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 15 / 04 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *योग अग्नि सेविकर्मों को दग्ध किया ?*

 

➢➢ *आत्माओं को काम चिता से उतार ज्ञान चिता पर बिठाया ?*

 

➢➢ *अल्फ को जान पवित्रता के स्वधर्म को अपनाया ?*

 

➢➢ *सदा खुशहाल रह स्वयं के सर्व के प्रिय बनकर रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *आगे चलकर अनेक प्रकार की परिस्थितियाँ आयेंगी उन्हें पार करने के लिए बहुत पावरफुल स्थिति चाहिए, अगर योगयुक्त होंगे तो जैसा समय वैसा तरीका टच होगा। अगर समय प्रमाण युक्ति नहीं आती हैं तो समझना चाहिए योगबल नहीं हैं।योगबल वाली आत्मा को आने वाली परिस्थिति का पहले से ही पता होगा* इसलिए वह योगयुक्त स्थिति में रह हर परिस्थिति को सहज पार कर लेंगे।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं डबल लाइट आत्मा हूँ"*

 

✧  *सेवा में निमित्त बनना यह भी श्रेष्ठ भाग्य है - इस भाग्य को सदा आगे बढ़ाने के लिए विशेष स्वयं को डबल लाइट समझो। किसी भी प्रकार का बोझ खुशी की अनुभूति सदा नहीं करायेगा।*

 

  *जितना अपने को डबल लाइट अनुभव करेंगे उतना भाग्य पद्मगुणा बढ़ता जायेगा। बापदादा डबल लाइट रहने वाले बच्चों के हर कार्य में मददगार हैं।*

 

  जितना सेवा में निमित्त बनने का भाग्य मिलता है उतना डबल लाइट स्थिति से उड़ती कला में उड़ने के विशेष अनुभवी बन सकते हो। *डबल लाइट स्थिति में रहने से सदा खुशी में नाचते रहेंगे और खुशी के महादानी बन खुशी की खान बढ़ाते रहेंगे।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  सभी जिस स्थिती में अभी बैठे हैं, उसको कौन - सी स्थिती कहेंगे? व्यक्त में अव्यक्त स्थिती है? *बापदादा से मुलाकात करते समय बिन्दु रुप की स्थिती में रह सकते हो?* बिन्दु रुप की स्थिती विशेष किस समय बनती है? जब एकान्त में बैठते हो तब या चलते - फिरते भी हो सकती है?

 

✧  *अन्तिम पुरुषार्थ याद का ही है।* इसलिए याद का स्टेज वा अनुभव को भी बुद्धी में स्पष्ट समझना आवश्यक है।

बिन्दुरुप की स्थिती क्या है और अव्यक्त स्थिति क्या है, दोनों का अनुभव क्या क्या है? क्यों कि नाम दो कहते है तो दोनों के अनुभव में भी अन्तर होगा।

 

✧  चलते फिरते बिन्दुरुप कि स्थिती इस समय कम भी नहीं लेकिन ना के बारबर ही कहें। इसका भी अभ्यास करना चाहिए। जैसे जब कोई ऐसा दिन होता है तो सारे चलते -फिरते हुए ट्रैफिक को भी रोक कर तीन मिनिट साइलेन्स की प्रैक्टिस करते हैं। सारे चलते हुए कार्य को स्टाँप कर लेते हैं। *आप भी कोई कार्य करते हो वा बात करते हो तो बीच - बीच में यह संकल्पों की प्रैक्टिस करना चाहिए*।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  देह का भान है तो क्या बाप याद है? बाप के समीप सम्बन्ध का अनुभव होता है जब देहभान का त्याग करते हो तो। *देहभान का त्याग करने से ही देही-अभिमानी बनने से पहली प्राप्ति क्या होती है? यही ना की निरन्तर बाप की स्मृति में रहते हो अर्थात् हर सेकण्ड के त्याग से हर सेकण्ड के लिए बाप के सर्वसम्बन्ध का, सर्वशक्तियों का अपने साथ अनुभव करते हो। तो यह सबसे बड़ा भाग्य नहीं? यह भविष्य में नहीं मिलेगा।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺ *"ड्रिल :- सर्व का सदगति दाता एक बाप है"*

