03-10-2020   नूरानी कलेमात


मीठे बच्चे
रूह रूपी बैटरी 84 मोटरों में जाने के सबब डल हो गई है, अब उसे याद के सफ़र से लबरेज़ करो

सवाल:-
रब्बा किन बच्चों को बहुत-बहुत क़िस्मत नशीन समझते हैं?

जवाब:-
जिनके पास कोई झंझट नहीं है, जो आज़ाद हैं, ऐसे बच्चों को रब्बा फ़रमाते तुम बहुत-बहुत क़िस्मत नशीन हो, तुम याद में रहकर अपनी बैटरी फुल चार्ज कर सकते हो। अगर इबादत नहीं सिर्फ़ इल्म सुनाते तो तीर लग नहीं सकता। भल कोई कितना भी भभके से अपना तजुर्बा सुनाये मगर खुद में इख्तियार नहीं तो दिल खाती रहेगी।

आमीन।
मीठे-मीठे रूहानी बच्चों के वास्ते रूहानी रब समझाते हैं। रूहानी रब का नाम क्या है? पाक परवरदिगार। वह है ही अल्ल्लाह् ताला, बेहद का बाप। इन्सान को कभी बेहद का बाप या अल्ल्लाह् ताला या खुदा ताला नहीं कहा जा सकता। नाम भल बहुतों के शिव हैं मगर वह तमाम है जिस्म नशीन हैं इसलिए उनको अल्ल्लाह् ताला नहीं कहा जा सकता। यह रब बैठ बच्चों को समझाते हैं। मैंने जिसमें दाख़िली किया है, उनका यह निहायत विलादतों के आख़िर की विलादत है। तुम बच्चों से कई पूछते हैं - तुम इनको अल्ल्लाह् ताला क्यों कहते हो? रब पहले से ही समझाते हैं - कोई भी मैकरू या महीन जिस्म नशीन को अल्ल्लाह् ताला नहीं कह सकते। महीन जिस्म नशीन मलक़ूतवतनवासी ही ठहरे। उन्हों को हूरैन कहा जाता है। आला ते आला है ही अल्ल्लाह् ताला, पाक परवरदिगार। आला ते आला नाम है,आला उनका गांव। रब तमाम रूहों के साथ वहाँ रिहाईश करते हैं। बैठक भी आला है। असल में कोई बैठने की जगह नहीं है। जैसे स्टॉर कहाँ बैठे हैं क्या? खड़े हैं ना। तुम रूहें भी अपनी ताक़त से वहाँ खड़ी हो। ताक़त ऐसी मिलती है जो वहाँ जाकर खड़े होते हैं। रब का नाम ही है तमाम कुव्वत नशीन, उनसे कुव्वत मिलती है। रूह उसको याद करती है, बैटरी चार्ज हो जाती है। जैसे मोटर में बैटरी होती है, उसके ज़ोर से ही मोटर चलती है। बैटरी में करेन्ट भरी हुई होती है फिर चलते-चलते वह खाली हो जाती है फिर बैटरी में पाॅवर से चार्ज कर मोटर में डालते हैं। वह होती हैं हद की बातें। यह है बेहद की बात। तुम्हारी बैटरी तो 5 हज़ार साल चलती है। चलते-चलते फिर ढीली हो जाती है। मालूम पड़ता है - एकदम ख़त्म नहीं होती है, कुछ न कुछ रहती है। जैसे टार्च में डिम हो जाती है ना। रूह तो है ही इस जिस्म की बैटरी। यह भी डल हो जाती है। बैटरी इस जिस्म से निकलती भी है फिर दूसरी, तीसरी मोटर में जाकर पड़ती है। 84 मोटरों में उनको डाला जाता है तो अब रब फ़रमाते हैं तुम कितने डलहेड पत्थर अक्ल बन गये हो। अब फिर अपनी बैटरी को भरो। सिवाए रब की याद के रूह कभी पाकीज़ा हो नहीं सकती। एक ही तमाम कुव्वत नशीन रब है, जिनसे राब्ता क़ायम करना है। रब खुद अपना तारुफ़ देते हैं कि मैं क्या हूँ, कैसा हूँ। कैसे तुम्हारी रूह की बैटरी डल हो जाती है। अब तुमको सलाह देता हूँ मेरे को याद करो तो बैटरी सातों फ़ज़ीलतों से लबरेज़ फर्स्टक्लास हो जायेगी। पाकीज़ा बनने से रूह 24 कैरेट बन जाती है। अभी तुम मुलम्मे के बन गये हो। ताक़त बिल्कुल ख़त्म हो गई है। वह फ़ज़ल नहीं रही है। अब रब तुम बच्चों को समझाते हैं बच्चे अहम बात है। इबादत में रहना, पाकीज़ा बनना। नहीं तो बैटरी भरेगी नहीं। राब्ता लगेगा नहीं। भल कुक्कड़ आलिम तो निहायत हैं। इल्म भल देते हैं मगर वह हालत नहीं है। यहाँ बड़े भभके से तजुर्बा सुनाते हैं। अन्दर खाता रहता है। मैं जो बयान करता हूँ ऐसी हालत तो है नहीं। कई फिर इबादत नशीन तू रूह