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 18 / 08 / 22  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *नष्टोमोहा बन एक बाप से अपना बुधीयोग रखा ?*

 

➢➢ *शुभचिन्तक बन सबको शांतिधाम सुखधाम का रास्ता बताया ?*

 

➢➢ *बेफिक्र बादशाह की स्थिति में रह वायुमंडल पर अपना प्रभाव डाला ?*

 

➢➢ *प्रसन्नता की छाया द्वारा शीतलता का अनुभव किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *जैसे शुरु-शुरू में अभ्यास करते थे-चल रहे हैं लेकिन स्थिति ऐसी जो दूसरे समझते कि यह कोई लाइट जा रही है। उनको शरीर दिखाई नहीं देता था, इसी अभ्यास से हर प्रकार के पेपर में पास हुए। तो अभी जबकि समय बहुत खराब आ रहा है तो डबल लाइट रहने का अभ्यास बढ़ाओ।* दूसरों को सदैव आपका लाइट रुप दिखाई दे-यही सेफ्टी है। अन्दर आवें और लाइट का किला देखें।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ"*

 

✧  अपने को सदा मास्टर सर्वशक्तिमान् अनुभव करते हो? मास्टर का अर्थ है कि हर शक्ति को जिस समय आह्वान करो तो वो शक्ति प्रैक्टिकल स्वरूप में अनुभव हो। जिस समय, जिस शक्ति की आवश्यकता हो, उस समय वो शक्ति सहयोगी बने-ऐसे है? जिस समय सहनशक्ति चाहिये उस समय स्वरूप में आती है कि थोड़े समय के बाद आती है? अगर मानो शस्त्र एक मिनट पीछे काम में आया तो विजयी होंगे? विजय नहीं हो सकेगी ना। *तो मास्टर सर्वशक्तिमान अर्थात् शक्ति को ऑर्डर किया और हाजिर। ऐसे नहीं कि आर्डर करो सहन शक्ति को और आये सामना करने की शक्ति। तो उसको मास्टर सर्वशक्तिमान कहेंगे? जैसे कई परिस्थिति में सोचते हो कि किनारा नहीं करना है, सहन करना है लेकिन फिर सहन करते-करते सामना करने की शक्ति में आ जाते हो।*

 

  ऐसे ही निर्णय शक्ति की आवश्यकता है। लेकिन निर्णय शक्ति यथार्थ समय पर यथार्थ निर्णय नहीं ले तो उसको क्या कहेंगे? मास्टर सर्वशक्तिमान् या कमजोर? तो ऐसे ट्रायल करो कि जिस समय जो शक्ति आवश्यक है उस समय वो शक्ति कार्य में आती है? एक सेकेण्ड का भी फर्क पड़ा तो जीत के बजाय हार हो जाती है। सेकेण्ड की बात है ना। निर्णय करना हाँ या ना। और हाँ के बजाय अगर ना कर लिया तो सेकेण्ड का नुकसान सदा के लिये हार खिलाने के निमित्त बन जाता है। *इसलिये मास्टर सर्वशक्तिमान् का अर्थ ही है जो हर शक्ति र्डर में हो। जैसे ये शरीर की कर्मेन्द्रियां ऑर्डर में हैं ना। हाथ पांव जब चलाओ, जैसे चलाओ वैसे चलाते हो ना ऐसे सर्वशक्तियां इतना र्डर में चलें। जितना यूज करते जायेंगे उतना अनुभव करते जायेंगे।*

 