 

_ ➳  *सागर किनारे बैठी मैं आत्मा बाबा को स्नेह से याद कर रही हूँ... सागर की कल कल करती लहरों को देखते-देखते, प्रकृति के सामीप्य में... सहज ही मन मीठे बाबा की यादों में मगन हो रहा है... मैं अनुभव करती हूँ बापदादा ने पीछे से आकर मेरे कंधे पर अपना मजबूत हाथ रख दिया है...* पीछे मुड़ती हूँ तो अपने समीप अपने मीठे बाबा को देखती हूँ... बाबा के चेहरे का प्रकाश चारों और दिव्यता फैला रहा है... उनकी हंसी मुझे असीम आनंद से भर रही है... बाबा की मंद मंद मुस्कान, दमकते चेहरे को देखकर यह महसूस हो रहा है कि... आज बाबा से बहुत सुंदर रुहरुहान होने वाली है... मेरे मन में भी उत्सुकता हो रही है कि आज बाबा मुझे क्या कहने वाले हैं...

 

 *अपनी मीठी मुस्कान से आत्मा में आनंद रस घोलते हुए बाबा कहते हैं:-* "मेरे मीठे लाडले बच्चे... तुम आधाकल्प से अपने को भूले हुए माया के थपेड़े खाते भटकते आए हो... *अब मैं तुम्हें सच्चा रास्ता दिखाने आया हूँ... यह तुम्हारा अंतिम जन्म है... इसलिए तुम एक मुझ में ही निश्चय रखो...* परमत, मनमत का त्याग कर एक मेरी ही श्रीमत पर चलो... जो सभी तरह से सुख देने वाली है..."

 

_ ➳  *बाबा के सच्चे स्नेह में लीन होती मैं आत्मा कहती हूँ:-* "मेरे दिलाराम बाबा... आपने आकर मुझे सच्चा सुख दिया है... मुझे जन्म जन्म की भटकन से बचा लिया है... अब मैं सिर्फ आपको ही अपनी यादों में समाया हुआ पाती हूँ... *आपकी बताई शिक्षाओं पर, आपके बताये मार्ग पर ही चल रही हूँ... मैं कितनी भाग्यवान आत्मा हूँ... स्वयं भगवान सतगुरु बनकर आ गए हैं... मुझे मुक्ति और जीवनमुक्ति का मार्ग दिखा रहे हैं..."*

 

  *मुझ आत्मा को अपने दिलतख्त पर बिठाके बेहद प्यार बरसाते हुए बाबा कहते हैं:-* "मीठे मीठे सपूत बच्चे... *मैं तुम्हें कलियुगी दलदल से निकालकर पहले मुक्तिधाम ले जाता हूँ... फिर वहाँ से सतयुगी सुखों की दुनिया में ले जाता हूँ... इसके लिए मैं जो मत तुम्हें देता हूँ... वह सबसे न्यारी है...* कोई भी देहधारी गुरू, सन्त महात्मा यह मत नहीं दे सकते... इसलिए ही गाया जाता है... तुम्हारी गत मत तुम ही जानो... तुम मेरी इस श्रेष्ठ मत को अपने जीवन में धारण करो..."

 

_ ➳  *बाबा की गोद में बैठ पुलकित होती हुई मैं आत्मा कहती हूँ:-* "मेरे मन के मीत मीठे बाबा... आपकी श्रीमत मुझ आत्मा के लिए हर प्रकार से कल्याणकारी है... मनमत, परमत पर चल के तो आधा कल्प दुःख पाया, भटकते रहे... *अब मैं आपकी शिक्षाएं ही धारण करूँगी... आपकी ही मत पर चलके भविष्य के लिए अपना श्रेष्ठ भाग्य जमा करूँगी..."*

 

  *मुझे सभी चिंताओं से मुक्त कर बेगमपुर का बादशाह बनाते हुए बाबा कहते हैं:-* "मेरे लाडले सिकीलधे बच्चे... *गति सदगति करने की मत मैं ही आकर बताता हूँ... मनुष्य गुरु कोई भी सदगति नहीं कर सकते... वे कोई भी कह नहीं सकते कि... मैं तुम्हें अपने साथ ले जाऊँगा... सर्व का सदगति दाता, लिबरेटर एक मैं ही हूँ...* तुम कदम कदम पर मुझ से राय लो... एक मेरी शिक्षाओं को ही अमल में लाओ..."

