08-09-2020   नूरानी कलेमात


मीठे बच्चे
अपनी दिल पर हाथ रखकर पूछो कि रब्बा जो सुनाते हैं क्या हम सब पहले जानते थे, जो सुना है उसे मतलब के साथ समझकर ख़ुशी में रहो''

सवाल:-
तुम्हारे इस मोमिन दीन में सबसे ज्यादा ताक़त है - कौन-सी और कैसे?

जवाब:-
तुम्हारा यह मोमिन दीन ऐसा है जो सारे जहान की ख़ैर निजात सिरात ए मुस्तकीम पर कर देते हैं। मोमिन ही तमाम दुनिया को अमन बना देते हैं। तुम मोमिन खानदान ए फ़ाजिल हूरैन से भी आला हो, तुम्हें रब के ज़रियें यह ताक़त मिलती है। तुम मोमिन रब के मददगार बनते हो, तुम्हें ही सबसे बड़ी प्राइज़ मिलती है। तुम कायनात के भी मालिक और जहान के भी मालिक बनते हो।

आमीन।
मीठे-मीठे रूहानी सिकीलधे बच्चों के वास्ते रूहानी रब बैठ समझाते हैं। रूहानी बच्चे जानते हैं रूहानी रब एक ही बार हर 5 हज़ार साल के बाद आते हैं ज़रूर। कल्प नाम रख दिया है जो कहना पड़ता है। इस ड्रामा की या खिल्क़त की उम्र 5 हज़ार साल है, यह बातें एक ही रब बैठ समझाते हैं। यह कभी भी कोई इन्सान के मुंह से नहीं सुन सकते हैं। तुम रूहानी बच्चे बैठे हो। तुम जानते हो बरोबर हम तमाम रूहों का रब वह एक है। रब ही बच्चों को बैठ अपना तारूफ देते हैं। जो कोई भी इन्सान ज़रा भी नहीं जानते। कोई को मालूम नहीं गॉड और अल्ल्लाह् ताला क्या चीज़ है जबकि उनको गॉड फादर रब कहते हैं तो निहायत प्यार होना चाहिए। बेहद का रब है तो ज़रूर उनसे वर्सा भी मिलता होगा। इंग्लिश में अल्फ़ाज़ अच्छा कहते हैं हेविनली गॉड फादर। हेविन कहा जाता है नई दुनिया को और हेल कहा जाता है पुरानी दुनिया को। मगर जन्नत को कोई जानते नहीं। राहिब तो मानते ही नहीं। वह कभी ऐसे नहीं कहेंगे कि रब जन्नत की तामीर करने वाला है। हेविनली गॉड फादर - यह अल्फ़ाज़ निहायत मीठा है और हेविन मशहूर भी है। तुम बच्चों की अक्ल में हेविन और हेल का सारा चक्कर ख़िल्क़त के आग़ाज़-दरम्यान-आख़िर का अक्ल में फिरता है, जो-जो ख़िदमतगार हैं, तमाम तो एकरस खिदमतगार नहीं बनते।
तुम अपनी दारूल हुकूमत क़ायम कर रहे हो फिर से। तुम कहेंगे हम रूहानी बच्चे रब की अफ़ज़ल ते अफ़ज़ल सलाह पर चल रहे हैं। आला ते आला रब की ही सिरात ए मुस्तकीम है। श्रीमद् भगवद् गीता भी गाई हुई है। यह है पहले नम्बर का सहीफ़ा। रब का नाम सुनने से ही झट वर्सा याद आ जाता है। यह दुनिया में कोई भी नहीं जानते कि गॉड फादर से क्या मिलता है। अल्फ़ाज़ कहते हैं कदीम इबादत। मगर समझते नहीं कि कदीम इबादत किसने सिखायी? वो तो कृष्ण ही कहेंगे क्योंकि गीता में कृष्ण का नाम डाल दिया है। अभी तुम समझते हो रब ने ही हक़ीक़ी इबादत सिखायी, जिससे तमाम निजात-ज़िन्दगी ए निजात को पाते हैं। यह भी समझते हो कि हिन्दुस्तान में ही पाक परवरदिगार आया था, उनकी जयन्ती भी मनाते हैं मगर गीता में नाम गुम होने से अज़मत भी गुम हो गई है। जिससे सारी दुनिया को ख़ुशी-सुकून मिलती है, उस रब को भूल गये हैं। इनको कहा ही जाता है एकज़ भूल का ड्रामा। बड़े ते बड़ी भूल यह है जो रब को नहीं जानते। कभी कहते वह नाम-रूप से न्यारा है फिर कहते कच्छ-मच्छ अवतार है। ठिक्कर-भित्तर में है। भूल में भूल होती जाती है। सीढ़ी नीचे उतरते जाते हैं। फ़न कमतर होते जाते है, स्याह रास्त बनते जाते हैं। ड्रामा के प्लैन के मुताबिक़ जो रब जन्नत का तामीर करने वाला है, जिसने हिन्दुस्तान को जन्नत का मालिक बनाया, उनको ठिक्कर-भित्तर में कह देते हैं। अभी रब समझाते हैं तुम सीढ़ी कैसे उतरते आये हो, कुछ भी किसको मालूम नहीं है। ड्रामा क्या है, पूछते रहते हैं। यह दुनिया कब से बनी है? नई ख़िल्क़त कब थी तो कह देंगे लाखों साल आगे। समझते हैं पुरानी दुनिया में तो अभी निहायत साल पड़े हैं, इसको बेइल्मी का अन्धियारा कहा जाता है। गायन भी है ज्ञान अजंन सतगुरू दिया, अज्ञान अन्धेर विनाश यानि कि इल्म की ताबीर हक़ीक़ी हादी ने दी तो बे इल्मी का खात्मा हुआ । तुम समझते हो खालिक रब ज़रूर जन्नत ही तामीर करेंगे। रब ही आकर जहन्नुम को जन्नत बनाते हैं। खालिक रब ही आकर खिल्क़त के आग़ाज़-दरम्यान-आख़िर का इल्म सुनाते हैं। आते भी हैं आख़िर में। टाइम तो लगता है ना। यह भी बच्चों को समझाया है इल्म में इतना वक़्त नहीं लगता है, जितना याद के सफ़र में लगता है। 84 विलादतों की कहानी तो जैसे एक कहानी है, आज से 5000 साल पहले किन्हों की सल्तनत थी, वह सल्तनत कहाँ गयी?

