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 17 / 08 / 22  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *बुधी का योग और सबसे तोड़ एक बाप से जोड़ा ?*

 

➢➢ *ब्रह्मा बाप समान सम्पूरण बनकर रहे ?*

 

➢➢ *अटूट निश्चय के आधार पर विजय का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *बुधी रुपी कंप्यूटर में फुल स्टॉप की मात्रा लगाई ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  सदा यही लक्ष्य याद रहे कि हमें बाप समान बनना है तो जैसे बाप लाइट है वैसे डबल लाइट। *औरों को देखते हो तो कमजोर होते हो, सी फादर, फालो फादर करो।* उड़ती कला का श्रेष्ठ साधन सिर्फ एक शब्द है- 'सब कुछ तेरा'। *'मेरा' शब्द बदल 'तेरा' कर दो। तेरा हूँ, तो आत्मा लाइट है। और जब सब कुछ तेरा है तो लाइट (हल्के) बन गये।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं बाबा का स्नेही, सहयोगी और सेवाधारी हूँ"*

 

〰✧  सदा अपने को बाप के स्नेही, सहयोगी और सदा सेवाधारी आत्मायें समझते हो? जैसे स्नेह अटूट है ना। परमात्म-स्नेह को कोई भी शक्ति तोड़ सकती है? असम्भव है ना कि थोड़ा-थोड़ा सम्भव है? यह अविनाशी स्नेह विनाश हो नहीं सकता। स्नेह के साथ-साथ सदा सहयोगी हैं। किस बात में सहयोगी हैं? *जो बाप के डायरेक्शन्स हैं उसमें सदा सहयोगी हैं। सदा श्रीमत पर चलने में सहयोगी हैं और सदा सेवाधारी हैं। ऐसे नहीं कि सेवा का चांस मिला तो सेवाधारी। सदा सेवाधारी। ब्राह्मण बनना अर्थात् सेवा की स्टेज पर ही रहना।* ब्राह्मणों का काम क्या है? सेवा करना।

 

✧  वो नामधारी ब्राह्मण धामा खाने वाले और आप सेवा करने वाले। तो हर सेकेण्ड सेवा की स्टेज पर हैं-ऐसे समझते हो? कि जब चांस मिलता है तब सेवा करते हो? चांस पर सेवा करने वाले हो वा सदा सेवाधारी हो? खाना बनाते भी सेवा करते हो? क्या सेवा करते हो? याद में खाना बनाते हो तो यह सेवा करते हो। कोई भी कार्य करते हो तो याद में रहने से वायुमण्डल शुद्ध बनता है। क्योंकि वृत्ति से वायुमण्डल बनता है। तो याद की वृत्ति से वायुमण्डल बनाते हो। *सेवाधारी अर्थात् हर समय अपने श्रेष्ठ दृष्टि से, वृत्ति से, कृति से सेवा करने वाले। जिसको भी श्रेष्ठ दृष्टि से देखते हो तो श्रेष्ठ दृष्टि भी सेवा करती है। तो निरन्तर सेवाधारी हैं। ब्राह्मण आत्मा सेवा के बिना रह नहीं सकती। जैसे यह शरीर है ना तो श्वास के बिना नहीं रह सकता तो ब्रह्मण जीवन का श्वास है सेवा।* जैसे श्वास न चलने पर मूर्छित हो जाते हैं ऐसे अगर ब्राह्मण आत्मा सेवा में बिजी नहीं तो मूर्छित हो जाती है। ऐसे पक्के सेवाधारी हो ना।

 

