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 21 / 11 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *पुरानी दुनिया और पुराने शरीर का संन्यास किया ?*

 

➢➢ *भाग्यवान बनने की ख़ुशी में रहे ?*

 

➢➢ *ताज और तख़्त को सदा कायम रखा ?*

 

➢➢ *प्लेन बुधी से प्लान को प्रैक्टिकल में लाये ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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〰✧  *कोई भी कर्म करते सदैव यही स्मृति रहे कि हर कर्म में बापदादा मेरे साथ भी है और हमारे इस अलौकिक जीवन का हाथ उनके हाथ में है अर्थात् जीवन उनके हवाले है। फिर जिम्मेवारी उनकी हो जाती है।* सभी बोझ बाप के ऊपर रख अपने को हल्का कर दो तो कर्मयोगी फरिश्ता बन जायेंगे।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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✺   *"मैं कल्प पहले वाली भाग्यवान आत्मा हूँ"*

 

  *'बाप ने सारे विश्व में से हमें चुनकर अपना बना लिया' - यह खुशी रहती है ना।*

 

  *इतने अनेक आत्माओंमें से मुझ एक आत्मा को बाप ने चुना - यह स्मृति कितना खुशी दिलाती है! तो सदा इसी खुशी से आगे बढ़ते चलो।*

 

  *बाप ने मुझ अपना बनाया क्योंकि मैं ही कल्प पहले वाली भाग्यवान आत्मा थी, अब भी हूँ और फिर भी बनूँगी - ऐसी भाग्यवान आत्मा हूँ। इस स्मृति से सदा आगे बढ़ते चलो।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  (बापदादा ने ड्रिल कराई) *एवररेडी हो?* अभी-अभी बापदादा कहें *सब इकट्ठे चलो तो चल पडेगे?* कि सोचेंगे कि फोन करें, टेलीग्राम करें कि हम जा रहे हैं? टेलीफोन के ऊपर लाइन नहीं लगेगी? आपके घर वाले सोचेंगे कहाँ गये फिर?

 

✧  *सेकण्ड में आत्मा चल पडी* - है तो अच्छा ना कि याद आयेगा कि अभी तो एक सबजेक्ट में कमजोर हूँ? अच्छा, यह याद आयेगा कि चीजों को सिर्फ ठिकाने लगाकर आऊँ? सिर्फ इतल्ला करके आऊँ कि हम जा रहे हैं?

 

✧  यह सोच थोड-थोडा चलेगा? नहीं। सभी बंधन मुक्त बनेंगे। *अभी से चेक करो कि कोई सोन का, चांदी का धागा तो नहीं है?* लोहा मोटा होता है तो दिखाई देता है लेकिन ये सोना और चांदी आकर्षित कर लेता है।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *जो मनसा के महादानी होंगे उनके संकल्प में इतनी शक्ति होती है जो संकल्प किया उसकी सिद्धि मिली।* तो मनसा महादानी संकल्पों की सिद्धि को प्राप्त करने वाला बन जाता है। जहाँ चाहे वहाँ संकल्पों को टिका सकते हैं। *संकल्प के वश नहीं होंगे लेकिन संकल्प उनके वश होता है।* जो संकल्पों की रचना रचे, वह रच सकता है। जब संकल्प का विनाश करना चाहें तो विनाश कर सकते हैं। *तो ऐसे महादानी में संकल्पों के रचने, संकल्पों को विनाश करने और संकल्पों की पालना करने की तीनों ही शक्ति होती हैं। तो यह है मनसा का महादान। ऐसे ही समझो मास्टर सर्वशक्तिवान का प्रत्यक्ष स्वरूप दिखाई देता है।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- संगमयुग के शुभ समय में सर्वोत्तम बनना"*

 

