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 15 / 03 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *बाप समान टीचर बनकर रहे ?*

 

➢➢ *कुम्भकारन की नींद में सोये हुए को जगाया ?*

 

➢➢ *त्रिकालदर्शी बन दिव्य बुधी के वरदान को कार्य में लगाया ?*

 

➢➢ *सम्पूरण पवित्रता को धारण कर परमानन्द का अनुभव किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *सेवा में वा स्वंय की चढ़ती कला में सफलता का मुख्य आधार है - एक बाप से अटूट प्यार ।* बाप के सिवाए और कुछ दिखाई न दे । संकल्प में भी बाबा, बोल में भी बाबा, कर्म में भी बाप का साथ, *ऐसी लवलीन स्थिति में रह एक शब्द भी बोलेंगे तो वह स्नेह के बोल दूसरी आत्मा को भी स्नेह में बाँध देंगे । ऐसी लवलीन आत्मा का एक बाबा शब्द ही जादू मंत्र का काम करेगा ।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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✺   *"मैं शान्ति का पैगाम देने वाला खुदाई पैगम्बर हूँ"*

 

✧  *सदा अपने को शान्ति का सन्देश देने वाले, शान्ति का पैगाम देने वाले सन्देशी समझते हो? ब्राह्मण जीवन का कार्य है - सन्देश देना।* कभी इस कार्य को भूलते तो नहीं हो?

 

  *रोज चेक करो कि मुझ श्रेष्ठ आत्मा का श्रेष्ठ कार्य है वह कहाँ तक किया! कितनों को सन्देश दिया। कितनों को शान्ति का दान दिया। सन्देश देने वाले महादानी-वरदानी आत्मायें हो।* कितने टाइटल्स हैं आपके?

 

  आज की दुनिया में कितने भी बड़े ते बड़े टाइटल हों आपके आगे सब छोटे हैं। वह टाइटल देने वाली आत्मायें हैं लेकिन अब बाप बच्चों को टाइटल देते हैं। *तो अपने भिन्न-भिन्न टाइटल्स को स्मृति में रख उसी खुशी, उसी सेवा में सदा रहो। टाइटल की स्मृति से सेवा स्वत: स्मृति में आयेगी।* अच्छा-

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  जब जैसे चाहो वैसे स्थिति बना सके। यह मन को ड्रिल करानी है। *यह जरूर प्रैक्टिस करो - एक सेकण्ड में आवाज में, एक सेकण्ड में फिर आवाज से परे, एक सेकण्ड में सर्विस के सकल्प से परे स्वरूप में स्थित हो जायें*। इस ड्रिल की बहुत आवश्यकता है।

 

✧  एक सेकण्ड में कार्य प्रति शारीरिक भान में आयें, फिर एक सेकण्ड में अशरीरि हो जायें। जिसकी यह ड्रिल पक्की होगी वह सभी परिस्थितियों का सामना कर सकते हैँ। *जैसे शारीरिक ड्रिल सुबह को कराई जाती है, वैसे यह अव्यक्त ड्रिर भी अमृतवेले विशेष रूप से करनी है*। करना तो सारा दिन है लेकिन विशेष प्राक्टीस करने का समय अमृतवेले है।

 

✧  *जब देखो बुद्धि बहुत बिजी है तै उसी समय यह प्रैक्टिस करो - परिस्थिति में होते हुए भी हम अपनी बुद्धि को न्यारा कर सकते हो*। लेकिन न्यारे तब हो सकेंगे जब जो भी कार्य करते हो वह न्यारी अवस्था में होकर करेंगे। अगर उस कार्य में अटैचमेन्ट होगी तो फिर एक सेकन्ट में डिटैच नहीं होगे। इसलिए यह प्रैक्टिस करो।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  एक तो साथी को सदैव साथ रखो। दूसरा - साक्षी बनकर हर कर्म करो। *तो साथी और साक्षी - ये दो शब्द प्रैक्टिस में लाओ तो यह बन्धन मुक्त की अवस्था बहुत जल्दी बन सकती है।* सर्वशक्तिवान का साथ होने से शक्तियाँ भी सर्वप्राप्त हो जाती हैं। और साथ-साथ साक्षी बनकर चलने से कोई भी बन्धन में फंसेंगे नहीं। तो बन्धनमुक्त हुए हो ना।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- अंतर्मुखी बन विचार सागर मंथन कर बाप समान टीचर बनना"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा सागर के किनारे बैठ सागर में उठते हुए लहरों को निहार रही हूँ... ये लहरें कभी हवाओं की बाँहों को थाम आसमान को छूने की कोशिश कर रही हैं... कभी चट्टानों से टकराकर खेल रही हैं...* मेरे जीवन की उथल पुथल की लहरों को समाप्त करने वाले ज्ञान सागर बाबा का मैं आत्मा आह्वान करती हूँ... तुरंत ज्ञान सागर बाबा सागर के किनारे मुस्कुराते हुए खड़े हो जाते हैं... मैं आत्मा होली हंस बन ज्ञान रत्नों को चुगने के लिए ज्ञान सागर में डुबकी लगा देती हूँ...  

