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 16 / 11 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *अपनी स्थिति अचल और निर्भय बनायी ?*

 

➢➢ *पढाई पर पूरा पूरा ध्यान दिया ?*

 

➢➢ *निर्बल, दिलशिकस्त, असमर्थ आत्माओं को बल दिया ?*

 

➢➢ *सदा एक बाप के श्रेत्श संग में रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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〰✧  जैसे ब्रह्मा बाप ने निश्चय के आधार पर, रुहानी नशे के आधार पर, निश्चित भावी के ज्ञाता बन सेकेण्ड में सब सफल कर दिया। अपने लिए कुछ नहीं रखा। *तो स्नेह की निशानी है सब कुछ सफल करो। सफल करने का अर्थ है श्रेष्ठ तरफ लगाना।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं सर्व की दुआयें लेने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ"*

 

  * सदा 'दृढ़ता सफलता की चाबी है' - इस विधि से वृद्धि को प्राप्त करने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ, ऐसा अनुभव होता है ना।*

 

  *दृढ़ संकल्प की विशेषता कार्य में सहज सफल बनाए विशेष आत्मा बना देती है और कोई भी कार्य में जब विशेष आत्मा बनते हैं तो सबकी दुआयें स्वत: ही मिलती हैं। स्थूल में कोई दुआयें नहीं देता लेकिन यह सूक्ष्म है जिससे आत्मा में शक्ति भरती है और स्व-उन्नति में सहज सफलता प्राप्त होती है।*

 

   *तो सदा दृढ़ता की महानता से सफलता को प्राप्त करने वाली और सर्व की दुआयें लेने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ - इस स्मृति से आगे बढ़ते चलो।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *आत्मा का आदि वा अनादि लक्षण तो शान्त है, तो सेकण्ड में ऑर्डर हो कि अपने अनादि स्वरूप में स्थित हो जाओ तो हो सकते हो कि टाइम लगेगा?* सुनाया था ना कि लगाना चाहे बिन्दी और लग जाये क्वेचन मार्क तो क्या होगा? इसको किस अवस्था का अभ्यास कहेंगे? सभी फरिश्ते स्थिति का अभ्यास करते हो?

 

✧  *अभी और अभ्यास करना है कि जितना समय चाहे उतना समय उस विधि से स्थित हो जायें।* अभी देखो कोई भी प्रकृति की आपदा या परिस्थिति की आपदा आती है तो अचानक आती हैना, और दिन-प्रतिदिन अचानक यह प्रकृति अपनी हलचल बढ़ाती जाती है। यह कम नहीं होनी है, बढ़नी ही है। *अचानक आपदा आ जाती है।*

 

✧  *तो ऐसे समय पर समाने वा समेटने की शक्ति की आवश्यकता है।* और कहाँ भी बुद्धि नहीं जाये, बस बाप और मैं, बुद्धि को जहाँ लगाना चाहें वहाँ लग जाये। क्यों-क्या में नहीं जाये, ये क्या हुआ, ये कैसे होगा, होना तो नहीं चाहिये, हो कैसे गया - इसको ब्रेक कहेंगे?

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *आप के आगे आने से लाइट ही लाइट देखने में आये। ऐसे होना है।* मधुबन ही लाइट का घर हो जायेगा। यह दीवे आदि देखते भी जैसे कि नहीं देखेंगे। जैसे वतन में लाइट ही लाइट देखने में आती है वैसे यह स्थूल वतन लाइट का हाउस हो जायेगा। *जब आप चैतन्य लाइट हाउस हो जायेंगे तो फिर यह मधुबन भी लाइट हाउस हो जायेगा।* अभी यह है लास्ट पढ़ाई की लास्ट सब्जेक्ट प्रैक्टिकल (उँमूम्त) में। थ्योरी (पदैब्) का कोर्स समाप्त हुआ। प्रैक्टिकल कोर्स की लास्ट सब्जेक्ट है। *इस लास्ट सब्जेक्ट में बहुत फास्ट पुरुषार्थ करना पड़ेगा। इसी स्टेज के लिए गायन है।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- सारी यूनिवर्स को बाप का मैसेज देना"*

 