_ ➳  *अपने भाग्य के गीत गाती दिल से मुस्कुराती चमचमाती खुशियों से भरपूर मैं आत्मा मधुबन घर के आंगन मे टहल रही हूँ... वाह कैसा अद्भुत अद्वितीय श्रेष्ठ शानदार भाग्य मैने पाया है... जो बाबा को मैंने पाया है... उसने मुझे अपना बनाया है... काटें से फूल बनाया है...* हर रंग से उसने मेरे बेरंग जीवन को सजाया हीरे तुल्य बनाया है... दिलाराम बाप ने मुझे अपने दिल में बिठाया है अपने नैनो का नूर बनाया है... कितना बाबा ने मुझ पर बेशुमार प्यार लुटाया है... ये मीठे दिल के जज्बात सुनाने मैं आत्मा फरिशता रूप धारण किए अपने प्यारे बाबा के पास वतन पहुंचती हूँ...

 

_ ➳  *मर्यादाओं की लकीर में मुझ आत्मा को बांधते हुए बाबा कहते है:-* "मीठे लाडले बच्चे मेरे... शिव पिता धरा पर है आया... बहिश्त की सौगात भी है साथ में लाया... *मर्यादा पुरूषोत्तम तुमको है बनाने आया... बांध कर अपने जीवन को तुम मर्यादाओ की लकीर से मर्यादा पुरूषोत्तम अब तुम बन जाओ... उस्ताद बाप की इस बात को मान अब तुम अपने जीवन को हीरे तुल्य बनाओ..."*

 

  *मर्यादाओं की लकीर के अंदर स्वयं को बांध मैं आत्मा कहती हूँ:-* "मीठे सलोने बाबा मेरे... बहिश्त की ये सौगात देख कितना ना मुझ आत्मा का मन हर्षायाँ... *उस्ताद बाप की हर बात को गहरे से समझ रही हूँ... बांध कर मर्यादाओं की लकीर से अपने जीवन को सुखमय बना रही हूँ... पुरूषोतम बनने के पुरूषार्थ में तेजी से आगे बढ़ती जा रही हूँ..."*

 

_ ➳  *मर्यादाओं का कवच मुझ आत्मा को पहनाते हुए बाबा कहतें है:-* "मीठे राजदुलारे बच्चे मेरे... कल्प की है यह अंतिम बेला... इस पर गहरे से गौर फरमाओं... पुरूषों में उत्तम बनने के इस समय में मर्यादाओं की सीढी पर अब चढ़ते जाओ... *एक-एक मर्यादा को सामने रख उसे जीवन मे लाओ... ऐसा उत्तम ते उत्तम, पुरूषोतम अपने जीवन को बनाओं..."*

 

  *मर्यादाओं का कवच पहन कर मैं आत्मा कहती हूँ:-* "मीठे प्यारे दिल के सच्चे सहारे बाबा मेरे... कल्प की अंतिम पुरूषोत्तम बेला में गहरे से आपकी हर समझानी को दिल में समा रही हूँ... और इसका स्वरूप बनती जा रही हूँ... चढ़ कर मर्यादाओं की सीढी सुरक्षित आगे ते आगे बढ़ती जा रही हूँ... *एक-एक मर्यादा को सामने रख उसे जीवन मे ला रही हूँ... मर्यादाओं के इस कवच से जीवन को निश्चिंत और सुरक्षित बना रही हूँ... इस प्रकार पुरूषोत्तम बनती जा रही हूँ..."*

 

_ ➳  *मर्यादाओं का कंगन मुझ आत्मा को बांधते हुए बाबा कहते है :-* "मीठे फूल बच्चे मेरे... बांध कर संगमयुगी मर्यादाओं का कंगन अब अपने जीवन को सुरक्षित बनाओ... *संगमयुगी मर्यादाओं के पथ पर चल अब पुरूषोत्तम तुम बन जाओ...* सजा कर अपने जीवन को मर्यादाओं से ऐसा श्रेष्ठ आदर्श बन दिखलाओं... अपनी मर्यादित जीवन से औरों को भी मर्यादा पुरूषोत्तम बनाओ..."

