18-10-2020 ग़ैबी नूरानी कलेमात रिवाइज:07-04-86


इबादत याफ़्ता, कुर्बानी याफ़्ता, खालिक़ ही दुनिया की सल्तनत के हक़दार

आज रूहानी शमा अपने रूहानी परवानों को देख रहे हैं। तमाम रूहानी परवाने शमा से मिलन मनाने के लिए चारों ओर से पहुंच गये हैं। रूहानी परवानों का प्यार रूहानी शमा जाने और रूहानी परवाने जाने। रब उल हक़ जानते हैं कि तमाम बच्चों के दिल का प्यार कशिश कर इस रूहानी मेले में तमाम को लाया है। यह रूहानी मेला रूहानी बच्चे जानें और रब जाने! दुनिया के लिए यह मेला बातिन है। अगर किसी को कहो रूहानी मेले में जा रहे हैं तो वह क्या समझेंगे? यह मेला हमेशा के लिए मालामाल बनाने का मेला है। यह इलाही-मेला तमाम दस्तयाबी खुद का रूप बनाने वाला है। रब उल हक़ तमाम बच्चों के दिल के जोश-उल्लास को देख रहे हैं। हर एक के ज़हन में प्यार के समन्दर की लहरें लहरा रही हैं। यह रब उल हक़ देख भी रहे हैं और जानते भी हैं कि लगन ने मुश्किल कुशा बनाए मधुबन रिहाईश नशीन बना लिया है। तमाम की तमाम बातें प्यार में ख़त्म हो गई। एवररेडी की रिहर्सल कर दिखाई। एवररेडी हो गये हो ना। यह भी स्वीट ड्रामा का स्वीट पार्ट देख रब उल हक़ और मोमिन बच्चे खुशगवार हो रहे हैं। प्यार के पीछे तमाम बातें आसान भी लगती हैं और प्यारी भी लगती। जो ड्रामा बना वह ड्रामा वाह! कितनी बार ऐसे दौड़े-दौड़े आये हैं। ट्रेन में आये हैं या पंखों से उड़ के आये हैं? इसको कहा जाता है जहाँ दिल है वहाँ नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है। प्यार का खुद का रूप तो दिखाया, अब आगे क्या करना है? जो अब तक हुआ वह अफ़ज़ल है और अफ़ज़ल रहेगा।
अब वक़्त के मुताबिक तमाम प्यारे, तमाम अफ़ज़ल बच्चों से रब उल हक़ और ख़ास क्या चाहते हैं? वैसे तो पूरी सीजन में वक़्त दर वक़्त इशारे देते हैं। अब उन इशारों को ज़ाहिर रूप में देखने का वक़्त आ रहा है। प्यारी रूहें हो मददगार रूहें हो, खिदमतगार रूहें भी हो। अभी इबादत नशीन रूहें बनो। अपने तनज़ीम खुद के रूप की इबादत की रूहानी आग से तमाम रूहों को दु:ख बैचेनी से आज़ाद करने का अज़ीम काम अन्जाम देने का वक़्त है। जैसे एक तरफ़ खूने-नाहक खेल की लहर बढ़ती जा रही है, तमाम रूहें अपने को बेसहारा एहसास कर रहीं हैं, ऐसे वक़्त पर तमाम सहारे का एहसास कराने के ज़रिया आप अज़ीम इबादत नशीन रूहे हो। चारों ओर इस इबादत नशीन खुद के रूप के ज़रिए रूहों को रूहानी चैन का एहसास कराना है। तमाम दुनिया की रूहें कुदरत से, माहौल से, इन्सानी रूहों से, अपने ज़हन की कमज़ोरियों से, जिस्म से बेचैन हैं। ऐसी रूहों को सुख-चैन की सूरत ए हाल का एक सेकेण्ड भी एहसास करायेंगे तो