_ ➳  *इस सुहानी संगम के अमृतवेले मेरे प्राण प्यारे बाबा अलौकिक जन्मदिन की बधाई देते हुए मुझे प्यार से जगाते हैं... मैं आत्मा भी बाबा को जन्मदिन की बधाई देती हूँ...* कितना अनोखा संगम है इस अनोखे संगम युग पर... बाप और बच्चे का जन्मदिन एक ही दिन... प्यारे बाबा मुझे गोदी में उठाकर वतन में लेकर जाते हैं... जहाँ चारों ओर रंग बिरंगे हीरों से सजे हुए बैलून्स हैं... इन बैलून्स से रंग बिरंगी किरणें निकलकर मुझ आत्मा की चमक और बढ़ा रही है... प्यारे बाबा मीठी रूह-रिहान करते हुए मुझे ज्ञानामृत पिलाते हैं...

 

   *सर्व आत्माओं को बाप का परिचय देने सर्विस की भिन्न भिन्न युक्तियाँ बतलाते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे फूल बच्चे... ईश्वर पिता की गोद में फूल सा खिलने का जो सुख पाया है उस सुख को दूसरो के दामन में भी सजाओ... *दुखो में तड़फ रहे पुकार रहे हताश और निराश हो गए भाई आत्माओ को सुख और शांति की राह दिखाओ... सच्चे पिता से मिलाकर उनको भी खजानो से भरपूर कर दो...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा प्रभु प्यार की कश्ती में डूबकर अनंत अविनाशी खुशियों से भरपूर होते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... *मै आत्मा आपसे अथाह खुशियो को पाकर सबको इस खान का मालिक बना रही हूँ... पूरा विश्व खुशियो से गूंज उठे ऐसी परमात्म लहर फैला रही हूँ...* प्यारे बाबा से हर दिल का मिलन करवा रही हूँ... और आप समान भाग्य सजा रही हूँ...

 

   *मीठे बाबा खिवैया बन काँटों के समुंदर से फूलों के बगीचे में ले जाते हुए कहते हैं:-* मीठे प्यारे लाडले बच्चे... आप समान सबके दुखो को दूर करो... आनन्द प्रेम शांति से हर मन को भरपूर करो... सबको उजले सत्य स्वरूप के भान का अहसास दिलाओ... *प्यारा बाबा आ गया है यह दस्तक हर दिल पर दे आओ... सब बिछड़े बच्चों को सच्चे पिता से मिलवाओ और दुआओ का खजाना पाओ...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा फ़रिश्ता बन चारों ओर मेरा बाबा आ गया के ज्ञान फूल बरसाते हुए कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा आपसे पाये प्यार दुलार और ज्ञान रत्नों को हर दिल को बाटने वाली दाता बन गई हूँ... *सबको देह से अलग सच्ची मणि आत्मा के नशे से भर रही हूँ... प्यारे बाबा का परिचय देकर उनके दुखो से मुरझाये चेहरे को सुखो से खिला रही हूँ...*

 

   *मेरे बाबा कलियुगी अंधकार को दूर कर अखंड ज्योति बन ज्ञान की लौ जलाते हुए कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... *अब ईश्वरीय प्रतिनिधि बन सबके जीवन को खुशियो से भर दो... विचार सागर कर नई योजनाये बनाओ... और ईश्वरीय पैगाम हर आत्मा तक पहुँचाओ...* सबकी जनमो की पीड़ा को दूर कर ख़ुशी उल्लास उमंगो से जीवन सजा आओ... पिता धरा पर उतर आया है... पुकारते बच्चों को जरा यह खबर सुना आओ...

 

_ ➳  *मैं आत्मा सम्बन्ध संपर्क में आने वाली हर आत्मा को उमंग उत्साह के पंख दे उड़ाते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा आपसे पायी अनन्त खुशियो की चमक सबको दिखा रही हूँ... प्यारा बाबा खुशियो की खान ले आया है खजानो को लुटाने आया है...* यह आहट हर दिल पर करती जा रही हूँ... भर लो अपनी झोलियाँ यह आवाज सबको सुना रही हूँ...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- पास होकर विजय माला का दाना बनना है*

 

