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 24 / 11 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ सत्यता की शक्ति का अनुभव किया ?

 

➢➢ सत्य ज्ञान को प्रतक्ष्य किया ?

 

➢➢ आत्माओं को सत्यता के साथ साथ नवीनता का अनुभव करवाया ?

 

➢➢ जितनी अथॉरिटी उतनी ही नम्रता और रहमभाव रहा ?

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  ✰ अव्यक्त पालना का रिटर्न

         ❂ तपस्वी जीवन

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〰✧  चलते - फिरते अपने को निराकारी आत्मा और कर्म करते अव्यक्त फरिश्ता समझो तो साक्षी दृष्टा बन जायेंगे। इस देह की दुनिया में कुछ भी होता रहे, लेकिन फरिश्ता ऊपर से साक्षी हो सब पार्ट देखते, सकाश अर्थात् सहयोग देता है। सकाश देना ही निभाना है।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?

 

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अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए

             ❂ श्रेष्ठ स्वमान

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   "मैं एकरस स्थिति का अनुभव करने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ"

 

  'सदा एक बाप की याद में रहने वाली, एकरस स्थिति का अनुभव करने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ' - ऐसे अनुभव करते हो?

 

  जहाँ एक बाप याद है, वहाँ एकरस स्थिति स्वत: सहज अनुभव होगी। तो एकरस स्थिति श्रेष्ठ स्थिति है।

 

  एकरस स्थिति का अनुभव करने वाली श्रेष्ठ आत्मा हूँ - यह स्मृति सदा ही आगे बढ़ाती रहेगी। इसी स्थिति द्वारा अनेक शक्तियों की अनुभूति होती रहेगी।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?

 

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         रूहानी ड्रिल प्रति

अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं

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✧  ऐसे नहीं, योग में बैटेंगे तो फुलस्टॉप लगेगा। हलचल में फुलस्टॉप। इतनी पॉवरफुल ब्रेक है? कि ब्रेक लगायेंगे यहाँ और ठहरेगी वहाँ। और समय पर फुलस्टॉप लगे, समय बीत जाने के बाद फुलस्टॉप लगाया तो उससे फायदा नहीं है। सोचा और हुआ।

 

✧  सोचते ही नहीं रहो कि मैं शरीर नहीं आत्मा हूँ, आत्मा हूँ, मेरे को फुलस्टॉप लगाना है और कुछ नहीं सोचना है, यह सोचते भी टाइम लग जायेगा। ये सेकण्ड का फुलस्टॉप नहीं हुआ। ये अभ्यास स्वयं ही करो। कोई को कराने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि नये चाहे पुराने, सभी यह विधि तो जानते हो ना!

 

✧  तो अभ्यास बहुतकाल का चाहिए। उस समय समझो - नहीं, मैं फुल स्टॉप लगा दूँगी! नहीं लगेगा, यह पहले से ही समझना उस समय, समय अनुसार कर लेंगे! नहीं, होगा ही नहीं। बहुत काल का अभ्यास काम में आयेगा। क्योंकि कनेक्शन है।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?

 

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         ❂ अशरीरी स्थिति प्रति

अव्यक्त बापदादा के इशारे

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〰✧  कोई भी कार्य करते सिर्फ यह सोचो- मैं निमित हूँ कराने वाला कौन है? जैसे भक्तिमार्ग में शब्द उच्चारण करते थे 'करन-करावनहार'। लेकिन वह दूसरे अर्थ से कहते थे। लेकिन इस समय जो भी कर्म करते हो उसमें करनकरावनहार तो है ना? कराने वाला बाप है, करने वाला निमित्त है। अगर यह स्मृति में रख कर्म करते हैं तो सहज स्मृति नहीं हुई? निरन्तर योगी नहीं हुए? फिर कभी हंसी में नीचे आयेंगे भी तो ऐसे अनुभव करेंगे जैसे हूबहू स्टेज पर कोई ऐक्टर होते हैं तो समझते हैं कि लोक-कल्याण अर्थ हंसी का पार्ट बजाया। फिर अपनी स्टेज पर तो बिल्कुल ऐसे अनुभव होगा जैसे अभी-अभी यह पार्ट बजाया, अब दूसरा पार्ट बजाता हूँ। खेल महसूस होगा। साक्षी हो जैसे पार्ट बजा रहे हैं। तो सहज योगी हुए ना?

