04-01-2020   नूरानी कलेमात


मीठे बच्चे
कदम-कदम रब की सिरात ए मुस्तकीम पर चलते रहो, एक रब से ही सुनो तो इबलीस का वार नहीं होगा

सवाल:-
आला मर्तबा हासिल करने की बुनियाद क्या है?

जवाब:-
आला मर्तबा हासिल करने के लिए रब के हर डायरेक्शन पर चलते रहो। रब का डायरेक्शन मिला और बच्चों ने माना। दूसरा कोई इरादा तक भी न आये। 2- इस रूहानी खिदमत में लग जाओ। तुम्हें और कोई की याद नहीं आनी चाहिए। आप मुये मर गई दुनिया तब आला मर्तबा मिल सकता है।

नग़मा:-
तुम्हें पाके हमने........

आमीन।
आमीन। मीठे-मीठे रूहानी बच्चों ने यह नग़मा सुना। वो है अकीदत मन्दी का गाया हुआ। इस वक़्त रब इसका राज़ समझाते हैं। बच्चे भी समझते हैं - अब हम रब से बेहद का वर्सा पा रहे हैं। वह सल्तनत हमारी कोई छीन न सके। हिन्दुस्तान की सल्तनत बहुतों ने छीनी है ना। मुसलमानों ने छीनी, अंग्रेजों ने छीनी।असल में पहले तो शैतान ने छीनी है, शैतानी राय पर। यह जो बन्दरों की तस्वीर बनाते हैं - हियर नो ईविल, सी नो ईविल.... इनका भी कोई राज़ होगा ना। रब समझाते हैं एक तरफ़ है शैतान का शैतानी फ़िरक़ा, जो रब को नहीं जानते हैं। दूसरी तरफ़ हो तुम बच्चे। तुम भी पहले नहीं जानते थे। रब इनके लिए भी सुनाते हैं कि इसने भी निहायत अकीदत मन्दी की है, इनका यह है निहायत विलादतों के आख़िर की विलादत। यही पहले पाकीज़ा थे, अब नापाक बने हैं। इनको मैं जानता हूँ। अभी तुम और किसकी राय सुनो। रब फ़रमाते हैं, मैं तुम बच्चों से बात करता हूँ। हाँ, कभी कोई दोस्त- रिश्तेदारों वगैरह को ले आते हैं तो थोड़ी बात कर लेता हूँ। पहली बात तो है पाकीज़ा बनना है तब ही अक्ल में इख्तियार होगा। यहाँ के कायदे निहायत कड़े हैं। आगे कहते थे 7 रोज़ भट्ठी में रहना है, और कोई की याद न आये, न खत वगैरह लिखना है। रहो भल कहाँ भी। मगर तमाम दिन भट्ठी में रहना पड़े। अभी तो तुम भट्ठी में पड़कर फिर बाहर निकलते हो। कोई तो आश्चर्यवत् सुनन्ती, कथन्ती, अहो इबलीस फिर भागन्ती हो गये। यह है बड़ी भारी मंजिल। रब का फ़रमान नहीं मानते। रब फ़रमाते हैं तुम तो आवाज़ से बालातर हो। तुम क्यों मुफ्त में फँस पड़े हो। तुम तो इस रूहानी खिदमत में लग जाओ। तुम्हें और कोई की याद नहीं आनी चाहिए। आप मुये मर गई दुनिया तब आला मर्तबा मिल सकता है। तुम्हारी तजवीज़ ही है - हज़रात से अफ़ज़ल हज़रात बनने की। कदम-कदम रब के डायरेक्शन पर चलना पड़े। मगर इसमें भी हिम्मत चाहिए। सिर्फ़ कहने की बात नहीं है। लगाव की रग कम नहीं है, खात्मा ए लगाव होना है। मेरा तो एक रहमतुल्आल्मीन, दूसरा न कोई। हम तो रब्बा की पनाह लेते हैं। हम ज़हर कभी नहीं देंगे। तुम अल्ल्लाह् ताला तरफ़ आते हो तो इबलीस भी तुमको छोड़ेगा नहीं, खूब पछाड़ेगा। जैसे हकीम लोग कहते हैं - इस दवाई से पहले तमाम बीमारी बाहर निकलेगी। डरना नहीं। यह भी ऐसे है। इबलीस खूब सतायेगा, बुज़ुर्गी हालत में भी ख़बासत के इरादे ले आयेगा। लगाव पैदा हो जायेगा। रब्बा पहले से ही बता देते हैं कि यह तमाम होगा। जहाँ तक जियेंगे, यह इबलीस की बॉक्सिंग चलती रहेगी। इबलीस भी पहलवान बन तुमको छोड़ेगा नहीं। यह ड्रामा में नूँध है। मैं थोड़े ही इबलीस को कहूँगा कि बुरे इरादे न लाओ। निहायत लिखते हैं रब्बा रहमत करो। मैं थोड़े ही किस पर रहमत करुँगा। यहाँ तो तुमको सिरात ए मुस्तकीम पर चलना है। रहमत करूँ फिर तो तमाम मलिक ए आज़म बन जाएं। ड्रामा में भी है नहीं। तमाम मज़हब वाले आते हैं। जो और-और मज़हब में ट्रान्सफर हो गये होंगे वह निकल आयेंगे। यह सैपलिंग