  सदा अपना ये स्वमान स्मृति में रखो कि हम मास्टर सर्वशक्तिमान हैं। इस स्वमान की सीट पर सदा स्थित रहो। जैसी सीट होती है वैसे लक्षण आते हैं। कोई भी ऐसी परिस्थिति सामने आये तो सेकेण्ड में अपने इस सीट पर सेट हो जाओ। सीट पर सेट नहीं होते तो शक्तियां भी र्डर नहीं मानती। सीट वाले का ऑर्डर माना जाता है। तो सेट होना आता है ना। सीट पर बैठने वाले कभी अपसेट नहीं होते। या तो है सीट या तो है अपसेट। लक्ष्य अच्छा है, लक्षण भी अच्छे हैं। सभी महावीर हैं। कभी-कभी सिर्फ थोड़ा माया से खेल करते हो। *अब के विजयी ही सदा के विजयी बनेंगे। अब विजयी नहीं तो फिर कभी भी विजयी नहीं बनेंगे। इसलिये संगमयुग है ही सदा विजयी बनने का युग। द्वापर-कलियुग हार खाने का युग है और संगम विजय प्राप्त करने का युग है। इस युग को वरदान है। तो वरदानी बन विजयी बनो।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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आज सर्व स्नेही बच्चों के स्नेह का रेस्पाण्ड करने के लिए बापदादा मिलन मनाने के लिए आये हैं। विदेही बापदाद को देह का आधार लेना पडता है। किसलिए? बच्चों को विदेही बनाने के लिए। जैसे बाप विदेही, देह में आते हुए भी विदेही स्वरूप में, विदेही-पन का अनुभव कराते हैं। ऐसे *आप सभी जीवन में रहते, देह में रहते विदेही आत्म-स्थिति में स्थित हो इस देह द्वारा करावनहार बन करके कर्म कराओ।* यह देह करनहार है। आप देही करावनहार हो। इसी स्थिति को विदेही स्थिति कहते है। इसी को ही फॉलो फादर कहा जाता है।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ *कई सोचते हैं - बीजरूप स्थिति या शक्तिशाली याद की स्थिति कम रहती है या बहुत अटेन्शन देने के बाद अनुभव होती है। इसका कारण अगले बार भी सुनाया कि लीकेज है, बुद्धि की शक्ति व्यर्थ तरफ बंट जाती है।* कभी व्यर्थ संकल्प चलेंगे, कभी साधारण संकल्प चलेंगे। *मनन करने वाले अभ्यास होने के कारण जिस समय जो स्थिति बनाने चाहें वह बना सकेंगे। लिंक रहने से लीकेज खत्म हो जायेगी और जिस समय जो अनुभूति चाहे बीजरूप स्थिति की, चाहे फरिश्ते रूप की, जो करना चाहो वह सहज कर सकेंगे।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  हॉस्पिटल कम यूनिवर्सिटी खोल अनेको का कल्याण करना"*

 

_ ➳  बचपन में आसमानी चाँद देख मचला करते थे...पर पा न सके...क्योकि तब मेरे पास ब्रह्मा मां जो न थी... *आज भाग्य से मिली प्यारी ब्रह्मा मां ने... मुझे प्यारा शिव चाँद हाथो में दे दिया है.*..और मन इस चाँद से हर पल खेल रहा है... ऐसा खुबसूरत भाग्य... मुझ आत्मा का होगा.... यह तो कल्पनाओ में भी न था... इन मीठी यादो में खोयी खोयी मै आत्मा... मीठे बाबा के कमरे में... अपनी ब्रह्मा माँ और शिव पिता से मिलने पहुंचती हूँ...

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को रूहानी सर्जन बनाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... मीठे बाबा से जो प्यार और ज्ञान की दौलत पायी है.. उसको पूरे विश्व पर दिल खोल कर बरसाओ... इस धरा से दुखो का नामोनिशान मिटाने वाले मा सुख दाता बनकर मुस्कराओ... *जिन सच्ची खुशियो की मचान पर खिलखिला रहे हो.. इन खुशियां को हर दिल का अधिकार बनाओ.*..

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा से पायी असीम खुशियो को अपनी झोली में भरते हुए कहती हूँ :-* "मीठे दुलारे बाबा मेरे... *आपने मेरा हाथ थामकर मुझे सुखो का सरताज बना दिया है.*. मेरी रूहानी रंगत पर विश्व फ़िदा हो गया है... मै आत्मा सुखो का पर्याय बनकर, हर दिल को सुख भरा रास्ता दिखाने वाली, रौशनी बन गयी हूँ..."

 

   *प्यारे बाबा मुझ आत्मा को अखूट खजानो के मालिक बनाते हुए कहते है :-* "मीठे लाडले प्यारे बच्चे... *ईश्वरीय खुशियो को जितना बांटोगे, उतना धनवान् बन मुस्कराओगे..*. यह ज्ञान धन अखूट है... इसलिए रूहानी सर्जन और प्रोफेसर बनकर, सबको इस रूहानी पढ़ाई से वाकिफ कराओ... सत्य का परिचय देने वाले सच्चे सत्यवान बन मुस्कराओ...