✧  तो जितना स्नेही हैं, उतना सहयोगी, उतना ही सेवाधारी हैं। सेवा का चांस तो बहुत है ना कि कभी किसको मिलता है, किसको नहीं मिलता? वाणी से सेवा का चांस नहीं मिलता लेकिन मन्सा से सेवा का चांस तो हर समय है ही। सबसे पावरफुल और सबसे बड़े से बड़ी सेवा मन्सा सेवा है। वाणी की सेवा सहज है या मन्सा सेवा सहज है? *मन्सा सेवा के लिये पहले अपने को पावरफुल बनाओ। वाणी की सेवा तो स्थिति नीचे-ऊपर होते हुए भी कर लेंगे। भाषण करके आ जायेंगे। कोई कोर्स करने वाला आयेगा तो भी कोर्स करा देंगे। लेकिन मन्सा सेवा ऐसे नहीं हो सकती। अगर मन्सा थोड़ा भी कमजोर है तो मन्सा सेवा नहीं हो सकती।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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पहले इस देह के सम्बन्ध और संस्कार के अधिकारी बनने के आधार पर ही मालिक-पन के संस्कार है। *सम्बन्ध में न्यारा और प्यारा-पन आना - यह निशानी है मालिक-पन की। संस्कारों में निर्मान और निर्माण, दोनों विशेषतायें मालिक-पन की निशानी हैं।* साथसाथ सर्व आत्माओं के सम्पर्क में आना, स्नेही बनना, दिलों के स्नेह की आशीर्वाद अर्थात शुभ भावना सर्व के अन्दर से उस आत्मा के प्रति निकले। चाहे जाने, चाहे न जाने। दूर का सम्बन्ध वा सम्पर्क हो लेकिन जो भी देखे वह स्नेह के कारण ऐसे ही अनुभव करे कि यह हमारा है स्नेह की पहचना से अपना-पन अनुभव करेगा। सम्बन्ध दूर का हो लेकिन स्नेह सम्पन्न का अनुभव करायेगा। विशेषता अनुभव में आयेगी कि वह जिसके भी सम्पर्क में आयेंगे उसको उस विशेष आत्मा से दाता-पन की अनुभूति होगी। यह किसी के संकल्प में भी नहीं आ सकता कि यह लेने वाले हैं। उस आत्मा से सुख की, दाता-पन की वा शान्ति, प्रेम, आनंद, खुशी, सहयोग, हिम्मत, उत्साह, उमंग - किसी न किसी विशेषता के दाता-पन की अनुभूति होगी। सदा विशाल बुद्धि और विशाल दिल, जिसको आप बडी दिल वाले कहते हो - ऐसी अनुभूति होगी। अब इन निशानियों से *अपने आपको चेक करो कि क्या बनने वाले हो?* दर्पण तो सभी के पास है। जितना स्वयं को स्वयं जान सकते उतना और कोई नहीं जान सकते। तो स्वयं को जानी। अच्छ

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ हम अवतार हैं, ऊपर से आये हैं - यह सदा स्मृति में रखो। *अवतार आत्मायें कभी शरीर के हिसाब-किताब के बन्धन में नहीं आयेंगी, विदेही बन करके कार्य करेंगी।* शरीर का आधार लेते हैं लेकिन शरीर के बंधन में नहीं बंधेते। तो ऐसे बने हो? *तो सदा अपने को शरीर के बंधन से न्यारा बनाने के लिए अवतार समझो। इस विधि से चलते रहो तो सदा बंधन-मुक्त न्यारे और सदा बाप के प्यारे बन जायेंगे।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  स्वदर्शन चक्रधारी बन 84 जनमो की स्मृति में रहना, और याद दिलाना*"

 

_ ➳  मीठे बाबा के मिलन को प्यासी मै आत्मा... मिलन की आस दिल में लिए डायमण्ड हाल में पहुंचती हूँ... मेरे सम्मुख दादी गुलजार है... मीठी दादी के सानिध्य में कुछ पल रहती हूँ... और अचानक मीठे बाबा की आवाज सुनाई देती है... *मेरे मीठे बच्चे... मेरे हर्ष की कोई सीमा ही नही रही है... और पलको से आसुंओं की अनवरत धारा बह चली है...* अपने मीठे बाबा को टुकुर टुकुर निहारे जा रही हूँ... और मीठे बाबा मेरी जनमो के बिछड़े पन की प्यास मिटाते जा रहे है...

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा को अमूल्य रत्नों से सजाकर कहते है :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... ईश्वर पिता को जानकर, जो स्वयं के सत्य स्वरूप को जाना है... तो स्वयं के चमकते रूप और मीठे बाबा की यादो में सदा खोये रहो... *सदा स्व के दर्शन में आनन्दित रहो.*.. इन मीठी यादो में सदा मगन रहो और दूसरो को भी सदा याद दिलाते रहो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के ज्ञान रत्नों को अपनी झोली में समाकर कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... विकारो से ग्रसित मै आत्मा... स्वयं को सदा देह मानकर दुखो के पहाड़ को जीती जा रही थी... *आपने जीवन में आकर, मेरा आत्मिक सौंदर्य दिखा कर, देवताई लक्ष्य दिया है.*.. अपने दमकते अनादि स्वरूप को जानकर मै आत्मा पुलकित हूँ..."

