10-10-2020   नूरानी कलेमात


मीठे बच्चे
तुम जब किसी को भी समझाते हो या तक़रीर करते हो तो रब्बा-रब्बा कहकर समझाओ, रब की अज़मत करो तब तीर लगेगा

सवाल:-
रब्बा हिन्दुस्तान रिहाईश नशीन बच्चों से ख़ास कौन से सवाल पूछते हैं?

जवाब:-
तुम हिन्दुस्तान रिहाईश नशीन बच्चे जो इतने दौलत मन्द थे, तमाम फ़ज़ीलतों से लबरेज़ 16 फनों से आरास्ता मुकम्मल हूरैन दीन के थे, तुम पाकीज़ा थे, हवस कटारी नहीं चलाते थे, निहायत दौलत मन्द थे। फिर तुमने इतना देवाला कैसे निकाला है - सबब का मालूम है? बच्चे, तुम गुलाम कैसे बन गये? इतनी सब दौलत कहाँ गँवा दिया? ख्याल करो तुम पाकीज़ा से नापाक कैसे बन गये? तुम बच्चे भी ऐसी-ऐसी बातें रब्बा-रब्बा कह दूसरों को भी समझाओ - तो आसानी से समझ जायेंगे।

आमीन।
आमीन कहने से भी रब ज़रूर याद आना चाहिए। रब का पहला-पहला कहना है दिल से मुझे याद करो। ज़रूर आगे भी कहा है तब तो अभी भी कहते हैं ना। तुम बच्चे रब को जानते हो, जब कहाँ कान्फ्रेंस में तकरीर करने जाते हो, वो लोग तो रब को जानते नहीं। तो उनको भी ऐसा कहना चाहिए कि रबुल्आलमीन फ़रमाते हैं, वही नापाक से पाक बनाने वाले है। ज़रूर पाकीज़ा बनाने के लिए यहाँ आकर समझाते हैं। जैसे रब्बा यहाँ तुमको फ़रमाते हैं - ए बच्चों, तुमको जन्नत का मालिक बनाया था, तुम अल्ल्लाह् अव्वल हूर-हूरैन दीन वाले दुनिया के मालिक थे, वैसे तुमको भी बोलना चाहिए कि रब्बा यह फ़रमाते हैं। ऐसे कोई की तकरीर की ख़बर आयी नहीं है। पाक परवरदिगार फ़रमाते हैं मुझे आला ते आला मानते हो, नापाक से पाक बनाने वाला भी मानते हो, मैं आता भी हूँ हिन्दुस्तान में और हक़ीक़ी इबादत सिखलाने आता हूँ,कहता हूँ दिल से मुझे याद करो, मुझ आलातरीन रब को याद करो क्योंकि वह रब देने वाला दाता है। बरोबर हिन्दुस्तान में तुम दुनिया के मालिक थे ना। दूसरा कोई मज़हब नहीं था। रब हम बच्चों को समझाते हैं हम फिर आपको समझाते हैं। रब्बा फ़रमाते हैं तुम हिन्दुस्तान रिहाईश नशीन कितने दौलतमंद थे। तमाम फ़ज़ीलतों से लबरेज़ 16 फ़नों से आरास्ता मुकम्मल हूरैन दीन था, तुम पाकीज़ा थे, हवस कटारी नहीं चलाते थे। निहायत दौलत मन्द थे। फिर रब फ़रमाते हैं तुमने इतना देवाला कैसे निकाला है - सबब का मालूम है? तुम दुनिया के मालिक थे। अभी तुम दुनिया के गुलाम क्यों बने हो?तमाम से कर्जा लेते रहते हो। इतने सब पैसे कहाँ गये? जैसे रब्बा तक़रीर कर रहे हैं वैसे तुम भी तक़रीर करो तो निहायतों को कशिश हो। तुम लोग रब्बा को याद नहीं करते हो तो किसको तीर लगता नहीं। वह ताक़त नहीं मिलती। नहीं तो तुम्हारी एक ही तक़रीर ऐसी सुनें तो कमाल हो जाए। पाक परवरदिगार समझाते हैं अल्ल्लाह् ताला तो एक ही है। जो दु:ख दूर करने वाला ख़ुशी देने वाला है, नई दुनिया क़ायम करने वाला है। इसी हिन्दुस्तान पर जन्नत थी। हीरे-जवाहरातों के महल थे, एक ही सल्तनत थी। तमाम शगुफ्ता थे। जैसे रब की अज़मत बेशुमार है, वैसे हिन्दुस्तान की अज़मत भी बेशुमार है। हिन्दुस्तान की अज़मत सुनकर ख़ुश होंगे। रब बच्चों से पूछते हैं - इतनी दौलत कहाँ गँवा दिया? अकीदत मन्दी की राह में तुम कितना खर्चा करते आये हो। कितने मन्दिर बनाते हो। रब्बा फ़रमाते हैं ख्याल करो - तुम पाकीज़ा से नापाक कैसे बने हो? कहते भी हो ना - रब्बा दु:ख में आपको याद करते हैं, ख़ुशी में नहीं करते। मगर दु:खी तुमको बनाता कौन है? घड़ी-घड़ी रब्बा का नाम लेते रहो। तुम रब्बा का पैगाम देते हो। रब्बा फ़रमाते हैं - हमने तो जन्नत, क़ायम किया, जन्नत में इन अफ़ज़ल ख्वातीन अफ़ज़ल हज़रात की सल्तनत थी ना। तुम यह भी भूल गये हो। तुमको यह भी मालूम नहीं है कि राधे-कृष्ण ही स्वयंवर के बाद लक्ष्मी-नारायण बनते हैं। कृष्ण जो दुनिया का मालिक था, उनको तोहमत बैठ लगाते हो, मेरे को भी तोहमत लगाते हो। मैं तुम्हारा ख़ैर निजात दिलाने