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के ज्ञान रत्नों को पाकर कर खुशियो में झूम कर कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... सच्चे ज्ञान से कोसो दूर मै आत्मा... कितनी अनपढ सी थी... *आज आपने तीनो लोको का ज्ञान देकर... मुझे प्रोफेसर और सर्जन बना दिया है..* मुझे कुछ भी नही से उठाकर, सब कुछ बना दिया है...

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा को रूहानी ज्ञान का प्रतिनिधि बनाते हुए कहते है :-* "जो कार्य मीठे बाबा ने किया है वही कर्तव्य आप बच्चों का है... *सबको सत्य का परिचय देकर, सच्चे सुखो की अमीरी से भरपूर करो.*.. मीठे बाबा जैसा हर दिल का कल्याण कर... असीम दुआओ और पुण्यो का खाता बढ़ाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा अपने मीठे मीठे बाबा को बड़े स्नेह से निहारते हुए कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... आपने विश्व कल्याणकारी बनाकर, मुझे कितना ऊँचा उठा दिया है... *मै आत्मा खुशियो की सौगात लिए, हर दिल आँगन को भरती जा रही हूँ..*. भगवान धरा पर अखूट खजाने बाँट रहा है..यह खबर पूरे विश्व में फैला रही हूँ..."अपने प्यारे बाबा से रुहरिहानं कर मै आत्मा... सृष्टि जगत में लौट आयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- शुभचिंतक बन सबको शांतिधाम, सुखधाम का रास्ता बताना है*"

 

_ ➳  इस काँटो के जंगल (दुखधाम) को फूलों का बगीचा (सुखधाम) बनाने का जो कर्तव्य करने के लिए परमपिता परमात्मा शिव बाबा इस धरा पर अवतरित हुए है उस कार्य में उनका मददगार बनने के लिए मुझे काँटे से फूल बन सबको फूल बनाने का पुरुषार्थ अवश्य करना है और सबको शान्तिधाम, सुखधाम का रास्ता बताना है। मन ही मन अपने आपसे यह प्रतिज्ञा करते हुए अपने दिलाराम बागवान बाप की मीठी यादों में मैं खो जाती हूँ। *प्रभु यादों की डोली में बैठ अव्यक्त फ़रिशता बन इस साकारी दुनिया और दुनियावी सम्बन्धो से किनारा कर मैं चल पड़ती हूँ उस अव्यक्त वतन में जहां मेरे दिलाराम बाबा मेरे आने की राह में पलके बिछाए बैठे हैं*।

 

_ ➳  वतन में पहुंच कर अब मैं वतन का खूबसूरत नजारा मन बुद्धि रूपी दिव्य नेत्रों द्वारा स्पष्ट देख रही हूं। पूरा वतन रंग बिरंगे फूलों की खुशबू से महक रहा है। मेरे ऊपर लगातार पुष्पो की वर्षा हो रही हैं। *जहाँ - जहाँ मैं पाव रखती हूं मुझे ऐसा अनुभव होता है जैसे मेरे पैरों के नीचे मखमली फूंलो का गलीचा बिछा हुआ है*। सामने मेरे दिलाराम मेरे बागवान बाबा अपने लाइट माइट स्वरूप में रंग बिरंगे फूलो से सजे एक बहुत सुंदर झूले पर बैठे मेरा इन्जार कर रहें हैं। मुझे देखते ही बाबा मुस्कराते हुए स्वागत की मुद्रा में खड़े हो कर अपनी बाहें फैला लेते हैं और आओ मेरे रूहे गुलाब बच्चे कह कर अपने गले लगा लेते हैं।

 

_ ➳  बाबा की बाहों के झूले में झूलते, अपनी आंखें बन्द कर मैं असीम सुख की अनुभूति में खो जाती हूँ। *अतीन्द्रिय सुखमय स्थिति का गहराई तक अनुभव करने के बाद मैं जैसे ही अपनी आंखें खोलती हूं तो देखती हूँ कि बाबा के साथ मैं एक बहुत बड़े फूंलो के बगीचे में खड़ी हूँ*। बाबा बड़े प्यार से एक एक - एक फूल पर दृष्टि डाल कर, हर फूल को बड़े प्यार से सहलाते हुए आगे बढ़ जाते हैं। मैं भी बाबा के पीछे - पीछे चलते हुए हर फूल को बड़े ध्यान से देख रही हूं। *कुछ फूल तो एक दम खिले हुए बड़ी अच्छी खुशबू फैला रहे हैं, कुछ अधखिलें हैं और कुछ थोड़े थोड़े मुरझाए हुए भी दिखाई दे रहें हैं*। लेकिन हर फूल के ऊपर प्यार भरी दृष्टि डाल कर अब बाबा वापिस उस झूले पर आ कर बैठ जाते हैं और मुझे भी अपने पास बैठने का ईशारा करते हैं।