बच्चे भी हैं। रब तो बच्चों की निहायत अज़मत करते हैं। रब फ़रमाते हैं - बच्चे, तुम बहुत-बहुत क़िस्मत नशीन हो। तुमको तो इतने झंझट नहीं। जिसको बच्चे जास्ती होते हैं उनको बंदिश भी होती है। बाबा को कितने ढेर बच्चे हैं। सबकी सम्भाल देख-रेख करनी पड़ती है। बाबा को भी याद करना है। माशूक की याद तो बिल्कुल पक्की होनी चाहिए। अकीदत मन्दी में तो तुम रब को कितना याद करते आये हो - या अल्ल्लाह्, बुत परस्ती भी पहले-पहले उनकी करते हो। पहले ग़ैर मुजस्सम अल्ल्लाह् ताला की ही करते हैं। ऐसे नहीं कि उस वक़्त तुम रूहानी हवासी बनते हो। रूहानी हवासी फिर पूजा थोड़े ही करेंगे।
रब समझाते हैं पहले-पहले अकीदत मन्दी शुरू होती है तो पहले एक बाप की पूजा करते हैं। एक ही शिव की पूजा करते हैं। जैसा राजा-रानी वैसी अवाम। आला ते आला है ही अल्ल्लाह् ताला, उनको ही याद करना है। दूसरे जो भी सब नीचे हैं - जिब्राइल अलैहिस्सलाम - मीकाइल अलैहिस्सलाम - इस्राफील अलैहिस्सलाम को भी याद करने की दरकार नहीं है। आला ते आला रब को ही याद करना है। मगर ड्रामा का पार्ट ऐसा है जो तुम नीचे उतरने के लिए बांधे हुए हो। रब समझाते हैं तुम कैसे नीचे उतरते हो। हर बात आग़ाज़ से अाख़िर तक ऊपर से नीचे तक रब समझाते हैं। अकीदत मन्दी भी पहले ख़ैर रास्त फिर सतो-रजो-तमो होती है। अभी तुम फिर ख़ैर रास्त बन रहे हो, इसमें ही मेहनत है। पाकीज़ा बनना है। अपने को देखना है, इबलीस कहाँ धोखा तो नहीं देता है? मेरी क्रिमिनल आई तो नहीं बनती है? कोई गुनाह का ख्याल तो नहीं आता है? गायन है बाप ए अवाम तो उनकी औलाद मोमिन-मोमिना बहन-भाई ठहरे ना। यहाँ के ब्राह्मण लोग भी अपने को ब्रह्मा की औलाद कहलाते हैं। तुम भी ब्राह्मण भाई-बहन हुए ना। फिर ख़बासती नज़र क्यों रखते हो। मोमिनों को तुम अच्छी तरह नज़र दे सकते हो। अभी तुम बच्चे ही जानते हो आदम अलैहिस्सलाम की औलाद मोमिन मोमिना बनकर फिर हूरैन बनते हैं। कहते भी हैं रब आकर मोमिन हूर-हूरैन दीन का क़याम करते हैं। यह समझ की बात है ना। हम आदम अलैहिस्सलाम की औलाद भाई-बहन हो गये तो बुरी नज़र कभी नहीं जानी चाहिए। उनको रोकना है। यह भी हमारी मीठी बहन है। वह लव रहना चाहिए। जैसे ब्लड कनेक्शन में लव रहता है, वह बदलकर रूहानी बन जाए। इसमें बहुत-बहुत मेहनत है। है भी आसान याद। अपने को रूह समझ रब को याद करना है। ख़बासती की नज़र नहीं रख सकते। रब्बा ने समझाया है - यह आंखें निहायत धोखा देने वाली हैं, उनको बदलना है। हम रूह हैं। अभी तो हम पाक परवरदिगार के बच्चे हैं। एडाप्ट किये हुए भाई-बहन हैं। हम अपने को बी.के. कहलाते हैं। चलन में फ़र्क तो रहता है ना। टीचर्स का काम है क्लास में सबसे पूछना - तुम समझते हो हमारी भाई-बहन की निगाह रहती है या कुछ चंचलता चलती है? सच्चे रब के आगे सच न बताया, झूठ बोला तो निहायत दण्ड पड़ जायेगा। कोर्ट में कसम उठाते हैं ना। सच्चे अल्ल्लाह् ताला रब के आगे सच कहेंगे। सच्चे रब का बच्चा भी सच्चा होगा। रब ट्रूथ है ना। वह हक़ ही बतलाते हैं। बाक़ी सब हैं गपोड़े। श्री श्री 108 अपने को कहलाते हैं, असल में यह तो माला है ना, जो सिमरते हैं। यह भी जानते नहीं कि हम क्यों सिमरते हैं। बौद्धियों की भी माला, क्रिश्चियन की भी माला होती है। हर एक अपने तरीक़े से माला फेरते हैं। तुम बच्चों को अब इल्म मिला हुआ है। बोलो, 108 की जो माला है उसमें ऊपर में फूल तो है ग़ैर मुजस्सम। उनको ही तमाम याद करते हैं। उनकी याद से ही हम जन्नत की पटरानी यानि कि मल्लिकाए