 

   *विचार सागर मन्थन कर अथाह खजानों से संपन्न बनने के लिए ज्ञान धन का दान करने की युक्ति बतलाते हुए ज्ञान सागर प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे फूल बच्चे... *ईश्वरीय खजानो को बाँहों में भरकर मुस्कराने वाले महान भाग्यवान धनवान् हो... यह दौलत जितना लुटाओगे अमीरी को अपने इर्दगिर्द सदा ही छलकता पाओगे... इस ज्ञान धन की खान की झलक हर दिल को दिखाओ...* सबके जीवन में यह ईश्वरीय बहार खिला आओ...

 

_ ➳  *मैं होलीहंस आत्मा ज्ञान सागर की गहराई में गोते लगाकर मोतियों को चुगते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... *मै आत्मा ईश्वर पिता की गोद में आकर मालामाल हो गई हूँ... कभी दीन हीन और गरीब सी आत्मा आज दौलतमंद हो गई हूँ...* और आप समान सबको धनवान् भाग्यवान बनाकर सुखो के फूल बिखेर रही हूँ...

 

   *लहराता प्यार का सागर मीठा बाबा प्यार की लहरों से जीवन को मुस्कराहट देते हुए कहते हैं:-* मीठे प्यारे लाडले बच्चे... यह ज्ञान धन ही जादूगरी है जो सुखो की खान में बदल जायेगी... दिलो ही दिल में इसे गिनते रहो... और अथाह खजानो को हर दिल पर लुटाओ... *इस अविनाशी ज्ञान धन से सबके जीवन में खुशियो को खिलाओ... सबके दिल आँगन में आनन्द की फिजां महका आओ...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा ज्ञान नदी बनकर पूरे विश्व को ज्ञान जल की धाराओं से भिगोते हुए कहती हूँ:-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा...*मै आत्मा ईश्वरीय ज्ञान धन से सबकी झोली भरकर अथाह सुखो का मालिक बना रही हूँ... मीठे बाबा से पाये अमूल्य खजाने का मालिक हर दिल को बना रही हूँ...* मा ज्ञान सूर्य होकर औरो को भी प्रकाशित कर रही हूँ...

 

   *ज्ञान के जादूगर मेरे बाबा ज्ञान की छड़ी मुझ आत्मा को देते हुए कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... वरदानी संगम पर ईश्वर पिता से पाये अमूल्य रत्नों को... *विचार सागर मन्थन से गहराई से दिल में समाओ... और यह ज्ञान की महक सबके दिलो तक पहुँचाओ... यह ज्ञान दान महान पुण्य सा प्रतिफल देकर मालामाल करेगा...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा ज्ञान की छड़ी घुमाकर सबके जीवन से काँटों को निकालकर ज्ञान के फूलों से सजाते हुए कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा आपकी फूलो सी गोद में पाये रत्नों को दान कर सबके भाग्य को जगा रही हूँ... फूलो भरी राह पर हर दिल को चला रही हूँ...* जनमो के देह समझ थके पाँवो को सुख भरी मरहम लगा रही हूँ...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- कुम्भकरण की नींद में सोए हुए को जगाना है*"

 

 _ ➳  अपने लाइट के सूक्ष्म आकारी शरीर को धारण किये, मैं फ़रिशता एक विशाल समुन्द्र के किनारे टहल रहा हूँ और टहलते - टहलते विचार कर रहा हूँ कि कितनी खुशनसीब हैं वो आत्मायें जिन्होंने भगवान को पहचान लिया है और जो परमात्म पालना में पल रही हैं। *किंतु कितनी बदनसीब हैं वो आत्मायें जो परमात्म सन्देश मिलने के बाद भी इस बात को स्वीकार नही करना चाहती कि परमात्मा इस धरा पर अपने बच्चों से मिलने के लिए आये हुए हैं*।

 

 _ ➳  मन ही मन ऐसी आत्माओं के दुर्भाग्य के बारे में विचार करते हुए उन पर रहम आता है जो परमात्म परिचय मिलने के बाद भी कुम्भकर्ण की नींद में सोए हुए है। आलस्य, अलबेलेपन में संगम युग की अनमोल घड़ियों को व्यर्थ में गंवाते जा रहें हैं। *ऐसे कुम्भकर्ण की नींद में सोए लोगों को जगाना हर ब्राह्मण आत्मा का कर्तव्य भी है और यही परमात्म प्रेम का रिटर्न भी है*। मन मे यह विचार करके मैं फ़रिशता उस स्थान से उड़ कर अब सूक्ष्म लोक की और चल पड़ता हूँ। ऊपर आकाश में उड़ते - उड़ते नीचे धरती का नज़ारा मैं स्पष्ट देख रहा हूँ। *केवल खाने, पीने और सोने में ही समय को व्यर्थ गंवाने वाले, कुम्भकर्ण की नींद में सोये मनुष्यों को मैं देखता हुआ जा रहा हूँ*।

