━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

 23 / 11 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

 

∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *याद से स्वयं को पारसबुधी बनाया ?*

 

➢➢ *ज्ञान डांस किया ?*

 

➢➢ *त्रिकालदर्शी स्टेज द्वारा व्यर्थ का खाता समाप्त किया ?*

 

➢➢ *मान, शान और साधनों का त्याग किया ?*

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

〰✧  *आपके सामने कोई कितना भी व्यर्थ बोले लेकिन आप व्यर्थ को समर्थ में परिवर्तन कर दो। व्यर्थ को अपनी बुद्धि में स्वीकार नहीं करो। अगर एक भी व्यर्थ बोल स्वीकार कर लिया तो एक व्यर्थ अनेक व्यर्थ को जन्म देगा।* अपने बोल पर भी पूरा ध्यान दो, कम बोलो, धीरे बोलो और मीठा बोलो तो अव्यक्त स्थिति सहज बन जायेगी।

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

   *"मैं पुण्य का खाता जमा करने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ"*

 

  *'सदा पुण्य का खाता जमा करने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ' - ऐसे अनुभव होता हैं? यह सेवा - नाम सेवा का है, लेकिन पुण्य का खाता जमा करने का साधन है। तो पुण्य के खाते सदा भरपूर हैं और आगे भी भरपूर रहेंगे।*

 

  *जितनी सेवा करते हो, उतना पुण्य का खाता बढ़ता जाता है। तो पुण्य का खाता अविनाशी बन गया। यह पुण्य अनेक जन्म भरपूर करने वाला है।*

 

  *तो पुण्य आत्मा हो और सदा ही पुण्यात्मा बन औरों को भी पुण्य का रास्ता बताने वाले। यह पुण्य का खाता अनेक जन्म साथ रहेगा, अनेक जन्म मालामाल रहेंगे - इसी खुशी में सदा आगे बढ़ते चलो।*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

✧  (बापदादा ने ड़िल कराई) *एक सेकण्ड में डॉट लगा सकते हो?* अभी-अभी कर्म में और अभी-अभी कर्म से न्यारे, कर्म के सम्बन्ध से न्यारे हो सकते हो? यह एक्सरसाइज आती है?

 

✧  किसी भी कर्म में बहुत बिजी हो, मन-बुद्धि कर्म के सम्बन्ध में लगी हुई है, बन्धन में नहीं, सम्बन्ध में, लेकिन डायरेक्शन मिले - फुलस्टॉप। तो *फुलस्टॉप लगा सकते हो कि कर्म के संकल्प चलते रहेंगे?* यह करना है, यह नहीं करना है, यह ऐसे है, यह ऐसे है।

 

✧  तो यह प्रेक्टिस एक सेकण्ड के लिए भी करो लेकिन *अभ्यास करते जाओ, क्योंकि अंतिम सर्टीफिकेट एक सेकण्ड के फुलस्टॉप लगाने पर ही मिलना है।* सेकण्ड में विस्तार को समा ले, सार स्वरूप बन जाये। तो यह प्रैक्टिस जब भी चांस मिले, कर सकते हो तो करते रहो।

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

〰✧  *कर्मणा द्वारा गुणों का दान करने के कारण कौन-सी मूर्त बन जायेंगे? फ़रिश्ता। कर्म अर्थात् गुणों का दान करने से उनकी चलन और चेहरा दोनों ही फ़रिश्ते की तरह दिखाई देंगे। दोनों प्रकार की लाइट होंगी अर्थात् प्रकाशमय भी और हल्कापन भी। जो भी कदम उठेगा वह हल्का। बोझ महसूस नहीं करेंगे। जैसे कोई शक्ति चला रही है।* हर कर्म में मदद की महसूसता करेंगे। हर कर्म में सर्व द्वारा प्राप्त हुआ वरदान अनुभव करेंगे। दूसरे, हर कर्म द्वारा महादानी बनने वाला सर्व की आशीर्वाद के पात्र बनने के कारण सर्व वरदान की प्राप्ति अपने जीवन में अनुभव करेंगे। मेहनत से नहीं, लेकिन वरदान के रूप में। *तो कर्म में दान करने वाला एक तो फ़रिश्ता रूप नज़र आयेगा, दूसरा सर्व वरदानमूर्त अपने को अनुभव करेगा।*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

