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 15 / 02 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *योग बल से अपनी कर्मेन्द्रियों को शीतल और शांत बनाया ?*

 

➢➢ *"हम यह पुराना शरीर छोड़ घर वापिस जायेंगे" - यह बुधी में रहा ?*

 

➢➢ *लोहे समान आत्मा को परस बनाया ?*

 

➢➢ *हर कार्य साहस से कर सर्व का सम्मान प्राप्त किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  मन्सा सेवा के लिए मन, बुद्धि व्यर्थ सोचने से मुक्त होना चाहिए। मनमनाभव के मन्त्र का सहज स्वरूप होना चाहिए। *जिन श्रेष्ठ आत्माओं की श्रेष्ठ मन्सा अर्थात् संकल्प शक्तिशाली है, शुभ-भावना, शुभ-कामना वाले हैं वह मन्सा द्वारा शक्तियों का दान दे सकते हैं।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ"*

 

✧  सदा अपने को मास्टर सर्वशक्तिवान अनुभव करते हो? *इस स्वरूप की स्मृति में रहने से हर परिस्थिति ऐसे अनुभव होगी जैसे परिस्थिति नहीं लेकिन एक साइडसीन है। परिस्थिति समझने से घबरा जाते लेकिन साइडसीन अर्थात् रास्ते के नजारे हैं तो सहज ही पार कर लेते।*

 

  क्योंकि नजारों को देख खुशी होती है, घबराते नहीं। *तो विघ्न, विघ्न नहीं हैं लेकिन विघ्न आगे बढ़ने का साधन है। परीक्षा क्लास आगे बढ़ाता है।*

 

  तो यह विघ्न, परिस्थिति, परीक्षा आगे बढ़ाने के लिए आते हैं ऐसे समझते हो ना! कभी कोई बात सोचते यह क्या हुआ, क्यों हुआ? तो सोचने में भी टाइम जाता है। *सोचना अर्थात् रुकना। मास्टर सर्वशक्तिवान कभी रुकते नहीं। सदा अपने जीवन में उड़ती कला का अनुभव करते हैं।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *शिव बाप समान बनना अर्थात निराकार स्थिति में स्थित होना। मुश्किल है क्या?* बाप और दादा से प्यार है ना! तो जिससे प्यार है उस जैसा बनना, जब संकल्प भी है - बाप समान बनना ही है, तो कोई मुश्किल नहीं है।

 

✧  सिर्फ बार-बार अटेन्शन। साधारण जीवन नहीं। साधारण जीवन वाले बहुत हैं। बडे-बडे कार्य करने वाले बहुत हैं। लेकिन आप जैसा कार्य, आप ब्राह्मण आत्माओं के सिवाए और कोई नहीं कर सकता है। *तो आज स्मृति दिवस पर बापदादा समानता में समीप आओ, समीप आओ, समीप आओ का वरदान दे रहे हैं।*

 

✧  सभी हद के किनारे, चाहे संकल्प, चाहे बोल, चाहे कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क कोई भी हद का किनारा, अपने मन की नईया को इन हद के किनारों से मुक्त कर दो। *अभी से जीवन में रहते मुक्त ऐसे जीवनमुक्ति का अलौकिक अनुभव बहुतकाल से करो। अच्छा।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  व्यक्तभाव से अव्यक्त भाव में कहाँ तक आगे बढ़े - यह चेकिंग करनी है। अगर अव्यक्ति स्थिति बढ़ी है तो अपने चलन में भी अलौकिक होंगे। *अव्यक्त स्थिति की प्रैक्टिकल परख क्या है? आलौकिक चलन।* इस लोक में रहते अलौकिक कहाँ तक बने हो? यह चेक करना है।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺ *"ड्रिल :- आत्मा रूपी ज्योति में ज्ञान-योग का घृत डालना"*

➳ _ ➳ *मीठे मधुबन के प्रांगण में... मै आत्मा बाबा की यादो में चहल कदमी करते हुए... अपने प्यारे से बाबा की यादो में डूब जाती हूँ... और यूँ यादो में खोयी खोयी सी... में आत्मा अपने कदमो का रुख मीठे बाबा के कमरे की ओर बढ़ाती हूँ... मुझ आत्मा के स्वागत में पलके बिछाये बाबा मेरे ही इंतजार में बेठे है*... मुझे देखते ही बाबा खिल उठते है... अपने बच्चे को सम्मुख देख प्यारे पिता का असीम प्यार उमड़ आया है... और मै और बाबा एक दूजे के नयनों में खो से जाते है...