तुम बच्चों को अब सारी नॉलेज है। तुम हो कितने सादा अजामिल जैसे गुनाहगार, तवाईफ़, कुब्जायें, भीलनियाँ उनको कितना आला बनाते हैं। रब समझाते हैं - तुम क्या से क्या बन गये हो। रब आकर समझाते हैं - पुरानी दुनिया का अब हाल देखो क्या है? इन्सान कुछ भी नहीं जानते कि खिल्क़त का चक्कर कैसे फिरता है? रब फ़रमाते हैं तुम अपनी दिल पर हाथ रखकर पूछो-आगे यह कुछ जानते थे? कुछ भी नहीं। अभी जानते हो रब्बा फिर से आकर हमको जहान की बादशाही देते हैं। कोई की अक्ल में नहीं आयेगा कि जहान की बादशाही क्या होती है। जहान माना सारी दुनिया। तुम जानते हो रब हमको ऐसी सल्तनत देते हैं जो हमसे आधाकल्प तक कोई छीन नहीं सकते। तो बच्चों को कितनी ख़ुशी होनी चाहिए। रब से कितना बार हुकूमत लिया है। रब हक़ है, हक़ीक़ी उस्ताद भी है, हक़ीक़ी हादी भी है। कब सुना ही नहीं। अभी मतलब के साथ तुम समझते हो। तुम बच्चे हो, रब को तो याद कर सकते हो। आजकल छोटेपन में ही हादी करते हैं। हादी की तस्वीर बनाए भी गले में डालते हैं और घर में रखते हैं। यहाँ तो वन्डर है-बाप,उस्ताद, हक़ीक़ी हादी तमाम एक ही है। रब फ़रमाते हैं मैं साथ में ले चलूँगा। तुमसे पूछेंगे क्या पढ़ते हो? बोलो, हम नई दुनिया में राजाई हासिल करने के वास्ते। हक़ीक़ी इबादत की तालीम लेते हैं। यह है ही हक़ीक़ी इबादत। जैसे बैरिस्टर से राब्ता होता है तो ज़रूर अक्ल का राब्ता बैरिस्टर तरफ़ जायेगा। टीचर को ज़रूर याद तो करेंगे ना। तुम कहेंगे हम जन्नत की बादशाहत दस्तयाब करने के लिए ही पढ़ते हैं। कौन पढ़ाते हैं?पाक परवरदिगार खुदा ताला। उनका नाम तो एक ही है जो चला आया है। गाड़ी का नाम तो है नहीं। मेरा नाम है ही पाक परवरदिगार। रब पाक परवरदिगार और गाड़ी आदम अलैहिस्सलाम कहेंगे। अभी तुम जानते हो यह कितना वन्डरफुल है, जिस्म तो एक ही है। इनको क़िस्मत नशीन जिस्म क्यों कहते हैं? क्योंकि पाक परवरदिगार की दाख़िली है तो ज़रूर दो रूहे ठहरी। यह भी तुम जानते हो और किसको तो यह ख्याल में भी नहीं आता। अब दिखाते हैं भागीरथ ने गंगा लाई। क्या पानी लाया? अभी तुम प्रैक्टिकल देखते हो - क्या लाया है, किसने लाया है? किसने दाखिली किया है? रब ने किया ना। इंसान में पानी थोड़े ही दाख़िली करेगा। जटाओं से पानी थोड़े ही आयेगा। इन बातों पर इन्सान कभी ख्याल भी नहीं करते हैं। कहा ही जाता है - रिलीजन इज़ माइट। रिलीजन में ताक़त है। बताओ, सबसे जास्ती किस रिलीजन में ताक़त है? ( मोमिन रिलीजन में) हाँ यह दुरूस्त है, जो कुछ ताक़त है मोमिन दीन में ही है, और कोई रिलीजन में कोई ताक़त नहीं। तुम अभी मोमिन हो। मोमिनों को ताक़त मिलती है रब से, जो फिर तुम जहान के मालिक बनते हो। तुम्हारे में कितनी बड़ी ताक़त है। तुम कहेंगे हम मोमिन दीन के हैं। किसकी अक्ल में नहीं बैठेगा। तफ्सील रूप भल बनाया है मगर वह भी आधा है। अहम खालिक और उनके पहले मख़लूक़ को कोई नहीं जानते। रब है खालिक, फिर मोमिन हैं चोटी, इसमें ताक़त है। रब को सिर्फ़ याद करने से ताक़त मिलती है। बच्चे तो ज़रूर नम्बरवार ही बनेंगे ना। तुम इस दुनिया में सब से अफ़ज़ल मोमिन खानदान ए फ़ाजिल हो। हूरैन से भी आला हो। तुमको अब ताक़त मिलती है। सबसे जास्ती ताक़त है मोमिन दीन में। मोमिन क्या करते हैं? सारी दुनिया को अमन बना देते हैं। तुम्हारा दीन ऐसा है जो सब की ख़ैर निजात करते हैं सिरात ए मुस्तकीम के ज़रिए। तब रब फ़रमाते हैं तुमको अपने से भी आला बनाता हूँ। तुम कायनात के भी मालिक,जहान के भी मालिक बनते हो। सारे जहान पर तुम बादशाहत करेंगे। अभी