आपका दिल से बार-बार शुक्रिया मानेंगे। मौजूदा वक़्त तनज़ीम रूप की आग खुद के रूप की ज़रूरत है। अभी खालिक के बच्चे खालिक खुद के रूप में वाक़ेअ रह दरेक वक़्त देते जाओ। मुसलसल अज़ीम लंगर लगाओ क्योंकि रॉयल भिखारी निहायत हैं। सिर्फ़ दौलत के भिखारी, भिखारी नहीं होते मगर ज़हन के भिखारी कई तरह के हैं। ग़ैर दस्तयाब रूहें दस्तयाबी की बूँद की प्यासी निहायत हैं इसलिए अभी तनज़ीम में खालिकपन की लहर फैलाओ। जो खजाने जमा किये हैं वह जितना मास्टर खालिक बन देते जायेंगे उतना भरता जायेगा। कितना सुना है। अभी करने का वक़्त है। इबादत याफ़्ता का मतलब है - इबादत के ज़रिए सुकून की, कुव्वत की रोशनी चारों ओर फैलती हुई एहसास में आवें। सिर्फ़ खुद के वास्ते याद खुद का रूप बन कुव्वत लेना और मिलन मनाना वह अलग बात है। मगर इबादत याफ्ता औरों को देने का खुद का रूप है। जैसे सूरज दुनिया को रोशनी की और कई फ़ानी दस्तयाबियों का एहसास कराता है। ऐसे अज़ीम इबादत याफ़्ता रूप के ज़रिए दस्तयाबियों के किरणों का एहसास कराओ। इसके लिए पहले जमा का खाता बढ़ाओ। ऐसे नहीं याद से और इल्म के ग़ौर तलब से खुद को अफ़ज़ल बनाया, इबलीस फ़तहयाब बनाया, इसी में सिर्फ़ ख़ुश नहीं रहना। मगर तमाम खजानों में सारे दिन में कितनों के वास्ते खालिक बनें। तमाम खजाने दर रोज काम में लगाये या सिर्फ़ जमा को देख ख़ुश हो रहे हैं। अभी यह चार्ट रखो कि ख़ुशी का खज़ाना, सुकून का खज़ाना, कुव्वतों का खज़ाना, इल्म का खज़ाना, फ़ज़ीलतों का खज़ाना, इमदाद देने का खज़ाना कितना बांटा यानि कि कितना बढ़ाया, इससे वह काॅमन चार्ट जो रखते हो वह अपने आप ही अफ़ज़ल हो जायेगा। दूसरों पर रहमत नशीन बनने से खुद पर रहमत नशीन अपने आप ही बन जाते। समझा - अभी कौन-सा चार्ट रखना है? यह इबादत याफ़्ता का चार्ट है - जहान फ़लाह नशीन बनना। तो कितनों का फ़लाह किया? और खुद के फ़लाह में ही वक्त जा रहा है? खुद के फ़लाह करने का वक़्त निहायत बीत चुका। अभी खालिक बनने का वक़्त आ गया है इसलिए रब उल हक़ फिर से वक़्त का इशारा दे रहे हैं। अगर अब तक भी खालिकपन की सूरत ए हाल का एहसास नहीं किया तो कई विलादत दुनिया की सल्तनत के हकदार बनने के पद्मापदम क़िस्मत को हासिल नहीं कर सकेंगे, क्योंकि मलिक ए आज़म दुनिया के मां बाप यानि कि खालिक हैं। अब के खालिकपन की आदत कई विलादत दस्तयाबी कराती रहेगी, अगर अभी तक लेने की आदत, कोई भी रूप में हैं। शोहरत लेवता, शान लेवता और किसी भी तरह के लेवता की आदत खालिक नहीं बनायेंगी।