 

  *सर्व मर्यादाओं का स्वरूप बनकर मैं आत्मा कहती हूं:-* "मीठे मनमीत बाबा मेरे... मान कर आपकी ये बात... लिए है मर्यादाओं के कंगन बांध... *इस प्रकार संगमयुगी मर्यादाओं के पथ पर चल पुरूषों में उत्तम बनती जा रही हूँ... सजा कर अपने जीवन को मार्यादाओ से सबके सामने आदर्श बनती जा रही हूँ...* और अपनी मर्यादा पुरुषोत्तम जीवन से औरों को आप समान बना रही हूँ..."

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- पुरानी दुनिया और पुराने शरीर का सन्यास करना है*"

 

 _ ➳  अपने आश्रम के क्लास रूम में अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप में स्थित हो कर, अपने परम शिक्षक शिव बाबा के मधुर महावाक्य मैं सुन रही हूँ। *बाबा ने अपने सभी ब्राह्मण बच्चों को "तुम हो बेहद के सन्यासी" टाइटल देते हुए मुरली के माध्यम से अपने मधुर महावाक्य उच्चारण किये*। उन मधुर महावाक्यों की समाप्ति के बाद, अपने आश्रम के बाबा रूम मैं बैठ मैं बाबा के उन महावाक्यों को स्मृति में ला कर जैसे ही उन पर विचार सागर मंथन करने लगती हूँ *ऐसा अनुभव होता है जैसे मेरे सामने लगे ट्रांसलाइट के चित्र के स्थान पर साक्षात अव्यक्त बापदादा खड़े हैं और मुझे देख कर मन्द - मन्द मुस्करा रहें हैं*।

 

 _ ➳  ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे बाबा के होंठ धीरे धीरे खुल रहें हैं और बाबा मुझ से कुछ कह रहे हैं। मैं एकटक बाबा को निहार रही हूँ। *बाबा के नयनों से एक बहुत तेज लाइट की धार निकलती है और मेरी भृकुटि से होती हुई सीधे मुझ आत्मा को टच करती है*। देखते ही देखते बाबा की वो लाइट माइट पा कर मैं अपने अव्यक्त स्वरूप में स्थित होने लगती हूँ। स्वयं को अब मैं एकदम हल्का अनुभव कर रही हूँ। *मुझे ऐसा लग रहा हूं जैसे मेरे पाँव धरती को नही छू रहे बल्कि धीरे - धीरे धरती से ऊपर उठ रहे हैं*। एक बहुत ही निराला अनुभव मैं आत्मा इस समय कर रही हूँ। मेरा यह लाइट स्वरूप मुझे असीम आनन्द की अनुभूति करवा रहा है।

 

 _ ➳  इस अति सुंदर अव्यक्त स्थिति में स्थित, मेरी निगाहें जैसे ही दोबारा बाबा की ओर जाती है। बाबा के अधखुले होंठो से निकल रही अव्यक्त आवाज को अब मैं बिल्कुल स्पष्ट सुन रही हूँ। बाबा के हर संकल्प को अब मेरी बुद्धि बिल्कुल क्लीयर कैच कर रही है। *मैं स्पष्ट समझ रही हूँ कि बाबा मुझ से कह रहें हैं, मेरे बच्चे:- इस पुरानी दुनिया का तुम्हे कम्प्लीट सन्यास करना है"*। हद के सन्यासी तो घर - बार छोड़ जंगलो में चले जाते हैं। लेकिन तुम्हे बेहद का सन्यासी बन, घर - गृहस्थ में रहते मन बुद्धि से इस पुरानी दुनिया का कम्प्लीट सन्यास करना है। *तुम्हे प्रवृत्ति में रहते पर - वृति में रह अपना जीवन कमल पुष्प समान बना कर, सबको अपनी रूहानियत की खुशबू से महकाना है*।

 