 

   *प्यारे बाबा मुझ आत्मा को दिव्य तरंगो से भरपूर करते हुए कहते है :-* "मीठे लाडले बच्चे... अपने 84 जनमो को जानकर, बेहद के खेल को भलीभांति जान गए हो... अपने स्वदर्शन को यादो में फिराते ही रहो... यही यादे सुखो भरे मीठे जीवन को प्यारी हकीकत बनाएंगी... *खुद भी यादो में डूबे रहो, और औरो को भी इन यादो के अहसासो में भिगो दो.*.."

 

_ ➳  *मै आत्मा अपने प्यारे बाबा से असीम ख़ुशी को पाकर कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... *आपने जीवन में आकर जीवन को खुशियो की मचान बना दिया है.*.. मेरा खोया वजूद याद दिला कर, मुझे अनोखा और प्यारा बना दिया है... मै आत्मा अपने 84 जनमो के पार्ट को देख देख ख़ुशी में झूम रही हूँ...."

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा को अपने वरदानों से भरपूर करते हुए कहते है :-* "मीठे सिकीलधे बच्चे... मीठे बाबा बेहद का समाचार सुनाकर, *तीनो लोको की खबर सुनाकर, मा त्रिलोकीनाथ बना देते है.*.. इस मीठे नशे में सदा झूमते रहो... अपनी बुद्धि में सदा स्वदर्शन को फिराते रहो... कितना खुबसूरत देवताई भाग्य पाते हो...इन मीठी स्मर्तियो में खोये रहो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा की सारी रत्नों भरी खानों पर अपना अधिकार जमाते हुए कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा... मै आत्मा हदो में फंसी स्वयं को मात्र देह समझ दुखो में उलझी रही... आपने आकर मुझे नूरानी बनाया है... अथाह ज्ञान धन देकर मुझे मालामाल किया है... और *देवताई सुखो का अधिकार देकर भाग्यवान बनाया है.*.." अपने प्यारे बाबा से मीठी रुहरिहानं कर मै आत्मा... अपने कर्म क्षेत्र पर लौट आयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- सच्चे बाप को याद कर सचखंड का मालिक बनना है*"

 

_ ➳  सचखंड की स्थापना कर, उस सचखंड का मुझे मालिक बनाने वाले अपने सत्य परमपिता परमात्मा बाप के साथ अंदर बाहर सदा सच्चे रहने का प्रोमिस करती हुई मैं मन ही मन विचार करती हूं कि कितने घोर अंधकार में भटक रही है दुनिया! जो रावण की झूठी नगरी झूठखण्ड को सच माने बैठी है। *रावण की झूठी माया ने सबकी बुद्धि को ताला लगा दिया है जो झूठ और सच का निर्णय भी नहीं कर पा रहे*। इस झूठ खंड के विनाशी भौतिक सुख संसाधनों से मिलने वाले अल्पकाल के विनाशी सुखों को ही पाने में लगे हुए हैं। जो अविनाशी सुख इस समय परमात्मा आ कर दे रहे हैं और भविष्य 21 जन्मों के लिए देने वाले हैं उन सुखों को तो यह बेचारे कभी अनुभव ही नहीं कर पाएंगे।

 

_ ➳  यही विचार करते करते मैं अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य की सुनहरी यादों में खो जाती हूँ और परमात्म प्यार की मधुर स्मृतियों में खोकर जैसे ही अपने प्यारे मीठे शिव बाबा को याद करती हूं। मैं अनुभव करती हूं स्वयं को बाप दादा के सामने। *मेरे सामने कुर्सी पर लाइट लाइट स्वरुप में बापदादा विराजमान है। मैं एकटक उनकी ओर निहार रही हूं*। उनकी मीठी दृष्टि में अपने लिए समाये असीम प्यार को देख मन ही मन हर्षित हो रही हूं। बाबा के पास बैठकर बाबा के घुटनों में अपना सिर रखकर परमात्म प्यार का असीम सुख ले रही हूं।

 

_ ➳  सिर पर बाबा के हाथों का हल्का - हल्का स्पर्श मुझे परमात्म शक्तियों से भर रहा है। परमात्म बल से भरपूर हो कर मैं स्वयं को एकदम हलका अनुभव कर रही हूं। *आंखों को बंद करके बाबा की गोद मे सिर रख कर परमात्म पालना के दिव्य अलौकिक आनंद में मैं डूबी हुई हूं*। तभी एक बहुत ही खूबसूरत दृश्य मुझे दिखाई देता है। मैं देख रही हूं कि लाइट का सूक्ष्म शरीर धारण कर मैं एक नन्हा फरिश्ता बन बापदादा के साथ कहीं दूर जा रहा हूं। देह और देह की दुनिया पीछे छूटती जा रही है।