❉ *मीठे बाबा मुझ आत्मा को देवताई सौंदर्य से दमकाते हुए बोले :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... *सवेरे सवेरे उठकर मीठे बाबा की यादो में अपनी मद्धम हो गयी रौशनी को, पुनः प्रज्जवलित करो.*.. मीठे बाबा की यादो में अपने सारे विकर्मो को भस्म करके, दिव्य गुण और शक्तियो से सज जाओ... यह यादे ही खोया हुआ प्रकाश पुनः वापिस दिलायेगी..."

➳ _ ➳ *मै आत्मा अपने मीठे बाबा को दिल से शुक्रिया करते हुए कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा... देह की दुनिया में लिप्त होकर मै आत्मा अपने वजूद को ही खो गयी थी... *आपने मुझे यादो के सत्य के प्रकाश में फिर से तेजस्वी बनाया है.*.. आपके प्यारे से साथ में, मै आत्मा अपनी रूहानियत को पाकर पुनः खुबसूरत होती जा रही हूँ..."

❉ *प्यारे बाबा मुझ आत्मा को आत्मिक तेज से प्रकाशित करते हुए बोले :-* "मीठे लाडले बच्चे... अमृतवेले यादो भरे मौसम में ईश्वरीय याद में गहरे डूब जाओ... और अपनी खोयी पवित्रता को पाकर देवताई सुखो में मुस्कराओ... *यादो के घृत से आत्मिक तेज को बढ़ाओ... सवेरे मीठे बाबा संग प्यार भरी बातो में खो जाओ... और यूँ ही यादो में के नशे में डूबे हुए, स्वर्ग के मीठे सुख अपनी हथेली पर सजाओ.*.."

➳ _ ➳ *मै आत्मा मीठे बाबा की ओर बड़े ही प्रेम से निहारती हुई कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... *मै आत्मा आपको पाकर आपकी मीठी यादो के साये तले, अपनी देवताई दिव्यता को पाती जा रही हूँ.*.. देह की मिटटी में विकारो की धूल से धूमिल हो गयी अपनी खोयी छवि को पुनः तेज से भर रही हूँ... मै आत्मा अमृतवेले यादो में तेजस्वी बन रही हूँ..."

❉ *मीठे बाबा मुझ आत्मा को अपनी सारी शक्तियो से भरपूर करते हुए बोले :-* "मीठे सिकीलधे बच्चे... *सवेरे उठकर मीठे बाबा की मधुर यादो में रहकर स्वयं को नूरानी बनाओ*... अपनी खोयी सुंदरता को पाकर विश्व राज्य तिलक को पाओ... यादो में गहरे डूबकर अपनी असीम शक्तियो से पुनः सज जाओ... और खुशियो भरे स्वर्ग पर मुस्कराता हुआ जीवन पाओ..."

➳ _ ➳ *मै आत्मा अपने मीठे बाबा को दिल से वादा करते हुए कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... *आपने जीवन में आकर *जिन सच्ची खुशियो से मुझे सजाया है, ज्ञान श्रंगार से मुझे बेशकीमती बनाया है, और अपनी यादो की खुशबु में सदा का निखारा है, उसका मै किन शब्दों में शुक्रिया करूँ..."* ऐसी मीठी प्यारी रुहरिहानं अपने बाबा सुनाकर... मै आत्मा साकार तन में आ गयी...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- याद के बल से अपनी कर्मेन्द्रियों को शीतल, शान्त बनाना है*

➳ _ ➳ 
स्व स्थिति के आसन पर विराजमान होते ही मैं अनुभव करती हूँ जैसे *कोई राजा अपने सिहांसन पर विराजमान होकर, अपने अधिकारों का प्रयोग करता है और अपने राज्य की कारोबार को चलाने के लिए अपने मंत्रियों को आदेश देकर अपने शासन की बागडोर को अच्छी रीति सम्भलाता है ठीक उसी तरह मैं आत्मा भी अब स्वराज्य अधिकारी की सीट पर सेट हूँ और महसूस कर रही हूँ कि मैं आत्मा राजा हूँ और हर कर्मेंद्रिय मेरे ऑर्डर प्रमाण कार्य कर रही है*। 

