19-10-2020   नूरानी कलेमात


मीठे बच्चे
तुम्हें अभी बहुत-बहुत सादा रहना है, फैशनेबुल ऊंचे कपड़े पहनने से भी जिस्मानी हवास आता है

सवाल:-
तक़दीर में आला मर्तबा नहीं है तो किस बात में बच्चे सुस्ती करते हैं?

जवाब:-
रब्बा फ़रमाते बच्चे अपना सुधार करने के लिए चार्ट रखो। याद का चार्ट रखने में निहायत फ़ायदा है। नोट बुक हमेशा हाथ में हो। चेक करो कितना वक़्त रब को याद किया? हमारा रजिस्टर कैसा है? हूरैन कैरेक्टर है? आमाल करते रब्बा की याद रहती है? याद से ही कट उतरेगी, आला तक़दीर बनेगी।

नग़मा:-
भोलेनाथ से निराला........

आमीन।
मीठे-मीठे बच्चों पास यह अफ़ज़ल ख्वातीन अफ़ज़ल हज़रात की तस्वीर घर में ज़रूर होनी चाहिए। इनको (अफ़ज़ल ख्वातीन अफ़ज़ल हज़रात को) देख निहायत ख़ुशी होनी चाहिए क्योंकि तुम्हारा यह है तालीम का एम ऑब्जेक्ट। तुम जानते हो हम स्टूडेन्ट हैं और अल्ल्लाह् ताला पढ़ाते हैं। इलाही स्टूडेन्ट और तालिब इल्म हैं, हम यह पढ़ते हैं। सबके लिए यह एक ही मकसद है। इनको देखते निहायत ख़ुशी होनी चाहिए। नग़मा भी बच्चों ने सुना। निहायत भोला-नाथ है। कोई-कोई शंकर को भोलानाथ समझते हैं फिर शिव और शंकर को मिला देते हैं। अभी तुम जानते हो वो शिव आला से आला अल्ल्लाह् ताला और शंकर हूरैन फिर दोनों एक कैसे हो सकते हैं। यह भी नग़में में सुना कि अकीदत मन्दों की हिफ़ाज़त करने वाले, ज़रूर अकीदत मन्दों पर कोई आफतें हैं। 5 खबासतों की आफतें सबके ऊपर हैं। अकीदत मन्द भी तमाम हैं। इल्मी किसको नहीं कहा जा सकता। इल्म और अकीदत मन्दी बिल्कुल अलग चीज़ है। जैसे शिव और शंकर अलग हैं। जब इल्म मिलता है तो फिर अकीदत मन्दी नहीं रहती। तुम दारूल मसर्रत के मालिक बनते हो। आधाकल्प के लिए खैर निजात मिल जाती है। एक ही इशारे से तुम आधाकल्प का वर्सा पा लेते हो। देखते हो अकीदत मन्दों के ऊपर कितनी तकलीफ़ है। इल्म से तुम हूरैन बन जाते हो फिर जब अकीदत मन्दों पर भीड़ होती है यानि कि दु:ख होता है तब रब आते हैं। रब समझाते हैं ड्रामा के मुताबिक जो पास्ट हुआ सो फिर रिपीट होना है। फिर अकीदत मन्दी शुरू होती है तो उलटी राह शुरू होती है यानि कि नापाक बनने की राह। उसमें भी नम्बरवन है हवस, जिसके लिए ही कहा जाता है हवस पर फ़तह पाने से तुम जहान फ़तहयाब बनेंगे। वह कोई फ़तह थोड़े ही पाते हैं। शैतानी सल्तनत में ख़बासत के बिगर तो कोई का भी जिस्म पैदा नहीं होता, सुनहरे दौर में शैतानी सल्तनत होती नहीं। वहाँ भी अगर शैतान होता तो बाक़ी अल्ल्लाह् ताला ने इलाही सल्तनत क़ायम करके क्या किया? रब को कितना ओना रहता है। हमारे बच्चे खुशहाल रहें। दौलत इकट्ठा करके बच्चों को दे देते हैं कि खुशहाल रहें। मगर यहाँ तो ऐसे हो नहीं सकता। यह है ही दु:ख की दुनिया। यह बेहद का रब फ़रमाते हैं तुम वहाँ विलादत दर विलादत ख़ुशी भोगते आयेंगे। बेशुमार दौलत मिल जाती है, 21 विलादत वहाँ कोई दु:ख नहीं होगा। देवाला नहीं मारेंगे। यह बातें अक्ल में इख्तियार कर अन्दरूनी बड़ी ख़ुशी रहनी चाहिए। तुम्हारा इल्म और इबादत तमाम बातिन है।मैकरू हथियार वगैरह कुछ नहीं हैं। रब समझाते हैं यह है इल्म तलवार। उन्होंने फिर मैकरू हथियार निशानियाँ हूरैन को दे दी हैं।