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺ "ड्रिल :- सत्यता की शक्ति"

➳ _ ➳ मै आत्मा कभी अनुभवी थी, सिर्फ झूठ की ठोकरों की... मीठे बाबा ने जीवन में आकर सत्य का खुबसूरत सवेरा दिखाकर...मेरे जनमो के अंधकार को एक सेकण्ड में दूर कर दिया...और आज सच की खनक से जीवन गुंजायमान हो उठा है... अज्ञान के अंधेरो की आदी मै आत्मा... इसी को जीवन की नियति मानकर जीती जा रही थी... कि सहसा भगवान ने जीवन में प्रवेश कर... मेरे जीवन से हर झूठ का सफाया कर दिया... मुझे तीसरा नेत्र देकर मुझे त्रिनेत्री सजा दिया... इस नेत्र की बदौलत मै आत्मा अपने खुबसूरत सतयुग को निहार कर... आनन्द की चरमसीमा पर हूँ... और आनन्द की यही लहरे... हर दिल पर उछालने वाली, ज्ञान गंगा बन मुस्करा रही हूँ... दिल की यह बात मीठे बाबा को सुनाने मै आत्मा... मीठे बाबा के कमरे में प्रवेश करती हूँ...

❉ मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अथाह ज्ञान रत्नों की जागीर सौंपते हुए कहा :- "मीठे प्यारे फूल बच्चे...ईश्वर पिता ने मा नॉलेजफुल बनाकर ज्ञान के तीसरे नेत्र से रौशन किया है... तो सत्यता की इस रौशनी मे सच और झूठ का फर्क सिद्धकर दिखाओ... विश्व को ज्ञान की सत्य राहों का मुरीद बनाओ... अज्ञान के अंधेरो से हर दिल को निकाल कर... सत्य की चमकती मुस्कराती राहों पर चलाओ..."

➳ _ ➳ मै आत्मा मीठे बाबा के प्यार में असीम ख़ुशी को पाकर कहती हूँ :- "मीठे प्यारे बाबा मेरे...मै आत्मा अज्ञान की फिसलती राहो पर चलती हुई गर्त में जा रही थी... आपने मेरा हाथ पकड़कर, मुझे इस दलदल से निकाल, अपने दिल में बसा लिया है... मै आत्मा इस सत्य का शंखनाद कर, हर दिल को जगा रही हूँ...और सच की चमक से भरे... जीवन की सौगात हर दिल को दिला रही हूँ..."

❉ प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी सारी सम्पत्ति का मालिक बनाते हुए कहा:- "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... सत्य पिता की सत्य भरी बाँहों में जो महके हो... उस ज्ञान की खशबू से हर मन को सुवासित करो... ईश्वर पिता द्वारा सुनी हुई सत्य की लहर को पूरे विश्व में बहाकर, अज्ञान का सूखापन मिटाओ... दुरांदेशी विशाल बुद्धि बनकर,सच और झूठ का भेद सिद्ध कर, अज्ञान का पर्दा उठाओ...

➳ _ ➳ मै आत्मा मीठे बाबा से ज्ञान धन का अखूट खजाना अपनी बाँहों में भरते हुए कहती हूँ :- "मीठे दुलारे बाबा मेरे... मै आत्मा देह के भान में पतित हो चली बुद्धि संग यहाँ वहाँ कितना भटक रही थी... आपने प्यारे बाबा अपनी फूलो सी गोद में बिठाकर... मुझे पावनता से सजाया है... बेहद का ज्ञान देकर मुझे दुरांदेशी बना दिया है... अब यह ख़ुशी मै आत्मा.... हर मन को बाँट रही हूँ... भक्ति और ज्ञान का सच्चा फर्क समझा कर... आप समान बेहद का समझदार बना रही हूँ..."