 

_ ➳  एक बहुत खुले स्थान पर बाबा मुझे ले आते हैं और मेरी आँखों पर पट्टी बांध कर मेरे साथ आंख मिचौली का खेल खेलने लगते हैं। *आंखों पर पट्टी बांधे अपने नन्हे नन्हे हाथों से मैं बाबा को पकड़ने की कोशिश कर रहा हूँ*। थोड़े प्रयास के बाद मैं बाबा को ढूंढ कर बाबा का हाथ पकड़ कर जैसे ही अपनी आंखों से पट्टी हटाता हूं तो उसी स्थान पर मैं अपना देवताई स्वरूप धारण किये एक नन्हे राजकुमार के रूप में स्वयं को सोने की एक बहुत सुंदर नगरी में देखता हूं।

 

_ ➳  हरे भरे पेड़ पौधे, डालियों पर चहचहाते रंग-बिरंगे खूबसूरत पक्षी, वातावरण में गूंजती कोयल की मधुर आवाज, बागों में नाचते सुंदर मोर, रसभरे फलों से लदे वृक्षों की सुंदर कतारें, सतरंगी छटा बिखेरती सूरज की किरणें, ऐसा मनोरम दृश्य मैं अपनी आंखो से देख रहा हूं। स्वयं को मैं अति सुंदर हीरे जड़ित पोशाक धारण किए एक सुंदर राजकुमार के रूप में बगीचे में अन्य राजकुमारों के साथ खेलता हुआ देख रहा हूं। *बगीचे के बीचो-बीच से गुजरता एक सुंदर पथ जिस पर लाल मखमली कालीन बिछा है जो राजमहल के भीतर तक जा रहा है। यह मेरा राजमहल है जो पूरा सोने का बना है*। स्वर्ण महल के अंदर दास दासियाँ 56 प्रकार के भोजन बना रहे हैं। माँ श्री लक्ष्मी और पिता श्री नारायण मुझे अपनी गोद में उठा कर दुलार कर रहे हैं। शयनकक्ष में माँ मुझे मीठी लोरी सुनाकर सुला रही है।

 

_ ➳  अपने देवताई जीवन का दिन हंसते गाते खेल पाल करते आनंद में मैं व्यतीत कर रहा हूं। *तभी कानों में बाबा की मधुर आवाज सुनाई देती है:- "मेरे राजा बच्चे अपने देवताई राजकुमार स्वरुप को और अपने राजमहल को देखा ना"!इसी सचखण्ड का आपको मालिक बनना है*। बाबा के ये महावाक्य निरन्तर कानो में गूंज रहे हैं और सचखण्ड के सुंदर नज़ारे बार बार आंखों के सामने स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

 

_ ➳  सचखण्ड के इन सुंदर नजारों को अपनी आंखों में बसाये, सचखण्ड का मालिक बनने का तीव्र पुरुषार्थ करने के लिए *अब मैं फ़रिशता अपनी साकारी देह में अवतरित हो रहा हूँ और साकारी तन में प्रवेश कर अपने संगमयुगी ब्राह्मण स्वरूप को धारण कर रहा हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं अटूट निश्चय के आधार पर विजय का अनुभव करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं सदा हर्षित और निश्चिन्त आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सदैव बुद्धि रूपी कम्प्यूटर में फुलस्टॉप की मात्रा लगाती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा प्रसन्नचित्त रहती हूँ  ।*

   *मैं सदा समर्थ आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

✺ अव्यक्त बापदादा :-

➳ _ ➳  कोई को तख्त मिलता और किसको रायल फैमिली मिलती है। इसके भी गुह्य रहस्य हैं। *जो सदा संगम पर बाप के दिल तख्तनशीन स्वत: और सदा रहता है,* कभी-कभी नहींजो सदा आदि से अन्त तक स्वप्न मात्र भीसंकल्प मात्र भी पवित्रता के व्रत में सदा रहा हैस्वप्न तक भी अवित्रता को टच नहीं किया है, *ऐसी श्रेष्ठ आत्मायें तख्तनशीन हो सकती हैं।* 