वाला, तुम मुझे कुत्ते बिल्ली, कण-कण में कह देते हो। रब्बा फ़रमाते हैं तुम कितने नापाक बन गये हो। रब फ़रमाते हैं तमाम का ख़ैर निजात दिलाने वाला, नापाक से पाक बनाने वाला मैं हूँ। तुम फिर नापाक से पाक बनाने वाली गंगा कह देते हो। मेरे से राब्ता न लगाने से तुम और ही नापाक बन पड़ते हो। मुझे याद करो तो तुम्हारे गुनाहों का ख़ात्मा होंगा। घड़ी-घड़ी रब्बा का नाम लेकर समझाओ तो पाक परवरदिगार याद रहेगा। बोलो, हम रब की अज़मत करते हैं, रब खुद फ़रमाते हैं मैं कैसे सादे नापाक जिस्म में निहायत विलादतों के अाखिर में आता हूँ। इनके ही निहायत विलादत हैं। यह अब मेरा बना है तो इस गाड़ी के ज़रिए तुमको समझाता हूँ। यह अपनी विलादतों को नहीं जानते हैं। क़िस्मत नशीन गाड़ी यह है, इनकी भी बुज़ुर्ग हालत में मैं आता हूँ। पाक परवरदिगार ऐसा समझाते हैं। ऐसी तक़रीर किसकी सुनी नहीं है। रब्बा का तो नाम ही नहीं लेते हैं। तमाम दिन रब्बा को तो बिल्कुल याद ही नहीं करते हैं। झरमुई झगमुई में लगे रहते हैं और लिखते हैं कि हमने ऐसी तक़रीर की, हमने यह समझाया। रब्बा समझते हैं कि अभी तो तुम चीटिंया हो। मकोड़े भी नहीं बने हो और तकब्बुर कितना रहता है। समझते नहीं हैं कि पाक परवरदिगार आदम अलैहिस्सलाम के ज़रिए फ़रमाते हैं। पाक परवरदिगार को तुम भूल जाते हो। आदम अलैहिस्सलाम पर झट बिगड़ते हैं। रब फ़रमाते हैं - तुम मुझे ही याद करो, तुम्हारा काम है मेरे से। मुझे याद करते हो ना। मगर तुमको भी मालूम नहीं है कि रब क्या चीज़ है, कब आते हैं। हादी लोग तुमको कहते हैं कि कल्प लाखों साल का है और रब फ़रमाते हैं कि कल्प है ही 5 हज़ार साल का। पुरानी दुनिया सो फिर नई होगी। नई सो फिर पुरानी होती है। अब नई देहली है कहाँ? देहली तो जब परिस्तान होगी तब नई देहली कहेंगे। नई दुनिया में नई देहली थी, जमुना घाट पर। उन पर आदम अलैहिस्सलाम और हव्वा अलैहिस्सलाम के महल थे। परिस्तान था। अभी तो कब्रिस्तान होना है, तमाम दफन हो जाने हैं इसलिए रब फ़रमाते हैं - मुझ आला ते आला रब को याद करो तो पाकीज़ा बनेंगे। हमेशा ऐसे रब्बा-रब्बा कहकर समझाओ। रब्बा नाम नहीं लेते हो इसलिए तुम्हारा कोई सुनते नहीं हैं। रब्बा की याद न होने से तुम्हारे में जौहर नहीं भरता। जिस्मानी हवास में तुम आ जाते हो। बांधेलियां जो मार खाती हैं वह तुमसे जास्ती याद में रहती हैं, कितना पुकारती हैं। रब फ़रमाते हैं तुम सब द्रोपदियां हो ना। अब तुमको नंगन होने से बचाते हैं। मातायें भी ऐसी कोई होती हैं जिनको कल्प पहले भी पूतना वगैरह नाम दिये थे। तुम भूल गये हो।
रब फ़रमाते हैं हिन्दुस्तान जब दारूल इलाही था तो उसे जन्नत कहा जाता था। यहाँ फिर जिनके पास मकान, एरोप्लेन वगैरह हैं वह समझते हैं हम जन्नत में हैं। कितने बेवकूफ हैं। हर बात में बोलो रब्बा फ़रमाते हैं। यह हठयोगी तुमको निजात थोड़े ही दे सकते हैं। जबकि तमाम का ख़ैर निजात देने वाला एक है फिर हादी किसलिए करते हो? क्या तुमको राहिब बनना है या हठयोग सीखकर ब्रह्म में लीन होना है? लीन तो कोई हो नहीं सकता। पार्ट सबको बजाना है। सब एक्टर्स ला फ़ानी हैं। यह अबदी ड्रामा है, मोक्ष किसको मिल कैसे सकता है। रब फ़रमाते हैं मैं इन राहिबों का भी फ़लाह करने आता हूँ। फिर नापाक से पाक बनाने वाली गंगा कैसे हो सकती। नापाक से पाक बनाने वाला तुम मुझे कहते हो ना। तुम्हारा मेरे से राब्ता टूटने से यह हाल हुआ है। अब फिर मेरे से राब्ता लगाओ तो गुनाह ख़ाक़ होंगे। दारूल निजात में पाकीज़ा रूहें रहती हैं। अभी तो तमाम दुनिया नापाक है। पाकीज़ा दुनिया का तुमको मालूम ही नहीं है। तुम तमाम नाकाबिल हो, काबिल ए एहतराम एक भी नहीं। तुम रब्बा का नाम लेकर सबको बेदार कर सकते हो। रब जो दुनिया का मालिक बनाते हैं - उनकी तुम तौहीन बैठ करते हो। श्रीकृष्ण छोटा बच्चा, सर्वगुण सम्पन्न वह ऐसा