना प्रभाव प्रत्यक्ष रूप में दिखा रहा है ऐसे साइन्स की भी रचता साइलेन्स बल है। साइलेन्स बल को अभी प्रत्यक्ष दिखाने का समय है। साइलेन्स बल का वायब्रेशन तीव्रगति से फैलाने का साधन है - मन-बुद्धि की एकाग्रता। यह एकाग्रता का अभ्यास बढ़ना चाहिए।* एकाग्रता की शक्तियों द्वारा ही वायुमण्डल बना सकते हो। हलचल के कारण पावरफुल वायब्रेशन बन नहीं पाता। बापदादा आज देख रहे थे कि एकाग्रता की शक्ति अभी ज्यादा चाहिए। सभी बच्चों का एक ही दृढ़ संकल्प हो कि अभी अपने भाई-बहनों के दु:ख की घटनायें परिवर्तन हो जाएँ। दिल से रहम इमर्ज हो। *क्या जब साइन्स की शक्ति हलचल मचा सकती है तो इतने सभी ब्राह्मणों के साइलेन्स की शक्ति, रहमदिल भावना द्वारा वा संकल्प द्वारा हलचल को परिवर्तन नहीं कर सकती!*

 

✺  *"ड्रिल :- एकाग्रता का अभ्यास"*

 

_ ➳  मैं आत्मा एकांत में बैठती हूँ... *सभी बाह्य बातों से उपराम होती हुई अंतर्मुखी हो जाती हूँ...* मैं आत्मा मन को अन्य संकल्पों से हटाकर भृकुटी के मध्य केन्द्रित करती हूँ... मैं शांत स्वरूप आत्मा हूँ... मस्तक के मध्य चमकती हुई बिंदु हूँ... मैं आत्मा अपने बिंदु रूप में टिक जाती हूँ... *मैं आत्मा इस देह रूपी विनाशी घर से बाहर निकल पहुँच जाती हूँ अपने अविनाशी घर स्वीट साइलेंस होम में...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा अपने स्वीट साइलेंस होम में स्वीट साइलेंस की अनुभूति कर रही हूँ...* शांति के सागर में डूब रही हूँ... आवाज़ से परे, हलचल से परे मैं आत्मा गहरी शांति को अनुभव कर रही हूँ... मुझ आत्मा की मन-बुद्धि की हलचल समाप्त हो रही है... मुझ आत्मा की एकाग्रता की शक्ति बढ रही है... *मैं आत्मा साइलेन्स की स्थिति में स्थित हो जाती हूँ...*

 

_ ➳  अब मैं आत्मा साइलेन्स में रहकर... एकाग्रता की शक्ति से अंतर्मुखी हो रही हूँ... मैं आत्मा अंतर्मुखी होकर सदा सुखी और सन्तुष्टता का अनुभव कर रही हूँ... *अब मैं आत्मा साइलेंस की शक्ति से सर्व समस्याओं का हल कर रही हूँ... मैं आत्मा सर्व प्रकार के हलचल में भी अचल रहती हूँ...*

 

_ ➳  मैं आत्मा सदा एक की लगन में मगन होकर एकाग्रता के अभ्यास को बढ़ाती हूँ... *लगन की अग्नि की ज्वाला से व्यर्थ को समाप्त कर रही हूँ... व्यर्थ संकल्प, व्यर्थ कर्म, व्यर्थ बातों से मुक्त हो रही हूँ...* मुझ आत्मा के मन-बुद्धि सभी संकल्पों-विकल्पों से मुक्त हो रहे हैं... मैं आत्मा स्मृति स्वरुप समर्थी स्वरुप बन रही हूँ...

 

_ ➳  *मैं आत्मा मनमनाभव के मन्त्र में टिककर... शांति के सागर से शांति की किरणों को लेकर... चारों ओर फैला रही हूँ...* अशांत आत्माओं को शांति का दान कर रही हूँ... मैं आत्मा शांति के पावरफुल वायब्रेशन द्वारा सबके दुख की घटनाओं को परिवर्तित कर शांति का वायुमंडल बना रही हूँ... *मैं आत्मा साइलेन्स की शक्ति, रहमदिल भावना द्वारा हलचल को परिवर्तित कर रही हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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