➳ _ ➳  जिसने चारों ही सब्जेक्ट में अच्छे मार्क्स लिये हैंआदि से अन्त तक अच्छे नम्बर से पास हुए हैंउसी को ही पास विद् आनर कहा जाता है। बीच-बीच में मार्क्स कम हुई हैं फिर मेकप किया है, मेकप वाला नहीं लेकिन *आदि से चारों ही सब्जेक्ट में बाप के दिल पसन्द है वो तख्त ले सकता है।* 

➳ _ ➳  साथ-साथ जो ब्राह्मण संसार में सर्व के प्यारेसर्व के सहयोगी रहे हैंब्राह्मण परिवार हर एक दिल से सम्मान करता है, *ऐसा सम्मानधारी तख्त नशीन बन सकता है।* अगर इन बातों में किसी न किसी में कमी है तो वो नम्बरवार रायल फैमिली में आ सकता है। चाहे पहली में आवे, चाहे आठवीं में आए, चाहे त्रेता में आए। तो *अगर तख्तनशीन बनना है तो इन सभी बातों को चेक करो।*

✺   *ड्रिल :-  "सतयुग, त्रेतायुग में तख्तनशीन बनने का पुरुषार्थ करना"*

➳ _ ➳  भृकुटी की कुटिया में विराजमान मैं अविनाशी प्रकाश पुंज आत्मा हूँ... *अपने सत्य स्वरूप को और गहराई से अनुभव करते हुए* मैं आत्मा देख रही हूँ... स्वयं को मस्तक के भव्य भाल पर सूर्य के समान चमकते हुए... जैसे सूर्य अपनी शक्तिशाली किरणों से पूरे विश्व को प्रकाशित करता है... ठीक उसी प्रकार *मैं अविनाशी प्रकाश पुंज आत्मा अपनी शक्तिशाली किरणों से इस पूरे विश्व को प्रकाशित कर रही हूँ...* इस देह मे होते भी विदेही अवस्था का स्पष्ट अनुभव हो रहा है... मैं आत्मा एक खिचाव महसूस कर रही हूँ... जैसे कोई मुझे ऊपर की तरफ खींच रहा हो... धीरे-धीरे मैं आत्मा इस देह रूपी घर से निकल कर सूक्ष्म शरीर के साथ ऊपर की तरफ बादलों के बीच से होती हुई जा रही हूँ... पहुँच जाती हूँ सूक्ष्म वतन में जहां *बाबा अपने फरिश्ते स्वरुप में बडे से रंग-बिरंगे फूलों के झूले पर बैठे मुस्कुरा रहे हैं...*

➳ _ ➳  ये दृश्य मन को मोह लेने वाला है... बाबा बाहें फैला कर मुझे अपने पास आने का इशारा करते हैं... मैं फरिश्ता बिना देर किए जल्दी से जाकर अपने मीठू बाबा के गले लग जाता हूँ... बाबा से गले लगते ही जैसे *बाबा की सर्व शक्तियाँ मुझ में समा रही है...* बाबा मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए कहते हैं आ गये मेरे लाडले बच्चे बाबा आपका ही इन्तजार कर रहा था... ये सुन कर मैं फरिश्ता गदगद हो जाता हूँ... प्यार से भर जाता हूँ... *मुझ फरिश्ते की चमक और बढ गई है...* अब बाबा मेरा हाथ पकड़ कर मुझे भी अपने साथ रंग-बिरंगे फूलों से बने झूले पर बिठा देते हैं... और मुझे सामने देखने का ईशारा करते हैं... बाबा मुझ फरिश्ते के सामने एक दृश्य इमर्ज करते हैं... मुझ फरिश्ते के सामने स्वर्णिम दृश्य इमर्ज हो रहे हैं... मैं फरिश्ता बहुत बडे-बडे सोने-हीरों से जड़ित महल देख रहा हूँ... सम्पूर्ण सतोप्रधान प्रकृति, कल-कल करते मीठे झरने बह रहे हैं... दूध की नदियां बह रही है... वाह कितने सुंदर-सुंदर फल और फूलों के बगीचे है... पंछी मधुर आवाज में गीत गा रहे हैं... ऐसा लग रहा है मानो प्रकृति और ये पंछी मिलकर नये नये साज बजा रहे हों... ये सभी दृश्य बडे मनमोहक लग रहे हैं...