 

 _ ➳  मन मे साक्षी भाव और ऐसी आत्माओं के प्रति शुभभावना, शुभकामना लिए अब मैं आकाश को पार कर जाता हूँ और कुछ ही क्षणों में सफेद चांदनी के प्रकाश से प्रकाशित फरिश्तों की एक बहुत सुंदर दुनिया मे प्रवेश करता हूँ। *श्वेत रश्मियां फैलाते, प्रकाश की काया में फ़रिश्ते यहाँ - वहाँ उड़ रहें हैं*। पूरा वतन फरिश्तों की लाइट से जगमग कर रहा है। *सभी फरिश्तो के सिरताज अव्यक्त ब्रह्मा बाबा एक दिव्य प्रकाश की काया में सबसे अलग दिखाई दे रहें हैं*। उनके अंग - अंग से जैसे प्रकाश का झरना फूट रहा है। उनके मस्तक पर विराजमान शिव बाबा सूर्य के समान चमक रहें हैं।

 

 _ ➳  अपने सम्पूर्ण फ़रिशता स्वरुप में ब्रह्मा बाबा बॉहें पसारे, एक दिव्य मुस्कान के साथ, वतन में आने वाले अपने हर फ़रिशता बच्चे का स्वागत कर रहें हैं। बाबा बड़े प्यार से मुस्कराते हुए हर बच्चे को गले लगाते हैं और अपना वरदानी हाथ उसके सिर पर रख कर उसे वरदानों से भरपूर कर देते हैं। *इस खूबसूरत दृश्य को देखता हुआ, मैं फ़रिशता अब बापदादा के पास पहुंचता हूँ। बाबा मुस्कराते हुए मेरी ओर देख कर अपनी बाहें फैला लेते हैं और मैं फ़रिशता बाबा की बाहों में समाकर, बाबा के असीम स्नेह की गहराई में डूब जाता हूँ*। तृप्त हो कर मैं बाबा के सामने बैठ जाता हूँ। बाबा अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रखते हैं। वरदान दे कर अपनी सर्वशक्तियों से बापदादा मुझे भरपूर कर देते हैं।

 

 _ ➳  बापदादा से सर्वशक्तियाँ और वरदान ले कर अब मैं फ़रिशता कुम्भकर्ण की नींद में सोए लोगों का जगाने का संकल्प बापदादा के सामने रखता हूं और बापदादा को अपने साथ चलने का आग्रह करता हूँ। *बापदादा मेरा आग्रह स्वीकार कर, मेरा हाथ थामे अब मुझे विश्व ग्लोब पर ले आते हैं*। बापदादा के साथ कम्बाइंड हो कर अब मैं पूरे विश्व का चक्कर लगा रहा हूँ और कुम्भकर्ण की नींद में सोए मनुष्यों पर ज्ञान की किरणें बरसा कर उन्हें अज्ञान अंधकार रूपी नींद से जगा रहा हूँ। *परमात्म किरणे उन पर फैलाते हुए, परमात्म प्रेम का उन्हें अनुभव करवाकर, उन्हें परमात्मा के अवतरण का सन्देश दे रहा हूँ*।

 

 _ ➳  मैं देख रहा हूँ कुम्भकर्ण की नींद में सोये सभी मनुष्य परमात्म प्रेम का अनुभव करके अब अज्ञान अंधकार रूपी निद्रा से निकल कर ज्ञान के सोझरे में आ रहें हैं और परमात्म पालना का अनुभव करने के लिए अपने आस - पास के सेवा स्थलों पर जा रहें हैं। *ब्रह्माकुमारी बहने ज्ञान कलश हाथ मे लिए उन सभी को ज्ञान अमृत पिला कर, उनके जीवन को परमात्म प्रेम से भरपूर कर रही हैं*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं त्रिकालदर्शी बन दिव्य बुद्धि के वरदान को कार्य मे लगाने वाली सफलता सम्पन्न आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