आज़म बनते हैं। हज़रात से अफ़ज़ल हज़रात, ख्वातीन से अफ़ज़ल ख्वातीन बनना - यह है खानदान ए आफ़ताबी मखमल की पटरानी बनना फिर खादी की हो जाती है। तो ऐसी-ऐसी प्वाइंट्स अक्ल में रख फिर समझाना चाहिए। फिर तुम्हारा नाम निहायत बाला हो जायेगा। बात करने में शेरनी बनो। तुम पाक परवरदिगार कुव्वतैन फौज हो ना। कई तरह की फौजें हैं ना। वहाँ भी तुम जाकर देखो क्या सिखलाते हैं। लाखों इन्सान जाते हैं। रब्बा ने समझाया है - क्रिमिनल आई निहायत धोखा देने वाली है। अपनी हालत का बयान करना चाहिए। एहसास सुनाना चाहिए - हम घर में कैसे रहते हैं? हालत पर क्या असर पड़ता है? डायरी रखो - कितना वक़्त इस हालत में रहता हूँ? रब समझाते हैं रूसतम से इबलीस भी रूसतम होकर लड़ती है। जंग का मैदान है ना। इबलीस बड़ा ताक़तवर है। इबलीस यानि कि 5 ख़बासत दौलत को सम्पत्ति कहा जाता है, जिसके पास जास्ती दौलत होती है, अजामिल भी जास्ती वह बनते हैं।
रब फ़रमाते हैं - पहले-पहले तुम तवाइफों को तो बचाओ। तो वह फिर अपनी एसोसिएशन बनायेंगी। हमको तो रब से वर्सा लेना है। रब फ़रमाते हैं मैं तुमको आलम ए इलाही का मालिक बनाने आया हूँ। यह अाख़िरी विलादत है। तवाइफों को समझाना चाहिए - तुम्हारे नाम के सबब हिन्दुस्तान की इतनी आबरू (इज़्ज़त) गई है। अब रब आये हैं आलम ए इलाही में ले चलने। हम सिरात ए मुस्तकीम पर आये हैं तुम्हारे पास। अभी तुम दुनिया की मालिक बन जाओ। हिन्दुस्तान का नाम बाला करो, हमारे मुआफिक़। हम भी रब को याद करने से पाकीज़ा बन रहे हैं। तुम भी यह एक विलादत छी-छी काम छोड़ दो। रहम तो करना है ना। फिर तुम्हारा नाम बाला निहायत हो जायेगा। कहेंगे इनमें तो ऐसी ताक़त है जो ऐसा गन्दा धंधा इनसे छुड़ा दिया। सबकी एसोसिएशन है। तुम अपनी एसोसिएशन बनाकर गवर्मेंन्ट से जो मदद चाहे ले सकती हो। तो अब ऐसे छी-छी जिन्होंने हिन्दुस्तान का नाम बदनाम किया है, उन्हों की खिदमत करो। तुम्हारी भी युनियन निहायत पक्की चाहिए। जो 10-12 आपस में मिलकर जाए समझायें। मातायें भी अच्छी हों। कोई नया युगल हो, बोले हम पाकीज़ा रहते हैं। पाकीज़ा रहने से ही दुनिया के मालिक बनते हैं। तो क्यों नहीं पाकीज़ा बनेंगे। तमाम झुण्ड का झुण्ड जाये। बड़ी नरमाई से जाकर कहना है, हम आपको पाक परवरदिगार का पैगाम देने आये हैं। अब तबाही सामने खड़ी है। रब फ़रमाते हैं मैं तमाम का फ़लाह करने आया हूँ। तुम भी यह एक विलादत ख़बासत में मत जाओ। तुम समझा सकते हो हम आदम ज़ादा आदमज़ादियां अपने ही जिस्म-ज़हन-दौलत से खिदमत करते हैं। हम भीख तो मांगते नहीं। अल्ल्लाह् ताला के बच्चे हैं। ऐसे-ऐसे प्लैन बनाओ। ऐसे नहीं कि तुम मदद नहीं कर सकते हो। ऐसा काम करो जिसमें वाह-वाह हो। हज़ारों मदद देने वाले निकल आयेंगे। यह अपनी तनज़ीम बनाओ। अहम-अहम को चुनो, सेमीनार करो। बच्चों को सम्भालने वाले तो निहायत निकल सकते हैं। तुम इलाही खिदमत में लग जाओ। ऐसी फ्राकदिल होनी चाहिए जो झट खिदमत पर निकल पड़े। एक तरफ़ यह खिदमत और दूसरी बात गीता की, इन बातों को मिलकर उठाओ। तुम पढ़ते ही हो यह अफ़ज़ल ख्वातीन अफ़ज़ल हज़रात बनने के लिए। तो यहाँ तुम बच्चों का आपस में इख्तिलाफ़ नहीं रहना चाहिए। अगर कोई बात रब से छिपाते हो, सच नहीं बताते हो तो भी अपना ही नुकसान करते हो और ही सौगुणा गुनाह चढ़ जाता है। अच्छा!
मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों के वास्ते मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी रब की रूहानी बच्चों को सलाम।