गाते हैं ना - हिन्दुस्तान हमारा वतन है। कभी अज़मत के नग़में गाते, कभी फिर कहते हिन्दुस्तान की क्या हालत है......! जानते नहीं कि हिन्दुस्तान इतना आला कब था! इन्सान तो समझते हैं जन्नत और जहन्नुम यहाँ है। जिसको दौलत मोटर वगैरह हैं, वह जन्नत में है। यह नहीं समझते जन्नत कहा ही जाता है नई दुनिया को। यहाँ सब कुछ सीखना है। साइंस का हुनर भी फिर वहाँ काम में आता है। यह साइंस भी वहाँ ख़ुशी देती है। यहाँ तो इन सबसे है कलील अरसे का ख़ुशी। वहाँ तुम बच्चों के लिए यह मुस्तक़ल ख़ुशी हो जायेगी। यहाँ सब सीखना है जो फिर आदत ले जायेंगे। कोई नई रूहें नहीं आयेंगी, जो सीखेंगी। यहाँ के बच्चे ही साइंस सीखकर वहाँ चलते हैं। निहायत होशियार हो जायेंगे। सब आदत ले जायेंगे फिर वहाँ काम में आयेंगी। अभी है कलील अरसे की ख़ुशी। फिर यह बॉम्ब्स वगैरह ही सबको खलास कर देंगे। मौत के बिगर सुकून की सल्तनत कैसे हो। यहाँ तो बे सुकूनियत की सल्तनत है। यह भी तुम्हारे में नम्बरवार हैं जो समझते हैं, हम पहले-पहले अपने घर जायेंगे फिर दारूल मसर्रत में आयेंगे। ख़ुशी में रब तो आते ही नहीं। रब फ़रमाते हैं मुझे भी बुज़ुर्ग जिस्म चाहिए ना। अकीदत मन्दी में भी सबकी खुवाहिशात पूरी करता आया हूँ। सन्देशियों को भी दिखाया है - कैसे अकीदत मन्द लोग इबादत पूजा वगैरह करते हैं, हूरैन को सजाए, इबादत वगैरह कर फिर समुन्दर में डुबो देते हैं। कितना खर्च होता है। पूछो यह कब से शुरू हुआ है? तो कहेंगे रिवाज़ से चला आया है। कितना भटकते रहते हैं। यह भी सब ड्रामा है।
रब बार-बार बच्चों को समझाते हैं हम तुमको मीठा बनाने आये हैं। यह हूरैन कितने मीठे हैं। अभी तो इन्सान कितने कड़ुवे हैं। जिन्होंने रब को निहायत मदद की थी, उन्हों की इबादत करते रहते हैं। तुम्हारी इबादत भी होती है, मर्तबा भी तुम आला हासिल करते हो। रब खुद फ़रमाते हैं मैं तुमको अपने से भी आला बनाता हूँ। आला ते आला अल्ल्लाह् ताला की है सिरात ए मुस्तकीम। कृष्ण की तो नहीं कहेंगे। गीता में भी श्रीमत मशहूर है। कृष्ण तो इस वक़्त बाप से वर्सा ले रहे हैं। कृष्ण की आत्मा के रथ में बाप ने प्रवेश किया है। कितनी वन्डरफुल बात है। कभी किसकी अक्ल में आये गा नहीं। समझने वालों को भी समझाने में बड़ी मेहनत लगती है। रब कितना अच्छी तरह बच्चों को समझाते हैं। रब्बा लिखते हैं आलातरीन आदम अलैहिस्सलाम मुंह निस्बनामा मोमिन। तुम आला खिदमत करते हो तो यह प्राइज़ मिलती है। तुम रब के मददगार बनते हो तो सबको प्राइज़ मिलती है - नम्बरवार तजवीज़ के मुताबिक। तुम्हारे में भी बड़ी ताक़त है। तुम इन्सान को जन्नत का मालिक बना सकते हो। तुम रूहानी फौज हो। तुम यह बैज नहीं लगायेंगे तो इन्सान कैसे समझेंगे कि यह भी रूहानी मिलेट्री है। मिलेट्री वालों को हमेशा बैज लगा हुआ होता है। पाक परवरदिगार है नई दुनिया का खालिक। वहाँ इन हूरैन की सल्तनत थी, अब नहीं है। फिर रब फ़रमाते हैं दिल से मुझे याद करो। जिस्म के साथ तमाम रिश्ते छोड़ दिल से मुझे याद करो तो आदम अलैहिस्सलाम की डिनायस्टी में आ जायेंगे। इसमें लज्जा की तो बात ही नहीं। रब की याद रहेगी। रब इनके लिए भी बताते हैं यह नारायण की पूजा करते थे, नारायण की मूर्ति साथ में रहती थी। चलते फिरते उनको देखते थे। अभी तुम बच्चों को इल्म है, बैज तो ज़रूर लगा रहना चाहिए। तुम हो हज़रात को अफ़ज़ल हज़रात बनाने वाले। हक़ीक़ी इबादत भी तुम ही सिखलाते हो। हज़रात से अफ़ज़ल हज़रात बनाने की खिदमत करते हो। अपने को देखना है हमारे में कोई बुरी खस्लत तो नहीं है?