इबादत याफ़्ता यानि कि लेवता के कुर्बान याफ़्ता। यह हद के लेवता, कुर्बान याफ़्ता, इबादत याफ़्ता बनने नहीं देगा इसलिए इबादत याफ़्ता यानि कि हद के खुवाहिशात से ना वाक़िफ रूप। जो लेने का इरादा करता वह कलील अरसे के लिए लेता है मगर हमेशा के लिए गंवाता है इसलिए रब उल हक़ बार-बार इस बात का इशारा दे रहे हैं। इबादत याफ़्ता रूप में ख़ास मुश्किल रूप यही कलील अरसे की खुवाहिशात है इसलिए अभी ख़ास इबादत की प्रेक्टिस करनी है। बराबर बनने का यह सबूत देना है। प्यार का सबूत दिया यह तो ख़ुशी की बात है। अभी इबादत याफ़्ता बनने का सबूत दो। समझा। वैराइटी आदत होते हुए भी खालिक-पन की आदत बाक़ी आदतों को दबा देंगी। तो अब इस आदत को इमर्ज करो। समझा। जैसे मधुबन में भाग कर पहुँच गये हो ऐसे इबादत याफ़्ता सूरत ए हाल की मंजिल तरफ़ भागो। अच्छा- भले पधारे। तमाम ऐसे भागे हैं जैसे कि अभी तबाही होनी है। जो भी किया, जो भी हुआ रब उल हक़ को प्यारे है, क्योंकि बच्चे प्यारे हैं। हर एक ने यही सोचा है कि हम जा रहे हैं। लेकिन दूसरे भी आ रहे हैं, यह नहीं सोचा। सच्चा कुम्भ मेला तो यहाँ लग गया है। तमाम आखिरी मिलन, आखिरी टुब्बी देने आये हैं। यह सोचा कि इतने सब जा रहे हैं तो मिलने की तरीक़त कैसी होगी! इस सुध-बुध से भी न्यारे हो गये! न मुकाम देखा, न रिज़र्वेशन को देखा। अभी कभी भी यह बहाना नहीं दे सकेंगे कि रिज़र्वेशन नहीं मिलती। ड्रामा में यह भी एक रिहर्सल हो गई। मिलन के दौर पर अपनी सल्तनत नहीं है। खुद की सल्तनत है मगर सरज़मी की सल्तनत तो नहीं है, न रब उल हक़ को खुद की गाड़ी है, परायी सल्तनत, पराया जिस्म है इसलिए वक़्त के मुताबिक नई तरीक़त की शुरुआत करने के लिए यह सीज़न हो गई। यहाँ तो पानी का भी सोचते रहते, वहाँ तो झरनों में नहायेंगे। जो भी जितने भी आये हैं, रब उल हक़ प्यार के रेसपाण्ड में प्यार से इस्तिकबाल करते हैं।
अभी वक्त दिया है ख़ास फाइनल इम्तहान के पहले तैयारी करने के लिए। फाइनल पेपर के पहले टाइम देते हैं। छुट्टी देते हैं ना। तो रब उल हक़ कई राज़ों से यह ख़ास वक़्त दे रहे हैं। कुछ राज़ बातिन हैं कुछ राज़ ज़ाहिर हैं। मगर ख़ास हर एक इतना अटेन्शन रखना कि हमेशा बिन्दू लगाना है यानि कि बीती को बीती करने का बिन्दू लगाना है। और बिन्दू सूरत ए हाल में वाकेअ हो सल्तनत के हक़दार बन काम करना है। तमाम खज़ानों के बिन्दु तमाम के वास्ते खालिक बन सिन्धु बन तमाम को लबरेज़ बनाना है। तो बिन्दू और सिन्धु यह दो बातें ख़ास याददाश्त में रख अफ़ज़ल सर्टीफिकेट लेना है। हमेशा ही अफ़ज़ल इरादें की कामयाबी से आगे बढ़ते रहना। तो बिन्दु बनना, सिन्धु बनना यही तमाम बच्चों के वास्ते बरक़ात देने वाले की बरक़ात है। बरक़ात लेने के लिए भागे हो ना। यही बरक़ात देने वाले की बरक़ात हमेशा याददाश्त में रखना। अच्छा!