 

∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- देही-अभिमानी बनना"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा स्मृतिपटल पर व्यक्त हो रहे सभी विचारों को फुल स्टॉप लगाकर एकांतवासी होकर सेण्टर में बाबा के कमरे में बैठती हूँ... एक के अंत में मगन हो जाती हूँ...* धीरे-धीरे इस देह, देह की दुनिया से डिटैच होकर ऊपर उड़ते हुए, बादलों, पहाड़ों, चाँद, सितारों, आसमान से भी पार होती हुई पहुँच जाती हूँ... मेरे प्यारे बाबा के पास... और बाबा के सम्मुख बैठ बाबा की रूहानी बातों को प्यार से सुनती हूँ...

 

  *इस अंतिम जनम में देह अभिमान को छोड़कर देही अभिमानी बनने की शिक्षा देते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे फूल बच्चे... 21 जनमो के मीठे सुख आपकी दहलीज पर आने को बेकरार है... इन सुखो को जीने के लिये अपने सत्य स्वरूप के नशे से भर जाओ... *वरदानी संगम पर आत्मा अभिमानी के संस्कार को इस कदर पक्का करो कि अथाह सुख अथाह खुशियां दामन में सदा की सज जाएँ...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा अपने सत्य स्वरुप में चमकती हुई अपने स्वधर्म के गुण गाती हुई कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... मै आत्मा शरीर के भान से निकल कर आत्मा होने की सत्यता से परिपूर्ण होती जा रही हूँ... *सातो गुणो से सजधज कर तेजस्वी होती जा रही हूँ... और नई दुनिया में अनन्त सुखो की स्वामिन् होती जा रही हूँ...*

 

  *दिव्य गुणों की खुशबू से मेरे जीवन को दिव्य बनाकर मीठे बाबा कहते हैं:-* मीठे प्यारे लाडले बच्चे... देह के भान ने उजले प्रकाश को धुंधला कर दुखो के कंटीले तारो में लहुलहानं सा किया है... अब आत्मिक ओज से स्वयं को भर लो... *अपने चमकते स्वरूप और गुणो की उसी खूबसूरती से फिर से दमक उठो... तो सुखो के अम्बार कदमो में सदा के बिछ जायेंगे...*

 

_ ➳  *आत्मदर्शन कर सर्वगुणों से सुसज्जित हो दिव्यता से ओतप्रोत होकर मैं आत्मा कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा आपकी मीठी यादो में अपनी खोयी चमक वही खूबसूरत रंगत पुनः पाती जा रही हूँ... आत्मा अभिमानी होकर खुशियो में मुस्करा रही हूँ... *मीठे बाबा के प्यार में सतयुगी सुख अपने नाम करवा रही हूँ...*

 

  *संगम पर मेरे संग-संग चलते हुए मेरे क़दमों में फूल बिछाते हुए मेरे बाबा कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... *संगम के कीमती समय में सुखो की जागीर अपनी बाँहों में भरकर 21 जनमो तक अथाह खुशियों में मुस्कराओ...* ईश्वर पिता का सब कुछ अपने नाम कर लो... और खूबसूरत दुनिया के मालिक बन विश्व धरा पर इठलाओ...

 

_ ➳  *मैं आत्मा आत्मिक स्वरुप की झलक और फलक से संगम के अमूल्य समय, श्वांस, संकल्पों को सफल करते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा कभी यूँ ईश्वर पिता के दिल पर इतराउंगी ... सब कुछ मेरी मुट्ठी में होगा... *भाग्य इतना खूबसूरत और ईश्वरीय प्यार के जादू में खिलेगा ऐसा मैंने भला कब सोचा था... ये प्यारे से ईश्वरीय पल मुझे 21 जनमो का सुख दिलवा रहे है...*

────────────────────────

 

∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- अथाह खुशी में रहते हुए ज्ञान डांस करना है*"

 