❉ मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को ज्ञान की कूक सुनाने वाली ज्ञान बुलबुल बनाते हुए कहा :- "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे... ईश्वर पिता से जिन सच्ची खुशियो को बाँहों में समाकर... इस कदर खुशनुमा बने हो,.. यह सच्ची खुशियां सबके दामन में भी सजा आओ... झूठ के दायरे से बाहर निकाल सच के सूर्य का अहसास कराओ... हर दिल सच्चाई को ही तो ढूंढ रहा है... उनकी मदद करने वाले सच्चे रहनुमा बनकर... उन्हें भी आप समान ज्ञान का धनी बनाओ..."

➳ _ ➳ मै आत्मा मीठे बाबा से सारी शक्तियो को लेकर, शक्तिशाली बनकर कहती हूँ :- "मीठे प्यारे बाबा मेरे... मै आत्मा सच की झनकार को पूरे विश्व में गूंजा रही हूँ... सबके मनो की उलझन को सुलझाकर, सच का सुनहरा सवेरा दिखा रही हूँ... मीठे बाबा आपने जो सत्य मुझ आत्मा को दिखाकर देह के जंजालों से छुड़ाया है... मै आत्मा सबके दामन में यह प्रकाश खिला रही हूँ... प्यारे बाबा से वरदानों की सौगात लेकर मै आत्मा कर्मक्षेत्र पर लौट आयी...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺ "ड्रिल :- सत्य ज्ञान को प्रतक्ष्य करना"

➳ _ ➳ ज्ञान दाता परम पिता परमात्मा ने आकर जो सत्य ज्ञान हम ब्राह्मणों को देकर अज्ञान अंधकार में भटकने से जैसे हमे छुड़ाया है ऐसे ही अज्ञान अंधकार में भटक रहे अपने सभी आत्मा भाइयों को यह ज्ञान देना और ज्ञानदाता बाप को प्रत्यक्ष करना ना केवल हर ब्राह्मण आत्मा का कर्तव्य ही है बल्कि ज्ञानदाता अपने प्यारे पिता परमात्मा के प्रति उनके स्नेह का रिटर्न भी है। यही कर्तव्य अब मुझे करना है। परम पिता परमात्मा द्वारा रचे इस रुद्र ज्ञान यज्ञ में दधीचि ऋषि मिसल हड्डी - हड्डी स्वाहा कर, तन - मन - धन से इस ईश्वरीय सेवा में लग जाना है।

➳ _ ➳ स्वयं से यह दॄढ प्रतिज्ञा कर, मन ही मन विचार सागर मन्थन कर, मैं सेवा की नई - नई युक्तियाँ सोचते - सोचते मन बुद्धि से पहुँच जाती हूँ उस वरदान भूमि पर जहाँ बाबा के निमित बने हुए, श्रेष्ठ, सिकीलधे बच्चे अपने भगवान बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए सेवा के नए - नए प्लैन्स बनाने के लिए मीटिंग करते रहते हैं। मधुबन की उस पावन धरनी पर बैठी, मन में ज्ञानदाता अपने प्यारे बाबा को प्रत्क्षय करने का संकल्प लिए, अपने प्यारे बाबा की याद में बैठे - बैठे मैं अनुभव करती हूँ जैसे बाबा वतन में बैठ मुझे याद कर रहें हैं। अपने लाइट के सूक्ष्म आकारी शरीर को धारण कर मैं चल पड़ती हूँ अपने प्यारे बापदादा के पास उनके अव्यक्त वतन की ओर।

➳ _ ➳ आबू की खूबसूरत पहाड़ियों को क्रॉस कर, आकाश से होता हुआ मैं फरिश्ता, अव्यक्त वतन में प्रवेश करता हूँ। सफेद प्रकाश से प्रकाशित फरिश्तो की इस खूबसूरत दुनिया में पहुँच कर मैं देखता हूँ बापदादा के सामने उनके सभी निमित बने हुए सिकीलधे यज्ञ रक्षक ब्राह्मण बच्चे उपस्तिथ है। फरिश्तो की जैसे एक बहुत सुन्दर सभा लगी हुई है। सभी को बापदादा सेवा के प्लैन्स की बधाई दे रहें हैं और साथ ही साथ आने वाले समय प्रमाण सेवा में कौन सी एडिशन करनी है, यह भी समझा रहें हैं। बापदादा अपने सभी विश्व कल्याणकारी ब्राह्मण सो फ़रिश्ता बच्चों को इस नयें ज्ञान को जल्दी से जल्दी सारे विश्व के आगे प्रत्यक्ष करने का फरमान दे रहें हैं। क्योंकि जब तक यह प्रत्यक्ष नही होता कि " यह ज्ञान नयां है " तब तक ज्ञानदाता बाप की प्रत्यक्षता कैसे हो सकती है!