➳ _ ➳ 
अपने ऊँचे ते ऊँचे अधिकारीपन के आसन पर सेट होकर अब मैं अपनी सभी कर्मेन्द्रियों को समेट, मास्टर बीज रूप स्थिति में स्थित होकर शांति में बैठने का अभ्यास करती हूँ और धीरे - धीरे महसूस करती हूँ जैसे मैं आत्मा अंतर्मुखता की एक ऐसी गुफा में जा रही हूँ जहाँ कोई आवाज, कोई शोर नही यहां तक कि संकल्पो की भी हलचल नही। *अंतर्मुखता का यह अवस्था मुझे गहन शांति का अनुभव करवा रही है। अपने मस्तक से निकल रहे शांति के वायब्रेशन्स को मैं अपने चारों और फैलता हुआ देख रही हूँ। शांति के शक्तिशाली वायब्रेशन्स धीरे - धीरे चारों ओर फैलते जा रहें हैं और मेरे आस पास के वायुमंडल को शांत बना रहे हैं*। मैं महसूस कर रही हूँ कि मुझ आत्मा से निकल रहे शांति के वायब्रेशन्स से एक शक्तिशाली आभामण्डल मेरे चारों तरफ बन गया है जो बाहरी वातावरण के हर प्रभाव से मुझे मुक्त कर रहा है।

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अंतर्मुखी बन, शांति की गहन अनुभूति करते हुए, शांति के सागर अपने प्यारे पिता को अब मैं याद करती हूँ और महसूस करती हूँ कि उन्हें याद करते ही मेरे मन बुद्धि का कनेक्शन शांति धाम में रहने वाले शांति के सागर अपने शिव पिता के साथ जुड़ गया है और यह कनेक्शन मुझे अपनी और खींच रहा है। *मन बुद्धि के विमान पर बैठ सेकण्ड में मैं साकार और सूक्ष्म लोक को पार करके अपने शांतिधाम घर मे पहुँच जाती हूँ। शांति के बहुत ही शक्तिशाली वायब्रेशन इस शांति धाम घर में फैले हुए हैं। जो मुझे गहन शांति से भरपूर कर रहे हैं*। गहन शांति की गहन अनुभूति करते हुए मैं आत्मा धीरे - धीरे शांति के सागर अपने प्यारे पिता के पास पहुँच जाती हूँ।

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सर्वगुणों और सर्वशक्तियों के सागर अपने शांति दाता शिव बाबा के समीप बैठ अब मैं उनके सर्व गुणों, सर्व शक्तियों की एक - एक किरण को गहराई तक स्वयं में समाती जा रही हूँ। जैसे - जैसे बाबा की सर्वशक्तियों की किरणे मुझ आत्मा पर पड़ रही हैं मैं स्वयं में असीम बल भरता हुआ अनुभव कर रही हूँ। *अपने बिंदु बाप की शीतल किरणों की छत्रछाया में गहन शीतलता की अनुभूति करते हुए अपने प्यारे बाबा के साथ इतना सुन्दर मधुर मंगल मिलन मनाने का सुख मैं प्राप्त कर रही हूँ*। मास्टर बीज रूप बन अपने बीज रूप बाप के साथ मंगल मिलन मनाने का यह सुख मुझे परम आनन्द प्रदान कर रहा है। परमात्म शक्तियों से मैं आत्मा भरपूर होती जा रही हूँ और बहुत ही शक्तिशाली स्थिति का अनुभव कर रही हूँ। 

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अपने बीज रूप शिव पिता के सानिध्य में बैठ, उनकी सर्वशक्तियों को स्वयं में समाकर मैं मास्टर बीज रूप आत्मा उनके समान अति तेजस्वी, सर्वशक्तिसम्पन्न स्वरूप बन कर, अब वापिस अपने कर्म क्षेत्र पर लौट रही हूँ। *अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर, शरीर निर्वाह अर्थ कर्म करके फिर अपने को देह से न्यारी मास्टर बीज रूप आत्मा समझ, कर्मेन्द्रियों को समेट शान्त में बैठने का अभ्यास निरन्तर करते हुए, गहन शांति की अनुभूति मैं हर पल स्वयं भी कर रही हूँ और दूसरों को करा रही हूँ*।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं लोहे समान आत्मा को पारस बनाने वाली आत्मा हूँ।*
✺   *मैं मास्टर पारसनाथ आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺ *मैं आत्मा हर कार्य साहस से करती हूँ ।*
✺ *मैं आत्मा सर्व का सम्मान प्राप्त करती हूँ ।*
✺ *मैं हिम्मतवान आत्मा हूँ ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  देवता बनने वाले माना देने वाले। लेवता नहीं देवता... कितने बार देवता बने हो, अनेक बार बने हो ना... तो देवता अर्थात् देने के संस्कार वाले... *कोई कुछ भी दे लेकिन आप सुख की अंचली, शान्ति की अंचली, प्रेम की अंचली दो*... लोगों के पास है ही दुःख अशान्ति तो क्या देंगे वो ही देंगे ना... और आपके पास क्या है - सुख-शान्ति... सब ठीक है ना! अच्छा...