_ ➳  अपने प्यारे मीठे बाबा की मीठी मधुर याद में बैठ मैं चात्रक बन उनके निराकारी अति सुखदायी स्वरूप को मन बुद्धि के दिव्य नेत्र से निहारती हुई अथाह सुख के सागर में गोते लगा रही हूँ। *उनसे निकलने वाली सर्व गुणों और सर्वशक्तियों की रंग बिरंगी किरणों से आ रहे सुख, शांति, प्रेम, आनन्द, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति के वायब्रेशन चारों ओर फैल कर मन को आनन्दित कर रहें हैं*। आनन्दमग्न हो कर मेरा मन मयूर ऐसे नाच रहा है जैसे वीणा के सात स्वरों की मधुर झनकार सुनकर  किसी के भी पैर स्वत: ही थिरकने लगते हैं। *ऐसे मैं आत्मा भी ज्ञान सागर अपने शिव पिता के ज्ञान की मीठी फुहारें अपने ऊपर महसूस कर, आनन्द से भरपूर होकर, ज्ञान डांस कर रही हूँ*। 

 

_ ➳  मन को सुकून देने वाली इस ज्ञान डांस को करते - करते मैं मन बुद्धि से की जाने वाली एक ऐसी खूबसूरत आंतरिक यात्रा पर चल पड़ती हूँ जो मुझे उस स्थान पर ले जा रही है *जहां ज्ञान सागर मेरे शिव पिता के अथाह ज्ञान की सतरँगी किरणो का झरना निरन्तर बहता रहता है और उस झरने के नीचे आकर आत्मायें आनन्द विभोर होकर स्वत: ही चात्रक बन ज्ञान डांस करते हुए अतीन्द्रीय सुख के झूले में झूलने लगती हैं*। ज्ञानसागर अपने शिव पिता के उस परमधाम घर और उनसे मिलने वाले उस अतीन्द्रीय सुख के मधुर अहसास में खोई मैं इस आतंरिक यात्रा पर निरन्तर आगे बढ़ते हुए साकार लोक को पार कर जाती हूँ और सूक्ष्म लोक में प्रवेश कर उसको भी पार कर अपने पिता के पास उनके धाम पहुँच जाती हूँ।

 

_ ➳  आत्माओं की उस निराकारी दुनिया, अपने स्वीट साइलेन्स होम में शांति की गहन अनुभूति करके मैं उस महाज्योति अपने ज्ञानसागर शिव पिता के पास जाकर बैठ जाती हूँ जिनसे निकल रही सर्वगुणों, सर्व शक्तियों की अनन्त किरणें एक पानी के झरने से आ रही रिमझिम करती शीतल फ़ुहारों के समान प्रतीत हो रही हैं। *ज्ञान के इस शीतल झरने के नीचे बैठ ज्ञान स्नान करके मैं बहुत ही आनन्दित हो रही हूँ। जैसे वर्षा की रिमझिम फुहारें प्रकृति में नवजीवन का संचार करती हैं ऐसे ज्ञान सागर मेरे शिव पिता के ज्ञान की बरसात मेरे अन्दर नई उमंग और ताजगी का संचार कर रही हैं*। ज्ञान की इन रिमझिम फ़ुहारों के मेरे ऊपर पड़ने से मेरी सोई हुई शक्तियां पुनः जागृत हो रही हैं।

स्वयं को मैं बहुत ही एनर्जेटिक अनुभव कर रही हूँ।

 

_ ➳  ज्ञान सागर अपने शिव पिता के ज्ञान चंदन से स्वयं को महका कर परमधाम से मैं नीचे आ जाती हूँ और अपने प्यारे बापदादा के अव्यक्त वतन में पहुँचती हूँ। *फरिश्तो की आकारी दुनिया इस सूक्ष्म वतन में जहाँ अव्यक्त ब्रह्मा बाबा के आकारी तन का आधार ले कर प्यारे शिव बाबा हम बच्चों से मिलन मनाते हैं, मीठी - मीठी रूहरिहान करते हैं*। इस सूक्ष्म वतन में आ कर मैं आत्मा भी अपना आकारी स्वरूप धारण कर लेती हूँ और सामने खड़े बापदादा के पास पहुँचती हूँ जो अपनी दोनों बाहों को फैलाये मेरा आह्वान कर रहें हैं। *उनकी बाहों में समाकर, उनसे असीम स्नेह पाकर, मैं उनके पास बैठ जाती हूँ*। 

