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 26 / 11 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ ऐसा कोई धंधा तो नही किया जिससे विकारों की उत्पत्ति हो ?

 

➢➢ एक सतगुरु बाप की श्रीमत पर चल आप समान बनाने की सेवा की ?

 

➢➢ शुभ भावना, शुभ कामना के सहयोग से आत्माओं को परिवर्तित किया ?

 

➢➢ कदम कदम में पद्मों की कमाई जमा की ?

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  ✰ अव्यक्त पालना का रिटर्न

         ❂ तपस्वी जीवन

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〰✧  बाप को अव्यक्त रूप में सदा साथी अनुभव करना और सदा उमंग-उत्साह और खुशी में झूमते रहना। कोई बात नीचे ऊपर भी हो तो भी ड्रामा का खेल समझकर बहुत अच्छा, बहुत अच्छा करते अच्छा बनना और अच्छे बनने के वायब्रेशन से नगेटिव को पॉजिटिव में बदल देना।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?

 

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अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए

             ❂ श्रेष्ठ स्वमान

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✺   "मैं डबल लाइट आत्मा हूँ"

 

  अपने को सदा डबल लाइट अनुभव करते हो? जो डबल लाइट है उस आत्मा में माइट अर्थात् बाप की शक्तियाँ साथ हैं। तो डबल लाइट भी हो और माइट भी है। समय पर शक्तियों को यूज कर सकते हो या समय निकल जाता है, पीछे याद आता है? क्योंकि अपने पास कितनी भी चीज है, अगर समय पर यूज नहीं किया तो क्या कहेंगे? जिस समय जिस शक्ति की आवश्यकता हो उस शक्ति को उस समय यूज कर सकेंगे - इसी बात का अभ्यास आवश्यक है।

 

  कई बच्चे कहते हैं कि माया आ गई। क्यों आई? परखने की शक्ति यूज नहीं की तब तो आ गई ना! अगर दूर से ही परख लो कि माया आ रही है, तो दूर से ही भगा देंगे ना! माया आ गई - आने का चांस दे दिया तब तो आई। दूर से भगा देते तो आती नहीं। बार-बार अगर माया आती है और फिर युद्ध करके उसको भगाते हो तो युद्ध के संस्कार आ जायेंगे। अगर बहुतकाल का युद्ध का संस्कार होगा तो चन्द्रवंशी बनना पड़ेगा। सूर्यवंशी बहुतकाल के विजयी और चन्द्रवंशी माना युद्ध करते-करते कभी विजयी, कभी युद्ध में मेहनत करने वाले। तो सभी सूर्यवंशी हो ना! चन्द्रमा को भी रोशनी देने वाला सूर्य है। तो नम्बरवन सूर्य कहेंगे ना! चन्द्रवंशी दो कला कम हैं। 16 कला अर्थात् फुल पास।

 

  कभी भी मन्सा में, वाणी में या सम्बन्ध-सम्पर्क में, संस्कारों में फेल होने वाले नहीं, इसको कहते हैं - 'सूर्यवंशी'। ऐसे सूर्यवंशी हो? अच्छा। सभी अपने पुरुषार्थ से सन्तुष्ट हो? सभी सब्जेक्ट में फुल पास होना - इसको कहते हैं अपने पुरुषार्थ से सन्तुष्ट। इस विधि से अपने को चेक करो। यही याद रखना कि मैं उड़ती कला में जाने वाला उड़ता पंछी हूँ। नीचे फँसने वाला नहीं। यही वरदान है।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?

 

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         रूहानी ड्रिल प्रति

अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं

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✧  बहुत न्यारा और बहुत प्यारा चाहिए। समझा क्या अभ्यास करना चाहिए? मुश्किल तो नहीं लगता है ना? कि थोडा-थोडा मुश्किल लगता है? कर्मेन्द्रियों के मालिक हो ना? राजयोगी अपने को कहलाते हो, किसके राजा हो? अमेरिका के, आफ़िका के! कर्मन्द्रियों के राजा हो ना! और राजा बन्धन मे आ गया तो राजा रहा?