 

_ ➳  मेरे मन मे चल रही दुविधा को जैसे बाबा मेरे चेहरे से स्पष्ट पढ़ रहे हैं इसलिए मेरे कुछ भी पूछने से पहले बाबा मुझसे कहते हैं, मेरे रूहे गुलाब बच्चे:- *"इस काँटो की दुनिया को फूलो की नगरी बनाने के लिए ही बाबा ये सैपलिंग लगा रहें हैं" और ये सभी फूल मेरे वो मीठे, सिकीलधे बच्चे हैं जो श्रीमत पर चल काँटे से फूल बनने का पुरुषार्थ कर रहें हैं, लेकिन नम्बरवार हैं*। इसलिए कुछ फूल तो पूरी तरह खिले हुए हैं जो अपनी रूहानियत की खुशबू सारे विश्व में फैला रहें हैं। कुछ अधखिले हैं जो अभी खिलने के लिए तैयार हो रहें हैं। और कुछ मुरझाए हुए भी हैं जो बार बार माया से हार खाते रहते हैं। लेकिन बाबा अपने हर बच्चे को नम्बर वन रूहे गुलाब के रूप में देखना चाहते हैं इसलिए हर बच्चे को सूक्ष्म में इमर्ज कर उन्हें बल देते रहते हैं।

 

_ ➳  अपने मन में चल रहे सभी सवालों के जवाब सुन कर अब मैं मन ही मन दृढ़ संकल्प करती हूं कि अब मुझे नम्बर वन रूहे गुलाब अवश्य बनना है। इसलिए *काँटे से फूल बन, सबको फूल बनाने का ही अब मुझे पुरुषार्थ करना है*। बाबा मेरे मन के हर संकल्प को पढ़ कर बड़ी गुह्य मुस्कराहट के साथ मुझे देखते हैं और अपना वरदानीमूर्त हाथ मेरे सिर पर रख देते है। मुझे माया जीत भव और सफलता मूर्त भव का वरदान देते हुए मेरे मस्तक पर विजय का तिलक लगाते हैं।

 

_ ➳  विजय का स्मृति तिलक लगाकर, काँटे से फूल बनने के पुरुषार्थ में आने वाले माया के हर विघ्न का डटकर सामना करने के लिए अब मैं *स्वयं को बलशाली बनाने के लिए निराकारी ज्योति बिंदु आत्मा बन चल पड़ती हूँ अपने निराकार काँटो को फूल बनाने वाले बबूलनाथ अपने प्यारे परमपिता परमात्मा शिव बाबा के पास परमधाम और जा कर उनके सानिध्य में बैठ स्वयं को उनकी सर्वशक्तियो से भरपूर करने लगती हूँ*। स्वयं में परमात्म बल भर कर अब मैं वापिस लौट रही हूँ।

 

_ ➳  साकारी दुनिया मे, अपने साकारी ब्राह्मण तन में प्रवेश कर, अब मैं अपने सम्बन्ध संपर्क में आने वाली हर आत्मा को सच्चा - सच्चा परमात्म ज्ञान सुना कर उन्हें शान्तिधाम, सुखधाम जाने का रास्ता बता रही हूँ। *रूहानियत की खुशबू चारों और फैलाते हुए अपनी पवित्रता की शक्ति से मैं विकारों रूपी काँटो की चुभन से पीड़ित आत्माओं को उस चुभन से निकाल उन्हें फूलो की मखमली शैया का सुखद अनुभव करवा कर उन्हें भी काँटे से फूल बनने का सत्य मार्ग दिखा रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं बेफिक्र बादशाह की स्थिति में रह वायुमण्डल पर अपना प्रभाव डालने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं मास्टर रचयिता आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सदैव प्रसन्नता की छाया द्वारा शीतलता का अनुभव करती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदैव निर्मल और निर्माण रहती हूँ  ।*

   *मैं प्रसन्नचित्त आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

✺ अव्यक्त बापदादा :-

➳ _ ➳   *सहन करने में घबराओ मत। क्यों घबराते हो?* क्योंकि समझते हो कि झूठी बात में हम सहन क्यों करेंलेकिन सहन करने की आज्ञा किसने दी हैझूठ बोलने वाले ने दी है?  *कई बच्चे सहन करते भी हैं लेकिन मजबूरी से सहन करना और मोहब्बत में सहन करना, इसमें अन्तर है।*