 

✺   *ड्रिल :-  "देवता बन सुख-शान्ति की अंचली देने का अनुभव"*

 

 _ ➳  अपने देवता स्वरूप को स्मृति में लाते ही दाता पन के संस्कार स्वत: ही इमर्ज होने लगते हैं और *अपने लाइट के फ़रिशता स्वरूप को धारण कर मैं फ़रिशता चल पड़ता हूँ विश्व की उन सभी दुखी और अशांत आत्माओं को सुख शांति की अनुभूति करवाने जो पल भर की सुख शांति पाने के लिए दर - दर भटक रहे हैं, भक्ति मार्ग के अनेक कर्मकांडो में फंस कर स्वयं को कष्ट दे रहें हैं*... लम्बी - लम्बी पैदल यात्रायें करके मंदिरों, तीर्थो पर जा रहें हैं... किन्तु सुख, शांति की अंचली मात्र से भी कोसों दूर हैं...

 

 _ ➳  सुख, शांति की तलाश में भटक रही इन आत्माओं के बारे में विचार करते ही मुझे अनुभव होता है जैसे ये सभी तड़पती हुई आत्मायें मेरे ही भक्त हैं और सुख, शांति की अंचली पाने के लिए मुझे पुकार रहें हैं... अपने भक्तों के रोने -चिल्लाने की करुण आवाजें अब मेरे कानों में स्पष्ट सुनाई दे रही हैं... *अपने भक्तों की करुणामयी, दुखदाई पुकार को सुन कर अब मैं फ़रिशता अपने देवता स्वरूप को धारण करता हूँ और अपने भक्तों को सुख, शांति की अंचली देने मंदिर की ओर चल पड़ता हूँ*...

 

 _ ➳  मन्दिर के बाहर पहुंच कर अब मैं मन्दिर के अंदर का दृश्य देख रहा हूँ... मन्दिर में प्रतिस्थापित मेरे जड़ चित्रों के सामने खड़े भक्तों को मैं देख रहा हूँ... उनके चेहरों पर पड़ी दुख की रेखाएं मुझे स्पष्ट दिख रही हैं ... दोनों हाथ जोड़ कर सुख, शांति की भीख मांग रहें हैं... *विनाशी साधनों में सुख शांति समझने के कारण उन साधनों को पाने के लिये लम्बी - लम्बी अरदासें कर रहें हैं*... अपने भक्तों की यह दुर्दशा देख, रहम दिल बन अब मैं अपनी उस जड़ मूर्ति में प्रवेश करता हूँ... और अपने शिव पिता परमात्मा का आह्वान करता हूँ...

 

 _ ➳  पलक झपकते ही मैं अपने बिल्कुल ऊपर अपने पिता परमात्मा शिव बाबा की छत्रछाया को अपने ऊपर अनुभव करता हूँ... *बाबा से निकल रही सुख, शांति की शक्तिशाली किरणे सीधी मेरे ऊपर पड़ रही हैं और मेरे देव स्वरूप से निकल कर अब धीरे - धीरे पूरे मन्दिर में फैल रही हैं*... मेरे वरदानी हस्तों से सुख, शांति के पुष्पों की वर्षा हो रही हैं... सुख शांति के ये पुष्प भक्तों की झोली में गिर रहें हैं और उन्हें पल भर के लिए गहन सुख, शांति की अनुभूति करवा रहें हैं... सुख, शांति की अंचली पाने की उनकी आश जैसे पूरी हो रही है...

 

 _ ➳  सुख शांति के शक्तिशाली वायब्रेशन धीरे - धीरे पूरे मन्दिर में फैल कर मन्दिर से बाहर चारों और फैल रहें हैं और सबको अपनी और आकर्षित कर रहें हैं... दूर दूर से आत्मायें खिंची आ रही हैं और मन्दिर में आ कर सुख, शांति की अनुभूति करके तृप्त हो रही हैं... *पल भर की सुख, शांति पाकर सभी के दुखी चेहरे जैसे खिल उठे हैं... उनकी खोई हुई मुस्कान पुनः लौट आई है*... आंखों में खुशी के आंसू लिए मेरे भक्त मेरी जयजयकार करते हुए अपने घर लौट रहे हैं...

 

 _ ➳  वरदानी मूरत बन, अपने वरदानी हस्तों से अपने भक्तों को सुख शांति की अंचली देकर अब मैं अपने देव स्वरूप से अपने ब्राह्मण स्वरूप में लौट आती हूँ... अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर *अब मैं अपने देवताई स्वरूप को सदा स्मृति में रख, स्वयं को परमात्म शक्तियों से सम्पन्न कर, मास्टर दाता बन, अपने सम्बन्ध सम्पर्क में आने वाली हर आत्मा को सुख, शांति की अनुभूति करवाती रहती हूँ*...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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