सहीफें वगैरह जो पढ़ते हैं वो लोग कभी ऐसे नहीं कहते कि यह इल्म तलवार है, यह इल्म खड़ग है। यह बेहद का रब ही बैठ समझाते हैं। वह समझते हैं कुव्वतैन फौज ने फ़तह पाई है तो ज़रूर कोई हथियार होंगे। रब आकर यह तमाम भूलें बताते हैं। यह तुम्हारी बात निहायत बेइंतहा इन्सान सुनेंगे। दानिश मन्द वगैरह भी एक दिन आयेंगे। बेहद का रब है ना। तुम बच्चों को सिरात ए मुस्तकीम पर चलने में ही फ़लाह है तब जिस्मानी हवास टूटेगा, इसलिए दौलत मन्द लोग आते नहीं हैं। रब फ़रमाते हैं जिस्मानी तकब्बुर को छोड़ो। अच्छे कपड़े वगैरह का भी नशा रहता है। तुम अभी वनवाह में हो ना। अभी जाते हो ससुर घर। वहाँ तुमको निहायत जेवर पहनायेंगे। यहाँ ऊंचे कपड़े नहीं पहनने हैं। रब फ़रमाते हैं बिल्कुल सादा रहना है। जैसे आमाल मैं करता हूँ, बच्चों को भी सादा रहना है। नहीं तो जिस्म का तकब्बुर आ जाता है। वह तमाम निहायत नुकसान कर देते हैं। तुम जानते हो हम ससुर घर जाते हैं। वहाँ हमको निहायत जेवर मिलेंगे। यहाँ तुमको जेवर वगैरह नहीं पहनने हैं। आजकल चोरी वगैरह कितनी होती हैं। रास्ते में ही डाकू लूट लेते हैं। रोज़ ब रोज़ यह हंगामा वगैरह ज़्यादा बढ़ता जायेगा इसलिए रब फ़रमाते हैं अपने को रूह समझ मुझे याद करो। जिस्मानी हवास में आने से रब को भूल जायेंगे। यह मेहनत अभी ही मिलती है। फिर कभी अकीदत मन्दी की राह में यह मेहनत नहीं मिलती।
अभी तुम मिलन पर हो। तुम जानते हो रब आते ही हैं रूह ए अफ़ज़ल मिलन के दौर पर। लड़ाई भी ज़रूर होगी। एटॉमिक बाम्ब्स वगैरह खूब बनाते रहते हैं। कितना भी माथा मारो कि यह बन्द हो जाए मगर ऐसे हो नहीं सकता। ड्रामा में नूँध है। समझाने से भी समझेंगे नहीं। मौत होना ही है तो बन्द कैसे होगा। समझते भी हैं तो भी बन्द नहीं करेंगे। ड्रामा में नूँध है। याजूज और माजूज को खलास होना ही है। याजूज हैं यूरोपवासी। उन्हों का है साइन्स घमण्ड, जिससे तबाही होती है। फिर फ़तह होती है साइलेन्स घमण्ड की। तुमको सुकून घमण्ड में रहना (सुकून खुद के रूप रहना) सिखाया जाता है। रब को याद करो - डेड साइलेन्स। हम रूह जिस्म से न्यारी हैं। जिस्म छोड़ने के लिए जैसे हम तजवीज़ करते हैं, ऐसे कभी कोई जिस्म छोड़ने के लिए तजवीज़ करते हैं क्या? सारी दुनिया तलाश कर आओ - कोई है जो बोले - ए रूहें अब तुमको जिस्म छोड़ जाना है। पाकीज़ा बनो। नहीं तो फिर सज़ा खानी पड़ेगी। सज़ा कौन खाती हैं? रूह। उस वक़्त दीदार ए जलवा होता है। तुमने यह-यह गुनाह किये हैं, खाओ सज़ा। उस वक़्त फील होता है। जैसे विलादत दर विलादत की सज़ा मिलती है। इतना दु:ख भोगना, बाक़ी ख़ुशी का बैलेन्स क्या रहा। रब फ़रमाते हैं - अभी कोई आमाल ए अज़ाब नहीं करो। अपना रजिस्टर रखो। हर एक स्कूल में चाल-चलन का रजिस्टर रखते हैं ना। एज्यूकेशन मिनिस्टर भी कहेंगे हिन्दुस्तान का कैरेक्टर दुरूस्त नहीं है। बोलो, हम इन (अफ़ज़ल ख्वातीन-अफ़ज़ल हज़रात) जैसे कैरेक्टर्स बनाते हैं। यह अफ़ज़ल ख्वातीन-अफ़ज़ल हज़रात की तस्वीर तो हमेशा साथ में होनी चाहिए। यह है एम ऑब्जेक्ट। हम ऐसे बनते हैं। इस अल्ल्लाह् अव्वल हूर-हूरैन दीन को हम क़ायम कर रहे हैं सिरात ए मुस्तकीम पर। यहाँ चाल चलन को सुधारा जाता है। तुम्हारी यहाँ कचहरी भी होती है। तमाम सेन्टर्स पर बच्चों को कचहरी करनी चाहिए। रोज़ बोलो चार्ट रखो तो सुधार होगा। किसकी तक़दीर में नहीं है तो फिर सुस्ती कर लेते हैं। चार्ट रखना बड़ा अच्छा है।