_ ➳  रुद्रमाला में पिरोने अर्थात अपने प्यारे पिता के गले का हार बनने के लक्ष्य को सामने रखते ही मेरी आंखों के आगे खूबसूरत जगमग करती चैतन्य मणियों की माला स्वत: ही आ जाती है और विजयमाला के उन खूबसूरत मणकों को निहारते हुए मैं मन ही मन संकल्प करती हूँ कि इस विजयमाला में मुझे भी शिरोमणि बन, बाबा के गले मे अवश्य पिरोना है। *इसी संकल्प को दृढ़ता के साथ पूरा करने की प्रतिज्ञा कर, अपने मन और बुद्धि को अपने प्यारे पिता की याद में स्थिर करते ही मैं महसूस करती हूँ जैसे अव्यक्त बापदादा की आवाज धीरे - धीरे मेरे कानों में सुनाई दे रही है और बाबा जैसे मुझ से कह रहे हैं, बच्चे -: "विजयमाला में शिरोमणि बनने के लिए माया के बंधनों को काटते जाओ"*। 

 

_ ➳  बापदादा के इस अव्यक्त इशारे को समझ कर माया के बंधनों को काटने के लिए अब मैं मास्टर सर्वशक्तिवान के श्रेष्ठ स्वमान की सीट पर सेट होती हूँ और अपनी शक्तियों के प्रयोग से माया के हर वार से स्वयं को बचाने के लिए, स्वयं को सर्वशक्तियों से सम्पन्न बनाने और अपनी सोई हुई शक्तियों को पुनः जागृत करने के लिए सर्वशक्तिवान अपने शिव पिता की याद में अपने मन और बुद्धि को एकाग्र करती हूँ। *सर्वशक्तिवान अपने प्यारे बाबा की याद में अपने इस श्रेष्ठ स्वमान की सीट पर सेट होते ही मैं अनुभव करती हूँ जैसे मेरे अंदर एक अद्भुत शक्ति स्वत: ही भरने लगी है जो मुझे मेरे सर्वगुण और सर्व शक्ति सम्पन्न स्वरूप में स्थित कर रही है*। अपने सर्वगुण, सर्वशक्ति सम्पन्न स्वरूप में स्थित होते ही मैं महसूस कर रही हूँ जैसे मेरे अंदर से एक प्रकाश निकल रहा है जिसमे से सात रंगों की किरणें निकल कर धीरे - धीरे मेरे चारों और फैलने लगी हैं। 

 

_ ➳  प्रकाश की इन सात रंगों की किरणों से निकल रहे वायब्रेशन्स जैसे - जैसे चारों और फैल रहें हैं वैसे - वैसे वातावरण में रूहानियत छा रही है। पूरा वायुमण्डल जैसे बहुत ही सुखमय और शांतमय अनुभव होने लगा है। *एक गहन शांत और सुखमय स्थिति का मैं अनुभव करने लगी हूँ। अपने इस शांत और सुखमय स्वरूप में स्थित होकर गहन शांति का अनुभव करते हुए, मैं आत्मा अपने सुख, शांति के वायब्रेशन्स चारों और फैलाती हुई अब देह की कुटिया से बाहर आ जाती हूँ औऱ अपरमअपार सुख देने वाले अपने सुख सागर सर्वशक्तिवान बाबा के पास उनके शान्तिधाम घर की ओर चल पड़ती हूँ*। अपने निराकारी बिंदु स्वरूप में, प्वाइंट ऑफ लाइट मैं आत्मा अब धीरे - धीरे ऊपर आकाश की और बढ़ रही हूँ। आकाश को पार कर, सूक्ष्म वतन से होती हुई अपने ऊँचे ते ऊँचे धाम में मैं आत्मा प्रवेश करती हूँ।

 