चारों ओर के तमाम प्यारे, मददगार बच्चों को हमेशा रब की इजाज़त की परवरिश करने वाले फरमाबरदार बच्चों को, हमेशा फ्राकदिल, बड़ी दिल से तमाम को तमाम खज़ाने बांटने वाले, अज़ीम सवाबी बच्चों को, हमेशा रब जैसा बनने के जोश और हुल्लास से उड़ते फ़न में उड़ने वाले बच्चों को खालिस, बरक़ात देने वाले तमाम खज़ानों के सिन्धु रब उल हक़ का यादप्यार और सलाम।
ग़ैबी रब उल हक़ के साथ पार्टियों की मुलाक़ात
1- अपने को पदमापदम क़िस्मत नशीन एहसास करते हो! क्योंकि देने वाला रब इतना देता है जो एक विलादत तो क़िस्मत नशीन बनते ही हो मगर कई विलादत तक यह ला फ़ानी क़िस्मत चलती रहेगी। ऐसी ला फ़ानी क़िस्मत कभी सपने में भी सोची थी! नामुमकिन लगता था ना? मगर आज मुमकिन हो गया। तो ऐसी अफ़ज़ल रूहें हैं - यह ख़ुशी रहती है? कभी किसी भी हालत में ख़ुशी गायब तो नहीं होती! क्योंकि रब के ज़रियें ख़ुशी का खज़ाना रोज़ मिलता रहता है, तो जो चीज़ रोज़ मिलती है वह बढ़ेगी ना। कभी भी ख़ुशी कम हो नहीं सकती क्योंकि खुशियों के समन्दर के ज़रिए मिलती ही रहती है, अखुट है। कभी भी किसी बात के फिकर में रहने वाले नहीं। प्रापर्टी का क्या होगा, फैमिली का क्या होगा? यह भी फ़िक्र नहीं, बेफिक्र! पुरानी दुनिया का क्या होगा! तब्दील ही होगी ना। पुरानी दुनिया में कितना भी अफ़ज़ल हो मगर सब पुराना ही है इसलिए बेफिक्र बन गये। मालूम नहीं आज हैं कल रहेंगे, नहीं रहेंगे - यह भी फ़िक्र नहीं। जो होगा अच्छा होगा। मोमिनों के लिए सब अच्छा है। बुरा कुछ नहीं। आप तो पहले ही बादशाह हो, अभी भी बादशाह, मुस्तकबिल में भी बादशाह। जब हमेशा के बादशाह बन गये तो बेफिक्र हो गये। ऐसी बादशाही जो कोई छीन नहीं सकता। कोई बन्दूक से बादशाही उड़ा नहीं सकता। यही ख़ुशी हमेशा रहे और औरों को भी देते जाओ। औरों को भी बेफिक्र बादशाह बनाओ। अच्छा!
2. हमेशा अपने को रब की याद की हिफ़ाज़त में रहने वाली अफ़ज़ल रूहें एहसास करते हो? यह याद की हिफ़ाज़त तमाम मुश्किलात से सेफ कर देती है। किसी भी तरह की मुश्किल हिफ़ाज़त में रहने वाले के पास आ नहीं सकती। हिफ़ाज़त में रहने वाले यक़ीनन फ़तहयाब हैं ही। तो ऐसे बने हो? हिफ़ाज़त से अगर इरादा रूपी पैर भी निकाला तो इबलीस वार कर लेगा। किसी भी तरह के हालात आवे हिफ़ाज़त में रहने वाले के लिए मुश्किल से मुश्किल बात भी आसान हो जायेगी। पहाड़ जैसी बातें रूई के जैसी एहसास होंगी। ऐसी हिफ़ाज़त की कमाल है। जब ऐसी हिफ़ाज़त मिले तो क्या करना चाहिए। चाहे क़लील अरसे की कोई भी कशिश हो मगर बाहर निकला तो गया इसलिए कलील अरसे की कशिश को भी जान गये हो। इस कशिश से हमेशा दूर रहना। हद की दस्तयाबी तो इस एक विलादत में ख़त्म हो जायेगी। बेहद की दस्तयाबी हमेशा साथ रहेगी। तो बेहद की दस्तयाबी करने वाले हिफ़ाज़त में रहने वाली ख़ास रूहें हैं, सादा नहीं। यह याददाश्त हमेशा के लिए कुव्वत नशीन बना देगी।