 

_ ➳  *बाबा के हाथ और साथ से संगम के हर पल में मौज मनाती मैं आत्मा कहती हूँ:-* "मेरे दिल के सहारे प्यारे बाबा... मैंने एक दिलाराम को ही अपने दिल में बसा लिया है... आपकी शिक्षाएं ही मेरे जीवन का श्रृंगार कर रही हैं... *आपकी बाहों में ही मैंने सच्चा सुख पाया है... अब मैं सदा आपकी श्रीमत पर ही चल रही हूँ... आप मुझे सर्व सुखों की जागीर देने आए हैं... उसे पाने के लिए मैं स्वयं को हर प्रकार से योग्य बनाती जा रही हूँ..."*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- तमोप्रधान से सतोप्रधान बनने का पुरुषार्थ करना है*"

 

_ ➳  आज के इस तमोप्रधान माहौल में तमोप्रधान बन चुकी हर चीज को और इस तमोप्रधान दुनिया को फिर से सतोप्रधान बनाने के लिए ही भगवान इस धरा पर आयें है और इस श्रेष्ठ कर्तव्य को सम्पन्न करने के लिए तथा सभी आत्माओं की बुद्धि को स्वच्छ, सतोप्रधान  बनाने के लिए परमपिता परमात्मा स्वयं परमशिक्षक बन जीवन को परिवर्तन करने वाली पढ़ाई हर रोज हमे पढ़ा रहें हैं। *तो कितनी महान सौभाग्यशाली हूँ मैं आत्मा जो गॉडली स्टूडेंट बन भगवान से पढ़ रही हूँ। मन ही मन अपने भाग्य की सराहना करते, मैं स्वयं से प्रतिज्ञा करती हूँ कि अपने परमशिक्षक भगवान बाप द्वारा मिलने वाले ज्ञान को अच्छी रीति बुद्धि में धारण कर, अपनी बुद्धि को सतोप्रधान बनाने का मैं पूरा पुरुषार्थ करूँगी*।

 

_ ➳  अपने परमशिक्षक शिव बाबा द्वारा मिलने वाले ज्ञान के अखुट खजानों को बुद्धि में धारण कर बुद्धि को स्वच्छ और पावन बनाने के लिए अब मैं अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप में स्थित हो जाती हूँ और अपने बाबा द्वारा मुरली के माध्यम से हर रोज मिलने वाले मधुर महावाक्यों पर विचार सागर मंथन करने बैठ जाती हूँ। *एकांत में बैठ मुरली की गुह्य प्वाइंट्स पर विचार सागर मन्थन करते हुए मैं महसूस करती हूँ कि जितना इस पढ़ाई पर मैं मन्थन कर रही हूँ मेरी बुद्धि उतनी ही खुल रही है और इस पढ़ाई को जीवन मे धारण करना बिल्कुल सहज लगने लगा है*। नर से नारायण और नारी से लक्ष्मी बनाने वाली ये पढ़ाई ही परिवर्तन का आधार है जिसे मैं अपने जीवन मे स्पष्ट महसूस कर रही हूँ। *जैसे - जैसे इस पढ़ाई को मैं अपने जीवन मे धारण करती जा रही हूँ वैसे - वैसे मेरी बुद्धि सतोप्रधान बनती जा रही है*।

 

_ ➳  इस ईश्वरीय पढ़ाई से अपने जीवन मे आये परिवर्तन के बारे में विचार कर मन ही मन हर्षित होते हुए अपने परमशिक्षक शिव बाबा का मैं दिल से कोटि - कोटि शुक्रिया अदा करती हूँ और उनकी मीठी याद में खो जाती हूँ *जो मुझे सेकण्ड में अशरीरी स्थिति में स्थित कर देती है और मन बुद्धि के विमान पर बिठा कर मुझे मधुबन की उस पावन धरनी पर ले जाती है जहाँ भगवान स्वयं परमशिक्षक बन साकार में बच्चों को आकर ईश्वरीय पढ़ाई पढ़ाते हैं*।