    *मैं संपूर्ण पवित्रता को धारण करके परमानन्द का अनुभव करने वाली पवित्र आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳. *एक वाणी, दूसरा स्व शक्तिशाली स्थिति और तीसरा श्रेष्ठ रूहानी वायब्रेशन जहाँ भी सेवा करो वहाँ ऐसा रूहानी वायब्रेशन फैलाओ जो वायब्रेशन के प्रभाव में सहज आकर्षित होते रहें।* देखो, अभी लास्ट जन्म में भी आप सबके जड़ चित्र कैसे सेवा कर रहे हैं? क्या वाणी से बोलते? वायब्रेशन ऐसा होता जो भक्तों की भावना का फल सहज मिल जाता है। *ऐसे वायब्रेशन शक्तिशाली हों, वायब्रेशन में सर्व शक्तियों की किरणें फैलती हों, वायुमण्डल बदल जाए। वायब्रेशन ऐसी चीज है जो दिल में छाप लग जाती है।* आप सबको अनुभव है किसी आत्मा के प्रति अगर कोई अच्छा या बुरा वायब्रेशन आपके दिल में बैठ जाता है तो कितना समय चलता है? बहुत समय चलता है ना! निकालने चाहे तो भी नहीं निकलता है, किसका बुरा वायब्रेशन बैठ जाता है तो सहज निकलता है? तो *आपका सर्व शक्तियों की किरणों का वायब्रेशन, छाप का काम करेगा। वाणी भूल सकती है, लेकिन वायब्रेशन की छाप सहज नहीं निकलती है।* अनुभव है ना!

 

 _ ➳. *अभी सेकण्ड में ज्ञान सूर्य स्थिति में स्थित हो चारों ओर के भयभीत, हलचल वाली आत्माओं को, सर्वशक्तियों की किरणें फैलाओ। बहुत भयभीत हैं। शक्ति दो। वायब्रेशन फैलाओ।* अच्छा। (बापदादा ने ड्रिल कराई)

 

✺   *ड्रिल :-  "श्रेष्ठ रूहानी वायब्रेशन फैलाने का अनुभव"*

 

 _ ➳  पावन अमृतवेला में बाबा को निहारती अपने भाग्य को सहारती इठलाती इतराती मैं आत्मा गुनगुनाती हूं..."जाने क्या देखा मुझमें मुझे प्यार कर लिया, मेरे लाडले कहा और मुझे बांहों में भर लिया" *मैं विशेष आत्मा हूं... मुझे स्वयं भगवान ने अपना बनाया है... इसी रूहानी नशे में अपने स्वमान में स्थित हो बाबा को साथ ले सृष्टि की सैर को निकलती हूं...*

 

 _ ➳  ऊँची ऊँची चोटियों के ऊपर से, कहीं कल-कल करती नदियां... ऊपर से नीचे गिरते झरने... ताल तालाब... लहलहाते पेड़ पौधे... चहचहाते पक्षियों के झुंड...उगते सूरज की लालिमा ये सब बड़ा ही सुखदायी लग रहा है... *परम कलाकार की बनाई ये तस्वीर एकदम अनोखी है मन को भाने वाली है...*

 

 _ ➳  तभी कोलाहल से मेरी तंद्रा टूटती है...नीचे देखती हूं, तो पाती हूँ कि *अनेक आत्मायें भयभीत होकर हलचल में हैं... शक्तिहीन स्थिति में होने के कारण बेचैन हैं...* इनकी इसी अवस्था को दिखाने के लिए ही बाबा ने आज मुझे इस सैर को प्रेरित किया है... *मेरे बाबा को हर एक आत्मा का कितना ध्यान रहता है... ये सोचकर ही मैं आत्मा कृतकृत्य हो जाती हूं... ये मेरे आत्मा भाई हैं, मुझे इनको इस अवस्था से बाहर निकालना ही है... मैं आत्मा सर्वशक्तिमान की संतान हूँ...*

 

 _ ➳  *अपने  सर्वशक्तिमान, ज्ञान सूर्य पिता को याद कर मैं आत्मा मास्टर ज्ञान सूर्य की शक्तिशाली स्थिति में स्थित हो इन आत्माओं को सर्व शक्तियों की किरणें दे रही हूं...* शुभभावना और शुभकामनाओं के वायब्रेशन्स दे रही हूं... *ईश्वर पिता से प्राप्त इन रूहानी वायब्रेशन्स से वायुमंडल बदल रहा है... शक्तियों की किरणों के वायब्रेशन फैलते ही इन आत्माओं की हलचल समाप्त हो रही है...* ये आत्मायें शान्ति की सुख की शक्तियों की तरंगों को अनुभव कर रही हैं... *वातावरण धीरे धीरे हल्का हो शान्त हो गया है सभी आत्माएँ प्रसन्नता पूर्वक इस सुख शान्ति के लिए ईश्वर पिता को मन ही मन धन्यवाद देती हैं...*

 

 _ ➳  *मैं भी बाबा को इस सेवा को कराने के लिये दिल से शुक्रिया अदा करती हूं...* बाबा आपका जितना भी शुक्रिया करूँ वो कम है... मेरे बाबा... मेरे बाबा... *"किस तरह सुनाएं ओ बाबा! जो तुमसे इतना पाएं हैं वो भूल कभी ना पाएंगे..."*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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