 

✧  सभी का टाइटल तो बहुत अच्छा है। सब राजयोगी हैं तो राजयोगी हो या प्रजायोगी हो? कभी प्रजायोगी, कभी राजयोगी? तो डबल विदेशी सभी पास विद ऑनर होंगे? बापदादा को तो बहुत खुशी होगी - यदि सब विदेशी पास विद ऑनर हो जायें।

 

✧  थोडा-सा मुश्किल है कि सहज है? अच्छा मुश्किल शब्द आपके डिक्शनरी से निकल गया है। ये ब्राह्मण जीवन भी एक डिक्शनरी है। तो ब्राह्मण जीवन के डिक्शनरी में मुश्किल शब्द है ही नहीं कि कभी-कभी उडकर आ जाता है?

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?

 

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         ❂ अशरीरी स्थिति प्रति

अव्यक्त बापदादा के इशारे

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〰✧  अभी का तिलक जन्म-जन्मान्तर का तिलकधारी वा ताजधारी बनाता है। तो सदैव एकरस रहना है। फोला फादर करना है। जो स्वयं हर्षित है वह कैसे भी मन वाले को हर्षित करेगा। हर्षित रहना यह तो ज्ञान का गुण है। इसमें सिर्फ रूहानियत एड करना है। हर्षितपन का संस्कार भी एक वरदान है जो समय पर बहुत सहयोग देता है।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   "ड्रिल :- ड्रामा का श्रेष्ठ नालेज समझना"

➳ _ ➳  सृष्टि रंगमंच पर चल रहे इस बेहद के ड्रामा में हीरो पार्ट धारी मैं आत्मा स्वयं के पार्ट को साक्षी होकर देख रही हूँ... इस कल्याण कारी ड्रामा की हर सीन बेहद ही खूबसूरत है ... सत्यं शिवं सुन्दरम् का गहरा एहसास करती हुई मैं आत्मा बुद्धि में स्वदर्शन चक्र फिराती हुई अपने फरिश्ता स्वरूप में स्थित हूँ बापदादा के सम्मुख... और बापदादा आज श्रीमत पर परफैक्ट बनने की विधि समझाते हुए विचार सागर मंथन के लिए समझानी दे रहे है।

❉   स्नेह शक्तियों और गुणों की मिठास खुद में समेटे, मीठा- मीठा कहकर मुझे मीठा बनाने वाले मेरे मीठे बाबा बोले:-"मेरी मास्टर ज्ञानसागर बच्ची, जो पास्ट हुआ है वह फिर रिपीट हो रहा है यह बहुत समझने की बात है, क्या आप इस की गहराई समझ कर अपने इस संगम युगी जीवन के हीरो पार्ट के कर्तव्यों को भली भाँति समझती हो! सतयुग के अपने यादगार जड चित्रों की महिमा का महत्व समझती हो? अपने फ्यूचर के फरिश्ता स्वरूप के फीचर का सबको साक्षात्कार कराती हो?

➳ _ ➳  इस पतित दुनिया में पावनता का बादल बन बरसते, बापदादा के रूहानी स्नेह में डूबकर दिव्य बुद्धि मैं आत्मा, पतित पावन बाप से बोली:-"अपनी पावन ज्ञान गंगा से मेरी बुद्धि को निर्मल और दिव्य बनाने वाले मेरे मीठे बाबा! स्वदर्शन चक्र की ये जो सौगात आपसे पायी है, इसने मुझ आत्मा की बुद्धि को दिव्य बुद्धि बनाया है। पग पग पर आपके साथ के अनुभवों की मीठी सी सौगात मेरी समझ को और भी गहरा बना रही है...  इस बेहद के ड्रामा के आदि, मध्य, अन्त की सारी नाॅलिज अब मेरी बुद्धि में समाँ रही है...