 

_ ➳  देख रही हूँ मैं स्वयं को अपने गॉडली स्टूडेंट ब्राह्मण स्वरूप में डायमंड हाल में, जहाँ भगवान अपने साकार रथ पर विराजमान होकर मधुर महावाक्य उच्चारण कर रहें हैं। *एकटक अपने परमशिक्षक भगवान बाप को निहारते हुए उनके मुख कमल से निकलने वाले अनमोल ज्ञान को सुनकर उसे बुद्धि में धारण करके मैं वापिस लौट आती हूँ और इस पढ़ाई से अपनी बुद्धि को सतोप्रधान बनाने वाले अपने परमशिक्षक निराकार शिव बाबा से उनके ही समान बन उनसे मिलने मनाने की इच्छा से अब अपने मन और बुद्धि को सब बातों से हटाकर मन बुद्धि को पूरी तरह एकाग्र कर लेती हूँ*। एकाग्रता की शक्ति धीरे - धीरे देह भान से मुक्त कर, मेरे निराकारी सत्य स्वरूप में मुझे स्थित कर देती है और अपने सत्य स्वरूप में स्थित होते ही स्वयं को मैं देह से पूरी तरह अलग विदेही आत्मा महसूस करने लगती हूँ।

 

_ ➳  देह के भान से मुक्त होकर अपने प्वाइंट ऑफ लाइट स्वरूप में स्थित होकर मैं बड़ी आसानी से अपने शरीर रूपी रथ को छोड़ उससे बाहर आ जाती हूँ और हर बन्धन से मुक्त एक अद्भुत हल्केपन का अनुभव करते हुए, देह और देह की दुनिया से किनारा कर ऊपर आकाश की ओर उड़ जाती हूँ। *मन बुद्धि से दुनिया के खूबसूरत नजारो को देखती, अपनी यात्रा पर चलते हुए, मैं आकाश को पार कर, उससे ऊपर सूक्ष्म वतन से परें आत्माओं की उस खूबसूरत निराकारी दुनिया मे प्रवेश करती हूँ जहाँ मेरे शिव पिता रहते हैं*।

 

_ ➳  अपने इस शान्तिधाम, निर्वाणधाम घर मे आकर, गहन शांति की अनुभूति करते हुए इस अंतहीन ब्रह्मांड में विचरण करते - करते मैं पहुँच गई हूँ अपने प्यारे पिता के समीप जो अपनी सर्वशक्तियो की किरणों रूपी बाहों को फैलाये मेरा आह्वान कर रहें हैं। *अपने पिता परमात्मा के प्रेम की प्यासी मैं आत्मा स्वयं को तृप्त करने के लिए अपने पिता के पास पहुँच  कर उनकी किरणों रूपी बाहों में समा जाती हूँ। अपनी किरणों रूपी बाहों में मुझे भरकर मेरे मीठे दिलाराम बाबा अपना असीम स्नेह मुझ पर लुटा रहें हैं*। अपने अंदर निहित गुणों और  शक्तियों को जिन्हें मैं देह भान में आकर भूल गई थी, उन्हें बाबा अपने गुणों और सर्वशक्तियों की अनन्त धाराओं के रूप में मुझ पर बरसाते हुए पुनः जागृत कर रहे हैं।

 

_ ➳  अपनी खोई हुई शक्तियों को पुनः प्राप्त कर मैं आत्मा बहुत ही शक्तिशाली स्थिति का अनुभव करवा रही हैं। सर्वगुण और सर्वशक्तिसम्पन्न बनकर मैं वापिस साकारी दुनिया में लौट आई हूँ। *अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर, अपने परमशिक्षक शिव बाबा द्वारा मुरली के माध्यम से हर रोज पढ़ाई जाने वाली पढ़ाई को अच्छी रीति पढ़कर, और अच्छी रीति धारण करके अपने बुद्धि रूपी बर्तन को मैं धीरे - धीरे साफ, स्वच्छ और सतोप्रधान बनाती जा रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं अल्फ को जानने और पवित्रता के स्वधर्म को अपनाने वाली विशेष आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं सदा खुशहाल रह कर स्वयं को और सर्व को प्रिय लगने वाली खुशनसीब आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