तुम बच्चे बाप-दादा के पास आते हो, बाप है पाक परवरदिगार, दादा है उनका जिस्म। बाप ज़रूर जिस्म के ज़रिए ही मिलेंगे ना। रब के पास आते हैं, रिफ्रेश होने। सामने बैठने से याद पड़ती है। रब्बा आया है ले जाने के लिए। रब सामने बैठे हैं तो जास्ती याद आनी चाहिए। अपनी याद के सफ़र को वहाँ भी तुम रोज़ बढ़ा सकते हो। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों के वास्ते मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी रब की रूहानी बच्चों को सलाम।

तरीक़त के वास्ते अहम निकात:-

1) अपने को देखना है कि हमारे में कोई बुरी खस्लत तो नहीं हैं! जैसे हूरैन मीठे हैं, ऐसा मीठा बना हूँ?

2) रब की अफ़ज़ल ते अफ़ज़ल सलाह पर चल अपनी दारूल हुकूमत क़ायम करनी है। खिदमतगार बनने के लिए खिल्क़त के आग़ाज़-दरम्यान-आख़िर का, हेविन और हेल का इल्म अक्ल में फिराना है।

बरक़ात:-
अफ़ज़ल जज़्बात की बुनियाद से तमाम को सुकून, कुव्वत की रोशनी देने वाले जहान फ़लाह नशीन बनो

जैसे रब के इरादा और बोल में, दीदों में हमेशा ही फ़लाह का जज़्बा और खुवाहिशात है ऐसे आप बच्चों के इरादो में जहान फ़लाह का जज़्बा और खुवाहिशात भरी हुई हो। कोई भी काम करते जहान की तमाम रूहें इमर्ज हों। मास्टर आफ़ताब ए इल्म बन नेक जज़्बात और अफ़ज़ल खुवाहिशात की बुनियाद से सुकून और कुव्वत की रोशनी देते रहो तब कहेंगे जहान फ़लाह नशीन। मगर इसके लिए तमाम बंदिशों से आज़ाद, खुदमुख्तार बनो।

स्लोगन:-
''मैं पन और मेरा पन'', यही जिस्मानी हवास का दरवाज़ा है। अब इस दरवाजे को बन्द करो।

आमीन