➳ _ ➳ बापदादा के फरमान अनुसार सभी ब्राह्मण बच्चे अब इसी एक संकल्प में स्थित हैं कि इस नयें ज्ञान को और ज्ञान दाता बाप को अब जल्दी से जल्दी प्रत्यक्ष करना है। इस संकल्प को सिद्ध करने के लिए बापदादा अपनी हजारों भुजाओं को फैला कर सभी फरिश्तो को "सफलतामूर्त भव" का वरदान दे रहें हैं। बापदादा के हस्तों से वरदानी पुष्पों की वर्षा हो रही है। सभी बच्चे उमंग उत्साह में झूम रहें हैं। अपनी लाइट माइट से बापदादा सभी बच्चों में बल भर रहें हैं। विजय का तिलक मस्तक पर लगाये, शक्तियों के अवतार बन कर अब सभी फ़रिश्ते इस ईश्वरीय कार्य को सम्पन्न करने के लिए विश्व ग्लोब पर बैठ, संकल्प शक्ति से मनसा सकाश द्वारा विश्व की सर्व आत्माओं को यह नयां ज्ञान और परमात्म अवतरण का सन्देश दे रहें हैं।

➳ _ ➳ इस बेहद की विहंग मार्ग की सेवा को करके अब सभी फ़रिश्ते साकार सृष्टि पर लौट रहे हैं। अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो कर सभी ब्राह्मण संगठित रूप में अब इस नये ज्ञान और ज्ञानदाता को प्रत्यक्ष करने का दृढ़ संकल्प लेकर इस ईश्वरीय सेवा में एकजुट होकर लग गए हैं। सभी घर - घर जाकर ज्ञान की ऑथॉरिटी से इस बात को सिद्ध कर रहें हैं कि यह कोई साधारण ज्ञान नही है बल्कि स्वयं भगवान इस ज्ञान के ज्ञानदाता हैं और वे स्वयं सारी दुनिया को अज्ञान अंधकार से निकाल ज्ञान के सोझरे में ले जाने के लिए आये हैं। अखबारों द्वारा, टेलीविजन द्वारा, मीडिया द्वारा घर - घर में इस नए ज्ञान का प्रचार हो रहा है। परमात्म मदद से सभी एक दो सहयोग देते, उमंग उत्साह से इस नये ज्ञान को और ज्ञानदाता भगवान को प्रत्यक्ष करने के महान कार्य को सम्पन्न कर रहें हैं।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   मैं स्व के चक्र को जानने वाली आत्मा हूँ।
✺   मैं ज्ञानी तू आत्मा हूँ।
✺   मैं प्रभू प्रिय आत्मा हूँ।

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺ मैं आत्मा बाप समान प्रत्यक्ष प्रमाण हूँ ।
✺ मैं आत्मा प्रजा जल्दी तैयार करती हूँ ।

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  आज बापदादा ने जमा का खाता देखा इसलिए आज विशेष अटेन्शन दिला रहे हैं कि समय की समाप्ति अचानक होनी है। यह नहीं सोचो कि मालूम तो पड़ता रहेगा, समय पर ठीक हो जायेंगे। जो समय का आधार लेता हैसमय ठीक कर देगाया समय पर हो जायेगा.... उनका टीचर कौन? समय या स्वयं परम-आत्मापरम-आत्मा से सम्पन्न नहीं बन सके और समय सम्पन्न बनायेगातो इसको क्या कहेंगेसमय आपका मास्टर है या परमात्मा आपका शिक्षक है? तो ड्रामा अनुसार अगर समय आपको सिखायेगा या समय के आधार पर परिवर्तन होगा तो बापदादा जानते हैं कि प्रालब्ध भी समय पर मिलेगी क्योंकि समय टीचर है। समय आपका इन्तजार कर रहा है, आप समय का इन्तजार नहीं करो। वह रचना हैआप मास्टर रचता हो। तो रचता का इन्तजार रचना करेआप मास्टर रचता समय का इन्तजार नहीं करो। 