अव्यक्त बापदादा :-

 

_ ➳  *जब करना ही है, होना ही है तो इस बात पर विशेष अटेन्शन दो। जब आप ग्रेट-ग्रेट ग्रैण्ड फादर के बच्चे हैं, आपके ही सभी बिरादरी हैं, शाखायें हैं, परिवार है, आप ही भक्तों के इष्ट देव हो। यह नशा है कि हम ही इष्ट देव हैं?* तो भक्त चिल्ला रहे हैं, आप सुन रहे हो! वह पुकार रहे हैं - हे इष्ट देव, आप सिर्फ सुन रहे हो, उन्हों को रेसपाण्ड नहीं करते हो? *तो बापदादा कहते हैं हे भक्तों के इष्ट देव अभी पुकार सुनो, रेसपाण्ड दो, सिर्फ सुनो नहीं। क्या रेसपाण्ड देंगे? परिवर्तन का वायुमण्डल बनाओ।*

 

✺  *"ड्रिल :- स्वयं को इष्ट देव के स्वरुप में स्थित कर भक्तों की पुकार सुनना"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा एक आँख में सुखधाम, दूसरी आँख में शांतिधाम की स्मृतियों को समाए हुए... सुख और शांति के सागर का आह्वान करती हूँ...* प्यारे बाबा मुझ आत्मा के सामने तुरंत हाजिर हो जाते हैं... मैं आत्मा सुख, शांति के सागर में समाकर... अतीन्द्रिय सुख और शांति का अनुभव कर रही हूँ... प्यारे बापदादा हाथ पकड मुस्कुराते हुए मुझ आत्मा को मंदिर में लेकर जाते हैं...

 

_ ➳  *मंदिर में मुझ आत्मा का ही पूज्य स्वरुप है... जिसके सामने सभी भक्त चिल्ला रहे हैं... पुकार रहे हैं...* मैं आत्मा देख रही हूँ कि दुखी, अशांत आत्माएं... सुख, शांति के लिए... एक बूंद प्यार के लिए तड़प रही हैं... कितनी भाग्यवान आत्मा हूँ मैं... जो मुझे सुख, शांति, प्यार का सागर ही मिल गया है... प्यारे बाबा मुझे स्मृति दिलाते हैं कि ये सब मुझ आत्मा के ही भाई हैं... सब एक ही बिरादरी एक ही परिवार हैं...

 

_ ➳  *बाबा द्वारा स्मृति पाकर मैं आत्मा इष्ट देव के स्वरुप में स्थित हो जाती हूँ...* ग्रेट-ग्रेट ग्रैण्ड फादर मुझ पर तेजस्वी किरणों की बौछारें कर रहे हैं... मैं आत्मा इन किरणों को ग्रहण कर रही हूँ... मुझसे होती हुई ये किरणें सभी भक्तों पर पड़ रही हैं... *मैं आत्मा रहमदिल भावना से तडपती आत्माओं की पुकार सुन... ज्ञान जल की अंचली देकर... उनकी प्यास बुझा रही हूँ...* मैं आत्मा बाबा के साथ भटकती आत्माओं को सत्य की राह दिखा रही हूँ...

 

_ ➳  *मैं आत्मा पूर्वज हूँ... इष्ट देव हूँ... विश्व परिवर्तन के कार्य के निमित्त हूँ... मास्टर वरदाता हूँ... बाप समान मास्टर कल्याणकारी हूँ... बापदादा की राईट हैण्ड हूँ...* इस स्मृति से मैं आत्मा सदा विश्व कल्याण के स्टेज पर स्थित रहती हूँ... मैं आत्मा चारों ओर सुख, शांति के वायब्रेशंस फैला रही हूँ... शुभ भावना-शुभ कामना द्वारा सबका कल्याण कर रही हूँ... मैं आत्मा चारों ओर के हलचल के वायुमंडल को शांत कर रही हूँ... *मैं आत्मा बाबा से मिले खजानों को सबको बांटकर... चारों ओर खुशहाली का वायुमंडल बना रही हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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