❉  विकारों की कैद में कराहती आत्माओ को लिबरेट करने वाले मेरे लिबरेटर शिव बाबा स्नेह से मुस्कुराते हुए बोले:-" मेरी शिवशक्ति बच्ची,  बेहद के ड्रामा में मेरा परिचय सब आत्माओं को देने का दारोमदार तुम बच्ची पर है गीता ज्ञान दाता मुझ शिव पिता को भूलकर कृष्ण को पूजती आत्माओं को, इस भ्रम से आप बच्ची लिबरेट कराओं... जाओ अब जाकर गीता  को करेक्ट कराओं।अपने जड चित्रों के उपासको को अब अपने चैतन्य रूप की झलक दिखाओं। परदर्शन में डूबी हर आत्मा को स्वदर्शन का अनुभव कराओं।

➳ _ ➳  परम पिता के असीम रूहानी स्नेह की गहरी अनुभूतियों में खोई मैं कल्प कल्प की विशेष आत्मा गुप्त रूहानी सेना के रूहानी कमांडर शिव पिता से बोली:-"गुप्त वेश में आपकी शक्ति सेना ये कमाल कर रही है बाबा! गीता ज्ञान दाता प्रत्यक्ष हो रहा है, आप समान बनकर साक्षात चैतन्य मूर्तियाँ एक नये कुरूक्षेत्र में उतर रही है, शिव पिता की प्रत्यक्षता आप स्वयं ही देख रहे है, श्वेतवस्त्रधारी ये दिव्यात्माए गीता के भगवान को प्रत्यक्ष कर रही है, परदर्शन से मुक्त होकर, देखो, करोडो आत्माए -"यही है यही है" का अलख जगाती इधर ही आ रही है।

❉  दया के सागर, प्रेम के सागर, विषय सागर में डूबे बेडे को पार लगाने वाले हर्षित हो, मन्द मन्द मुस्काते बोले:-" दिव्य बुद्धि से ड्रामा के हर राज़ को धारण करने वाली मेरी मीठी बच्ची, ड्रामा ज्ञान के लेकर मूँझने वाली आत्माओं को एक बाप के सच्चे सच्चे रूप का अनुभव करा, सबके प्रति रहमभाव अपनाओं, किनारा करने वालों के भी सहारा बन विश्वकल्याण के कार्यों को मंजिल तक ले जाओं। अविनाशी प्यार के धागे में हर आत्मा को पिरोकर ही अपनी अवस्था अविनाशी बनाओ... सभी के  कर्म भोग का वर्णन समाप्त कर कर्मयोग का जिक्र सुनो और सुनाओं।

➳ _ ➳  बुद्धि रूपी निर्मल आकाश में जगमगाते  एक मात्र शिव सूर्य, और उनकी श्रीमत की दिव्य माला गले में धारण किये, मैं आत्मा विचार सागर मंथन से परफैक्ट बनती शिव शिक्षक से बोली:-"बाबा आपके अविनाशी प्यार की सौगात ही सबको एक धागे से बाँधकर इस रूद्रज्ञान यज्ञ को सम्पूर्ण बना रही है, ड्रामा के आदि, मध्य, अन्त का राज सब आत्माओं की बुद्धि में प्रत्यक्ष हो रहा है, आप ही करावन हार है बाबा! मैने तो हाँजी का पार्ट बजाया है... विचार सागर मंथन के लिए भी आप ही मेरी बुद्धि चला रहे है।... ये गीता ज्ञान भी आप ही प्रत्यक्ष करा रहे है... सभी आत्माए एक शिव पिता के कल्याणकारी रूप का जयकार कर रही है... और बापदादा मन्द मन्द मुस्कुराते वरदानों से मुझे नवाज़ रहे है।

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   "ड्रिल :- अविनाशी ज्ञान रत्नों का धन्धा कर 21 जन्मों के लिए पदमापदम भाग्यशाली बनना है"