तुम जानते हो हम इस 84 के चक्कर को जानने से ही चक्कर नशीन बादशाह बन जाते हैं। कितना आसान है और फिर पाकीज़ा भी बनना है। याद के सफ़र का चार्ट रखो, इसमें तुमको निहायत फ़ायदा है। नोट बुक नहीं निकाला तो समझो - रब्बा को याद नहीं किया। नोट बुक हमेशा हाथ में रखो। अपना चार्ट देखो - कितना वक़्त रब को याद किया। याद बिगर जंक उतर न सके। कट उतारने के लिए चीज़ को घासलेट में डालते हैं ना। आमाल करते हुए भी रब को याद करना है तो तजवीज़ का सिला मिल जायेगा। मेहनत है ना। ऐसे ही थोड़े ही ताज रख देंगे सिर पर। रब्बा इतना आला मर्तबा देते हैं, कुछ तो मेहनत करनी है। इसमें हाथ पैर वगैरह कुछ भी नहीं चलाने हैं। तालीम तो बिल्कुल आसान है। अक्ल में है रहमतुल्आल्मीन से आदम अलैहिस्सलाम के ज़रिए हम यह बन रहे हैं। कहाँ भी जाते हो तो बैज पड़ा रहे। बोलो, असल में कोट ऑफ आर्मस यह है। समझाने की बड़ी रायॅल्टी चाहिए। निहायत मीठापन से समझाना है। कोट ऑफ आर्मस पर भी समझाना है। प्यारी अक्ल और उल्टी अक्ल किसको कहा जाता है? तुम रब को जानते हो? जिस्मानी रब को तो गॉड नहीं कहेंगे। वह बेहद का रब ही नापाक से पाक बनाने वाला, दरिया ए मसर्रत है। उनसे ही बेतहाशा खुशी मिलती हैं। बे इल्मी अरसे में समझते हैं माँ-बाप ख़ुशी देते हैं। ससुरघर भेज देते हैं। अब तुम्हारा है बेहद का ससुरघर। वह है हद का। वह माँ-बाप करके 5-7 लाख, करोड़ देंगे। तुम्हारा तो रब ने नाम रखा है पद्मा पदमपति बनने वाले बच्चों। वहाँ तो पैसे की बात ही नहीं। सब कुछ मिल जाता है। बड़े अच्छे-अच्छे महल होते हैं। विलादत दर विलादत के लिए तुमको महल मिलते हैं। सुदामा का मिसाल है ना। चावल मुट्ठी सुना है तो यहाँ वह भी ले आते हैं। अब चावल रुखा थोड़े ही खायेंगे। तो उनके साथ कुछ मसाले वगैरह भी ले आते हैं। कितना प्यार से ले आते हैं। रब्बा तो हमको विलादत दर विलादत के लिए देंगे इसलिए कहा जाता है दाता। अकीदत मन्दी की राह में तुम अल्ल्लाह् ताला के वास्ते देते हो तो कलील अरसे के लिए दूसरी विलादत में मिल जाता है। कोई ग़रीबों को देते हैं, कॉलेज बनाते हैं तो दूसरी विलादत में तालीम का सदक़ा मिलता है। मुसाफिर खाना बनाते हैं तो मकान मिलता है क्योंकि मुसाफिर खाने में निहायत आकर ख़ुशी पाते हैं। यह तो विलादत दर विलादत की बात है। तुम जानते हो - रहमतुल्आल्मीन को जो देते हैं वह तमाम हमारे ही काम में लगाते हैं। रहमतुल्आल्मीन तो अपने पास रखते नहीं हैं। इनको भी कहा सब कुछ दे दो तो दुनिया के मालिक बन जायेंगे। तबाही का दीदार ए जलवा भी कराया, बादशाहत का दीदार ए जलवा भी कराया। बस नशा चढ़ गया। रब्बा हमको जहान का मालिक बनाते हैं। गीता में भी है अर्जुन को साक्षात्कार कराया। मुझे याद करो तो तुम यह बनेंगे। तबाही और क़याम का दीदार ए जलवा कराया। तो इनको भी शुरू में ख़ुशी का पारा चढ़ गया। ड्रामा में यह पार्ट था। क़िस्मत नशीन गाड़ी को भी कोई जानते थोड़े ही