_ ➳  चैतन्य आत्माओं की निराकारी दुनिया अपने इस मूलवतन घर में जहाँ कोई साकार या स्थूल बन्धन नही, कोई समय की सीमा नही, ऐसे अपने प्यारे वतन में, प्यार के सागर अपने प्यारे पिता की सर्वशक्तियों की किरणों रूपी बाहों में समाय चैतन्य सितारों को मैं देख रही हूँ। *अपने स्नेह की शीतल किरणों से बाबा अपने सभी चैतन्य सितारों को भरपूर कर रहें हैं। इस अति खूबसूरत स्नेह मिलन के नजारे को देखते हुए अब मैं अपने प्यारे पिता के पास पहुँचती हूँ और उन्हें जाकर स्पर्श करती हूँ। एक तेज करेण्ट मुझ आत्मा में प्रवाहित होने लगता है और सर्वशक्तियों की अनन्त धारायें मुझ आत्मा के ऊपर बरसने लगती है*। मैं आत्मा परमात्म शक्तियों को स्वयं में समाने लगती हूँ। असीम ऊर्जा से भरपूर होकर, अब मैं वापिस साकार सृष्टि की ओर लौटती हूँ। 

 

_ ➳  अपनी साकार देह में, भृकुटि पर विराजमान होकर अब मैं विजयमाला में पिरोने के तीव्र पुरुषार्थ में लग गई हूँ। विजयमाला में शिरोमणि बनने के लिए, माया के बन्धनों को अब मैं अपने प्यारे पिता की याद से काटती जा रही हूँ। *चलते, फिरते हर कर्म कम्बाइंड स्वरूप की स्मृति में रह करने से, माया अनेक प्रकार के रॉयल रूप धारण करके मेरे पास आती तो है किंतु मुझे बाबा के साथ देख वापिस लौट जाती है। सदा बाबा की छत्रछाया में रहने से माया का कोई भी वार अब मुझे प्रभावित नही करता। बाबा की सर्वशक्तियों की छत्रछाया मेरे चारों और एक सुरक्षा कवच बना कर, माया के हर बन्धन को काट कर, मुझे माया के हर वार से बचा लेती है*।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं निर्बल दिलशिकस्त असमर्थ आत्मा को एक्स्ट्रा बल देने वाली आत्मा हूँ।*

✺   *मैं रूहानी रहमदिल आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं आत्मा सदा एक बाप के श्रेष्ठ संग में रहती हूँ  ।*

✺   *मैं आत्मा किसी के संग के रंग के प्रभाव से सदा मुक्त हूँ  ।*

✺   *मैं सहज योगी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. जब बाप के बने हैं तो सबसे पहले कौन-सा वायदा कियाबाबा तन-मन-धन जो भी हैकुमारों के पास धन तो ज्यादा होता नहीं फिर भी जो हैसब आपका है। यह वायदा किया हैतन भीमन भीधन भी और संबंध भी सब आपसे - यह भी वायदा पक्का किया है? *जब तन-मन-धनसम्बन्ध सब आपका है तो मेरा क्या रहा!* फिर कुछ मेरा-पन है? होता ही क्या है? तन, मन, धन, जन.... सब बाप के हवाले कर लिया।

 

 _ ➳  2. जब मन भी बाप का हुआमेरा मन तो नहीं है ना! या मन मेरा हैमेरा समझकर यूज करना है? *जब मन बाप को दे दिया तो यह भी आपके पास 'अमानतहै।* फिर युद्ध किसमें करते होमेरा मन परेशान हैमेरे मन में व्यर्थ संकल्प आते हैंमेरा मन विचलित होता है....जब मेरा है नहीं, अमानत है फिर अमानत को मेरा समझ कर यूज करनाक्या यह अमानत में ख्यानत नहीं है? *माया के दरवाजे हैं - 'मैं और मेरा'। तो तन भी आपका नहींफिर देह- अभिमान का मैं कहाँ से आया! *मन भी आपका नहींतो मेरा-मेरा कहाँ से आयातेरा है या मेरा है?* बाप का है या सिर्फ कहना हैकरना नहींकहना बाप का और मानना मेरा!

 