 

_ ➳  अपने प्यारे बापदादा की समीपता के मधुर एहसास में खोई हुई एक बहुत ही खूबसूरत दृश्य देखने मे मैं मगन हो जाती हूँ। *मैं देख रही हूँ अपने सामने बाबा को नटखट कृष्ण कन्हिया के रूप में जो ज्ञान की मीठी बाँसुरी बजा रहें हैं और उस बाँसुरी की मीठी धुन कर बाबा के सभी ब्राह्मण बच्चे गोप गोपियाँ बन ज्ञान डाँस कर रहें हैं*। नटखट कान्हा के रूप में बाबा हर गोप गोपी के साथ डांस करते हुए दिखाई दे रहें हैं। इस बहुत ही खूबसूरत दृश्य को देखते - देखते अव्यक्त बापदादा की मीठी मधुर आवाज सुन मेरी चेतनता लौटती है। *मेरी दृष्टि बाबा की ओर जाते ही मैं देखती हूँ बाबा बड़े प्यार से मुस्कराते हुए मुझे निहार रहें हैं*। 

 

_ ➳  बाबा के नयनों की भाषा को मैं स्पष्ट पढ़ रही हूँ। ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे बाबा मुझ से पूछ रहे हैं कि यह ज्ञान डाँस करके कितना आनन्द आया! *मेरी आँखों मे समाये उस परमआनन्द को बाबा साफ देख रहें हैं इसलिए मुस्कराते हुए अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रख कर मुझे सदा इस अतीन्द्रीय सुख के झूले में झूलने का वरदान दे रहें हैं*। अपने प्यारे बापदादा के साथ ज्ञान डाँस करके, और वरदान लेकर मैं अपने निराकार स्वरूप में वापिस साकारी दुनिया में लौट आती हूँ और फिर से अपने साकार शरीर रूपी रथ पर आ कर विराजमान हो जाती हूँ।

 

_ ➳  *अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर, इस सृष्टि रूपी कर्मभूमि पर कर्म करते बीच - बीच में इसी रूहानी ड्रिल द्वारा ज्ञान डाँस का आनन्द अब मैं स्वयं भी लेती रहती हूँ तथा औरों को भी यह ड्रिल करवाकर उन्हें भी यह ज्ञान डाँस करवाती रहती हूँ

────────────────────────

 

∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं त्रिकालदर्शी स्टेज द्वारा व्यर्थ का खाता समाप्त करने वाली आत्मा हूँ।*

✺   *मैं सदा सफलता मूर्त आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

────────────────────────

 

∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं आत्मा मान, शान और साधनों का त्याग करती हूँ  ।*

✺   *मैं आत्मा महान त्याग करती हूँ  ।*

✺   *मैं महात्यागी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

────────────────────────

 

∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  ब्राह्मण अर्थात् अलौकिक। *ब्राह्मण जीवन का महत्व बहुत बड़ा है। प्राप्तियां बहुत बड़ी हैं। स्वमान बहुत बड़ा है और संगम के समय पर बाप का बननायह बड़े-से-बड़ा पदमगुणा भाग्य है*। इसलिए बापदादा कहते हैं कि हर खजाने का महत्व रखो। जैसे दूसरों को भाषण में संगमयुग की कितनी महिमा सुनाते हो। *अगर आपको कोई टापिक देवें कि संगमयुग की महिमा करो तो कितना समय कर सकते होएक घण्टा कर सकते हो*टीचर्स बोलो। *जो कर सकता है वह हाथ उठाओ। तो जैसे दूसरों को महत्व सुनाते हो,* महत्व जानते बहुत अच्छा हो । बापदादा ऐसे नहीं कहेगा कि जानते नहीं हैं। *जब सुना सकते हैं तो जानते हैं तब तो सुनाते हैं। सिर्फ है क्या कि मर्ज हो जाता है। इमर्ज रूप में स्मृति रहे* - वह कभी कम हो जाता हैकभी ज्यादा। तो *अपना ईश्वरीय नशा इमर्ज रखो*। हाँ मैं तो हो गईहो गया... नहीं। *प्रैक्टिकल में हूँ... यह इमर्ज रूप में हो*। *निश्चय है लेकिन निश्चय की निशानी है - 'रूहानी नशा'। तो सारा समय नशा रहे। रूहानी नशा - मैं कौन! यह नशा इमर्ज रूप में होगा तो हर सेकण्ड जमा होता जायेगा*। 