हैं। तो तुम बच्चों को यह एम ऑब्जेक्ट अक्ल में रहनी चाहिए। हम यह बनते हैं। जितनी तजवीज़ करेंगे उतना आला मर्तबा पायेंगे। गाया जाता है फालो फादर। इस वक़्त की बात है। बेहद का रब फ़रमाते हैं मैं जो राय देता हूँ उस पर फालो करो। इसने क्या किया सो भी बताते हैं। उनको सौदागर, रत्नागर, जादूगर कहते हैं ना। रब्बा ने अचानक ही सब कुछ छोड़ दिया। पहले उन जवाहिरातों का जौहरी था, अब ला फ़ानी इल्म के जवाहिरात का जौहरी बना। हेल को हेविन बनाना कितना बड़ा जादू है। फिर सौदागर भी है। बच्चों को कितना अच्छा सौदा देते हैं। कख-पन चावल मुट्ठी लेकर महल दे देते हैं। कितनी अच्छी कमाई कराने वाला है। जवाहरात के सौदे में भी ऐसे होता है। कोई अमेरिकन ग्राहक आता है तो उनसे 100 की चीज़ का 500, हज़ार भी ले लेंगे। उनसे तो निहायत पैसे लेते हैं। तुम्हारे पास तो सबसे पुरानी चीज़ है कदीम इबादत।
तुमको अब भोलानाथ रब मिला है। कितना भोला है। तुमको क्या बनाते हैं। कखपन के बदले तुमको 21 विलादत के लिए क्या बना देते हैं। इन्सानों को कुछ भी मालूम नहीं। कभी कहेंगे भोलानाथ ने यह दिया, कभी कहेंगे अम्बा ने दिया, हादी ने दिया। यहाँ तो है तालीम। तुम इलाही दारूल उलूम में बैठे हो। इलाही दारूल उलूम कहेंगे गीता को। गीता में है अल्ल्लाह् ताला ने फ़रमाया। मगर यह भी किसको मालूम नहीं है कि अल्ल्लाह् ताला किसको कहा जाता है। कोई से भी पूछो - पाक परवरदिगार को जानते हो? रब है बागवान। तुमको कांटों से फूल बना रहे हैं। उनको गॉर्डन ऑफ अल्लाह कहते हैं। यूरोपियन लोग भी कहते हैं पैराडाइज़। बरोबर हिन्दुस्तान परिस्तान था, अब कब्रिस्तान है। अभी फिर तुम परिस्तान के मालिक बनते हो। रब आकर सोये हुए को जगाते हैं। यह भी तुम जानते हो नम्बरवार तजवीज़ के मुताबिक। जो खुद जाग जाते हैं तो दूसरों को भी जगाते हैं। नहीं जगाते हैं तो गोया खुद जगा हुआ नहीं है। तो रब समझाते हैं इन नग़मों वगैरह की भी ड्रामा में नूँध है। कोई नग़में निहायत अच्छे हैं। जब तुम उदास हो जाते हो तो यह नग़मा बजाओ तो ख़ुशी में आ जायेंगे। रात के राही थक मत जाना - यह भी अच्छा है। अब रात पूरी होती है। इन्सान समझते हैं जितना अकीदत मन्दी करेंगे उतना अल्ल्लाह् ताला जल्दी मिलेगा। हनूमान वगैरह का साक्षात्कार हुआ तो समझते हैं अल्ल्लाह् ताला मिला। रब फ़रमाते हैं यह दीदार ए जलवा वगैरह की सब ड्रामा में नूँध है। जो जज़्बात रखते हैं उसका दीदार ए जलवा हो जाता है। बाक़ी ऐसा कोई होता नहीं है। रब ने कहा है यह बैज तो सबको हमेशा पड़ा रहे। किस्म-किस्म के बनते रहते हैं। यह निहायत अच्छा है समझाने के लिए।
तुम रूहानी मिलेट्री हो ना। मिलेट्री को हमेशा निशानी रहती है। तुम बच्चों को भी यह होने से नशा रहेगा - हम यह बन रहे हैं। हम स्टूडेन्ट हैं। रब्बा हमको इन्सान से हूरैन बना रहे हैं। इन्सान हूरैनों की इबादत करते हैं। हूरैन तो हूरैन की इबादत नहीं करेंगे। यहाँ इन्सान हूरैनों की इबादत करते हैं क्योंकि वह अफ़ज़ल हैं। अच्छा!
मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों के वास्ते मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी रब की रूहानी बच्चों को सलाम।