लगता है, इसमें बड़ी मेहनत है। नये जो आते हैं तो सिर्फ़ कहना है रब को याद करो। रहमतुल्आल्मीन फ़रमाते हैं। आदम अलैहिस्सलाम कोई अल्ल्लाह् ताला नहीं है। वह तो 84 विलादतों में आते हैं। कई राय, कई बातें हैं। यह अक्ल में पूरा इख्तियार करनी है। हम नापाक थे। अब रब फ़रमाते हैं तुम पाकीज़ा कैसे बनो। चक्कर पहले भी कहा था - दिल से मुझे याद करो। अपने को रूह समझ जिस्म के तमाम मज़हब छोड़ जीते जी मरो। मुझ एक रब को ही याद करो। मैं तमाम की ख़ैर निजात करने आया हूँ। हिन्दुस्तान रिहाईश नशीन ही आला बनते हैं फिर 84 विलादत ले नीचे उतरते हैं। बोलो, तुम हिन्दुस्तान रिहाईश नशीन ही इन हूर-हूरैनों की बुतपरस्ती करते हो। यह कौन हैं? यह जन्नत के मालिक थे ना। अभी कहाँ हैं? 84 विलादत कौन लेते हैं? सुनहरे दौर में तो यही हूर-हूरैन थे। अभी फिर इस जंग ए क़यामत के ज़रिए सबकी तबाही होनी है। अभी तमाम नापाक स्याह रास्त हैं। मैं भी इनके निहायत विलादतों के आख़िर में ही आकर दाखिली करता हूँ। यह पूरा अकीदत मन्द था। नारायण की बुतपरस्ती करता था। इनमें ही दाखिली कर फिर इनको नारायण यानि कि अफ़जल हज़रात बनाता हूँ। अब तुमको भी तजवीज़ करनी है। यह डीटी दारूल हुकूमत क़ायम हो रही है। माला बनती है ना। ऊपर में है ग़ैर मुजस्सम फूल, फिर मेरू जोड़ी। रहमतुल्आल्मीन के नीचे एकदम यह खड़े हैं। जहान के अब्बा आदम अलैहिस्सलाम और जहान की अम्मी हव्वा अलैहिस्सलाम। अभी तुम इस तजवीज़ से जन्नत के मालिक बनते हो। अवाम भी तो कहती है ना - हिन्दुस्तान हमारा है। तुम भी समझते हो हम दुनिया के मालिक हैं। हम बादशाहत करेंगे, और कोई मज़हब होगा ही नहीं। ऐसे नहीं कहेंगे - यह हमारी बादशाहत है, और कोई बादशाहत है नहीं। यहाँ बहुत हैं तो हमारा तुम्हारा चलता है। वहाँ यह बातें ही नहीं। तो अब रब समझाते हैं - बच्चे, और तमाम बातें छोड़ दिल से मुझे याद करो तो गुनाहों का ख़ात्मा होंगा। ऐसे नहीं कोई सामने बैठ निष्ठा (राब्ता) कराये, नज़र दे। रब तो फ़रमाते हैं चलते-फिरते रब को याद करना है। अपना चार्ट रखो - तमाम दिन में कितना याद किया? सवेरे उठ कितना वक़्त रब से बातें की? आज रब्बा की याद में बैठे? ऐसे-ऐसे अपने से मेहनत करनी है। नॉलेज तो अक्ल में है फिर औरों को भी समझाना है। यह किसकी अक्ल में नहीं आता है कि हवस अज़ीम दुश्मन है। 2-4 साल रहकर फिर इबलीस का थप्पड़ ज़ोर से लगने से गिर पड़ते हैं। फिर लिखते हैं रब हमने काला मुँह कर दिया। बाबा लिख देते काला मुँह करने वाले को 12 मास यहाँ आने की दरकार नहीं है। तुम रब से अहद कर फिर भी ख़बासत में गिरे, मेरे पास कभी नहीं आना। बड़ी मंजिल है। रब आये ही हैं नापाक से पाक बनाने। निहायत बच्चे शादी कर पाकीज़ा रहते हैं। हाँ, किसी बच्ची पर मार पड़ती है तो उनको बचाने लिए गन्धर्वी शादी कर पाकीज़ा रहते हैं। उसमें भी कोई-कोई को तो नाक से इबलीस पकड़ लेता है। हार खा लेते हैं। औरतें भी निहायत हार खा लेती हैं। रब फ़रमाते हैं तुम तो सूपनखा हो, यह तमाम नाम इस वक़्त के ही हैं। यहाँ तो रब्बा कोई ख़बासती को बैठने भी न दे। कदम-कदम पर रब से राय लेनी पड़े। सरेन्डर हो जाए तो फिर रब फरमाएंगे अब ट्रस्टी बनो। राय पर चलते रहो। पोतामेल बतायेंगे तब तो राय देंगे। यह बड़ी समझने की बातें हैं। तुम तबर्रुक भल लगाओ मगर मैं खाता नहीं हूँ। मैं तो दाता हूँ। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों के वास्ते मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी रब की रूहानी बच्चों को सलाम।