कारोबार कैसे बैठ करेगा। और कृष्ण सबका फादर हो कैसे सकता। अल्ल्लाह् ताला तो एक होता है ना। जब तक मेरी सिरात ए मुस्तकीम पर नहीं चलेंगे तो कट कैसे उतरेगी। तुम सबकी इबादत करते रहते हो तो क्या हालत हो गई, इसलिये फिर मुझे आना पड़ता है। तुम कितने धर्म कर्म भ्रष्ट हो गये हो। बताओ हिन्दू मज़हब किसने कब क़ायम किया? ऐसे अच्छी ललकार से तकरीर करो। तुमको घड़ी-घड़ी रब याद ही नहीं आता है। कभी-कभी कोई लिखते हैं कि हमारे में तो जैसे रब्बा ने आकर तक़रीर किया। रब्बा निहायत मदद करते रहते हैं। तुम याद के सफ़र में नहीं रहते हो इसलिए चींटी राह की खिदमत करते हो। रब्बा का नाम लेंगे तब ही किसको तीर लगेगा। रब्बा समझाते हैं बच्चे तुमने ही आलराउन्ड 84 का चक्कर लगाया है तो तुमको ही आकर समझाना पड़े। मैं हिन्दुस्तान में ही आता हूँ। जो काबिल ए एहतराम थे वह नाकाबिल बनते हैं। मैं तो काबिल ए एहतराम नाकाबिल नहीं बनता हूँ।
रब्बा फ़रमाते हैं, रब्बा फ़रमाते हैं'', यह तो धुन लगा देनी चाहिए। तुम जब ऐसे-ऐसे तक़रीर करो, जब ऐसा हम सुनें तब समझें कि अब तुम चींटी से मकोड़े बने हो। रब फ़रमाते हैं मैं तुमको तालीम देता हूँ, तुम सिर्फ़ दिल से मुझे याद करो। इस गाड़ी के ज़रिए तुमको सिर्फ़ कहता हूँ कि मुझे याद करो। गाड़ी को थोड़े ही याद करना है। रब्बा ऐसे फ़रमाते हैं, रब्बा यह समझाते हैं, ऐसे-ऐसे तुम बोलो फिर देखो तुम्हारा कितना असर निकलता है। रब फ़रमाते हैं जिस्म के साथ तमाम रिश्तों से अक्ल का राब्ता तोड़ो। अपनी जिस्म भी छोड़ा तो बाक़ी रही रूह। अपने को रूह समझ मुझ रब को याद करो। कई कहते हैं अहम् ब्रह्मस्मि'' इबलीस के हम मालिक हैं। रब फ़रमाते हैं तुम यह भी नहीं जानते कि इबलीस किसको कहा जाता और दौलत किसको कहा जाता है! तुम दौलत को माया कह देते हो। ऐसे-ऐसे तुम समझा सकते हो। निहायत अच्छे-अच्छे बच्चे नूरानी कलेमात भी नहीं पढ़ते हैं। रब को याद नहीं करते तो तीर नहीं लगता क्योंकि याद की कूव्वत नहीं मिलती है। कुव्वत मिलती है याद से। जिस कुव्वत ए इबादत से तुम दुनिया के मालिक बनते हो। बच्चे हर बात में रब्बा का नाम लेते रहो तो कभी कोई कुछ कह न सके। तमाम का अल्ल्लाह् ताला बाप तो एक है या तमाम अल्ल्लाह् ताला हैं? कहते हैं हम फलाने राहिब के फालोअर्स हैं। अब वह राहिब और तुम घरेलू राब्ते वाले तो तुम फालोअर्स कैसे ठहरे? गाते भी हैं झूठी माया, झूठी काया, झूठा सब संसार। सच्चा तो एक ही रब है। वह जब तक न आये तो हम सच्चे नहीं बन सकते हैं। निजात-ज़िनदगी ए निजात देने वाला एक ही है। बाक़ी कोई भी निजात थोड़े ही देते हैं जो हम उनके बनें। रब्बा फ़रमाते हैं यह भी ड्रामा में था। अब चौकस हो आंखें खोलो। रब्बा ऐसे फ़रमाते हैं, यह कहने से तुम छूट जायेंगे। तुम्हारे ऊपर कोई बकवास नहीं करेंगे। तीन मुजस्सम पाक परवरदिगार कहना है, सिर्फ़ पाक परवरदिगार नहीं। तीन मुजस्सम को किसने तामीर किया? जिब्राइल अलैहिस्सलाम के ज़रिए क़याम कौन कराते हैं? क्या जिब्राइल अलैहिस्सलाम क्रियेटर हैं? ऐसे-ऐसे नशे से बोलो तब काम कर सकते हो। नहीं तो जिस्मानी हवास में बैठ तक़रीर करते हैं।
रब समझाते हैं यह कई मज़हबों का कल्प दरख्त है। पहले-पहले है हूर-हूरैन मज़हब। अब वह हूरैन मज़हब कहाँ गया? लाखों साल कह देते हैं यह तो 5 हज़ार साल की बात है। तुम मन्दिर भी उन्हों के बनाते रहते हो। दिखाते हैं पाण्डवों और कौरवों की लड़ाई लगी। पाण्डव पहाड़ों पर गल मरे फिर क्या हुआ? मैं कैसे तशदिद करुँगा। मैं तो तुमको इद्दम तशदिद ग़ैर ख़बासती बनाता हूँ। हवस कटारी न चलाना, उसको ही ग़ैर ख़बासती कहते हैं। वह हैं ग़ैर ख़बासती का खानदान। अच्छा!
मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों के वास्ते मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी रब की रूहानी बच्चों को सलाम।