तरीक़त के वास्ते अहम निकात:-
1) हम मीठे रब के बच्चे हैं, आपस में मीठे बहन-भाई होकर रहना है। कभी भी ख़बासत की नज़र नहीं रखनी है। नज़र में कोई भी चंचलता हो तो रूहानी सर्जन को सच बताना है।

2) कभी भी आपस में इख्तिलाफ़ में नहीं आना है। फ्राकदिल बन खिदमत करनी है। अपने जिस्म-ज़हन-दौलत से, बहुत-बहुत नरमाई से खिदमत कर सबको रब का तारूफ (पैगाम) देना है।

बरक़ात:-
अपने अफ़ज़ल ज़िन्दगी के ज़रिए इलाही इल्म का ज़ाहिर प्रूफ देने वाले इबलीस प्रूफ बनो।

खुद को इलाही इल्म का ज़ाहिर सबूत और प्रूफ समझने से इबलीस प्रूफ बन जायेंगे। ज़ाहिर प्रूफ है - आपकी अफ़ज़ल पाकीज़ा ज़िन्दगी। सबसे बड़ी नामुमकिन से मुमकिन होने वाली बात फैमिली में रहते पर-वृत्ति में रहना। जिस्म और जिस्म की दुनिया के रिश्तों से पर (न्यारा) रहना। पुराने जिस्म की आंखों से पुरानी दुनिया की चीज़ों को देखते हुए न देखना यानि कि मुकम्मल पाकीज़ा ज़िन्दगी में चलना - यही अल्ल्लाह् ताला को ज़हूर करने और इबलीस प्रूफ बनने का आसान अस्बाब है।

स्लोगन:-
अटेन्शन रूपी पहरेदार दुरुस्त हैं तो हवास ए बालातर ख़ुशी का खज़ाना खो नहीं सकता।

आमीन