रात की क्लास 15-6-68

पास्ट जो हो गया है उनको रिवाईज़ करने से जिनकी कमज़ोर दिल है तो उन्हों के दिल की कमज़ोरी भी रिवाईज़ हो जाती है इसलिये बच्चों को ड्रामा के पट्टे पर ठहराया गया है। अहम फ़ायदा है ही याद से। याद से ही उम्र बड़ी होनी है। ड्रामा को बच्चे समझ जायें तो कब ख्याल न हो। ड्रामा में इस वक़्त इल्म सीखने और सिखाने का चल रहा है। फिर पार्ट बन्द हो जायेगा। न रब का, न हमारा पार्ट रहेगा। न उनका देने का पार्ट, न हमारा लेने का पार्ट होगा। तो एक हो जायेंगे ना। हमारा पार्ट नई दुनिया में हो जायेगा। रब्बा का पार्ट दारूल सुकून में होगा। पार्ट की रील भरी हुई है ना, हमारा उजूरे का पार्ट, रब्बा का दारूल सुकून का पार्ट। देने और लेने का पार्ट पूरा हुआ, ड्रामा ही पूरा हुआ। फिर हम सल्तनत करने आयेंगे, वह पार्ट चेंज होगा। इल्म स्टाप हो जायेगा, हम वह बन जायेंगे। पार्ट ही पूरा तो बाक़ी फ़र्क नहीं रहेगा। बच्चे और रब का भी पार्ट नहीं रहेगा। यह भी इल्म को पूरा ले लेते हैं। उनके पास भी कुछ रहता ही नहीं है। न देने वाले पास रहे, न लेने वाले में कमी रही तो दोनों एक दो के बराबर हो गये। इसमें इरादा ए ग़ौरतलब करने की अक्ल चाहिए। ख़ास तजवीज़ है याद के सफ़र की। रब बैठ समझाते हैं। सुनाने में तो मोटी बात हो जाती है, अक्ल में तो महीन है ना। अन्दर में जानते हैं रहमतुल्आल्मीन का रूप क्या है। समझाने में मोटा रूप हो जाता है। अकीदत मन्दी की राह में बड़ा लिंग बना देते हैं। रूह है तो छोटी ना। यह है कुदरत। कहाँ तक आख़िर पायेंगे? फिर पिछाड़ी में बेअन्त कह देते। रब्बा ने समझाया है तमाम पार्ट रूह में भरा हुआ है। यह कुदरत है। आखिर नहीं पाया जा सकता। खिल्क़त के चक्कर का आखिर तो पाते हैं। खालिक़ और मख़लूक़ के आग़ाज़-दरम्यान-आख़िर को तुम ही जानते हो। रब्बा नॉलेजफुल है। फिर हम भी फुल हो जायेंगे। पाने लिये कुछ रहेगा नहीं। रब इसमें दाखिल कर पढ़ाते हैं। वह है नुक्ता। रूह का और रब का दीदार ए जलवा होने से ख़ुशी थोड़े ही होती है। मेहनत कर रब को याद करना है तो गुनाहों का ख़ात्मा होंगा। रब फ़रमाते हैं मेरे में इल्म बन्द हो जायेगा तो तेरे में भी बन्द हो जायेगा। नॉलेज ले आलातरीन बन जाते हैं। तमाम कुछ ले लेते हैं फिर भी रब तो रब है ना। तुम रूहें रूह ही रहेंगे, रब होकर तो नहीं रहेंगे। यह तो इल्म है। रब रब है, बच्चे बच्चे हैं। यह तमाम इरादा ए ग़ौरतलब कर डीप में जाने की बातें हैं। यह भी जानते हैं जाना तो तमाम को है। तमाम चले जाने वाले हैं। बाक़ी रूह जाकर रहेगी। तमाम दुनिया ही ख़त्म होनी है। इसमें बेखौफ रहना होता है। तजवीज़ करनी है बेखौफ हो रहने का। जिस्म वगैरह का कोई भी हवास न आवे। उसी हालत में जाना है। रब अपने जैसा बनाते हैं, तुम बच्चे भी अपने जैसा बनाते रहते हो। एक रब की ही याद रहे ऐसी तजवीज़ करनी है। अभी टाइम पड़ा है। यह रिहर्सल तीखी करनी पड़े। प्रैक्टिस नहीं होगी तो खड़े हो जायेंगे। टांगे थिरकने लग पड़ेगी और हार्ट फेल अचानक होता रहेगा। स्याह रास्त जिस्म को हार्टफेल होने में देरी थोड़े ही लगती है। जितना बे जिस्म होते जायेंगे, रब को याद करते रहेंगे उतना नज़दीक आते जायेंगे। इबादत वाले ही बे खौंफ रहेंगे। इबादत से कुव्वत मिलती है, इल्म से दौलत मिलती है। बच्चों को चाहिए कुव्वत। तो कुव्वत पाने लिये रब को याद करते रहो। रब्बा है ला फ़ानी सर्जन। वह कब पेशेन्ट बन न सके। अभी रब फ़रमाते हैं तुम अपनी ला फ़ानी दवाई करते रहो। हम ऐसी सन्जीवनी बूटी देते हैं जो कब कोई बीमार न पड़े। सिर्फ़ नापाक से पाक बनाने वाले रब को याद करते रहो तो पाकीज़ा बन जायेंगे। हूरैन हमेशा सेहतमंद पाकीज़ा हैं ना। बच्चों को यह तो यक़ीन हो गया है हम चक्कर चक्कर वर्सा लेते हैं। इम्मेमोरियल टाइम रब आया है जैसे अभी आया है। रब्बा जो सिखलाते, समझाते हैं यही हक़ीक़ी इबादत है। वह गीता वगैरह तमाम अकीदत मन्दी की राह के हैं। यह इल्म की राह रब ही बताते हैं। रब ही आकर नीचे से ऊपर उठाते हैं। जो पक्के यक़ीनी दानिशमंद हैं वही माला का दाना बनते हैं। बच्चे समझते हैं अक़ीदत करते करते हम नीचे गिरते आये हैं। अभी बाप आकर सच्ची कमाई कराते हैं। जिस्मानी बाप इतनी कमाई नहीं कराते जितनी रूहानी बाप कराते हैं। अच्छा बच्चों को गुडनाईट और सलाम।