 _ ➳  *सिर्फ पहला वायदा याद करो कि न बाडी-कान्सेस की - 'मैं हैन मेरा'। तो जो बाप की आज्ञा हैतन को भी अमानत समझो। मन को भी अमानत समझो।* फिर मेहनत की जरूरत है क्या? *कोई भी कमजोरी आती है तो इन दो शब्दों से आती है - 'मैं और मेरा'। तो न आपका तन है बाडी-कान्सेस का मैं।*  मन में जो भी संकल्प चलते हैं अगर आज्ञाकारी हो तो बाप की आज्ञा क्या हैपाजिटिव सोचो, शुभ भावना के संकल्प करो। फालतू संकल्प करो - यह बाप की आज्ञा है क्यानहीं। तो जब आपका मन नहीं है फिर भी व्यर्थ संकल्प करते हो तो बाप की आज्ञा को प्रैक्टिकल में नहीं लाया ना! *सिर्फ एक शब्द याद करो कि-मैं 'परमात्म-आज्ञाकारी बच्चा हूँ'। बाप की यह आज्ञा है या नहीं हैवह सोचो। जो आज्ञाकारी बच्चा होता है वह सदा बाप को स्वत: ही याद होता है। स्वत: ही प्यारा होता है।* स्वत: ही बाप के समीप होता है। तो चेक करो मैं बाप के समीपबाप का आज्ञाकारी हूँएक शब्द तो अमृतवेले याद कर सकते हो - 'मैं कौन?' आज्ञाकारी हूँ या कभी आज्ञाकारी और कभी आज्ञा से किनारा करने वाले

 

✺   *ड्रिल :-  "'परमात्म-आज्ञाकारी बच्चा होने का अनुभव"*

 

 _ ➳  अमृतवेले मीठे शिवबाबा की कोमल स्पर्श से आँखे खुली... बाबा की मीठी मुस्कान देख रोमांचित हो उठी... बाबा का हाथ माथे पर अनुभव कर अपना दोनों हाथ उनकी ओर बढा दिया... बाबा का हाथ पकड अशरीरी हो चल पड़ी अनंत की सैर करने... मीठे बाबा की मधुर मुस्कान से मन पुलकित हो गया... *इतनी सहज सच्ची थी बाबा संग प्रेम अनुभूति...* बाबा संग रहने का दिल ने वायदा जो किया है... मीठे बाबा ही है तन मन धन संबंध में...

 

 _ ➳  जहां बाबा बसे हो वो तन है पवित्र, वो मन है मंदिर, वो संबंध है स्वर्णिम... *बाबा की शिक्षाऐं और ज्ञान की वर्षा से यह तन मन धन जन की सुधि खोने लगी...* मीठे बाबा के संग सहज ही सब विस्मृत सा अनुभव करती हूँ... मैं कौन और मेरा क्या ? *मैैं बाबा का और मीठा बाबा मेरा...* बड़ा ही सुंदर सरल अनुभव हुआ... स्वयं को बाबा के सान्निध्य में देखकर असीम संतोष का अनुभव किया... बाबा की समीपता से अंदर के भराव को महसूस कर रही हूँ...

 

 _ ➳  अपने पुराने जीर्ण शीर्ण देह और देह के परिचय के परत दर परत आवरण को अनायास चीरते हुए *अपने मूल स्वरूप के दर्शन कर हल्‍का महसूस कर रही हूँ... अंधकार की कालिमा से, समस्त व्यर्थ से मुक्ति को प्राप्त कर दीप्त आभामय हो गई हूँ... स्वयं को उज्जवल प्रकाश स्वरूप में देख पुराने मैं - पन, मेरा - पन से सहज भाव से किनारा कर समर्थ अनुभव करती हूँ... बाॅडी काॅन्शियस से वैराग महसूस हो रही है... बाबा की आज्ञाओं के पालन में रमता योगी बन आनंद ले रही हूँ...* कोई मेहनत नहीं, कोई परिश्रम नहीं केवल असीम शांति को महसूस कर भरपूर हो रही हूँ...

 

 _ ➳  सहज रीति से शुभ भावना व समर्थ संकल्प से परिपूर्ण हो तन मन धन के समर्पण से बोझ रहित प्रफुल्लित अनुभव कर रही हूँ... अपने इसी स्वरूप में स्थित होकर मैं आत्मा अपने कर्म क्षेत्र पर वापिस लौट आती हूँ... और अपने सभी कर्तव्यों का पालन कर... बाबा की आज्ञानुसार अपने *सर्व आत्मा भाईयों की निःस्वार्थ सेवा में अपना संगम का अनमोल समय व्यतीत करती हूँ...* मैं औैर मेरा को ज्योति स्वरूप का चोला पहनाकर  सदा समर्थ स्वरूप में रह *सर्व आत्माओं को  शांति प्रदान करने की सेवा में जुट जाती हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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