➳ _ ➳  *बात के कारण सहन नहीं करते हो लेकिन बाप की आज्ञा है सहनशील बनो।* तो बाप की आज्ञा मानते हो तो परमात्मा की आज्ञा मानना ये खुशी की बात है ना कि मजबूरी हैतो कई बार सहन करते भी हो लेकिन थोड़ा मिक्स होता हैमोहब्बत भी होती है, मजबूरी भी होती है। *सहन कर ही रहे हो तो क्यों नहीं खुशी से ही करो। मजबूरी से क्यों करो! वो व्यक्ति सामने आता है ना तो मजबूरी लगती है और बाप सामने आवेकि बाप की आज्ञा पालन कर रहे हैं तो मोहब्ब्त लगेगीमजबूरी नहीं।* तो ये शब्द नहीं सोचो।

➳ _ ➳  आजकल ये थोड़ा कामन हो गया है - मरना पड़ेगामरना पड़ेगाकब तक मरना पड़ेगाअन्त तक या दो साल, एक साल, ६ मासफिर तो अच्छा मर जायें... लेकिन कब तक मरना है।  *लेकिन यह मरना नहीं है अधिकार पाना है। तो क्या करेंगे? मरेंगेयह मरना शब्द खत्म कर दो।*

✺   *ड्रिल :-  "बाप की आज्ञा प्रमाण खुशी से सहन करना"*

➳ _ ➳  *बाबा और मैं एक बहुत सुंदर बगीचे में बैठे हुए हैं... चारों ओर हरियाली ही हरियाली है...* किस्म किस्म के रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियाँ लगी हुई हैं... जिनसे बहुत मनमोहक... भीनी-भीनी महक आ रही है... यह ताज़गी मेरे मन को मोह रही है...   

➳ _ ➳  इस खुशनुमा वातावरण को देखकर... मेरा मन खुशी से झूमने लगा... तभी मेरी नज़र एक फलों से लदे हुए वृक्ष पर पड़ती है... बाबा मुझे उस वृक्ष को दिखाते हुए कहते हैं... देखो *बच्ची... यह वृक्ष फलों से कितना भरा हुआ है... कितनी छाया दे रहा है... फिर भी इसे बहुत सहन करना पड़ता है... बाबा मुझे यह दिखा कर सहनशीलता का पाठ पक्का करा रहे थे...*

➳ _ ➳  *बाबा मुझसे कहते हैं... बच्ची... कभी कोई छोटी... बड़ी बात या झूठी बात भी सामने आ जाये तो सहन करो... सहन करने में घबराओ मत... खुशी से सहन करो... मजबूरी से नहीं... बाबा की याद में रहकर... आज्ञा समझ कर... कोई भी कर्म करोगे तो बोझ या... सहन करना नहीं लगेगा...* फिर बाबा कहने लगे... बच्ची... सृष्टि चक्र का नियम है... *जो हो गया वह फिर से रिपीट होगा... इसलिये नथिंग न्यू का पाठ भी पक्का करो...* सहनशील बनो...

➳ _ ➳  मैं बाबा से कहती हूँ... बाबा... *आपसे प्राप्त गुणों और शक्तियों को धारण कर अपने प्रैक्टिकल जीवन में... हर कर्म में... लाऊंगी... किसी भी परिस्थिति में मुझे सहन करना भी पड़े तो मैं खुशी खुशी सहन करुँगी...* उसका वर्णन फिर कभी नहीं करुँगी... मन-वाणी और कर्म में सहनशील बनूंगी... 

➳ _ ➳  *मुझे ही मरना पड़ता है... मुझे ही सहन करना पड़ता है... बाबा... इन शब्दों को मैं आत्मा अब कभी नहीं कहूँगी... इस बेहद की स्क्रीन पर हर सीन को मैं आत्मा साक्षी भाव से देखूँगी...* कोई भी परिस्थिति मुझे डगमग नहीं कर सकेगी... मैं आत्मा सर्व के प्रति शुभ भावना शुभ कामना रख अपना रोल प्ले करुँगी... *दिल व जान से आपकी बच्ची होने का सबूत हर आत्मा को कराऊँगी...*

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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