➳ _ ➳  इस मनभावन दृश्य को देखते-देखते मैं फरिश्ता एक बडे से हीरे-सोने से बने महल में प्रवेश करता हूँ... जहाँ मैं फरिश्ता देखता हूँ... सामने देवी-देवताओं की सभा लगी हुई है... जिसमें *डबल सिरताज देवी-देवताएँ बैठे हैं* और उनके बीच एक बहुत बडा सोने-हीरों से जड़ित तख्त है... उस तख्त पर भी डबल सिरताज देवी और देवता विराजमान हैं... *अलग-अलग रंगों के हीरे और सोने से बने तख्त पर विराजमान देवी और देवता अलग और बहुत मनमोहक नजर आ रहे हैं...* मैं फरिश्ता यहाँ वहाँ देखता हूँ... और सोचता हूँ... ये सभी तख्त पर क्यों नहीं बैठे हैं... सिर्फ यही दो देव आत्माएँ तख्त पर विराजमान हैं... अचानक से मुझ फरिश्ते को कंधे पर स्पर्श अनुभव होता है... जैसे ही मुड कर देखती हूँ... सामने बाबा को पाती हूँ... और फिर मैं बाबा को सारी बात बताती हूँ... और बाबा को कहती हूँ... बाबा वो तख्त बहुत ही सुंदर और मनमोहक था... हम भी भविष्य में वैसे ही तख्त पर बैठेंगे... लेकिन बाबा वहां सभी तख्त पर क्यों नहीं बैठे थे... इसका क्या रहस्य है बाबा, बाबा मुझे देख मुस्कुराते हैं और फिर इस बात के गुह्य रहस्य को बताते हैं... मैं एकटक होकर बाबा की एक-एक बात को बडे ध्यान से सुन रही हूँ...

➳ _ ➳  बाबा मुझे बताते हैं बच्चे भविष्य तख्त प्राप्त करने का आधार है... *सदा बाप के दिलतख्तनशीन हो रहना... अभी के दिलतख्तनशीन ही भविष्य तख्त प्राप्त कर सकते हैं...* चारों ही सब्जेक्ट में फुल मार्क्स लेने वाले पास विद आनर, चारों ही सब्जेक्ट में बाप के दिल पसंद जो बनते हैं... और *अभी जो सम्मानधारी बनता वहीं तख्त नशीन बनता है...* वहीं भविष्य तख्त नशीन बनता है... अगर इनमें से किसी भी बात में कमी है तो वो नम्बरवार रायल फैमिली में आता है... समझा बच्चे, बाबा की सारी बात सुन मैं आत्मा स्व चैकिंग करती हूँ... बाबा की कही सभी बातों को सामने लाती हूँ... अपने आप से मैं प्रश्न पूछती हूँ... क्या मैं आत्मा बाबा द्वारा बताए तख्तनशीन के पुरुषार्थ अनुसार ही पुरूषार्थ कर रही हूँ...

 ➳ _ ➳  बाबा को देखते हुए मैं आत्मा कहती हूँ... बाबा मैं हूँ ही दिलतख्तनशीन सो भविष्य तख्तनशीन आत्मा... बाबा मुझ आत्मा को देखते हुए कहते हैं हाँ मेरे लाडले बच्चे हाँ बाबा मुझ आत्मा के सिर पर अपना वरदानी हाथ रख मुझे वरदान देते हैं... *बच्चे-सदा दिलतख्तनशीन भव !* मैं अंतर्मन से इस वरदान को स्वीकार करती हूँ... जैसे ही अंतर्मन से मैं आत्मा इस वरदान को स्वीकार करती हूँ... वैसे ही मैं आत्मा अपने जीवन में इस वरदान को सहज फलीभूत होते देख रही हूँ... मैं आत्मा सदा स्वयं को बाबा के दिलतख्त पर अनुभव कर रही हूँ... *मैंने पहले नम्बर में आने का दृढ़ संकल्प किया है* बाबा के दिए वरदान को बार बार स्मृति में ला रही हूँ... जितना स्मृति में ला रही हूँ... उतना ही मैं इस वरदान को अनुभव कर रही हूँ... मैं आत्मा अपनी सम्मानधारी स्थिति का स्पष्ट अनुभव कर रही हूँ... हर आत्मा को सम्मान और सहयोग दे रही हूँ... *मैं आत्मा चारों ही सब्जेक्ट में बाप की दिल पंसद बनती जा रही हूँ...* इस प्रकार मैं आत्मा *तीव्र पुरषार्थ में जुट गई हूँ* और "सदा दिलतख्तनशीन भव" सो भविष्य तख्तनशीन भव के वरदान को सहज ही अपने जीवन में फलीभूत होते अनुभव कर रही हूँ... शुक्रिया मीठू बाबा, शुक्रिया

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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