➳ _ ➳  ज्ञान के सागर अपने शिव पिता परमात्मा द्वारा मुरली के माध्यम से हर रोज प्राप्त होने वाले मधुर महावाक्यों को एकांत में बैठ मैं पढ़ रही हूँ और पढ़ते - पढ़ते अनुभव कर रही हूँ कि ब्रह्मा मुख द्वारा अविनाशी ज्ञान के अखुट खजाने लुटाते मेरे शिव पिता परमात्मा परमधाम से नीचे साकार सृष्टि पर आकर मेरे सम्मुख विराजमान हो गए हैं। अपने मुख कमल से मेरी रचना कर मुझे ब्राह्मण बनाने वाले मेरे परम शिक्षक शिव बाबा, ब्रह्मा बाबा की भृकुटि पर बैठ ज्ञान की गुह्य बातें मुझे सुना रहें हैं और मैं ब्राह्मण आत्मा ज्ञान के सागर अपने शिव पिता के सम्मुख बैठ, ब्रह्मा मुख से उच्चारित मधुर महावाक्यों को बड़े प्यार से सुन रही हूँ और ज्ञान रत्नों से अपनी बुद्धि रूपी झोली को भरपूर कर रही हूँ।

➳ _ ➳  मुरली का एक - एक महावाक्य अमृत की धारा बन मेरे जीवन को परिवर्तित कर रहा है। आज दिन तक अज्ञान अंधकार में मैं भटक रही थी और व्यर्थ के कर्मकांडो में उलझ कर अपने जीवन के अमूल्य पलों को व्यर्थ गंवा रही थी। धन्यवाद मेरे शिव पिता परमात्मा का जिन्होंने ज्ञान का तीसरा नेत्र देकर मुझे अज्ञान अंधकार से निकाल मेरे जीवन मे सोझरा कर दिया। अपने शिव पिता परमात्मा के समान महादानी बन अब मुझे उनसे मिलने वाले अविनाशी ज्ञान रत्नों का दान सबको कर, सबको अज्ञान अंधकार से निकाल सोझरे में लाना है।
 
➳ _ ➳  अपने शिव पिता के स्नेह का रिटर्न अब मुझे उनके फरमान पर चल, औरो को आप समान बनाने की सेवा करके अवश्य देना है। अपने आप से यह प्रतिज्ञा करते हुए मैं देखती हूँ मेरे सामने बैठे बापदादा मुस्कराते हुए बड़े प्यार से मुझे निहार रहें हैं। उनकी मीठी मधुर मुस्कान मेरे दिल मे गहराई तक समाती जा रही है। उनके नयनों से और भृकुटि से बहुत तेज दिव्य प्रकाश निकल रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे प्रकाश की सहस्त्रो धारायें मेरे ऊपर पड़ रही है और उस दिव्य प्रकाश में नहाकर मेरा स्वरूप बहुत ही दिव्य और लाइट का बनता जा रहा है। मैं देख रही हूँ बापदादा के समान मेरे लाइट के शरीर में से भी प्रकाश की अनन्त धारायें निकल रही हैं और चारों और फैलती जा रही हैं।

➳ _ ➳  अब बापदादा मेरे पास आ कर मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर अपने सभी अविनाशी खजाने, गुण और शक्तियां मुझे विल कर रहें हैं। बाबा के हस्तों से निकल रहे सर्व ख़ज़ानों, सर्वशक्तियों को मैं स्वयं में समाता हुआ स्पष्ट अनुभव कर रही हूँ। बापदादा मेरे सिर पर अपना वरदानी हाथ रख मुझे "अविनाशी ज्ञान रत्नों के महादानी भव" का वरदान दे रहें हैं। वरदान दे कर, उस वरदान को फलीभूत कर, उसमे सफलता पाने के लिए बाबा अब मेरे मस्तक पर विजय का तिलक दे रहें हैं। मैं अनुभव कर रही हूँ मेरे लाइट माइट स्वरूप में मेरे मस्तक पर जैसे ज्ञान का दिव्य चक्षु खुला गया है जिसमे से एक दिव्य प्रकाश निकल रहा है और उस प्रकाश में ज्ञान का अखुट भण्डार समाया है।