तरीक़त के वास्ते अहम निकात:-
1. खिदमत में कामयाबी हासिल करने के लिए तकब्बुर को छोड़ हर बात में रब्बा का नाम लेना है। याद में रहकर खिदमत करनी है। झरमुई-झगमुई में अपना टाइम वेस्ट नहीं करना है।

2. सच्चा-सच्चा ग़ैर ख़बासती बनना है। कोई भी तशदिद नहीं करनी है। जिस्म के साथ तमाम रिश्तों से अक्ल का राब्ता तोड़ देना है।

बरक़ात:-
दुनिया के फ़लाह के काम में हमेशा बिज़ी रहने वाले दुनिया के बुनियादी रूप बनो।

दुनिया फ़लाह नशीन बच्चे सपने में भी फ्री नहीं रह सकते। जो दिन रात खिदमत में बिज़ी रहते हैं उन्हें सपने में भी कई नई-नई बातें, खिदमत के प्लैन और तरीके दिखाई देते हैं। वे खिदमत में बिज़ी होने के सबब अपनी तजवीज़ के फ़ालतू से और औरों के भी फ़ालतू से बचे रहते हैं। उनके सामने बेहद दुनिया की रूहें हमेशा इमर्ज रहती हैं। उन्हें ज़रा भी अलबेलापन आ नहीं सकता। ऐसे खिदमतगार बच्चों को बुनियादी रूप बनने की बरक़ात हासिल हो जाती है।

स्लोगन:-
मिलन के दौर का एक-एक सेकण्ड सालों के बराबर है इसलिए अलबेलेपन में वक़्त नहीं गंवाओ।

आमीन