जो सिकीलधे लाडले होते हैं वह हमेशा हिफ़ाज़त के अन्दर रहते हैं। याद ही हिफ़ाज़त है। इस हिफ़ाज़त से इरादा रूपी पैर भी बाहर निकाला तो इबलीस आ जायेगा। यह हिफ़ाज़त इबलीस को सामने नहीं आने देती। इबलीस की ताक़त नहीं है - हिफ़ाज़त में आने की। वह हमेशा इबलीस पर फ़तहयाब बन जाते हैं। बच्चा बनना यानि कि हिफ़ाज़त में रहना। यह भी रब का प्यार है जो हमेशा बच्चों को हिफ़ाज़त में रखते हैं। तो यही ख़ास बरक़ात याद रखना कि लाडले बन गये, हिफ़ाज़त मिल गई। यह बरक़ात हमेशा आगे बढ़ाती रहेगी।
विदाई के वक़्त
तमाम ने जागरण किया! आपके अक़ीदत मन्द जागरण करते हैं तो अकीदत मन्दों को सिखाने वाले तो पसंदीदा हूरैन ही होते हैं, जब यहाँ पसंदीदा हूरैन जागरण करें तब अकीदत मन्द कॉपी करें। तो तमाम ने जागरण किया यानि कि अपने खाते में कमाई जमा की। तो आज की रात कमाने की सीज़न की रात हो गई। जैसे कमाई की सीज़न होती है तो सीज़न में जागना ही होता है। तो यह कमाई की सीज़न है इसलिए जागना यानि कि कमाना। तो हरेक ने अपनी-अपनी जितनी कुव्वत उतना जमा किया और यही जमा किया हुआ अज़ीम सदक़ा नशीन बन औरों को भी देते रहेंगे और खुद भी कई विलादत खाते रहेंगे। अभी तमाम बच्चों को इलाही मेले के गोल्डन चांस की गोल्डन मार्निंग कर रहे हैं। वैसे तो गोल्डन से भी डायमण्ड मार्निंग है। खुद भी डायमण्ड हो और मार्निंग भी डायमण्ड है और जमा भी डायमण्ड ही करते हो तो तमाम डायमण्ड ही डायमण्ड है इसलिए डायमण्ड मार्निंग कर रहे हैं। अच्छा।

बरक़ात:-
इरादे को भी चेक कर फ़ालतू के खाते को ख़त्म करने वाले अफ़ज़ल खिदमतगार बनो

अफ़ज़ल खिदमतगार वह है जिसका दरेक इरादा पाॅवरफुल हो। एक भी इरादा कहाँ भी फ़ालतू न जाए क्योंकि खिदमतगार यानि कि दुनिया की स्टेज पर एक्ट करने वाले। तमाम दुनिया आपको कॉपी करती है, यदि आपने एक इरादा फ़ालतू किया तो सिर्फ़ अपने वास्ते नहीं किया मगर कईयों के ज़रिया बन गये, इसलिए अब फ़ालतू के खाते को ख़त्म कर अफ़ज़ल खिदमतगार बनो।

स्लोगन:-
खिदमत के माहौल के साथ बेहद की बेनियाज़ी कैफियत का माहौल बनाओ।


पैगाम- आज महीने का तीसरा रविवार है, तमाम हक़ीक़ी इबादत नशीन भाई बहिनें सायं 6.30 से 7.30 बजे तक, ख़ास इबादत की प्रेक्टिस के वक़्त मास्टर तमाम कुव्वत नशीन के कुव्वत नशीनी खुद के रूप में वाक़ेअ हो कुदरत के साथ तमाम रूहों को पाकीज़गी की किरणें दें, सातों फ़ज़ीलतों से लबरेज़ बनाने की खिदमत करें।

आमीन