 

✺   ड्रिल :-  "समय का इन्तजार न कर सम्पन्न बनने का अनुभव"

 

 _ ➳  मैं मास्टर रचयिता आत्मा हूँ... मैं सर्व शक्तियों से सम्पन्न आत्मा हूँ... मेरे परम पिता परमात्मा ने मुझ आत्मा को ज्ञान दिया है कि... समय आपकी रचना है... घड़ी के काँटे आप हो... आप ही रचयिता हो... मैं आत्मा इस ज्ञान को धारण कर... पवित्र बन... कलयुगी समय को... सतयुगी समय में परिवर्तित कर रही हूँ... मुझ आत्मा के पावन बनने से... पवित्र बनने से... सारा वायुमंडल... और सारी प्रकृति... पवित्र बन रही है... और सारा समय परिवर्तित हो रहा है...

 

 _ ➳  बाबा ने बताया है... समय से पहले सम्पूर्ण बनो... समय के बाद में सम्पूर्ण बने तो वह समय की महिमा होगी... आपकी नहीं... मैं आत्मा बाबा के इन महावाक्यों को धारण कर... श्रेष्ठ और तीव्र पुरुषार्थ कर रही हूँ... मैं आत्मा समय से पहले सम्पूर्ण बन गयी हूँ... जिससे सारे कल्प में मुझ आत्मा का महत्व रहता है... मुझ आत्मा की महिमा होती है... क्यूँकि मैं आत्मा समय को परिवर्तित करने में... बापदादा की मददगार बनी हूँ... जैसे बाप की महिमा वैसे ही बच्चे की महिमा...

 

 _ ➳  मुझ आत्मा का बाबा ने जमा का खाता देखा... और बाबा ने मुझ आत्मा को विशेष अटेन्शन दिलाया... कि समय की समाप्ति अचानक होनी है... मुझ आत्मा को समझ आ गया है कि... अभी कमी रखने का समय बीत चुका है... मैं आत्मा तीव्र पुरुषार्थ कर... समय से फास्ट निकल रही हूँ... और समय को नजदीक ला रही हूँ... मैं आत्मा समय को अपने अनुसार परिवर्तित कर रही हूँ... समय के परिवर्तित होने का इंतजार नहीं करती हूँ... जो आत्मा समय का आधार लेती है... या सोचते हैं कि समय ठीक कर देगा... या समय पर हो जायेगा... उनका टीचर समय होता है... वो आत्मा फिर रचना बन जाती है... समय उनका रचयिता बन जाता है... मैं आत्मा जानती हूँ कि... महिमा रचयिता की होती है... रचना की नहीं... इसलिए मैं आत्मा स्वयं परमात्मा से सम्पन्न बनती हूँ... समय मुझ आत्मा का मास्टर नहीं है... समय मुझ आत्मा का शिक्षक नहीं है... स्वयं परमात्मा मुझ आत्मा का शिक्षक है...

 

 _ ➳  अगर ड्रामा अनुसार समय मुझ आत्मा को सिखाता है... या समय के आधार पर मुझ आत्मा का परिवर्तन होता है... तो प्रालब्ध भी समय पर मिलेगी... क्योंकि समय टीचर है... बाबा ने मुझ आत्मा को बताया है कि... आप समय के रचयिता हो... समय आप विश्व परिवर्तक आत्माओं का इन्तजार कर रहा है... आप समय का इन्तजार नहीं करो... समय रचना है... आप आत्मा मास्टर रचता हो... तो रचता का इन्तजार रचना करती है... आप मास्टर रचता समय का इन्तजार नहीं करो... मैं आत्मा बाबा के दिए... इस ज्ञान को हमेशा बुद्धि में रखती हूँ... और समय और प्रकृति को अपने अनुसार... परिवर्तित करती हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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