➳ _ ➳  महादानी बन, अपने लाइट माइट स्वरूप में सारे विश्व की सर्व आत्माओ को अविनाशी ज्ञान रत्न देने के लिए अब मैं सारे विश्व मे चक्कर लगा रही हूँ। मेरे मस्तक पर खुले ज्ञान के दिव्य चक्षु से निकल रही लाइट से ज्ञान का प्रकाश चारों और फैल रहा है और सारे विश्व में फैल कर विश्व की सर्व आत्माओं को परमात्म परिचय दे रहा हैं। सर्व आत्माओं को परमात्म अवतरण का अनुभव हो रहा है। सभी आत्मायें अविनाशी ज्ञान रत्नों से स्वयं को भरपूर कर रही हैं। सभी का बुद्धि रूपी बर्तन शुद्ध और पवित्र हो रहा है। ज्ञान रत्नों को बुद्धि में धारण कर सभी परमात्म पालना का आनन्द ले रहे हैं।
 
➳ _ ➳  लाइट माइट स्वरूप में विश्व की सर्व आत्माओं को अविनाशी ज्ञान रत्नों का दान दे कर, अब मैं साकार रूप में अपने साकार ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो कर महादानी बन मुख द्वारा अपने सम्बन्ध संपर्क में आने वाली सभी आत्माओं को आविनाशी ज्ञान रत्नों का दान दे कर, सभी को अपने पिता परमात्मा से मिलाने की सेवा निरन्तर कर रही हूँ। अपने ब्राह्मण स्वरूप में, डबल लाइट स्थिति का अनुभव करते अपनी स्थिति से मैं अनेको आत्माओं को परमात्म प्यार का अनुभव करवा रही हूँ। परमात्म प्यार का अनुभव करके वो सभी आत्मायें अब परमात्मा द्वारा मिलने वाले अविनाशी ज्ञान रत्नों को धारण कर अपने जीवन को खुशहाल बना रही हैं।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   मैं सहयोगी आत्मा हूँ।
✺   मैं आत्मा शुभ भावना, शुभ कामना के सहयोग से आत्माओं को परिवर्तन करती हूँ।
✺   मैं सफलता सम्पन्न आत्मा हूँ।

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   मैं आत्मा कदम-कदम में पदमों की कमाई सदैव जमा करती हूँ  ।
✺   मैं सबसे बड़ी धनवान आत्मा हूँ  ।
✺   मैं पद्मापद्म भाग्यशाली आत्मा हूँ ।

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  वाह मेरा परिवार! वाह मेरा भाग्य! और वाह मेरा बाबा! ब्राह्मण जीवन अर्थात् वाह-वाह! हाय-हाय नहीं। शारीरिक व्याधि में भी हाय-हाय नहींवाह! यह भी बोझ उतरता है। अगर 10 मण से आपका 3-4 मण बोझ उतर जाए तो अच्छा है या हाय-हायक्या है?वाह बोझ उतरा! हाय मेरा पार्ट ही ऐसा है! हाय मेरे को व्याधि छोड़ती ही नहीं है! आप छोड़ो या व्याधि छोड़ेगी? वाह-वाह करते जाओ तो वाह-वाह करने से व्याधि भी खुश हो जायेगी। देखोयहाँ भी ऐसे होता है नाकिसकी महिमा करते हो तो वाह-वाह करते हैं। तो व्याधि को भी वाह-वाह कहो। हाय यह मेरे पास ही क्यों आईमेरा ही हिसाब है! प्राप्ति के आगे हिसाब तो कुछ भी नहीं है। प्राप्तियां सामने रखो और हिसाब किताब सामने रखोतो वह क्या लगेगाबहुत छोटी सी चीज लगेगी। मतलब तो ब्राह्मण जीवन में कुछ भी हो जाए, पाजिटिव रूप में देखो। निगेटिव से पाजिटिव करना तो आता है ना। निगेटिव पाजिटिव का कोर्स भी तो कराते हो ना! तो उस समय अपने आपको कोर्स कराओ तो मुश्किल सहज हो जायेगा। मुश्किल शब्द ब्राह्मणों की डिक्शनरी में नहीं होना चाहिए। अच्छा - कोई भी हिसाब हैआत्मा से हैशरीर से है या प्रकृति से हैक्योंकि प्रकृति के यह 5 तत्व भी कई बार मुश्किल का अनुभव कराते हैं। कोई भी हिसाब-किताब योग अग्नि में भस्म कर लो।