 _ ➳  इस अव्यक्त मिलन का भरपूर आनन्द लेते - लेते मैं अनुभव करती हूँ जैसे अव्यक्त बापदादा अब अपने अव्यक्त वतन की ओर जा रहें हैं और मुझे भी अपने साथ चलने का ईशारा दे रहें हैं। बापदादा का हाथ थामे, मैं अव्यक्त फ़रिशता अब धीरे - धीरे ऊपर उड़ रहा हूँ। *छत को क्रॉस कर, ऊपर की और उड़ता हुआ, आकाश में विचरण करता हुआ, आकाश को भी पार कर अब मै फ़रिशता बापदादा के साथ पहुंच जाता हूँ सूक्ष्म वतन*। अपने पास बिठा कर, अपनी स्नेह भरी दृष्टि से बाबा मुझे निहार रहें हैं। बाबा की दृष्टि से बाबा के सभी गुण मुझ में समाते जा रहें हैं।

 

 _ ➳  बाबा की शक्तिशाली दृष्टि मुझमें एक अलौकिक रूहानी नशे का संचार कर रही हैं जिससे मैं फरिश्ता असीम रूहानी आनन्द का अनुभव कर रहा हूँ। बाबा के हाथों का मीठा - मीठा स्पर्श मुझे बाबा के अपने प्रति अगाध प्रेम का स्पष्ट अनुभव करवा रहा है । मैं बाबा के नयनो में अपने लिए असीम स्नेह देख कर गद - गद हो रहा हूँ। *बाबा की दृष्टि से आ रही सर्वशक्तियों की लाइट माइट मुझमे असीम बल का संचार कर रही है*। स्वयं को परमात्म बल से भरपूर करके अब मैं बापदादा को निहारते हुए "बेहद के सन्यासी" बनने के उनके फरमान का पालन करने की उनसे दृढ़ प्रतिज्ञा कर वापिस साकारी दुनिया की ओर प्रस्थान करता हूँ। *अपने लाइट के सूक्ष्म आकारी शरीर के साथ मैं फिर से अपने साकारी तन में प्रवेश कर जाता हूँ*। 

 

 _ ➳  अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो कर बाबा के फरमान को धारणा में लाने का अब मैं पूरा पुरुषार्थ कर रही हूँ। देह और देह की दुनिया में रहते हुए भी मन बुद्धि से इस दुनिया का कम्प्लीट सन्यास कर मैं स्वयं को इस नश्वर दुनिया से न्यारा अनुभव कर रही हूं। *सर्व सम्बन्धों का सुख बाबा से लेते हुए मैं देह और देह से जुड़े सम्बन्धों से सहज ही उपराम होती जा रही हूँ*। मन बुद्धि से पुरानी दुनिया का सन्यास, मुझे प्रवृति में रहते भी हर प्रकार के बोझ से मुक्त, लाइट स्थिति का अनुभव हर समय करवा रहा है

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं ताज और तख्त को सदा कायम रखने वाली आत्मा हूँ।*

✺   *मैं निरन्तर स्वतः योगी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं आत्मा प्लेन बुद्धि से प्लैन को सदा प्रैक्टिकल में लाती हूँ  ।*

✺   *मैं आत्मा सदा सफलता प्राप्त करती हूँ  ।*

✺   *मैं आत्मा सफलतामूर्त हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  बापदादा का *हर एक बच्चे से बहुत-बहुत-बहुत प्यार है।* ऐसे नहीं समझें कि हमारे से बापदादा का प्यार कम है। *आप चाहे भूल भी जाओ लेकिन बाप निरन्तर हर बच्चे की माला जपते रहते हैं।* क्योंकि बापदादा को हर बच्चे की विशेषता सदा सामने रहती है। कोई भी बच्चा विशेष न होयह नहीं है। *हर बच्चा विशेष है|* बाप कभी एक बच्चे को भी भूलता नहीं हैतो *सभी अपने को विशेष आत्मा हैं और विशेष कार्य के लिए निमित्त हैं,* ऐसे समझ के आगे बढ़ते चलो। 