तरीक़त के वास्ते अहम निकात:-
1. इबलीस पहलवान बन सामने आयेगा, उससे डरना नहीं है। इबलीस फ़तहयाब बनना है। कदम-कदम सिरात ए मुस्तकीम पर चल अपने ऊपर आपे ही रहमत करनी है।

2. रब को अपना सच्चा-सच्चा पोतामेल बताना है। ट्रस्टी होकर रहना है। चलते-फिरते याद का प्रेक्टिस करनी है।

बरक़ात:-
अपने खुद के रूप के ज़रिए अकीदत मन्दों को लाइट के क्राउन का दीदार ए जलवा कराने वाले पसंदीदा हूरैन देव बनो।

जब से आप रब के बच्चे बने, पाकीज़गी का अहद किया तो रिटर्न में लाइट का ताज हासिल हो गया। इस लाइट के ताज के आगे जवाहिरात जड़ित ताज कुछ भी नहीं है। जितना-जितना इरादे, बोल और आमाल में प्योरिटी को इख्तियार करते जायेंगे उतना यह लाइट का क्राउन साफ़ होता जायेगा और पसंदीदा हूरैन के रूप में अकीदत मन्दों के आगे ज़ाहिर होते जायेंगे।

स्लोगन:-
हमेशा रब उल हक़ के साये के अन्दर रहो तो मुश्किल कुशा बन जायेंगे।

आमीन