 

✺   ड्रिल :-  "ब्राह्मण जीवन में वाह-वाह करते हिसाब-किताब से छूटने का अनुभव"

 

 _ ➳  कोहिनूर समान चमकती हुई मैं नूर भृकुटी सिंहासन पर विराजमान हो जाती हूँ... मुझ नूर से चमकती हुई किरणें निकल कर चारों ओर फैल रही है... इस शरीर से बाहर निकलकर चमकते हुए प्रकाश के कार्ब में बैठकर मैं आत्मा पहुँच जाती हूँ सूक्ष्मवतन... श्वेत प्रकाश की दुनिया में... जहाँ बापदादा हिसाब-किताब के लिस्ट देख रहे हैं...  मैं आत्मा बाबा के पास जाकर बैठ जाती हूँ...   

 

 _ ➳  मैं आत्मा बाबा से पूछती हूँ प्यारे बाबा- इस लिस्ट में मेरे और कितने हिसाब किताब रह गए हैं... बाबा बोले- मीठी बच्ची 63 जन्मों के हिसाब किताब हैं... यूं ही थोड़ी खत्म हो जायेंगे... हाँ बाबा कब से मैं आप को ढूंढ रही थी... पर आपने मुझे ढूंढ लिया... कितने समय के बाद बाबा आप मिले हो कह कर मैं आत्मा बाप दादा के गले लग जाती हूँ...      

 

 _ ➳  मेरी सिकीलधि बच्ची कहकर बापदादा मुझे अपनी गोदी में बिठाकर... मुझ पर अनन्त प्यार बरसा रहे हैं... मैं आत्मा बाबा के प्यार में समा रही हूँ... मुझ आत्मा का कितना ऊंचा भाग्य है जो ऊँचे ते ऊँचे परमात्मा के साथ विशेष पार्ट है... अब मैं सदा इसी स्मृति में रहती हूँ कि मैं श्रेष्ठ ब्राह्मण आत्मा गुणों के सागर की संतान हूँ... मैं आत्मा स्मृति स्वरूप बन रही हूँ...  

 

 _ ➳  बाबा मुझे वाह-वाह के गीत गाकर सुनाते हैं... मुझ आत्मा के सभी हिसाब-किताब इस प्यारे से मीठे से वाह-वाह के गीत सुनकर चुक्तू हो रहे हैं... वाह बाबा वाह ! आपने कितना सरल उपाय बताकर मुझ आत्मा के बोझ को हल्का कर दिया... प्यारे मीठे बाबा इस हाय-हाय की जंजीर से मुझ आत्मा को आपने मुक्त कर दिया है...  

 

 _ ➳  अब मैं नूर सदा निगेटिव को पॉजिटिव कर बाबा की नूरे रतन बन गई हूँ... प्रभु पसन्द बन गई हूँ... अब मैं आत्मा सदा योग अग्नि से अपने हिसाब किताब चुक्तू करती हूँ... मैं आत्मा बाबा से मिली अनन्त प्राप्तियों का, अखण्ड खजानों का अनुभव करती हूँ...  अब मैं आत्मा सदा वाह मेरा परिवार ! वाह मेरा भाग्य ! और वाह मेरा बाबा ! के गीत गाते अपने को सरलता से सभी हिसाब किताब से छूटने का अनुभव कर रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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