 

✺   *ड्रिल :-  "विशेष आत्मा होने का अनुभव"*

 

 _ ➳  आज मैं आत्मा बाबा कि याद में खोई हुई हूँ... मुझ आत्मा को *परमात्म प्यार की सौगात मिली हैं...* वाह मेरा भाग्य कि परमात्मा भगवान को *मुझ आत्मा से बहुत बहुत प्यार हैं...* मैं कितनी भाग्यशाली आत्मा हूँ जिसको सारी दुनिया में सबसे विशेष भगवान का प्यार मिला हैं... वाह मेरा भाग्य वाह... ये प्यार कोटो में कोई और कोई में भी कोई को प्राप्त होता हैं... भगवान ने मुझ लकी आत्मा को *अपने प्यार के लिए चुना हैं* उसकी सर्वशक्तियां, सर्व ख़जाने मुझ आत्मा के पास हैं...

 

 _ ➳  परमात्मा ने मुझे अपना बना के *अपना सर्वस्व मुझे दिया हैं...* और उससे भी सबसे खास मुझ आत्मा को परमातम प्यार मिला हैं... सारी दुनिया तो विनाशी प्यार के पीछे दौड़ रही है पर मुझ *आत्मा को सच्चा सच्चा परमातम प्यार मिला हैं...* सारी दुनियाँ जिसे कण कण में ढूढ़ रही है वो स्वयं मुझे मिला हैं... मैं आत्मा अपने भाग्य के कितने ना गीत गाऊं... ये सच्चा सच्चा परमात्म प्यार सारे कल्प में एक ही बार मुझ आत्मा को मिला हैं... बाबा का *प्यार कभी भी कम नहीं होता* और भगवान का प्यार मुझ आत्मा के लिए बढता ही रहता हैं... बाबा हर समय मुझे याद करते रहते हैं कि *बच्चे देखो मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ...*

 

 _ ➳  बाबा मुझ आत्मा को निरंतर याद करते हैं और मैं आत्मा भी बाबा को निरंतर याद करती हूँ... वाह मुझ आत्मा का भाग्य जो *स्वयं भगवान मुझे याद करते हैं...* मैं आत्मा उनकी प्यार में पल रही हूँ... मैं आत्मा अपने परम पिता को भूल से भी नहीं भूल सकती हूँ... और उनकी *ममता और स्नेह में पल रही हूँ...* मैं आत्मा कितनी विशेष हूँ कि *परमात्मा मुझे याद करते हैं...* कोई ना कोई विशेषता परमात्मा ने मुझ आत्मा को दी हैं...

 

 _ ➳  तीनों लोको, *तीनों कालों का ज्ञान मुझ आत्मा में हैं... जो इस संगम पर मुझे मिला हैं... बाबा का हर बच्चा विशेष आत्मा हैं...* और बाबा ने अपने हर बच्चे कि विशेषताओ को अपने प्यार से और भी ज्यादा निखारा हैं... वाह बच्चे वाह जो परमात्मा भी उन्हें भूलता नहीं हैं... मैं आत्मा *परमात्म प्यार कि अधिकारी* बन गई हूँ... वाह मेरा भाग्य जो परमात्मा मेरे साथ हैं...

 

 _ ➳  मैं आत्मा मन में *परमातम प्यार का अनुभव कर* रही हूँ... भगवान ने मुझ आत्मा को अपना कहा है... माँ की ममता और *पिता का स्नेह मुझ आत्मा को परम-पिता से मिल रहा है...* भगवान ने अपने कार्य में मुझ आत्मा को सहयोगी बनाया हैं... और मैं *आत्मा फॉलो फादर* करते हुए आगे बढती जा रही हूँ... मुझ आत्मा की *जन्मों कि प्यास बुझ गई* जो *परमात्मा का प्यार मुझे मिल गया*... वाह बाबा वाह... वाह मेरा भाग्य वाह...

 

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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