 

✺   *ड्रिल :-  "संगमयुग की महिमा इमर्ज रूप में स्मृति में रखना"*

 

 _ ➳  संसार रूपी भवसागर में हिचकोलें खाती मेरी जर्जर सी वो कश्ती... डूबने के भय से सँवरने के लिए भक्ति के खडताल बजाती हुई मैं भक्त आत्मा... *और तभी अचानक किसी ने हाथ पकड कर बिठा लिया संगम रूपी जल पोत पर*... और भक्त आत्मा से ज्ञानी तू आत्मा का परिचय भी दे दिया... भवसागर की हर लहर को तैरने के अनुकूल बनाते हुए मेरे शिव पिता खुद नाविक बन मेरी कश्ती को पार लगा रहे है... *मैं कौन की पहेली की गहराई में जाकर मैं जितना खुद को जानने की कोशिश कर रही हूँ... उतना उतना रूहानी नशा चढता जा रहा है... मैं आत्मा स्वमानों की माला पहने अपने गुण और शक्तियों को इमर्ज करते हुए... एक एक गुण की गहराई से अनुभूति कर रही हूँ... संगम के ये खजाने... समय का खजाना... एक एक पल दूसरे युगों के सालों के बराबर, संकल्प का खजाना... बंध गया है मेरे संकल्पों की डोर से परमधाम में रहने वाला... गुणों और शक्तियों का  खजाना... मास्टर सर्वशक्तिमान बनाकर बाप समान बनने का लक्ष्य दे डाला है उसने मुझे*...

 

 _ ➳  *हर पल किनारों की ओर ले जाता मुझे ये संगम रूपी जहाजी बेडा*... पल पल बाप से सर्वसम्बन्धों का सुख देता हुआ... विभिन्न प्रकार की ड्रैसेस से सजा मेरा सुन्दर सा केबिन... देवताई ड्रैस फरिश्ता ड्रैस... *फरिश्ता स्वरूप की ड्रैस पहन मैं आत्मा उड चली सूक्ष्म वतन की ओर*... सूक्ष्म वतन में बापदादा के साथ कुछ पल के लिए साक्षी होकर देख रही हूँ मैं... संगम के बेडे पर सवार सभी देव कुल की आत्माओं को... *पल पल सतयुगी सृष्टि के सृजन में लगी हुई*... हर संकल्प से उसे और करीब लाती हुई बापदादा निरन्तर खुशियों से सम्पन्न कर रहे है इस पोत को... हर पल स्नेह की मीठी सी बारिश... शीतल फुहारें...

 

 _ ➳  *खुशियों का अखूट खजाना भर के चला है ये संगम रूपी जलयान*... और हर क्षण हर पल खुशियों की खुराक से भरपूर होती मैं आत्मा... *अमृत वेले का वो रूहानी मिलन और मुरली... खुशियों के खजाने की चाबी मिली है मुझ आत्मा को... जितना घुमाती हूँ उतने खजाने खुलते जा रहे है मेरे सामने... खुशियों के झर झर बहते झरने... हर पल अनुभवों का पल*... मेरे संकल्प की डोर से बंधकर आते शिव सूर्य ठीक मेरे मस्तिक के ऊपर स्थित हो गये है... *मैं बिन्दु रूप धारण कर स्वयं को समाँ रहा हूँ शिव सूर्य की सुनहरी किरणों में*... और आहिस्ता आहिस्ता एकाकार होता मैं शिव बिन्दु के साथ... मानों आभार व्यक्त करने के लिए ही मैं विनम्र होता हुआ मिटा देना चाहता हूँ अपने वजूद को उस परम बिन्दु में... *संगम के इस महा मिलन की स्मृति को गहराई से अपनी स्मृति में संजोये मैं आत्मा लौट आई हूँ अपनी देह मैं... अखूट खजानों की चाबी को हाथ में लिए*...

 

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

 

_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━