तरीक़त के वास्ते अहम निकात:-
1. अक्ल में हमेशा अपनी एम ऑब्जेक्ट याद रखनी है। अफ़ज़ल ख्वातीन अफ़ज़ल हज़रात की तस्वीर हमेशा साथ रहे, इसी ख़ुशी में रहो कि हम ऐसा बनने के लिए तालीम हासिल कर रहे हैं, अभी हम हैं गॉडली स्टूडेन्ट।

2. अपना पुराना कखपन चावल मुट्ठी दे महल लेने हैं। आदम अलैहिस्सलाम बाप को फालो कर ला फ़ानी जवाहिरात ए इल्म का जौहरी बनना है।

बरक़ात:-
बे जिस्मी पन के इन्जेक्शन के ज़रिए ज़हन को कन्ट्रोल करने वाले खुलूस ज़हन बनो।

जैसे आजकल अगर कोई कन्ट्रोल में नहीं आता है, निहायत तंग करता है, उछलता है या पागल हो जाता है तो उनको ऐसा इन्जेक्शन लगा देते हैं जो वह शान्त हो जाए। ऐसे अगर कुव्वत ए इरादा आपके कन्ट्रोल में नहीं आती तो बे जिस्मीपन का इन्जेक्शन लगा दो। फिर कुव्वत ए इरादा फ़ालतू नहीं उछलेगा। आसानी से खुलूस ज़हन हो जायेंगे।मगर अगर अक्ल की लगाम रब को देकर फिर ले लेते हो तो ज़हन फ़ालतू की मेहनत में डाल देते है। अब फ़ालतू की मेहनत से छूट जाओ।

स्लोगन:-
अपने बुज़ुर्गाने दीन खुद के रूप को याददाश्त में रख तमाम रूहों पर रहम करो।

आमीन